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Feb 19, 2018

तू है या नहीं भगवान-जनम जनम के फेरे १९५७

फिल्म जनम जनम के फेरे से एक गीत सुनते हैं भरत व्यास का
लिखा हुआ. ईश्वर है या नहीं इस गीत में ये संवाद हो रहा है.

लता, मन्ना डे और रफ़ी का गाया ये गीत दुर्लभ है. हिंदी फिल्मों
के कई अच्छे गीत अनसुने से रह गए और कॉमन मास तक ना
पहुँच पाए.
   



गीत के बोल:

तू है या नहीं भगवान
तू है या नहीं भगवान
कभी होता भरोसा कभी होता भरम
पड़ा उलझन में है इंसान
कभी होता भरोसा कभी होता भरम
पड़ा उलझन में है इंसान
तू है या नहीं भगवान

मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
तेरे सोचे बिना जब होता है सब
तो समझ ले कहीं है भगवान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान

तू है या नहीं भगवान
तू है या नहीं भगवान

वो है अगर तो क्यूँ दे ना दिखाई
वो है अगर तो क्यूँ दे ना दिखाई कैसी ये उल्टी रीत है
वो है अगर तो क्यूँ दे ना दिखाई कैसी ये उल्टी रीत है
झूठा है वो उसके झूठे ही भय से झूठा जगत भयभीत है
घन घन गरजती हुई ये घटायें
घन घन गरजती हुई ये घटायें किसका सुनाती गीत हैं
लहराते सागर की लहरों में गूँजे
लहराते सागर की लहरों में गूँजे किसका अमर संगीत है
किसका अमर संगीत है
जो दाता है सबका महान हो ओ ओ ओ ओ ओ
जो दाता है सबका महान
दिया जिसने जनम दिया जिसने ये तन
क्यूँ न उसको सका तू पहचान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान

तू है या नहीं भगवान
तू है या नहीं भगवान

बालक की ममता रोती है क्यूँ
बालक की ममता रोती है क्यूँ अनहोनी जग में होती है क्यूँ
मंदिर में दीप जलाते हैं जो उनके घर की बुझती ज्योति है क्यूँ
अनहोनी जग में होती है क्यूँ

जीवन-मरण हानि और फ़ायदा कर्मों का फल है उसका भी क़ायदा
इंसान की कुछ भी चलती नहीं करनी अपनी कभी टलती नहीं
भक्ति के भाव से उसको तू जान ले
श्रद्धा की आँखों से उसको तू पहचान ले
होता नहीं क्या अचंभा बड़ा आकाश किसके सहारे खड़ा
आकाश किसके सहारे खड़ा
फूलों में रंग झरनों में तरंग धरती में उमंग जो उठाता
वो कौन क्या तुम
बादल में बिजली पहाड़ों में फूल जो खिलाता
वो कौन क्या तुम
वो है सर्वस्त्रशक्तिमान
वो है सर्वस्त्रशक्तिमान
कण-कण में बसे पर दिखाई न दे
उसकी शक्ति को तू पहचान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
तेरे सोचे बिना जब होता है सब
तो समझ ले कहीं है भगवान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
मत उलझन में पड़ इंसान
………………………………………………………..
Too hai ya nahin bhagwan-Janam janama ke phere 1957

Artists: Nirupa Roy, Manhar Desai,  Unknown Babaji

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Jan 25, 2018

ऐसी भी क्या जल्दी है-राजा १९६३

प्रेम धवन का लिखा एक गीत सुनते हैं सन १९६३ की फिल्म
राजा से. एस एन त्रिपाठी इसके संगीतकार हैं और आशा भोंसले
गायिका.

फिल्म से हमने एक गीत आपको पहले सुनवाया था. इस गीत की
संभावित श्रेणियाँ इस प्रकार से हैं-ऐसी भी हिट्स, जल्दी हिट्स और
ठहरो हिट्स. श्रेणी को केटेगरी कहा जाता है जैसे कारीगरी, बाजीगरी
वगैरह.

गीत के शुरू शुरू में आशा भोंसले ने तरह तरह की आवाजें निकाली
हैं जिनमें वो भी शामिल है जैसी किसी के सर पर ठंडा पानी डालने
के बाद उसके मुंह से निकलती हैं. गीत में हाथी के चिंघाड जैसी भी
कुछ ध्वनियाँ हैं जो एक वाद्य यन्त्र द्वारा निकाली गई हैं.




गीत के बोल:

ऐसी भी क्या जल्दी है ठहरो ज़रा
आये हो अभी अभी ओ जाने वफ़ा
कहना है फ़साना अभी
बाकी है तराना अभी
सुनो तो ज़रा ऐ

रोक लेंगी ये निगाहें तेरी राहों को
जाओगे क्या तुम झटक के मेरी बाहों में
रोक लेंगी ये निगाहें तेरी राहों को
जाओगे क्या तुम झटक के मेरी बाहों में
क़दमों में तेरे डाला है जालिम दिल का खज़ाना

ऐसी भी क्या जल्दी है ठहरो ज़रा
आये हो अभी अभी ओ जाने वफ़ा
कहना है फ़साना अभी
बाकी है तराना अभी
सुनो तो ज़रा ऐ

जाते हो तो ये भी दिल में सोच के जाना
रह सकेगा शमा से क्या दूर परवाना
जाते हो तो ये भी दिल में शोच के जाना
रह सकेगा शमा से क्या दूर परवाना
ओ जाने वाले मुश्किल है हमसे दामन चुराना

ऐसी भी क्या जल्दी है ठहरो ज़रा
आये हो अभी अभी ओ जाने वफ़ा
कहना है फ़साना अभी
बाकी है तराना अभी
सुनो तो ज़रा

ऐसी भी क्या जल्दी है ठहरो ज़रा
आये हो अभी अभी ओ जाने वफ़ा
....................................................
Aisi bhi kya jaldi hai-Raja 1963

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Jan 20, 2018

आज की रात आज की रात-कवि कालिदास १९५९

महाकवि कालिदास पर बने ऐतिहासिक कथाचित्र से एक
गीत सुनते हैं. इसे भारत व्यास ने लिखा है और इसका
संगीत तैयार किया है एस एन त्रिपाठी ने. इस जोड़ी ने
कई ऐतिहासिक व पौराणिक फिल्मों के लिए गीत बनाये.

गुणवत्ता की बात की जाए तो इनके बनाये अधिकांश गीत
दुसरे समकालीन गीतों से बेहतर हैं मगर प्रसिद्धि के
मामले में ये पीछे रह गए.

प्रस्तुत गीत गाया है उषा मंगेशकर और सविता बैनर्जी ने.
कॉम्बिनेशन के लिहाज से ये एक रेयर गीत है क्यूंकि इन
दोनों की आवाजें दो ही गीतों में साथ में है. एक शायद
फिल्म काबुलीवाला का गीत है.

गीत अनूठा है और इसमें गति परिवर्तन भी है. ये करिश्मा
आर डी बर्मन और मदन मोहन के अलावा औरों ने भी किया
है.




गीत के बोल:

जिसे बनाया खेवनहारा
वही आज कर गया किनारा
अपना बना के आज किसी ने
लूट लिया रे भाग्य हमारा

आज की रात
आज की रात आज की रात
चाँदनी अंग में आग लगाये
चकोरी झर झर नीर बहाये
आज मेरा चन्दा नहीं है साथ
आज की रात
आज की रात आज की रात

आ आ हा हा हा
आ आ हा हा हा
आज की रात आज की रात
आज की रात आज की रात
मगन मन मन्द मन्द मुस्काये
चकोरी मन में खिल खिल जाये
आज मेरा चन्दा है मेरे साथ
आज की रात आज की रात
आज की रात आज की रात

आज की रात
आज की रात आज की रात

बसन्ती ऱुत नयनो में आज
के पावस बन के छाई है
निराली ये पूनम की रात
अमावस बन के आई है
किसे नैनन का नीर दिखाऊँ
किसे मैं मन की पीर बताऊँ
आज मेरा चन्दा नहीं है साथ
आज की रात
आज की रात आज की रात

आ आ हा हा हा
आ आ हा हा हा
आज की रात आज की रात
आज की रात आज की रात
आज क्यों बजते सनन न छुन
मेरे पाँव की ये पायल
नयन में कौन समाया रे
बिखरने लगा मेरा काजल
आज मैं गीत प्रीत के गाऊँ
कभी सदमाऊँ कभी मुसकाऊँ
आज मेरा चन्दा है मेरे साथ
आज की रात आज की रात
आज की रात आज की रात

आज की रात
आज की रात आज की रात
..........................................................
Aaj ki raat-Kavi Kalidas 1959

Artists: Nirupa Roy, Anita Guha

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May 10, 2017

चैन तुमसे चैन तुमसे-पनिहारी १९४६

फिल्म पनिहारी से एक मधुर गीत सुनते हैं जिसे सुरेन्द्र ने
गाया है. इस गीत को लिखा है पंडित इन्द्र, ब्रजेन्द्र गौड़ और
राममूर्ति चतुर्वेदी में से किसी एक ने. संगीत एस एन त्रिपाठी
का है.

गीतकार का नाम जैसे ही कोई पाठक बतलायेगा, अपडेट कर
दिया जायेगा.  





गीत के बोल:

चैन तुमसे चैन तुमसे क़रार तुमसे है
चैन तुमसे चैन तुमसे क़रार तुमसे है

ज़िंदगी की बहार तुमसे है
ज़िंदगी की बहार तुमसे है
चैन तुमसे चैन तुमसे क़रार तुमसे है
चैन तुमसे चैन तुमसे क़रार तुमसे है
चैन तुमसे

हमने खेली है जान की बाज़ी
हमने खेली है जान की बाज़ी
जीत तुमन्से जीत तुमन्से है हार तुमसे है
जीत तुमन्से जीत तुमन्से है हार तुमसे है
चैन तुमसे

दिल में आते हो हाय यूँ बन कर
दिल में आते हो हाय यूँ बन कर
बर्क़ को भी बर्क़ को भी क़रार तुमसे है
बर्क़ को भी बर्क़ को भी क़रार तुमसे है
चैन तुमसे

मुझको दुनिया की कुछ ख़बर ही नहीं
मुझको दुनिया की कुछ ख़बर ही नहीं
होश इतना होश इतना है प्यार तुमसे है
होश इतना होश इतना है प्यार तुमसे है
चैन तुमसे
...........................................................
Chain tumse-Panihari 1946

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Feb 25, 2017

फूल बगिया में बुलबुल बोले-रानी रूपमती १९५७

रानी रूपमती से एक मधुर युगल गीत सुनते हैं. आपने अनेकों
लता और रफ़ी के युगल गीत सुने होंगे. सबसे ज्यादा रफ़ी-लता
के युगल गीत बनाये लक्ष्मी प्यारे ने, फिर शंकर जयकिशन का
नंबर आता है. तीसरे नंबर पर कल्याणी आनंदजी हैं और चौथे
नंबर पर नौशाद.

एस एन त्रिपाठी ने केवल ७ युगल गीत बनाये दोनों के मगर
उनमें से ३-४ बेहद लोकप्रिय हैं. जनम जनम के फेरे का गीत
हो या फिल्म नादिर शाह का गीत, पुराने गीतों के रसिकों को
आज भी याद हैं.

प्रस्तुत गीत भारत व्यास का लिखा हुआ है. इसे परदे पर गा
रहे हैं निरुप रॉय और भारत भूषण.
       



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो जी हो
फूल बगिया में बुलबुल बोले
डाल पे बोले कोयलिया
प्यार करो
प्यार करो रुत प्यार की आई रे
भंवरों से कहती हैं कलियाँ
हो जी हो हो जी हो
हो जी हो हो जी हो

हो जी हो हो जी हो
हो जी हो हो जी हो
हो जी हो हो जी हो
प्यार तो है तलवार की धार जी
प्यार की मुश्किल हैं गलियां
प्यार में राधा बांवरी बन गई
रटते रटते सांवलिया

जो प्यार करते जग से ना डरते
प्रेमी अगन में पलते हैं
दीपक के तन में लौ की लगन में
लाखों पतंगे जलते हैं
जाने करे कुर्बान हिरन जब
गीत की बाजे बंसुरिया

प्यार करो
प्यार करो रुत प्यार की आई रे
भंवरों से कहती हैं कलियाँ
प्यार में राधा बांवरी बन गयी
रटते रटते सांवलिया

कौन करेगा प्रीत यहाँ जब
कोई किसी का मीत नहीं
प्रीत भरा संगीत नहीं तो
प्यार की जग में जीत नहीं
तार बजे जब बीना के तब
प्यार की बाजे पायलिया

प्यार करो
प्यार करो रूत प्यार की आई रे
भंवरों से कहती हैं कलियाँ
प्यार में राधा बांवरी बन गयी
रटते रटते सांवलिया
हो जी हो हो जी हो
हो जी हो हो जी हो
हो जी हो हो जी हो
……………………………………………………..
Phool bagiya mein bulbul bole-Rani Roopmati 1957

Artists: Bharat Bhushan, Nirupa Rai

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Dec 21, 2016

इधर बिजली उधर शोला-राजा १९६३

संगीतकार एस एन त्रिपाठी को जनता शायद धार्मिक फिल्मों और
क्लासिकल गीतों से ही जोड़ कर देखती आई है. आज सुनते हैं
एक क्लब सोंग फिल्म राजा से जो सन १९६३ की एक फिल्म है.
ये क्लब पीरियड क्लब है अर्थात राज दरबार वाला क्लब है. अब
यही गीत किसी मॉडर्न सेट अप वाले किसी दृश्य में फिट किया
जाता तो थोडा लोकप्रिय भी हो जाता.

राधाकांत निर्देशित और मुकुल बैनर पिक्चर्स बैनर तले बनी इस
फिल्म में  जीवन, उल्हास, विजया चौधरी, हेलन, जगदीप के साथ
हेलन प्रमुख भूमिका में हैं.

हिंदी सिनेमा का इतिहास हेलन के उल्लेख बिना अधूरा ही रहेगा.
कितना भी हम सितारों का महिमा मंडन कर लें मगर ये एक बात
शाश्वत सत्य की तरह है कि हेलन के लिए दर्शकों के दिल में आदर
वाली विशेष जगह रही हमेशा. उनकी चपलता और गति लाजवाब
और बेजोड रही. कोई भी नृत्य शैली उनके लिए असंभव न थी.




गीत के बोल:

इधर बिजली उधर शोला
जो टकराए तो फिर क्या होगा
हो जी हो जी होशियार
हो जी हो जी होशियार
इधर बिजली उधर शोला
जो टकराए तो फिर क्या होगा
हो जी हो जी होशियार
हो जी हो जी होशियार

उनके दिल में बहाने ही बहाने
अपनी आँखों में निशाने ही निशाने
उनके दिल में बहाने ही बहाने
अपनी आँखों में निशाने ही निशाने
हुस्न भी है इश्क भी है
देखिये होगा क्या फैसला
इधर बिजली उधर शोला
जो टकराए तो फिर क्या होगा
हो जी हो जी होशियार
हो जी हो जी होशियार

आज हवाएं कुछ बदली हुई हैं
आज निगाहें कुछ मचली हुई हैं
आज हवाएं कुछ बदली हुई हैं
आज निगाहें कुछ मचली हुई हैं
एक तूफ़ान उठ रहा है
आज है इम्तहान दिल का
इधर बिजली उधर छोला
जो टकराए तो फिर क्या होगा
हो जी हो जी होशियार
हो जी हो जी होशियार

ये अदाओं का नज़रों का ज़माना
ये इशारों ही इशारों का ज़माना
ये अदाओं का नज़रों का ज़माना
ये इशारों ही इशारों का ज़माना
मुश्किलें ही मुश्किलें हैं
दिल रहे न रहे क्या पता
इधर बिजली उधर गोला
जो टकराए तो फिर क्या होगा
हो जी हो जी होशियार
हो जी हो जी होशियार
………………………………………………………
Idhar Bijli Udhar Shola-Raja 1963

Artists-Helen, Jagdeep, Jeevan

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Jul 20, 2016

नैन का चैन चुरा कर ले गई-चंद्रमुखी १९६०

अनजानी फिल्मों से मधुर गीत सुनाने का वादा है आपसे.
इसलिए, अगला गीत सुनते हैं फिल्म चंद्रमुखी(१९६०) से.
गीत मुकेश ने गाया है. भरत व्यास इस खूबसूरत गीत के
रचनाकार हैं. संगीत दिया है एस एन त्रिपाठी ने.

फिल्म चंद्रमुखी के प्रमुख कलाकार हैं मनहर देसाई और
कविता. काँति प्रोडक्शन के लिए इसका निर्देशन आर ठाकुर
ने किया.आर ठाकुर ने सन १९४८ की फिल्म जय हनुमान
का निर्देश भी किया था जो रंजीत फिल्म कम्पनी की एक
फिल्म है.

प्रस्तुत गीत फिल्म का शीर्षक गीत है. गीत में तीन अंतरे
हैं, मगर उपलब्ध क्लिपों में दो ही उपलब्ध हैं.



गीत के बोल:

नैन का चैन चुराकर ले गई
कर गई नींद हराम
चन्द्रमा सा मुख था उसका
चन्द्रमुखी था नाम
हो ओ ओ नैन का चैन चुराकर ले गई

अँखियां नीली और नशीली
दिल में बस गई वो लजीली
चाँदनी सी मद भरी थी
गगन से उतरी परी थी
याद है वो दिन सुहाना
याद है वो दिन सुहाना
वो सुहानी शाम
हो ओ ओ नैन का चैन चुराकर ले गयी
कर गई नींद हराम
हो ओ ओ नैन का चैन चुराकर ले गयी

सुन रहा हूँ वो पैजनिया
बन में नाची इक हिरनिया
याद खोई फिर जगी थी
जानी पहचानी लगी थी
नैन मिलते ही नयन से
नैन मिलते ही नयन से
मन हुआ बदनाम
हो ओ ओ नैन का चैन चुराकर ले गयी
कर गई नींद हराम
हो ओ ओ नैन का चैन चुराकर ले गयी
...................................................................
Nain ka chain chura kar-Chandramukhi 1960

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Sep 28, 2015

आ जा आ जा भंवर-रानी रूपमती १९५७

रानी रूपमती और बाज बहादुर की ऐतिहासिक प्रेम कहानी से आप
ज़रूर वाकिफ होंगे. मालवा क्षेत्र में बसे मांडू का किला आज भी इस
कहानी की याद दिलाता है. मांडू किसी समय बहुत समृद्ध और बड़ा
शहर हुआ करता था. इस प्रेम कहानी का अंत भी अन्य प्रसिद्ध
कहानियों की तरह दुखांत ही हुआ.

भारत भूषण और निरुप रॉय अभिनीत फिल्म रानी रूपमती सन १९५७
में प्रगट हुई फिल्म है. इसमें गीत लिखे भारत व्यास ने और संगीत
दिया श्रीनाथ त्रिपाठी उर्फ एस. एन. त्रिपाठी ने. 

फिल्म देखने वाला इतिहास ज़ल्दी समझता है फिल्म देख के. कुछ गुनी
और ज्ञानी किताबों की ख़ाक छान के समझते हैं, बचे हुए रिसर्च कर के.
सबका अपना तरीका है समझने का.

गीत काफी कसरती किस्म का है जहाँ तक गायकी का सवाल है. ऐसे
मधुर गीतों का जिक्र नहीं होता सयानों के म्युझिक रिव्यू वगैरह में.
फिल्म का निर्देशन भी एस एन त्रिपाठी ने किया है.





गीत के बोल:


छोड़ चला क्यूँ निर्मोही
कैसा तेरा प्यार
रो रो करे पुकार कामिनी
बीती जाए बहार
आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
हो ओ आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
न सता रे आ रे आ रे

मोरी अँखियाँ उदासी
तोरे दरस की प्यासी
पल पल छिन छिन देखें राह तिहारी
आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
हो ओ आ

गुन गुन धुन सुन सुन तेरी हरजाई
तन मन की रे मैंने सुध बिसराई
गुन गुन धुन सुन सुन तेरी हरजाई
तन मन की रे मैंने सुध बिसराई
हरजाई आ जा
आ जा भंवर सूनी डगर
आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
सूना है घर आ जा
आ जा आ जा भंवर सूनी डगर
..................................................................
Aa ja aa ja bhanwar-Rani roopmati 1957

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Mar 5, 2012

प्यारा प्यारा ये समा-लाल किला १९६१

किसी किले के नाम से बनने वाली फिल्मों में सन १९६१ की
फिल्म लाल किला प्रमुख है. इस फिल्म का निर्देशन किया
नानूभाई भट्ट ने.
       
लाता मंगेशकर के गाये रेयर जेम्स ऐसे गीतों को कहा जाता
है. संगीत प्रेमियों और संगीत समीक्षकों ने इस पर अपने कसीदे
नहीं काढ़े.    

भारत व्यास के बोल हैं और श्रीनाथ त्रिपाठी का संगीत.
   



गीत के बोल:

प्यारा प्यारा ये समा
प्यारा प्यारा ये समा है और सुहानी रात है
आ रही अब होंठों पे अब दिल में छुपी जो बात है
प्यारा प्यारा ये समा

आज सपने जगमगाते
आज सपने जगमगाते झूमता आकाश है
एक चन्दा दूर है और एक मेरे पास है
और एक मेरे पास है
प्यार की पूनम खिली
प्यार की पूनम खिली और प्रीत की बरसात है
आ रही अब होंठों पे अब दिल में छुपी जो बात है
प्यारा प्यारा ये समा

चांदनी की ओढ़ चादर
चांदनी की ओढ़ चादर सारी दुनिया सो रही
जागते हम तुम अकेले दिल में हलचल हो रही है
दिल में हलचल हो रही है
आज तारों ने सजाई
आज तारों ने सजाई रूप की बारात है

आ रही अब होंठों पे अब दिल में छुपी जो बात है
प्यारा प्यारा ये समा है और सुहानी रात है
आ रही अब होंठों पे अब दिल में छुपी जो बात है
प्यारा प्यारा ये समा
………………………………………………..
Pyara pyara ye sama hai-Lal Quila 1961

Artists: Jairaj, Nirupa Roy

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Jul 17, 2011

झननन झन झननन झन बाजे पायलिया-रानी रूपमती १९५९

आपको फिल्म रानी रूपमती से कानों की कसरत करवाने वाला
एक और मधुर गीत सुनवाते हैं. ये लता और रफ़ी का गाया युगल
गीत है जिसे भारत भूषण और निरूपा राय पर फिल्माया गया है.
भारत व्यास के बोल है और श्रीनाथ त्रिपाठी का संगीत है. विडियो
में आपको मांडू की ऐतिहासिक इमारतें दिखाई देंगी.






गीत के बोल :


अमिय हलाहल मदभरे श्वेत श्याम रतनार
जियत मरत झुकि झुकि परत जेहि चितवत एक बार

झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
पिया से मिलन चली आज कामिनिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन

ओ ओ ओ ओ ओ
रात अन्धेरी डर लागे रसिया
रात अन्धेरी डर लागे रसिया
पास कैसे आऊँ तोरे मनबसिया
पपीहा बोले
पपीहा बोले अम्रित घोले जियरा डोले हौले हौले हौले
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे

सज सिंगार कोई नार नवेली
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सज सिंगार कोई नार नवेली
निडर डगर में चली है अकेली
ऋतु बसन्त आई अलबेली
डार डार बोले कारी कोयलिया
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया
झननन झन झननन झन झननन

ल : ओ ओ ओ ओ ओ
प्यार जगा है देखो कण कण में
प्यार जगा है देखो कण कण में
रास रसा है मन मधुबन में
बजे मंजीरे
बजे मंजीरे जमुना तीरे मैं तो चली रे धीरे धीरे धीरे
झननन झन झननन झन झननन बाजे पायलिया

झननन झन झननन झन झननन बाजे
बाजे पायलिया
झनन झन झन बाजे पायलिया
झनन झनन बाजे पायलिया
झन झन बा झन झन बा झन झन बा
आ आ आ आ आ आ आ
झनन झनन झनन झनन बाजे
झनन झनन झनन झनन बाजे
झनन झनन झनन झनन बाजे

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बा आ आ आ आ जे
बा आ आ आ आ जे
बा आ आ आ आ जे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
झननन झन झननन झन झननन बाजे
....................................
Jhananan jhan baaje-Rani Roopmati 1957

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बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी-रानी रूपमती १९५७

आइये गायकी का आनंद उठाया जाए। गीत के आनंद और
गायकी के आनंद में फर्क है। गायकी में बोल सुरीले हो सकते
हैं और नहीं भी। अभिनेता अभिनेत्री हो या ना हों, कोई फर्क नहीं
पढता। गायकी का मज़ा या तो किसी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज
की आवाज़ में मिलता है या फिर मन्ना डे के गायन में मिलता
है। यहाँ परदे पर कृष्ण राव चोनकर नाम के शास्त्रीय संगीत के
गायक आपको दिखाई देंगे जो हमारे हीरो को गायन सिखा
रहे हैं। इस गीत में आवाज़ कृष्ण राव चोनकर और रफ़ी की है।

ऐसे गायन को हम उप-शास्त्रीय संगीत में शामिल कर सकते हैं
जो ना तो पूरा फ़िल्मी है ना पूर्ण रागदारी का हिस्सा।





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ

बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
हे ऐ ऐ ऐ ऐसो है बेदर्दी बनवारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
हे ऐ ऐ ऐ मोहे बेदर्दी बनवारी
ऐसो है निडर डरत न काहूँ से लंगर
ऐसो है निडर डरत न काहूँ से लंगर
अपने धिंगा धिंगी करत है डगर
हे मोरे राम, हे मोरे राम, हे मोरे राम

बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी

इतने दिनन में मोसे कबहूँ न अटक्यो
हा आ आ आ आ आ ,
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न
आ आ आ, आ आ आ, आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ
बाट चलत
इतने दिनन में मोसे कबहूँ न अटक्यो
नित प्रति जात गलिन में सुबह शाम
आवत फागुन इतरात जात दे-दे तारी
हे मोरे राम, हे मोरे राम, हे मोरे राम

बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नई चुनरी रँग डारी रे
चुनरी रँग डारी रे, चुनरी रँग डारी रे,
चुनरी रँग डारी रे, चुनरी रँग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी
बाट चलत नयी चुनरी रंग डारी

ध, प म ग रे सा नी सा, रे ग म प ध प,
ध प, म ग, रे सा, सा ग रे म सा म ग
म ध नी ध म ग, म ध नी सा, आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ

बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बाट चलत नयी
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
..........................................
Baat chalat nayi chunri-Rani Roopmati 1957

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Jun 16, 2011

नैनों से नैनों की बात हुई-चंद्रमुखी १९६०

पुरानी फिल्मों में कई ऐसे रत्न छुपे हुए हैं कि ढूंढ ढूंढ के उनको
निकालना पढता है। प्रस्तुत गीत भी ऐसा ही है। रेडियो पर काफी
बजा ये गीत शायद विडियो के रूप में उपलब्ध नहीं है यू ट्यूब पर।
भारत व्यास रचित गीत लता मंगेशकर द्वारा गाये अतिरिक्त
मधुरता वाले गीतों में गिना जाता है संगीत रसिकों द्वारा। कानों
में मिश्री सी घोल दी हो जैसे। संगीतकार एस एन त्रिपाठी का जादुई
संगीत है जनाब इस गीत में। गीत की साउंड क्वालिटी ज़बरदस्त है
और आपको आनंद ज़रूर आएगा मेरा दावा है।




गीत के बोल:

नैनों से नैनों की बात हुई
छुप-छुप के तुमसे मुलाक़ात हुई
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
फिर भी घुँघरू ने बोल दिया छम-छम-छम

नैनों से नैनों की बात हुई

तुम जो मिले फूल खिले दिल के अरमान हिले
धरती गगन दोनों लगे झूमने
नैनों से मिलते ही नयन चलने lagi मंद पवन
भँवर लगे कलियों को चूमने
भँवर लगे कलियों को चूमने
पहले मिलन की ये करामात हुई
चन्दा बिन पूनम की रात हुई
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
फिर भी घुँघरू ने बोल दिया छम-छम-छम

नैनों से नैनों की बात हुई

चंचल पलकों के तले नज़रों के तीर चले
बाज़ी लगी दो दिलों के खेल की
तुम भी चले हम भी चले देख के सब लोग जले
बढ़ने लगी बेल मधुर मेल की
बढ़ने लगी बेल मधुर मेल की
अपनी मुहब्बत की शुरुआत हुई
जीत इधर और उधर मात हुई
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
फिर भी घुँघरू ने बोल दिया छम-छम-छम

नैनों से नैनों की बात हुई
छुप-छुप के तुमसे मुलाक़ात हुई
नहीं जान सके तुम नहीं जान सके हम
फिर भी घुँघरू ने बोल दिया छम-छम-छम
.....................................
Nainon se nainon ki baat huyi-Chandrakanta 1960

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Jun 10, 2011

परवरदिगार-ए-आलम-हातिम ताई १९५६

बिना विवरण के भी कभी कभी गीत सुनने में आनंद आता है।
विवरण देना ज़रूरी नहीं है मगर दिया जाता है जिससे पढने
वाले को कुछ अतिरिक्त जानकारी मिले या जिससे लिखने और
पढने वाले के बीच संवाद कायम हो।

प्रस्तुत गीत फिल्म हातिम ताई से है। बाकी की जानकारी टैग में
समाहित है। गीत में ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते हुए उससे
फ़रियाद की जा रही है।



गीत के बोल:

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

नूह का सफ़ीना तूने तूफ़ान से बचाया
दुनिया में तू हमेशा बंदों के काम आया
माँगी ख़लील ने जब तुझसे दुआ ख़ुदाया
आतिश को तूने फ़ौरन एक गुलसिताँ बनाया
har इल्तेजा ने तेरी रहमत को है उभारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

यूनुस को तूने मछली के पेट से निकाला
तूने ही मुश्किलों में अयूब को सम्भाला
इलयास पर करम का तूने किया उजाला
है दो जहाँ में या रब तेरा ही बोल बाला
तूने सदा इलाही बिगड़ी को है सँवारा

परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम

यूसुफ़ को तूने मौला दी क़ैद से रिहाई
याक़ूब को दुबारा शक़्ल-ए-पिसर दिखाई
बहती हुई नदी में मूसा की रह बनाई
तूने सलीब पर भी ईसा की जाँ बचाई
दाता तेरे करम का कोई नहीं किनारा


परवरदिगार-ए-आलम तेरा ही है सहारा
तेरे सिवा जहाँ में कोई नहीं हमारा
परवरदिगार-ए-आलम
...........................
Parvardigaar-e-alm- Hatim Tai 1956

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Jun 4, 2011

झूमती है नज़र-हातिम ताई १९५६

जयराज और शकीला परदे पर। आशा और रफ़ी का युगल गीत। गीत
अख्तर रोमानी का और संगीत श्रीनाथ त्रिपाठी का। एक सदाबहार
युगल गीत जो निहायत ही रूमानी है, क्यूँ ना हो रोमानी साहब ने जो
लिखा है। आशा और रफ़ी के युगल गीतों में एक अलग सी कशिश महसूस
की मैंने। जहाँ लता और रफ़ी के गीत सादगी की सीमाओं के भीतर होते,
संगीतकार आशा और रफ़ी के गीतों में अभिनव प्रयोग करते और वो
सब करने की कोशिश करते जो लता रफ़ी के युगल गीतों में संभव नहीं
हो पाता। वैसे प्रस्तुत गीत बहुत ही सौम्य किस्म का गीत है, सौम्यता
जो कि एस एन त्रिपाठी के संगीत का वाटरमार्क है। एस एन त्रिपाठी वाकई
बहुत प्रतिभाशाली संगीतकार थे, बस ज्यादा प्रसिद्धि उनकी किस्मत में
नहीं थी सो वे केवल वर्ग विशेष की पसंद बन कर रह गये। बहरहाल
ये गीत उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है और क्यूँ है इसको सुनिए,
खुद जान जाइये।

फिल्म में नायिका शकीला परी की भूमिका में हैं और जयराज हातिम ताई
की। शकीला स्वभावतः कुछ ज्यादा ही प्रसन्न नज़र आ रही हैं इस गीत
में। कहीं कहीं तो ऐसा आभास होता है मानो उन्होंने कोई चुटकुला सुन
लिया हो और उसपर प्रतिक्रिया जाहिर कर रही हों। जयराज ज्यादा उछल
कूद नहीं मचाते थे सो इस गीत में भी वे गंभीर और संतुलित दिखाई दे
रहे हैं।





गीत के बोल:

झूमती है नज़र झूमता है प्यार
झूमती है नज़र झूमता है प्यार
ये नज़र छीन कर ले गई करार
ये नज़र छीन कर ले गई करार
झूमती है नज़र झूमता है प्यार

हम हैं आज़ाद पंछी फिजाओं के
हाथ ना आ सके हम हवाओं के
वादे करते नहीं हम वफाओं के
फिर भी तुम जानो दिल तुम पे हैं निसार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

मैं तेरे हुस्न के गीत गाऊंगा
इश्क की आरजू लब पे लाऊंगा
मैं तुझे धडकनों में बसाऊंगा
एक है दिल जिसमें हैं हसरतें हज़ार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

मेरी हर सांस में तेरा प्यार है
मेरी हर सांस में तेरा प्यार है
तू मेरे बाग़-ए-दिल की बाहर है
तू मेरे बाग़-ए-दिल की बाहर है
तू मेरी ज़िन्दगी का सिंगार है
ओ सनम तू मेरे दिल की है पुकार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार

तुम हमें हम तुम्हें देखते राहें

तुम हमें हम तुम्हें देखते राहें
हाल-ए-दिल हो बयां लब ना कुछ कहें
हाल-ए-दिल हो बयां लब ना कुछ कहें
मिल के हम प्यार की मौजों में बाहें
आ ज़रा छेड़ दे दिल से दिल के तार
ये नज़र छीन कर ले गई करार

झूमती है नज़र झूमता है प्यार
.....................................
Jhoomti hai nazar jhoomta hai pyar-Hatim Tai 1956

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Jun 3, 2011

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे-नाग देवता १९६१

आइये थोड़ा धार्मिक हो जाएँ। भजन सुनें फिल्म नाग देवता से जो
सन १९६१ की फिल्म है। सुमन कल्याणपुर की आवाज़ वाले इस गीत
को फिल्माया गया है शशिकला पर। ये एक पौराणिक फिल्म है जिसमें
महिपाल मुख्य भूमिका में हैं। शांतिलाल सोनी फिल्म के निर्देशक हैं
और संगीत दिया है एस. एन. त्रिपाठी ने। गीत का विडियो यू ट्यूब पर
उपलब्ध ज़रूर है। इसे देखने के लिए ये लिंक क्लिक करना पड़ेगा।
जब कान्हा की मीठी मुरलिया-विडियो






गीत के बोल:

हो, जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
किसी को रिझाये किसी को तडपाये
किसी को रिझाये किसी को तडपाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे

पनघट पे नैनों से कर के इशारा
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
नटखट सांवरिया ने मुझको पुकारा
हो ओ ओ बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
बैरन मुरलिया ने जादू सा डाला
कान्हा का बाण हाय तान तान मारा
मैं तो रह गई पनघट पे खड़ी की खड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये
हाय मैं तो रह गई पनघट पे कड़ी की कड़ी
चला भी नहीं जाये रुका भी नहीं जाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे

मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
मैं भी जो होती कान्हा की बांसुरिया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ
हो ओ ओ संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
संग संग मुझे भी रखते सांवरिया
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
हाथों में सजती मैं होंठों से लगती
मुझपे जो पढ़ती मोहन की नजरिया
मेरे मन में हैं क्या क्या उमंगें खड़ी
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये
बताई ना जाये छुपायी भी ना जाये

जब कान्हा की मीठी मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ मुरलिया बजे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुरलिया बजे
....................................
Jab kanha ki meethi muraliya baje-Naag Devta 1961

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Jan 12, 2011

आ लौट के आ जा मेरे मीत-रानी रूपमती १९५९

मुकेश की आवाज़ में एक गीत सुनिए जिसे ना जाने कितनी
बार सुना होगा मैंने। इस दर्द भरे गीत का आकाशवाणी से
विशेष नाता रहा है और इसे लगभग सभी गीतों के कार्यक्रम
में नियमित रूप से बजाय जाता रहा। पिछले गीत से मुझे ये
गीत याद आया। भारत भूषण इस गीत में भी आपको दिखाई देंगे
बस फर्क गायक की आवाज़ का हो गया है। पिछला गीत रफ़ी की
आवाज़ में था। ऐतिहासिक और पौराणिक फिल्मों के लिए अभिनेता
भारत भूषण भी एक पसंद हुआ करते थे फिल्म निर्माताओं की। गीत
लिखा है कविवर भारत व्यास ने और धुन है एस एन त्रिपाठी की।



गीत के बोल:

लौट के आ, लौट के आ
लौट के आ , लौ के आ

आ लौट के आ जा मेरे मीत
आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

मेरा सूना पड़ा रे संगीत
मेरा सूना पड़ा रे संगीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

बरसे गगन मेरे बरसे नयन
देखो तरसे है मन अब तो आ जा
बरसे गगन मेरे बरसे नयन
देखो तरसे है मन अब तो आ जा
शीतल पवन लगाये अगन
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा
शीतल पवन लगाये अगन
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा

तूने भाली रे निभाई प्रीत
तूने भाली रे निभाई प्रीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

एक पल है हँसना एक पल है रोना
कैसा है जीवन का खेला
एक पल है हँसना एक पल है रोना
कैसा है जीवन का खेला
एक पल है मिलना एक पल बिछड़ना
दुनिया है दो दिन का मेला

ये घडी ना जाए बीत
ये घडी ना जाए बीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

मेरा सूना पड़ा रे संगीत
मेरा सूना पड़ा रे संगीत
तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

आ लौट के आ जा मेरे मीत

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Jan 2, 2011

नया नया चाँद है-खुदा का बंदा १९५७

नया साल, नई उमंगें, नई उमंगें, नई मंजिलें और नये रेज़ोल्यूशन ।
नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ ही ये गीत प्रस्तुत है पुरानी फिल्म
खुदा का बंदा से। संगीत एस एन त्रिपाठी का है और इसे गा रहे हैं
गीता दत्त और मन्ना डे।

नए साल में आपको प्याज़ और टमाटर खूब खाने को मिलें इसी दुआ
के साथ.......



गीत के बोल:

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है

कितने भी रंग चाहे बदले ज़माना
हो ओ ओ ओ ओ ओ
कितने भी रंग चाहे बदले ज़माना
दिल में जो आई हो तो
दिल पे ना जाना
दिल पे ना जाना
जी दिल पे ना जाना

मिल के बिछड़ जाना
बड़ी बुरी बात है
मिल के बिछड़ जाना
बड़ी बुरी बात है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है

नज़रों में आज मेरी दुनिया हसीं है
हो ओ ओ ओ
नज़रों में आज मेरी दुनिया हसीं है
उल्फत की राह देखो
कितनी रंगीन है
कितनी रंगीन है
जी,कितनी रंगीन है

घर में हमारे आई
ख़ुशी की बारात है
घर में हमारे आई
ख़ुशी की बारात है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है

तुम जो मिले तो
मिला ख़ुशी का खज़ाना
हो ओ ओ ओ ओ ओ
तुम जो मिले तो मिला
ख़ुशी का खज़ाना
तुम जो हो पास मेरे
समा है सुहाना
समा है सुहाना
जी समा है सुहाना

प्यार फले फूले यही
दुआ दिन रात है
प्यार फले फूले यही
दुआ दिन रात है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया प्यार है जी
नया नया साथ है

नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नया नया चाँद है जी
नई नई रात है
नई नई रात है

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Nov 23, 2010

पनघट को चली पनिहारी -पनघट १९४३

संगीतकार एस. एन. त्रिपाठी की बतौर स्वतंत्र संगीतकार पहली
फिल्म थी चन्दन(१९४१)। सन ४३ में आई फिल्म पनघट ने उन्हें
प्रसिद्धि दिलाई और फिल्म संगीत क्षेत्र में पैर ज़माने का मौका दिया।
ये फिल्म विजय भट्ट द्वारा प्रोड्यूस की गई थी । ये वही विजय भट्ट
हैं जिन्होंने गूँज उठी शहनाई का निर्देशन किया है। विजय भट्ट ने
जितना भी योगदान दिया फिल्म जगत को, वो उच्च कोटि का एवं
प्रशंसनीय है। विजय भट्ट की तरह ही एस. एन. त्रिपाठी को धार्मिक,
पौराणिक एवं ऐतिहासिक विषयों में काफी दिलचस्पी रही।

एस एन त्रिपाठी पर चर्चा हम आगे करते रहेंगे, पढ़ते रहिये
ये ब्लॉग।



गीत के बोल:

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

कमर पर घड़ा धरे मतवारी
कमर पर घड़ा धरे मतवारी
मतवारी रे
कमर पर घड़ा धरे मतवारी
पनिहारी रे

पनिहारी लचक ना जाना
पनिहारी ओ पनिहारी
पनिहारी लचक ना जाना
घड़ा है तेरा भरी रे
पनिहारी रे
घड़ा है तेरा भरी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

जिस पनघट लहराए है
सवान बारह है मॉस
उस पनघट प्यासी कड़ी
पिया मिलन की आस
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
अभी तो कुंवारी रे
पनिहारी रे
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
अभी तो कुंवारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

मैं हूँ छोटी सी
मैं हूँ छोटी सी
छोटी गगरिया
मैं हूँ छोटी सी
मैं हूँ छोटी सी
छोटी गगरिया

खोजूं पीछू बाबुल की नगरिया
खोजूं पीछू बाबुल की नगरिया

मोहे पनघट मैं पनघट की प्यारी रे
मोहे पनघट मैं पनघट की प्यारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

धीरे खींचो बदन में हौले
धीरे खींचो
धीरे खींचो बदन में हौले
घबरावे है नाज़ुक जवानी
घबरावे है नाज़ुक जवानी

देख ढूंढें ननदिया किनारी
देख ढूंढें ननदिया किनारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे
......................................
Panghat ko chali panihari-Panghat 1943

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Nov 9, 2010

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े-जय चित्तौड़ १९६१

दुर्लभ गीतों की श्रेणी में अगला गीत पेश है फिल्म 'जय चित्तौड़' से ।
ये एक ऐसा गीत है जो केवल रेडियो पर सुना गया और आज आप
इसका विडियो देखेंगे जो कि एक बड़े संगीत रसिक द्वारा यू ट्यूब
पर डाला गया है।

श्री नाथ त्रिपाठी जिन्हें हम एस एन त्रिपाठी के नाम से जानते हैं
काफी सक्रिय रहे हिंदी फिल्मों में मगर अधिकतर पौराणिक या
ऐतिहासिक फिल्मों में। उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण भी किया
और अभिनय भी। गीत लिखा है भारत व्यास ने और इसे फिल्माया
गया है फिल्म दीवार की प्रसिद्ध "माँ" निरूपा रॉय पर।

'जय चित्तौड़' फिल्म का यह गीत महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक
को समर्पित है। इतिहासकार अगर इस मसले पर थोडा टॉर्च से
प्रकाश डाल सकें तो बड़ी कृपा होगी। वैसे एक बात तो समझ आती
है -जब आपको इतिहास की जानकारी होती है तब आप ऐसे
तथ्यपरक गीतों की रचना कर सकते हैं। इसका तीसरा अंतरा
सुन कर शायद आप भी मेरे विचार से सहमत होंगे।

जिन लोगों का ये ख्याल है कि घोड़े की टाप की आवाज़ केवल
ओ. पी. नय्यर के गीतों में ही बढ़िया है वो इसे सुन कर अपनी
गलत फ़हमी दूर कर लें।



गीत के बोल:

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े
ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े
तुझपे सवार है जो
मेरा सुहाग है वो
रखियो रे आज उनकी लाज हो

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े

तेरे कन्धों पे आज भार है मेवाड़ का
करना पड़ेगा तुझे सामना पहाड़ का
हल्दी घाटी नहीं है काम कोई खिलवाड़ का
देना जवाब वहां शेरों की दहाड़ का
घड़ियाँ तूफ़ान की हैं तेरे इम्तेहान की हैं
घड़ियाँ तूफ़ान की हैं तेरे इम्तेहान की हैं
रखियो रे आज उनकी लाज हो

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े
तुझपे सवार है जो
मेरा सुहाग है वो
रखियो रे आज उनकी लाज हो

छक्के छुड़ा देना तू दुश्मनों की आल के
उनकी छाती पे चड़ना पांव को उछाल के
लाना सुहाग मेरा वापस तू संभाल के
तेरे इतिहास में अक्षर होंगे गुलाल के
चेतक महान है तू बिजली का बाण है तू
चेतक महान है तू बिजली का बाण है तू
रखियो रे आज उनकी लाज हो

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े
तुझपे सवार है जो
मेरा सुहाग है वो
रखियो रे आज उनकी लाज हो

ओ पवन वेग से उडनेवाले घोड़े

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Mar 26, 2010

ज़रा सामने तो आओ छलिये-जनम जनम के फेरे १९५७

एक संगीत प्रेमी ने कहीं लिखा की बॉलीवुड की स्टंट और पौराणिक, धार्मिक
फ़िल्में सी ग्रेड की फिल्मों में गिनी जाती हैं। कुछ हद तक मैं सहमत हूँ।
व्यावसायिक दृष्टि वाले निर्माता निर्देशकों का ध्यान मसाला फिल्मों तक
सीमित रहा और बॉलीवुड के बड़े बड़े शोमैन जो कहे जाते हैं उन्होंने ऐतिहासिक
या धार्मिक फ़िल्में बनाने का रिस्क कभी नहीं लिया। विजय भट्ट उन सब में
अपवाद हैं एक जिन्होंने बैजू बावरा और गूँज उठी शेहनाई जैसी फ़िल्में बनायीं।

फिल्म जनम जनम के फेरे का निर्देशन मनमोहन देसाई ने किया था तो हम उनको
भी अपवाद मान सकते हैं क्यूंकि उन्होंने आगे चल के अमिताभ के साथ कई सुपरहिट
मसाला फ़िल्में बनायीं।

जनता मनोरंजन हेतु फ़िल्में देखा करती है और ईश्वर का ध्यान तभी करती
है जब जीवन में समस्याएं उभरने लगती हैं। ईश्वर की भक्ति में मनोरंजन का
आनंद प्राप्त करने की क्षमता केवल परम भक्तों और जोगियों में है , आम आदमी
के बस में नहीं।

स्टंट फ़िल्में अक्सर निचले तबके के लोग ज्यादा देखा करते हैं और वे ढिशुम ढिशुम
में अपने रोजमर्रा की निराशा को ख़त्म करने का प्रयास करते हैं। जैसे अधिकतर
ब्लॉगर बीवी की झिडकियां सुनने या बॉस की फटकार सुनने के बाद ब्लॉग लिखने
आ जाते हैं।

हम शायद टोपिक से भटक गए हैं। आइये वापस सी ग्रेड की चर्चा की जाए। तथाकथित
सी ग्रेड फिल्मों का संगीत कभी कभी लोकप्रिय हो जाया करता था। उसका एक अच्छा
उदाहरण फिल्म 'जनम जनम के फेरे' है जिसने सन १९५७ की बिनाका गीतमाला में
नामचीन फिल्मों के संगीत को पछाड़ा और अव्वल नंबर प्राप्त किया।

फिल्म का ये युगल गीत लता और रफ़ी की आवाज़ में है जिसे भारत व्यास ने लिखा है
और धुन बनाई है श्रीनाथ त्रिपाठी ने जिन्हें हम एस. एन. त्रिपाठी के नाम से पहचानते हैं।
फिल्म के दूसरे गीत ज़यादा सुनने को नहीं मिले।

गीत फिल्माया गया है निरूपा रॉय और मनहर देसाई पर।



गीत के बोल:

आत्मा की ये आवाज़ है

ज़रा सामने तो आओ छलिये
छुप छुप छलने में क्या राज़ है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है

ज़रा सामने तो आओ छलिये
छुप छुप छलने में क्या राज़ है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है

ज़रा सामने तो आओ छलिये

हम तुम्हें चाहें तुम नहीं चाहो
ऐसा कभी ना हो सकता
हम तुम्हें चाहें तुम नहीं चाहो
ऐसा कभी ना हो सकता
पिता अपने बालक से बिछड़ के
सुख से कभी नहीं सो सकता
हमें डरने की जग में क्या बात है
जब हाथ में तिहारे मेरी लाज है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है

ज़रा सामने तो आओ छलिये

प्रेम की है ये आग सजन जो
इधर उठे और उधार लगे
प्रेम की है ये आग सजन जो
इधर उठे और उधर लगे
प्यार का है ये करार पिया जो
इधर सजे और उधर सजे
तेरी प्रीत पे बड़ा हमें नाज़ है
मेरे सर का तू ही रे सरताज है
यूं छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है

ज़रा सामने तो आओ छलिये
छुप छुप छलने में क्या राज़ है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है

ज़रा सामने तो आओ छलिये

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