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Dec 5, 2019

मैं क्या जानूँ क्या जादू है-जिंदगी १९४०

तुम क्या जानो क्या जादू है. तुम गाते हो इसलिए
तुम्हें पता नहीं चलता मगर सुनने वाले पर तो जादू
हो ही जाता है. कहाँ से लाये थे तुम ये आवाज़ कि
दूसरा तुम्हारे जैसा इस सदी में भी नहीं मिला अभी
तक.

केदार शर्मा का लिखा ये सर्वकालिक लोकप्रिय गीत
सुनते हैं जिसका संगीत तैयार कर के और सहगल से
गवा कर पंकज मलिक ने इसे अमर कर दिया.




गीत के बोल:

मैं क्या जानूँ क्या जादू है
जादू है जादू है
मैं क्या जानूँ क्या जादू है
इन दो मतवाले नैनों में जादू है
जादू है जादू है
मैं क्या जानूँ क्या जादू है

एक एक अथाह सागर सा है
एक एक अथाह सागर सा है
इन दो मतवाले नैनों में जादू है
जादू है जादू है
मैं क्या जानूँ क्या जादू है

मन पूछ रहा है अब मुझसे
नैनों ने कहा है क्या तुझसे
मन पूछ रहा है अब मुझसे
नैनों ने कहा है क्या तुझसे
जब नैन मिले नैनों ने कहा
नैनों ने कहा
जब नैन मिले नैनों ने कहा
अब नैन बसे के नैनों में
मैं क्या जानूँ क्या जादू है
जादू है जादू है
इन दो मतवाले नैनों में जादू है
जादू है जादू है
मैं क्या जानूँ क्या जादू है
…………………………………………………
Main kya janoon kya-Zindagi 1940

Artist: KL Saigal

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Aug 30, 2018

मनभावन मनभावन लो सावन-बंधन १९४०

सावन विंटेज युग की फिल्मों के गीतों में भी आया
करता था. इस गीत को ही ले लीजिए कितना पुराना
है. २०१८ तक हिसाब लगाएं तो इसे बने ७८ साल हो
चुके हैं.

सुनते हैं लीला चिटनिस का ही गाया एक और गीत
फिल्म बंधन से जिसे कवि प्रदीप ने लिखा है और
जिसकी तर्ज़ बनाई है सरस्वती देवी ने.



गीत के बोल:

मनभावन मनभावन लो सावन आया रे
मनभावन मनभावन लो सावन आया रे
बन-बन उपवन कुंज-कुंज में गुंजन छाया रे
लो सावन आया रे मनभावन मनभावन

रिमझिम-रिमझिम गाता आया
सरगम सकल सुनाता आया
नया सन्देसा नई आस नवजीवन लाया रे
नया सन्देसा नई आस नवजीवन लाया रे
लो सावन आया रे मनभावन मनभावन

मगन हुई हंसों की टोली
दुनिया प्रेम-हिण्डोले डोली
मगन हुई हंसों की टोली
दुनिया प्रेम-हिण्डोले डोली
डाल पे बैठी बुलबुल बोली सावन आया रे
डाल पे बैठी बुलबुल बोली सावन आया रे
लो सावन आया रे
मनभावन मनभावन लो सावन आया रे
मनभावन मनभावन लो सावन आया रे
........................................................
Manbhawan manbhawan lo-Bandhan 1940

Artist: Ashok Kumar, Leela Chitnis

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Aug 18, 2018

अपने भैया को नाच नचाऊँगी-बंधन १९४०

बरसों तक जनता ये मानती रही कि हिंदी फिल्मों की
प्रथम महिला संगीत निर्देशक सरस्वती देवी हैं. ये बात
अब पुरानी हो चुकी है और ये श्रेय किसी और के खाते
में चला गया है. ये बात अभी भी तथ्य है कि स्थापित
संगीतकारों में सरस्वती देवी ही प्रथम महिला संगीतकार
हैं.

अब तो जानकारियां पुरानी सभ्यता की चीज़ों की तरह
यहाँ वहाँ से बाहर निकल रही हैं और उस जानकारी को
बांटने के लिए जनता वैसे ही बेताब है जैसे चूहे को
चिंदी मिल जाती है तो वो सारे शहर में ढिंढोरा पीटता
फिरता है कि वो दर्जी बन गया. इस जानकारी के उबाल
और उफान में इतना समय नहीं बचा कि पानी पीने के
१०० तरीकों पर बना अनुसंधानात्मक वीडियो देख सकें.

सुनते हैं फिल्म बंधन से के गाना लीला चिटनिस और
सुरेश का गाया हुआ. इस कवि प्रदीप ने लिखा है.



गीत के बोल:

अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी
सारी दुनिया में धूम मचाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी

देखो मान जावो दीदी न छेड़ो मुझे
मैं जरूर सिंगार सजाऊँगी
नाच नचाऊँगी

तुमसे न बोलूँ
क्यूँ मेरे भैया
हरगिज़ न बोलूँ
सुनो तो भैया
नाचते थे कृष्ण कन्हैया
तुम भी नाचो
घूँघट को काढ़ मैं डिम-डिम-डिम डमरू बजाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी

लहंगा पहनाऊँगी चुनरी ओढाऊँगी
दीदी बुरी मेरी दीदी बुरी
झूमर पहनाऊँगी कंगन पहनाऊँगी
दीदी बुरी ये मेरी दीदी बुरी ये
रुनुन झुनुर झुनुर झाँझर पहनाऊँगी
माथे पे बिंदिया लगाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी

दीदी तुम शैतानी करो ना
अपनी ही मन-मानी करो ना
तुम भी आना-कानी करो ना
भैया आना-कानी
वरना कान ऊमेठूँगी मैं तेरे
वरना कान ऊमेठूँगी मैं और
हल्की सी चपत जमाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी
……………………………………………..
Apne bhaiya ko naach nachaoongi-Bandhan 1940

Artists: Leela Chitnis, Suresh

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Mar 29, 2018

काहे करता देर बाराती-औरत १९४०

हिंदी सिनेमा के प्राचीन युग की तरफ एक बार फिर से रुख
किया जाए. इस बार सुनते हैं एक ऐसा गीत जिसे संगीतकार
ने खुद गाया है.

सन १९४० की फिल्म औरत के लिए इसे अनिल बिश्वास ने
गाया है. गीत के बोल सफ़दर आह सीतापुरी के हैं.




गीत के बोल:

काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
जाना है तोहे पी की नगरिया
जाना है
जाना है तोहे पी की नगरिया
कठिन बड़ी है डगरिया
हो जाये न अबेर ज़रा सी
हो जाये न अबेर ज़रा सी
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर

कैसा रिश्ता कैसा नाता
कैसा नाता
काहे मन को फँसाता
कैसा रिश्ता कैसा नाता
कैसा रिश्ता
कैसा नाता
कैसा नाता
काहे मन को फँसाता
सब है भरम का फेर बाराती
सब है भरम का फेर
भरम का फेर
सब है भरम का फेर बाराती
सब है भरम का फेर
भरम का फेर
सब है भरम का फेर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर

काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर

जाना है तोहे पी की नगरिया
जाना है
जाना है तोहे पी की नगरिया
कठिन बड़ी है डगरिया
हो जाये न अबेर ज़रा सी
हो जाये न अबेर ज़रा सी
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
…………………………………………………..
Kaahe karta der barati-Aurat 1940

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Mar 28, 2010

चने जोर गरम-बंधन १९४०

चना जोर गरम को प्रसिद्धि दिलाई फिल्म क्रांति के गीत ने। ऐसा है ?
इससे पहले भी चना जोर गरम का जिक्र हिंदी फिल्म संगीत में हुआ है।
पहले पहल १९४० कि फिल्म बंधन में एक गीत बना इस पर। गीत
लिखा है कवि प्रदीप ने और इसकी धुन बनाई है सरस्वती देवी ने।
फिल्म बंधन का एक दूसरा गीत ज्यादा प्रसिद्ध हुआ-चल चल रे नौजवान।
फिल्म बंधन के प्रमुख कलाकार हैं-अशोक कुमार और लीला चिटनिस।

ये हल्का फुल्का गीत फिल्माया गया है एक इमारत के सामने जिस पर
मिडिल स्कूल का बोर्ड लगा है। वैसे भी इस प्रकार कि वस्तुएं स्कूल के
बाहर ही ज्यादा बेचीं जाती थीं। हमारी नई पीढ़ी को शायद ही इसकी
जानकारी हो, क्यूंकि आजकल चना जोर गरम 'माल' या 'सुपर बाज़ार' के
बाहर बिकता देखा जाता है।




गीत के बोल:

चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम
चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम

मेरे चने हैं चटपट भैया और बड़े लासानी
और कैसे चाव से खाते देखो राम और रमजानी
और चुन्नू मुन्नू की जबान भी हो गई पानी पानी
और कहें कबीर सुनो भाई साधो सुनो गुरु की बानी

चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम
चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम

अरे मदरसे का जीवन तो चाँद दिनों का ठाठ
और पढ़ लिख कर सब चल दोगे अपनी अपनी बाट
फिर कोई तुममे होगा अफसर कोई गवर्नर लाट
तब मैं आऊंगा दफ्तर तुमरे लिए चने की चाट

चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम
चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम
................................................................
Chane zoe garam-Bandhan 1940

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Dec 30, 2009

मेरी आशा के जीवन में आई बहार-औरत १९४०

ज़ोर का झटका धीरे से। आइये ३७ साल पीछे चलें। फ़िल्म जादू टोना
के गीत के बाद देखिये सन १९४० के एक गीत। ये फ़िल्म औरत से है
इसी फ़िल्म को बाद में महबूब ने १९५७ में मदर इंडिया की शक्ल दी।
गायिका हैं सरदार अख्तर और सुरेन्द्र , बोल है सफ़दर "आह" सीतापुरी
के और धुन है अनिल बिश्वास की। इस गीत की अंतिम पंक्तियाँ रोचक हैं।




गीत के बोल:

मेरी आशा के जीवन में आई बहार
मेरी आशा के जीवन में आई बहार

चले शीतल पवन खिले फूलों की डार
चले शीतल पवन खिले फूलों की डार
बनी अपने पिया के गले का मैं हार
बनी अपने पिया के गले का मैं हार

मेरी आशा के जीवन में आई बहार

सुनो पंछी के राग, करे कोयल पुकार
सुनो पंछी के राग
मची बागों में धूम
किये पत्ते निखार, मची बागों में धूम
किये पत्ते निखार, मची बागों में धूम
हुआ फूलों के गहने से बनता सिंगार
हुआ फूलों के गहने से बनता सिंगार

सुनो पंछी के राग, करे कोयल पुकार
सुनो पंछी के राग, करे कोयल पुकार
आहा खेतों पे पड़ती है जल की फुहार
आहा खेतों पे पड़ती है जल की फुहार
पड़ी नैनों पे चोट, लगी दिल में कटार
पड़ी नैनों पे चोट, लगी दिल में कटार
चले छैला सजनवा जो छाती उभार
चले छैला सजनवा जो छाती उभार

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