Showing posts with label Kaalia. Show all posts
Showing posts with label Kaalia. Show all posts

Jul 23, 2017

दिल तो देते नहीं-कालिया १९८१

आशा भोंसले का गाया हुआ एक उम्दा गीत सुनते हैं फिल्म
कालिया से. कालिया फिल्म से किशोर कुमार का गाया हुआ
गाना ज्यादा फेमस है मगर इस फिल्म के ३-४ गाने सुनने
लायक हैं.

मजरूह सुल्तानपुरी का गीत है और आर डी बर्मन का संगीत.
फिल्म के विलन को हम पहचान पा रहे हैं-अमजद खान और
जो अभिनेत्री नाच रही है उसे पहचानने में पाठक मदद करें.



गीत के बोल:

दिल तो देते नहीं
दिल तो देते नहीं कहते हो सवाल अच्छा है
दिल तो देते नहीं कहते हो सवाल अच्छा है
वो अलग बाँध के रखा है जो माल अच्छा है
दिल तो देते नहीं कहते हो सवाल अच्छा है
वो अलग बाँध के रखा है जो माल अच्छा है
दिल तो देते नहीं

जब दिल माँगा कह देते हो ये क्या नादानी है
भोलेपन के दिन हैं अभी उठती जवानी है
जब दिल माँगा कह देते हो ये क्या नादानी है
भोलेपन के दिन हैं अभी उठती जवानी है
कहीं खो जायेगा खो जायेगा
कहीं खो जायेगा चीज़ ये अनमोल है
चीज़ ये अनमोल है आपका ख्याल अच्छा है
वो अलग बाँध के रखा है जो माल अच्छा है
दिल तो देते नहीं

दिल में लाखों कसमें खा कर जब जब हम आते हैं
हो झूठा वादा करते हो हम मान जाते हैं
हो ओ ओ दिल में लाखों कसमें खा कर जब जब हम आते हैं
झूठा वादा करते हो हम मान जाते हैं
जब चाहा सनम चाहा सनम
जब चाहा सनम हमको बहला दिया
हमको बहला दिया यार ये कमाल अच्छा है
वो अलग बाँध के रखा है जो माल अच्छा है
दिल तो देते नहीं कहते हो सवाल अच्छा है
वो अलग बाँध के रखा है जो माल अच्छा है
दिल तो देते नहीं
……………………………………………………..
Dil to dete nahin-Kaalia 1981

Artists: Hina Kausar, Amjad Khan

Read more...

Apr 14, 2017

जबसे तुमको देखा देखा ही करते हैं-कालिया १९८१

जबसे तुमको देखा देखा ही करते हैं-कालिया १९८१

एक युगल गीत फिल्म कालिया से किशोर और आशा का गाया
हुआ. इसमें बीच में एक बच्चा बतलाता है कि नायक नायिका की
गाने और नाचने वाली कसरत को क्या कहा जाता है.

गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी के हैं और संगीत पंचम का.
अमिताभ बच्चन और परवीन बाबी पर इसे फिल्माया गया है. ये
जबरिया विवरण हम इसलिए देते हैं ताकि हर कोई पहचान जाए
कलाकारों के बारे में. ये विवरण उन ज्ञानी लोगों के लिए नहीं है
जो कलाकारों के छींकने और खासने का भी हिसाब रखते हैं.





गीत के बोल:

जबसे तुमको देखा देखा ही करते हैं
जबसे तुमको देखा देखा ही करते हैं
तुम ही कुछ बतलाओ इसको क्या कहते हैं.
एल ओ वी ई आं एल ओ वी ई
जबसे तुमको देखा जीते हैं मरते हैं
जबसे तुमको देखा जीते हैं मरते हैं
तुम ही कुछ बतलाओ इसको क्या कहते हैं.
एल ओ वी ई आं एल ओ वी ई

दुनिया लगने लगी कोई सपनों की वादी
मौसम पहले ना था कभी इतना गुलाबी
दुनिया लगने लगी कोई सपनों की वादी
सपनों की वादी
मौसम पहले ना था कभी इतना गुलाबी
इतना गुलाबी
आज मुझपे न जाने कैसी है ये बेखुदी
एल ओ वी ई एल ओ वी ई

जबसे तुमको देखा देखा ही करते हैं
तुम ही कुछ बतलाओ इसको क्या कहते हैं.
एल ओ वी ई एल ओ वी ई
एल ओ वी ई

जानम जाते हो उधर कहाँ छोडो ये नज़ारे
आओ अपना नज़ारा देखो दिल में हमारे
जानम जाते हो उधर कहाँ छोडो ये नज़ारे
आओ अपना नज़ारा देखो दिल में हमारे
दिल में हमारे
तुम हो यहाँ भी वहाँ भी ये कैसी जादूगरी
एल ओ वी ई एल ओ वी ई

जबसे तुमको देखा देखा ही करते हैं
तुम ही कुछ बतलाओ इसको क्या कहते हैं.
एल ओ वी ई एल ओ वी ई
एल ओ वी ई
.......................................................................
Jabse tumko dekha dekha hi-Kaalia 1981

Artists: Amitabh Bachchan, Parveen Babi

Read more...

Jun 27, 2011

कौन किसी को बांध सका-कालिया १९८१

कुछ चीज़ों का कुदरती साथ होता है, कुछ का होता अदरकी साथ और
कुछ का हम जबरन बना दिया करते हैं। चोली दामन का साथ एक
जग-जाहिर उदाहरण है। बम्बई के वड़ापाव की ही बात ली जाये। बिना
वडे का पाव या बिना पाव का वडा बम्बई, जिसे हम अब मुंबई कहते हैं,
के निवासियों को थोड़ा अटपटा सा लगता है। ये तो क्षेत्र विशेष का
उदाहरण हो गया।

एक उदाहरण और-कुछ लोगों का मानना है कि मौसंबी के जूस में
ग्लूकोज़ का होना ज़रूरी है। एक ज़माना था जब लगभग हर बीमार
को मौसंबी के रस में ग्लूकोज़ मिला के दिया जाता। अब जो जनता
शौकिया तौर पर बाज़ार में जा कर जूस पीती उसे ग्लूकोज़ नहीं
मिलता तो पूछती-इसमें गुल्लू-कोज़ नहीं मिलाया ?

फिल्मों में भी ऐसे आवश्यक तत्त्व होते हैं। आज आपको अमिताभ की
फिल्म का एक गीत सुनवाते हैं इसमें जो कलाकार परदे पर गीत गा रहा
है उसका नाम है-राम सेठी। ये जनाब आपको ८० के दशक की लगभग
हर उस फिल्म में जिसमें अमिताभ ने काम किया है, मिल जायेंगे।

एक समय था जब अमिताभ की फिल्मों में महमूद होते, कभी उनकी
फिल्मों में मुकरी होते। आज आप महसूस करेंगे उनके साथ दो शख्सों
की उपस्थिति-परेश रावल और शरद सक्सेना। समय समय पर ऐसे
आवश्यक तत्वों में बदलाव होता रहा। अमिताभ के पूरे फ़िल्मी
कैरियर को अगर ४ खण्डों में बांटा जाये तो हर दौर की कुछ अलग
विशेषताएं आपको मिलेंगी। इसपर विस्तृत चर्चा फिर कभी।

गीत सुना जाये जिसे लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और धुन बनाई
राहुल देव बर्मन ने। गायक कलाकार हैं मोहम्मद रफ़ी।



गीत के बोल:

कौन किसी को बांध सका
हाँ, कौन किसी को बाँध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

अंगड़ाई ले कर के जागी है नौजवानी
अंगड़ाई ले कर के जागी है नौजवानी
सपने नये हैं और ज़ंजीर है पुरानी
पहरेदार फ़ांके से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
रात अंधेरी, रुत बरखा और
ग़ाफ़िल सारा ज़माना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

हो ओ ओ ओ हो ओ हो ओ
खिड़की से रुकता है झोंका कहीं हवा का ?
हिल जायें दीवारें ऐसा करो धमाका
खिड़की से रुकता है झोंका कहीं हवा का ?
हिल जायें दीवारें ऐसा करो धमाका
बोले ढोल ताशे से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
देख के भी न, कोई देखे
ऐसा कुछ रंग जमाना है

तोड़ के पिंजरा, एक न एक दिन, पंछी को उड़ जाना है
कौन किसी को बाँध सका, सय्याद तो इक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा, एक न एक दिन, पंछी को उड़ जाना है

कह दो शिकारी से फंदा लगा के देखे
कह दो शिकारी से फंदा लगा के देखे
अब जिसमें हिम्मत हो रस्ते में आ के देखे
निकला शेर हाँके से
बरसो राम धड़ाके से
होशियार भई सब होशियार
जाने वाले को जाना है और
सीना तान के जाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है

कौन किसी को बांध सका
सय्याद तो एक दीवाना है
तोड़ के पिंजरा एक न एक दिन
पंछी को उड़ जाना है
..............................................................
Kaun kisi ko bandh saka-Kaalia 1981

Artists: Ram Sethi, Amitab Bachchan, Pran

Read more...

Jun 6, 2011

जहाँ तेरी ये नज़र है-कालिया १९८१

फिल्म कालिया सन १९८१ की फिल्म है। उस दौर में अमिताभ को किशोर
कुमार के गीत बहुत मिले परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये जोड़ी जनता को
पसंद थी तो अधिकतर निर्देशक किशोर कुमार से ही अमिताभ वाले गाने
गवाते।

फिल्म कालिया का ये गीत सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत है। एक पार्टी में
ये गीत गाया जा रहा है और किसी जमेस बोंड की फिल्म माफिक सुरंग
आपको इस गीत में दिखाई देगी। फिल्म के निर्देशक टीनू आनंद हैं। फिल्म
व्यावसायिक दृष्टि से बहुत सफल नहीं हुयी। गीत मजरूह सुल्तानपुरी की
कलम से निकला है तो संगीत राहुल देव बर्मन की सांगीतिक घुड्शाला से।

अब तो आप समझ ही गये होंगे कि नज़र किधर है-उन मोहतरमा के हार
पर जिनका हाथ पकड़ कर खलनायक अमजद खान नृत्य शुरू करते हैं।



गीत के बोल:

हे हे
धीम फटा फट धिन्गरी पका
पका का का का का का का
धीम फटा फट धिन्गरी पका
पका का का का का का का

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
बच ना सका कोई आये कितने
लम्बे हैं मेरे हाथ इतने
देख इधर यार ध्यान किधर है
अरे देख इधर यार ध्यान किधर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

क्यूँ नहीं जानी तू ये समझता
काम नहीं ये है तेरे बस का
कुक डू कू कू

क्यूँ नहीं जानी तू ये समझता
काम नहीं ये है तेरे बस का
होश में आ जा ध्यान किधर है
अरे, होश में आ जा ध्यान किधर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

मेरी तरफ जो उठा है तन के
कट के वही हाथ गिरा बदन से
अरे मेरी तरफ जो उठा है तन के
कट के वही हाथ गिरा बदन से
सामने आये किस का जिगर है
हाँ, सामने आये किस का जिगर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

चाल ये बंदा ऐसी भी चल जाये
बंद हो मुट्ठी अरे चीज़ निकल जाये
गिली गिली गिली गिली

अरे चाल ये बंदा ऐसी भी चल जाये
बंद हो मुट्ठी अरे चीज़ निकल जाये
ये भी करिश्मा देख इधर है
हाँ, ये भी करिश्मा देख इधर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
बच ना सका कोई आये कितने
लम्बे हैं मेरे हाथ इतने
देख इधर यार ध्यान किधर है
अरे देख इधर यार ध्यान किधर है
............................................
Jahan teri ye nazar hai-Kaalia 1981

Read more...

Feb 8, 2010

सनम तुम जहाँ -कालिया १९८१

कुछ गीत आपको सोने में मदद करते हैं। इस गीत की धुन भी ऐसी
ही है। इसको आप चाहे देखते हुए सुनें या फिर केवल सुनें तो भी ये
आपकी सोने में मदद करेगा। फिल्म कालिया में ये गीत परदे पर
गा रही हैं परवीन बोबी । आशा भोंसले के स्वर तैर रहे हैं पंचम अर्थात
राहुल देव बर्मन की धुन पर। गाने के अंत में नायक भी सो जाता है।
ऐसी बढ़िया लोरी सुनाई दे और नींद ना आये......



गीत के बोल:

हे हे हे हे , हे हे हे हे
हे हे हे हे , हे हे हे हे
हे, जानी जाना,
हा जानी जाना
हे जानी जाना
सनम तुम जहाँ
मेरा दिल वहां
सनम तुम जहाँ
मेरा दिल वहां
बनते हो अनजान
काहे दिलवर जान
बनते हो अनजान
काहे दिलवर जान

कुछ तो है तुम्हारे पास
आई जो लगा के आस, अर रा
मेरी जान

हे हे हे हे , हे हे हे हे

सनम तुम जहाँ
मेरा दिल वहां
बनते हो अनजान
काहे दिलवर जान
बनते हो अनजान
काहे दिलवर जान

कुछ तो है तुम्हारे पास
आई जो लगा के आस, अरे हाँ
मेरी जान

हे हे हे हे , हाँ हाँ हाँ हाँ
सनम तुम जहाँ
मेरा दिल वहां

यार भी यहीं है
प्यार भी यहीं है
यार भी यहीं है
प्यार भी यहीं है
आ गया मज़ा,
छ गया नशा
रंग लायी बेक़रारी
अब ये रात है हमारी, अरे हाँ
मेरी जान
हे हे हे हे , हे हे हे हे
सनम तुम जहाँ
मेरा दिल वहां
हे, जानी जाना
हे, ना ना ना ना

अब कहीं ना जाना
छोड़ दो बहाना
अब कहीं ना जाना
छोड़ दो बहाना
ढल ना जाए रात
रह ना जाए बात
है गज़ब कि शाम आज
बढ़ के ले लो जाम आज, अरे हाँ
मेरी जान

हे हे हे हे , हे हे हे हे
सनम तुम जहाँ
मेरा दिल वहां
हे, जानी जाना
हे, जानी जाना

देख क्या रहे हो
मुस्कुरा रहे हो
देख क्या रहे हो
मुस्कुरा रहे हो
दिल कि ये लगी
दिल्लगी नहीं
तुम जो चाहो समझो यार
हमने तो किया है प्यार, अरे हाँ
मेरी जान

हे हे हे हे , हे हे हे हे
सनम तुम जहाँ
मेरा दिल वहां
बनते हो अनजान
काहे दिलवर जान
बनते हो अनजान
काहे दिलवर जान
कुछ तो है तुम्हारे पास
आई जो लगा के आस, अर रा
मेरी जान

हे हे हे हे , हे हे हे हे
हे हे हे हे , हे हे हे हे
हे
............................
Sanma tum jahan-Kaalia 1981

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP