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Aug 6, 2011

बादलों बरसो नयन की कोर से-सम्पूर्ण रामायण १९६१

फिल्म सम्पूर्ण रामायण से एक गीत सुनिए लाता मंगेशकर की आवाज़ में.
गीत भरत व्यास का है और संगीत वसंत देसाई का. अनीता गुहा नाम की
अभिनेत्री पर इसे फिल्माया गया है. भरत व्यास के गीत में आप फ़िल्मी
गैर फ़िल्मी दोनों प्रकार की कविता का आनंद ले सकते हैं. फ़िल्मी कविता
में कभी कभार छेड़-छाड़ हो जाती है धुन बनाते वक्त.

सुगठित भारी काया और गोल भरे चेहरे वाली अभिनेत्री अनीता गुहा धार्मिक
फिल्मों में काफी दिखाई दीं. गौरतलब है उन्होंने किशोर कुमार के साथ फिल्म
चाचा जिंदाबाद में काम किया है.







बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से
बिजलियों कड़को ह्रदय की ओर से
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
बादलों बरसो नयन की कोर से

ऐ घटाओं गर्जना को थाम लो
ऐ घटाओं गर्जना को थाम लो
आज मेरे करुण स्वर से काम लो
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आज मेरे,
आज मेरे करुण स्वर से काम लो
बंध गया सावन नयन की डोर से

बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से

ज़हर को अमृत समझ कर पी रही
ज़हर को अमृत समझ कर पी रही
मीन जल बिन दीन हो कर जी रही
प्राण तड़पे भाग्य के झकझोर से

बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से
बिजलियों कड़को ह्रदय की ओर से
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
बादलों बरसो नयन की कोर से
....................................
Badlon barso nayan ki kor se-Sampoorna Ramayana 1961

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Apr 30, 2010

तुमसे दूर चले-प्यार की राहें १९५९

समय समय पर हिंदी फिल्म संगीत के दरवाजे पर गुमनाम से लोगों ने
भी दस्तक दी है। ऐसा ही एक नाम है कनु घोष जिन्होंने १९५९ की फिल्म
प्यार की राहें का संगीत तैयार किया था। गीत लिखा है थोडा पहचाने से
नाम-प्रेम धवन ने। गायक ज़रूर नामचीन हैं इस गीत के-हेमंत कुमार और
लता मंगेशकर। प्रदीप कुमार और अनीता गुहा अभिनीत और लेखराज भाकरी
निर्देशित फिल्म कब आई कब गई शायद फिल्म के नायक नायिका को भी
याद नहीं रहा होगा।

मैंने आपसे ३ पोस्ट पहले वादा किया था इसलिए आपको काले-पीले(श्वेत-श्याम)
युग की ओर लेकर आया हूँ।



गीत के बोल:

तुम से दूर चले
हम मजबूर चले
प्यार भरे दिल मिल ना सके
नील गगन के तले
नील गगन के तले
तुम से दूर चले
हम मजबूर चले
प्यार भरे दिल मिल ना सके
नील गगन के तले
नील गगन के तले

ना तेरी खता ना मेरी खता
ये है किस्मत के खेल
तुम भी चाहो हम भी चाहें
हो ना सके पर मेल
मैं मजबूर हुयी
तुमसे दूर हुयी
रूठी हुयी तकदीर के आगे
किसका जोर चले
किसका जोर चले

सुख चैन गया अरमान लूटे
इस प्यार की राहों में
ओ प्रीत मेरी ओ गीत मेरे
ढल गए आहों में
तुम बिन राह ना सकूं
पर कुछ कह ना सकूं
लोक लाज के घूंघट में
रो रो कोई जले
रो रो कोई जले

तुम से दूर चले
हम मजबूर चले
प्यार भरे दिल मिल ना सके
नील गगन के तले
नील गगन के तले

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Apr 28, 2010

चला है कहाँ-संजोग १९६१

कुछ गीत स्वतः दिमाग में कौंध जाते हैं। ऐसा ही एक गीत है
जो मुझे सदा से आकर्षित करता रहा। कुछ विशेष वजह होगी इसकी,
मुझे चल, चला, चला है, इत्यादि शब्द वाले गाने ज्यादा ध्यान में
आते हैं। उसके अलावा जो गीत थोड़ी ऊंची पट्टी पर गाये गए होते
हैं वो दिमाग के किसी कोने में ज़रूर अपना स्थान बना लेते हैं।

ये प्रश्नवाचक गीत है फिल्म संजोग से जिसमे अभिनेत्री अनीता गुहा
नायक प्रदीप कुमार से संगीतमय प्रश्न पूछ रही हैं । गीत राजेंद्र कृष्ण
का लिखा हुआ है और धुन है मदन मोहन की। फिल्म के ३ गीतों पर
हम पहले चर्चा कर चुके हैं। आइये इस मधुर गीत का आनंद उठायें ।



गीत के बोल:



चला है कहाँ
चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,


चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

अँखियाँ मेरी सपने तेरे, हो हो
देख ज़रा ओ साथी मेरे, हो हो
दिल दीवाना तुझे पुकारे
करे इशारे ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

आ, आ, हा हा, आ आ आ
हा हा, आ आ आ आ

सावन भी आनेवाला है, हो हो
रंग नया लानेवाला है हो ओ
रुत अलबेली मुझे अकेली
देख सहेली ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

फूल बनी है कली अभी तो हो ओ
बनायें है दिल की गली अभी तो हो ओ
अभी अभी तो पायल मेरी बाजी
छम छम ..... ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

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Mar 7, 2010

आना है तो चले आओ-टैक्सी स्टैंड १९५८

एक कर्णप्रिय युगल गीत सुनवाया जाए आज। ये है एक
गुमनाम सी फिल्म 'टैक्सी स्टैंड' से। फिल्म सन १९५८ में
रिलीज़ हुई थी। उम्मीद है कि बड़े बड़े सिनेमा प्रशंसकों ने
ही इसको देखा होगा। खैर, फिल्म जैसी भी हो, ये गीत आपने
ज़रूर एक ना एक बार सुना होगा और शायद इसके बारे में
आपने मालूमात करने की कोशिश भी की हो। ये गीत मेरी
पसंद का गीत है। मजरूह सुल्तानपुरी ने गीत लिखा हैं और
आवाजें हैं आशा और रफ़ी की। इस फिल्म में चंद्रशेखर
और अनीता गुहा मुख्य कलाकार हैं। चित्रगुप्त की विविधता
का अंदाज़ा लगाने के लिए ये गीत सुनना ज़रूरी है ।



गीत के बोल:

आना है तो चले आओ सुहानी शाम है
ऐसे में आपसे दिल को ज़रूरी काम है

हमको भी तो, कसम ले लो, कहाँ आराम है
पहलू में दर्द है लब पे तुम्हारा नाम है

इतना ही तुमसे हमको था कहना
दिल में समाना दिल ही में रहना
इतना ही तुमसे हमको था कहना
दिल में समाना दिल ही में रहना
इस दिल को तुमसे यही काम है

आना है तो चले आओ सुहानी शाम है
ऐसे में आपसे दिल को ज़रूरी काम है

है डाली डाली उल्फत की माला
रंगों में डूबा फूलों का प्याला
है डाली डाली उल्फत की माला
रंगों में डूबा फूलों का प्याला
जैसे मोहब्बत का एक जाम है

हमको भी तो, कसम ले लो, कहाँ आराम है
पहलू में दर्द है लब पे तुम्हारा नाम है

हल्का सा अब तो करके इशारा
गिरते हुए को देना सहारा
हल्का सा अब तो करके इशारा
गिरते हुए को देना सहारा
तेरी ही नज़रों का ये काम है

आना है तो चले आओ सुहानी शाम है
ऐसे में आपसे दिल को ज़रूरी काम है

हमको भी तो, कसम ले लो, कहाँ आराम है
पहलू में दर्द है लब पे तुम्हारा नाम है

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Feb 17, 2010

देस छुडाये भेस छुडाये-चाचा जिंदाबाद १९५९

राजेंद्र कृष्ण का ही लिखा हुआ एक गीत सुनिए जो सन १९५९
कि फिल्म 'चाचा जिंदाबाद' फिल्म से है। फिल्म का शीर्षक किसी
नारे जैसा लगता है। इश्क में क्या क्या होता है देखिये किशोर कुमार
के चश्मे से। आपने कई फिल्मों में अनीता गुहा नाम कि कलाकार को
माँ, बहन या किसी चरित्र भूमिका में देखा होगा। इस फिल्म में वे
हिरोइन हैं और batwoman की पोशाक से मिलती जुलती पोशाक में
दिखाई दे रही हैं। इस गीत का संगीत तैयार किया है मदन मोहन ने।
अंगला भाषा के शब्दों का प्रयोग हिंदी गीतों में बहुत पहले से होता आ
रहा है। ये गाना उसका शानदार नमूना है।



गीत के बोल:

देस छुडाये भेस छुडाये
क्या क्या करे ना प्रीत रामा
क्या क्या करे ना प्रीत
रंग बदल दे, ढंग बदल दे
प्रीत की ऐसी रीत रामा
प्रीत की ऐसी रीत

कागा सब तन खाइयो
चुन चुन खाइयो सब मांस
हाँ हाँ हाँ हाँ
ये दो नैना मत खाइयो
ओ मोहे, ओ मोहे , ओ मोहे
पत, पत, नी, नी पत्नी
पत्नी मिलन की आस

कागा सब तन खाइयो
चुन चुन खाइयो मांस
कागा सब तन खाइयो
चुन चुन खाइयो मांस
ये दो नैना मत खाइयो
मोहे पत्नी मिलन की आस, रामा
पत्नी मिलन की आस, रामा
पत्नी मिलन की आस
मैं तो सदके जावां
ओ मैं तो सदके जावां
बाजरे के खेत में सूरतिया दिखा जा गोरी
बाजरे के खेत में सूरतिया दिखा जा गोरी

सौ मुश्किल से दिल को दिल से
मिला है मन का मीत रामा
मिला है मन का मीत

देस छुडाये भेस छुडाये
क्या क्या करे ना प्रीत रामा
क्या क्या करे ना प्रीत

आहा आहा आहा क्वाईट
तुम्हारी नज़र का ये पहला इशारा
ड डड़ डां, ड डड़ डां, ड डड़ डां, ड डड़
चुरा के मेरा दिल हुआ नो दौ ग्यारह
टा टड़ ऊंई ,टा टड़ ऊंई, टा टड़ ऊंई, टा टड़
किया मोम तूने
आं आं आं आं आं
किया मोम तूने बड़े संगदिल को
बड़े संगदिल को
जो मारा भी तो कैसे मूंजी को मारा
जो मारा भी तो कैसे मूंजी को मारा
जो मारा भी तो कैसे मूंजी को
ओये,कैसे मूंजी को
ओये,कैसे मूंजी को मारा
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
जो मारा भी तो कैसे मूंजी को मारा
मारा मारा मारा मारा मारा
रामा रामा रामा रामा
हो रामा, हो रामा, हो रामा
रामा हो, रामा हो, माँ रामा
हो रामा, हो रामा, हो रामा

शाम सवेरे हरदम तेरे
गए ये मनवा गीत हो रामा
गए ये मनवा गीत

देस छुडाये भेस छुडाये
क्या क्या करे ना प्रीत रामा
क्या क्या करे ना प्रीत

he, ??????
नज़र बनती है धागा गा गा गा गा गा
to lab ka goun silta hai he he he he he he
मेरी जान चाहने वाला ला ला ला ला ला ला
बड़ी दिफिश, बड़ी दिफिश, कलटिश, कलटिश
difficulty से मिलता है
टकीला , नकीला, ..............
...............................
............................
.............................
jack and jill went up the hill
jack and jill went up the hill
in search of love
jack and jill went up the hill
in search of love
both fell down and then they found
they are drowned in love
jack and jill went up the hill
in search of love
both fell down and then they found
they are drowned in love
ली ली ली ली ली ली
ली ली ली ली ली ली
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ली ली
ली ली ली ली ली ली
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ल्यों

किस्मत पलटी ये difficlty
बन गयी सुन्दर प्रीत हो रामा
बन गयी सुन्दर प्रीत

देस छुडाये भेस छुडाये
क्या क्या करे ना प्रीत रामा
क्या क्या करे ना प्रीत

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Dec 15, 2009

बदली बदली दुनिया है मेरी-संगीत सम्राट तानसेन १९६२

एक कर्णप्रिय युगल गीत लता और महेंद्र कपूर का गाया हुआ
सुनिए जो धीमा है और हलके हलके आपको आनंदित करता
है। इसे लिखा है शैलेन्द्र ने और धुन बनाई है एस एन त्रिपाठी
ने। ये फिल्म सन १९६२ में आई थी और इसमें तानसेन की
भूमिका में भारत भूषण हैं। अनीता गुहा नाम की अभिनेत्री
परदे पर दिखाई देंगी आपको जिन्होंने फिल्म में हंसा नाम के
चरित्र की भूमिका निभाई थी।



गीत के बोल:

बदली बदली दुनिया है मेरी
जादू है ये क्या तेरे नैनन का
बनके कजरा अँखियों में रहा
एक सुंदर सपना बचपन का
बनके कजरा अँखियों में रहा
एक सुंदर सपना बचपन का

कहती थी सदा दिलकी धड़कन
कहती थी सदा दिलकी धड़कन
तू बैठ बिछाके अपने नयन
सच्ची है अगर ये तेरी लगन
लौट आएगा साथी जीवन का

बदली बदली दुनिया है मेरी

मेरे गीतों के चंचल स्वर
मेरे गीतों के चंचल स्वर
आए होंगे बादल बनकर
बरसे होंगे इस आँगन पर
देके संदेस मेरे मन का

बदली बदली दुनिया है मेरी

इस रात को चाँद तले ये मिलन
इस रात को चाँद तले ये मिलन
चुप देख रहा है नील गगन
दौहरायेगा ये मद-मस्त पवन
संगीत हमारी धड़कन का

बदली बदली दुनिया है मेरी
.............................
Badli badli duniya hai meri-Sangeet samrat Tansen 1962

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Nov 2, 2009

अपने पिया की मैं तो-कण कण में भगवान १९६३

पंडित शिवराम कृष्ण नाम है एक संगीतकार का, जिन्होंने
श्वेत श्याम के ज़माने में काफ़ी फिल्मों में संगीत दिया। उनका बनाया
एक गीत शादी ब्याह के अवसर पर अवसर गाया जाता था। महिला
संगीत के कार्यक्रमों में ये सुनाई दे जाता था। इसके बोल लिखे हैं
भरत व्यास ने और इसे फिल्माया गया है अनिता गुहा पर।

'कण कण में भगवान' एक पौराणिक एवम धार्मिक फ़िल्म है।
धार्मिक फ़िल्म होने की वजह से ये एक बार परदे पर दिखने
के बाद सिनेमा-गृहों में नहीं दिखाई थी। बहुत साल के बाद इसके
गीत देखने का मौका मिला है। विडियो अपलोड करने वाले को धन्यवाद्।
गीत सुमन कल्यानपुर ने गाया है। अनिता गुहा के साथ में धार्मिक फ़िल्म
विशेषज्ञ हीरो-महिपाल हैं।



गाने के बोल:

पिया चरण की भभूत रमाई, प्रीत की पहनी माला
अब काहे का डरना जग से, मन में हुआ उजाला

अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
हँसी उड़ाये चाहे सारी दुनिया,
मैं तो बनी रे जोगनिया
अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया

सांवरिया के रंग में चुनरिया रंगाउंगी
सांवरिया के रंग में चुनरिया रंगाउंगी
चंद्रमा का झुमका पहन पिया आउंगी
झन झन बाजे मोरी, हो, ओ
झन झन बाजे मोरी झांझरिया
मैं तो बनी रे जोगनिया

अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
हँसी उड़ाये चाहे सारी दुनिया,
मैं तो बनी रे जोगनिया
अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया

तेरे लिए मैंने तो शर्म-लाज छोड़ी रे
तेरे लिए मैंने तो शर्म-लाज छोड़ी रे
तेरे संग जोड़ी तो जगत संग तोडी रे
तू है मोहन मेरा, हो, ओ, ओ ,ओ
तू है मोहन मैं तेरी मोहनिया,
मैं तो बनी रे जोगनिया
अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
हँसी उड़ाये चाहे सारी दुनिया
मैं तो बनी रे जोगनिया

अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया

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Aug 1, 2009

वो भूली दास्तान -संजोग १९६१

आइये आज आपको संजोग फिल्म का एक गीत सुनवाया जाए.
दो गीत हम सुन चुके हैं पहले-'बदली से निकला है चाँद-लता'
और 'भूली हुई यादों-मुकेश' .

'संजोग' फ़िल्म का एक लोकप्रिय गाना जिसको कई कलेक्शन
में प्रस्तुत किया गया - वो भूली दास्तान लो फिर याद आ गई।
इस गाने के कई इंस्ट्रुमेंटल वर्ज़न भी आए बाज़ार में , बांसुरी पर,
एल्क्ट्रिक गिटार , हवायियन गिटार , वायलिन पर। इसकी धुन
आकर्षक है इसलिए ये आसानी से जुबान पर चढ़ जाता है. राजेंद्र कृष्ण
और मदन मोहन के गीतों में सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक इसको मैं
गिनता हूँ। गाना अनीता गुहा पर फिल्माया गया है।



गाने के बोल

वो भूली दास्तां, लो फिर याद आ गई

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी
नज़र के सामने घटा सी छा गयी

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

कहाँ से फिर चले आये, ये कुछ भटके हुए साये
ये कुछ भूले हुए नग़मे, जो मेरे प्यार ने गाये
ये कुछ बिछडी हुई यादें, ये कुछ टूटे हुए नग़मे
पराये हो गये तो क्या, कभी ये भी तो थे अपने
न जाने इनसे क्यों मिलकर, नज़र शर्मा गयी

वो भूली दास्तां ...

उम्मीदों के हँसी मेले, तमन्नाओं के वो रेले
निगाहों ने निगाहों से, अजब कुछ खेल से खेले
हवा में ज़ुल्फ़ लहराई, नज़र पे बेखुदी छाई
खुले थे दिल के दरवाज़े, मुहब्बत भी चली आई
तमन्नाओं की दुनिया पर, जवानी छा गयी

वो भूली दास्तां ...

बड़े रंगीन ज़माने थे, तराने ही तराने थे
मगर अब पूछता है दिल, वो दिन थे या फ़साने थे
फ़क़त इक याद है बाकी, बस इक फ़रियाद है बाकी
वो खुशियाँ लुट गयी लेकिन, दिल-ए-बरबाद है बाकी
कहाँ थी ज़िन्दगी मेरी, कहाँ पर आ गयी

वो भूली दास्तां ...

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी
नज़र के सामने घटा सी छा गयी

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

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Jun 15, 2009

बदली से निकला है चाँद - संजोग १९६१

सन १९६० की फिल्म है संजोग। फिल्म का नाम शायद बहुत
कम लोगों ने सुना होगा । लेकिन, जैसे ही मुकेश के गए हुए
गाने-भूली हुई यादों का जिक्र होता है फौरन दिमाग में फिल्म
का नाम आ जाता है । वैसे मदन मोहन भक्त ये दावा करते हैं
कि इस फिल्म का सबसे प्रसिद्द गाना "वो भूली दास्तान" है।
संजोग फिल्म में कुछ कर्ण प्रिय गाने हैं. उनमे से एक है
"बदली से निकला है चाँद" । इस गाने को लोकप्रिय बनाने
का श्रेय विविध भारती को जाता है। विविध भारती पर अक्सर
इस गाने का इंस्ट्रुमेंटल बजा करता था । श्रीधर केंकरे का बांसुरी
पर बजाया हुआ । यकीन मानिये वो इंस्ट्रुमेंटल मूल गाने से भी
ज्यादा बढ़िया सुनाई पड़ता है ।

विडम्बना देखिये, अनीता गुहा जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्री को
कुछ ही कर्णप्रिय नग्मे हिंदी फिल्म्स में मिले हैं। अगर यही गाना
किसी और नामचीन अभिनेत्री पर फिल्माया गया होता तो शायद
अमर हो जाता।

गायिका : लता मंगेशकर
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
संगीतकार: मदन मोहन



गीत के बोल :

बदली से निकला है चाँद, परदेसी पिया
लौट के तू घर आ जा , घर आ जा
बदली से निकला है चाँद

पूछे पता तेरा ठंडी हवाएं
चुप मुझे देख के चुप हो जाएँ

लायें तो कैसे तुझे ढूंढ के लायें, हो
ढूंढ के लायें

बदली से निकला......

आ के गुजर गयीं कितनी बहारें
और बरस गयीं कितनी फुहारें

आजा तुझे हम कबसे पुकारें, हो
कबसे पुकारें

बदली से निकला है चाँद, परदेसी पिया
लौट के तू घर आ जा , घर आ जा
बदली से निकला है चाँद

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