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Oct 26, 2019

जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ-मिलाप १९५५

साहिर लुधियानवी कब दिमाग पे दे दे बत्ती पता ही
नहीं चलता. फिल्म मिलाप के एक गीत में पंक्ति है
-ये हसीं भूल कर के देख लो. वो गीत एक क्लब
सोंग है जिसमें नायिका गीता बाली डांस कर रही हैं
अपने कातिलाना एक्सप्रेशंस के साथ. गीता दत्त  की
आवाज़ उसे और कातिलाना बना रही है. गीत आप
सुन चुके है पहले.

सुनते हैं फिल्म से एक और गीत. इसे भी गीता दत्त
ने गाया है. गीत के पहले अंतरे की पंक्ति से एक गीत
का मुखडा बना है जिसे आशा भोंसले ने गाया है रफ़ी
के साथ.

राज खोसला की ये बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी और
इसे गीत के फिल्मांकन को देख के लगता है वे कारदार
की फिल्मों के गीतों के फिल्मांकन के फैन हैं.


https://www.youtube.com/watch?v=dJH_9s2gVqE


गीत के बोल:

जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ

आये हैं दूर से मिले हुजुर से
हमको सज़ा ना दो जी दिल के कसूर की
आये हैं दूर से मिले हुजुर से
हमको सज़ा ना दो जी दिल के कसूर की
आधी है रात अभी बाकी है बात अभी
छोडो ना साथ अभी बाबूजी जाते हो कहाँ

जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ

दिल तुम पे वार के दुनिया को हार के
बैठे हैं देर से जी रस्ते में प्यार के
दिल तुम पे वार के दुनिया को हार के
बैठे हैं देर से जी रस्ते में प्यार के
थोड़ी सी चाह दे दो सीने में राह दे दो
दिल को पनाह दे दो बाबूजी जाते हो कहाँ

जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ
बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
...........................................................
Jaate ho to jao par-Milap 1955

Artists: Geeta Bali, Dev Anand

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Sep 7, 2016

हम से भी कर लो कभी-मिलाप १९५५

कहते हैं जुबां मीठी हो तो हर चीज़ पे काबू कर लेती है. ये बात
सही भी है. मीठा-मीठा बोलो और सबको लुभाओ. बोलने की कला
में मीठी जुबान का बड़ा महत्त्व है. कड़वी बोली केवल संतों के ही
मुखारविंद से अच्छी लगती है.

प्रस्तुत गीत में मीठी बातों के लिए निवेदन किया जा रहा है. एक
गीत में हमने कुछ पोस्ट पहले यमक अलंकार के प्रयोग की चर्चा
की थी. इस गीत में भी आपको थोडा इसका प्रयोग मिलेगा. रचना
साहिर लुधियानवी की है और संगीत एन दत्ता का. गीता दत्त ने इस
गीत को गाया है. गीत गीता बाली और देव आनंद पर फिल्माया
गया है. नायक किसी वाइरल बुखार से अभी अभी ठीक हुआ है
ऐसा जान पड़ता है, उसमें नायिका गीत के ज़रिये प्राणवायु का
संचार कर रही है. गीत में आप एक नामचीन हास्य कलाकार के
दर्शन भी कर पायेंगे.





गीत के बोल:

हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें


मैं बहार का शोख फूल हूँ
अक़ल मर मिटे ऐसी भूल हूँ
मैं बहार का शोख फूल हूँ
अक़ल मर मिटे ऐसी भूल हूँ
घुली घुली हैं घुली घुली हैं रातें
कभी कभी तो मीठी मीठी दो बातें

हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें

चुप हो किस लिये बात तो करो
हँस न पाओ तो आह ही भरो
चुप हो किस लिये बात तो करो
हँस न पाओ तो आह ही भरो
घुली घुली हैं घुली घुली हैं रातें
कभी कभी तो मीठी मीठी दो बातें

हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें

दिल को प्यार से भर के देख लो
ये हसीन भूल कर के देख लो
दिल को प्यार से भर के देख लो
ये हसीन भूल कर के देख लो
घुली घुली हैं घुली घुली हैं रातें
कभी कभी तो मीठी मीठी दो बातें

हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
हम से भी कर लो कभी कभी तो
मीठी मीठी दो बातें
...........................................................................
Hamse bhi kar lo-Milap 1955

Artists: Geeta Bali, Dev Anand

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Aug 1, 2016

ये बहारों का समां २-मिलाप १९५५

फिल्म आर्ट्स बैनर तले बनी फिल्म मिलाप का निर्देशन
राज खोसला ने किया था. देव आनंद और गीता बाली इस
फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं. राज खोसला की पदार्पण
फिल्म है बतौर निर्देशक. फिल्म मनोरंजन से भरपूर होने
के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर पिट गयी. फिल्म का संगीत
भी उत्तम गुणवत्ता वाला है लेकिन नियति का खेल किसने
जाना है?

प्रस्तुत गीत का हेमंत कुमार वाला संस्करण आप सुन चुके
हैं पहले. आज का संस्करण लता मंगेशकर का गाया हुआ है.
बोल इसके भी साहिर लुधियानवी ने लिखे हैं और संगीत
है एन दत्ता का.



गीत के बोल:

ये बहारों का समां
चाँद तारों का समां
खो ना जाए आ भी जा
ये बहारों का समां
चाँद तारों का समां
खो ना जाए आ भी जा

ये बहारों का समा


जिन्दगानी दर्द बन जाए
कहीं ऐसा ना हो
जिन्दगानी दर्द बन जाए
कहीं ऐसा ना हो
सांस आहें सर्द बन जाये
कहीं ऐसा ना हो
दिल तड़प कर नागहाँ,
सो ना जाए आ भी जा

ये बहारों का समा
चाँद तारों का समा
खो ना जाये, आ भी जा

ये बहारों का समा

क्या हुआ क्यों इस तरह तूने,
निगाहें फेर ली
क्या हुआ क्यों इस तरह तूने,
निगाहें फेर ली
मेरी राहों की तरफ से,
अपनी राहें फेर ली
ज़िन्दगी का कारवां,
खो ना जाए आ भी जा

ये बहारों का समा
चाँद तारों का समा
खो ना जाये, आ भी जा

ये बहारों का समा
.....................................................................
Ye baharon ka sama(Lata)-Milap 1955

Artist:Geeta Bali

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Mar 9, 2010

कई सदियों से-मिलाप १९७२

कुछ सदाबहार गीत गुमनाम से और अनजाने से संगीतकारों द्वारा
भी बनाये गए। हम गुनगुनाते रहते हैं गीतों को, और ध्यान नहीं देते
कि उसके निर्माण में कौन कौन जुड़ा है। आम श्रोता बमुश्किल गायक
का नाम ही याद रख पाता है। १९७२ कि एक फिल्म है मिलाप, जिसमे
शत्रुघ्न सिन्हा हीरो हैं और उनके साथ रीना रॉय नायिका हैं। ये गीत
दर्द भरा गीत नहीं है, इसमें तड़प भरी पुकार है , प्रेमी अपनी प्रेमिका को
दिल के भीतरी कोने से याद कर रहा है और आने का निवेदन कर रहा है।

मुकेश के सर्वश्रेष्ठ गीतों में से एक, जिसकी पुष्टि आकाशवाणी की फरमाईशों
से भी होती है। गीत लिखा है नक्श लायलपुरी ने और संगीतकार हैं ब्रज भूषण ।
नक्श लायलपुरी का नाम तो फिर भी सुना सा है मगर बृज भूषण प्रतिभा
होने के बावजूद गुमनामी के अँधेरे में कहीं गुम हो गए। ये बात और है जितने
भी गीत उन्होंने बनाये उन सब के मध्य से उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी
फिल्म संगीत के इतिहास में।

विडियो संस्करण में आपको संगीत के कुछ अतिरिक्त टुकड़े मिलेंगे जिससे आपका
सुनने का आनंद दुगना हो जायेगा । ये एक ऐसा गीत है जिसे ओर्केस्ट्रा कलाकार भी
ढंग से नहीं गा पाते हैं। ऊंची पट्टी पर पहुँचती मुकेश की आवाज़ की नक़ल मुश्किल
कार्य है।

गीत के बोल:

हो ओ ओ, ओ ओ ओ
हो ओ ओ, ओ ओ ओ
हो ओ ओ, ओ ओ ओ

कई सदियों से, कई जन्मों से
तेरे प्यार को तरसे मेरा मन
आ जा
आ जा के अधूरा है अपना मिलन
कई सदियों से, कई जन्मों से
कई सदियों से, कई जन्मों से
तेरे प्यार को तरसे मेरा मन
आ जा
आ जा के अधूरा है अपना मिलन

कई सदियों से

राहों में कहीं, नज़र आया
अपने ही ख्यालों का साया
राहों में कहीं, नज़र आया
अपने ही ख्यालों का साया
कुछ देर मेरा मन, लहराया
हो ओ ओ, ओ ओ ओ, फिर डूब गाई आशा की किरण
आ जा
आ जा के अधूरा है अपना मिलन

कई सदियों से, कई जन्मों से
कई सदियों से, कई जन्मों से
तेरे प्यार को तरसे मेरा मन
आ जा
आ जा के अधूरा है अपना मिलन
कई सदियों से

सपनों से मुझे, ना यूँ बहला
पायल के खोये गीत जगा
सपनों से मुझे, ना यूँ बहला
पायल के खोये गीत जगा
सुनसान है जीवन की बगिया
हो ओ ओ, ओ ओ ओ, सूना है बहारों का आँगन
आ जा
आ जा के अधूरा है अपना मिलन

कई सदियों से, कई जन्मों से
कई सदियों से, कई जन्मों से
तेरे प्यार को तरसे मेरा मन
आ जा
आ जा के अधूरा है अपना मिलन

कई सदियों से

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Jun 6, 2009

ये बहारों का समा-मिलाप १९५५

नारायण दत्ता के संगीत खजाने से एक मधुर धुन। ये गीत
हेमंत कुमार का गाया हुआ है। गीत लता की आवाज़ में भी
उपलब्ध है। इस गीत में एक शब्द है जिसका अर्थ शायद आप
जानना चाहें-नागहाँ , इसका अर्थ है-अचानक। फिल्म मिलाप
सन १९५५ की हिंदी फिल्म है। साहिर लुधियानवी ने गीत लिखा
है और इसमें ज्यादा कठिन शब्द उन्होंने नहीं डाले हैं। देव आनंद
इस गीत को परे पर गाते हैं। विडियो उपलब्ध नहीं है अतः ऑडियो
से ही आनंद उठायें।



गीत के बोल:

ये बहारों का समा
चाँद तारों का समा
खो ना जाये , आ भी जा

ये बहारों का समा

जिन्दगानी दर्द बन जाए
कहीं ऐसा ना हो
जिन्दगानी दर्द बन जाए
कहीं ऐसा ना हो
सांस आहें सर्द बन जाये
कहीं ऐसा ना हो
दिल तड़प कर नागहाँ,
सो ना जाए आ भी जा

ये बहारों का समा
चाँद तारों का समा
खो ना जाये, आ भी जा

ये बहारों का समा

क्या हुआ क्यों इस तरह तूने,
निगाहें फेर ली
क्या हुआ क्यों इस तरह तूने,
निगाहें फेर ली
मेरी राहों की तरफ से,
अपनी राहें फेर ली
ज़िन्दगी का कारवां,
खो ना जाए आ भी जा

ये बहारों का समा
चाँद तारों का समा
खो ना जाये, आ भी जा

ये बहारों का समा
......................................................................
Ye baharon ka sama(Hemant Kumar)-Milap 1955

Artist: Dev Anand

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