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Dec 23, 2009

सुध बिसर गई आज-संगीत सम्राट तानसेन १९६२

१९६२ का साल भी काफ़ी समृद्ध वर्ष रहा फ़िल्म संगीत के क्षेत्र में। एक और
गुणी संगीतकार जो आखिरी के वर्षों में केवल धार्मिक और पौराणिक फिल्मों तक
सिमट कर रह गए वो हैं- एस एन त्रिपाठी जिनका पूरा नाम श्रीनाथ त्रिपाठी है।
इस फ़िल्म के निर्देशक भी वे स्वयं हैं।

संगीत सम्राट तानसेन फ़िल्म को वो प्रशंसा नहीं मिली दर्शकों की, जो इसी विषय
पर बनी फ़िल्म बैजू बावरा को प्राप्त हुई, हालांकि फ़िल्म बैजू बावरा में तानसेन के
ऊपर दृश्य कम थे। एक तुलना जैसी बात हो जाती है जब भी उसी विषय पर बाद
में फ़िल्म आती है। अनारकली फ़िल्म और मुग़ल ऐ आज़म का अलग रहा। दोनों ही
हिट फ़िल्में रही । अनारकली पहले आई और मुग़ल ऐ आज़म बाद में , लेकिन बाद
में आई फ़िल्म ने सफलता के नए कीर्तिमान बना दिए। फ़िल्म में एक कारक नहीं
वरन कई कारण होते हैं उसको सफल बनने में। एक भी अवयव कहीं कमज़ोर रह
जाए तो वो तकलीफ देता है। कई अच्छी अच्छी फ़िल्में केवल बेकार संपादन की वजह
से पिट गयीं।

ये जो गीत है इसमे भारत भूषण आपको नज़र आयेंगे। भारत भूषण को फ़िल्म
बैजू बावरा से अपार प्रसिद्धि हासिल हुई थी। बैजू बावरा फिल्म में उन्होंने बैजू का
किरदार निभाया था । इस गीत को गाया है मन्ना डे और रफ़ी ने। बोल लिखे हैं
शैलेन्द्र ने जिन्होंने फ़िल्म के अनुरूप बढ़िया लेखन किया है।
"हर राग में पीर है किसके मन की ?"



गीत के बोल:

सुध बिसर गई आज
अपने गुनन की

सुध बिसर गई आज
अपने गुनन की

आई गई बात बीते दिनन की

सुध बिसर गई आज
अपने गुनन की

बिखरे सपन सारे विघ्ना से हम हारे
बिखरे सपन सारे विघ्ना से हम हारे
आंसुओं में डूबी हैं पलकें नयन की
पलकें नयन की

सुध बिसर गई आज
अपने गुनन की

जियरा के दो टूट, गयी प्रेरणा रूठ
जियरा के दो टूट, गयी प्रेरणा रूठ

घुट घुट गई सूख
सरिता सुरन की
सरिता सुरन की

हा आ आ, सुध बिसर गई आज
अपने गुनन की
आई गई बात बीते दिनन की

सुध बिसर गई आज

ध नि सा म, म ग म ध, ध म ध स
नि स ग, स नि स नि, ध नि ध, म ध म
ग म ध म ध नि स नि ध प म,
नि ध प म, नि ध प म

सुध बिसर गई आज
अपने गुनन की

हाय रे कलाकार जाने न संसार
हर राग में पीर है किसके मन की
हर राग में पीर है किसके मन की
हाय, किसके मन की

सुध बिसर गई आज
अपने गुनन की

सुध बिसर गयी आज
अपने गुनन की
आ ही गयी बात बीते दिनन की

सुध बिसर गयी
आज अपने गुनन की
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Sudh bisar gayi-Sangeet Samrat Tansen 1962

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Dec 15, 2009

बदली बदली दुनिया है मेरी-संगीत सम्राट तानसेन १९६२

एक कर्णप्रिय युगल गीत लता और महेंद्र कपूर का गाया हुआ
सुनिए जो धीमा है और हलके हलके आपको आनंदित करता
है। इसे लिखा है शैलेन्द्र ने और धुन बनाई है एस एन त्रिपाठी
ने। ये फिल्म सन १९६२ में आई थी और इसमें तानसेन की
भूमिका में भारत भूषण हैं। अनीता गुहा नाम की अभिनेत्री
परदे पर दिखाई देंगी आपको जिन्होंने फिल्म में हंसा नाम के
चरित्र की भूमिका निभाई थी।



गीत के बोल:

बदली बदली दुनिया है मेरी
जादू है ये क्या तेरे नैनन का
बनके कजरा अँखियों में रहा
एक सुंदर सपना बचपन का
बनके कजरा अँखियों में रहा
एक सुंदर सपना बचपन का

कहती थी सदा दिलकी धड़कन
कहती थी सदा दिलकी धड़कन
तू बैठ बिछाके अपने नयन
सच्ची है अगर ये तेरी लगन
लौट आएगा साथी जीवन का

बदली बदली दुनिया है मेरी

मेरे गीतों के चंचल स्वर
मेरे गीतों के चंचल स्वर
आए होंगे बादल बनकर
बरसे होंगे इस आँगन पर
देके संदेस मेरे मन का

बदली बदली दुनिया है मेरी

इस रात को चाँद तले ये मिलन
इस रात को चाँद तले ये मिलन
चुप देख रहा है नील गगन
दौहरायेगा ये मद-मस्त पवन
संगीत हमारी धड़कन का

बदली बदली दुनिया है मेरी
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Badli badli duniya hai meri-Sangeet samrat Tansen 1962

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May 25, 2009

झूमती चली हवा-संगीत सम्राट तानसेन १९६२

मुकेश का गाया ये एक सदाबहार गीत है। फ़िल्म में तानसेन बने
भारत भूषण इसे गा रहे हैं परदे पर। उन्हें कौन याद आया ये जानने
के लिए आपको फ़िल्म देखनी पड़ेगी । गीत शैलेन्द्र का लिखा हुआ है
और धुन बनाई है एस. एन. त्रिपाठी ने।



गीत के बोल:

झूमती चली हवा
झूमती चली हवा, याद आ गया कोई
बुझती बुझती आग को, फिर जला गया कोई

झूमती चली हवा ...

खो गई हैं मंज़िलें, मिट गये हैं रास्ते
खो गई हैं मंज़िलें, मिट गये हैं रास्ते
गर्दिशें ही गर्दिशें, अब हैं मेरे वास्ते
अब हैं मेरे वास्ते
और ऐसे में मुझे, फिर बुला गया कोई
झूमती चली हवा ...

चुप हैं चाँद चाँदनी, चुप ये आसमान है
चुप हैं चाँद चाँदनी, चुप ये आसमान है
मीठी मीठी नींद में, सो रहा जहान है
सो रहा जहान है
आज आधी रात को, क्यों जगा गया कोई

झूमती चली हवा ...

एक हूक सी उठी, मैं सिहर के रह गया
एक हूक सी उठी, मैं सिहर के रह गया
दिल को अपना थाम के आह भर के रह गया
आह भर के रह गया
चाँदनी की ओट से मुस्कुरा गया कोई

झूमती चली हवा ...
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Jhoomti chali hawa-Sangeet samrat Tansen 1962

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