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Dec 10, 2018

मैं हूँ एक हज्जाम-दो कलियाँ १९६८

आज सुनते हैं फिल्म दो कलियाँ से एक हल्का फुल्का
गीत. ऐसे गीत और कॉमेडी दृश्य फिल्म से उपजी खीज
और बोरियत को दूर करने का काम करते हैं ताकि दर्शक
अपने आप को ठगा महसूस ना करे और इस भ्रम में रहे
कि उसके टिकट के पूरे पैसे वसूल हो गए हैं.

महमूद ने परदे पर कौन कौन से कामों और व्यवसायों
पर कॉमेडी की है ये एक रिसर्च का विषय हो सकता है.
सुन रहे हैं किताबें लिखने वाले?

चलता फिरता हेयर कटिंग सैलून-ये अभी भी वास्तविक
जीवन में आना बाकी है. हालांकि गांवों में अभी भी कई
जगह पर नाई बाल काटने घरों तक पहुँचते हैं रूटीन में
और विशेष मौकों पर तो उन्हें बुलाया जाता है.

महमूद के लिए मन्ना डे ने ऐसे गीत काफी सारे गाये
हैं. साहिर के बोल और रवि के संगीत वाला ये गीत
फिल्म के दूसरे गीतों की तुलना में कम सुना गया है.

गीत में शायद दक्षिण के डिग्री धारक निर्माता निर्देशकों
को याद किया गया है. महमूद की पीठ पर टंगे बोर्ड
पर बी ए(फेल) लिखा हुआ है.




गीत के बोल:

करा लो अरे घर की खेती साफ करा लो
मुस्लिम को तस्लीम अर्ज़ है
हिन्दू को प्रणाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

जब जब दूजे का सर मूंडूं
तब तब पाऊँ दाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

सबकी खातिर खुला हुआ है
इस कैंची का खाता
सबकी खातिर खुला हुआ है
इस कैंची का खाता
क्या पंडित जी क्या मौलाना
सबसे अपना नाता
क्या पंडित जी क्या मौलाना
अरे सफ़ेद बाल

सबके हुलिये चौकस रखना
हम लोगों का काम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

मुस्लिम को तस्लीम अर्ज़ है
हिन्दू को प्रणाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

ज़ुल्फें एक्टर छाप बना दू
आ जा ओ मतवाले
आज के दिलबर को भाते है
चेहरे मेंडक वाले
पीछे का ठीक है सामने का ठीक है
ज़ुल्फें एक्टर छाप बना दू
आ जा ओ मतवाले
आज के दिलबर को भाते है
चेहरे मेंडक वाले
सब्ज़ परी भी थे पायेगा
पहले बन गुलफ़ाम
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

मुस्लिम को तस्लीम अर्ज़ है
हिन्दू को प्रणाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

इस पेशे के रूप बहुत हैं
क्या तुमको समझायें
इस पेशे के रूप बहुत हैं
क्या तुमको समझायें
जो ग्राहक के सर को मूंडे
बिज़नेस मैन कहाये

हा हा हा एम्बेसेडर हेराल्ड
पी पी
जो ग्राहक के सर को मूंडे
बिज़नेस मैन कहाये
जो पब्लिक की करे हजामत
ओ हो हो आ हा हा
जो पब्लिक की करे हजामत
उनका लीडर नाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

मुस्लिम को तस्लीम अर्ज़ है
हिन्दू को प्रणाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम

अरे जब जब दूजे का सर मूंडूं
तब तब पाऊँ दाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम प्यारे
मै हूँ एक हज्जाम
………………………………………………….
Main hoon ek hajjam-Do kaliyan 1968

Artist: Mehmood

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Dec 1, 2018

तुम्हारी नज़र क्यों खफ़ा-दो कलियाँ १९६८

गानों के की वर्ड्स की हम अक्सर बात करते हैं. नज़र
भी एक ऐसा की वार्ड है जिसके इर्द गिर्द ढंग का गाना
बुना जाए तो वो हिट हो सकता है. ये बात मैं उदाहरणों
के आधार पर कह सकता हूँ. ज़रूरी नहीं नज़र शब्द ही
मुखड़े में घुसेड देने मात्र से गाना हिट की गारंटी बनेगा.
एक बेदम धुन और नाक से गाने वाले को पकड़ा दो
गाना-हिट ना होने की सौ फीसदी गारंटी.

दो कलियाँ से ये लोकप्रिय युगल गीत सुनते हैं और लता
रफ़ी की आवाजों में. हमें ऐसा क्यूँ लगता है परदे पर गा
रहे कलाकार चिड़िमार नज़र आते अगर ऐसी सधी हुई
और मधुर आवाजों वाले गायक ना होते ?



गीत के बोल:

तुम्हारी नज़र क्यूं खफ़ा हो गई
खता बख्श दो गर खता हो गई
तुम्हारी नज़र क्यूं खफ़ा हो गई
खता बख्श दो गर खता हो गई
हमारा इरादा तो कुछ भी न था
तुम्हारी खता खुद सज़ा हो गई
हमारा इरादा तो कुछ भी न था
तुम्हारी खता खुद सज़ा हो गई

सज़ा ही सही आज कुछ तो मिला है
सज़ा में भी इक प्यार का सिलसिला है
सज़ा ही सही आज कुछ तो मिला है
सज़ा में भी इक प्यार का सिलसिला है
मोहब्बत का अब कुछ भी अंजाम हो
मुलाक़ात की इब्तदा हो गई

तुम्हारी नज़र क्यूं खफ़ा हो गई
खता बख्श दो गर खता हो गई
हमारा इरादा तो कुछ भी न था
तुम्हारी ख़ता खुद सज़ा हो गई

मुलाक़ात पे इतने मगरूर क्यूं हो
हमारी ख़ुशामद पे मजबूर क्यूं हो
मुलाक़ात पे इतने मगरूर क्यूं हो
हमारी ख़ुशामद पे मजबूर क्यूं हो
मनाने की आदत कहा पड़ गई
ख़ताओं की तालीम क्या हो गई

तुम्हारी नज़र क्यूं खफ़ा हो गई
ख़ता बख्श दो गर ख़ता हो गई
तुम्हारी नज़र क्यूं खफ़ा हो गई
ख़ता बख्श दो गर ख़ता हो गई

सताते न हम तो मनाते ही कैसे
तुम्हें अपने नज़दीक लाते ही कैसे
सताते न हम तो मनाते ही कैसे
तुम्हें अपने नज़दीक लाते ही कैसे
इसी दिन का चाहत को अरमान था
कबूल आज दिल की दुआ हो गई

तुम्हारी नज़र क्यूं खफ़ा हो गई
ख़ता बख्श दो गर ख़ता हो गई
तुम्हारी नज़र क्यूं खफ़ा हो गई
ख़ता बख्श दो गर ख़ता हो गई
…………………………………………
Tumhari nazar  kyun khafa-Do kaliyan 1968

Artists: Biswajeet, Mala Sinha

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Nov 14, 2018

बच्चे मन के सच्चे-दो कलियाँ १९६८

बच्चों की तारीफ़ वाला एक गीत सुनते हैं दो कलियाँ
फिल्म से जिसकी रचन अकी है साहिर लुधियानवी ने.
लता मंगेशकर की आवाज़ वाले इस गाने का संगीत
रविशंकर शर्मा उर्फ रवि ने किया है.

बॉलीवुडिया फिल्मों में आपने जुड़वाँ भाई बहनों वाली
फ़िल्में तो देखी ही होंगी. इन सब में जुड़वाँ किरदार
वयस्क हैं. किसी में भी जुड़वाँ बच्चों वाला कथानक
नहीं है सिवाय फिल्म दो कलियाँ के.

कैलेण्डर के हिसाब से आज बाल दिवस है.

https://www.youtube.com/watch?v=CQuBmwOUFpU



गीत के बोल:

बच्चे मन के सच्चे
बच्चे मन के सच्चे
सारे जग की आँख के तारे
ये वो नन्हे फूल हैं जो
भगवान को लगते प्यारे
बच्चे मन के सच्चे

खुद रूठे खुद मन जायें
फिर हमजोली बन जायें
झगड़ा जिसके साथ करें
अगले ही पल फिर बात करे
झगड़ा जिसके साथ करें
अगले ही पल फिर बात करे
इनको किसी से बैर नहीं
इनके लिए कोई गैर नहीं
इनका भोलापन मिलता है
सबको बांह पसारे

बच्चे मन के सच्चे
सारे जग की आँख के तारे
ये वो नन्हे फूल हैं जो
भगवान को लगते प्यारे
बच्चे मन के सच्चे


इंसान जब तक बच्चा है
तब तक समझ का कच्चा है
ज्यूं ज्यूं उसकी उमर बढ़े
मन पर झूठ का मेल चढ़े
क्रोध बढे नफ़रत घेरे
लालच की आदत घेरे
बचपन इन पापो से हट कर
अपनी उम्र गुज़ारे

बच्चे मन के सच्चे
सारे जग की आँख के तारे
ये वो नन्हे फूल हैं जो
भगवान को लगते प्यारे
बच्चे मन के सच्चे

तन कोमल मन सुन्दर है
बच्चे बड़ों से बेहतर हैं

इनमे छूत और छात नहीं
झूठी जात और पात नहीं
भाषा की तक़रार नहीं
मज़हब की दीवार नहीं
इनकी नज़रों में एक है
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे

बच्चे मन के सच्चे
सारे जग की आँख के तारे
ये वो नन्हे फूल हैं जो
भगवान को लगते प्यारे
बच्चे मन के सच्चे
सारे जग की आँख के तारे
ये वो नन्हे फूल हैं जो
भगवान को लगते प्यारे
बच्चे मन के सच्चे
बच्चे मन के सच्चे
…………………………………………….
Bachche man ke sachche-Do kaliyan 1968

Artist: Neetu Singh

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Nov 11, 2018

सजना ओ सजना-दो कलियां १९६८

सजना संवरना हिट्स के अंतर्गत आने वाला एक गाना
सुनते हैं फिल्म दो कलियाँ से जिसे आशा भोंसले ने
गाया है.

संगीतकार रवि के संगीत निर्देशन में सजना ओ सजना
बोलों वाला एक गीत और है जी तेज गति वाला है. उसे
भी आशा भोंसले ने गाया है.

गीत गीतांजलि और बिश्वजीत पर फिल्माया गया है.
समय क्या हाल कर देता है किसी भी मनुष्य का. फिल्म
पारसमणि में गीतांजलि नायिका थीं. फिल्म में भारती
भी मौजूद हैं और फिल्म में निर्देशक है एस मुरुगन.




गीत के बोल:

सजना ओ सजना
सजना ओ सजना
ऐसे में जी न जला
रात सुहानी है प्यासी जवानी है
आ मेरे पहलू में आ
सजना ओ सजना
सजना ओ सजना
ऐसे में जी न जला
रात सुहानी है प्यासी जवानी है
आ मेरे पहलू में आ
सजना ओ सजना

खो के न पायेगा फिर ये सहारे
आ तेरी रातो में भर दूं सितारे
खो के न पायेगा फिर ये सहारे
आ तेरी रातो में भर दूं सितारे
साँसों में घुल जा आँखों में तुल जा
ओ मेरे दिलवर थोड़ा सा खुल जा
मिलने की घडिया यूँ ना गवां

सजना ओ सजना
सजना ओ सजना
ऐसे में जी न जला
रात सुहानी है प्यासी जवानी है
आ मेरे पहलू में आ
सजना ओ सजना

पी मेरे आँखों से बन जा शराबी
होने दे थोड़ी सी दुनिया गुलाबी
पी मेरे आँखों से बन जा शराबी
होने दे थोड़ी सी दुनिया गुलाबी
रंगो में बस जा फूलों में रच जा
ओ मेरे दिलवर वे मोसे बच जा
आ मेरी जुल्फों के साये में आ

सजना ओ सजना
सजना ओ सजना
ऐसे में जी न जला
रात सुहानी है प्यासी जवानी है
आ मेरे पहलू में आ
सजना ओ सजना
सजना ओ सजना
सजना ओ सजना
ऐसे में जी न जला
रात सुहानी है प्यासी जवानी है
आ मेरे पहलू में आ
सजना ओ सजना
………………………………………………..
Sajna o sajna-Do kaliyan 1968

Artists: Geetanjali, Biswajeet

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Nov 2, 2018

मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें-दो कलियां 1968

कुदरत ने प्रकृति के सभी जीवों को एक ना एक विशेष
गुण दे कर बनाया है ताकि कोई भी अपने आप को
सबसे बड़ा ना समझ बैठे. छोटी सी चींटी को दुनिया का
सबसे मेहनती जीव कहा जाता है. ये खिताब सिक्स पैक
एट पैक एब्स बनाने वालों को हासिल नहीं है.

इंसानों के व्यवहार की मिसालें देने के लिये पशु पक्षी ही
याद किये जाते हैं चाहे वो कौवा हो या भैंस. घर की मुर्गी
दाल बराबर की एक मिसाल भी है.

गीतकार ने मुर्गा-मुर्गी की मिसाल ली है. ये हमारे आसपास
बहुतायत में पाने वाला जीव है. शहरों में कम और गावों
में ज्यादा पाये जाते हैं. क्या इंसान इतना गया गुज़रा है
कि सबसे ज़्यादा उर्वर बुद्धि होने के बावजूद उसे हर बात
याद दिलाना पड़ती है.




गीत के बोल:

मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें
नन्हा चूजा खेल करे
मैं किसको बोलूं जो मेरे
माता पिता का मेल करे
मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें
नन्हा चूजा खेल करे
मैं किसको बोलूं जो मेरे
माता पिता का मेल करे
मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें

चिड़िया और चिड़ा मिलजुल कर
दाना दुनका लायें
अपने छोटे से बच्चे को
खोल के चोंच खिलायें
मैं जब अपने भाग को सोचूं
आँख में आंसू आयें
आँख में आंसू आयें

मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें
नन्हा चूजा खेल करे
मैं किसको बोलूं जो मेरे
माता पिता का मेल करे
मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें

साथ के घर का नन्हा बच्चा
मत पिता संग खेले
साथ के घर का नन्हा बच्चा
मत पिता संग खेले
मेरा बचपन मत पिता की
दूरी का दुःख झेले
कोई मुझे वैसा घर दे दे
महल जो महलें ले ले
महल जो महलें ले ले

मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें
नन्हा चूजा खेल करे
मैं किसको बोलूं जो मेरे
माता पिता का मेल करे
मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें

बड़ों के आगे बात करें
ये हम बच्चो का काम नहीं
जब तक उनका मन न पिघले
अपने लिए आराम नहीं
उस घर में क्या रहना
सीता के संग राम नहीं
सीता के संग राम नहीं

मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें
नन्हा चूजा खेल करे
मैं किसको बोलूं जो मेरे
माता पिता का मेल करे
मुर्गा मुर्गी प्यार से देखें
……………………………………………….
Murga murgi pyar se dekhen-Do kaliyan 1968

Artist: Neetu Singh, Biswajeet, Mala Sinha

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Sep 20, 2017

ये समा ये रुत ये नज़ारे-दो कलियाँ १९६८

मीठा माने क्या-शक्कर, गुड, रसगुल्ला, गुलाब जामुन या
फलों की मिठास. वैसे ही गीतों का हाल है. कोई स्टीविया
की तरह तो कोई सेकरीन की तरह भी मीठा मिलेगा आपको.

मिठास ज़रूर होती है, भले ही कम ज्यादा हो. लता रफ़ी का
एक युगल गीत सुनते हैं जो सुना हुआ है.

दो कलियाँ फिल्म के लिए इसे साहिर लुधियानवी ने लिखा
और रवि ने संगीतबद्ध किया. परदे पर कलाकारों को आप
पहचान जायेंगे, ना पहचान पायें तो पोस्ट के टैग वगैरह
देख लीजियेगा.



गीत के बोल:

ये समा ये रुत ये नज़ारे
दिल मेरा मचलने लगा
जाने वफ़ा ऐ दिलरुबा
ऐसे में आ मेरी बाहों में आ
रोक ले निगाहों के इशारे
तन मेरा पिघलने लगा
मैं हूँ तेरी तू है मेरा
आ मेरे दिल की पनाहों में आ

शाने पे मेरे गिरा दे ज़ुल्फ़ें
आँखों पे मेरी बिछा दे ज़ुल्फ़ें
शाने पे मेरे गिरा दे ज़ुल्फ़ें
आँखों पे मेरी बिछा दे ज़ुल्फ़ें
ऐसा जगा दे प्यार का जादू
सारे जहाँ पे छाये नशा

रोक ले निगाहों के इशारे
तन मेरा पिघलने लगा
मैं हूँ तेरी तू है मेरा
आ मेरे दिल की पनाहों में आ
ये समा ये रुत ये नज़ारे
दिल मेरा मचलने लगा
जाने वफ़ा ऐ दिलरुबा
ऐसे में आ मेरी बाहों में आ

आँखों ने आँखों की पढ़ ली जुबां
मेरे भी दिल में उमंगें हैं जवां
आँखों ने आँखों की पढ़ ली जुबां
मेरे भी दिल में उमंगें हैं जवां
शौक से बढ़ कर थाम ले बाजू
जान गयी तेरे दिल में है क्या

ये समा ये रुत ये नज़ारे
दिल मेरा मचलने लगा
जाने वफ़ा ऐ दिलरुबा
ऐसे में आ मेरी बाहों में आ
रोक ले निगाहों के इशारे
तन मेरा पिघलने लगा
मैं हूँ तेरी तू है मेरा
आ मेरे दिल की पनाहों में आ
………………………………………………………………………..
Ye sama ye rut-Do Kaliyan 1968

Artists: Mala Sinha, Biswajeet

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Apr 22, 2017

चित नंदन आगे नाचूंगी-दो कलियाँ १९६८

जिस गीत में थोडा अलग हट के साहित्यिक शब्द प्रयुक्त
होता है उसे सुन के मन प्रफुल्लित, हर्षित और ना जाने
क्या क्या होने लगता है. ऐसा मैंने कई लोगों के मुंह से
सुना.

साहिर के बोल हैं और रवि का संगीत. आशा भोंसले के
अलावा एक और आवाज़ है गीत में.



गीत के बोल:

ता थई थई तत ता थई थई तत
.........................
चित नंदन आगे नाचूंगी
चित नंदन आगे नाचूंगी
चित नंदन आगे नाचूंगी
चित नंदन आगे नाचूंगी
नाच नाच पिया रसिक रिझाऊं
नाच नाच पिया रसिक रिझाऊं
प्रेमी जन को जांचूंगी
चित नंदन आगे नाचूंगी
चित नंदन आगे नाचूंगी

आगे के बोल सुन के समझ लें
................................................
Chit nandan aage nachoongi-Do kaliyan 1968

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