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Nov 15, 2025

तेरी कठपुतली हूँ-चला मुरारी हीरो बनने १९७७

जिसे आना है उसे जाना है. नश्वर संसार का यही नियम है. पिछले दिनों
बॉलीवुड के एक शानदार कलाकार असरानी अगली दुनिया को कूच कर
गए. अपने हास्य द्वारा लोगों कामनोरंजन करते करते उन्होंने कुछ गंभीर
किस्म की फ़िल्में बनाने कीकोशिश भी करी मगर जनता को उनका ये 
अंदाज़ शायद पसंद नहीं आया.

उनकी बनायीं १९७७ के फिल्म चला मुरारी हीरो बनने का एक गीत
सुनते हैं. इस फिल्म में हेमा मालिनी की भी भूमिका है. ये गीत उनीं पर
फिल्माया गया है जिसमें असरानी भी नाचते दिखलाई डे रहे हैं.

 

 गीत के बोल:
 
तेरी कह्पुटली हूँ नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ न बोलूंगी तेरे संग डोलूँगी
हाय रे मैं हूँ तुम्हारी तू साजन है मेरा
तेरी कह्पुटली हूँ नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ न बोलूंगी तेरे संग डोलूँगी
हाय रे मैं हूँ तुम्हारी तू साजन है मेरा
 
अब काहे का डरना जग से अब काहे की चोरी
बांध ली तेरे संग बलमवा जब ये प्रीत की डोरी
अब काहे का डरना जग से अब काहे की चोरी
बांध ली तेरे संग बलमवा जब ये प्रीत की डोरी
 
के बांके बावरिया बजा के पयलिया
रोज़ करती हूँ तुम्हारी गलियो का फेरा
 
तेरी कठपुतली हूँ नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ न बोलूंगी तेरे संग डोलूँगी
हाय रे मैं हूँ तुम्हारी तू साजन है मेरा

राम कसम मैं सच कहती हूँ सुन ले ओ हमजोली
दो दिन में तू मेरे घर पे लाया न जो डोली
राम कसम मैं सच कहती हूँ सुन ले ओ हमजोली
दो दिन में तू मेरे घर पे लाया न जो डोली

तो मायके से चल के मैं खुद मेहँदी मल के
द्वार पे तेरे ओ जुल्मी लगा दूंगी डेरा
 
तेरी कठपुतली हूँ नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ न बोलूंगी तेरे संग डोलूँगी
हाय रे मैं हूँ तुम्हारी तू साजन है मेरा
.................................................................................
Teri kahputli hoon-Chala MUrari Hero Banne 1977

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May 3, 2018

हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से-आलाप १९७७

सन १९७७ की आलाप फिल्म से एक गीत सुनते हैं जिसे
असरानी ने गाया है. अमिताब बच्चन को असरानी ट्रेनिंग
दे रहे हैं और इस गीत में डर के प्रकार भी बतलाते हैं.
इस गंभीर किस्म की फिल्म में जो हास्य वाले दुर्लभ दृश्य
हैं उनमें से ये एक है.

गीत राही मासूम रज़ा ने लिखा है और इसका संगीत तैयार
किया है जयदेव ने.



गीत के बोल:

हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे

फूँक फूँक के पांव धरूं मैं फिर भी पायल बाजे
ओ रामा फिर भी पायल बाजे
अरे फूँक फूँक के पांव धरूं मैं फिर भी पायल बाजे
ओ रामा फिर भी पायल बाजे
सैयां जी के घर का कोई खड़ा मेरे दरवाजे
खड़ा मेरे दरवाजे

चले जवानी पीछे पीछे चले जवानी
अरे चले जवानी पीछे पीछे बचपन आगे आगे
रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे

अंग अंग में चन्दन महके ये कैसी ऋतु आई
ओ रामा ये कैसी ऋतु आई
अरे अंग अंग में चन्दन महके ये कैसी ऋतु आई
ओ रामा ये कैसी ऋतु आई
चाहे जैसी हवा चले पर मोहे लगे पुरवाई
ओ श्यामा मोहे लगे पुरवाई
नैना दिन भर सपना देखें
नैना अरे नैना अरे नैना
अजी नैना दिन भर सपना देखें काजल रात को डाले
रामा डर लागे

ओ लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे
अरे रामा डर लागे

डर किरने प्रकार के होते हैं उनको ख्वाबों में देखिये
लज्जा ईर्ष्या क्रोध वीभत्स हा हा हा
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे
अरे रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
……………………………………………….
Ho rama dar laage apni umariya se-Alaap 1977

Artists: Asrani, Amitabh Bachchan, Rekha

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Aug 5, 2015

न जाने दिन कैसे-चला मुरारी हीरो बनने १९७७

विडंबनाओं से भरा पड़ा है हिंदी फिल्म जगत. इसके अपने नियम
है जिससे यहाँ के बाशिंदे भली भाँति वाकिफ हैं. ये कभी क्रूर नज़र
आता है तो कभी भाईचारे की एक अच्छी मिसाल. उतार चढ़ाव के
ऊसल-मिसल से भरपूर है यहाँ का जीवन. हिंदी सिनेमा के कलाकार
असरानी को ४८ साल हो गए हैं इस बॉलीवुड की फिल्मों में काम 
करते हुए. काफी लंबा अंतराल है. इस दौरान उन्होंने अपने जीवन
के सभी रंग अवश्य देख लिए होंगे. बतौर हास्य कलाकार तो जनता
ने उन्हें बहुत चाहा. दरअसल एक छबि जो दर्शक के मन में बन
जाती है किसी कलाकार की, वो उसे तोडना नहीं चाहता. यह ट्रेंड
अभी भी जिंदा है, कुछ बदलाव अवश्य आये हैं जैसे हमने उदाहरण
दिया था फिल्म बाजीगर और उसके नायक का. सन १९६७ की एक
फिल्म ‘हरे कांच की चूडियाँ’ से अपने कैरियर की शुरुआत करने
वाले असरानी लगभग पौने ४०० फिल्मों में काम कर चुके हैं. 

असरानी ने एक संजीदा फिल्म बनाई और कोशिश की एक संजीदा
रोल करने की, मगर उस प्रयास में वे बॉक्स ऑफिस पर असफल
रहे. हम फिल्म ‘चला मुरारी हीरो बनने’ की बात कर रहे हैं आपसे.
फिल्म की कहानी औसत है मगर इसमें अच्छे गीत हैं और इसमें
हेमा मालिनी की उपस्थिति के बावजूद फिल्म कोई कमाल दिखलाने
में असफल रही. कथानक चयन में शायद कमी रही और संपादन
भी फिल्म का सामान्य है. या तो उनको उस समय इन विधाओं के
पारंगतों की सेवाएं नहीं मिल पाईं या उनके चयन में कोई कमी रही.
फिल्म के गीत आपको राहुल देव बर्मन के भक्तों के संग्रह में अवश्य
मिल जायेंगे.

आज आपको फिल्म से किशोर कुमार का गाया एक गीत सुनवा रहे
हैं जिसे असरानी पर फिल्माया गया है. असरानी का पूरा नाम है
गोवर्धन असरानी. वे अपने सरनेम या उपनाम से ही जाने जाते हैं.
असरानी ने एक और फिल्म बनाई -हम नहीं सुधरेंगे जो सन १९८०
में रिलीज़ हुई थी. उसके अलावा उन्होंने कुछ हिंदी गुराती फिल्मों का
निर्देशन भी किया है.





गीत के बोल:


ना जाने दिन कैसे जीवन में आये हैं
ना जाने दिन कैसे जीवन में आये हैं
के मुझसे बिछड़े खुद मेरे साये हैं
ना जाने दिन कैसे जीवन में आये हैं

क्या क्या सोचा था क्या थीं उम्मीदें
जिसके लिए भी मैंने खो दीं आँखों की ये नींदें
उसी से दुःख का तोहफे ये पाए हैं
ना जाने दिन कैसे जीवन में आये हैं

समझा सुख जिसको छाया थी गम की
जैसे कहीं रेत पे चमके कुछ शबनम सी
ये धोखे नज़र के हमने भी खाए हैं
ना जाने दिन कैसे जीवन में आये हैं
...................................................................
Na jaane din kaise-Chala murari hero banne 1977

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May 3, 2015

मैं लड़की पों पों पों-हेरा फेरी २०००

गीत की शुरुआत होती है असरानी द्वारा तब्बू को कुछ
समझाए जाने से. यकायक दृश्य बदल जाता है और पों
पों पों होना शुरू हो जाती है. गीत शुरू हो चुका है और
सुनील शेट्टी साथ में नाचना और गाना शुरू कर देते हैं.
गीत है फिल्म हेरा फेरी से जो सन २००० की फिल्म है.

गीत किसी ट्रक ड्राइवर से प्रेरित दिखता है. होर्न की ध्वनि
से बहुत प्रेम करने वाला ट्रक ड्राइवर जिसने कभी ऐसा कोई
गीत गाया हो जिसमें पों पों पों के अलावा कुछ न हो.

गीत मनोरंजक है और इसमें ज्यादा दिमाग लगाने की कोई
आवश्यकता नहीं है. कविता कृष्णमूर्ति के साथ अभिजीत के
स्वर हैं गीत में. नायाब बोल हैं समीर के और अनूठा संगीत
है अन्नू मलिक का. ये सन २००० का गीत है और अगर
आज गाने बनाने वाले इस मुगालते में हैं कि पों पों पीं पीं
की ध्वनि इस्तेमाल में वे ही पायोनियर हैं तो भ्रम दूर कर लें
इसे सुन कर.




गीत के बोल:


मैं लड़की पों पों पों तू लड़का पों पों पों
हम दोनों मिले पों पों पों अब आगे होगा क्या 
मैं लड़की पों पों पों तू लड़का पों पों पों
हम दोनों मिले पों पों पों अब आगे होगा क्या 
कुछ नहीं होगा कुछ नहीं होगा 
हम दोनों में बस ये होगा 
पों पों पा पों पों पा पों पों पा
पों पों पा पों पों पा पों पों पा पों पों 

मैं लड़का पों पों पों तू लड़की पों पों पों
हम दोनों मिले पों पों पों अब आगे होगा क्या 
मैं लड़का पों पों पों तू लड़की पों पों पों
हम दोनों मिले पों पों पों अब आगे होगा क्या 
कुछ नहीं होगा कुछ नहीं होगा 
हम दोनों में बस ये होगा 
पों पों पा पों पों पा पों पों पा
पों पों पा पों पों पा पों पों पा पों पों 

पागलपन छोड़ दे ये कसमें तोड़ दे 
अब रिश्ता जोड़ दे यूँ न बातें बना 
कुछ ऐसा सोच ना जानेमन टोक ना 
राहों में रोक ना ऐसे मुझे ना फंसा 
मैं दीवानी तेरी दिलजानी नज़र से नज़र मिला 
जा अनजानी ना कर नादानी ना ऐसे करीब आ 
मैं दीवानी तेरी दिलजानी नज़र से नज़र मिला 
जा अनजानी ना कर नादानी ना ऐसे करीब आ 
दिल दे दे पों पों पों दिल ले ले पों पों पों 
क्यूँ भागे पों पों पों कोई कारण बतला
दिल नहीं लेना पों पों पों दिल नहीं देना पों पों पों 
बा यूँ ही करते रहना पों पों पों 

मस्तानी शाम है मस्ती का जाम है 
कुछ तुझसे काम है आ ना ज़रा पास आ 
यूँ झूठी बात में आऊँ न घात में
मैं तेरे हाथ में समझूं इरादा तेरा
कुछ कर जाऊं मैं मर जाऊं समंदर में कूद के
ओ जानेमन ना देर लगाना मज़ा तो ले डूब के
कुछ कर जाऊं मैं मर जाऊं समंदर में कूद के
ओ जानेमन ना देर लगाना मज़ा तो ले डूब के
मैं आऊँ पों पों पों मैं जाऊं पों पों पों 
मान भी जा पों पों पों अब ऐसे न तड़पा 
अच्छा बाबा मान गया मैं रूठ के 
अब तो ऐसे न जा पों पों पों पों पों पों
 
मैं लड़का पों पों पों तू लड़की पों पों पों
हम दोनों मिले पों पों पों अब आगे होगा क्या 
मैं लड़की पों पों पों तू लड़का पों पों पों
हम दोनों मिले पों पों पों अब आगे होगा क्या 
कुछ नहीं होगा कुछ नहीं होगा 
हम दोनों में बस ये होगा 
पों पों पा पों पों पा पों पों पा
पों पों पा पों पों पा पों पों पा पों पों 
.....................................................
Main Ladki Po Po Po-Hera Pheri 2000

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Feb 23, 2010

रात को आईयेगा-साहेब बहादुर १९७७

फिल्म साहेब बहादुर के बारे में एक अच्छी बात ये है की ये फिल्म
निकोलोई गोगोल के एक नाटक पर आधारित है। दूसरी बात इसको हम
सन १९५० की फिल्म अफसर का रिमेक कह सकते हैं । अफसर का
नाम दर्शकों ने ज़रूर सुना होगा। फिल्म 'साहेब बहादुर' का नाम दर्शकों
को दूरदर्शन के सौजन्य से मालूम हुआ। दूरदर्शन इस फिल्म को ३ बार
दिखला चुका है । क्लासिक की परिभाषा शायद समय समय पर बदलती रहती
है। अधिकतर वे फ़िल्में जिनको दर्शक खुद देखने नहीं जाते , चैनल वालों
द्वारा जबरदस्ती दिखलाई जाती हैं वो भी क्लासिक कहलाती हैं। इस फिल्म में
क्लासिक जैसा कुछ नहीं है सिवा लक्ष्मी शंकर के ट्रुप का नृत्य और २-३
गीतों के। फिल्म सिनेमा हाल में कब लगी, लगी भी या नहीं कोई जानकारी
नहीं है मुझे।

गीत सुनिए और बाकी का विवरण खुद समझने का प्रयत्न करिए।



गीत के बोल:


रात को आईयेगा दिल बहलाईएगा
जो कुछ भी पेश करें शौक फरमाइयेगा
रात को आईयेगा दिल बहलाईएगा
जो कुछ भी पेश करें शौक फरमाइयेगा
हे रात को आयिगा दिल बहलाईएगा
जो कुछ भी पेश करें शौक फरमाइयेगा

रात को आईयेगा

लेके बहार आये हैं प्यार ही प्यार लाये हैं
आपकी दुनिया में यारों दिल का करार लायें हैं
समझो ना बेगाना अपना समझ के आना
आँखों ही आँखों में कर लेंगें याराना
हम भी हैं मतवाले तुम भी हो दिलवाले
करते हैं वादा के खुश होके जाईयेगा

रात को आयिगा दिल बहलाईएगा
जो कुछ भी पेश करें शौक फरमाइयेगा
रात को आईयेगा

एक हलचल मचा देंगे सूनी महफ़िल सजा देंगे
ऐसा तूफ़ान उठा देंगे सोये दिलों को जगा देंगे
रात की रात ऐसी रौनक लगेगी नाचेगा घुँघरू
नाचेगा घुँघरू तो पायल बजेगी
होश में आईयेगा तो मदहोश जियेगा, हाँ

रात को आईयेगा दिल बहलाईएगा
जो कुछ भी पेश करें शौक फरमाइयेगा
रात को आईयेगा

दो दिन के मेहमान हैं जब चले जायेंगे
जितना भी भूलना चाहोगे राह राह के याद आयेंगे
चाहे तो रख लेना अपना बनाके
आँखों में पलकों में दिल में छुपा के
आ जाना शाम ढले मस्ती का दौर चले
सुन के अपनी कुछ अपनी सुनियेगा हाँ

रात को आईयेगा दिल बहलाईएगा
जो कुछ भी पेश करें शौक फरमाइयेगा
रात को आईयेगा दिल बह्लायिगा
जो कुछ भी पेश करें शौक फरमाइयेगा

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Jun 29, 2009

टिर्र टुर्र वाले गाने-३ तेरी कठपुतली हूँ -चला मुरारी हीरो बनने

तेरी कठपुतली हूँ -चला मुरारी हीरो बनने

एक विदूषक कितना कोशिश कर ले संजीदा बनने की, अपने प्रयास में
कितना ही सफल हो जाये, जनता की नज़र में असफल ही रहता है।
ये बॉलीवुड के कुछ कटु सत्यों में से एक है। फिल्म एवम टेलिविज़न
इंस्टिट्यूट के प्रोफ़ेसर असरानी ने एक अच्छा प्रयास किया १९७७ में
'चला मुरारी हीरो बनने' फिल्म बना कर लेकिन दर्शकों ने उसको नकार
दिया। इस फिल्म में एक गाना है हेमा मालिनी के ऊपर फिल्माया गया
और लता का गया हुआ। मुझे पसंद है। इसमें भी टिर्र टुर्र की वाणी का
भरपूर प्रयोग हुआ है



गीत के बोल:

तेरी कठपुतली हूँ, नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ ना बोलूंगी, तेरे संग डोलूँगी
हाय रे, मैं हूँ तुम्हारी, तू सजन है मेरा

तेरी कठपुतली हूँ, नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ ना बोलूंगी, तेरे संग डोलूँगी
हाय रे, मैं हूँ तुम्हारी, तू सजन है मेरा

अब काहे का डरना जग से अब काहे की चोरी
बंद ली तेरे संग बलमवा जब ये प्रीत की डोरी
अब काहे का डरना जग से अब काहे की चोरी
बंद ली तेरे संग बलमवा जब ये प्रीत की डोरी
के बन के बावरिया, बजा के पायलिया
रोज़ करती हूँ तुम्हारी मैं गलियों का फेरा

तेरी कठपुतली हूँ, नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ ना बोलूंगी, तेरे संग डोलूँगी
हाय रे, मैं हूँ तुम्हारी, तू सजन है मेरा

राम कसम मैं सच कहती हूँ सुन ले ओ हमजोली
दो दिन में तू मेरे घर पे लाना या जो डोली
राम कसम मैं सच कहती हूँ सुन ले ओ हमजोली
दो दिन में तू मेरे घर पे लाना या जो डोली
तो मइके से चाल के मैं खुद मेहँदी मलके
द्वार पे तेरे ओ जुल्मी लगा दूँगी डेरा

तेरी कठपुतली हूँ, नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ ना बोलूंगी, तेरे संग डोलूँगी
हाय रे, मैं हूँ तुम्हारी, तू सजन है मेरा

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