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Jul 20, 2017

तेरी महफ़िल में किस्मत-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

एक फ़िल्मी कव्वाली जिसमें केवल गायिकाओं की आवाजें हैं.
ये है मुग़ल-ए-आज़म से फेमस कव्वाली लता मंगेशकर और
शमशाद बेगम की गाई हुई. दो तरीके की विचारधाराओं का
मिश्रण है इसमें. आज जो पुराने गीत तबियत से सुने जाते
हैं उसकी वजह उन गीतों के बढ़िया बोल और संगीत होता
है.

शकील के बोल हैं और नौशाद का संगीत. इसे फिल्माया गया
है मधुबाला और एक दूसरी अभिनेत्री पर जिसका नाम आप
पहचानिये. गौरतलब है इस फिल्म को फिल्म बनाने के विचार
से फिल्मांकन तक पूरे चौदह साल लगे.





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ
हा आ आ
तेरी महफ़िल में किस्मत आज़मा कर हम भी देखेंगे
घड़ी भर को तेरे नज़दीक आकर हम भी देखेंगे
घड़ी भर को तेरे नज़दीक आकर हम भी देखेंगे
अजी हाँ हम भी देखेंगे
आ आ आ आ आ आ
तेरी महफ़िल में किस्मत आज़मा कर हम भी देखेंगे
तेरे कदमों पे सर अपना झुका कर हम भी देखेंगे
तेरे कदमों पे सर अपना झुका कर हम भी देखेंगे
अजी हाँ हम भी देखेंगे

आ आ आ आ आ आ
बहारें आज पैग़ाम-ए-मोहब्बत ले के आई हैं
बड़ी मुद्दत में उम्मीदों की कलियां मुस्कुराई हैं
बड़ी मुद्दत में ए जी हाँ
बड़ी मुद्दत में उम्मीदों की कलियां मुस्कुराई हैं
ग़म-ए-दिल से जरा दामन बचा कर हम भी देखेंगे
ग़म-ए-दिल से जरा दामन बचा कर हम भी देखेंगे
अजी हाँ हम भी देखेंगे

हा आ आ आ आ आ
अगर दिल ग़म से खाली हो तो जीने का मज़ा क्या है
न हो खून-ए-जिगर तो अश्क़ पीने का मज़ा क्या है
न हो खून-ए-जिगर हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
न हो खून-ए-जिगर तो अश्क़ पीने का मज़ा क्या है
मोहब्बत में जरा आँसू बहा कर हम भी देखेंगे
मोहब्बत में जरा आँसू बहा कर हम भी देखेंगे
तेरी महफ़िल में किस्मत आज़मा कर हम भी देखेंगे
अजी हाँ हम भी देखेंगे

आ आ आ आ आ आ
मोहब्बत करने वालो का है बस इतना ही अफ़साना
तड़पना चुपके चुपके आह भरना घुट के मर जाना
तड़पना चुपके चुपके आ हाँ हाँ
तड़पना चुपके चुपके आह भरना घुट के मर जाना
किसी दिन ये तमाशा मुस्कुरा कर हम भी देखेंगे
किसी दिन ये तमाशा मुस्कुरा कर हम भी देखेंगे
तेरी महफ़िल में किस्मत आज़मा कर हम भी देखेंगे
अजी हाँ हम भी देखेंगे

आ आ आ आ आ आ
मोहब्बत हमने माना ज़िन्दगी बरबाद करती है
ये क्या कम है के मर जाने से दुनिया याद करती है
ये क्या कम है अजी हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
ये क्या कम है के मर जाने से दुनिया याद करती है
किसी के इश्क़ में दुनिया लुटाकर हम भी देखेंगे
किसी के इश्क़ में दुनिया लुटाकर हाँ हाँ हाँ 
तेरी महफ़िल में किस्मत हाँ हाँ हाँ
तेरे कदमों पे सर अपना झुका कर हाँ हाँ हाँ
तेरी महफ़िल में किस्मत आज़मा कर हम भी देखेंगे
अजी हाँ हम भी देखेंगे
……………………………………………………………….
Teri mehfil mein kismat-Mughal-e-azam 1960

Artists: Madhubala, Dilip Kumar,

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Jun 25, 2017

बेकस पे करम कीजिये-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

फिल्म: मुग़ल-ए-आज़म
वर्ष: १९६०
गीतकार: शकील बदायूनी
गायिका: लता मंगेशकर
संगीत: नौशाद



गीत के बोल:

ऐ मेरे मुश्किलकुशा  फ़रियाद है  फ़रियाद है
आपके होते हुए दुनिया मेरी बरबाद है

बेकस पे करम कीजिये  सरकार-ए-मदीना
बेकस पे करम कीजिये
गर्दिश में है तक़दीर  भँवर में है सफ़ीना
गर्दिश में है तक़दीर  भँवर में है सफ़ीना
बेकस पे करम कीजिये  सरकार-ए-मदीना
बेकस पे करम कीजिये

है वक़्त-ए-मदद आइये बिगड़ी को बनाने
बिगड़ी को बनाने
गोशीदा नहीं आपसे कुछ दिल के फ़साने
ज़ख़्मों से भरा है किसी मजबूर का सीना
बेकस पे करम कीजिये

छाई है मुसीबत की घटा गेसुओं वाले
गेसुओं वाले
लिल्लाह मेरी डूबती कश्ती को बचा ले
तूफ़ान के आसार हैं  दुश्वार है जीना
बेकस पे करम कीजिये
गर्दिश में है तक़दीर  भँवर में है सफ़ीना
बेकस पे करम कीजिये  सरकार-ए-मदीना
बेकस पे करम कीजिये
…………………………………………
Bekas pe karam kijiye-Mugha-e-azam 1960

Artist: Madhubala

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Jun 23, 2017

ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

प्यार इश्क और मोहब्बत के रास्ते में दीवारें आयें या
चट्टानें ये अपने अंजाम तक पहुँच के ही रहता है. अब
अंजाम चाहे बर्बादी हो या खुशहाली इसे किसकी परवाह
है. मुग़ल-ए-आज़म का ये गीत कुछ इसी बात की
तस्दीक करता सा प्रतीत होता है.

इतिहास को समझना हो तो फ़िल्में बहुत काम आती हैं.
फिल्मों में जबरन के ड्रामे का जो हिस्सा होता है उसे
भी पब्लिक सच समझ लेती है. ये सब हमने फिल्मों
में ही देखे-हीरो मरने की कगार पर खड़ा है और गीत
गा रहा है. यहाँ एक गरीब आदमी शहजादे के लिए ये
गीत गा रहा है और सारे एक्सप्रेशन हीरो के चेहरे पर
उभर रहे हैं. मोतीलाल जैसे दिखने वाले इस कलाकार
का नाम है सैयद हसन अली जो अल-हिलाल फिल्म के
हीरो थे. उन्हें कुमार के नाम से ज्यादा जाना जाता है.




गीत के बोल:

वफ़ा की राह में  आशिक की ईद होती है
ख़ुशी मनाओ  मोहब्बत शहीद होती है

ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद
ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद
दौलत की ज़ंजीरों से तू  रहती है आज़ाद
ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद
ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद

मन्दिर में  मस्जिद में तू और तू ही है ईमानों में
मुरली की तानों में तू और तू ही है आज़ानों में
तेरे दम से दीन-धरम की दुनिया है आबाद
ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद
ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद

प्यार की आँधी रुक न सकेगी  नफ़रत की दीवारों से
ख़ून-ए-मुहब्बत हो न सकेगा  खंजर से  तलवारों से
मर जाते हैं आशिक़  ज़िन्दा रह जाती है याद
ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद
ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद

इश्क़ बग़ावत कर बैठे तो दुनिया का रुख़ मोड़ दे
आग लगा दे महलों में और तख़्त-ए-शाही छोड़ दे
सीना ताने मौत से खेले  कुछ ना करे फ़रियाद
ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद
ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद
ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद

ताज हुकूमत जिसका मज़हब  फिर उसका ईमान कहाँ
ताज हुकूमत जिसका मज़हब  फिर उसका ईमान कहाँ
जिसके दिल में प्यार न हो  वो पत्थर है इंसान कहाँ
जिसके दिल में प्यार न हो  वो पत्थर है इंसान कहाँ
प्यार के दुश्मन होश में  आ हो जायेगा बरबाद
ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद
ऐ मुहब्बत ज़िन्दाबाद
ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद
………………………………………………………..
Zindabad zindabad-Mughal-e-azam 1960

Artists: Dilip Kumar, Prithviraj Kapoor,

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Jun 21, 2017

हमें काश तुमसे मुहब्बत-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

अक्सर हमें वे शब्द जल्दी याद होते हैं जिनका प्रयोग
गीत के मुखड़े में होता है. पहले अंतरे के भी कुछ याद
रह जाते हैं. दूसरे, तीसरे अंतरे का शब्द याद रख पाना
केवल उन्हीं के बस का है जिन्हें गीत याद हो जाता है.

फिल्म आंधी के एक गीत में नशेमन शब्द का प्रयोग है.
फिल्म मुग़ल-ए-आज़म से एक गीत सुनते हैं लता का
गाया हुआ जिसके अंतरे में ये शब्द आता है. इसके बोल
लिखे हैं शकील बदायूनी ने और संगीत है नौशाद का.




गीत के बोल:

हमें काश तुमसे मुहब्बत न होती
हमें काश तुमसे मुहब्बत न होती
कहानी हमारी हक़ीकत न होती
हमें काश तुमसे मुहब्बत न होती

न दिल तुमको देते  न मजबूर होते
न दुनिया  न दुनिया के दस्तूर होते
क़यामत से पहले क़यामत न होती
हमें काश तुमसे मुहब्बत न होती

हमीं बढ़ गये इश्क़ में हद से आगे
ज़माने ने ठोकर लगाई तो जागे
अगर मर भी जाते तो हैरत न होती
हमें काश तुमसे मुहब्बत न होती

तुम्हीं फूँक देते नशेमन हमारा
मुहब्बत पे एहसान होता तुम्हारा
ज़माने से कोई शिकायत न होती
हमें काश तुमसे मुहब्बत न होती
कहानी हमारी हक़ीकत न होती
हमें काश तुमसे मुहब्बत न होती
……………………………………………………
Hamen kaash tumse mohabbat na hoti-Mughal-e-azam 1960

Artists: Madhubala

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Jun 1, 2017

जब रात है ऐसी मतवाली-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

फिल्म मुग़ल-ए-आज़म से अगला गीत सुनते हैं जिसे लता मंगेशकर
संग कोरस ने गाया है. हिंदी सिनेमा इतिहास की सबसे महंगी बनी
हुई फिल्मों में से एक है यह. भव्य सेटों का इस्तेमाल किया गया
था फिल्म में.

गीत एक फ़िल्मी कव्वाली है जिसे शकील बदायूनी ने लिखा है और
इसकी धुन तैयार की है नौशाद ने.




गीत के बोल:

ये दिल की लगी कम क्या होगी
ये इश्क़ भला कम क्या होगा
जब रात है ऐसी मतवाली
फिर सुबह का आलम क्या होगा

नग़मो से बरसती है मस्ती 
छलके हैं खुशी के पैमाने
आज ऐसी बहारें आई हैं 
कल जिनके बनेंगे अफ़साने
अब इससे ज्यादा और हसीं
ये प्यार का मौसम क्या होगा
जब रात है ऐसी मतवाली
फिर सुबह का आलम क्या होगा

ये आज का रंग और ये महफ़िल 
दिल भी है यहाँ दिलदार भी है
आँखों में कयामत के जलवे 
सीने में तड़पता प्यार भी है
इस रंग में कोई जी ले अगर 
मरने का उसे ग़म क्या होगा
जब रात है ऐसी मतवाली
फिर सुबह का आलम क्या होगा

हालत है अजब दीवानों की 
अब खैर नहीं परवानों की
अन्जाम-ए-मोहब्बत क्या कहिये 
लय बढ़ने लगी अरमानों की
ऐसे में जो पायल टूट गयी 
फिर ऐ मेरे हमदम क्या होगा
जब रात है ऐसी मतवाली
फिर सुबह का आलम क्या होगा
................................................................
Jab raat hai aisi matwali-Mughla-e-azam 1960

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Apr 13, 2017

मोहब्बत की झूठी कहानी-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

फिल्म: मुग़ल-ए-आज़म
वर्ष: १९६०
गीतकार: शकील बदायूनी
गायिका: लता मंगेशकर
संगीत: नौशाद



गीत के बोल:

मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये
मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये
बड़ी चोट खाई  जवानी पे रोये
जवानी पे रोये
मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये

न सोचा न समझा  न देखा न भाला
तेरी आरज़ू ने  हमें मार डाला
तेरे प्यार की मेहरबानी पे रोये  रोये
मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये
बड़ी चोट खाई  जवानी पे रोये
जवानी पे रोये

खबर क्या थी होंठों को सीना पड़ेगा
मुहब्बत छुपा कर भी  जीना पड़ेगा
जियें तो मगर ज़िन्दगानी पे रोये  रोये
मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये
बड़ी चोट खाई  जवानी पे रोये
जवानी पे रोये
मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोये
कहानी पे रोये
……………………………………..
Mohabbt ki jhoothi kahani-Mughal-e-azam 1960

Artist: Madhubala

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Jan 5, 2017

ए इश्क़ ये सब दुनिया वाले-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

एक कहावत है अदरक क्या जाने बन्दर का स्वाद. इस  बात
के पुष्टि कई फ़िल्मी गीतों में हुई है.जिसने कभी किरकिट नहीं
खेली वो भी किरकिट का एक्सपर्ट कमेन्ट उत्पादक बन जाता
है, वैसे ही जिसने प्यार मोहब्बत के आलू प्याज ना खाए हों
वो भी इश्क पर थीसिस लिखता दिखलाई दे जायेगा.

दुनिया तो कहती ही रहेगी, मगर ना तो प्यार करने वाले ही
रुकेंगे न प्याज खाने वाले. प्याज १०० रूपये किलो हो जाए
तब भी नहीं.

सुनते हैं मुग़ल-ए-आज़म से लता मंगेशकर का गाया एक गीत
जिसे शकील ने लिखा और नौशाद ने संगीत से संवारा. गीत
में शहजादे पर कटाक्ष है और पूछा जा रहा है के वाकई इश्क
का मतलब मालूम है भी या नहीं ? शीला दलाया नामक इस
कलाकार ने फिल्म में अनारकली की बहन की भूमिका निभाई
थी जो परदे पर गीत गा रही है.



गीत के बोल:

ए इश्क़ ये सब दुनिया वाले
ए इश्क़ ये सब दुनिया वाले बेकार की बातें करते हैं
बेकार की बातें करते हैं
पायल के ग़मों का इल्म नहीं
पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार की बातें करते हैं
झंकार की बातें करते हैं
ए इश्क़ ये सब दुनिया वाले

हर दिल में छुपा है तीर कोई हर पाँव में है ज़ंजीर कोई
पूछे कोई उनसे ग़म के मज़े
पूछे कोई उनसे ग़म के मज़े जो प्यार की बातें करते हैं
जो प्यार की बातें करते हैं
ए इश्क़ ये सब दुनिया वाले

उल्फ़त के नये दीवानों को किस तरह से कोई समझाये
किस तरह से कोई समझाये
नज़रों पे लगी है पाबंदी
नज़रों पे लगी है पाबंदी दीदार की बातें करते हैं
दीदार की बातें करते हैं
ए इश्क़ ये सब दुनिया वाले

भँवरे हैं अगर मदहोश तो क्या परवाने भी हैं ख़ामोश तो क्या
सब प्यार के नग़मे गाते हैं
सब प्यार के नग़मे गाते हैं सब यार की बातें करते हैं
सब यार की बातें करते हैं

ए इश्क़ ये सब दुनिया वाले बेकार की बातें करते हैं
बेकार की बातें करते हैं
ए इश्क़ ये सब दुनिया वाले
.......................................................................
Ae ishq ye sab duniya waale-Mughal-e-azam 1960

Artists: Dilip Kumar, Ajit, Sheila Dalaya

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Apr 16, 2016

ख़ुदा निगेहबान हो तुम्हारा-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

गीत संगीत जीवन का अभिन्न अंग है. चाहे कोई ध्वनियों पर
ध्यान दे या ना दे, इनका असर सभी पर पड़ा करता है. सृष्टि
के वरदानों में से एक है संगीत.

फिल्म मुग़ल-ए-आज़म का एक गीत है लता मंगेशकर का गाया
हुआ जिसमें कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार से हैं-

उठे जनाज़ा जो कल हमारा, क़सम है तुमको, न देना काँधा

दर्द की इन्तेहा के आगे अगर कुछ है तो शायद ऐसी पंक्तियाँ
ही बयां कर पाती होंगी. दो अंतरों में ही नाउम्मीदी के ऐसे
बयान लिखने वाले की कल्पनाशक्ति की दाद देना पड़ेगी. वो
समय था जब गीतों के बोलों पर और फिल्मांकन पर मेहनत
की जाती थी. इस फिल्म के गीत, विशेषकर मधुबाला पर
फिल्माए गए अनूठे हैं और प्रस्तुत गीत भावाभिव्यक्ति में
एक कठिन परीक्षा जैसी थी अभिनेत्री के लिए. बैकग्राउंड
में गीत बज रहा है जैसे दिल से भाव निकल रहे हों शब्द
की शक्ल लेकर. यहाँ निगेहबान शब्द का अर्थ है- ईश्वर का
संरक्षण.



गीत के बोल:

वो आई सुबह के परदे से मौत की आवाज़
किसी ने तोड़ दिया जैसे ज़िन्दगी का साज़

ख़ुदा निगेहबान हो तुम्हारा
धड़कते दिल का पयाम ले लो
तुम्हारी दुनिया से जा रहें हैं
उठो हमारा सलाम ले लो

है वक़्त-ए-रुख़्सत, गले लगा लो
ख़ताएं भी आज बख्श डालो
बिछड़ने वाले का दिल न तोड़ो
ज़रा मोहब्बत से काम ले लो
तुम्हारी दुनिया से जा रहें हैं
उठो हमारा सलाम ले लो

उठे जनाज़ा जो कल हमारा
क़सम है तुमको, न देना काँधा
न हो मोहब्बत हमारी रुसवा
ये आँसुओं का पयाम ले लो

ख़ुदा निगेहबान हो तुम्हारा
धड़कते दिल का पयाम ले लो
तुम्हारी दुनिया से जा रहें हैं
उठो हमारा सलाम ले लो
.....................................................................
Khuda Nigehbaan ho tumhara- Mughal-e-azam 1960

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