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Jul 13, 2020

दोनों के दिल हैं मजबूर-नर्गिस १९९२

आज १३ जुलाई प्रसिद्ध सेक्सोफोन वादक मनोहारी सिंह की
पुण्यतिथि है. मनोहारी सिंह एस डी बर्मन के ओर्केस्ट्रा से
जुड़े और बाद में उनके पुत्र आर डी बर्मन के साथ उन्होंने
लमे समय तक वादक, संगीत सहायक और अरेंजर के रूप
में काम किया.

मनोहारी सिंह कई वाद्य कुशलता के साथ बजाते थे जिनमें
से एक बांसुरी भी है.

मनोहारी सिंह ने बासु चक्रवर्ती के साथ मिल के जोड़ी भी
बनाई थी. आज हम आपको इसी जोड़ी के संगीत से सजी
सन १९९२ की फिल्म नर्गिस से एक गाना सुनवाते हैं जिसे
लता मंगेशकर और जगजीत सिंह ने गाया है. इसे लिखा
है मजरूह सुल्तानपुरी ने.




गीत के बोल:

मजबूर प्यार से
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
हम क्या करें मेरी जां तुम क्या करो
मेरी जां तुम क्या करो
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
हम क्या करें मेरी जां तुम क्या करो
मेरी जां तुम क्या करो
.
............................................................
Dono ke dil hain majboor-Nargis 1992

Artists:

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Apr 6, 2017

आ हमसफ़र प्यार की सेज पर –चटपटी १९८२

स्मिता पाटिल और श्रीराम लागू की यादगार भूमिकाओं वाली
फिल्म है चटपटी. इस फिल्म से एक मधुर युगल गीत सुनते
हैं किशोर और लता का गाया हुआ. यही गीत ७० के दशक
की एक फिल्म यास्मीन में भी इस्तेमाल हुआ था. दोनों फिल्मों
का संगीत बासु-मनोहारी द्वारा तैयार किया गया था. बासु और
मनोहारी आर डी बर्मन के सहायक रहे हैं.

गीत योगेश का लिखा हुआ है. फिल्म का यही गीत सबसे ज्यादा
लोकप्रिय है उसके अलावा फिल्म का शीर्षक गीत रोचक है जिसे
आशा भोंसले ने गाया है.



गीत के बोल:

आ आ आ आ
आ  हमसफ़र  प्यार की सेज पर
कुछ कहें  कुछ सुनें
जाग के रात भर
आ  हमसफ़र  प्यार की सेज पर
कुछ कहें  कुछ सुनें
जाग के रात भर 
आ आ आ आ आ हमसफ़र

इतना प्यार तू सनम  लाया है कहाँ से
इतना रूप तू सनम लाई है जहाँ से
मैं जो भी हूँ वो है  तेरे प्यार का असर
कहीं लग न जाए तुझको मेरी नज़र
आ  हमसफ़र  हा हा हा प्यार की सेज पर
कुछ कहें  कुछ सुनें
जाग के रात भर 
आ आ आ आ आ हमसफ़र

आओ आज मिलें  कुछ तो खो के पा लें
आओ आज लुट के  कुछ तो हम चुरा लें
कहूँ क्या मैं दिल में  उठ रही है क्या लहर
गले मुझ से मिल के  हो जा तू बेखबर
आ हमसफ़र  प्यार की सेज पर
कुछ कहें  कुछ सुनें
जाग के रात भर 
हाँ हाँ आ आ हमसफ़र प्यार की सेज पर
कुछ कहें कुछ सुनें
जाग के रात भर
हाँ हाँ आ आ आ हमसफ़र
.............................................................
Aa hamsafar pyar ki sej par-Chatpati 1982

Artists: Smita Patil, Rajkiran

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Nov 20, 2010

वादा करो जानम-सबसे बड़ा रुपैया १९७६

फिल्म सबसे बड़ा रुपैया के बारे में आपको काफी जानकारी इस
पोस्ट में दी गई थी। अब आप सुनिए इस फिल्म का सबसे
लोकप्रिय गीत जो मधुर भी है। इस गीत को विनोद मेहरा और
मौसमी चटर्जी पर फिल्माया गया है। गीत के बोल मजरूह के हैं
और संगीत बासु-मनोहारी का। गायक कलाकार हैं-किशोर और
लता। हर संगीत प्रेमी अपने कलेक्शन में कुछ अक्सर सुनने
वाले गीत रखता है। ये एक ऐसा ही गीत है। इसको आप अक्सर
सुन सकते हैं । ऐसी मेलोडिज़ को ही सॉफ्ट मेलोडिज़ कहा जाता है।




गीत के बोल:


वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
बाँधी है जो दिल से अब ये डोर
ज़िन्दगी भर ना टूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
बाँधी है जो दिल से अब ये डोर
ज़िन्दगी भर ना टूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे

बदलें ना हम तुम कभी
रुत ये बदलती रहे
दो दिलों की ये बात चलती ही रहे

हो ओ ओ, आके बहारों की छाँव
जाती रहे ढलती रहे
ना फिरे ये नज़र दिल से दिल ना रूठे
ज़माना चाहे छूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
बाँधी है जो दिल से अब ये डोर
ज़िन्दगी भर ना टूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे

होने देंगे ऐसा ना हम कल को ज़माना हँसे
यूं करें प्यार का नाम दुनिया याद करे
हमपे गिरे बिजलियाँ आंधी के तूफ़ान चलें
हाथ से ये तेरा आँचल अब ना छूटे
ज़माना चाहे छूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
बाँधी है जो दिल से अब ये डोर
ज़िन्दगी भर ना टूटे

वादा करो जानम ना छोड़ोगे ये दामन
ज़माना चाहे छूटे
हूँ ऊं ऊं ऊं ज़माना चाहे छूटे
हूँ ऊं ऊं ऊं ज़माना चाहे छूटे
.......................................
Wada karo jaanam-Sabse bada rupaiya 1976

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Nov 18, 2010

बही जइयो ना रानी -सबसे बड़ा रुपैया १९७६

"सबसे बड़ा रुपैया" नाम की दो फ़िल्में हैं। एक काले-पीले ज़माने की और
और एक रंगीन ज़माने की। काले-पीले दौर की फिल्मों को हम क्लासिक
कहते हैं। यहाँ 'हम' से मतलब फ़िल्मी पत्रकारों और फ़िल्मी-बुद्धिजीवियों
से है। वैसे क्लासिक की परिभाषा विस्तृत है। नामचीन लोगों की बनाई
जो फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर पिट जाती हैं उनको भी क्लासिक कहा
जाता है ।

हम गीत सुनेंगे रंगीन युग वाली फिल्म से। फिल्म का निर्देशन किया है
एस. रामनाथन ने। फिल्म में महमूद, विनोद मेहरा और मौसमी चटर्जी
प्रमुख कलाकार हैं। महमूद और विनोद मेहरा इक्का दुक्का फिल्मों में
साथ साथ दिखाई दिए उनमे से एक है-दो फूल । विनोद मेहरा और
मौसमी चटर्जी की जोड़ी आपने काफी फिल्मों में देख ली होगी। एक फिल्म
आई थी-उस पार जो शायद दोनों की पदार्पण फिल्म थी। उसके बाद दोनों
दिखे अनुराग में। फिल्म 'अनुराग' और 'उस पार' फिल्मों में संगीत एस दी
बर्मन का है। फिल्म दो फूल के संगीत निर्देशक आर डी बर्मन हैं। बर्मन
खेमे के दो सहायक संगीत निर्देशकों -बासु-मनोहारी ने मिलकर फिल्म
सबसे बड़ा रुपैया का संगीत तैयार किया। इस फिल्म के संगीत से आपको
लगेगा की ये पंचम का संगीत है। बासु-मनोहारी पंचम के सहायक रहे अतः
उनके संगीत में समानता होना स्वाभाविक है। बासु और मनोहारी की जोड़ी
ने सचिन देव बर्मन के लिए भी सहायक का काम किया है।

एक और विशेष बात ये है कि गीत लिखने के लिए सेवाएँ भी गीतकार
मजरूह सुल्तानपुरी की ली गयीं जिन्होंने बर्मन खेमे के लिए बहुत से
गीत लिखे। इस फिल्म के गीत थोड़े लोकप्रिय अवश्य हुए लेकिन फिल्म
नहीं चली। एक गीत लता और किशोर की आवाज़ वाला काफी बजा। वो
हम बाद में सुनेंगे, पहले सुनते हैं इस फिल्म का सबसे कर्णप्रिय गीत जो
लता और उषा मंगेशकर की आवाज़ में है । इसे फिल्माया गया है मौसमी
चटर्जी और अन्य कलाकारों पर। गात का फिल्मांकन भी बढ़िया है और
नयन-सुख देने वाला है।

फिल्म की कहानी लिखी है 'अबरार अल्वी' ने जिन्हें हम गुरु दत्त की फिल्मों
से पहचानते हैं।




गीत के बोल:

आ हा , हो हो, आ हा, हा हा,
हा हा हा, हा हा हा , हा हा हा

बही जइयो ना, रानी बही जइयो ना
बही जइयो ना
राजा की तलैया में रही जइयो ना
रही जइयो ना
एक तो जवानी दूजे छेड़ जाए बहता पानी
अइयो अइयो
हो ओ ओ ओ , बही जइयो ना, रानी बही जइयो ना

कोई ना दौड़ के
बाँहों को थाम ले
गहरे में जाना नहीं
हो ओ ओ, फँस जाए ना किसी
मन की मछरिया
लट बिखरना नहीं
हो, तोहे जो देखे
हाँ, तोहे जो देखे
पानी मारे लहरिया
तो हमको बुलइयो ना

बही जइयो ना, रानी बही जइयो ना
बही जइयो ना
राजा की तलैया में रही जइयो ना
रही जइयो ना
एक तो जवानी दूजे छेड़ जाए बहता पानी
अइयो अइयो
हो ओ ओ ओ , बही जइयो ना, रानी बही जइयो ना

आ हा आ, हा हा हा

इस पार बांवरी
सोचे है क्या खड़ी
राजा बसे उस पार
हो ओ ओ ओ, बालेपने में तो
सुनती हैं दूर से
हर सांवरी ये पुकार

हो ओ ओ ओ , फिर मैं अकेली
दोल जाऊं भंवर में तो
शोर मचैयो ना

बही जइयो ना, रानी बही जइयो ना
बही जइयो ना
राजा की तलैया में रही जइयो ना
रही जइयो ना
एक तो जवानी दूजे छेड़ जाए बहता पानी
अइयो अइयो
हो ओ ओ ओ , बही जइयो ना, रानी बही जइयो ना

बही जइयो ना, रानी बही जइयो ना
बही जइयो ना
राजा की तलैया में रही जइयो ना
रही जइयो ना
एक तो जवानी दूजे छेड़ जाए बहता पानी
अइयो अइयो
हो ओ ओ ओ , बही जइयो ना, रानी बही जइयो ना
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Bahi jaiyo na rani bahi jaiyo-Sabse bada rupaiya 1976

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