Showing posts with label Raga Bhairavi. Show all posts
Showing posts with label Raga Bhairavi. Show all posts

Jun 13, 2016

दो हंसों का जोड़ा बिछड गयो-गंगा जमुना १९६१

फिल्म: गंगा जमुना
वर्ष: १९६१
गीतकार: शकील बदायूंनी
संगीत: नौशाद
गायिका: लता मंगेशकर




गीत के बोल:

दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे
गजब भयो रामा  जुलम भयो रे

मोरा सुख चैन भी  जीवन भी मोरा छिन लिया
पापी संसार ने साजन भी मोरा छिन लिया
पिया बिन तड़पे जिया  रतिया बिताऊं कैसे
बिरहा की अगनी को अंसुवन से बुझाऊँ कैसे
जिया मोरा मुश्किल में पड़ गयो रे
गजब भयो रामा  जुलम भयो रे

रात की आस गयी  दिन का सहारा भी गया
मोरा सूरज भी गया  मोरा सितारा भी गया
प्रीत कर के कभी प्रीतम से ना बिछड़े कोई
जैसी उज़डी हूँ मैं  ऐसे भी ना उजड़े कोई
बना खेल मोरा बिगड़ गयो रे
गजब भयो रामा  जुलम भयो रे

जीते जी छोडूँगी सैयां ना डगरिया तोरी
बीत जाएगी यूँ ही सारी उमरिया मोरी
नैनों से होती रहेगी यूँ ही बरसात बलम
याद में रोती रहूंगी तेरी दिन-रात बलम
नगर मोरे मन का उजड़ गयो रे
गजब भयो रामा  जुलम भयो रे
…………………………………………………………..
Do hanson ka joda-Ganga Jamuna 1961

Read more...

Nov 29, 2009

किसी ने अपना बना के मुझको -पतिता १९५३

पतिता एक महान हिन्दी फ़िल्म है । १९५३ में ऐसी फ़िल्म
बनाना काफ़ी हिम्मत का काम था। ज्यादती की शिकार एक
युवती की कथा है ये। दुर्घटना की शिकार युवती का प्रेमी उसके
प्रति सहानुभूति और समझदारी का भाव रख कर उसको संबल
प्रदान करता है।

शंकर जयकिशन का प्रिय राग था-भैरवी. जोड़ी के दोनों सदस्यों
को इस राग से विशेष लगाव था. इस राग पर आधारित उन्होंने
कई नायब धुनें रचीं.

जब भैरवी की बात छिड़ी है तो आइये एक और गीत सुना जाए ।
फ़िल्म पतिता का ये गीत थोड़ा कम सुना हुआ है मगर गुणवत्ता
इसकी वही है जो एल्बम के बाकी गीतों में है। फ़िल्म के सभी
गीत गीतकार शैलेन्द्र के लिखे हुए हैं। उषा किरण नामक अभिनेत्री
इस गीत पर आको झूमती नज़र आएँगी। अभिनेत्री की भावनाओं
का निचोड़ इन पंक्तियों में स्पष्ट है- "जो ख्वाब रातों में भी न
आया, वो मुझको दिन में दिखा दिया"





गीत के बोल :

किसी ने अपना बना के मुझको,
मुस्कुराना सिखा दिया
अंधेरे घर में किसी ने हंस के,
चिराग जैसे जला दिया

किसी ने अपना बना के मुझको,
मुस्कुराना सिखा दिया

शर्म के मारे मैं कुछ न बोली
शर्म के मारे मैं कुछ न बोली
नज़र ने परदा गिरा दिया

मगर वो सब कुछ समझ गए हैं
के दिल भी मैंने गँवा दिया

किसी ने अपना बना के मुझको,
मुस्कुराना सिखा दिया

न प्यार देखा न प्यार जाना
न प्यार देखा न प्यार जाना

सुनी थी लेकिन कहानियाँ
सुनी थी लेकिन कहानियाँ

जो ख्वाब रातों में भी न आया
वो मुझको दिन में दिखा दिया

किसी ने अपना बना के मुझको,
मुस्कुराना सिखा दिया

वो रंग भरते हैं ज़िन्दगी में
वो रंग भरते हैं ज़िन्दगी में
बादल रहा है मेरा जहाँ

कोई सितारे लुटा रहा था
किसी ने दामन बिछा दिया

किसी ने अपना बना के मुझको,
मुस्कुटाना सिखा दिया
अंधेरे घर में किसी ने हंस के,
चिराग जैसे जला दिया
..............................................................................
Kisi ne apna bana ke-Patita 1953

Artists: Usha Kiran

Read more...

सुनो छोटी सी गुडिया की-सीमा १९५५

शंकर जयकिशन को राग भैरवी से विशेष लगाव था। उनके
खजाने में बहुत से नगमे आपको इस राग पर आधारित मिल जायेंगे।
पहले एक गीत का जिक्र हम कर चुके हैं -फ़िल्म बादल का -दो दिन के
लिए मेहमान यहाँ । ये जो गीत आज पेश है वो भी लता मंगेशकर का गाया
हुआ है। ये राग सिन्धु भैरवी पर आधारित गीत है और इसमे आपको
उस्ताद अली अकबर खान के सरोद का जादू भी सुनाई देगा।
गीत हसरत जयपुरी का लिखा हुआ है और उनकी गीत लेखन में
चपलता का एक अच्छा उदाहरण है। इस गीत का मीटर आसान नहीं है ।
इसको बनाने में काफ़ी कठिनाई हुई होगी ऐसा अनुमान है। हिन्दी फ़िल्म
संगीत अपनी शुद्धता की चरम अवस्था पे था ५० के दशक में। माधुर्य और
मोतियों की लड़ी से पिरोये शब्दों पर कड़ी मेहनत की जाती थी । उसके बाद
कहीं जाके हमें ऐसा न भुलाया जा सकने वाला गीत प्राप्त होता था ।



गीत के बोल:

सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी
सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी

जैसे तारों की बात सुने रात सुहानी

सुनो छोटी सी गुड़िया की कहानी

ओ जिसकी किस्मत में गम के बिछौने थे
आंसू ही खिलौने थे
दर्द ही तकियां थीं
दुःख भरी अँखियाँ थीं

घर भी न थ कोई और दर भी न था कोई
ओ ओ ओ , और दर भी न था कोई

भरे आंचल में गम छुपाये आँखों में पानी
सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी
सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी

दिल में ये अरमान थे एक छोटा सा बंगला हो
चांदी सी धरती पर सोने का जंगला हो
दिल में ये अरमान थे एक छोटा सा बंगला हो
चांदी सी धरती पर सोने का जंगला हो

खेल हों जीवन के यहाँ मेल हों जीवन के
ओ ओ ओ और मेल हों जीवन के

गया बचपन तो आंसू भरी आई जवानी
सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी
सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी

चाँद का डोला हो और बिजली का बाजा हो
डोले में रानी हो और घोड़े पे राजा हो

प्यार के रस्ते हों और फूल बरसते हों
हो हो हो और फूल बरसते हों

बनना चाहती थी एक दिन वो तारों की रानी

सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी
सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी

उसके बाद क्या हुआ दीदी
उसके बाद

हो टूटे पल भर में सपनों के मोती भी
लुट गई ज्योति भी
रह गए अंधेरे
उजड़े हुए सवेरे
बात ये पूरी थी और फिर भी अधूरी थी
बात ये पूरी थी और फिर भी अधूरी थी
ओ ओ ओ ये फिर भी अधूरी थी
होगा अंजाम क्या ये ख़बर ख़ुद भी न जानी
सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी

जैसे तारों की बात सुने रात सुहानी

सुनो छोटी सी गुड़िया की कहानी
..........................................................................
Suno chhoti si gudiya ki-Seema 1955

Artist: Nutan

Read more...

Oct 22, 2009

बाबुल मोरा-स्ट्रीट सिंगर १९३७

सहगल के गाये गीत अमर गीतों की श्रेणी में आते हैं।
आज की पीड़ी के गायक भी उनकी गायकी से प्रभावित हैं।
उनके गीतों में से सबसे ज्यादा प्रभाव अगर किसी गीत ने
छोड़ा है तो वो है -बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए । गीत लिखा
था वाजिद अली शाह ने। वाजिद अली शाह अवध के नवाब थे
जिनका राज़ १८४७ से १८५६ तक चला। कला और संस्कृति प्रेमी थे।
उनके राज़ में कला और संस्कृति अपने पूरे शबाब पर थी।
ये एक ठुमरी है जो कई कलाकारों ने अपने अपने अंदाज़ में गाई है।

सहगल के गाये गीत की धुन बनाई है आर सी बोराल ने । इस गीत में
सहगल ख़ुद हारमोनियम लेकर घूमते हुए गा रहे हैं। घूमते घूमते गाना
और रिकॉर्डिंग करना एक दुष्कर कार्य है । इस पर आवाज़ एक सरीखी
बनाये रखना एक चैलेन्ज जैसा है। ठुमरी भैरवी बड़े गुलाम अली साहब
और सहगल की आवाज़ में सुनना एक सुखदायी अनुभव है।



गाने के बोल:

बाबुल मोरा, नैहर छूटो ही जाए
बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए
मोरा, नैहर छूटो ही जाए

चार कहार मिले
मोरी डोलिया सजावें
मोरा अपना बेगाना छूटो जाए
मोरा नैहर आ आ आ ...
छूटो ही जाए

अंगना तो परबत भया
और देहरी भई बिदेश
ले घर बाबुल आपनो
मैं चली पिया के देश

बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए
मोरा, नैहर छूटो ही जाए

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP