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Sep 28, 2015

आ जा आ जा भंवर-रानी रूपमती १९५७

रानी रूपमती और बाज बहादुर की ऐतिहासिक प्रेम कहानी से आप
ज़रूर वाकिफ होंगे. मालवा क्षेत्र में बसे मांडू का किला आज भी इस
कहानी की याद दिलाता है. मांडू किसी समय बहुत समृद्ध और बड़ा
शहर हुआ करता था. इस प्रेम कहानी का अंत भी अन्य प्रसिद्ध
कहानियों की तरह दुखांत ही हुआ.

भारत भूषण और निरुप रॉय अभिनीत फिल्म रानी रूपमती सन १९५७
में प्रगट हुई फिल्म है. इसमें गीत लिखे भारत व्यास ने और संगीत
दिया श्रीनाथ त्रिपाठी उर्फ एस. एन. त्रिपाठी ने. 

फिल्म देखने वाला इतिहास ज़ल्दी समझता है फिल्म देख के. कुछ गुनी
और ज्ञानी किताबों की ख़ाक छान के समझते हैं, बचे हुए रिसर्च कर के.
सबका अपना तरीका है समझने का.

गीत काफी कसरती किस्म का है जहाँ तक गायकी का सवाल है. ऐसे
मधुर गीतों का जिक्र नहीं होता सयानों के म्युझिक रिव्यू वगैरह में.
फिल्म का निर्देशन भी एस एन त्रिपाठी ने किया है.





गीत के बोल:


छोड़ चला क्यूँ निर्मोही
कैसा तेरा प्यार
रो रो करे पुकार कामिनी
बीती जाए बहार
आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
हो ओ आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
न सता रे आ रे आ रे

मोरी अँखियाँ उदासी
तोरे दरस की प्यासी
पल पल छिन छिन देखें राह तिहारी
आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
हो ओ आ

गुन गुन धुन सुन सुन तेरी हरजाई
तन मन की रे मैंने सुध बिसराई
गुन गुन धुन सुन सुन तेरी हरजाई
तन मन की रे मैंने सुध बिसराई
हरजाई आ जा
आ जा भंवर सूनी डगर
आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
..................................................................
Aa ja aa ja bhanwar-Rani roopmati 1957

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Sep 28, 2011

जोगिया से प्रीत किये दुःख होए - गरम कोट १९५५

आज सितम्बर २८ को स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर का बयासीवां जन्म दिवस
है।

लता मंगेशकर का निस्संदेह इतिहास की उन नारियों में स्थान है जिन्होंने
जन-मानस पर सबसे ज्यादा प्रभाव डाला है जहाँ तक भारतीय इतिहास का
सवाल है । आश्चर्य नहीं है कि उन्हें भारत रत्न से भी काफी समय पहले
सम्मानित किया जा चुका है। सैंकड़ों संगीतकारों के साथ उन्होंने हजारों गीत
गाये हैं और आज भी गाने की ख्वाहिश रखती हैं।

हिंदी फिल्मों के महानायक को आप "८२" के अंक वाली तख्ती लिए टीवी
के चैनल पर लता मंगेशकर को जन्म दिवस की शुभकामनाएं देते देख ही
चुके होंगे। मेरे ख्याल से महानायक अपनी युवावस्था में उतने सक्रिय नहीं
दिखे जितना वे अपनी बुजुर्गावास्था में दिखाई दे रहे हैं। उनसे आज की पीढ़ी
को ऊर्जावान बने रहने का सबक लेना चाहिए। लिटिल "बी" सुन रहे हैं ना ?

आपको लता मंगेशकर के गाये कई मधुर गीत हम सुनवा चुके हैं इस ब्लॉग
पर। आज आपको सुनवाते हैं एक अनजान सी फिल्म गरम कोट से एक मधुर
गीत जो शायद खिचड़ी रंग के बालों वाली पीढ़ी ने अवश्य एक ना एक बार सुना
होगा। सादा और सरल सा गीत है जिसकी धुन बनाई है संगीतकार अमरनाथ ने।

'गरम कोट' राजिंदर सिंह बेदी की लिखी एक कहानी पर आधारित फिल्म है।
'गरम कोट' कहानी से साहित्य प्रेमी विशेषकर उर्दू साहित्य प्रेमी अवश्य ही वाकिफ
होंगे। बेदी ख्यातनाम साहित्यकार हैं। गौरतलब है कि इस फिल्म के सह-निर्माता
बेदी हैं और इस फिल्म के ज़रिये उन्हें स्क्रीनप्ले लिखने का पहला अवसर
मिला और स्क्रीनप्ले लिखने का ये सिलसिला समय के साथ आगे बढ़ता ही गया।
समय के साथ उन्हें कई फिल्मों के संवाद लिखने का भी मौका मिला।

भक्त-श्रेष्ठ मीरा बाई की दिव्य रचना पर बने गीत को फिल्माया गया है हिंदी फिल्मों
की सबसे चर्चित मां पर। नारी शक्ति को प्रणाम करते हुए ये गीत सभी महिला पाठकों
को समर्पित। उल्लेखनीय है अभिनेत्री निरूपा रॉय ने फिल्म दीवार में अमिताभ की
मां का किरदार निभाया था। इसी वाक्य को अगर हम ३७ साल पहले लिखते तो यूँ
होता- फिल्म दीवार में अमिताभ ने निरूपा रॉय के बेटे की भूमिका निभाई थी।
गीत मीरा बाई का पारंपरिक गीत है और इसका संगीत तैयार किया है अमरनाथ
(चावला) ने. इनके बारे में जिक्र फिर कभी.





गीत के बोल:

प्रीत किये दुःख होए, दुःख होए
प्रीत किये दुःख होए
जोगिया से प्रीत किये दुःख होए
जोगिया से प्रीत किये दुःख होए

प्रीत किये सुख, ना मोरी सजनी
प्रीत किये सुख, ना मोरी सजनी
जोगिया मीत ना कोए

जोगिया से प्रीत किये दुःख होए
जोगिया से प्रीत किये दुःख होए

रैन दिवस कल नाहीं परत है
रैन दिवस कल नाहीं परत है
रैन दिवस कल नाहीं परत है

तुम मिलिया बिन मोहे
तुम मिलिया बिन मोहे

ऐसी सूरत या जग माही
ऐसी सूरत या जग माही
फेर न देखी कोए
फेर न देखी कोए

जोगिया से प्रीत किये दुख होए
जोगिया से प्रीत किये दुख होए

मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे
कब रे मिलोगे
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे
मिलिया आनंद होए

जोगिया से प्रीत किये दुख होए
जोगिया से प्रीत किये दुख होए
.......................................
Jogiya se preet kiye dukh hoye-Garam Coat 1955

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Jul 17, 2011

झननन झन झननन झन बाजे पायलिया-रानी रूपमती १९५९

आपको फिल्म रानी रूपमती से कानों की कसरत करवाने वाला
एक और मधुर गीत सुनवाते हैं. ये लता और रफ़ी का गाया युगल
गीत है जिसे भारत भूषण और निरूपा राय पर फिल्माया गया है.
भारत व्यास के बोल है और श्रीनाथ त्रिपाठी का संगीत है. विडियो
में आपको मांडू की ऐतिहासिक इमारतें दिखाई देंगी.






गीत के बोल :


अमिय हलाहल मदभरे श्वेत श्याम रतनार
जियत मरत झुकि झुकि परत जेहि चितवत एक बार

झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
पिया से मिलन चली आज कामिनिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन

ओ ओ ओ ओ ओ
रात अन्धेरी डर लागे रसिया
रात अन्धेरी डर लागे रसिया
पास कैसे आऊँ तोरे मनबसिया
पपीहा बोले
पपीहा बोले अम्रित घोले जियरा डोले हौले हौले हौले
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे

सज सिंगार कोई नार नवेली
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सज सिंगार कोई नार नवेली
निडर डगर में चली है अकेली
ऋतु बसन्त आई अलबेली
डार डार बोले कारी कोयलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन

ल : ओ ओ ओ ओ ओ
प्यार जगा है देखो कण कण में
प्यार जगा है देखो कण कण में
रास रसा है मन मधुबन में
बजे मंजीरे
बजे मंजीरे जमुना तीरे मैं तो चली रे धीरे धीरे धीरे
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया

झननन झन झननन झन झननन बाजे
बाजे पायलिया
झनन झन झन बाजे पायलिया
झनन झनन बाजे पायलिया
झन झन बा झन झन बा झन झन बा
आ आ आ आ आ आ आ
झनन झनन झनन झनन बाजे
झनन झनन झनन झनन बाजे
झनन झनन झनन झनन बाजे

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बा आ आ आ आ जे
बा आ आ आ आ जे
बा आ आ आ आ जे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
झननन झन झननन झन झननन बाजे
....................................
Jhananan jhan baaje-Rani Roopmati 1957

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Jan 12, 2011

आ लौट के आ जा मेरे मीत-रानी रूपमती १९५९

मुकेश की आवाज़ में एक गीत सुनिए जिसे ना जाने कितनी
बार सुना होगा मैंने। इस दर्द भरे गीत का आकाशवाणी से
विशेष नाता रहा है और इसे लगभग सभी गीतों के कार्यक्रम
में नियमित रूप से बजाय जाता रहा। पिछले गीत से मुझे ये
गीत याद आया। भारत भूषण इस गीत में भी आपको दिखाई देंगे
बस फर्क गायक की आवाज़ का हो गया है। पिछला गीत रफ़ी की
आवाज़ में था। ऐतिहासिक और पौराणिक फिल्मों के लिए अभिनेता
भारत भूषण भी एक पसंद हुआ करते थे फिल्म निर्माताओं की। गीत
लिखा है कविवर भारत व्यास ने और धुन है एस एन त्रिपाठी की।



गीत के बोल:

लौट के आ, लौट के आ
लौट के आ , लौ के आ

आ लौट के आ जा मेरे मीत
आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

मेरा सूना पड़ा रे संगीत
मेरा सूना पड़ा रे संगीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

बरसे गगन मेरे बरसे नयन
देखो तरसे है मन अब तो आ जा
बरसे गगन मेरे बरसे नयन
देखो तरसे है मन अब तो आ जा
शीतल पवन लगाये अगन
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा
शीतल पवन लगाये अगन
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा

तूने भाली रे निभाई प्रीत
तूने भाली रे निभाई प्रीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

एक पल है हँसना एक पल है रोना
कैसा है जीवन का खेला
एक पल है हँसना एक पल है रोना
कैसा है जीवन का खेला
एक पल है मिलना एक पल बिछड़ना
दुनिया है दो दिन का मेला

ये घडी ना जाए बीत
ये घडी ना जाए बीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

मेरा सूना पड़ा रे संगीत
मेरा सूना पड़ा रे संगीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

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Nov 9, 2010

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े-जय चित्तौड़ १९६१

दुर्लभ गीतों की श्रेणी में अगला गीत पेश है फिल्म 'जय चित्तौड़' से ।
ये एक ऐसा गीत है जो केवल रेडियो पर सुना गया और आज आप
इसका विडियो देखेंगे जो कि एक बड़े संगीत रसिक द्वारा यू ट्यूब
पर डाला गया है।

श्री नाथ त्रिपाठी जिन्हें हम एस एन त्रिपाठी के नाम से जानते हैं
काफी सक्रिय रहे हिंदी फिल्मों में मगर अधिकतर पौराणिक या
ऐतिहासिक फिल्मों में। उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण भी किया
और अभिनय भी। गीत लिखा है भारत व्यास ने और इसे फिल्माया
गया है फिल्म दीवार की प्रसिद्ध "माँ" निरूपा रॉय पर।

'जय चित्तौड़' फिल्म का यह गीत महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक
को समर्पित है। इतिहासकार अगर इस मसले पर थोडा टॉर्च से
प्रकाश डाल सकें तो बड़ी कृपा होगी। वैसे एक बात तो समझ आती
है -जब आपको इतिहास की जानकारी होती है तब आप ऐसे
तथ्यपरक गीतों की रचना कर सकते हैं। इसका तीसरा अंतरा
सुन कर शायद आप भी मेरे विचार से सहमत होंगे।

जिन लोगों का ये ख्याल है कि घोड़े की टाप की आवाज़ केवल
ओ. पी. नय्यर के गीतों में ही बढ़िया है वो इसे सुन कर अपनी
गलत फ़हमी दूर कर लें।



गीत के बोल:

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े
ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े
तुझपे सवार है जो
मेरा सुहाग है वो
रखियो रे आज उनकी लाज हो

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े

तेरे कन्धों पे आज भार है मेवाड़ का
करना पड़ेगा तुझे सामना पहाड़ का
हल्दी घाटी नहीं है काम कोई खिलवाड़ का
देना जवाब वहां शेरों की दहाड़ का
घड़ियाँ तूफ़ान की हैं तेरे इम्तेहान की हैं
घड़ियाँ तूफ़ान की हैं तेरे इम्तेहान की हैं
रखियो रे आज उनकी लाज हो

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े
तुझपे सवार है जो
मेरा सुहाग है वो
रखियो रे आज उनकी लाज हो

छक्के छुड़ा देना तू दुश्मनों की आल के
उनकी छाती पे चड़ना पांव को उछाल के
लाना सुहाग मेरा वापस तू संभाल के
तेरे इतिहास में अक्षर होंगे गुलाल के
चेतक महान है तू बिजली का बाण है तू
चेतक महान है तू बिजली का बाण है तू
रखियो रे आज उनकी लाज हो

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े
तुझपे सवार है जो
मेरा सुहाग है वो
रखियो रे आज उनकी लाज हो

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े

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Dec 12, 2009

मुन्ना बड़ा प्यारा-मुसाफिर १९५७

शैलेन्द्र ने ये गीत अपने बालक को ध्यान में रख कर लिखा था, ऐसा
तमाम किस्से और कहानियों से पता चलता है। उनके पुत्र शैली शैलेन्द्र
ने इस बात का जिक्र भी किया है किसी इंटरव्यू में ।

१९५७ की फ़िल्म मुसाफिर में ये गीत गाया है किशोर कुमार ने ।
किशोर कुमार प्रमुख गायक-अभिनेता रहे हिन्दी फिल्मों के और
उनसे सभी रंग के गीत गवा लिए फ़िल्म और संगीत निर्देशकों ने।
फ़िल्म में संगीत दिया है सलिल चौधरी ने। किशोर कुमार के
साथ निरूपा राय नाम की कलाकार परदे पर आपको दिखलाई देंगी।
ऋषिकेश मुखर्जी के सुनहरे सफर का पहला कदम था ये।




गीत के बोल:

मुन्ना बड़ा प्यारा , अम्मी का दुलारा
कोई कहे चाँद कोई आंख का तारा

हँसे तो भला लगे, रोये तो भला लगे
अम्मी को उसके बिना कुछ भी अच्छा न लगे
जियो मेरे लाल, जियो मेरे लाल
तुमको लगे मेरी उमर जियो मेरे लाल

मुन्ना बड़ा प्यारा , अम्मी का दुलारा
मुन्ना बड़ा प्यारा , अम्मी का दुलारा
कोई कहे चाँद कोई आंख का तारा

एक दिन वो माँ से बोला, क्यूँ फूंकती है चूल्हा
क्यूँ न रोटियों का पेड़ हम लगा ले
आम तोड़ें रोटी तोड़ें, रोटी आम खा लें
क्यूँ न रोटियों का पेड़ हम लगा ले
आम तोड़ें रोटी तोड़ें, रोटी आम खा लें
काहे करे रोज़ रोज़ तू ये झमेला
अम्मी को आई हँसी , हंस के वो कहने लगी
लाल मेहनत के बिना रोटी किस घर में पकी
जियो मेरे लाल, जियो मेरे लाल
ओ जियो जियो जियो जियो मेरे लाल

मुन्ना बड़ा प्यारा , अम्मी का दुलारा
मुन्ना बड़ा प्यारा , अम्मी का दुलारा
कोई कहे चाँद कोई आंख का तारा

एक दिन वो छुपा मुन्ना, ढूंढें न मिला मुन्ना
एक दिन वो छुपा मुन्ना, ढूंढें न मिला मुन्ना
बिस्तर के नीचे, कुर्सियों के पीछे
देखा कोना कोना, सब थे साँस खींचे
बिस्तर के नीचे, कुर्सियों के पीछे
देखा कोना कोना, सब थे साँस खींचे
कहाँ गया कैसे गया, सब थे परेशान
सारा जग ढूंढ थके, कहीं मुन्ना न मिला
मिला तो प्यार भरी माँ की आँखों में मिला
सारा जग ढूंढ थके, कहीं मुन्ना न मिला
मिला तो प्यार भरी माँ की आँखों में मिला
जियो जियो मेरे लाल, जियो मेरे लाल
अरे जियो जियो जियो जियो मेरे लाल

मुन्ना बड़ा प्यारा , अम्मी का दुलारा
मुन्ना बड़ा प्यारा , अम्मी का दुलारा
कोई कहे चाँद कोई आंख का तारा
कोई कहे चाँद कोई आंख का तारा
.........................................................................
Munna bada pyara-Musafir 1957

Artist: Kishore Kumar

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Sep 11, 2009

ढलती जाए रात- रज़िया सुल्ताना १९६१

ये पुरानी रज़िया सुल्तान नाम की फिल्म है। ये गीत सुनते
सुनते मुझे बहुत साल हो गए हैं । इस गीत में आपको जयराज और
निरूपा रॉय नामे के कलाकार दिखाई देंगे। गीत गाया है आशा और
रफ़ी ने। आनंद बक्षी के शायद शुरुआती गीतों में से एक है ये।
धुन बनायीं है एक गुमनाम से संगीतकार लच्छीराम ने। ये युगल गीत
भी अन्य कलाकारों द्वारा गाया जा रहा है परदे पर फिल्म सुहागन के
गीत की तरह जिसमे माला सिन्हा और गुरु दत्त नज़र आते हैं।
एक आनंदित करने वाले सदाबहार गीत का आनंद उठाइए।



गीत के बोल:

ढलती जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ
ढलती जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ

ढलती जाए रात

मस्त नज़ारे चाँद सितारे रात के मेहमाँ हैं ये सारे
उठ जाएगी शब की महफ़िल नूर-ए-सहर के सुन के नक्कारे
हो न हो दुबारा मुलाक़ात

ढलती जाए रात

नींद के बस में खोई-खोई कुल दुनिया है सोई सोई
ऐसे में भी जाग रहा है हम तुम जैसा कोई कोई
क्या हसीं है तारों की बारात

ढलती जाए रात

जो भी निग़ाहें चार है करता उसपे ज़माना वार है करता
हूँ राह-ए-वफ़ा का बन के राही फिर भी तुम्हें दिल प्यार है करता
बैठा ना हो ले के कोई घात

ढलती जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ
ढलती जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ
ढलती जाए रात

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