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Dec 24, 2015

मैं गुनाहगार हूँ-नई रौशनी १९६७

आपको बहुत दिन हुए महेंद्र कपूर का गीत सुनवाए. आइये सुना
जाए एक शांत सा मधुर युगल गीत सन १९६७ की एक फिल्म
नै रोशनी से. संगीतकार रवि के संगीत की सभी खूबियां आपको
इस गीत द्वारा ज्ञात हो जाएँगी. खूबियों से यहाँ मेरा अभिप्राय
संगीत संयोजन से है.

महेंद्र कपूर के साथ यह गीत लता मंगेशकर ने भी गाया है. इस
गीत को शायद ही आपने कभी सुना होगा. अरे, मैंने ही इसे एक दो
बार सुना है केवल. गीत विश्वजीत और माला सिन्हा पर फिल्माया
गया है. रात में फिल्माया गया ये गीत काफी रोमांटिक किस्म का
है. गीत राजेंद्र कृष्ण की कलम से निकला है.

गीतकार ने कुछ अनूठे भाव इस गीत में ढोले हैं- ‘हमने देखा ये अजब
दीवाना कैद हो के भी मज़ा लेता है’




गीत के बोल:


मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको
मैंने सपने में तुम्हें छेड़ दिया
उम्र भर कैद-ए-मोहब्बत की सजा दी तुमको
तुमने सपने में हमें छेड़ दिया

प्यार से जिसने गिरफ्तार किया
दिल मेरा उसको दुआ देता है
हमने देखा ये अजब दीवाना
कैद हो के भी मज़ा लेता है
मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको
मैंने सपने में तुम्हें छेड़ दिया
उम्र भर कैद-ए-मोहब्बत की सजा दी तुमको
तुमने सपने में हमें छेड़ दिया

सख्तियाँ कैद की तुम क्या जानो
चाहते हो तो रिहाई ले लो
अब कफस ही में पड़ा रहने दो
चाहे बदले में खुदाई ले लो
उम्र भर कैद-ए-मोहब्बत की सजा दी तुमको
तुमने सपने में हमें छेड़ दिया
मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको
मैंने सपने में तुम्हें छेड़ दिया

मैंने ख्वाबों का सहारा ले के
दो घडी तुमसे मोहब्बत की है
तुम इसे लाख मोहब्बत कह लो
हम तो समझेंगे शरारत की है
मैं गुनाहगार हूँ जो चाहे सजा दो मुझको
मैंने सपने में तुम्हें छेड़ दिया
उम्र भर कैद-ए-मोहब्बत की सजा दी तुमको
तुमने सपने में हमें छेड़ दिया
.........................................................
Main gunahgaar hoon-Nai roshni 1967

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Dec 14, 2014

कमल के फूल जैसा-दो आँखें १९७४

हंसराज बहल का संगीत अथाह सागर है जिसमें आपको सभी प्रकार के रत्न
मिल जायेंगे. उन्होंने श्वेत श्याम के ज़माने में जो संगीत दिया वो अनमोल है.
रंगीन युग में भी उन्होंने थोड़े झटके दिए, ये गीत उनमें से एक है. अपने प्रिय
गायक रफ़ी को ही उन्होंने आजमाया है इस गीत के लिए.  गीत लिखा है
वर्मा मलिक ने.

गीत वर्मा मलिक ने लिखा है और इस पर थिरकने वाली नायिका हैं-रेखा.
फिल्म है दो आँखें जो सन १९७४ की फिल्म है. रेखा के मैंने जितने भी गाने
देखे हैं कभी उनको देखकर बोरियत नहीं हुयी. योग के पहले वाली रेखा हो
या योग के बाद वाली रेखा. उनके भावों में आकर्षण, अल्हडपन, उन्मुक्तता
और भावावेश का मिश्रण है. कुछ कोम्प्लेक्स सी केमिस्ट्री है जिसके लिए
बाकी  की नायिकाएं तरसती ही रहीं. निर्देशक  अजोय बिश्वास ने इस गीत
को काफी तबियत से फिल्म दिया है. सामान्यतया बालकनी में बैठने वाले
दर्शक आगे की पंक्ति में क्यूँ बैठे अब समझ आया.

फिल्म का शुमार फ्लॉप फिल्मों की श्रेणी में होता है. इसका कारण हो सकते
हैं फिल्म के नायक जो कि अपने कैरियर के ढलान पर पहुँच चुके थे. इसे
विडम्बना ही कहेंगे १९७३ में ही रिलीज़ हुई अजोय की निर्देशित फिल्म
"समझौता" बहुत चली और उसके गाने भी बहुत बजे.

गीत में जोर का झटका धीरे से लगने का वकत आता है गीत के अंत में
जिसमें नायक प्यानो पर बैठ कर इस गीत को गा रहा है और कल्पना कर
रहा है नायिका की. उल्लेखनीय बात ये है गीत में आपको प्यानो कहीं सुनाई
नहीं देगा अंत के सिवा .




गीत के बोल:

कमल के फूल जैसा
बदन तेरा चिकना चिकना
कमल के फूल जैसा
बदन तेरा चिकना चिकना
कमल के फूल जैसा
कमल के फूल जैसा
बदन तेरा चिकना चिकना

कजर तेरा बिखरा बिखरा
आंख तेरी फितना फितना फितना
ये बिंदिया उभरी उभरी
ये झुमका अटका अटका
ये जुल्फें लिपटी लिपटी
ये आँचल लटका लटका
ये आँचल लटका लटका
कमर जब लचकी लचकी
फिसल गयी इतना इतना इतना

कमल के फूल जैसा, आ हा ,
बदन तेरा चिकना चिकना
कमल के फूल जैसा

जवानी बिफरी बिफरी
ये रूप है छलका छलका
जवानी बिफरी बिफरी
ये रूप है छलका छलका
ये पलकें मचली मचली
नशा है हल्का हल्का
नशा है हल्का हल्का
दूर तू उतनी उतनी
पास मैं जितना जितना

कमल के फूल जैसा, ओए होए ,
बदन तेरा चिकना चिकना
कमल के फूल जैसा

ये पांव गोरे गोरे
हैं घुँघरू सजते सजते
ये पांव गोरे गोरे

हैं घुँघरू सजते सजते
कदम जब उठते उठते
गीत हैं बजते बजते
गीत हैं बजते बजते
पायल तेरी छलकी छलकी
तड़क धिन धिक् ना धिक् ना धिक् ना

कमल के फूल जैसा, हाय हाय
बदन तेरा चिकना चिकना
कमल के फूल जैसा

कमल के फूल जैसा
बदन तेरा चिकना चिकना
कजर तेरा बिखरा बिखरा
आंख तेरी फितना फितना फितना

कमल के फूल जैसा
बदन तेरा चिकना चिकना
कमल के फूल जैसा
....................................
Kamal ke phool jaisa-Do aankhen 1974

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Aug 1, 2014

तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे-दो दिल १९६५



संगीतकार हेमंत कुमार ने उल्लेखनीय योगदान
दिया है हिंदी फिल्म संगीत को. फिल्म नागिन
जिसकी गिनती सर्वकालिक संगीतमय हिट फिल्मों
में होती है, कौन भुला सकता है. उन्होंने गीतकार
कैफी अजमी के साथ मिलकर फिल्म दो दिल के
लिए मधुर रचनाएँ बनायीं. दो गीत आपको पहले
सुनवाए जा चुके हैं. आज सुनते हैं फिल्म का
तीसरा गीत. गीत फिल्माया गया है विश्वजीत
और राजश्री पर.



गीत के बोल:

तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
चले प्यार का नाम ज़माने में 
किसी और का नाम रहे न रहे 
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
चले प्यार का नाम ज़माने में 
किसी और का नाम रहे न रहे
 
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
 
 
मेरी प्यास  का कोई हिसाब नहीं 
तेरी मस्त नज़र का जवाब नहीं 
मेरी प्यास  का कोई हिसाब नहीं 
तेरी मस्त नज़र का जवाब नहीं 
इसी मस्त नज़र से पिलाये जा 
इसी मस्त नज़र से पिलाये जा 
मेरे सामने जाम रहे न रहे 
 
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
 
जो निगाह उठी तो पयाम मिला 
जो निगाह झुकी तो सलाम मिला 
जो निगाह उठी तो पयाम मिला 
जो निगाह झुकी तो सलाम मिला 
इसी वक्त बुझा दे लगी दिल की 
ये पयाम सलाम रहे न रहे 
 
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
चले प्यार का नाम ज़माने में 
किसी और का नाम रहे न रहे
तेरा हुस्न रहे मेरा इश्क रहे
तो ये सुबह ये शाम रहे न रहे 
........................................................
Tera husn rahe mera ishq-Do dil 1965

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Jun 23, 2011

लगी ना छूटेगी-परदेसी १९७०

आपको सन १९७० की परदेसी का एक गीत सुनवा चुके हैं।
अगला गीत सुनिए लता मंगेशकर की आवाज़ में। साहिर
के अंदाज़-ए-बयां पर तो संगीतप्रेमी काफी लिखते रहे हैं और
लिखते रहेंगे, थोड़ा मजरूह के अंदाज़-ए-बयां पर भी गौर किया
जाये जिन्होंने ज्यादा सरल और थोड़े कठिन अंदाज़ में काफी
उम्दा किस्म के अफ़साने बुने।

प्रस्तुत गीत में विद्रोही सी सुनाई पढ़ती नायिका का सरे आम
इकरार-ए-मोहब्बत है और अनूठे अंदाज़ में। कुछ चैलेंज वाले
अंदाज़ में ज़माने से वो मुखातिब है-जो बन पड़े कर ले बैरी जहां,
बीच में दीवारें खड़ी करवा दो चाहे मंगल ग्रह भेज दो, हम तो प्यार
करेंगे, बेहिसाब करेंगे और धुआंधार करेंगे।

कुछ कुछ सफ़ेद कपड़ों को उजला बनाने वाले उत्पादों के विज्ञापन
जैसे शुरू होते इस विडियो में लहराते बलखाते कलाकारों के
नाम हैं-विश्वजीत और मुमताज़। कुछ मनमोहक कुछ बोर से
नृत्य में थोड़ी खींचा-तानी थोड़ी ढिशुम-ढिशुम की मिलावट है।




गीत के बोल:

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ

तू रोक जो सके रोक ले थाम के
हंस देगी मेरी पायल तेरे नाम पे
बोलियाँ प्यार की
बोलियाँ प्यार की बोलती जाऊंगी
कट दे चाहे मेरी जुबां

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ

दुनिया ने फिर उसे दुःख दिया भी तो क्या
कोई प्यार को भुला के जिया भी तो क्या
बावरा मन कहे
बावरा मन कहे, मार डालो मोहे
ना रहूंगी मैं पी के बिना

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ

अब छीन के मुझे ले चले तू कहीं
धड़कन तो मेरे दिल की मिलेगी नहीं
प्यार में खो चुकी
प्यार में खो चुकी मैं तो गुम हो चुकी
अब रहा जिया मेरा कहाँ

लगी ना छूटेगी प्यार में ज़ालिमा
जो बन पड़े कर ले बैरी जहाँ
................................
Lagi na chhootegi-Pardesi 1970

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Dec 6, 2010

आप से मैंने मेरी जान-ये रात फिर नहीं आएगी १९६६

ओ पी नय्यर के संगीत निर्देशन वाली एक और फिल्म है
जिसके सभी गीत सुने जाते हैं और ये तय करना मुश्किल
होता है कि कौन सा बेहतर है। ओ पी नय्यर के लिए शायद
ये चुनौती भरा विषय रहा होगा एक भूतिया फिल्म के लिए
संगीत तैयार करना। हिंदी सस्पेंस फिल्मों का खाका अक्सर
भूतों के इर्द गिर्द घूमा करता है। इस गीत में नायक नायिका
दोनों स्मार्ट दिख रहे हैं। मैंने सुन्दर शब्द का प्रयोग इसलिए
नहीं किया कि सुन्दरता शब्द शायद स्त्रियों के लिए सुरक्षित
है। पुराने ज़माने में पुरुषों का चेहरा गोरा बनाने वाली क्रीम
नहीं आया करती थी।

गीत फिल्माया गया है विश्वजीत और शर्मिला टेगोर पर।
शर्मिला अपनी चित-परिचित घबराहट मिश्रित मुस्कराहट
के साथ प्रस्तुत हैं। ये एक ऐसा भाव था जो उनका ट्रेड मार्क
भाव कहा जा सकता है।

गीत के बोल लाजवाब हैं और इसको टाइप करने में भी आनंद की
अनुभूति हो रही है। इसको आप कह सकते हैं आदर्श/संपूर्ण युगल
गीत । एक उम्दा किस्म का रोमांटिक गीत सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो
उठता है। गीत लिखा है शम्सुल हुदा बिहारी(SH Bihari) ने।




गीत के बोल:

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं
आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

आपको मैंने मोहब्बत का खुदा समझा है
आप कहिये कि मुझे आपने क्या समझा है
ज़िन्दगी क्या है मोहब्बत की मेहरबानी है
दर्द को मैंने हकीकत में दवा समझा है

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकती हैं

आप से मैंने मेरी जान

दिल वही है जो सदा गीत वफ़ा के गाये
प्यार करता हो जिसे प्यार ही करता जाए
सैंकड़ों साल जीने से बेहतर है वो घडी
हाथ में जब हाथ हो जब यार का मौत आ जाए

आपसे मैंने मेरी जान मोहब्बत की है
आप चाहें तो मेरी जान भी ले सकते हैं

आप जब हैं तो मेरे पास मेरा सब कुछ है
जान क्या चीज है ईमान भी ले सकती हैं

आपसे मैंने मेरी जान

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Nov 2, 2010

जाइये आप कहाँ जायेंगे -मेरे सनम १९६५

जैसे ६० और ७० के दशक में हमने देखा कि हीरोइन के सर पर
चिड़िया का घोंसला या मिटटी का गमला लगे जूडे मिले वैसे ही हीरो के
केश विन्यास पर भी कुछ नज़र डाली जाए। उस दशक में कुछ
नायक - विश्वजीत और जॉय मुखर्जी अपने बालों की फुग्गे
वाली स्टाइल के लिए जाने गए। इस स्टाइल में सामने के बालों
को इस तरीके से संवारा जाता मानो कोई हवा भरा छोटा गुब्बारा
रख कर बाल बनाये गए हों। अब गीत कि बात ककी जाए। गीत है
मेरे सनम फिल्म से जिसे गा रही हैं आशा भोंसले। पब्लिक सोचती है
कि काश्मीर की कली, किस्मत, मेरे सनम इत्यादि फिल्मों का संगीत
एक जैसा क्यूँ है। मामला साफ़ है कि तीनों फिल्मों के संगीतकार
ओ. पी. नय्यर साहब हैं। ये बात और है कि मेरे सनम फिल्म के गीत
नय्यर साहब के फेवरेट गीतकार बिहारी साहब ने नहीं लिखे बल्कि
मजरूह साहब की कलम से निकले हैं । फिल्म के बारे में एक रोचक
तथ्य और है कि ये फिल्म नरेन्द्र बेदी की एक कहानी पर आधारित है।
संतूर का सुन्दर प्रयोग हुआ है गीत में जो इसकी एक और विशेषता है।



गाने के बोल:

जाइए आप कहाँ जायेंगे
ये नजर लौट के फिर आएगी
ये नजर लौट के फिर आएगी
दूर तक आप के पीछे, पीछे
दूर तक आप के पीछे, पीछे
मेरी आवाज चली जाएगी

जाइए आप कहाँ जायेंगे
ये नजर लौट के फिर आएगी
ये नजर लौट के फिर आएगी

आप को प्यार मेरा, याद जहाँ आएगा
कोई काँटा, वहीँ दामन से लिपट जायेगा
कोई काँटा, वहीँ दामन से लिपट जायेगा

जाइए आप कहाँ जायेंगे
ये नजर लौट के फिर आएगी
ये नजर लौट के फिर आएगी

जब उठोगे मेरी बेताब निगाहों की तरह
रोक लेगी कोई डाली मेरी बाँहों की तरह
रोक लेगी कोई डाली मेरी बाँहों की तरह

जाइए आप कहाँ जायेंगे
ये नजर लौट के फिर आएगी
ये नजर लौट के फिर आएगी

देखिये चैन मिलेगा ना कहीं दिल के सिवा
आप का कोई नहीं, कोई नहीं दिल के सिवा
आप का कोई नहीं, कोई नहीं दिल के सिवा

जाइए आप कहाँ जायेंगे
ये नजर लौट के फिर आएगी
ये नजर लौट के फिर आएगी
दूर तक आप के पीछे, पीछे
दूर तक आप के पीछे, पीछे
मेरी आवाज चली जाएगी

जाइए आप कहाँ जायेंगे
ये नजर लौट के फिर आएगी
ये नजर लौट के फिर आएगी
.....................................
Jaiye aap kahan jayenge-Mere sanam 1965

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Oct 25, 2010

ये है रेशमी जुल्फों का- मेरे सनम १९६५

हिंदी फिल्मों में सभी वर्ग के दर्शकों का ख्याल रखा जाता है ये
बात ऐसे गीत देख कर समझ में आती है। अपने ज़माने के हिसाब
से ये लटके झटके वाला गाना कहा जा सकता है। आज के दौर के
लिए ये गीत शायद सोबर गीतों की श्रेणी में आये। हकीकत ये है कि
ऐसे गीत सिनेमा हॉल में आगे की कतार में बैठने वाले दर्शकों को ध्यान
में रख कर बनाये जाते थे। समय बदला और आगे पीछे क्या पूरे कुवें में
भंग नज़र आने लगी। आगे की कतार जिसका अपना महत्व हुआ करता
थे धीरे धीरे कम होता गया और मल्टीप्लेक्स आने के बाद तो लगभग
ख़त्म सा हो गया। अमूमन ऐसे गीत या तो हेलन पर फिल्माए जाते या
फिर किसी अन्य कुशल नृत्यांगना पर। प्रयोग समय समय पर होते रहे हैं
और आप इस गीत को उस ज़माने का आईटम -सोंग कह सकते हैं क्यूँ कि
फिल्म की सहायक नायिका पर इसको फिल्माया गया है। मजरूह के लिखे
गीत कि तर्ज़ तैयार की है ओ पी नय्यर ने। आशा भोंसले के ये चर्चित गीतों
में से एक है। कुल मिलकर गीत बढ़िया बन पड़ा है और सदाबहार है। गीत
में अभिनेत्री मुमताज़ कि आकर्षक ड्रेस कुछ वन्य जीवों की खालों की याद
दिलाती है।



गीत के बोल:

हं हं हं हं
हा हा हा हा, हां

ये है रेशमी, जुल्फों का अँधेरा, ना घबराइए
जहाँ तक महक है, मेरे गेसुओं की, चले आइये
ये है रेशमी, जुल्फों का अँधेरा, ना घबराइए
जहाँ तक महक है, मेरे गेसुओं की, चले आइये
ये है रेशमी जुल्फों का अँधेरा, ना घबराइए
जहाँ तक महक है, मेरे गेसुओं की, चले आइये

सुनिए, तो ज़रा, जो हकीकत है कहते हैं हम
खुलते, रुकते, इन रंगीन लबों की क़सम
जल उठेंगे दिए जुगनुओं की तरह
जल उठेंगे दिए जुगनुओं की तरह
ये तबस्सुम तो फरामैये,
हा हा हा हा, हां

ये है रेशमी जुल्फों का अँधेरा ना घबराइए
जहाँ तक महक है, मेरे गेसुओं की, चले आइये

ला ला ला ला
ला ला ला ला
ला ला ला ला
ला ला ला ला

प्यासी है नज़र, हाँ
ये भी कहने की है बात क्या
तुम हो मेहमान
तो ना ठहरेगी ये रात क्या
रात जाए, रहें आप दिल में मेरे
रात जाए, रहें आप दिल में मेरे
अरमान बन के रह जाइये,
हं हं हं हं, हा

ये है रेशमी जुल्फों का अँधेरा ना घबराइए
जहाँ तक, महक है, मेरे गेसुओं की, चले आइये

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May 4, 2010

तेरे चेहरे से हटे आंख-प्यार का सपना १९६९

माला सिन्हा और विश्वजीत की जोड़ी। सन १९६९ की फिल्म का नाम
है प्यार का सपना। हॉस्पिटल की जूनियर डॉक्टर सी दिखती नायिका
और क्रिकेट के मैदान से भगा दिए गए क्रिकेटर से दिखते नायक
के ऊपर ये एक सॉफ्ट किस्म का रोमांटिक गीत फिल्माया गया है।
अब आप क्रिकेट के मैदान पर ऑफ व्हाइट शर्ट और टाई पहन के
जायेंगे तो भगा ही दिए जायेंगे ना। निर्देशक का बस चलता तो
ज़मीन की घास भी सफ़ेद पुतवा देता। निर्देशक नामचीन हस्ती हैं
जिनका मैं भी एक प्रशंसक हूँ इसलिए इस कथन का थोडा संशोधन
करके कहता हूँ कि श्वेत श्याम के युग के कलाकारों को रंगीन रील
में भी श्वेत श्याम दिखने कि कला कोई उनसे सीखे।


रफ़ी के गाये इस गीत को लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और इसकी धुन बनाई
है चित्रगुप्त ने।



गीत के बोल:


तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं
सामने तू है तुझे देख के अब क्या देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं

रात जुल्फों में तेरी दिन तेरे रुखसारों में
रात जुल्फों में तेरी दिन तेरे रुखसारों में
एक ही वक़्त पे दिन-रात का जलवा देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं

तेरे जलवों की बहारें भी तमाशाई हैं
तेरे जलवों की बहारें भी तमाशाई हैं
मैं भी दिल थाम के कब तक ये तमाशा देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं
तेरे चेहरे से हटे आँख तो दुनिया देखूं

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May 1, 2010

यही वो जगह है-ये रात फिर ना आएगी १९६६

सब कुछ अलग हटके है इस गीत के साथ। अभी तक हिंदी फिल्मों में
भूतिया दृश्यों या भूतिया अभिनेत्रियों के लिए जनता को लता मंगेशकर की
आवाज़ सुनाई देती थी। इस फिल्म से समीकरण बदले। हालाँकि इससे पहले
भी कुछ और गायिकाओं ने भूतिया फिल्मों के लिए गीत गाये थे मगर लता के
गाये गीतों के अलावा किसी का गाया गीत सुनाई नहीं दिया । आशा भोंसले की
आवाज़ शर्मिला टेगोर के लिए भी कुछ नया सा अनुभव था जनता के लिए।
१९६६ में ही आई फिल्म देवर में शर्मिला के लिए आपको लता की आवाज़ सुनाई
पड़ेगी। देवर में रोशन का संगीत है। अब ओ पी नय्यर का संगीत होगा फिल्म में
तो गीत आशा की आवाज़ में ही सुनाई देगा ना। कुछ भी हो गीत के बोल और धुन
दोनों बढ़िया हैं। शम्सुल हुदा बिहारी ने गीत लिखा है।

अभिनेत्री के सर पर बालों की चोटी और समीप ही पहाड़ की चोटी में कुछ समानता
सी है। गीत का फिल्मांकन बढ़िया है और उसमे ज्यादा चुटकी लेने की गुंजाईश नहीं है।
विडियो में केवल एक अंतरा दिखाई देगा आपको लेकिन मैंने गीत के पूरे बोल इधर
आपकी सुविधा/दुविधा के लिए दे दिए हैं।



गीत के बोल:

यही वो जगह है, यही वो फ़िज़ा है
यहीं पर कभी आप हमसे मिले थे

यही वो जगह है, यही वो फ़िज़ा है
यहीं पर कभी आप हमसे मिले थे
इन्हें हम भला किस तरह भूल जायें
यहीं पर कभी आप हमसे मिले थे

यही वो जगह है

यहीं पर मेरा हाथ में हाथ लेकर
कभी ना बिछड़ने का वादा किया था
सदा के लिये हो गए हम तुम्हारे
गले से लगा कर हमें ये कहा था
कभी कम ना होंगी हमारी वफ़ाएं
यहीं पर कभी आप हमसे मिले थे

यही वो जगह है

यहीं पर वफ़ा का नया रंग भर के
बनाई थी चाहत की तसवीर तुमने
यहीं की बहारों से फूलों को चुन कर
संवारी थी उलफ़त की तक़दीर तुमने
वो दिल आपको याद कैसे दिलाये
यहीं पर कभी आप हमसे मिले थे

यही वो जगह है

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Dec 9, 2009

परदेसी पिया -परदेसी १९७०

७० के दशक तक आते आते सभी पुराने ज़माने के संगीतकार थोड़े
लाउड होते चले. लाउड न हुए तो उस समय के हिसाब से उन्होंने अपने
संगीत में थोड़े बदलाव किए. ये गीत फ़िल्म परदेसी से है जिसका
संगीत चित्रगुप्त ने तैयार किया है। इस गीत को परदेसी गीतों में
वो स्थान नहीं मिला जिसका ये हक़दार है।

आशा भोंसले और रफ़ी के गाये इस युगल गीत को मैंने बहुत सुना।
इस फ़िल्म को देखने का सौभाग्य नहीं मिला। यू ट्यूब की मेहेरबानी से
विडियो के दर्शन हो गए। विश्वजीत ७० के दशक में ढलान पर थे
और मुमताज़ अपने शिखर की ओर बढती हुई अभिनेत्री। १९६५ में आई
फ़िल्म मेरे सनम में भी मुमताज़ और विश्वजीत ने साथ काम किया था।
मुमताज़ सहायक अभिनेत्री थीं और फ़िल्म में आशा पारेख नायिका थी।



गीत के बोल:

परदेसी पिया हो परदेसी पिया
परदेसी पिया हो परदेसी पिया
मोरा जिया कहीं ले के चले जइयो तो न

अब जाना कहाँ री, अब जाना कहाँ
अब जाना कहाँ री, अब जाना कहाँ

वादा ले ले नहीं रहना गोरी तेरे बिना

परदेसी पिया हो परदेसी पिया

तेरे पास आकर सैयां मेरा मन यूँ डोले
तेरे पास आकर सैयां मेरा मन यूँ डोले
कोई जैसे सपनों में चले नैना खोले

हो, इसी अदा पर तो मैंने दिल दे दिया
हाय दिल दे दिया


परदेसी पिया हो परदेसी पिया
परदेसी पिया हो परदेसी पिया

बसंती अंचल तेरा उड़े क्यूँ राहों में
बसंती अंचल तेरा उड़े क्यूँ राहों में
खिलाये जा फुलवारी मेरी इन बाहों में

हो, ये बैयाँ छुड़ा मत लेना ओ साजना
हाय ओ साजना

अब जाना कहाँ री, अब जाना कहाँ
अब जाना कहाँ री, अब जाना कहाँ

तू माथे की बिंदिया है तू ही कंगना मेरा
तू माथे की बिंदिया है तू ही कंगना मेरा

चुनरिया से बढ़ के है मुझे दमन तेरा

हो, ये दामन तो जीवन भर को उलझा लिया
हाय उलझा लिया

परदेसी पिया हो परदेसी पिया
मोरा जिया कहीं ले के चले जइयो तो न

अब जाना कहाँ री, अब जाना कहाँ
वादा ले ले नहीं रहना गोरी तेरे बिना

परदेसी पिया हो परदेसी पिया

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May 10, 2009

टुकड़े हैं मेरे दिल के-मेरे सनम १९६५

थोड़ा गंभीर किस्म का गाना है ये। धैर्य चाहिए ऐसे गाने
सुनने के लिए । इसमे विश्वजीत और आशा पारेख नायक
नायिका हैं। मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे बोलों को उतने ही
जतन से संगीत पहनाया है ओ पी नय्यर ने। गायक स्वर है
मोहम्मद रफी का।



गाने के बोल:

टुकड़े हैं मेरे दिल के, ऐ यार तेरे आँसू
देखे नहीं जाते हैं, दिलदार तेरे आँसू

टुकड़े हैं मेरे दिल के, ऐ यार तेरे आँसू
देखे नहीं जाते हैं, दिलदार तेरे आँसू

टुकड़े हैं मेरे दिल के, ऐ यार तेरे आँसू

कतरे नहीं छलके ये, आँखों के प्यालों से
मोती हैं मुहोब्बत के, इन फूल से गालों पे,
इन फूल से गालों पे
बहने नहीं दूंगा मैं बेकार तेरे आँसू
देखे नहीं जाते हैं, दिलदार तेरे आँसू

टुकड़े हैं मेरे दिल के, ऐ यार तेरे आँसू

अश्कों से भरा देखूँ, कैसे तेरी आँखों को
ऐ जाँ ये सुलगता ग़म, दे दे मेरी आँखों को,
दे दे मेरी आँखों को

पलकों पे उठा लूंगा, सौ बार तेरे आँसू
देखे नहीं जाते हैं, दिलदार तेरे आँसू

टुकड़े हैं मेरे दिल के, ऐ यार तेरे आँसू

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