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Nov 14, 2010

कौन सी है चीज़ जो यहाँ-जैसे को तैसा १९७३

बाल दिवस के अवसर पर एक गीत पेश है ७० के दशक से।

फिल्म उद्योग ने पारंपरिक दिखने वाली माँ से लेकर
आधुनिक दिखने वाली माँ देखी है पिछले ७०-७५ सालों
में, जबसे हिंदी चलचित्र निर्माण प्रारंभ हुआ। माँ के पॉवर
को सभी बॉलीवुडियों ने माना और महसूस किया ।

एक गीत सुना जाए फिल्म जैसे को तैसा से, जो माँ की
महिमा का बखान कर रहा है। आनंद बक्षी इसके रचयिता
हैं और इसे गा रहे हैं किशोर और आशा। संगीत पंचम का है।
परदे पर जीतेंद्र और अनजान अभिनेत्री दिखाई देंगे आपको
साथ में माँ के रोल में हैं पुराने ज़माने की नामचीन अभिनेत्री
कामिनी कौशल।

इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी आगे, तब तक सुनते
और देखते रहिये मधुर गीत।



गीत के बोल:

हो, कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
माँ नहीं मिलती

याद किसी को हो तो
ऐसी बात सुनाएँ
जिसमे कहीं ना कहीं
माँ का नाम ना आये

दुनिया में कोई ऐसी दास्तां नहीं मिलती
हो, सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

जिनकी माँ होती है
खुशकिस्मत होते हैं
जिनकी माँ नहीं होती
जीवन भर रोते हैं
हो ओ ओ ओ ओ ,
जिनकी माँ होती है
खुशकिस्मत होते हैं
जिनकी माँ नहीं होती
जीवन भर रोते हैं

जिस्म उन्हें मिलते हैं लेकिन
जान नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

मंदिर पे भी ऐ मन
कुछ राही नहीं रुकते
ईश्वर के आगे भी
कितने सर नहीं झुकते

माँ को जो ना माने वो जुबां नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

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Nov 11, 2010

भैया रे भैया रे -जैसे को तैसा १९७३

'जैसे को तैसा' फिल्म का एक और गीत जो फिल्म में फिलर की तरह
इस्तेमाल किया गया है। 'फिलर' मतलब ऐसे गीत जो फिल्म में हों या
ना हों कोई फर्क नहीं पड़ेगा।



गीत के बोल:

भैया रे भैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

ओ दैया रे दैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

हे, भैया रे भैया रे
ओ दैया रे दैया रे

जो जैसा करता है, आ हा
वो वैसा भरता है , आ हा
के मरने वाला खुद भी मरता है
खुद भी मरता है, मरता है रे
जो जैसा, हाँ, करता है, हाँ
वो वैसा भरता है
के मरने वाला खुद भी मरता है, रे

कंस को मारे कन्हैया

भैया रे भैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

हे, भैया रे भैया रे
ऐ दैया रे दैया रे

कहते हैं दिलवाले
सुन ले सब धन वाले
ये दोस्तों को दुश्मन बना डाले
दुश्मन बना डाले
कहते हैं दिलवाले, आ हा
सुन ले सब धन वाले, आ हा
ये दोस्तों को दुश्मन बना डाले
आ हा आ

ऐसे में भेद रुपैया

दैया रे दैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

दैया रे दैया रे
भैया रे भैया रे

ऊपर से और है, आ हा
अन्दर से कुछ और है, आ हा
तू चोर है के ना जाने मोर है
मोर है
ऊपर से और है, हाँ
अन्दर से कुछ और है, हाँ
तू चोर है के ना जाने मोर है

तू है भंवर या खिवैया

भैया रे भैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

हे, भैया रे भैया रे
दैया रे दैया रे
हे, भैया रे भैया रे
दैया रे दैया रे
हे, भैया रे दैया रे
भैया रे दैया रे
भैया रे दैया रे

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Oct 26, 2010

जैसे को तैसा मिला-जैसे को तैसा १९७३

ये फिल्म का शीर्षक गीत है। हंटर से पिटाई करते वक़्त भी सधी
आवाज़ में गीत गाया जा सकता है। हिंदी फिल्म का नायक सब
कुछ कर सकता है। ये कुछ कुछ ज्योमेट्री की थेओरम की तरह है।
पीटने वाला कलाकार जीतेंद्र है और पिटने वाला कलाकार रमेश देव।
गीत किशोर ने गाया है और संगीत आर. डी. बर्मन ने दिया है। गीत
में जो फ़िल्मी मकान है उसकी सीढियां जानी पहचानी सी हैं और इसे
आप कई फिल्मों में देख चुके होंगे। गीत में हंटर की आवाज़ के लिए
जो प्रभाव इस्तेमाल किया गया है उसको सुन कर लगता है कि सर्प
की फुफकार और हंटर की आवाज़ में ज्यादा फर्क नहीं है। इस गीत
को 'रीयल एक्शन सोंग' कहा जा सकता है ।



गीत के बोल:


जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या


मुजरिम तेरा नाम है
तुझपे ये इलज़ाम है
सीधे साधे भले लोगों को
सताना तेरा काम है
मुजरिम तेरा नाम है
तुझपे ये इलज़ाम है
सीधे साधे भले लोगों को
सताना तेरा काम है

ये खता है तेरी ये सजा है तेरी
तू आगे आगे, तो मैं पीछे दौदूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

कुछ जानते वो नहीं
पहचानते वो नहीं
लातों के जो भूत होते हैं
बातों से तो वो मानते नहीं
कुछ जानते वो नहीं
पहचानते वो नहीं
लातों के जो भूत होते हैं
बातों से तो वो मानते नहीं

आ गयी वो घडी बोल कैसी पड़ी
आ ज़रा मैं तेरी बाहें मरोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

खाना है पीना है रे
हम सब को जीना है रे
हक छीनता है मगर दूसरों का
तू कितना कमीना है रे
ऐ बांगडू
खाना है पीना है रे
हम सब को जीना है रे
हक छीनता है मगर दूसरों का
तू कितना कमीना है रे

तेरे जैसे हैं जो यूँ ही मरते हैं वो
चाबुक से मारूं के आँखों को फोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

बोल, जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

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Oct 25, 2010

साजन कहाँ जाऊंगी मैं -जैसे को तैसा १९७३

भूतिया फ़िल्में मुझे आकर्षित करती रही हैं उसकी एक वजह उनका
संगीत होता है। ऐसी ही एक फिल्म है जिसमे भूतिया किरदार हालाँकि
छोटा सा है मगर एक मधुर गीत गाता है। फिल्म का निर्देशन मुरुगन
कुमारन साहब ने किया है और चेहरे मोहरे से वो अभिनेत्री दक्षिण की
ही नज़र आती है। हो सकता है वो मुरुगन की पसंदीदा अभिनेत्री हो जिसको
एक छोटा सा रोल इसमें दिया गया हो। गीत शुरू होते ही अपने अभिनेता का
चेहरा ऐसा भाव दिखाता है जैसे गीत गाने वाला भूत पलंग के नीचे से गाते
हुए निकल कर जंगल में घुस गया हो। अच्छा प्रभाव दर्शाया गया है। गीत
आनंद बक्षी ने लिखा है और इसे गाया है लता मंगेशकर ने। संगीत एक बार
फिर से आर. डी. बर्मन का है।




गीत के बोल:

साजन
सजना रे

साजन कहाँ जाऊंगी मैं
वापस यहाँ आऊँगी मैं
साजन कहाँ जाऊंगी मैं
वापस यहाँ आऊँगी मैं

मुरझा के फूल खिलते भी हैं
बिछड़े हुए मिलते भी हैं
हो, तुम रखना याद पतझड़ के बाद
बनके बहार ओ मेरे मीत
फिर तेरे गीत गाऊंगी मैं

साजन कहाँ जाऊंगी मैं
वापस यहाँ आऊँगी मैं

मुझसे तो प्यार करते हो तुम
फिर किसलिए डरते हो तुम
हो, मैं हूँ मजबूर तुमसे हूँ दूर
आ जाऊं पास मिट जाए प्यास
प्यासी कहाँ जाऊंगी मैं ?

साजन कहाँ जाऊंगी मैं
वापस यहाँ आऊँगी मैं

साजन कहाँ
साजन कहाँ
साजन कहाँ

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Jan 3, 2010

अब के सावन में जी डरे-जैसे को तैसा १९७३

बरसात वाले गीतों की कड़ी में अब अगला गीत पेश है फिल्म
जैसे को तैसा से, जिसे फिल्माया गया है जीतेंद्र और रीना रॉय
पर। फिल्म 'जैसे को तैसा' मैंने बड़े परदे पर देखी है और इस
गीत को देखने का असल आनंद वहीँ आता है, क्यूँ कि दृश्यावली
थोड़ी गहरे रंगों वाली है।

लता और किशोर के गाये युगल गीत युवा पीढ़ी को बहुत
पसंद आते रहे और हाल ही में २००० के बाद की एक फिल्म
में इस गीत का आधुनिक संस्करण शामिल किया गया नए
गायकों की आवाज़ में। फिल्म का नाम है-दिल विल प्यार व्यार।

पुराना सदाबहार संस्करण गाया है लता और किशोर ने। नए
संस्करण में आवाजें हैं बाबुल सुप्रियो और साधना सरगम की ।



गीत के बोल:

अब के सावन में जी डरे
रिम झिम तन पे पानी गिरे
अब के सावन में जी डरे
रिम झिम तन पे पानी गिरे
मन में लगे आग सी, हो ओ ओ

अब के सावन में जी डरे
रिम झिम तन पे पानी गिरे
मनन में लगे आग सी
हो

ऐसा मौसम पहले कभी भी आया नहीं
ऐसा बादल अम्बर पे सजना छाया नहीं, हो हो
ऐसा मौसम पहले कभी भी आया नहीं
ऐसा बादल अम्बर पे सजना छाया नहीं


हो, यह सुहाना समां प्रेम की खोज में, मौज में
हो हो, पागल प्रेमी बनके फिरे
रिम झिम तन पे पानी गिरे
मन में लगे आग सी

हो हो हो, अब के सावन में जी डरे
रिम झिम तन पे पानी गिरे
मन में लगे आग सी


आ तुझको आँखों में छुपा लूं इस रात में
कजरा गजरा बह जाएगा री बरसात में
हो हो , तुझको आँखों में छुपा लूं इस रात में
कजरा गजरा बह जाएगा री बरसात में

हो, होश से काम लो, राम का नाम लो, थाम लो
हो हो, जाने बैरन रुत क्या करे
रिम झिम तन पे पानी गिरे
मन में लगे आग सी, हो ओ ओ


अब के सावन में जी डरे
रिम झिम तन पे पानी गिरे
मन में लगे आग सी
मन में लगे आग सी
मन में लगे आग सी
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Ab ke sawan mein jee dare-Jaise ko taisa 1973

Artists-Jeetendra, Reena Roy

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