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Nov 25, 2018

जिधर देखूं तेरी तस्वीर नज़र(अमिताभ)-महान १९८३

सोचिये कि जो गीत परदे पर नायकों के ऊपर फिल्माए
गये होते हैं वो अगर सारे नायक खुद गाने लगें तो क्या
होगा. वो जो जनता कूद कूद के उनके वीडियो देखती है
यूट्यूब पर उसमें कमी आयेगी और सर्वर का लोड भी कम
होगा.

फिल्म महान में एक गाना है जिसे किशोर से गवाया गया.
महानायक की इच्छा हुई इसे गाने की. उनकी आवाज़ में
भी इसे रिकॉर्ड कर लिया गया. फिल्म के एल पी पर ये
मौजूद है. अब हर गाना रंग बरसे तो नहीं हो जाता ना.

ये कितना सुना जाता है ये तो आप ही डिसाइड करिये.
हम तो आपको बस इसे सुनवा देते हैं.

हिंदी फिल्म जगत ने सहगल और सुरैया के बाद बड़े कद
के सिंगिंग स्टार नहीं देखे. दोनों विधाओं पर हर व्यक्ति
कमांड कर ले ये नियति को भी तो मंज़ूर नहीं होता जो
व्यक्ति समझ नहीं पाता. सुलक्षणा पंडित बेहद प्रतिभाशाली
थीं मगर भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया.



गीत के बोल:

जिधर देखूं तेरी तस्वीर
जिधर देखूं तेरी तस्वीर नज़र आती है
तेरी सूरत मेरी तकदीर नज़र आती है

जिंदा हूँ मैं तेरे लिये जीवन तेरा है
मेरा है जो सब है तेरा अब क्या मेरा है
मेरी खुशियों की तू जागीर नज़र आती है

जिधर देखूं तेरी तस्वीर नज़र आती है

बिना देखे बिना जाने तन मन बांधे जो
बंधन जो जनम जनम मर के जुदा न हो
तेरी चाहत वही ज़ंजीर नज़र आती है

जिधर देखूं तेरी तस्वीर नज़र आती है
तेरी सूरत मेरी तकदीर नज़र आती है
………………………………………………
Jidhar dekhoon teri tasveer(Amitabh)-Mahaan 1983

Artists: None

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Aug 24, 2016

तू मइके मत जइयो-पुकार १९८३

गायक-अभिनेता वाला युग ३० के दशक और ४० के दशक
के पूर्वार्ध तक पूरे शबाब पर था. अधिकांश नायक नायिका
अपने गाने गा लिया करते थे. उस दौर के बाद कुछ ही
ऐसे बचे जैसे सुरैया, किशोर कुमार जिनको आप आल-राउंडर
कह सकते हैं. उनके अलावा शौकिया गाने वाले कलाकार
बचे.

अमिताभ बच्चन ने फिल्मों में गाना मिस्टर नटवरलाल से
शुरू किया. अगर गीतों में शामिल डायलोग की बात करें तो
ये सिलसिला पुराना है.

आज आपको फिल्म पुकार से गुलशन बावरा का लिखा गीत
सुनवा रहे हैं जिसका संगीत पंचम ने तैयार किया है. इसे
परदे पर जीनत अमान और अमिताभ बच्चन पर फिल्माया
गया है. साल के बारह महीने क्या क्या होता है इस गीत में
बतला दिया गया है



गीत के बोल:

तू मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
तू मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
तू मइके मत जइयो

तू मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
तू मइके मत जइयो

जनवरी फ़रवरी
जनवरी फ़रवरी के दो महीने लगती है मुझको सर्दी
जनवरी फ़रवरी के दो महीने लगती है मुझको सर्दी
तू क्या जाने तू क्या जाने
तू क्या जाने सर्दी ने जो
आ हा आ हा आ हा आ हा हालत पतली कर दी
तू मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
मइके मत जइयो

मार्च, अप्रैल में बहार कुछ ऐसे झूम के आये
कैसे?
मार्च, अप्रैल में बहार कुछ ऐसे झूम के आये
देख के तेरा देख के तेरा
देख के तेरा गदरा बदन हाय दिल मेरा ललचाये

मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
मइके मत जइयो

मई और जून का आता है जब रंगों भरा महीना
मई और जून का आता है जब रंगों भरा महीना
देख तेरा
देख तेरा मलमल का कुरता  आ हा आहा ऐ हे ओ हो
अरे छूटे मेरा पसीना
मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
तू मइके मत जइयो

जुलाई अगस्त में सावन ऐसे रिमझिम रिमझिम बरसे
रिमझिम रिमझिम रिमझिम रिमझिम रिमझिम रिमझिम
रिमझिम रिमझिम रिमझिम रिमझिम रिमझिम रिमझिम
जुलाई अगस्त में सावन ऐसे रिमझिम रिमझिम बरसे

बन्द कमरे में बन्द कमरे में
अरे बन्द कमरे में बैठेंगे हम निकलेंगे न घर से

मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
तू मइके मत जइयो

सेप्टेम्बर अक्तूबर का मौसम होता है प्यारा
आ सुनो मेरे लम्बू रे सुनो मेरे मितवा
सुनो मेरा साथी रे
सेप्टेम्बर अक्तूबर का मौसम होता है प्यारा
ऐसे में मैं ऐसे में मैं
ऐसे में मैं रहूँ अकेला ये नहीं मुझे गंवारा
मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
तू मइके मत जइयो

हाय नवम्बर और दिसम्बर का तू पूछ न हाल
हाय नवम्बर और दिसम्बर का तू पूछ न हाल
सच तो ये है
अरे पगली सच तो ये है
हाँ सच तो ये है पगली हम न बिछड़ें पूरा साल

मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
मइके मत जइयो
मत जइयो मेरी जान
तू मइके मत जइयो आ हा आ हा
मत जइयो मेरी जान
तू मइके मत जइयो
…………………………………………………………..
Too maike mat jaiyo-Pukar 1983

Artists: Amitabh Bachchan, Zeenat Aman

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Mar 14, 2016

समुन्दर में नहा के-पुकार १९८३

मुझसे दो तीन संगीत प्रेमियों ने पूछा-आप छोटी पोस्ट
क्यूँ लिखा करते हैं. सबसे पहले तो मैंने प्रति-प्रश्न किया
आप पाठक हैं या लेखक. उन तीनों में से एक लेखक था.
उस लेखक ने २ हिंदी फिल्मों पर किताबें लिखीं थीं और
तीसरी कतार में थी.

आइये जीनत अमान का एक गीत सुनें. जीनत अमान को
फ़िल्मी नायिका की छबि बदलने का श्रेय जाता है. छबि के
अलावा उन्होंने फैशन में भी बदलाव करा दिया. पारंपरिक
साडी पहने घरेलू सी दिखने वाली हिंदी फ़िल्मी नायिका को
उन्होंने नयी छबि दिखला दी.

अभिनेत्री रेखा द्वारा लिखी हुई जीनत अमान की संक्षिप्त जीवनी
मे एक सटीक टिप्पणी की हुई है जीनत अमान के बारे में
-"जीनत अमान ने सिनेमा में नारी के चित्रण में आमूल-चूल
परिवर्तन करा दिए ". ये बात काफ़ी हद तक सही है। इसके
अलावा भी कुछ है जिसका जिक्र हमें अवश्य करना चाहिए।
वो है फैशन में बदलाव. ५० के दशक की बड़ी बड़ी आँखों
वाली सुंदरी नलिनी जयवंत को हिंदी सिनेमा की पहली फैशन
क्वीन कहा जाता है तो जीनत हैं दूसरी फैशन क्वीन. इस बात
पर कुछ लोग असहमत हो सकते हैं और शर्मीला टैगोर का
नाम ले सकते हैं. नलिनी की तरह ही जीनत अमान भी अपनी
स्क्रीन प्रेसेंस के लिए जानी जाती थीं. ये बात अलग है नलिनी
का भीने जीनत से बेहतर हुआ करता था.

उसके अलावा बॉलीवुड में बदलाव लाने वाली अभिनेत्रियाँ बहुत
कम हैं। यूँ कहें अभिनेत्रियों को मौका कम मिला और नायिका
प्रधान फ़िल्में कम बनीं-मदर इण्डिया जैसी.  नई पीड़ी से
प्रिटी जिंटा एक नाम है जिसने बॉलीवुड में अलग ही अपनी
पहचान बनाई. आई पी एल में भी उन्होंने प्रसिद्धि पायी जितनी
कि जुही चावला या शिल्प शेट्टी को नहीं मिली. 

अगर आपको पोस्ट पसंद आई है तो अपनी टिप्पणी अवश्य
छोड़ें.

गीत है फिल्म पुकार से जिसमें वे अमिताभ बच्चन की नायिका
हैं. प्रस्तुत गीत में नायिका के सौंदर्य का वर्णन है. गीत गुलशन
बावरा ने लिखा है और इसकी तर्ज़ बनाई है राहुल देव बर्मन ने
जिन्होंने इसे गाया भी है. गीत काफी चर्चित हुआ था अपने समय
में. फिल्म के निर्देशक रमेश बहल हैं.



गीत के बोल:

ऐ जूली, जूली
समुन्दर में नहा के और भी नमकीन हो गयी हो
समुन्दर में नहा के और भी नमकीन हो गयी हो
लगा है प्यार का वो रंग
अरे लगा है प्यार का वो रंग
के रंगीन हो गयी हो हो हो हो हो
समुन्दर में नहा के और भी नमकीन हो गयी हो

देखा तुझको तो दिल में आया देखता ही रहूँ
भीगे भीगे बदन को तेरे खिलता कमल कहूँ
देखा तुझको तो दिल में आया देखता ही रहूँ
भीगे भीगे बदन को तेरे खिलता कमल कहूँ
मेरी नज़र की तुम भी
अरे मेरी नज़र की तुम भी
शौक़ीन हो गयी हो हो हो हो हो
समुन्दर में नहा के और भी नमकीन हो गयी हो

हँसती हो तो दिल की धडकन हो जाए और जवान
चलती हो लहर के तो दिल में उठे तूफ़ान
हँसती हो तो दिल की धडकन हो जाए और जवान
चलती हो लहर के तो दिल में उठे तूफ़ान
पहले थी बेहतर अब तो
अरे पहले थी बेहतर अब तो
बेहतरीन हो गयी हो हो हो हो हो
समुन्दर में नहा के और भी नमकीन हो गयी हो
लगा है प्यार का वो रंग
अरे लगा है प्यार का वो रंग
के रंगीन हो गयी हो हो हो हो हो
समुन्दर में नहा के और भी नमकीन हो गयी हो
……………………………………………………..
Samundar mein naha ke-Pukar 1983

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Feb 8, 2016

ये कहाँ आ गए हम-सिलसिला १९८१

हिंदी फिल्म संगीत के सबसे आश्चर्यचकित करने वाले गीतों में
से एक आज प्रस्तुत है. टेक्निकली देखा जाए तो ये एक युगल
गीत है. लता मंगेशकर की आवाज़ के साथ इस गीत में संवाद
हैं अमिताभ बच्चन के, इस गीत की ख़ूबसूरती को बढाने के
लिए. लता की आवाज़ से तो चार चाँद लगा ही गए थे गीत में,
दो चाँद अमिताभ ने भी लगा दिए तो ये हो गया छः चाँद वाला
गीत.

शिव हरि ने निस्संदेह एक उत्तम दर्जे की धुन तैयार की है लता
के लिए. सन १९७५ के बाद जो कुछ प्रभावी गीत लता के आये
उनमें से आप सिलसिला के दो गीत –प्रस्तुत, नीला आसमान सो
गया और जो तुम तोडो पिया को गिन सकते हैं. खैय्याम के
अलावा राम लक्ष्मण और शिव हरि ऐसे संगीतकार हैं जिन्होंने
लता के ऐसे गीत बनाये जो कानों को सुखद लगे और ८० के
दशक में हिट भी रहे.

गीत की विशेषता इसका वाद्य यन्त्र संयोजन है. कहीं कहीं लाउड
होने के बावजूद वो सुनने वाले के कानों पर गुदगुदी करता ही
महसूस होता है. आज के संगीतकार इस गीत से सबक ले सकते
हैं-तेज आवाजों का उपयुक्त प्रयोग कैसे करें. वैसे ये काम रहमान
कुछ हद तक बखूबी कर रहे हैं. उनके संगीत में दूसरों की तुलना
में शोर कम सुनाई देता है.हम २०१० तक के संगीत की बात कर
रहे हैं इधर.

गीत लगभग खैय्याम की धुन ‘ए-दिल-ए-नादान’ की श्रेणी का है
और आप इसे आसानी से टाइमलेस सोंग कह सकते हैं. इसे आप
किसी भी समय कभी भी सुनेंगे ये आनंद ही देगा. पिछले ३५ साल
से इसे हम निरंतर सुनते चले आ रहे हैं और इसके प्रभाव में ज़रा
भी फर्क नहीं आया.

गीत का फिल्मांकन काफी बुद्धिमता से किया गया है. संगीत के सुर
के मुताबिक़ दृश्यावली साथ साथ चलती है बिना कंटिन्यूटि को डिस्टर्ब
किये. गाने में नायक नायिका की ओर्गेनिक, इनोर्गैनिक जितनी भी
तरह की केमिस्ट्री है सब अपने शत-प्रतिशत पर है और इसे आप हिंदी
सिनेमा इतिहास के सबसे प्रभावशाली और सहज लगने वाले प्रणय
दृश्यों में से एक मान लें. वैसे कभी कभी मुझे लगता है जैसे ये
गीत फिल्म कभी कभी के गीतों का एक्सटेंशन हो. इस गीत को
लगभग ४-५ अलग अलग लोकेशंस में फिल्माया गया है जैसा कि
इसे देखने के बाद मैंने महसूस किये. दावे से कोई फिल्म यूनिट
का सदस्य ही बतला सकता है इसके बारे में.

गीत एक एक गीत ‘देखा एक ख्वाब’ का  फिल्मांकन हौलैंड के
प्रसिद्ध क्यूकेनहौफ़ ट्यूलिप गार्डन में किया गया था. यश चोपड़ा
वैसे भी हरे भरे लोकेशंस में फिल्म का फिल्मांकन करने के लिए
प्रसिद्ध थे.




गीत के बोल:

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं
तुम होती तो कैसा होता तुम होती तो वैसा होता तुम वो कहतीं
तुम इस बात पे हैरान होतीं तुम उस बाते पे कितनी हँसती
तुम होती तो ऐसा होता तुम होती तो वैसा होता
मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं

रु रु रु रु रु ..............

ये कहाँ आ गए हम यूँ ही साथ चलते चलते
तेरी बाहों में है जानम मेरे जिस्म-ओ-जान पिघलते
तेरी बाहों में है जानम मेरे जिस्म-ओ-जान पिघलते

ये रात है या तुम्हारी जुल्फें खुली हुई हैं
ये चांदनी है या तुम्हारी नज़रों से मेरी रातें धुली हुई हैं
ये चाँद है या तुम्हारा कंगन सितारे हैं या तुम्हारा आँचल
हवा का झोंका है या तुम्हारे बदन की खुशबू
ये पत्तियों की है सरसराहट के तुमने चुपके से कुछ कहा
ये सोचता हूँ मैं कब से गुमसुम
कि जब कि मुझको भी ये खबर है
कि तुम नहीं हो कहीं नहीं हो
मगर ये दिल कह रहा है तुम यहीं हो यहीं कहीं हो

तू बदन है मैं हूँ साया तू न हो तो मैं कहाँ हूँ
मुझे प्यार करने वाले तू जहाँ है मैं वहाँ हूँ
हमें मिलना ही था हमदम इसी राह पे निकलते

ये कहाँ आ गए हम यूँ ही साथ चलते चलते

मेरी सांस सांस महके कोई भीना भीना चन्दन
तेरा प्यार चांदनी है मेरा दिल है जैसे आँगन
हुई और भी मुलायम मेरी शाम ढलते ढलते
हुई और भी मुलायम मेरी शाम ढलते ढलते

ये कहाँ आ गए हम यूँ ही साथ चलते चलते

मजबूर ये हालात इधर भी हैं उधर भी
ताभायी की ये रात इधर भी है उधर भी
कहने को बहुत कुछ है मगर किस से कहें हम
कब तक यूंही खामोश रहें और सहें हम
दिल कहता है दुनिया के हर इक रस्म उठा दें
दीवार जो हम दोनों में है आज गिरा दें
क्यूँ दिल में सुलगते रहें लोगों को बता दें
हाँ हमको मोहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत है
अब दिल में यही बात इधर भी है उधर भी

ये कहाँ आ गए हम यूँ ही साथ चलते चलते
ये कहाँ आ गए हम
ये कहाँ आ गए हम
...................................................................
Ye kahan aa gaye ham-Silsila 1981

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Jan 9, 2016

चुपके चुपके चल री पुरवैया-चुपके चुपके १९७५

सचिन देव बर्मन समय के साथ साथ भले ही वृद्ध होते चले
मगर उनका संगीत जवान ही रहा और समय के साथ साथ
चला. उन्होंने निरंतर मधुर संगीत दिया जो उनकी ऊर्जा और
कल्पनाशीलता का द्योतक है.


गीत कर्णप्रिय है और इसे लिखा है आनंद बक्षी ने जिसकी
धुन बनाई है बर्मन दादा ने. गायिका हैं लता मंगेशकर. इस
फिल्म से एक गीत ब्लॉग पर आपको पहले सुनवा चुके हैं.

गीत फिल्माया गया है जया भादुडी पर. ये एक हास्य फिल्म
है जिसमें शर्मिला टैगोर ने यादगार भूमिका निभाई है. गीत में
आप अमिताभ बच्चन को भी देखेंगे. ये फिल्म का शीर्षक गीत
है.




गीत के बोल:

चुपके चुपके चल री पुरवइया
ओ चुपके चुपके चल री पुरवइया
चुपके चुपके चल री पुरवइया

बाँसुरी बजाये रे,
रास रचाए दैया रे दैया
गोपियों संग कन्हैया
चुपके चुपके चल री पुरवइया

पागल पवन से, कैसे कोई बोले
पागल पवन से, कैसे कोई बोले
गोरी के मुख से, घुँघटा ना खोले,
डोले, हौले से मन की नैया
गोपियों संग कन्हैया
चुपके चुपके चल री पुरवइया

ये क्या हुआ मुझको, क्या है ये पहेली
ये क्या हुआ मुझको, क्या है ये पहेली
ऐसे जैसे के, कोई राधा की सहेली, मैं भी
ढूंढूं कदम की छैंया
गोपियों संग कन्हैया
चुपके चुपके चल री पुरवइया

ऐसे समय पे कोई, चुप भी रहे कैसे
ऐसे समय पे कोई, चुप भी रहे कैसे
बाँध लिये रुत ने, पग मैं घुँघरू, जैसे
नाचे मन ता थैया ता थैया
गोपियों संग कन्हैया
चुपके चुपके चल री पुरवइया
.........................................................
Chupke chupke chal ri-Chupke chupke 1975

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Oct 25, 2015

मंजिलें अपनी जगह-शराबी १९८४

एक है देव आनंद वाली शराबी फिल्म और एक है
अमिताभ बच्चन वाली. दोनों के गीत अपने अपने
समय पर खूब बजे. अब दोनों युगों की तुलने करें
तो आप इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि नयी शराबी
के गीत ज्यादा सुने गए. शराब के मामले में तो ऐसा
है कि पुरानी शराब ज्यादा असर करती है. यहाँ तो
फिल्म और फिल्म के नाम का सवाल है. पुरानी तो
श्वेत श्याम थी नयी वाली रंगीन है. फिल्म में एक
गीत है-मंजिलें अपनी जगह. इसकी एक पंक्ति है-
कश्तियाँ साहिल पे अक्सर डूबती हैं प्यार की. ऐसा
कई प्रेम कथानकों में हमने पढ़ा और सुना है-कोई
तीसरे कोण की भेंट चढ जाती हैं तो कई खाप
पंचायतों की. कुछ ही खुशकिस्मत किसी खुशनुमा
फिल्म की तरह अपना प्रेमी-जीवन आसानी से गुज़ार
पाते हैं. गीत प्रकाश मेहरा ने लिखा है और इसकी
धुन बनाई बप्पी लहरी ने जिसे गाया किशोर ने.



गीत के बोल:

मंजिलों पे आ के लुटते हैं दिलों के कारवां
कश्तियां साहिल पे अक्सर डूबती हैं प्यार की

मंजिलें अपनी जगह हैं रस्ते अपनी जगह
मंजिलें अपनी जगह हैं रस्ते अपनी जगह
जब कदम ही साथ न दे तो मुसाफिर क्या करे
यूँ तो है हमदर्द भी और हमसफ़र भी है मेरा
बढ़ के कोई हाथ न दे दिल भला फिर क्या करे
मंजिलें अपनी जगह हैं रस्ते अपनी जगह

डूबने वाले को तिनके का सहारा ही बहुत
दिल बहाल जाए फकत इतना इशारा ही बहुत
इतने पर भी आसमान वाला गिरा दे बिजलियाँ
कोइ बतला दे ज़रा ये डूबता फिर क्या करे
मंजिलें अपनी जगह हैं रस्ते अपनी जगह

प्यार करना जुर्म है तो जुर्म हमसे हो गया
काबिल-ऐ-माफ़ी हुआ करते नहीं ऐसे गुनाह
संगदिल है ये जहाँ और संगदिल मेरा सनम
क्या करे जोश-ऐ-जूनून और हौसला फिर क्या करे


मंजिलें अपनी जगह हैं रस्ते अपनी जगह
जब कदम ही साथ न दे तो मुसाफिर क्या करे
यूँ तो है हमदर्द भी और हमसफ़र भी है मेरा
बढ़ के कोई हाथ न दे दिल भला फिर क्या करे
मंजिलें अपनी जगह हैं रस्ते अपनी जगह
..................................................................
Manzilen apni jagah-Sharabi 1984

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Aug 13, 2015

सारा ज़माना हसीनों का दीवाना-याराना १९८१

गीतों के प्रसिद्ध होने की कुछ अनूठी वजहें भी होती हैं. इस गीत
में जो झक-पक झक-पक करती रोशनियाँ हैं वो हमने इसके पहले
तक केवल दीवाली के समय घरों, दफ्तरों और दुकंनों पर लगी
देखी थीं. फिल्म की रिलीज़ के वक्त कई जगह चर्चा का मुद्दा ये
होता-कि लगायी कैसे हैं और जल कैसे रही हैं?  इनपर कई कई
किस्से और कहानियां सुनने को मिलती.

फिल्म ज्यादा नहीं चली मगर अमिताभ के कई भक्त –पहला दिन
पहला शो वाले इसे कैसे छोड़ सकते थे. वे फिल्म देखने के बाद जो
महिमा-मंडन करते वो किसी सयाने फिल्म समीक्षक के दृष्टिकोण को
भी मात करता सा प्रतीत होता. उस समय एक इलेक्ट्रॉनिक्स में ‘पता
नहीं क्या कुछ’ कर रहे एक छात्र ने एल ई डी रोशनियों के प्रयोग की
संभावना भी जताई थी. डिस्को का असर आप इस गीत पर भी थोडा
बहुत महसूस करेंगे.




गीत के बोल:

हे सारा ज़माना, सारा ज़माना
हसीनों का दीवाना, हसीनों का दीवाना
ज़माना कहे फिर क्यों, ज़माना कहे फिर क्यों
बुरा है दिल लगाना, बुरा है दिल लगाना

हे सारा ज़माना

ये कौन कह रहा है, तू आज प्यार कर ले
जो कभी भी ख़त्म न हो, वो एतबार कर ले
मान ले, मान ले मेरी बात, मेरी बात
सारा ज़माना, सारा ज़माना
हसीनो का दीवाना, हसीनो का दीवाना
ज़माना कहे फिर क्यों, ज़माना कहे फिर क्यों
बुरा है दिल लगाना, बुरा है दिल लगाना

हे सारा ज़माना


जब हुस्न ही नहीं तो, दुनिया में क्या कशिश है
दिल, दिल वही है जिसमें, कहीं प्यार की खलिश है
मान ले, मान ले मेरी बात, मेरी बात

हे सारा ज़माना, सारा ज़माना
हसीनो का दीवाना, हसीनो का दीवाना
ज़माना कहे फिर क्यों, ज़माना कहे फिर क्यों
बुरा है दिल लगाना, बुरा है दिल लगाना

हे सारा ज़माना
…………………………………………………………
Saara Zamana haseenon ka-Yaarana 1981

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Jul 29, 2015

मीत न मिला रे मन का-अभिमान १९७३

जैसा कि हिंदी फिल्म देखने वाले ये एज्यूम कर के चलते हैं
फिल्म में कुछ भी संभव है. न्यूटन का सेब ज़मीन पर गिरने
के बजाये हवा में उड़ के हिंदी गाना गा सकता है. विज्ञान को
धता बताने वाले कई दृश्य आपने देखें होंगे फिल्मों में. वैसे
एक थ्योरी कहती है कि जो मानव मस्तिष्क सोच सकता है
और कल्पना कर सकता है वो सब कुछ संभव है. हो सकता है
किसी दिन रजनीकांत वाले चुटकुले सच साबित होने लगें. ये
सब अभी तो संभावनाएं हैं, इन्हें एक तरफ रख कर गीत सुनते
हैं.

आज आपको एक ऐसा गीत सुनवा रहे हैं जो फिल्म के शीर्षक
में ही प्रकट हो जाता है. ऐसे गीत कम हैं फिल्मों में मगर हैं
ज़रूर, आपको इनमें से कुछ सुनवा और दिखा चुके हैं इस ब्लॉग
पर. पढते रहिये ‘हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना’

गीत है फिल्म अभिमान का. इसे फिल्म के टाइटल पर दिखाया
जाता है. हाथ में माइक पकडे अमिताभ गाना गा रहे हैं. ऐसा
दिखाया जा रहा है वो एक लोकप्रिय गायक हैं और श्रोता उनकी
आवाज़ के दीवाने हैं. फिल्म में उन्होंने एक गायक की भूमिका
निभाई है. गीत की दृश्यावली में दिखता है कि कई लड़कियां
उनका गाना सुन के झूम रही हैं. गाने का आखिरी अन्तरा मगर
कुछ और कह रहा है-देर से मन मेरा आस लिए डोले, कोई सजनी
खिडकी भी न खोले. ऐसा क्यूँ हैं आप गीत सुन के पता लगाइए .





गीत के बोल:

मीत न मिला रे मन का
मीत न मिला रे मन का
कोई तो मिलन का
कोई तो मिलन का, करो रे उपाय
मीत न मिला

चैन नहीं बाहर, चैन नहीं घर में
मन मेरा धरती पर, और कभी अंबर में
उसको ढूँढा, हर डगर में, हर नगर में
गली गली देखा नयन उठाये
मीत न मिला

रोज़ मैं अपने ही, प्यार को समझाऊँ
वो नहीं आयेगा, मान नहीं पाऊँ
शाम ही से प्रेम दीपक, मैं जलाऊँ
फिर वो ही दीपक, दूँ मैं बुझाये
मीत न मिला

देर से मन मेरा, आस लिये डोले
देर से मन मेरा, आस लिये डोले
प्रीत भरी बानी, राग मेरा बोले
कोई सजनी, एक खिड़की भी न खोले
लाख तराने, कहा मैं सुनाये
मीत न मिला रे मन का
................................
Meet na mila re man ka-Abhimaan 1973

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Jun 5, 2015

ये मेरा दिल प्यार का दीवाना- डॉन १९७८

हिंदी फिल्मों के मील के पत्थरों में से एक फिल्म है-डॉन.
अमिताभ बच्चन के कैरियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों से
एक. अमिताभ के लिए पार्श्व गायन करने वाले किशोर कुमार
के सबसे बड़े हिट गीतों में से एक भी इस फिल्म में मौजूद
है-खई के पान बनारस वाला. इस गीत का भी इस फिल्म की
सफलता में बड़ा योगदान रहा है. काफी लोगों ने फिल्म इस
एक गीत की वजह से भी देखी थी.

इसी फिल्म का एक आशा का गाया गीत आपको सुनवाते हैं
आज. ये गीत भी हिट गीत है और इसका बाद में एक रीमिक्स
वर्ज़न भी बना है. हेलन पर फिल्माया गया ये गीत बड़े परदे
पर देखने में आनंद देता है और आप इसे देखने के बाद नई
बनी फिल्म डॉन के सारे गीत भूल जायेंगे.

फिल्म का यही गीत बस इन्दीवर का लिखा हुआ है, बाकी के
गीत अनजान रचित हैं. संगीत कल्याणजी आनंदजी का है.




गीत के बोल:

ये मेरा दिल, प्यार का दीवाना
दीवाना, दीवाना, प्यार का परवाना
आता है मुझको, प्यार में जल जाना
मुश्किल है प्यारे, तेरा बच के जाना
ये मेरा दिल, प्यार का दीवाना

दिल वो चाहे जिसे, चाहे जिसे उसे पाए
प्यार वो, यार के जो नाम पे ही मिट जाए
जान के बदले में, जान लो नज़राना
ये मेरा दिल, प्यार का दीवाना

पल पल इक हलचल, दिल में एक तूफां है
आने को है वो मंज़िल, जिसका मुझे अरमां है
भूलेगा ना तुझे, दिल का ये टकराना

ये मेरा दिल, प्यार का दीवाना
दीवाना, दीवाना, प्यार का परवाना
आता है मुझको, प्यार में जल जाना
मुश्किल है प्यारे, तेरा बच के जाना
ये मेरा दिल, प्यार का दीवाना
..........................................................
Ye mera dil pyar ka deewana-Don 1978

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May 14, 2015

तूने अभी देखा नहीं- दो और दो पाँच १९८०

फिल्म का शीर्षक गीत है ये. फिल्म दो और दो पांच को
हम पूर्ण मनोरंजक नहीं तो कम से कम पचास टका तो
मनोरंजक मान ही सकते हैं. एक मसाला फिल्म है जिसमें
हास्य के अलावा भी दूसरे मसाले हैं. बहुसितारा फिल्म
जिसमें बड़े सितारों ने काम किया-अमिताभ, शशि, हेमा,
परवीन बोबी.

फिल्म में अमिताभ और शशि कपूर एक स्कूल में पहुँच
जाते हैं और कुछ न आते हुए भी शिक्षक बन जाते हैं .
एक पी टी मास्टर और दूसरा संगीत शिक्षक बन जाता है.
ऐसे करिश्मे या तो हिंदी फिल्मों में या भारतीय राजनीति
में ही संभव हैं. दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा चलती है एक दूसरे
को नीचा दिखने की और परेशां करने की. गीत उसी कड़ी
का एक हिस्सा है.

गीत किशोर कुमार का गाया हुआ है और अनजान के लिखे
बोलों को संगीत दिया है राजेश रोशन ने.




गीत के बोल:

अरे तूने अभी देखा नहीं, देखा है तो जाना नहीं
जाना है तो माना नहीं, मुझे पहचाना नहीं
दुनिया दीवानी मेरी, मेरे पीछे पीछे भागी
किसमें है दम यहाँ, ठहरे जो मेरे आगे
मेरे आगे आना नहीं, देखो टकराना नहीं
किसी से भी हारे नहीं हम

जो सोचें, जो चाहें वो करके दिखा दें
हम वो हैं जो दो और दो पाँच बना दें

तूने अभी देखा नहीं, देखा है तो जाना नहीं
जाना है तो माना नहीं, मुझे पहचाना नहीं

हम आते जाते राहों में कब कैसे क्या गुल खिलाएं
जो उलझें, वो समझें, हम क्या कमाल कर जाएँ
फूलों की राहों से काटों को हटा दें
हम वो हैं जो दो और दो पाँच बना दें

जो सोचें, जो चाहें वो करके दिखा दें
हम वो हैं जो दो और दो पाँच बना दें

हम आग लगा दें पानी में, पत्थर पे फूल खिलायें
बिन मौसम, बिन बादल, रिमझिम सावन बरसायें
पूरब के सूरज को पश्चिम से उगा दें
हम वो हैं जो दो और दो पाँच बना दें

जो सोचें, जो चाहें वो करके दिखा दें
हम वो हैं जो दो और दो पाँच बना दें

जब हम मनमौजी मस्ताने मस्ती के साज बजायें
तो झूमें ये धरती वो चाँद सितारे गाएँ
हम नाचें तो यारों को साथ नचा दें
हम वो हैं जो दो और दो पाँच बना दें

जो सोचें, जो चाहें वो करके दिखा दें
हम वो हैं जो दो और दो पाँच बना दें
..................................................................
Toone abhi dekha nahin-Do aur do paanch 1980

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Jan 7, 2015

लूटे कोई मन का नगर-अभिमान १९७३


फ़िल्मी गीतों में डबिंग आर्टिस्ट नाम का किरदार होता है एक.
डबिंग आर्टिस्ट से पहले गाना गवा लिया जाता है और बाद में
प्रमुख गायक/गायिका की आवाज़ में वो गीत रेकोर्ड किया जाता
ये चलन पहले काफी था अब कम है. इस गीत के साथ किस्सा
यूँ है-मनहर ने इस गीत को डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर गाया .
मुकेश ने जब इसे सुना तो निवेदन किया कि इसे फिल्म में
रहने दिया जाए. निवेदन मान लिया गया. फिल्मों के इतिहास
में कोई ऐसी फिल्म नहीं जिसमें लता-रफ़ी, लता-किशोर और
लता-मुकेश के युगल गीत एक साथ हों. अगर ऐसा होता तो
एक इतिहास बन जाता. ये उस ज़माने की फिल्म है जब "बिग"
जया और अमिताभ केवल "बी" हुआ करते थे. जया स्थापित
अभिनेत्री थीं  और अमिताभ नवागंतुक अभिनेता. गीत आकर्षक
धुन वाला है और मेरे हिसाब से इसे ज्यादा गुनगुनाया है जनता ने
बनिस्बत फिल्म के दूसरे युगल गीतों के.



गीत के बोल: 



लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी
लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी
कौन है वो, अपनों में कभी, ऐसा कहीं होता है,
ये तो बड़ा धोखा है

लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी

यहीं पे कहीं है, मेरे मन का चोर
नज़र पड़े तो बइयाँ दूँ
यहीं पे कहीं है, मेरे मन का चोर
नज़र पड़े तो बइयाँ दूँ
जाने दो, जैसे तुम प्यारे हो,
वो भी मुझे प्यारा है, जीने का सहारा है
देखो जी तुम्हारी यही बतियाँ मुझको हैं तड़पातीं

लूटे कोई मन का नगर
लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी

रोग मेरे जी का, मेरे दिल का चैन
साँवला सा मुखड़ा, उसपे कारे नैन
ऐसे को, रोके अब कौन भला,
दिल से जो प्यारी है, सजनी हमारी है
का करूँ मैं बिन उसके रह भी नहीं पाती

लूटे कोई मन का नगर
लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी
…………………………………………..
Loote koi man ka nagar-Abhimaan 1973

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Oct 1, 2014

तेरी बिंदिया रे-अभिमान १९७३

फिल्म अभिमान नारी प्रतिभा और पुरुष प्रतिभा के बीच
अहम के टकराव की कहानी है. नारी ज्यादा प्रतिभाशाली
है. फिल्म के कथानक अनुसार नायक नायिका की मधुर
आवाज़ पर मोहित हो उसे ब्याह घर ले आता है. उसके
बाद शादी के रिसेप्शन जैसा कुछ हो रहा है फिल्म में .
इस अवसर पर गाना गाया जा रहा है. सवाल जवाब वाला
ये गीत अनूठा है और अपने समय का हिट गीत भी .
अभिमान के सारे गाने हिट श्रेणी में आते हैं. इस युगल
गीत को लता और रफ़ी ने गाया है. बोल मजरूह के
हैं जो कि उच्च कोटि के हैं और संगीत सचिन देव बर्मन
का.

अभिनेत्री का अभिनय अभिनेता से बेहतर है जो कि इस
गीत से साफ़ झलक रहा है. अभिनेत्री में चेहरे पर भाव लाने
की क्षमता अपने कैरियर के शुरूआती दिनों से ही आला दर्जे
की रही है.




गीत के बोल:

तेरी बिंदिया रे,
रे आय हाय तेरी बिंदिया रे
तेरी बिंदिया रे,
रे आय हाय तेरी बिंदिया रे

सजन बिंदिया ले लेगी
तेरी निंदिया
रे आय हाय तेरी बिंदिया रे
        
तेरे माथे लगे हैं यूँ, जैसे चंदा तारा
जिया में चमके कभी कभी तो, जैसे कोई अन्गारा
तेरे माथे लगे हैं यूँ
सजन निंदिया
सजन निंदिया ले लेगी ले लेगी ले लेगी
मेरी बिंदिया 
रे आय हाय तेरा झुमका रे
रे आय हाय तेरा झुमका रे
चैन लेने ना देगा सजन तुमका
रे आय हाय मेरा झुमका रे 
        
मेरा गहना बलम तू,
तोसे सज के डोलूं
भटकते हैं तेरे ही नैना
मैं तो कुछ न बोलूं
मेरा गहना बलम तू
तो फिर ये क्या बोले है बोले है बोले है
तेरा कंगना
रे आय हाय मेरा कंगना रे
बोले रे अब तो छूटे न तेरा अंगना रे
रे आय हाय तेरा कंगना रे
          
तू आई है सजनिया
जब से मेरी बन के
ठुमक ठुमक चले है जब तू,
मेरी नस नस खनके
तू आई है सजनिया
सजन अब तो
सजन अब तो छूटे न छूटे न छूटे न
तेरा अंगना
रे आय हाय तेरा कंगना रे
तेरा कंगना रे
सजन अब तो छूटे न तेरा अंगना
रे आय हाय तेरा अंगना रे
..................................................
Teri bindiya re-Abhimaan 1973

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Sep 12, 2011

तुम भी चलो-ज़मीर १९७५

इस गीत में घोड़े ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। अमिताभ बच्चन और
सायरा तो कमाल के कलाकार हैं ही, मगर हमें फिल्म के बाकी कलाकारों के
अभिनय पर भी तो कभी कभी गौर फ़रमा लेना चाहिए ना। अमिताभ बच्चन
और सायरा बानो पर फिल्माए गीत को पहली बार जनता ने सुना था सन १९७५
में और तबसे इस गीत को निरंतर सुना जा रहा है। बोल थोड़े प्रेरणा दायक हैं।
सपन चक्रवर्ती ने इस गीत कि धुन बनाई है। उनका संगीत आर डी बर्मन के
संगीत के करीब सा लगता है। आशा और किशोर के गाये इस गीत को लिखा
है मजरूह सुल्तानपुरी ने।



गीत के बोल:

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी

ना ज़मीन मंजिल ना आसमान
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी

तुम भी चलो ला ला ला ला
हम भी चलें ला ला ला ला
चलती रहे ज़िन्दगी, ला ला ला

पीछे देखे ना कभी मुद के राहों में
हो, झूमे मेरा दिल तुम्हें ले के बाँहों में

धडकनों की जुबां नित कहे दास्तान
प्यार के झिलमिल छाओं में पलती रहे ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
ना ज़मीन मंजिल ना आसमान
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी

बहते चलें हम मस्ती के धारों में
हो ओ ओ, गूंजे यही धुन सदा दिल के तारों में
अब रुके ना कहीं प्यार का कारवां
नित नई रुत के रंग में ढलती रहे ज़िन्दगी

तुम भी चलो हम भी चलें
चलती रहे ज़िन्दगी
------------------------------
Tum bhi chalo-Zameer 1975

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Jul 29, 2011

काहे मनवा नाचे हमरा-आलाप १९७७

फिल्म आलाप से एक गीत और सुना जाए। लीक से
हटकर बनी और बॉक्स ऑफिस की पटरी से ज़ल्द ही
उतरी फिल्म में अमिताभ और रेखा की जोड़ी है।

प्रस्तुत गीत रेखा पर फिल्माया गया है जिसे गाया है
लाता मंगेशकर ने। रेखा की भूमिका सेमी-देहाती किस्म
की है फिल्म में अतः गीत के बोलों में थोड़ी खड़ी बोली
के शब्द समाहित हैं। फिल्म के कथानक अनुसार वो एक
गायक की बीबी हैं अतः उनका गाना भी ज़रूरी है। गीत
कर्णप्रिय है जिसका संगीत तैयार किया है जयदेव ने।

ऋषिकेश मुखर्जी निर्देशित फिल्मों में से यही शायद सबसे
कम चलने वाली फिल्म थी। फिल्म का कथानक अच्छा होते
हुए भी ऐसा लगता है कि कहानी अधूरी सी है या फिर एक
छोटी सी कहानी को किसी सास बहू सीरियल की तरह लम्बा
खींचा गया हो ।



गीत के बोल:


काहे मनवा नाचे हमरा
काहे मनवा नाचे हमरा
सखी री कोई इसे अब समझाए

काहे मनवा नाचे हमरा

नैनं कजरा डालन बैठी
नैनं कजरा डालन बैठी
माथे पे सूरज पालन बैठी
बीच में आये देखो सपने कासे

काहे मनवा नाचे हमरा
काहे मनवा नाचे हमरा
सखी री कोई इसे अब समझाए

काहे मनवा नाचे हमरा

नस नस में ये कौन उतरा है
नस नस में ये कौन उतरा है
दिल में किसका दिल धडका है
नाम अनाम का निस दिन बांचे

काहे मनवा नाचे हमरा
काहे मनवा नाचे हमरा
सखी री कोई इसे अब समझाए

काहे मनवा नाचे हमरा
..........................
Kaahe manwa nache hamra-Alaap 1977

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Jul 12, 2011

एक दिन हँसाना-बेनाम १९७४

एक लोरी सुनवाते हैं आपको फिल्म बेनाम से. बच्चों को सुलाना
कितना दुष्कर कार्य होता है इस गीत से आपको समझ आएगा या
यूँ कहें मेमोरी रिफ्रेश हो जाएगी आपकी. जिनके बच्चे होने वाले हों
वे इस गीत को देख कर आगे आने वाली परेशानी के लिए अपने
आपको मानसिक रूप से तैयार कर लें.

ये बात और है अगर आपकी आवाज़ मधुर है तभी गीत गायें अन्यथा
बच्चा घबरा कर, और जोर से भां भां करता रोने लगेगा, सोने के बजाये

लेखनी से मियां-बीबी की समस्या हल की है मजरूह सुल्तानपुरी ने और
आवाज़ से लता मंगेशकर ने राहुल देव बर्मन की धुन पर.




गीत के बोल :

ला ला ला हं हं हं
सो जा रे नींद सुहानी
एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी
एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी

सनन सनन पवन कहे सो जा मिलेगा
तुझको कोई नया खिलौना
मगन मगन सपन में खो जा मिलेगा
दूजा साथी कोई सलोना
दिन कल का नया दिन होगा
फिर कैसी ये परेशानी

एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी

निकलेंगे अभी बहुत जिया के अरमान
जीवन सारा अभी पड़ा है
हो ओ ओ टुकुर टुकुर नयन लिए
न हो रे हैरान
ऊपर वाला बहुत बड़ा है
किर काहे तू पड़ा जागे
अंखियों में लिए पानी
अब तो सो जा

एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी

एक दिन हँसाना एक दिन रुलाना
जीवन की रीत पुरानी
फिर तेरी पलकें काहे को छलकें
सो जा रे नींद सुहानी
..............................
Ek din hansana-Benaam 1974

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Jun 16, 2011

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता-हेरा फेरी १९७६

ये दिमाग भी कमबख्त बहुत कबाड़ा किस्म की चीज़ है, मटर पनीर
खाते खाते जूता पालिश की ख़ाली होती डब्बी याद आ जाती है तो
नहाते नहाते पेट्रोल पम्प दिखाई देने लगता है ।

आज एक पुराने मित्र की याद हो आई। जो मित्र दिल के करीब थे
समय ने उनको इतना दूर कर दिया कि अब उनकी यादों के सिवा
कुछ बचा नहीं है दोस्ती के नाम पे। कुछ दूसरी दुनिया पहुँच
गये तो कुछ मोह माया में उलझ कर रह गये। आपको फिल्म हेरा फेरी
का एक गीत सुनवाया था-बरसों पुराना ये याराना। फिल्म हेरा फेरी से
एक गीत आपको और सुनवाते हैं। ये सायरा बानो और अमिताभ बच्चन
पर फिल्माया गया है।




गीत के बोल:

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता

मौत से जो डरे, प्यार वो क्या करे
प्यार में तो यही मौत है ज़िन्दगी
जान क्या चीज़ है प्यार के सामने
साथ छूते ना छूते ये दिल की लगी
ये ना होता तो फिर प्यार की राह में
ख़ाक दर दर की कोई दीवाना
नहीं छानता नहीं छानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता

लैला शीरी हो या हीर या सोहनी
मर के भी उनकी सूरत सितारों में है
जिस के दिल का लहू घुल गया प्यार में
आज तक उनकी ख़ुशबू बहारों में है
कुछ तो है वरना दिल मेरा तेरे लिए
जान देने की जिद जाने-जाना
नहीं ठानता, नहीं ठानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता

कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
कौन अंजाम-ए-उल्फत नहीं जानता
मगर क्या करूं ये दिल दीवाना
नहीं मानता नहीं मानता
नहीं मानता दिल नहीं मानता
............................
Kaun anjaam-e-ulfat nahin jaanta-Hera Pheri 1976

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Jun 14, 2011

तेरे जैसा यार कहाँ-याराना १९८१

बहुत अरसे के बाद कोई फ़रमाइश आई है। चलिए एक गीत सुनते हैं
अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म याराना से। दोस्ती के नाम कुर्बान
ये गीत गाया है किशोर कुमार ने। सन १९८१ की फिल्म याराना बॉक्स
ऑफिस पर भले ना चली हो इसके गीत बहुत बजे थे। दोस्त हों तो
ऐसे जो वक़्त पर काम आयें और बिना कुछ मांगे ही आपकी मदद करें
जो दोस्त की ख़ुशी में खुश ना हुआ और दुःख में दुखी ना हुआ वो
दोस्त कैसा।

एक दिलचस्प चीज़ ये है गीत में कि अमिताभ के हाथ में जो माईक है
वो खोये की बर्फी की तरह इधर उधर मुड जाता है आसानी से।




गीत के बोल:

तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना
तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना

तेरे जैसा यार कहाँ कहाँ ऐसा याराना

मेरी ज़िन्दगी सँवारी मुझको गले से लगा के
बैठा दिया फ़लक पे मुझे ख़ाक़ से उठा के
मेरी ज़िन्दगी सँवारी मुझको गले से लगा के
बैठा दिया फ़लक पे मुझे ख़ाक़ से उठा के
यारा तेरी यारी को मैने तो ख़ुदा माना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना

मेरे दिल की ये दुआ है कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना वो दिन कभी न आए
मेरे दिल की ये दुआ है कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना वो दिन कभी न आए
तेरे संग जीना यहां तेरे संग मर जाना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफसाना
.....................................
Tere jaisa yaar kahan-Yaarana 1981

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Jun 6, 2011

जहाँ तेरी ये नज़र है-कालिया १९८१

फिल्म कालिया सन १९८१ की फिल्म है। उस दौर में अमिताभ को किशोर
कुमार के गीत बहुत मिले परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये जोड़ी जनता को
पसंद थी तो अधिकतर निर्देशक किशोर कुमार से ही अमिताभ वाले गाने
गवाते।

फिल्म कालिया का ये गीत सबसे ज्यादा लोकप्रिय गीत है। एक पार्टी में
ये गीत गाया जा रहा है और किसी जमेस बोंड की फिल्म माफिक सुरंग
आपको इस गीत में दिखाई देगी। फिल्म के निर्देशक टीनू आनंद हैं। फिल्म
व्यावसायिक दृष्टि से बहुत सफल नहीं हुयी। गीत मजरूह सुल्तानपुरी की
कलम से निकला है तो संगीत राहुल देव बर्मन की सांगीतिक घुड्शाला से।

अब तो आप समझ ही गये होंगे कि नज़र किधर है-उन मोहतरमा के हार
पर जिनका हाथ पकड़ कर खलनायक अमजद खान नृत्य शुरू करते हैं।



गीत के बोल:

हे हे
धीम फटा फट धिन्गरी पका
पका का का का का का का
धीम फटा फट धिन्गरी पका
पका का का का का का का

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
बच ना सका कोई आये कितने
लम्बे हैं मेरे हाथ इतने
देख इधर यार ध्यान किधर है
अरे देख इधर यार ध्यान किधर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

क्यूँ नहीं जानी तू ये समझता
काम नहीं ये है तेरे बस का
कुक डू कू कू

क्यूँ नहीं जानी तू ये समझता
काम नहीं ये है तेरे बस का
होश में आ जा ध्यान किधर है
अरे, होश में आ जा ध्यान किधर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

मेरी तरफ जो उठा है तन के
कट के वही हाथ गिरा बदन से
अरे मेरी तरफ जो उठा है तन के
कट के वही हाथ गिरा बदन से
सामने आये किस का जिगर है
हाँ, सामने आये किस का जिगर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है

चाल ये बंदा ऐसी भी चल जाये
बंद हो मुट्ठी अरे चीज़ निकल जाये
गिली गिली गिली गिली

अरे चाल ये बंदा ऐसी भी चल जाये
बंद हो मुट्ठी अरे चीज़ निकल जाये
ये भी करिश्मा देख इधर है
हाँ, ये भी करिश्मा देख इधर है

जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जान मुझे खबर है
बच ना सका कोई आये कितने
लम्बे हैं मेरे हाथ इतने
देख इधर यार ध्यान किधर है
अरे देख इधर यार ध्यान किधर है
............................................
Jahan teri ye nazar hai-Kaalia 1981

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Jan 22, 2011

अब तो है तुमसे हर ख़ुशी-अभिमान १९७३

फिल्म अभिमान के पिछले गीत में हमने पुरुष स्वाभिमान को
लगने वाली ठेस का जिक्र किया था। किस प्रकार नारी के अधिक
प्रतिभावान होने को पुरुष हजम नहीं कर पाता है। इस गीत में आप
पाएंगे की नायिका एक के बाद एक बुलंदी की सीढ़ियों को चढ़ती जा
रही है और नायक इन सब के बीच कहीं आपने आप को खोने लगा
है। कुंठित कलाकार का चरित्र अभिनय अमिताभ ने बढ़िया निभाया
है।

एक बात फिर भी तय है कि फिल्म में जया ने अमिताभ से ज्यादा
अच्छा अभिनय किया है।



गीत के बोल:


अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

जब हो गया तुम पे, ये दिल दीवाना
जब हो गया तुम से, ये दिल दीवाना
फिर चाहे जो भी कहे, हमको ज़माना
कोई बनाये बातें, चाहे अब जितनी, हो हो


अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे साथ हम भी सनम मशहूर हो गए
देखो कहाँ ले जाये, बेखुदी अपनी, हो हो

अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

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Jan 11, 2011

तुम हो मेरे दिल की धड़कन-मंजिल १९७९

अमिताभ बच्चन की हिट फ़िल्में जनता को याद हैं। कुछ फ्लॉप
फ़िल्में भी हैं उनकी, जिनके मधुर गीत अक्सर इधर उधार बजा
करते हैं। परंपरा के अनुसार हम आपको उनकी कम देखी गई
फिल्म से कम सुना हुआ गीत सुनवाते हैं। ये गीत योगेश का लिखा,
किशोर कुमार का गाया हुआ और आर. डी. बर्मन द्वारा संगीतबद्ध है।
अब आप ये मत पूछियेगा कि परदे पर तानपुरा दिख रहा है और
गीत में गिटार की आवाज़ आ रही है। ये एक आधुनिक तानपुरा है
जो गिटार की आवाज़ निकालता है। तबला भी विशेष है जिसमें से
कांगो-बांगो की आवाज़ निकलती है।




गीत के बोल:

तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन

तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन

तुम जो नहीं तो कैसी ख़ुशी
मायूसियों में डूबी है ज़िन्दगी
मुझे तुम बिन हर पलछिन
दस्ता हैं सूनापन

तुम हो मेरे दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन

तुम्हें जो देखा तो पलकों तले
लाखों दिए से देखो जलने लगे
मेरा तन मन मेरा जीवन
तुमसे ही है मगन

तुम हो मेरी दिल की धड़कन
तुम बिन लगे ना मन
तुम को ही ढूँढा करते हैं
हर पल मेरे दो नयन

.........................................
Tum ho meri dil ki dhadkan-Manzil 1979

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