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Jan 7, 2017

कागज़ की मेरी नाव-दो दिल १९४७

पानी केरा बुलबुला अस मानुस की जात. गूढ़ अर्थ वाले शब्द
हैं. कुछ गीत हमें इसका आभास करवाते हैं. आज सुनते हैं
फिल्म दो दिल से एक और गीत मुकेश और सुरैया का गाया
हुआ.

पंडित गोविन्दराम के संगीत निर्देशन में ये गीत बना था जिसे
दीनानाथ मधोक ने लिखा है. रेयर कोम्बिनेशन है मुकेश और
सुरैया का. हम लोग कुछ खास गायकों के युगल गीत सुनने के
आदि हो चुके हैं और अमर ध्यान दुसरे गायकों वाले युगल
गीतों की तरफ नहीं जा पाता है. मुकेश ने उस समय की काफी
सारी गायकों के साथ युगल गीत गाये हैं जिनमें शमशाद और
गीत दत्त प्रमुख हैं. लाता के साथ गाये युगल गीत तो खैर
बहुत से हैं मुकेश के.




गीत के बोल:

कागज़ की मेरी नाव
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
इस डोलती नैया का
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव

आँसू भी छलकते हैं और ग़म की घटायें हैं
आँसू भी छलकते हैं और ग़म की घटायें हैं
आवो मेरी आँखों में
आवो मेरी आँखों में सावन का नज़ारा है
इस डोलती नैया का
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है

कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव

हमने तेरी आँखों में एक दुनिया बसाई थी
हमने तेरी आँखों में एक दुनिया बसाई थी
जब तुम ही फिरे हमसे फिर कौन हमारा है
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है

कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव
…………………………………………………
Kagaz ki meri naav-Do dil 1947

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Sep 25, 2016

फिर नैन बाँवरे भर भर आये-दो दिल १९४७

गायिका सुरैया का पूरा नाम है सुरैया जमाल शेख. सन १९२९ में
गुजरावालां में जन्मी सुरैया का गायन कैरियर सन १९४२ से शुरू
हुआ जब उन्होंने महताब नामक एक्ट्रेस के लिए पार्श्व गायन किया.
बाल कलाकार के रूप में काम करते हुए उन्होंने अपने गाने भी गाये.
संगीत की शिक्षा उन्हें बाल्य काल में ही मिलना शुरू हो गयी थी.
डांस उन्होंने सीखा मुमताज़ अली से जो मशहूर कॉमेडियन महमूद
के पिता हैं.

सन १९३७ की फिल्म उसने क्या सोचा से बतौर बाल कलाकार उनके
एक्टिंग कैरियर का आगाज़ हुआ. अपने समय की सबसे मशहूर
गायिका-नायिका के बारे में चर्चा करेंगे आगे, फिलहाल एक गीत सुनें
फिल्म दो दिल से दीनानाथ मधोक का लिखा हुआ जिसे गोविन्दराम
ने संगीत से संवारा.

गीत में दो शब्द हैं-सोना, रूपा. इन शब्दों वाला एक गीत है देव आनंद
की एक फिल्म जोशीला में आशा भोंसले का गाया हुआ. गीत इन्हीं शब्दों
से शुरू होता है.



गीत के बोल:

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
आहों की ओट में निकले
मेरे दिल से हाय हाय
आहों की ओट में निकले
मेरे दिल से हाय हाय
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये

एक तो सूनी सेज हमारी दूजे रैन अँधेरी
रैन अँधेरी
एक तो सूनी सेज हमारी दूजे रैन अँधेरी
रैन अँधेरी
तीजे पहरे पे दुनिया है पेच  न जाये मेरी
तीजे पहरे पे दुनिया है पेच  न जाये मेरी
जब याद तुम्हारी आये
जब याद तुम्हारी आये
मेरा नन्हा सा जियरा धड़क जाये

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये

रूपा न माँगू सोना न माँगू
रूपा न माँगू सोना न माँगू
माँगूँ तोसे ये दाम हो
माँगूँ तोसे ये दाम
हाड़ मास का पिंजरा जाये
साँस आये न आये
मेरे लब पे रहे पिया का नाम
वो प्यार करे हम दोनों
वो प्यार करे हम दोनों
जिस प्यार के किस्से जग गाये

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
………………………………………………………………………
Phir nain bawre bhar bhar-Do dil 1947

Artist: Suraiya

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Aug 1, 2014

तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे-दो दिल १९६५



संगीतकार हेमंत कुमार ने उल्लेखनीय योगदान
दिया है हिंदी फिल्म संगीत को. फिल्म नागिन
जिसकी गिनती सर्वकालिक संगीतमय हिट फिल्मों
में होती है, कौन भुला सकता है. उन्होंने गीतकार
कैफी अजमी के साथ मिलकर फिल्म दो दिल के
लिए मधुर रचनाएँ बनायीं. दो गीत आपको पहले
सुनवाए जा चुके हैं. आज सुनते हैं फिल्म का
तीसरा गीत. गीत फिल्माया गया है विश्वजीत
और राजश्री पर.



गीत के बोल:

तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
चले प्यार का नाम ज़माने में 
किसी और का नाम रहे न रहे 
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
चले प्यार का नाम ज़माने में 
किसी और का नाम रहे न रहे
 
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
 
 
मेरी प्यास  का कोई हिसाब नहीं 
तेरी मस्त नज़र का जवाब नहीं 
मेरी प्यास  का कोई हिसाब नहीं 
तेरी मस्त नज़र का जवाब नहीं 
इसी मस्त नज़र से पिलाये जा 
इसी मस्त नज़र से पिलाये जा 
मेरे सामने जाम रहे न रहे 
 
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
 
जो निगाह उठी तो पयाम मिला 
जो निगाह झुकी तो सलाम मिला 
जो निगाह उठी तो पयाम मिला 
जो निगाह झुकी तो सलाम मिला 
इसी वक्त बुझा दे लगी दिल की 
ये पयाम सलाम रहे न रहे 
 
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
चले प्यार का नाम ज़माने में 
किसी और का नाम रहे न रहे
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
........................................................
Tera husn rahe mera ishq-Do dil 1965

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Jul 13, 2011

प्यासी हिरनी बन बन धाए-दो दिल १९६४

हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन में अब आपको सुनवाते हैं फिल्म
'दो दिल' का एक गीत जिसे गा रही हैं लता मंगेशकर. वी शांताराम
की पुत्री राजश्री दो दिल फिल्म में नायिका हैं. नायक हैं विश्वजीत.
गीत कैफ़ी आज़मी का लिखा हुआ है.

कुछ भूतिया फिल्मों के गीतों सा शुरू होता है ये गीत. नयिका खुद
दौड लगा रही है और नायक की भी जोगिंग की प्रैक्टिस करवा रही है.
अब इतना मधुर गीत कोई सुन्दर बाला गाती हुई जंगल में दिख
जाए तो अच्छे अच्छे दौड लगा दें उसे देख कर.




गीत के बोल :

कहाँ है तू
तू कहाँ है
आ जा ,ऐ मेरे मेरे सपनों के राजा

प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे

प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे

प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

नयी नयी कली खिली
चुन ले न कोई
नयी नयी कली खिली
चुन ले न कोई

ऐसी वैसी बातें दिल की
सुन ले न कोई
मन हंसा जिया मोरा
जाने क्या गाये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे

प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे

प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

चलते चलते रुक जाऊं मैं
चल नहीं पाऊँ
चलते चलते रुक जाऊं मैं
चल नहीं पाऊँ
पल पल भड़के तन में अग्नि
कैसे बुझाऊँ
लगी न बुझे कहीं
जी को जलाये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे

प्यासी हिरनी बन बन धाए
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

एक तो मैं हूँ भोली भाली
दूजे अकेली
एक तो मैं हूँ भोली भाली
दूजे अकेली

कैसे बूझी जाए मोसे
मन की पहेली
चली है हवा नयी
जिया घबराए रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे

प्यासी हिरनी बन बन धाए
कोई शिकारी आये रे
चोरी चोरी फंदा डाले
बांह पकड़ ले जाए रे

प्यासी हिरनी बन बन धाए
..................................
Pyasi hirni ban ban dhaaye-Do Dil 1964

Artist: Rajshri, 

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Mar 3, 2009

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने-दो दिल १९६४

ये गीत ४५ साल पुराना है। विश्वास ही नहीं होता कभी कि ये गीत
इतने पुराने हैं। आज भी सुनो तो वैसे ही लगते हैं जैसे नए हों। ये
गीत आरती मुखर्जी और रफ़ी का गाया हुआ युगल गीत है। परदे
पर इसे राजश्री और विश्वजीत पर फिल्माया गया है। बोल लिखे हैं
कैफी आज़मी और संगीत तैयार किया है हेमंत कुमार ने । इस
फ़िल्म का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था।



गीत के बोल:

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने
सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने
ओ रसिया, मन बसिया

तीखा तीखा कजरा लगाया तूने
काहे को जगाया जादू तूने
ओ सजनी सुख रजनी

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने

ओ रसिया मन बसिया
तूने प्यास जगा दी
नई आग लगा दी
मेरा अंग अंग जला जाए

ओ सजनी सुख रजनी
ज़रा नैन मिला ले
लगी दिल की बुझा ले
तेरे संग संग कोई आए
तेरा रूप सहा नहीं जाए

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने

कहे सारा ज़माना
मुझे तेरा दीवाना
सदा हार हार तुझे चाहूं

मेरी प्रीत पुरानी
हुयी तेरी दीवानी
पिया बार बार तुझे चाहूं

तेरे अंग....?? का मुझे आए

तीखा तीखा कजरा लगाया तूने

ओ रसिया मन बसिया
मेरे नैन नशीले
मेरे होंठ रसीले
जिया झूम झूम मेरा गाये

ओ सजनी सुख रजनी
ये फिजा भी शराबी
ये हवा भी शराबी

तुझे चूम चूम इधर आए
मुझे दूर कहीं लिए जाए

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने

ओ, तीखा तीखा कजरा लगाया तूने
काहे को जगाया जादू तूने
ओ सजनी सुख रजनी
ओ रसिया, मन बसिया
ओ सजनी सुख रजनी
ओ रसिया, मन बसिया
.......................................................................
Saara mera kajra-Do  Dil 1964

Artists: Biswajeet, Rajshri

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