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Jul 11, 2011

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे-नई कहानी १९४३

गायक - जी एम् दुर्रानी
गीतकार-वली साहब
संगीतकार -श्याम सुन्दर
फिल्म -नई कहानी
वर्ष-१९४३




गीत के बोल:

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
लहरों की
लहरों की गोदी में जैसे
आँख मिचौली खेले तारे
आँख मिचौली खेले तारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे

मन दोनों के खिल जाने दो
इक दूजे से मिल जाने दो
मन दोनों के खिल जाने दो
इक दूजे से मिल जाने दो
देखते हैं बेचैन बेचारे
नैन तुम्हारे नीर हमारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे

नर्गिस को शरमाते हैं वो
जल में आग लगाते हैं ये
नर्गिस को शरमाते हैं वो
जल में आग लगाते हैं ये
दोनों हैं बदनाम बेचारे
ज़ख़्म हमारे तीर तुम्हारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
.................................
Neend hamari khwab tumhare-Nai Kahani 1943

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Jun 10, 2011

परवरदिगार-ए-आलम-हातिम ताई १९५६

बिना विवरण के भी कभी कभी गीत सुनने में आनंद आता है।
विवरण देना ज़रूरी नहीं है मगर दिया जाता है जिससे पढने
वाले को कुछ अतिरिक्त जानकारी मिले या जिससे लिखने और
पढने वाले के बीच संवाद कायम हो।

प्रस्तुत गीत फिल्म हातिम ताई से है। बाकी की जानकारी टैग में
समाहित है। गीत में ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते हुए उससे
फ़रियाद की जा रही है।



गीत के बोल:

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

नूह का सफ़ीना तूने तूफ़ान से बचाया
दुनिया में तू हमेशा बंदों के काम आया
माँगी ख़लील ने जब तुझसे दुआ ख़ुदाया
आतिश को तूने फ़ौरन एक गुलसिताँ बनाया
har इल्तेजा ने तेरी रहमत को है उभारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

यूनुस को तूने मछली के पेट से निकाला
तूने ही मुश्किलों में अयूब को सम्भाला
इलयास पर करम का तूने किया उजाला
है दो जहाँ में या रब तेरा ही बोल बाला
तूने सदा इलाही बिगड़ी को है सँवारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

यूसुफ़ को तूने मौला दी क़ैद से रिहाई
याक़ूब को दुबारा शक़्ल-ए-पिसर दिखाई
बहती हुई नदी में मूसा की रह बनाई
तूने सलीब पर भी ईसा की जाँ बचाई
दाता तेरे करम का कोई नहीं किनारा


परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम
...........................
Parvardigaar-e-alm- Hatim Tai 1956

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Jun 4, 2011

झूमती है नज़र-हातिम ताई १९५६

जयराज और शकीला परदे पर। आशा और रफ़ी का युगल गीत। गीत
अख्तर रोमानी का और संगीत श्रीनाथ त्रिपाठी का। एक सदाबहार
युगल गीत जो निहायत ही रूमानी है, क्यूँ ना हो रोमानी साहब ने जो
लिखा है। आशा और रफ़ी के युगल गीतों में एक अलग सी कशिश महसूस
की मैंने। जहाँ लता और रफ़ी के गीत सादगी की सीमाओं के भीतर होते,
संगीतकार आशा और रफ़ी के गीतों में अभिनव प्रयोग करते और वो
सब करने की कोशिश करते जो लता रफ़ी के युगल गीतों में संभव नहीं
हो पाता। वैसे प्रस्तुत गीत बहुत ही सौम्य किस्म का गीत है, सौम्यता
जो कि एस एन त्रिपाठी के संगीत का वाटरमार्क है। एस एन त्रिपाठी वाकई
बहुत प्रतिभाशाली संगीतकार थे, बस ज्यादा प्रसिद्धि उनकी किस्मत में
नहीं थी सो वे केवल वर्ग विशेष की पसंद बन कर रह गये। बहरहाल
ये गीत उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है और क्यूँ है इसको सुनिए,
खुद जान जाइये।

फिल्म में नायिका शकीला परी की भूमिका में हैं और जयराज हातिम ताई
की। शकीला स्वभावतः कुछ ज्यादा ही प्रसन्न नज़र आ रही हैं इस गीत
में। कहीं कहीं तो ऐसा आभास होता है मानो उन्होंने कोई चुटकुला सुन
लिया हो और उसपर प्रतिक्रिया जाहिर कर रही हों। जयराज ज्यादा उछल
कूद नहीं मचाते थे सो इस गीत में भी वे गंभीर और संतुलित दिखाई दे
रहे हैं।





गीत के बोल:

झूमती है नज़र झूमता है प्यार
झूमती है नज़र झूमता है प्यार
ये नज़र छीन कर ले गई करार
ये नज़र छीन कर ले गई करार
झूमती है नज़र झूमता है प्यार

हम हैं आज़ाद पंछी फिजाओं के
हाथ ना आ सके हम हवाओं के
वादे करते नहीं हम वफाओं के
फिर भी तुम जानो दिल तुम पे हैं निसार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

मैं तेरे हुस्न के गीत गाऊंगा
इश्क की आरजू लब पे लाऊंगा
मैं तुझे धडकनों में बसाऊंगा
एक है दिल जिसमें हैं हसरतें हज़ार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

मेरी हर सांस में तेरा प्यार है
मेरी हर सांस में तेरा प्यार है
तू मेरे बाग़-ए-दिल की बाहर है
तू मेरे बाग़-ए-दिल की बाहर है
तू मेरी ज़िन्दगी का सिंगार है
ओ सनम तू मेरे दिल की है पुकार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

तुम हमें हम तुम्हें देखते राहें

तुम हमें हम तुम्हें देखते राहें
हाल-ए-दिल हो बयां लब ना कुछ कहें
हाल-ए-दिल हो बयां लब ना कुछ कहें
मिल के हम प्यार की मौजों में बाहें
आ ज़रा छेड़ दे दिल से दिल के तार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार
.....................................
Jhoomti hai nazar jhoomta hai pyar-Hatim Tai 1956

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Sep 11, 2009

ढलती जाए रात- रज़िया सुल्ताना १९६१

ये पुरानी रज़िया सुल्तान नाम की फिल्म है। ये गीत सुनते
सुनते मुझे बहुत साल हो गए हैं । इस गीत में आपको जयराज और
निरूपा रॉय नामे के कलाकार दिखाई देंगे। गीत गाया है आशा और
रफ़ी ने। आनंद बक्षी के शायद शुरुआती गीतों में से एक है ये।
धुन बनायीं है एक गुमनाम से संगीतकार लच्छीराम ने। ये युगल गीत
भी अन्य कलाकारों द्वारा गाया जा रहा है परदे पर फिल्म सुहागन के
गीत की तरह जिसमे माला सिन्हा और गुरु दत्त नज़र आते हैं।
एक आनंदित करने वाले सदाबहार गीत का आनंद उठाइए।



गीत के बोल:

ढलती जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ
ढलती जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ

ढलती जाए रात

मस्त नज़ारे चाँद सितारे रात के मेहमाँ हैं ये सारे
उठ जाएगी शब की महफ़िल नूर-ए-सहर के सुन के नक्कारे
हो न हो दुबारा मुलाक़ात

ढलती जाए रात

नींद के बस में खोई-खोई कुल दुनिया है सोई सोई
ऐसे में भी जाग रहा है हम तुम जैसा कोई कोई
क्या हसीं है तारों की बारात

ढलती जाए रात

जो भी निग़ाहें चार है करता उसपे ज़माना वार है करता
हूँ राह-ए-वफ़ा का बन के राही फिर भी तुम्हें दिल प्यार है करता
बैठा ना हो ले के कोई घात

ढलती जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ
ढलती जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ
ढलती जाए रात

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