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Aug 19, 2018

इस दुनिया की पगडण्डी पर-आम्रपाली १९४५

सन १९४५ की फिल्म आम्रपाली से एक गीत सुनते हैं
जो अमीरबाई कर्नाटकी का गाया हुआ है. इसे लिखा
है कवि प्रदीप ने और क्रेडिट्स में मिस कमल का
नाम है. देशभक्ति वाले गीत अंग्रेजों को पसंद नहीं
आते थे अतः प्रदीप को ये काम करना पड़ा. ऐसा
मैंने कहीं पढ़ा है.



गीत के बोल:

इस दुनिया की पगडण्डी पर
तुम्हीं हो मेरे साथी
इक तुम्हीं हो मेरे साथी
मेरे धुंधले जीवन-पथ पर
तुम ओजा की बाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी

तुम हो मेरे दिन के सूरज
मेरी रात के चन्दा
तुम ने मुझको बाँध लिया है
डाल प्रेम का फ़न्दा
मेरे राजकुमार हँसो
मैं तुम पे बालि बालि जाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी

इस विशाल संसार में मैं इक अकेली
काँप रही थी मेरी जीवनवेली
लेकिन जिस दिन तुमको पाया
मैंने मन को धीर बँधाया
अपने घर को स्वर्ग समझ
मैं फूले नहीं समाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी
…………………………………..
Is duniya ki pagdandi par-Amrapali 1945

Artist:

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Apr 5, 2018

उड़ जावूँ रे-आम्रपाली १९४५

आम्रपाली नाम से दो फ़िल्में मेरे ध्यान में हैं-एक तो सन १९४५
वाली और एक सन १९६६ वाली.

आज सुनते हैं विंटेज युग की आम्रपाली से एक गीत जिसे गाया
है अमीरबाई कर्नाटकी ने. सरस्वती देवी के संगीत में बने इस गीत
के बोल कवि प्रदीप ने लिखे हैं.





गीत के बोल:

उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

आज जो मैं पँख कहीं पाऊँ रे
पाऊँ रे
सपनों की नगरी में मैं उड़ जावूँ रे
जावूँ रे
तारों को तोड़ लाऊँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

दिखते हैं देखो कितने प्यारे-प्यारे
नीलम की थाली में चम-चम सितारे
आपस में खेल रहे आँख-मिचोली
आपस में खेल रहे आँख-मिचोली
मैं मन में ललचाऊँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

मेरी जवानी ने खोली है पाँखें
आज मिलावूंगी
आज मिलावूंगी मैं चन्दा से आँखें
ए ए ए चन्दा से आँखें
चल मेरे मनवा आकाश की ओर
चल मेरे मनवा आकाश की ओर
मैं तुझपे वार जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे
.....................................................................
Ud javoon re main to-Amrapali 1945

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Oct 26, 2017

तय करके बड़ी दूर-पहली नज़र १९४५

फिल्म पहली नज़र से एक गीत सुनते हैं मुकेश की आवाज़
में. डगरिया, नगरिया, नजरिया, सांवरिया, बजरिया वाला ये
गीत थोडा अलग हट के है.

गीत के बोल हैं सफ़दर आह सीतापुरी के और धुन बनाई है
अनिल बिश्वास ने.   




गीत के बोल:   

तय करके बड़ी दूर की परपेच डगरिया
ऐ इश्क़ चले आये हैं हम तेरी नगरिया
ओ तेरी नगरिया
तय करके बड़ी दूर की परपेच डगरिया
ऐ इश्क़ चले आये हैं हम तेरी नगरिया
ओ तेरी नगरिया

लहराये हवाओं में हसीनों के दुपट्टे
लहराये हवाओं में हसीनों के दुपट्टे
आये हम लेने के लिए तिरछी नज़रिया
ओ तिरछी नज़रिया
आये हम लेने के लिए तिरछी नज़रिया
ओ तिरछी नज़रिया

तय करके बड़ी दूर की परपेच डगरिया

हो सामने सज धज किये माशूक़ के मजमे
हो सामने सज धज किये माशूक़ के मजमे
सब आ के कहे आओ मेरे बांके साँवरिया
सब आ के कहे आओ मेरे बांके साँवरिया
ओ मेरे बांके साँवरिया
ऐ इश्क़ चले आये हैं हम तेरी नगरिया
ओ तेरी नगरिया

तय करके बड़ी दूर की परपेच डगरिया

परदेस से इक आया है दिल बेचने वाला
परदेस से परदेस से
परदेस से इक आया है दिल बेचने वाला
ऐ हुस्न तेरी आज तो खुल जाए बजरिया
ऐ हुस्न तेरी आज तो खुल जाए बजरिया
ओ खुल जाए बजरिया

ऐ इश्क़ चले आये हैं हम तेरी नगरिया
ओ तेरी नगरिया
तय करके बड़ी दूर की परपेच डगरिया
ऐ इश्क़ चले आये हैं हम तेरी नगरिया
ओ तेरी नगरिया
तय करके बड़ी दूर की परपेच डगरिया
.................................................................................
Tay kar ke badi door-Pehli nazar 1945

Artist:

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Apr 29, 2017

जवानी ये भरपूर-पहली नज़र १९४५

सन १९४५ की फिल्म पहली नज़र से कुछ गीत आप सुन चुके
हैं. एक और सुन लेते हैं जिसे मुकेश और नसीम अख्तर ने
गाया है. सफ़दर आह सीतापुरी के बोल हैं और अनिल बिश्वास
का संगीत.

भारी और भरी आवाजों वाला ज़माना था वो और इस गीत में
दोनों गायकों की आवाजें बुलंद हैं.

   

गीत के बोल:

जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें
बताओ तुम्हे कैसे दिल से बचायें
बताओ तुम्हे कैसे दिल से बचायें
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें

न बख़्शेगा कोई गुनाह-ए-मोहब्बत
न बख़्शेगा कोई गुनाह-ए-मोहब्बत
बड़ी गुफ़तर है ये राह-ए मोहब्बत
बड़ी गुफ़तर है ये राह-ए मोहब्बत
नीची निगाहें चुरा ले ना तुमको
नीची निगाहें चुरा ले ना तुमको
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें

मिटाओ बड़े शौक़ से तुम मिटाओ
मिटाओ बड़े शौक़ से तुम मिटाओ
मगर पहले एक बात हमको बताओ
मगर पहले एक बात हमको बताओ
वफ़ा भी करोगे अगर तुमको चाहे
वफ़ा भी करोगे अगर तुमको चाहे
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें
बताओ तुम्हे कैसे दिल से बचायें
बताओ तुम्हे कैसे दिल से बचायें
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें
जवानी ये भरपूर दिलकश अदायें
.........................................................................
Jawani ye bharpoor-Pehli nazar 1945

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Oct 20, 2016

किधर है तू ए मेरी तमन्ना-कुरुक्षेत्र १९४५

विंटेज संगीत की तरफ एक बार फिर लौटते हैं. आज हम सुनेंगे
फिल्म कुरुक्षेत्र का गीत कुंदनलाल सहगल का गाया हुआ.
जमील मजहरी के बोल हैं और पंडित गणपत राव का संगीत.
कुरुक्षेत्र नाम से सन १९३३ में भी एक फिल्म बनी थी.

फिल्म का निर्देशन रामेश्वर शर्मा ने किया था. इस फिल्म में
सहगल के अलावा राधा रानी, शांति, अजीत और आगा नाम
के कलाकार भी मौजूद हैं.





गीत के बोल:

किधर है तू ए मेरी तमन्ना
किधर है तू ए मेरी तमन्ना
चिराग अजिल था मेरे जला जा
मेरे अंधेरे की रोशनी बन
मेरे अंधेरे की रोशनी बन
इस उजड़ी मन्दिर में मेरी आ जा

मेरे गुलिस्ताँ के लाला-ओ-गुल
गये हैं मुद्दतें गुलफ़तना
ओ मेरे गुलशन में मेरी देवी
ओ मेरे गुलशन में मेरी देवी
फिर आ के इक बार मुस्कुरा जा

हवा रुकी है इसे तलक़ दे
बुझे हैं शोले इन्हें लपक दे
खिज़ा पे बेचैनियाँ छिड़क दे
इक आग सी हर तरफ़ लगा जा

किधर है तू ए मेरी तमन्ना
.............................................................
Kidhar hai too ae meri-Kurukshetra 1945

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Aug 28, 2016

उनका इशारा जान से प्यारा–पहली नज़र १९४५

आपको पहली नज़र से दो गीत सुनवा चुके हैं. अब तीसरा गीत
सुना जाए जिसे नसीम अख्तर ने गाया है. इसके बोल लिखे हैं
सफ़दर आह सीतापुरी ने और संगीत है अनिल बिश्वास का. फिल्म
में मोतीलाल और वीणा प्रमुख भूमिकाओं में हैं. साथ में और
कलाकार भी हैं-मुनव्वर सुल्ताना, बाबुराव पेंढारकर, नीमो, बिब्बो,
बालक राम, बुढो आडवाणी और कुक्कू.

नसीम अख्तर की आवाज़ में गीत ५० के दशक में नहीं सुनाई दिए.
५० के दशक में पूरा मामला ही बदल गया और लता, गीता और
आशा का ज़माना आ गया.

गिटार के कोर्ड्स आप सुन सकते हैं गीत में. अनिल बिश्वास भी
एक प्रयोगधर्मी संगीतकार थे मगर सब नियंत्रित होता था उनके
संगीत में. गायन पर वाद्य यंत्र हावी नहीं होते थे. गीत में सितार
और बांसुरी के भी छोटे छोटे टुकड़े हैं.



गीत के बोल:

उनका इशारा जान से प्यारा
दे गया दिल को मेरे सहारा
उनका इशारा जान से प्यारा
कर के मोहब्बत मुझसे वादा
कह दिया हाँ हाँ मैं हूँ तुम्हारा
मैं हूँ तुम्हारा
जान से प्यारा
दे गया दिल को मेरे सहारा
उनका इशारा जान से प्यारा

जैसे नया एक साज़ बजाया
जैसे नया एक गीत सुनाया
जैसे नया एक साज़ बजाया
जैसे नया एक गीत सुनाया
जागी जागी जागी उमंगें
जागी जागी जागी उमंगें
चौंकी जवानी दिल ने पुकारा
चौंकी जवानी दिल ने पुकारा

जान से प्यारा
जान से प्यारा
दे गया दिल को मेरे सहारा
उनका इशारा जान से प्यारा

खत्म हुआ बचपन का ज़माना
खत्म हुआ बचपन का ज़माना
पी की नगरिया में अब है जाना
पी की नगरिया में अब है जाना
थोड़ी सी नैया और बढ़ा दे
थोड़ी सी नैया और बढ़ा दे
पास है मंज़िल वो है किनारा
पास है मंज़िल वो है किनारा
.........................................................................
Unka ishara jaan se pyara-Pehli nazar 1945

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Aug 27, 2016

आहें न भरीं शिकवे-ज़ीनत १९४५

कुछ गीतों का क्रेज बन जाता है. उसके पीछे की वजह कुछ
भी हो सकती है. कभी कभी बिना वजह भी कोई गीत चर्चित
हो जाता है.

इस गीत के प्रसिद्ध होने के पीछे ऑफिशियल वजह क्या है मुझे
नहीं मालूम मगर जो थोड़े से ज्ञानी हो जाते हैं संगीत के क्षेत्र
में वे इस गीत के नाम से ही आह-आह और वाह-वाह करने
लगते हैं.

एक बड़ी वजह जो मुझे समझ आई वो है इसके फेमस होने
में-ये महिला कव्वाली है और शायद उस समय तक किसी हिंदी
फिल्म में टोटल महिला कव्वाली नहीं आई थी. नूरजहाँ और
जीनत बेगम तो उस समय की नामचीन गायिकाएं थीं मगर
कल्याणी का नाम उतना चर्चित नहीं था.

हम भी एडवांस में वाह वाह कर लेते हैं और आपको गीत
सुनवाते हैं. तीन गायिकाएं-नूरजहाँ, जोहरा बाई अम्बालेवाली
और कल्याणी इस गीत को गा रही हैं. नक्शब जराचवी के
लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है मीर साहब ने.



गीत के बोल:

आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
कुछ भी न जुबां से काम लिया
आहें न भरीं शिकवे न किए
आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
कुछ भी न जुबां से काम लिया
कुछ भी न जुबां से काम लिया
इस पर भी मोहब्बत छुप न सकी
जब तेरा किसीने नाम लिया
दिल को पकड़ कर बैठ गए
हाथों से कलेजा थाम लिया

पूछा जो किसी ने हाल तो हम
पूछा जो किसी ने हाल तो हम
कुछ कह न सके कुछ कह भी गए
कुछ कह न सके अजी हाँ हाँ
रोके तो बहुत आँसू लेकिन
कुछ रुक भी गए कुछ बह भी गए
कुछ रुक भी गए कुछ
कुछ रुक भी गए कुछ बह भी गए
अफ़साना कहा और लब न हिले
अश्कों से जहाँ का काम लिया

आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया

रोने से भला क्या दिल रुकता
क्या दिल रुकता
क्या दिल रुकता
दुनिया को तड़प कर तड़पाता
दुनिया को तड़प कर हाँ हाँ
दुनिया को तड़प कर तड़पाता
सच पूछिये वो तो ख़ैर हुई
सच पूछिये वो तो ख़ैर हुई
महफ़िल में तमाशा बन जाता
महफ़िल में तमाशा बन जाता
महफ़िल में तमाशा बन जाता
कुछ आप अदाएं रोक गए
कुछ ज़ब्त से हम ने काम लिया
कुछ आप अदाएं रोक गए
कुछ ज़ब्त से हम ने काम लिया

वो लाख तुम्हारे ज़ुल्म सहे
हाँ ज़ुल्म सहे
अजी ज़ुल्म सहे
पर आँख से आँसू बह न सका
बीमार-ए-मोहब्बत ऐ नक्शब
कुछ और तो मुँह से कह न सका
इक ठण्डी सी लम्बी आह भरी
चुपके से किसी का नाम लिया
इक ठण्डी सी लम्बी आह भरी
चुपके से किसी का नाम लिया


आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
...................................................................
Aahen na bahri shikwe na kiye-Zeenat 1945

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Aug 21, 2016

आ इंतज़ार है तेरा-बड़ी माँ १९४५

सन १९४५ को गुज़रे ६१ साल हो गए लेकिन उस युग के
गीत सुनो तो अब भी ताजे लगते हैं. आइये आज सुनें
नूरजहाँ का गाया हुआ एक मधुर गीत जिसे जिया सरहदी
ने लिखा और दत्ता कोरगाँवकर ने संगीत से संवारा.

फिल्म का नाम है बड़ी माँ जिसमें ईश्वरलाल और नूरजहाँ
की प्रमुख भूमिकाएं हैं. ये फिल्म वर्ष १९४५ की टॉप पांच
फिल्मों में से एक है. फिल्म गीतों से भरपूर है और इसमें
१० गीत हैं.



गीत के बोल:

आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा
आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा

आ जा न सता और
आ जा न रुला और
आ जा न सता और
आ जा न रुला और

आ जा कि तू ही है मेरी उम्मीद का तारा
उम्मीद का तारा
उम्मीद का तारा
आ जा कि तू ही है मेरी उम्मीद का तारा
संगम मेरी ख़ुशियों का निगाहों का सहारा
संगम मेरी ख़ुशियों का निगाहों का सहारा

आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा

आ कर मेरी जागी हुई रातों को सुला दे
खो जाऊँ
खो जाऊँ मुझे ऐसा कोई गीत सुना दे
आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा
आ जा आ जा

अब और सितम
अब और सितम हम से उठाए नहीं जाते
उठाए नहीं जाते
और राज़ मोहब्बत के
और राज़ मोहब्बत के छुपाए नहीं जाते
छुपाये नहीं जाते

आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा
दिल बेक़रार है मेरा
…………………………………………………….
Aa intazar hai tera-Badi Maa 1945

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Aug 1, 2016

पहली नज़र का तीर–पहली नज़र १९४५

मुकेश और नसीम अख्तर का गाया एक युगल गीत सुनते
हैं फिल्म पहली नज़र से. सफ़दर आह सीतापुरी के लिखे इस
गीत की तर्ज़ बनायीं है अनिल बिश्वास ने.

फिल्म में मोतीलाल, वीणा, मुनव्वर सुल्ताना, बाबुराव पेंढारकर
और बिब्बो जैसे कलाकार हैं. मजहर आर्ट्स के लिए इस फिल्म
का निर्देशन मज़हर खान ने किया था.

गीत फिल्माया गया है मोतीलाल और मुनव्वर सुल्ताना पर.



गीत के बोल:

पहली नज़र का तीर रे लगा
पहली नज़र का तीर
हो लगा पहली नज़र का तीर
अल्लाह लगा पहली नज़र का तीर

दिल था नाज़ुक टूट गया वो
दिल था नाज़ुक टूट गया वो
उनकी क्या तकदीर
हो लगा पहली नज़र का तीर
अल्लाह लगा पहली नज़र का तीर
हो लगा पहली नज़र का तीर

हो लाख सँभाला मैंने जी को
आँखों ने चुपके चुपके चुपके
देखा किसी को
देखा किसी को
हो लाख सँभाला मैंने जी को
आँखों ने चुपके चुपके चुपके
देखा किसी को
देखा किसी को
दिल में बनी तस्वीर
दिल में बनी तस्वीर 
हो लगा पहली नज़र का तीर

दिल था नाज़ुक टूट गया वो
दिल था नाज़ुक टूट गया वो
उनकी क्या तकदीर
हो लगा पहली नज़र का तीर
अल्लाह लगा पहली नज़र का तीर
हो लगा पहली नज़र का तीर

प्रीत की तमन्ना पर आने दो
गंगा जमुना मिल जाने दो
मिल जाने दो
मिल जाने दो
प्रीत की तमन्ना पर आने दो
गंगा जमुना मिल जाने दो
मिल जाने दो
मिल जाने दो
जाग उठे तकदीर
जाग उठे तकदीर

हो लगा पहली नज़र का तीर
रे लगा पहली नज़र का तीर
हो लगा पहली नज़र का तीर
अल्लाह लगा पहली नज़र का तीर
.....................................................
Pehli nazar ka teer-Pehli nazar 1945

Artists: Motilal, Munawwar Sultana

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Jul 18, 2016

सजा नसीब ने दे दी-एक दिन का सुल्तान १९४५

दुर्लभ गीतों के श्रृंखला में आज प्रस्तुत है अमीरबाई कर्नाटकी
का गाया हुआ एक गीत फिल्म एक दिन का सुल्तान ने. आप
सभी सोहराब मोदी के नाम से परिचित अवश्य होंगे. इस फिल्म
का निर्देशन उन्होंने ही किया है. मिनर्व मूवीटोन द्वारा निर्मित
इस फिल्म में मेंहताब और वास्ती प्रमुख कलाकार हैं.

गीत की विशेषता है कि इसे शमशाद बेगम ने गाया है फिल्म के
लिए और रेकोर्ड के लिए अमीरबाई कर्नाटकी ने. ऐसा कुछ मौकों
पर हुआ है हिंदी फिल्मों में उदाहरण के लिए अशोक कुमार के
परदे पर गाये गीत जिनके अधिकतर रेकोर्ड वर्ज़न अरुण कुमार
ने गाये.

प्रस्तुत गीत लिखा है वली साहब ने और इसकी धुन बनाई है
रफ़ीक गज़नवी ने.



गीत के बोल:

सजा नसीब ने दे दी नज़र मिलाने की
सजा नसीब ने दे दी नज़र मिलाने की
के शाख ही ना रही मेरे आशियाने की
के शाख ही ना रही मेरे आशियाने की
सजा नसीब ने दे दी नज़र मिलाने की

फिजा बहार में आई है हसरतें ले कर
फिजा बहार में आई है हसरतें ले कर
रहेंगी याद हमें करवटें ज़माने की
रहेंगी याद हमें करवटें ज़माने की

सजा नसीब ने दे दी नज़र मिलाने की

गिला फलक से नहीं
गिला फलक से नहीं उसकी बेवफाई का
गिला फलक से नहीं उसकी बेवफाई का
हंसा हंसा के है आदत उसे रुलाने की
हंसा हंसा के है आदत उसे रुलाने की

सजा नसीब ने दे दी नज़र मिलाने की

क़ज़ा भी साल है
क़ज़ा भी साल है दो बेकरार रूहों का
क़ज़ा भी साल है दो बेकरार रूहों का
मैं राह देख रही हूँ क़ज़ा के आने की
मैं राह देख रही हूँ क़ज़ा के आने की

सजा नसीब ने दे दी
.......................................................
Saza naseeb ne de di-Ek din ka sultan 1945

Artist: Mehtab

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May 25, 2016

जवानी मस्तानी है-धमकी १९४५

जवानी सन १९४५ के गीत में भी उतनी ही मस्तानी
हुआ करती थी जितनी के आज के गीतों में होती है.
धमकी नाम से तकरीबन ३ फ़िल्में बन चुकी हैं. एक
तो वो है जिसमें गणेश का संगीत है सन १९७३ की,

इसको सुन कर आपको गर कोई दूसरा गीत याद आने
लगे तो आश्चर्य बिलकुल मत कीजियेगा. दुनिया बहुत
ही गोल है और संगीत के मामले में भी ये ज्यादा गोल
है. आपको केवल एक गीत का हिंट देते हैं बाकी के दो
खुद आप तलाशिये. इसकी दूसरी पंक्ति और पिया गए
रंगून की दूसरी पंक्ति भाई-बहन जैसी सुनाई देती है.

मेरे कान थोड़े क्या बहुत पाक गए हैं और पुराने गीतों
के बोल पकड़ने में मैं मैं थोडा पिछड़ा हुआ हूँ, मेरे कान
वो क्या कहते हैं ६/६ नहीं हैं न इसलिए बोल सही होने
की कोई गारंटी नहीं दे सकता.



गीत के बोल:

जवानी मस्तानी है
पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है
पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है

एक थी लैला एक था मजनू
दोनों की आपस में हो गयी कुछ यूँ यूँ
दोनों की आपस में हो गयी कुछ यूँ यूँ
इश्क का रोग लगा के दोनों बिन आई ले आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है
इश्क का रोग लगा के दोनों बिन आई ले आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है

पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है

पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है

हीर की सुनो कहानी
रांझा को देखा मुंह में भर आया पानी
हीर की सुनो कहानी
रांझा को देखा मुंह में भर आया पानी
हंस के बोली प्यार करन की रूत है प्यार करेंगे
हंस के बोली प्यार करन की रूत है प्यार करेंगे
हम भी डूबेंगे सनम तुम को भी ले डूबेंगे
हम भी डूबेंगे सनम तुम को भी ले डूबेंगे
फिर फिल्म से निकली हाय बाज़ न आये
हाय रे हाय
हाय जवानी मस्तानी है

पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जबानी मस्तानी है

पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है
........................................................................
Jawani mastani hai-Dhamki 1945

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Feb 25, 2016

दिल जलता है तो-पहली नज़र १९४५

गायक मुकेश का पहला हिंदी फ़िल्मी गीत है ये फिल्म
पहली नज़र से जिसे उस समय के मशहूर अभिनेता और
सुपरस्टार मोतीलाल पर फिल्माया गया था.

मुकेश का आगमन हिंदी फिल्मों में ४ साल पहले हो चुका
था फिल्म निर्दोष(१९४१) में उन्होंने अभिनय किया था.

इस गीत में सहगल प्रभाव स्पष्ट झलकता है. उस समय के
प्रमुख गायक सहगल के अंदाज़ में गाने की कोशिशें किया
करते थे. मुकेश ज़ल्द ही उस प्रभाव से मुक्त हो गए और
अपनी पहचान बना ली.




गीत के बोल:

दिल जलता है तो जलने दे
आँसू ना बहा फ़रियाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

तू परदा नशीं का आशिक़ है
यूं नाम-ए-वफ़ा बरबाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

मासूम नजर के तीर चला
बिस्मिल को बिस्मिल और बना
अब शर्म-ओ-हया के परदे में
यूं छुप छुप के बेदाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

हम आस लगाये बैठे हैं
तुम वादा करके भूल गये
या सूरत आ के दिखा जाओ
या कह दो हमको याद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे
…………………………………………………….
Dil jalta hai to-Pehli nazae 1945

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Jul 24, 2011

बैठी हूँ तेरी याद का ले कर के सहारा-विलेज गर्ल १९४५

आपको फिल्म विलेज गर्ल के दो गीत सुनवाए थे पहले, आशा है
पसंद आये होंगे. अब सुनते हैं तीसरा गीत. ये भी नूरजहाँ की मधुर
और बुलंद आवाज़ में है. नायिका इतनी बेचैन है कि सीढ़ी चढ कर
घास फूस के बने मचान के ऊपर बैठ गयी है और गा रही है-बैठी हूँ
तेरी याद का लेकर सहारा.



गीत के बोल:


बैठी हूँ तेरी याद का ले कर के सहारा
आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

दिन रात जला करती हूँ फ़ुरकत में तुम्हारी
हर साँस धुआँ बनके निकलता है हमारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

चुप चाप सहे जाती हूँ मैं दर्द की चोटें
ले ले के जिये जाती हूँ मैं नाम तुम्हारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

अक्सर मेरी आँखों ने तुझे नींद में ढूँडा
उठ उठ के तुझे दिल ने कई बार पुकारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा
........................................
Baithi hoon teri yaad ka-Village girl 1945

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Jul 19, 2011

ये कौन हँसा किसने सितारों को-विलेज गर्ल १९४५

मैडम नूरजहाँ (जी हैं जैसे कि नूरजहाँ की आवाज़ के दीवाने उनको
पुकारते हैं), की आवाज़ में अगला गीत सुनिए फिल्म विलेज गर्ल से.
बोल एक बार फीस वाली साहब के हैं और संगीत श्याम सुन्दर का.

मैडम का संबोधन आपने और किसी गायिका के लिए नहीं सुना होगा.
कितनी मैडमें आयीं और गयीं मगर हिंदी उर्दू सिनेमा संगीत के इतिहास
में केवल एक ही मैडम हैं-वो हैं नूरजहाँ.

ये फिल्म अविभाजित भारत के फिल्म जगत बम्बई में बनायीं गयी थी.
विभाजन के बाद कई फ़िल्मी हस्तियाँ दूसरे देश में चली गयीं उनमें एक
नूरजहाँ भी हैं.





गीत के बोल:

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन

रहता है मेरी आँखों में आशाओं का मेला
रहता है मेरी आँखों में आशाओं का मेला
सपनों में हुआ करता है बालम से झमेला, होय
सपनों में हुआ करता है बालम से झमेला
नैनों की मधुर बीना पे
नैनों की मधुर बीना पे क्या राग सुनाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन

भाती नहीं है अब मुझे सावन की जवानी
भाती नहीं है अब मुझे सावन की जवानी
होंठों पे सदा रहती है साजन की कहानी, होय
होंठों पे सदा रहती है साजन की कहानी
इस प्रेम मिलन ने
इस प्रेम मिलन ने मुझे दीवाना बनाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन
........................................
Ye kaun hansa-Village Girl 1945

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Jun 2, 2011

किस तरह भूलेगा दिल-विलेज गर्ल १९४५

आपको फिल्म विलेज गर्ल का एक गीत सुनवाया था ४-५ दिन पहले।
अब दूसरा गीत सुनिए जो खासा लोकप्रिय हुआ। नूरजहाँ की दिलकश
आवाज़ और मोहक अदाओं भरा ये गीत सदा जवान गीतों की श्रेणी
में आता है। प्यार समर्पण और इबादत का दूसरा नाम है, गीत की
अंतिम पंक्तियाँ इसी बात को समर्थन देती प्रतीत होती हैं। दिल तोड़ने
वाले के लिए दुआएं निकल रही हैं।





गीत के बोल:

किस तरह भूलेगा दिल
उनका ख़याल आया हुआ
जा नहीं सकता अभी
शीशे में बाल आया हुआ

ओ घटा काली घटा, अब के बरस तू ना बरस
ओ घटा काली घटा, अब के बरस तू ना बरस
मेरे प्रीतम को अभी परदेस है भाया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ

आ चमन से, हे ऐ ऐ ऐ
आ चमन से दूर बुलबुल
जाके रोयें, रोयें साथ साथ
तेरा दिल भी चोट है मेरी तरह खाया हुआ
तेरा दिल भी चोट है मेरी तरह खाया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ

ख़ुश रहे दुनिया में वो जिसने है तोड़ा दिल मेरा
दे रहा है ये दुआ आँखों में अश्क आया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ
..................................
Kis tarah bhoolega dil-Village girl 1945

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May 22, 2011

सैयां सलोने से नैन मिला के-विलेज गर्ल १९४५

जोर का झटका धीरे से। आपको सन १९५० के भी पीछे लिए
चलते हैं। आज आपको विलेज गर्ल अर्थात 'गाँव की गोरी' फिल्म
का गीत सुनवाते हैं। वली साहब के गीत की धुन तैयार की
है संगीतकार श्याम सुन्दर ने। गाने और वाद्य संयोजन में
पंजाबियत बरकरार है। श्याम सुन्दर पंजाबी मूल के संगीतकार
थे। शेम सुन्दर ने कम फिल्मों में संगीत दिया मगर वे अपनी
अलग छाप छोड़ गये फिल्म जगत पर। गाना मेहँदी और लीपापोती
की रस्म के बाद गियर बदलता है और एक मस्त गीत सुनाई देने
लगता है। जिस कलाकार को मेहँदी लगायी जा रही है उसका नाम
है नूरजहाँ जिनके कई गीत आपने सुने होंगे। नजीर नाम के शख्स
दूल्हा बने हैं और घोड़ी के आगे नाचने वाली कलाकार का नाम है
गीता निजामी। गीत गाया है अमीर बाई कर्नाटकी ने। इस ब्लॉग पर
श्याम सुन्दर का ये गीत सुनिए आपको उनके संगीत को पहचानने
में मदद मिलेगी-ऐसे रसिया का-ढोलक

नूरजहाँ के हाव भाव देख कर ऐसा लग रहा है की उनको मेहँदी लगवाने
में आनंद आ रहा है। उल्लेखनीय है कि ये फिल्म नूरजहाँ की शुरुआती
कुछ फिल्मों में से एक है।



गीत के बोल:

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई

सैयां सलोने से नैन
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई

सैयां सलोने से नैन

हो, रावी किनारे
रावी किनारे मोरा छोटा सा गाँव
रावी किनारे मोरा छोटा सा गाँव
पतझड़ की धूप छांव
तारों की छांव
पतझड़ की धूप छाँव
तारों की छांव
सूनी नगरिया बसो मोरे राजा हो
मोरे सैयां हो
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई
सैयां सलोने से नैन

हो नैनों के गाँव
नैनों के गाँव में आजा रे बालम
नैनों के गाँव में आजा रे बालम
सपनों की दुनिया बसा जा रे बालम
सपनों की दुनिया बसा जा रे बालम
फिर मुझको गरवा लगा मोरे राजा हो
मोरे सैयां हो
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
....................................
Saiyan salone se nain-Village girl 1945

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Mar 27, 2010

नदी किनारे साँझ सकारे- प्रभु का घर १९४५

आइये एक बार फिर से गुज़रे ज़माने की ओर चला जाए।
सन १९४५ कि एक फिल्म है-प्रभु का घर। इस फिल्म का
संगीत तैयार किया था खेमचंद प्रकाश ने। फिल्म में कुछ
सुनने लायक गीत हैं। इसी फिल्म से सुनिए पंडित इन्द्र का
लिखा हुआ और खुर्शीद का गाया गीत ।



गीत के बोल:

नदी किनारे साँझ सकारे
मिलते रहियो, हाँ
मिलते रहियो ओ परदेसी
मिलते रहियो ओ परदेसी
ओ परदेसी, परदेसी
मिलते रहियो, हाँ,
मिलते रहियो ओ परदेसी

ठंडी हवाएं संग चलायें
घिर घिर आयें कली घटायें
ठंडी हवाएं संग चलायें
घिर घिर आयें कली घटायें

चांदनी रातें या बरसातें
चांदनी रातें या बरसातें

रुक ना सकेंगी ये मुलाकातें
प्यार की बातें
रुक ना सकेंगी ये मुलाकातें
प्यार की बातें

चाँद ने देखा हमने तुमने
नैनों में नैना डाले
हे हे हे ,नैनों में नैना डाले

नदी किनारे साँझ सकारे
मिलते रहियो, हाँ
मिलते रहियो ओ परदेसी

ये दो पंछी प्यासे आये
प्यासे हैं रस कौन पिलाये
ये दो पंछी प्यासे आये
प्यासे हैं रस कौन पिलाये

पीने पर भी प्यास ना जाए
पीने पर भी प्यास ना जाए
जान गाई अँखियाँ जादू वाले
जान गाई अँखियाँ जादू वाले
तेरे दिल के इशारे
तेरे दिल के इशारे

नदी किनारे साँझ सकारे
मिलते रहियो, हाँ
मिलते रहियो ओ परदेसी
ओ परदेसी

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Sep 29, 2009

दिल जलता है-पहली नज़र १९४५

तकरीबन हर गायक कलाकार ने ४० और ५० के दशक में एक न एक
बार सहगल की आवाज़ की नक़ल की कोशिश अवश्य की। ये बात अलग है कि
सी एच आत्मा के अलावा उनके नज़दीक कोई नहीं पहुँचा। ये मुकेश की
आवाज़ में एक गीत है पहली नज़र फ़िल्म से जिसका संगीत अनिल बिश्वास
द्वारा तैयार किया गया है। बोल लिखे हैं शायर आह सीतापुरी ने। गीत शानदार है
और इसकी ये पंक्तियाँ आज भी गूंजती हैं कानों में :

मासूम नजर के तीर चला
बिस्मिल को बिस्मिल और बना



गाने के बोल:

दिल जलता है तो जलने दे
आँसू ना बहा फ़रियाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे
आँसू ना बहा फ़रियाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

तू परदानशीं का आशिक़ है
यूं नाम-ए-वफ़ा बरबाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

मासूम नजर के तीर चला
बिस्मिल को बिस्मिल और बना
मासूम नजर के तीर चला
बिस्मिल को बिस्मिल और बना
अब शर्म-ओ-हया के परदे में
यूं छुप छुप के बेदाद ना कर
अब शर्म-ओ-हया के परदे में
यूं छुप छुप के बेदाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

हम आस लगाये बैठे हैं
तुम वादा करके भूल गये
हम आस लगाये बैठे हैं
तुम वादा करके भूल गये
या सूरत आ के दिखा जाओ
या कह दो हमको याद ना कर
या सूरत आ के दिखा जाओ
या कह दो हमको याद ना कर

दिल जलता है, दिल जलता है,
दिल जलता है ...

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