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Apr 17, 2017

महलों का राजा मिला-अनोखी रात १९६८

आज आपको सुनवाते हैं एक कर्णप्रिय गीत फिल्म अनोखी रात से
गीत अनूठा है क्यूंकि इसमें बेटी विदा के लिए निवेदन कर रही है.
हमें अक्सर फिल्मों में इसके उलट दृश्य ही देखने को ज्यादा मिलते
हैं जिसमें माँ बाप बेटी को समझाते दिखलाई देते हैं-एक दिन तो
ये घर छोड़ के जाना है, बेटी पराया धन होती है वगैरह वगैरह.

गीत फिल्माया गया है अभिनेत्री ज़ाहिदा पर. बेटी आश्वस्त है इस
बात से कि जो वर मिला है वो सु-वर है.गीत इन्दीवर का लिखा
हुआ है और धुन है रोशन की. शादी के अवसर पर बजने वाला ये
गीत सदाबहार गीत कहलाता है और इसे एक बार सुन लेने के बाद
आपको इसे बार बार सुनने की इच्छा होगी. कहा जाता है इस गीत
को श्रीमती रोशन ने तैयार करवाया था रोशन के अवसान के बाद.




गीत के बोल::

महलों का राजा मिला
के रानी बेटी राज करेगी
खुशी-खुशी कर दो बिदा
तुम्हारी बेटी राज करेगी
महलों का राजा मिला
के रानी बेटी राज करेगी


गलियों-गलियों धूम मचेगी
गलियों-गलियों धूम मचेगी
काँधे-काँधे डोली चलेगी
डोली में डोलेगा जिया
डोली में डोलेगा जिया
के रानी बेटी राज करेगी

खुशी-खुशी कर दो बिदा
तुम्हारी बेटी राज करेगी

जिस घर जाए स्वर्ग बना दे
जिस घर जाए स्वर्ग बना दे
दोनों कुल की लाज निभा दे
यही बाबुल जी देँगे दुआ
यही बाबुल जी देँगे दुआ
के रानी बेटी राज करेगी

खुशी-खुशी कर दो बिदा
तुम्हारी बेटी राज करेगी

बेटी तो है धन ही पराया
बेटी तो है धन ही पराया
पास अपने कोई कब रख पाया
भारी करना ना अपना जिया
भारी करना ना अपना जिया
तुम्हारी बेटी राज करेगी

खुशी-खुशी कर दो बिदा
तुम्हारी बेटी राज करेगी

महलों का राजा मिला
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Mehlon ka raja mila-Anokhi raat 1968

Artist: Zahida

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Jan 24, 2017

ओह रे ताल मिले-अनोखी रात १९६८

अनोखी रात के गीत में एक गूढ़ बात छुपी है इस धरती के
बारे में, गौर फरमाएं. रोशन के संगीत से सजे इस गीत को
गाया है मुकेश ने. धीर गंभीर आवाज़ वाले मुकेश ही इस गीत
के साथ न्याय कर सकते थे. संगीतकार बेहतर जानता है किस
गीत पर किसकी आवाज़ जंचेगी और रोशन भी एक मास्टर
संगीतकार थे. गीत एक समय के बंधन से मुक्त वाली चीज़ है
उसको कहते हैं टाइमलेस क्लासिक.

इन्दीवर का लिखा अनोखी रात का गीत भुलाये नहीं बनता.
इन्दीवर के पास वो सब कुछ था जो एक विद्वान गीतकार के
पास होना चाहिए. शब्द सामर्थ्य, सोचने वाला दिमाग और
उपमाओं और इडलियों को परोसने की कला. पेट खाली उपमाओं
से नहीं भरता अतः ८० के दशक में उन्होंने मोटी मोटी इडलियों
का प्रयोग किया दक्षिण की मोटी मोटी अभिनेत्रियों और दुबले
पतले जीतू वाली फिल्मों के गीतों के लिए. बप्पी के साथ उनकी
जुगलबंदी खूब चली.

उन्होंने जो कुछ लिखा जैसा लिखा वो सब स्वीकार्य है हमें.
अगर हिंदी सिनेमा सिचुएशनल गीतों की बात करता है तो
८० के दशक की फिल्मों की जैसी मांग रही उसके हिसाब से
इन्दीवर से बेहतर लेखक की कल्पना भी मुश्किल है. वो आज
के गीतकारों से तो बेहतर ही लिख गए 



गीत के बोल:

ओह रे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौन से जल में
कोई जाने ना
ओह रे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौन से जल में
कोई जाने ना
ओह रे ताल मिले नदी के जल में

सूरज को धरती तरसे धरती को चंद्रमा
धरती को चंद्रमा
पानी में सीप जैसे प्यासी हर आत्मा
प्यासी हर आत्मा
ओ मितवा रे
पानी में सीप जैसे प्यासी हर आत्मा
बूंद छुपी किस बादल में
कोई जाने ना

ओह रे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौन से जल में
कोई जाने ना

अनजाने होंठों पर यूं पहचाने गीत हैं
पहचाने गीत हैं
कल तक जो बेगाने थे जन्मों के मीत हैं
जन्मों के मीत हैं
ओ मितवा रे
कल तक जो बेगाने थे जन्मों के मीत हैं
क्या होगा कौन से पल में
कोई जाने ना

ओह रे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौन से जल में
कोई जाने ना
ओह रे ताल मिले नदी के जल में
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Oh re taal mile nadi ke jal mein-Anokhi Raat 1968

Artists: Sanjeev Kumar, Mukri, Zahida

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Jul 17, 2016

मिले न फूल तो काँटों से-अनोखी रात १९६८

आज आपको सुनवाते हैं फिल्म अनोखी रात से रफ़ी का
गाया एक गीत. इन्दीवर का लिखा ये गीत बहुत पॉपुलर है.
सन १९६८ की फिल्म में संजीव कुमार और ज़ाहिदा प्रमुख
कलाकार हैं.

प्रस्तुत गीत परीक्षित साहनी पर फिल्माया गया है. इसके
अलावा आपको जाहिदा, अरुणा ईरानी और तरुण बोस नाम
के कलाकार आपको गीत में दिखाई देंगे.

फिल्म अनोखी रात संगीतकार रोशन की आखिरी फिल्म थी.
इस फिल्म के संगीत बनाते वक्त ही रोशन इस नश्वर संसार
से कूच कर गए थे.  



गीत के बोल:

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
इसी तरह से बसर
इसी तरह से बसर हमने ज़िंदगी कर ली
मिले न फूल

अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा
अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा
ख़ुदा तराश लिया
ख़ुदा तराश लिया और बंदगी कर ली

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली

नज़र मिली भी न थी और उनको देख लिया
नज़र मिली भी न थी और उनको देख लिया
ज़ुबां खुली भी न थी
ज़ुबां खुली भी न थी और बात भी कर ली

मिले न फूल


वो जिनको प्यार है चांदी से इश्क़ सोने से
वो जिनको प्यार है चांदी से इश्क़ सोने से
वही कहेंगे कभी
वही कहेंगे कभी हमने ख़ुदकशी कर ली

मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
इसी तरह से बसर हमने ज़िंदगी कर ली
मिले न फूल
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Mile na phool to kaanton se-Anokhi raat 1968

Artists: Parikshit Sahni, Zahida

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Nov 1, 2011

मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो-अनोखी रात १९६८

बेर शुरू से फ़िल्मी गीतकारों का प्रिय फल रहा है और
इसे गरीबों का मेवा तक बतला दिया गया है. बेर खाना
स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है इसलिए अपनी जबरिया
हाई क्लास दिखावटी जिंदगी से निकल कर ज़रा बेर भी
चख लीजिए. आसानी से उपलब्ध होते हैं और स्वादिष्ट
भी लगते हैं. सस्ते में भी मिल जाते हैं. जंगल में आपको
बेर की ढेर झाडियाँ मिल जाएँगी जिसमें छोटे छोटे बेर
से ले कर बड़े साइज़ के बेर भी मिलेंगे. तो खायेंगे ना.

सुनते हैं बेर के उल्लेख वाला एक गाना १९६८ के फिल्म
अनोखी रात से जिसे लिखा है इन्दीवर साहब ने. इसकी
धुन तैयार की है रोशन ने और आशा भोंसले गायिका हैं.

बीर का अर्थ है भाई. राजस्थान निवासी इस शब्द से तो
भली-भांति परिचित हैं.



गीत के बोल:

ना ना ना ना ना ना
मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो
मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो
कोई काँटा हाय काँटा चुभ जायेगा
ऐसे झटके से डार मत छोडो
ऐसे झटके से डार मत छोडो
कोई काँटा हाय काँटा चुभ जायेगा

बाबुल ने ये पेड़ लगाया
बीरा ने की रखवाली
मेरे बीरा ने की रखवाली
ओ ओ ओ मैया ने इसको ऐसे सींचा
फूलों को जैसे माली
अरे फूलों को जैसे माली

तुम परदेसी आये कहाँ से
अरे तुम परदेसी आये कहाँ से
कैसे पकड़ ली डाली
अरे रे रे मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो
मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो
कोई काँटा हाय काँटा चुभ जायेगा

खट्टे फ़ेंके मीठे राखे
शबरी बड़ी सयानी
अरे शबरी बड़ी सयानी
अरे जूठे बेर में प्रीत है कितनी
लक्ष्मण ने कब जानी
अरे लक्ष्मण ने कब जानी
राम ही पहचानेंगे मुझको
अरे राम ही पहचानेंगे मुझको
राम की मैं दीवानी

अरे रे मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो
मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो
कोई काँटा उई काँटा चुभ जायेगा
ऐसे झटके से डार मत छोडो
ऐसे झटके से डार मत छोडो
कोई काँटा हाय काँटा चुभ जायेगा
………………………………………….
Meri beri ke ber mat todo-Anokhi Raat 1968

Artist: Aruna Irani

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Nov 14, 2010

दुल्हन से तुम्हारा मिलन होगा-अनोखी रात १९६८

अभिलाषाएं बाल-सुलभ, युवा, प्रौढ़ एवं वृद्ध हो सकती
हैं। कुंवारों के मन में लड्डू कैसे फूटा करते हैं उसकी एक
बानगी देखिये फिल्म अनोखी रात के गीत में गीत जिसमे
कुंवारी-अभिलाषा मन के बाहर उछल पड़ी है और उबड़ खाबड़
रास्तों पर साईकिल पर सवार हो के बल खा रही है। । गीत
इन्दीवर का लिखा हुआ है जिनके लिखे और मुकेश के गाये
कई गीत फिल्म संगीत के खजाने में मौजूद हैं।

कुछ युवक युवतियों का ये हाल हो जाता है शादी का ख्याल
उनको खाते पीते, सोते, रोते और धोते समय भी दिमाग में
घूमता रहता है और ये अपने चरम पर पहुँचता है शादी वाले
दिन। वो उत्साह शादी के बाद धीरे धीरे ठंडा हो जाता है।

गीत फिल्माया गया है हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एक प्रतिभा
संपन्न और समर्थ कलाकार संजीव कुमार पर। उन्होंने ऐसे
हाव भावों को समझाने का भरसक प्रयत्न किया है और उस
अजीब उतावलेपन को बखूबी चित्रित किया है। यही गीत किसी
और चम्पू कलाकार पर फिल्माया गया होता तो शायद
ऐसा लगता जैसे जमाल गोटा खाने के बाद वो फारिग होने की
गुज़ारिश कर रहा हो। जमाल गोटिये हीरो बहुत हैं इस फिल्म
इंडस्ट्री में जो फिल्म में ऐसे लगते हैं जैसे किसी सूटकेस में
जबरन ठूंसे हुए कपडे हों जो सूटकेस खोलते ही बाहर टपक
जाया करते हैं।

अनोखी रात संगीतकार रोशन की आखरी हिंदी फिल्म थी।
उनके असामयिक निधन के पश्चात् उनकी धर्मपत्नी ने
फिल्म का संगीत संगीत पूरा करवाया।




गीत के बोल:


दुल्हन से तुम्हारा मिलन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

बाहों में चांदी का बदन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

दुल्हन से तुम्हारा मिलन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

चाँद परी है चंचल है
वो तेरी है चितचोर

चाँद परी है चंचल है
वो तेरी है चितचोर

मुखड़े को ही तकते तकते
हो जाएगी भोर

ओ गोरी धन का तुम्हे दर्शन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

बाहों में चांदी का बदन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

ऐसी बेताबी है कैसी
पड़ी है सारी रात
ऐसी बेताबी है कैसी
पड़ी है सारी रात

जी भर भर के कर लेना तुम
कमसिनिया से बात

काँधे से झुका सा मन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

बाहों में चांदी का बदन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

वो है तेरी पद्मिनिया
और तू बांका रजपूत
वो है तेरी पद्मिनिया
और तू बांका रजपूत

गज भर की छाती रखता है
दिल भी रख मजबूत

नैनों नैनों में रंग होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

बाहों में चांदी का बदन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो

दुल्हन से तुम्हारा मिलन होगा
ओ मन थोड़ी धीर धरो
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Dulhan se tumhara milan hoga-Anokhi raat 1968

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