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Jul 24, 2020

मंज़िल वही है प्यार की-कठपुतली १९५७

आज २४ जुलाई है. जुलाई माह का २४ वां दिन और कोरोना
के चलते लॉकडाउन के चार माह पूरे हो गए हैं और ऊपर से
दो दिन और गुज़र गये है. इस पूरे समय ने हमारी जीवन शैली
में बदलाव ला दिया है. हालांकि कई जगह लॉकडाउन से राहत
मिली है और उनमें से कई स्थानों पर मरीजों की संख्या तेजी
से बढ़ी है. वैक्सीन का ही इंतज़ार है अब तो जिससे इसके
रोकथाम में गति आये.

आज बॉलीवुड के जिन चर्चित हस्तियों का जन्मदिन है उनमें
प्रमुख है-नायक चंद्रमोहन, प्रख्यात बांसुरी वादक पन्नालाल घोष,
अभिनेता मनोज कुमार और गायक सुबीर सेन.

मनोज कुमार पर दिन भर से सोशल मीडिया पर काफी चर्चा
हो रही है. अतः हम सुबीर सेन के बारे में बात करते हैं. गायक
सुबीर सेन मूलतः बंगाली गीतों के लिए ही जाने जाते हैं. उनके
कुछ हिंदी फ़िल्मी गीत भी उपलब्ध हैं जिनमें से एक आज हम
सुनेंगे. सुबीर सेन डिब्रूगढ़ आसाम में वर्ष १९३४ को पैदा हुए.

सुबीर सेन ने कई फ़िल्मों में अभिनय भी किया है जिनमें से
अधिकाँश बंगाली भाषा की फ़िल्में है. हिंदी फ़िल्म अनुभव में
वे दिखाई दिए थे.

सुनते हैं शैलेन्द्र का लिखा और शंकर जयकिशन द्वारा संगीतबद्ध
गीत फ़िल्म कठपुतली से जिसे बलराज साहनी और वैजयंतीमाला
पर फिल्माया गया है.





गीत के बोल:

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये

दुनिया की नज़रों से दूर
दुनिया की नज़रों से दूर जाते हैं हम तुम जहाँ
उस देश की चाँदनी गायेगी ये दास्ताँ
मौसम था वो बहार का दिल खिल मचल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये

छुप न सके मेरे राज
छुप न सके मेरे राज नग़मों में ढलने लगे
रोका था दिल ने मगर पहलू बदलने लगे
ये दिन ही कुछ अजीब थे जो आज कल गये
सपनों की महफ़िल में हम तुम नये

मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
मंज़िल वही है प्यार की राही बदल गये
…………………………………………………..
Manzil wahi hai pyar ki-Kathputli 1957

Artists: Balraj Sahni, Vaijayantimala

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Aug 9, 2016

हमें उन राहों पर चलना है-मासूम १९६०

सुबीर सेन और आरती मुखर्जी का गाया एक गीत सुनते हैं
जिसमें कोरस का भी गायन है. राजा मेहँदी अली खान के
लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है रॉबिन बैनर्जी ने. सन १९६०
की फिल्म मासूम का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था.
फिल्म में सरोष ईरानी, हनी ईरानी, मनमोहन कृष्ण, मोहन
चोटी, केष्टो मुखर्जी, चमन पुरी जैसे कलाकार हैं.

सत्येन बोस ने इससे पहले सन १९५४ में बच्चों वाली फिल्म
बनायीं थी जागृति जो काफी चर्चित रही और उस फिल्म के
गीत तो आज भी आप सुन सकते हैं.सन१९५४ की ही एक
फिल्म के लिए उन्होंने संगीतकार शैलेश को मौका दिया था
जिन्हें बाद में सवेरा फिल्म का संगीत तैयार करने का भी
अवसर मिला. बोस ने रोबिन बैनर्जी से केवल यही फिल्म
मासूम करवाई. ७० के दशक में बोस की अधिकांश फिल्मों
में लक्ष्मी-प्यारे का संगीत है.

इस गीत में सुबीर सेन का उच्चारण काफी हद तक साफ़ है.
उनसे काफी रिहर्सल कराई होगी संगीत निर्देशक ने इस गीत
के लिए अन्यथा वो ‘दुर मेरी मंज़िल’ और ‘दिल हुआ घायिल’
जैसा कुछ गाते. तब भी ‘इन’ और ‘उन’ शब्दों का मिश्रण
है गीत में.



गीत के बोल:

हमें उन राहों पर चलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

जब तक न लगन हो सीने में
बेकार है ऐसे जीने में
जब तक न लगन हो सीने में
बेकार है ऐसे जीने में
चढ़ना है हमें चंदा की तरह
सूरज की तरह नहीं ढ़लना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम हैं दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

मैं पास रहूँ या दूर रहूँ
ये बात अभी तुम से कह दूँ
मैं पास रहूँ या दूर रहूँ
ये बात अभी तुम से कह दूँ
हँसना ही नहीं फूलों की तरह
दीपक की तरह हमें जलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

आकाश से आती है ये सदा
ग़म आए अगर तो जी न ढला
आकाश से आती है ये सदा
ग़म आए अगर तो जी न ढला
कभी ग़म हैं यहाँ कभी हैं ख़ुशियाँ
हर हाल में हम को पलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
.......................................................................
Hamen un rahon par-Masoom 1960

Honey Irani, Sarosh Irani, Manmohan Krishna

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Jun 9, 2011

मैं रंगीला प्यार का राही-छोटी बहन १९५९

आइये एक हास्य गीत सुनें। गाने के बोल ज्यादा मजाकिया नहीं हैं
मगर ये फिल्माया गया है महमूद और शुभा खोटे की प्रसिद्ध जोड़ी पर।
फिल्म छोटी बहन के २ गीत आप सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर। ये तीसरा
गीत है। गीत गाया है सुबीर सेन और लता मंगेशकर ने। इस गीत
को सुबीर जैसा गा रहे हैं वैसे ही बोल लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।
भूल चूक लेनी देनी। हर दूसरा बंगाली गायक उन दिनों हेमंत कुमार
का दूर का रिश्तेदार सुनाई पढता। तांगा बहुत दिन से ना सड़क पे दिखा
और ना ही किसी बम्बैया गीत में, सो आज देख लेते हैं । उम्मीद है
इस गीत पर घोड़े ने भी खुश हो कर कुछ आवाजें ज़रूर निकाली होंगी।
ताँगे के नीचे लगी घंटी की आवाज़ तक सुना दी गई है गीत में।




गीत के बोल:

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
अब तेरी मेरी एक डगर

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
जो खिला है बन के बाहर

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

फुर्र्र्र या हा
ऐ हा हा हा हा हा
.................................
Main rangeela pyar ka raahi-Chhoti behan 1959

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