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Dec 5, 2019

मैं क्या जानूँ क्या जादू है-जिंदगी १९४०

तुम क्या जानो क्या जादू है. तुम गाते हो इसलिए
तुम्हें पता नहीं चलता मगर सुनने वाले पर तो जादू
हो ही जाता है. कहाँ से लाये थे तुम ये आवाज़ कि
दूसरा तुम्हारे जैसा इस सदी में भी नहीं मिला अभी
तक.

केदार शर्मा का लिखा ये सर्वकालिक लोकप्रिय गीत
सुनते हैं जिसका संगीत तैयार कर के और सहगल से
गवा कर पंकज मलिक ने इसे अमर कर दिया.




गीत के बोल:

मैं क्या जानूँ क्या जादू है
जादू है जादू है
मैं क्या जानूँ क्या जादू है
इन दो मतवाले नैनों में जादू है
जादू है जादू है
मैं क्या जानूँ क्या जादू है

एक एक अथाह सागर सा है
एक एक अथाह सागर सा है
इन दो मतवाले नैनों में जादू है
जादू है जादू है
मैं क्या जानूँ क्या जादू है

मन पूछ रहा है अब मुझसे
नैनों ने कहा है क्या तुझसे
मन पूछ रहा है अब मुझसे
नैनों ने कहा है क्या तुझसे
जब नैन मिले नैनों ने कहा
नैनों ने कहा
जब नैन मिले नैनों ने कहा
अब नैन बसे के नैनों में
मैं क्या जानूँ क्या जादू है
जादू है जादू है
इन दो मतवाले नैनों में जादू है
जादू है जादू है
मैं क्या जानूँ क्या जादू है
…………………………………………………
Main kya janoon kya-Zindagi 1940

Artist: KL Saigal

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May 8, 2018

दर्शन हुए तिहारे साजन-विद्यापति १९३७

आपको सन १९३७ की फिल्म विद्यापति से एक लोकप्रिय गीत
सुनवाया था २ साल पहले. अब सुनते हैं एक और गीत इसी फिल्म
से पहाड़ी सान्याल की आवाज़ में.

गीत केदार शर्मा का है. अंदाजा लगा सकते हैं आप उन्होंने कब
गीत लिखना शुरू किया था? संगीत है रायचंद्र बोराल का.



गीत के बोल:

दर्शन हुए तिहारे साजन
जागे भाग हमारे
दर्शन हुए तिहारे साजन
जागे भाग हमारे

रंग डारा मोहे प्रेम रंग मे
उमंग उमंग है अंग अंग में
रंग डारा मोहे प्रेम रंग मे
उमंग उमंग है अंग अंग में
चित में बसत अब नैना तिहारे
प्यारे प्यारे अति न्यारे साजन
चित में बसत अब नैना तिहारे
प्यारे प्यारे अति न्यारे साजन
जागे भाग हमारे

दर्शन हुए तिहारे साजन
जागे भाग हमारे

आँखों के आज सामने
आँखों का चाँद है
आँखों का चाँद है
आकाश देख आज तेरा
चाँद मँद है
भूल रहे हैं सितारे
भूल रहे हैं सितारे
भूल रहे हैं सितारे
भूल रहे हैं सितारे
.................................................................
Darshan hue tihaare saajan-Vidyapati 1937

Artist: Pahadi Sanyal

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May 2, 2018

सपना बन साजन आये-शोखियाँ १९५१

सन १९५१ की फिल्म शोखियाँ केदार शर्मा निर्देशित फिल्म है.
इस फिल्म के गीत श्रवणीय हैं . जमाल सेन की ये धुनें
अपने समकालीन संगीतकारों की धुनों से कहीं कम नहीं हैं.

प्रस्तुत गीत को सुन कर ही आप अंदाजा लगा लेंगे इसकी
गुणवत्ता का. बोल केदार शर्मा ने लिखे हैं और वे अपने समय
के एक अच्छे गीतकार थे. गीत लता मंगेशकर ने गाया है.
क्लिप में आपको सुरैया चंवर ढुलाते नज़र आएँगी.




गीत के बोल:

सोई कलियाँ आ आ आ आ
हँस पड़ी झुके लाज से नैन
वीणा की झंकार में तड़पन लागे बैन

सपना बन साजन आये
सपना बन साजन आये
हम देख देख मुस्कायें
हम देख देख मुस्कायें
ये नैना भर आये शरमाये
सपना बन साजन आये
सपना बन साजन

बिछ गये बादल बन कर चादर
बिछ गये बादल बन कर चादर
इन्द्रधनुष पे हमने जा कर
झूले खूब झुलाये
झूले खूब झुलाये

ये नैना भर आये शरमाये
सपना बन साजन आये
नीलगगन के सुन्दर तारे
नीलगगन के सुन्दर तारे
चुन लिये फूल समझ अति न्यारे
चुन लिये फूल समझ अति न्यारे
झोली में भर लाये
झोली में भर लाये

ये नैना भर आये शरमाये
सपना बन साजन आये

मस्त पवन थी हम थे अकेले
मस्त पवन थी हम थे अकेले
हिल मिल कर बरखा संग खेले
हिल मिल कर बरखा संग खेले
फूले नहीं समाये
हम फूले नहीं समाये

ये नैना भर आये शरमाये
सपना बन साजन आये
सपना बन साजन आये
............................................................
Sapna ban saajan aaye-Sokiyan 1951

Artist: Supriya, Premnath, Suraiya

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Feb 20, 2018

इचक बीचक चुर्र-बावरे नैन १९५०

केदार शर्मा रचित एक गीत सुनते हैं बावरे नैन फिल्म से जिसे
शमशाद बेगम ने गाया है. रौशन ने गीत की धुन बनाई है.

हल्का फुल्का गीत है ये. हास्य भी एक विधा है मगर इसका
प्रयोग संवादों में ज्यादा होता है और गीतों में कम. हास्य रस
वाले गीत को रसदार बनाना आसान नहीं है. किसी रोमांटिक
गीत को फिल्माना ज्यादा आसान है. कैसे भी आड़े टेढ़े पड़
जाओ प्यार मोहब्बत में सब जायज़ है.
   




गीत के बोल:

ऐ ईचक बीचक चुर्र
ऐ ईचक बीचक चुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र फुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र
ऐ ईचक बीचक
ऐ ईचक बीचक चुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र फुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र

शुरू शुरू में प्यार कहेगा तू दिलवर मैं जानी
धीरे धीरे
धीरे धीरे रोग बढ़ा तब याद आयेगी नानी
नज़र का तीर सीने में लगा गया दिल चीर
गया दिल चीर
मन उलझा उलझी दो अखियाँ हाय
मन उलझा उलझी दो अखियाँ अब क्या हो तस्वीर

ऐ ईचक बीचक
ऐ ईचक बीचक चुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र फुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र

अभी से एक के दो दो तुमको देने लगे दिखाई
सचमुच दोनो
सचमुच दोनो एक बने तो फिर क्या होगा भाई
बाँवरे नैन नैन न इनको नींद न इनको चैन
देखत हैं अब बाट किसी की होय
देखत हैं अब बाट किसी की ये पगले दिन रैन

ऐ ईचक बीचक
ऐ ईचक बीचक घुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र फुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र
………………………………………………………..
Ichak beechak churr-Bawre nain 1950

Artists: Cuckoo, Geeta bali, Raj Kapoor

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Dec 16, 2017

मतवाली मतवाली मतवाली-विद्यापति १९३७

अविस्मरणीय युगल गीतों पर समय समय पर विस्तृत चर्चा हम करते
आये हैं. आज आपको सुनवा रहे हैं सन १९३७ की फिल्म विद्यापति से
एक गीत. इसे कानन बाला और धूमि खान ने गाया है. कानन बाला
अपनी स्पष्ट आवाज़ के लिए जानी जाती थीं. आज भी उनके मुरीद उनके
गीत बेहद चाव के साथ सुना करते हैं. हाँ, ये बात और है कि ये मुरीद
अधिकांश सफ़ेद बालों वाले हैं. इक्का दुक्का आपको मिल जायेंगे ३०-४०
वर्ष की आयु के नवयुवक जो विभिन्न संगीत गोष्ठियों और संगीत प्रेमियों
की महफ़िल में घुसने के लिए इस प्रकार के गीत सुनने का दावा करते हैं
और वास्तव में ९० के दशक का संगीत सुना करते हैं.

ये एक विडम्बना है कि जूने पुराने संगीत पर जो कुछ भी चर्चा होती है
नेट पर वो अंग्रेजी भाषा में होती है. हम अभी तक अंग्रेजों के मानसिक
गुलाम ही हैं. चर्चा करने वालों में कईयों को शर्म आती है हिंदी में लिखने
में. उन्हें लगता है हिंदी भाषा में उनकी भावनाएं व्यक्त करने वाले शब्द
मौजूद नहीं हैं या बात में १० किलो के भाटे वाला वजन नहीं आएगा. ये
कुछ कुछ ऐसा है जैसे हिंदी में खाना खा कर अंग्रेजी में डकार मारना.

इसे केदार शर्मा ने लिखा और आर सी बोराल ने संगीतबद्ध किया.



गीत के बोल:


अम्बुवा की डाली डाली झूम रही है आली
अम्बुवा की डाली डाली झूम रही है आली

मैं पी कर मद की प्याली यूँ चाल चलूँ मतवाली
मैं पी कर मद की प्याली यूँ चाल चलूँ मतवाली

अम्बुवा की डाली डाली झूम रही है आली
अम्बुवा की डाली डाली झूम रही है आली
मतवाली मतवाली मतवाली
मतवाली मतवाली मतवाली
मैं चाल चलूँ मतवाली
मैं चाल चलूँ मतवाली
डर डर डर डर डर डर डा
डर डर डर डर डर डर डा
मोरे अंगना में आये आली आली
मैं चाल चलूँ मतवाली

झूम रही है आली
अम्बुवा की डाली
झूम रही है आली
अम्बुवा की डाली
अम्बुवा की डाली डाली झूम रही है आली
अम्बुवा की डाली डाली झूम रही है आली

मतवाली मतवाली मतवाली
मतवाली मतवाली मतवाली
मैं चाल चलूँ मतवाली
मैं चाल चलूँ मतवाली
मोरे अंगना में आये आली आली
मैं चाल चलूँ मतवाली
झूम रही है आली
अम्बुवा की डाली
झूम रही है आली
अम्बुवा की डाली
अम्बुवा की डाली डाली झूम रही है आली
…………………………………………………………….
Ambuwa ki dali….matwali-Vidyapati 1937

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Nov 26, 2017

हाल-ए-दिल उनको सुनाना था-फ़रियाद १९६४

हाल-ए-दिल हिट्स के अंतर्गत एक गीत और सुनते हैं फिल्म
फ़रियाद से. सन १९६४ की केदार शर्मा द्वारा निर्मित इस फिल्म
का ये सबसे मधुर गीत है शायद, मेरे ख्याल से. इस फिल्म में
बहुत ज्यादा चीज़ें याद करने लायक नहीं हैं, इसलिए शायद
जनता ने इस फिल्म को जल्दी भुला दिया. केदार शर्मा काफी
बड़े फिल्मकार थे अतः उनकी फिल्मों को आप आसानी से ख़ारिज
नहीं कर सकते. फिल्म के कलाकारों को एक्टिंग भले ही ना के
बराबर आती हो, बाकी के फ़िल्मी पहलू लगभग बढ़िया हैं.

इस गीत को केदार शर्मा ने लिखा है और स्नेहल भाटकर ने धुन
तैयार की. सुमन कल्याणपुर गायिका हैं और ये उनके कुछ चर्चित
गीतों में से एक है.





गीत के बोल:

हाल-ए-दिल उनको सुनाना था
हाल-ए-दिल उनको सुनाना था
सुनाया ना गया सुनाया ना गया
जो ज़ुबाँ पर मुझे लाना था
जो ज़ुबाँ पर मुझे लाना था
वो लाया ना गया वो लाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको

प्यार में सीने पे सर रख के तो दिल क़दमों पर
प्यार में सीने पे सर रख के तो दिल क़दमों पर
आप को अपना बनाना था
आप को अपना बनाना था
बनाया ना गया बनाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको

खेलती आँख मिचोली रही नज़रें अपनी
खेलती आँख मिचोली रही नज़रें अपनी
जिनको पलकों में छुपाना था
जिनको पलकों में छुपाना था
छुपाया ना गया छुपाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको

एक ही वार में हाथों से जिगर छीन लिया
एक ही वार में हाथों से जिगर छीन लिया
हाय जिस दिल को बचाना था
हाय जिस दिल को बचाना था
बचाया ना गया बचाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको सुनाना था
सुनाया ना गया सुनाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको
……………………………………………………………..
Haal-e-dil unko sunana tha-Fariyaad 1964

Artists: Zeb Rehman

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Nov 6, 2017

कभी तनहाइयों में-हमारी याद आएगी १९६१

मुबारक बेगम के गाये कुछ गीत काफी लोकप्रिय हैं. उनमें से एक
और सुनते हैं आज. इसे केदार शर्मा ने फिल्म हमारी याद आएगी
के लिए लिखा. संगीत है स्नेहल भाटकर का.

तनूजा बतौर नायिका तो फिल्म छबीली में नूतन के साथ दिखाई
दीं थीं मगर वो सहायक अभिनेत्री से पूर्ण अभिनेत्री इसी फिल्म में
बनीं-हमारी याद आएगी. नायक को आप पहचान ही गए होंगे. ये
हैं अशोक शर्मा सुपुत्र केदार शर्मा.

ये वही फिल्म है जिसकी शूटिंग के दौरान केदार शर्मा ने तनूजा
को थप्पड़ रसीद किया था. इसकी कहानी फिर कभी.




गीत के बोल:

कभी तनहाइयों में यूँ हमारी याद आएगी
कभी तनहाइयों में यूँ हमारी याद आएगी
अंधेरे छा रहे होंगे के बिजली कौंध जाएगी
अंधेरे छा रहे होंगे

ये बिजली राख कर जायेगी तेरे प्यार की दुनिया
ये बिजली राख कर जायेगी तेरे प्यार की दुनिया
ना फिर तू जी सकेगा और ना तुझको मौत आएगी

कभी तनहाइयों में यूँ हमारी याद आएगी
अंधेरे छा रहे होंगे के बिजली कौंध जाएगी
कभी तनहाइयों में यूँ
................................................................
Kabhi tanhaiyon mein yun-Hamari yaad aayegi 1961

Artists: Tanuja, Ashok Sharma

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Jul 15, 2017

एक बंगला बने न्यारा-प्रेसिडेंट १९३७

आज सुनते हैं सन १९३७ की फिल्म प्रेसिडेंट से सहगल
का गाया अमर गीत. फिल्म में के. एल. सहगल और
लीला देसाई और कमलेश कुमारी प्रमुख कलाकार हैं.
गीत केदार शर्मा का है और संगीत आर सी बोराल का.

ये उस ज़माने का गीत है जब बंगला परिभाषा अनुसार
वाकई बंगला हुआ करता था. आजकल बिल्डर लोग एक
कमरे के मकान को भी ‘बैंगलो’ कहा करते हैं. समय के
साथ चीज़ें कितनी बदल जाती हैं.




गीत के बोल:

एक बँगला बने न्यारा
एक बँगला बने न्यारा
रहे कुनबा जिस में सारा
एक बँगला बने न्यारा
एक बँगला बने न्यारा

सोने का बँगला चंदन का जँगला
सोने का बँगला चंदन का जँगला
विश्वकर्मा के द्वारा
विश्वकर्मा के द्वारा
सोने का बँगला चंदन का जँगला
विश्वकर्मा के द्वारा
अति सुन्दर प्यारा प्यारा
एक बँगला बने न्यारा
एक बँगला बने न्यारा

इतना ऊँचा बँगला हो
ये मानो गगन का तारा
इतना ऊँचा बँगला हो
ये मानो गगन का तारा
मानो गगन का तारा
मानो गगन का तारा
जिस पे चढ़ के इंद्रधनुष पर
झूला झूले चाँद हमारा
जिस पे चढ़ के इंद्रधनुष पर
झूला झूले चाँद हमारा
भंडार होये लक्ष्मी के हाथों में सारा
भंडार होये लक्ष्मी के हाथों में सारा
पाए अब जी भर के सुख जिसने बिपत उठाई
पाए अब जी भर के सुख जिसने बिपत उठाई
……………………………………………….
Ek bangle bane nyara-President 1937

Artist: KL Saigal

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Jul 14, 2017

घिर घिर के आसमान पर-बावरे नैन १९५०

फिल्म बावरे नैन से एक युगल गीत सुनते हैं जिसे
राजकुमारी और आशा भोंसले ने गाया है.

गीत एक घोडा गाड़ी पर फिल्माया गया है और इसे
गीत में आप एक ग्रामीण महिला को पहाड की चोटी
पर खड़े बांसुरी बजाते देख सकते हैं. केदार शर्मा की
कुछ फिल्मों में महिला बांसुरी वादक देख सकते हैं
आप.



गीत के बोल:

घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जाएं
घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जाएं

क़ाबू में दिल नहीं है ना होश में जवानी
क़ाबू में दिल नहीं है ना होश में जवानी
बेसुध बना रही हैं मस्ती भरी हवाएं

कह दो कोई पिया से परदेसवा न जाएं

घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जाएं

तेरी हँसी तो जा कर फूलों में छुप गयी थी
फूलों में छुप गयी थी
तेरी हँसी तो जा कर फूलों में छुप गयी थी
फूलों में छुप गयी थी
कोयल की कूक बन कर गूँजी मेरी सदाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जायें

घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटायें
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जायें

तू अपनी ओढ़नी में मन बाँध लें पिया का
मन बाँध लें पिया का
तू अपनी ओढ़नी में मन बाँध लें फिया का
मन बाँध लें पिया का
फिर ना उन्हें तू भूले न वो तुम्हें भुलायें
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जायें

घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जायें
……………………………………………………
Ghir ghir ke aasman par-Bawre Nain 1950

Artists: Geeta Bali, Manju

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May 13, 2017

बीता हुआ इक सावन-शोखियाँ १९५१

जमाल सेन का अधिकाँश समय दूसरे संगीतकारों के
सहायक के रूप में बीता. कुछ फिल्मों में उन्होंने बतौर
स्वतंत्र संगीतकार संगीत दिया उनमें से एक है शोखियाँ.
इस फिल्म में सुरैया नायिका हैं.

इस फिल्म से सुनते हैं लता का गाया गीत जिसे लिखा
है केदार शर्मा ने. फिल्म में इस गीत को जगह ना मिल
सकी और इसे काफी बाद में एक टेलीफिल्म में प्रयोग
किया गया ८० के दशक में. लता मंगेशकर ने इतना
रुक रुक के कभी कोई गज़ल भी नहीं गाई होगी




गीत के बोल:

बीता हुआ इक सावन इक याद तुम्हारी
बीता हुआ इक सावन इक याद तुम्हारी
ले दे के ये दो बातें दुनिया है हमारी
बीता हुआ इक सावन

मजबूर बहुत दूर ये तक़दीर के खेते
आराम से सोये न कभी चैन से लेटे
न कभी चैन से लेटे
आँखों में कटी जब भी कटी रात हमारी
ले दे के ये दो बातें दुनिया है हमारी
बीता हुआ इक सावन

इक बार बरसने दो बरसती हैं घटाएँ
हम रोते हैं दिन रात बता किसको बताएँ
बता किसको बताएँ
हँसती है हमें देख के तक़दीर हमारी
ले दे के ये दो बातें दुनिया है हमारी
बीता हुआ इक सावन

भर पाये मुहब्बत से दिल टूट गया है
तू रूठा तो ले सारा जहाँ रूठ गया है
ये जहाँ रूठ गया है
इक साथ दिये जाती है ये ठेस हमारी
ले दे के ये दो बातें दुनिया है हमारी
बीता हुआ इक सावन
……………………………………………………..
Beeta hua ek sawan-Shokhiyan 1951

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Oct 21, 2016

देखो देख रहा था पपीहा-फ़रियाद १९६४

कुछ गीत ऐसे होते हैं जिन्हें हम कभी-कभार सुनते हैं मगर उन्हें
एक बार और सुनना चाहते हैं. कुछ अलग सा होता है ऐसे गीतों
में. आज सुनिए फिल्म फ़रियाद से पपीहा हिट. गीत में पपीहे को
तबियत से याद किया गया है.

केदार शर्मा रचित इस गीत की धुन बनाई है स्नेहल भाटकर ने
और सुमन कल्याणपुर के संग महेंद्र कपूर ने इस रोचक गीत को
गाया है.

गीत में अशोक शर्मा और जेब रहमान नामक कलाकार हैं. अशोक
केदार शर्मा के पुत्र हैं.



गीत के बोल:

वो देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा जा के सबसे कहेगा पपीहा
पपीहा भला चुप क्यूँ रहेगा
पपीहा देखो देख रहा था


रिम झिम झिम गगरिया बरसे
रिम झिम झिम गगरिया बरसे
ऐसे में जइयो नहीं घर से
ऐसे में जइयो नहीं घर से
हमरा जिया घबराए
अब तुम बिन रहा न जाए
वो देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा जा के सबसे कहेगा पपीहा
पपीहा भला चुप क्यूँ रहेगा
पपीहा देखो देख रहा था

सर सर सर चलें सर्द हवाएं
सर सर सर चलें सर्द हवाएं
फूल हंसें कलियाँ मुस्कुराएँ
फूल हंसें कलियाँ मुस्कुराएँ
हमको ये समझाएं
हम मिल कर नाचे गायें
वो देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा जा के सबसे कहेगा पपीहा
पपीहा भला चुप क्यूँ रहेगा
पपीहा देखो देख रहा था

रिम झिम झिम करते हैं सितारे
रिम झिम झिम करते हैं सितारे
आप हुए हैं जबसे हमारे
हम फूले नहीं समाये
घडी घडी मुस्कुराए
वो देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा जा के सबसे कहेगा पपीहा
पपीहा भला चुप क्यूँ रहेगा
पपीहा देखो देख रहा था
…………………………………………….
Dekho dekh raha tha papiha-Fariyaad 1964

Artists: Ashok Sharma, Zeb Rehman

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Sep 26, 2016

सुन बैरी बलम सच बोल-बावरे नैन १९५०

राजकुमारी की बात चली तो फिल्म बावरे नैन से ही एक गीत
सुनते हैं उनका गाया हुआ जो बेहद लोकप्रिय है. इसके बोल
भी शर्मा जी ने लिखे हैं और संगीत है रोशन का.

बैरी शब्द वाला ये गीत आकर्षक धुन में बंधा हुआ है. पिछले
गीत से जो आपके मन में जो दुःख और विषाद के भाव प्रकट
हुए होंगे वो इस गीत को सुन कर गायब हो जायेंगे और आपका
दिल गार्डन गार्डन हो जायेगा.

राजकुमारी को पहली प्लेबैक गायिका होने के श्रेय प्राप्त है.




गीत के बोल:

सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा


मैं खोयी तू खोने लगा हाँ
मेरे दिल में यूँ यूँ होने लगा हाँ
मैं खोयी तू खोने लगा हाँ
मेरे दिल में यूँ यूँ होने लगा हाँ
मैं रोने लगी तू रोने लगा रे
इब क्या होगा

सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा

बैठे बैठे आह भरने लगे हे
हम इक-दूजे पर मरने लगे हे
बैठे बैठे आह भरने लगे हे
हम इक-दूजे पर मरने लगे हे
हम ये क्या नखरे करने लगे रे
इब क्या होगा

सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा

अब दिन को सपने आने लगे हे
तारो से आँख चुराने लगे हे
अब दिन को सपने आने लगे हे
तारो से आँख चुराने लगे हे
हम अपने से शरमाने लगे रे
इब क्या होगा

सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
....................................................................
Sun bairi balam sach bol re-Bawre nain 1950

Artists: Geeta Bali, Raj Kapoor

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क्यूँ मेरे दिल में दर्द-बावरे नैन १९५०

केदार शर्मा का लिखा एक गीत सुनते हैं फिल्म बावरे नैन से.
केदार शर्मा को राज कपूर का गुरु भी कहा जाता है. राज कपूर
ने निर्देशन की कई बारीकियां केदार शर्मा से सीखीं. कुछ सामान्य
बारीकियां सीखीं तो कुछ स्पेशल वाली जिनसे फिल्म में रोचकता
पैदा की जाती है.

फिल्म बावरे नैन का गीत राज कपूर और गीता बाली पर फिल्माया
गया है. गायिका हैं राजकुमारी. राजकुमारी के गाये कई गीत प्रसिद्ध
हैं जो आज समय के साथ थोड़े गम हो चले हैं. पुराने संगीत प्रेमी
उनके गीत अवस्य ही सुना करते हैं. ५० के दशक में बाकी भारी
आवाज़ वाली गायिकाओं की तरह उनके भी गीत कम होते गए.

प्रस्तुत गीत के संगीतकार हैं रोशन जिनकी ये पहली म्यूजिकल हिट
फिल्म थी. गौरतलब है इसमें लता मंगेशकर का गाया एक भी गीत
नहीं है.

हीरोईन इतनी दुखी है कि कवेलू की छत पर चढ के बैठ गयी है और
बेहद दर्द भरा गीत गा रही है. ऊपर चढ के गाने का एक फायदा ये है
आवाज़ दूर दूर तक जाती है, कोई नहीं सुनना चाहे तो भी सुनाई देती
है. छितरे बादलों को फूटी घटाओं की उपमा दी गयी है गीत में.
कुछ कुछ गुलजारना सा लगता है ये तो !!




गीत के बोल:

क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो
क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो

दिल की कली को खिलने से पहले मसल दिया
पहले मसल दिया
दिल की कली को खिलने से पहले मसल दिया
पहले मसल दिया
काहे हँसा हँसा के रुलाया जवाब दो
क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो


दुनिया में छा रहा है अंधेरा तेरे बग़ैर
अंधेरा तेरे बग़ैर
दुनिया में छा रहा है अंधेरा तेरे बग़ैर
अंधेरा तेरे बग़ैर
क्यूँ मेरे दिल का दीप बुझाया जवाब दो
क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो

फूटी घटाओं वो मेरी खुशियाँ कहाँ गयी
मेरी खुशियाँ कहाँ गयी
फूटी घटाओं वो मेरी खुशियाँ कहाँ गयी
मेरी खुशियाँ कहाँ गयी
क्यूँ मुझको प्यार रास न आया जवाब दो
क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो
..........................................................................
Kyon mere dil mein-Bawre Nain 1950

Artist: Geeta Bali

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Sep 19, 2016

हम जागें जग सोये-रंगीन रातें १९५६

सन १९५६ की एक फिल्म है रंगीन रातें जिसमें कि शम्मी कपूर और
माला सिन्हा की जोड़ी है. बतौर हीरोईन माला सिन्हा की ये पहली
फिल्म है. बंगाली फिल्मों में काम करने के बाद माला सिन्हा को किसी
फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में बम्बई जाना पड़ा और वहां उनकी
मुलाकात गीता दत्त से हुई. गीता दत्त ने माला सिन्हा को केदार शर्मा
से मिलवाया और शर्मा ने उन्हें अपनी फिल्म की हीरोईन बना दिया.
इस तरह शुरू हुआ हिंदी फिल्मों में एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री का
सफर.

इस फिल्म में कुछ श्रवणीय गीत हैं जिनमें से एक आज हम सुनेंगे
और देखेंगे. लता मंगेशकर ने इस गीत को गाया है. गीत के बोल लिखे
हैं केदार शर्मा ने और संगीत तैयार किया रोशन ने.

गीत फिल्माया गया है चाँद उस्मानी पर. चंद उस्मानी ने इस फिल्म
में नेत्रहीन लड़की कि भूमिका निभाई है. भजन सरीखा गीत है और
सुनने में सुखद है.



गीत के बोल:

हम जागें
हम जागें जग सोये री आली
हम जागें जग सोये
हम जागें जग सोये री आली
हम जागें जग सोये

दीप बुझे दो अंखियां मोरी
फिर भी बाट निहारूं तोरी
दीप बुझे दो अंखियां मोरी
फिर भी बाट निहारूं तोरी
ओ मन बसिया कबहूँ मिलोगे
ओ मन बसिया कबहूँ मिलोगे
तुम मिलया सुख होये
ओ ओ ओ
तुम मिल्या सुख होये री आली
हम जागें जग सोये

एक दुल्हन पी को लिपटाए
शरमाये कोई हाथ छुड़ाये
एक दुल्हन पी को लिपटाए
शरमाये कोई हाथ छुड़ाये
एक बेचारी बैठ झरोखे
एक बेचारी बैठ झरोखे
अंसुवन हार पिरोये
हो हो हो
असुवन हार पिरोये री आली
हम जागें जग सोये

ये बिरहा की रात सहेली
ये अपनी बरसात सहेली
ये बिरहा की रात सहेली
ये अपनी बरसात सहेली
जब छलकें बिरहन की अखियाँ
जब छलकें बिरहन की अखियाँ
ये बिरहन संग रोये
हो ओ ओ
ये बिरहन संग रोये री आली
हम जागें जग सोये
.............................................................
Ham jagen jag soye-Rangeen Ratein 1956

Artists: Chand Usmani, Mala Sinha

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Jul 6, 2016

ऐ दिल दुखड़ा किसे-नाज़ १९५४

जिन संगीतकारों का अहम योगदान रहा हिंदी फ़िल्मी गीत के
प्रकार और ग्रामर में उनमें से एक हैं अनिल बिश्वास. उनके इस
अतुलनीय योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. उन्होंने
हिंदी फिल्मों के सबसे पहले दौर से संगीत देना शुरू किया था
और समय के साथ वे गीतों और धुनों में बदलाव करते चले
और हर समय प्रासंगिक बने रहे. ये उनकी विलक्षण प्रतिभा की
बदौलत ही संभव हो पाया. उनकी संगीत के सभी पहलुओं पर
पकड़ थी. किस गायक से क्या गवाना है, किस वाद्य यंत्र का
कैसे उपयोग करना है, लोक संगीत से लेकर राग-रागिनियों,
ओर्केस्ट्रा, संगीत संयोजन आदि सभी विधाओं में वे पारंगत थे.

आइये आज सुनें लता के लिए उनकी बनाई गयी एक उम्दा धुन
फिल्म नाज़ से. केदार शर्मा के खूबसूरत बोलों को उन्होंने बहुत
करीने से पिरोया है धुन के स्वरों में.



गीत के बोल:

ऐ दिल दुखड़ा किसे सुनाएँ
दुखड़ा किसे सुनाएँ
ऐ दिल दुखड़ा किसे सुनाएँ

जिस डाली पर बैठे टूटी
साजन रूठा दुनिया रूठी
जिस डाली पर बैठे टूटी
साजन रूठा दुनिया रूठी
अब हम रोये या मुस्काएं
दुखड़ा किसे सुनाएँ
ऐ दिल दुखड़ा किसे सुनाएँ

ठंडी आहें आग लगा दें
ठंडी आहें आग लगा दें
आंसू आग पे तेल गिरा दें
ठंडी आहें आग लगा दें
हम जल जाएँ हम मर जाएँ
दुखड़ा किसे सुनाएँ
ऐ दिल दुखड़ा किसे सुनाएँ

क्या एक बार तरस खाओगे
क्या एक बार चले आओगे
आओ दिल के ज़ख्म दिखाएँ
दुखड़ा किसे सुनाएँ
ऐ दिल दुखड़ा किसे सुनाएँ
दुखड़ा किसे सुनाएँ
ऐ दिल दुखड़ा किसे सुनाएँ
………………………………………………….
Ae dil dukhda kise sunayen-Naaz 1954

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May 21, 2011

ख्यालों में किसी के इस तरह-बावरे नैन १९५०

अजीब इत्तेफाक है। बीच रोड पर ट्राफिक के सर्कस के बीच आपको
अगर फिल्म बावरे नैन का ये गीत याद आ जाये तो क्या कीजियेगा ?
अजी बस गुनगुना लग जाइये और क्या। बीच में आड़े टेड़े चलने वालों
के चरित्रों का उल्लेख करके जुबान ख़राब करने के बजाये गीत जोर जोर
से गाने लग जाइये। आज हमने भी यही किया और गाने ने होर्न का काम
किया। बात फिर भी समझ नहीं आई-ऐसा क्यूँ होता है-उलझन में
दिमाग हो और कोई गीत अपने आप दिमाग में कौंध जाये। हम भी
गीत बनाने वालों से यही पूछ लेते हैं-"ख्यालों में किसी के इस तरह
आया नहीं करते" । केदार शर्मा के लिखे गीत की धुन बनाई है रोशन
ने। गीत गा रहे हैं गीता दत्त और मुकेश। राज कपूर के साथ परदे
पर शायद विजय लक्ष्मी नामक अभिनेत्री हैं।



गीत के बोल:

ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते
ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते

दिलों को रौंद कर दिल अपना बहलाया नहीं करते
जो ठुकराए गए हों उनको ठुकराया नहीं करते
दिलों को रौंद कर

हँसी फूलों की दो दिन चाँदनी भी चार दिन की है
चाँदनी चार दिन की है
हँसी फूलों की दो दिन चाँदनी भी चार दिन की है
चाँदनी चार दिन की है
मिली हो चाँद सी सूरत तो इतराया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते

ख़यालों में किसी के

जिन्हें मिटना हो वो मिटने से डर जाया नहीं करते
वो डर जाया नहीं करते
जिन्हें मिटना हो वो मिटने से डर जाया नहीं करते
वो डर जाया नहीं करते
मुहब्बत करने वाले ग़म से घबराया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते

ख़यालों में किसी के

मुहब्बत का सबक सीखो, ये जाकर जलने वालों से
ये जाकर जलने वालों से
मुहब्बत का सबक सीखो, ये जाकर जलने वालों से
ये जाकर जलने वालों से
के दिल की बात भी लब तक कभी लाया नहीं करते
जो ठुकराए गए हों उनको ठुकराया नहीं करते

ख़यालों में किसी के, इस तरह आया नहीं करते
किसी को बेवफ़ा आ आ के तड़पाया नहीं करते

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Khayalon mein kisi ke-Baawre Nain 1950

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Feb 7, 2010

दूर देश से आ जा रे-शोखियाँ १९५१

लता मंगेशकर और सुरैया के युगल गीत दुर्लभ हैं। ये है १९५१ की फिल्म
'शोखियाँ' से एक गीत जिसकी धुन बनाई है जमाल सेन ने। जमाल सेन
एक सिद्ध हस्त ताल वाद्य वादक थे। उन्होंने कई संगीतकारों को अपनी
सेवाएं दीं। इस गीत में सुरैया नृत्य करती भी दिखाई दे रही हैं। कुछ कुछ
आदिवासी वेशभूषा पहने कलाकार किस जगह की संस्कृति का प्रतिनिधित्व
कर रहे हैं बीना फिल्म देखे कह पाना मुश्किल है। गीत लिखा है केदार शर्मा
ने जिन्होंने निर्देशन के अलावा गीत लेखन में भी तबियत से करतब दिखाए
५० के दशक में। बोल साफ़ सुनाई नहीं देते। जिसके कान ६/६ हों वो कृपया
मदद करें।



गीत के बोल:

हो हो हो हो हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ
हो हो हो हो हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ
हो, दूर देश से आ जा रे
हो, दूर देश से आ जा रे
आ जा रे, आ जा रे
मोसे रहा नहीं जाए
मोसे रहा नहीं जाए
मैं मोरनी मर जाऊंगी

सारी देर तोहे ननदिया
मोरी पथी ??? हंसी उडाये

छोड़ के जो, जाए परदेसी
छोड़ के जो, जाए परदेसी
पाछे लौट ना आये
पाछे लौट ना आये

आ के धीर बंधा रे
आ जा रे, आ जा रे
मोसे रहा नहीं जाए
मोसे रहा नहीं जाए
मैं मोरनी मर जाऊंगी

बन बन भटकूँ रैन दिवस
जिया जिस बित कल ना ही पाए

नगरी जो सूनी भई
नगरी जो सूनी भई
ये नैना क्यों भर आये
ये नैना क्यों भर आये

नैनों की प्यास बुझा जा रे
आ जा रे, आ जा रे
मोसे रहा नहीं जाए
मोसे रहा नहीं जाए
मैं मोरनी मर जाऊंगी

उमड़ उमड़ कर बदरिया
बरस बरस तरसाए

सावन की ये चोंचलें मोहे
आठों पहर जलाएं
आठों पहर जलाएं

सावन को समझा जा रे
आ जा रे, आ जा रे
मोसे रहा नहीं जाए
मोसे रहा नहीं जाए
मैं मोरनी मर जाऊंगी

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Jan 4, 2010

बालम आए बसो मोरे मन में- देवदास १९३५

शुरुआती दौर का एक प्रसिद्ध गीत। वैसे तो सहगल के अधिकतर
गाने प्रसिद्ध हैं लेकिन ये थोडा विशेष है। एक वो ज़माना था जब पेड़ों
के पीछे साजिन्दे छुपकर खड़े हो जाते थे और गाना रिकॉर्ड होता था ।
पार्श्व गायन अभी तक बॉलीवुड में नहीं आया था । इस गीत में सहगल
ने अभिनय किया है और ख़ुद गाया भी है। १९३५ की देवदास फ़िल्म से
ये गीत लिया गया है आज आपके लिए। केदार शर्मा ने इसके बोल लिखे
हैं और संगीत तैयार किया है तिमिर बरन ने। तिमिर बरन बंगला मूल
के संगीतकार थे। उस समय की फिल्मों को देख पाना दुर्लभ अनुभव है।
उसकी कई वजह हैं जिसमे से एक है फिल्म देखने के लिए उपलब्ध नहीं
होना। इस गीत में जमुना नाम की अभिनेत्री हैं जिन्होंने देवदास फिल्म
में पारो की भूमिका निभाई है।



गाने के बोल:

बालम आए बसो मोरे मन में
बालम आए बसो मोरे मन में
बालम आए बसो मोरे मन में
बालम

सावन आया तुम न आए

बालम आए बसो मोरे मन में
बालम आए बसो मोरे मन में
सावन आया तुम न आए
सावन आया तुम न आए
तुम बिन रसिया कुछ न भाये
तुम बिन रसिया कुछ न भाये
मन में मोरे हूक उठत जब
मन में मोरे हूक उठत जब
कोयल कूकती बन में

बालम आए बसो

हाँ तो तुम आ गईं
पूजा के लिए मंदिर में जा रही थी
तो फिर यहाँ क्यूँ आयीं
मुझे मेरे देवता ने बुलाया इसलिए मैं आ गयी
.....
......
.....

सूरतिया जा की मतवारी
सूरतिया जा की मतवारी
पतली कमरिया उमरिया बारी
सूरतिया जा की मतवारी
पतली कमरिया उमरिया बारी
एक नया संसार बसा है
एक नया संसार बसा है
जिनके दो नैनन में

बालम आए बसो मोरे मन में
बालम आए बसो मोरे मन में

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