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Feb 25, 2017

फूलों के रंग से-प्रेम पुजारी १९७०

इस गीत के बारे में इतनी कसीदाकारी की जा चुकी है बातों
की, ज्यादा कुछ कहना उस कसीदाकारी की तौहीन होगी. ये
जुर्रत हम नहीं कर सकते हैं. उस कसीदाकारी में जो कुछ
छूट गया है वो हम बतलाये देते हैं-गीत में जो ट्रेन आप
देखेंगे वो सुन्दर है. ये ट्रेन है स्विट्ज़रलैंड की.  ट्रेन का
सस्पेंशन सिस्टम बढ़िया क्वालिटी का है. शूटिंग के वक्त
कैमरा और देव आनंद ना के बराबर हिल रहे हैं गीत में.

गीत के बोल और धुन दोनों बढ़िया हैं मगर जिस शब्द ने
जनता को सबसे ज्यादा आकर्षित किया वो है-मदिर. कुछ
गीत हमने आपको सुनवाए हैं जिनमें नायक कार या जीप
में और नायिका ट्रेन में बैठी नज़र आती है. इसमें स्तिथि
उलट है. नायक ट्रेन में बैठा है.

गीत नीरज का है और संगीत एस डी बर्मन का.




गीत के बोल:

पल पल मुझे तू सताती
तेरे ही सपने  लेकर के सोया
तेरी ही यादों में जागा
तेरे खयालों में उलझा रहा यूँ
जैसे के माला में धागा
हाँ  बादल  बिजली  चंदन  पानी
जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार
हाँ  इतना मदिर  इतना मधुर
तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार

साँसों की सरगम  धड़कन की बीना
सपनों की गीताँजली तू
मन की गली में  महके जो हरदम
ऐसी जूही की कली तू
छोटा सफ़र हो  लम्बा सफ़र हो
सूनी डगर हो या मेला
याद तू आए  मन हो जाए
भीड़ के बीच अकेला
हाँ  बादल  बिजली  चंदन  पानी
जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार
हाँ  इतना मदिर  इतना मधुर
तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार

पूरब हो पच्छिम  उत्तर हो दक्खिन
तू हर जगह मुस्कुराए
जितना ही जाऊँ  मैं दूर तुझसे
उतनी ही तू पास आए
आँधी ने रोका  पानी ने टोका
दुनिया ने हँस कर पुकारा
तस्वीर तेरी  लेकिन लिये मैं
कर आया सबसे किनारा
हाँ  बादल  बिजली  चंदन  पानी
जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार
हाँ  इतना मदिर  इतना मधुर
तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार...................................................................
Phoolon ke rang se-Prem pujari 1970

Artists: Dev Anand, Zahida

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Jan 26, 2017

ताकत वतन की हमसे है-प्रेम पुजारी १९७०

देश भक्ति गीत सुनते हैं आज २६ जनवरी के अवसर पर. जो
ज़ज्बाई झोंका १५ अगस्त और २६ जनवरी को आता है अगर
वो साल भर कायम रहे तो सभी के मन में देशभक्ति और
देश प्रेम के भाव जाग्रत बने रहेंगे. हमारे जवान अगर हमारी
सीमाओं की सुरक्षा कर के हमें चैन की नींद सोने का अवसर
देते हैं तो हमारा भी ये दायित्व है हम अपने देश से प्रेम करें
और इसे स्वच्छ, स्वस्थ और खुशहाल बनाये रखने में अपना
योगदान दें.

फिल्म प्रेम पुजारी के लिए इस गीत को लिखा है नीरज ने और
इसकी धुन बनाई है एस डी बर्मन ने. मन्ना डे और रफ़ी के
संग कोरस ने इस गीत को गाया है.



गीत के बोल:

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

पहरेदार हिमालय के हम झोंके हैं तूफ़ान के
सुन कर गरज हमारी सीने फट जाते चट्टान के
पहरेदार हिमालय के हम झोंके हैं तूफ़ान के
सुन कर गरज हमारी सीने फट जाते चट्टान के

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

सीना है फौलाद का अपना फूलों जैसा दिल है
तन में विन्ध्याचल का बल है मन में ताजमहल है
सीना है फौलाद का अपना फूलों जैसा दिल है
तन में विन्ध्याचल का बल है मन में ताजमहल है

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

देकर अपना खून सींचते देश की हम फुलवारी
बंसी से बन्दूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी
देकर अपना खून सींचते देश की हम फुलवारी
बंसी से बन्दूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

आकर हमको कसम दे गई राखी किसी बहन की
देंगे अपना शीश न देंगे मिट्टी मगर वतन की
आकर हमको कसम दे गई राखी किसी बहन की
देंगे अपना शीश न देंगे मिट्टी मगर वतन की

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

खतरे में हो देश अरे तब लड़ना सिर्फ धरम है
मरना है क्या चीज़ आदमी लेता नया जनम है
खतरे में हो देश अरे तब लड़ना सिर्फ धरम है
मरना है क्या चीज़ आदमी लेता नया जनम है

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

एक जान है एक प्राण है सारा देश हमारा
नदियाँ चल कर थकी रुकी पर कभी न गंगा धारा
एक जान है एक प्राण है सारा देश हमारा
नदियाँ चल कर थकी रुकी पर कभी न गंगा धारा

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले
………………………………………………………..
Taqat watan ki hamse hai-Prem pujari 1970.

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Jan 15, 2017

रंगीला रे तेरे रँग में-प्रेम पुजारी १९७०

इस गीत पर हुए नृत्य की तारीफ में जनता जो जो लिख
चुकी है उस हिसाब से तो ये क्लासिकल डांस को भी मात
देने वाला कुछ है.

गीत अच्छा है सुनने में, ज़रूरी नहीं ये आपको देखने में
भी अच्छा लगे. नीरज के बोल हैं और एस डी बर्मन का
संगीत.



गीत के बोल:

रंगीला रे  तेरे रँग में
यूँ रँगा है मेरा मन
छलिया रे  ना बुझे है
किसी जल से ये जलन
ओ रंगीला रे  तेरे रँग में
यूँ रँगा है मेरा मन
छलिया रे  ना बुझे है
किसी जल से ये जलन

पलकों के झूले से सपनों की डोरी
प्यार ने बाँधी जो तूने वो तोड़ी
खेल ये कैसा रे  कैसा रे साथी
दीया तो झूमें है  रोये है बाती
कहीं भी जाये रे  रोये या गाये रे
चैन न पाये रे हिया
वाह रे प्यार  वाह रे वाह
रंगीला रे

दुःख मेरा दूल्हा है  बिरहा है डोली
आँसू की साड़ी है  आहों की चोली
आग मैं पियूँ रे  जैसे हो पानी
नारी दिवानी हूँ  पीड़ा की रानी
मनवा ये जले है  जग सारा छले है
साँस क्यों चले है पिया
वाह रे प्यार  वाह रे वाह
रंगीला रे

मैंने तो सींची रे  तेरी ये राहें
बाहों में तेरी क्यूँ औरों की बाहें
कैसे तू भूला वो  फूलों सी रातें
समझी जब आँखों ने आँखों की बातें
गाँव भर छूटा रे  सपना हर टूटा रे
फिर भी तू रूठा रे पिया
वाह रे प्यार  वाह रे वाह
रंगीला रे
……………………………………………………………..
Rangeela re-Prem pujari 1970

Artist: Waheeda Rehman

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May 3, 2010

यारों नीलम करो सुस्ती-प्रेम पुजारी १९७०

फिल्म प्रेम पुजारी का जो तीसरा गीत मुझे सबसे ज्यादा पसंद है
वो है "यारों नीलम करो सुस्ती" । प्रेम पुजारी के गीतों की कहानी भी
अजीब है जहाँ तक मेरी पसंद का सवाल है। मैंने सबसे पहले सुना
लता का गाया हुआ-रंगीला रे, उसके बाद सुना 'फूलों के रंग से' जो
किशोर ने गाया है। सबसे बाद में ये गीत सुना मगर समय के साथ
मेरे पसंद के मीटर पर ये ऊपर चढ़ गया। गीत जीप नाम के वाहन
में गाया जा रहा है जिसमे देव आनंद के साथ अनूप कुमार और ज़ाहिरा
हैं। एक मस्ती भरा लेकिन सन्देश देता ये गीत उम्मीद है आपको भी
पसंद आएगा । किशोर कुमार की आवाज़ की खनक का खूबसूरत
इस्तेमाल हुआ है इस गीत में। भूपेंद्र की खुमारी भरी आवाज़ के तो
क्या कहने, इस गाने का आवश्यक तत्त्व है वो तो.



गीत के बोल:

गम पे धूल डालो कहकहा लगा लो
अरे काँटों की डगरिया जिन्दगानी है
तुम जो मुस्कुरा दो राजधानी है
गम पे धूल डालो कहकहा लगा लो
काँटों की डगरिया जिन्दगानी है
तुम जो मुस्कुरा दो राजधानी है
ये होंठ सूखे सूखे
ये बाल रूखे रूखे
बोलो छाई उदासी क्यूँ यारों

यारों नीलम करो सुस्ती
हम से उधार ले लो मस्ती
अरे हस्ती का नाम तंदुरुस्ती
अरे यारों नीलम करो सुस्ती
हम से उधार ले लो मस्ती
अरे हस्ती का नाम तंदुरुस्ती
यारों नीलम करो सुस्ती

नदी गीत गाये, झरना गुनगुनाये
कोई गीत तुम भी साथ गा दो ना
दीप एक राह पर जला दो ना
नदी गीत गाये झरना गुनगुनाये
कोई गीत तुम भी साथ गा दो ना
दीप एक राह पर जला दो ना
अरे हवा सीरी सीरी सांस पीरी पीरी
देखो, समा सुहाना कैसा यारों

यारों नीलम करो सुस्ती
हम से उधार ले लो मस्ती
अरे हस्ती का नाम तंदुरुस्ती
यारों नीलम करो सुस्ती
हम से उधार ले लो मस्ती
अरे हस्ती का नाम तंदुरुस्ती
यारों नीलम करो सुस्ती

आँख ना चुराओ ना चुराओ
रूठ कर ना जाओ ना जाओ
आँख ना चुराओ ना चुराओ
रूठ कर ना जाओ, हे ना जाओ
आँख ना चुराओ, ह ह ह

आँख ना चुराओ
रूठ कर ना जाओ, हो ओ, हो ओ
अरे फूल जल उठेंगे इन बहारों में,
हाँ, धुआं सा उड़ेगा सब नज़रों में
हे, आँख ना चुराओ
रूठ कर ना जाओ
फूल जल उठेंगे इन बहारों में
धुआं सा उड़ेगा सब नज़रों में
हे, तीर मार गोरी
अरे हाँ, चोरी चोरी मेरा दिल ले जा
.............................................................
Yaaron neelam karo susti-Prem Pujari

Artists: Anoop Kumar, Dev Anand, Zahira

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May 1, 2010

शोखियों में घोला जाए-प्रेम पुजारी १९७०

फिल्म प्रेम पुजारी का जो गीत मुझे शीर्षक गीत का बाद सबसे
ज्यादा लुभाता है वो है-युगल गीत लता और किशोर की आवाज़ में।
गीत फिल्माया गया है वहीदा रहमान और देव आनंद पर। गीत की
विशेषता है की सूखी घास के रंग के अलावा आपको नायक नायिका
के लाल रंग के परिधान नज़र आयेंगे। गीत में ध्यान भटकाने का
सामान कम है। नीरज ने जितनी तबियत से इसको लिखा है उतनी ही बढ़िया
धुन इस गीत की तैयार की है एस डी बर्मन ने। अब गीत पहले लिखा
गया हो या धुन पहले बनी हो, end result बढ़िया है। ऐसे गीतों को हम
कहते हैं-timeless melody । गाने की बस एक चीज़ अटपटी है वो
है देव आनंद के हाथ में मछली मारने का यन्त्र जिसका रेगिस्तान में कोई
काम समझ नहीं पढता। हो सकता है साढ़े पांच फीट की मछली के लिए
इसको प्रतीक स्वरुप इस्तेमाल किया गया हो।

अरे अरे .............नहीं, ये तो तितली पकड़ने वाला यन्त्र है। दूसरे अंतरे के
बाद उसमे से तितलियाँ उडती नज़र आएँगी और मैदान की घास भी हरी हरी
नज़र आएगी। कहते हैं सावन के अंधे को हरा हरा ही दिखाई देता है तो इश्क
के मारों के बारे में क्या राय है ?

अँधेरे से उजाले की ओर कहिये या सूखे से हरियाली की ओर।





गीत के बोल:

शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब
उसमे फिर मिलायी जाए थोड़ी सी शराब
होगा यूँ नशा जो तैयार वो प्यार है

शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब
उसमे फिर मिलायी जाए थोड़ी सी शराब
होगा यूँ नशा जो तैयार वो प्यार है

हे हे हे हे हे हे हा हे

हँसता हुआ बचपन वो बहता हुआ मौसम है
छेड़ो तो एक शोला है छू लो तो बस शबनम है
हँसता हुआ बचपन वो बहता हुआ मौसम है
छेड़ो तो एक शोला है छू लो तो बस शबनम है
गाँव में मेले में, राह में अकेले में
आता जो याद बार बार वो प्यार है

शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब
उसमे फिर मिलायी जाए थोड़ी सी शराब
होगा यूँ नशा जो तैयार वो प्यार है
शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ला ला ला ला ला ला ला , आ आ आ

रंग में पिघले सोना अंग से यूँ रस छलके
जैसे बजे धुन कोई रात में हलके हलके
रंग में पिघले सोना अंग से यूँ रस छलके
जैसे बजे धुन कोई रात में हलके हलके
धूप में छांव में, घूमती हवाओं में
हर दम जो करे इंतज़ार वो प्यार है

शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब
उसमे फिर मिलायी जाए थोड़ी सी शराब
होगा यूँ नशा जो तैयार वो प्यार.......

याद अगर वो आये,
हो ओ ओ ओ ओ ओ
याद अगर वो आये, ऐसे कटे तन्हाई
सूने शहर में जैसे बजने लगे शहनाई
याद अगर वो आये, ऐसे कटे तन्हाई
सूने शहर में जैसे बजने लगे शहनाई
आना हो जाना हो कैसा भी ज़माना हो
उतरे कभी ना जो खुमार वो प्यार है

शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब
उसमे फिर मिलायी जाए थोड़ी सी शराब
होगा यूँ नशा जो तैयार वो प्यार है
शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब

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प्रेम के पुजारी हम है-प्रेम पुजारी १९७०

अलौकिक गायकी के कई महारथी हिंदी फिल्म जगत ने
देखे हैं। कहा जाता है कि संगीतकार को अगर स्वयं कोई
गीत गाना होता है तो वो सबसे उम्दा धुन अपने लिए
बचा के रखता है। कम से कम प्रेम पुजारी के इस गीत
को सुनने के बाद तो यही समझ आया मुझे।

हालाँकि इस बात पर मतभेद हैं, कोई किशोर के गाये गीत
को सर्वश्रेष्ठ बताने पर अड़ा हुआ है तो कोई लता के गाये गीत
को बेहतरीन मानता है। सचिन देव बर्मन की आवाज़ के मुरीद
ही शायद मेरे पक्ष में होंगे ।

तो सुनिए नीरज का लिखा हुआ और सचिन देव बर्मन का
संगीतबद्ध किया ये दर्शंवादी गीत(philosophical का
शायद हिंदी में यही अनुवाद होना चाहिए) । फिल्म में ये
गीत बेकग्राउंड में बजता है । फिल्म का शीर्षक गीत फिल्म के
विवरण के साथ ही बजता मिलता है।



गीत के बोल:

आ आ, आ आ आ आ आ
प्रेम के पुजारी
प्रेम के पुजारी हम हैं
रस के भिखारी हम हैं प्रेम के पुजारी
हो हो हो, प्रेम के पुजारी

कहाँ रे हिमालय ऐसा कहाँ ऐसा पानी
यहीं वो ज़मीन जिसकी दुनिया दीवानी
कहाँ रे हिमालय ऐसा कहाँ ऐसा पानी
यहीं वो ज़मीन जिसकी दुनिया दीवानी
सुंदरी ना कोई जैसी है धरती हमारी

प्रेम के पुजारी
प्रेम के पुजारी हम हैं
रस के भिखारी हम हैं प्रेम के पुजारी
हो हो हो , प्रेम के पुजारी

राजा गए
हाय राजा गए ताज गए बदला जहाँ सारा
रोज़ मगर बढ़ता जाए कारवां हमारा
राजा गए ताज गए बदला जहाँ सारा
रोज़ मगर बढ़ता जाए कारवां हमारा
फूल हम हजारों लेकिन ख़ुशबू एक हमारी
प्रेम के पूजारी
प्रेम के पुजारी हम हैं
रस के भिखारी हम हैं प्रेम के पुजारी
हो हो हो , प्रेम के पुजारी
प्रेम के पुजारी
प्रेम के पुजारी

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