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Aug 15, 2020

वतन की राह में-शहीद १९४८

आज स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर सुनते हैं आजादी
के एक साल बाद रिलीज़ हुई फिल्म शहीद से एक गीत.

राजा मेहँदी अली खान की रचना है और गुलाम हैदर का
संगीत. इसे रफ़ी और खान मस्ताना और साथियों ने गाया
है.




गीत के बोल:

वतन की राह में वतन के नौजवान शहीद हो
.
.
.......................................................................
Watan ki raah mein watan ke-Shaheed 1948

Artist: Dilip Kumar

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Jan 26, 2020

ओ शहीदों तुमपे-दिल परदेसी हो गया २००३

आज २६ जनवरी के अवसर पर सुनते हैं एक देशभक्ति
गीत जिसमें शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है और याद
किया गया है उनके शौर्य के लिए. उन्हें धन्यवाद दिया
गया है उनके अमूल्य योगदान के लिए.

गीत सोनू निगम ने गाया है और इसे आशुतोष राणा पर
फिल्माया गया है गीतकार सावन कुमार और संगीतकार हैं
उषा खन्ना. इस गीत में सावन कुमार ने सावन शब्द का
प्रयोग कर लिया है.




गीत के बोल:

ओ शहीदों ओ शहीदों
ओ शहीदों ओ शहीदों
तुमपे सारे देश को अभिमान है
तुमपे सारे देश को अभिमान है
जान दी तुमने वतन पे
जान दी तुमने वतन पे हमपे ये एहसान है
ओ शहीदों ओ शहीदों
तुमपे सारे देश को अभिमान है
तुमपे सारे देश को अभिमान है

दुश्मनों की लाशों को भी हमने तो इज्ज़त बख्श दी
दुश्मनों की लाशों को भी हमने तो इज्ज़त बख्श दी
घर में अपने घर दिया ये शान-ए-हिन्दुस्तान है
घर में अपने घर दिया ये शान-ए-हिन्दुस्तान है
ओ शहीदों ओ शहीदों
तुमपे सारे देश को अभिमान है
तुमपे सारे देश को अभिमान है

दिल का टुकड़ा दे दिया हमने तो भाई जान कर
दिल का टुकड़ा दे दिया हमने तो भाई जान कर
प्यार को कमजोरी समझा कितना बेईमान है
प्यार को कमजोरी समझा कितना बेईमान है
ओ शहीदों ओ शहीदों
तुमपे सारे देश को अभिमान है
तुमपे सारे देश को अभिमान है

ना करो गुमराह
ना करो गुमराह लोगों को धर्म के नाम पर
ना करो गुमराह लोगों को धर्म के नाम पर
अगर खुदा तेरा है तो मेरा भी निगेहबान है
अगर खुदा तेरा है तो मेरा भी निगेहबान है
ओ शहीदों ओ शहीदों
तुमपे सारे देश को अभिमान है
तुमपे सारे देश को अभिमान है

ना उठा ना उठा
ना उठा नापाक नज़रें मेरी सरहद की तरफ़
ना उठा नापाक नज़रें मेरी सरहद की तरफ़
भून कर रख दूंगा मेरा नाम हिन्दुस्तान है
भून कर रख दूंगा मेरा नाम हिन्दुस्तान है
ओ शहीदों ओ शहीदों
तुमपे सारे देश को अभिमान है
तुमपे सारे देश को अभिमान है

फिर जो छेड़ी फिर जो छेड़ी
फिर जो छेड़ी जंग तो बरसेगा सावन खून का
फिर जो छेड़ी जंग तो बरसेगा सावन खून का
नक्शों से मिट जायेगी जो भी तेरी पहचान है
नक्शों से मिट जायेगी जो भी तेरी पहचान है
ओ शहीदों ओ शहीदों
तुमपे सारे देश को अभिमान है
तुमपे सारे देश को अभिमान है
जान दी तुमने वतन पे
जान दी तुमने वतन पे हमपे ये एहसान है
ओ शहीदों ओ शहीदों
ओ शहीदों ओ शहीदों
…………………………………………………..
O shaheedon tumpe-Dil pardesi ho gaya 2003

Artist: Ashutosh Rana

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Aug 15, 2019

वतन वालों वतन ना बेच देना-इन्डियन २००१

आज स्वतंत्रता दिवस है. इस शुभ अवसर पर सुनते हैं एक
देशभक्ति के ज़ज्बे को जगाने वाला और सन्देश देता गीत.
इस दिन देश के हर नागरिक को देश के प्रति समर्पण का
संकल्प दोहराना चाहिए. हर नागरिक के मन में देश की
सेना के प्रति आदर और सम्मान का भाव होना चाहिए.

सन २००१ की फिल्म इन्डियन के लिए इसे आनंद बक्षी ने
लिखा, रूप कुमार राठौड़ ने गाया आनंद राज आनंद की धुन
पर.



गीत के बोल:

वतन वालों वतन ना बेच देना
ये धरती ये गगन ना बेच देना
शहीदों ने जान दी है वतन के वास्ते
शहीदों के कफ़न ना बेच देना

दोस्तों साथियों हम चले दे चले
अपना दिल अपनी जां
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तां

हम जिये हम मरे इस वतन के लिए
इस चमन के लिए
ताकि खिलतें रहे गुल हमेशा यहां

दोस्तों साथियों

दोस्तों से मिलो दोस्तों की तरह
दुश्मनों से मिलो दुश्मनों की तरह
जीना क्या मरना क्या बुज़दिलों की तरह
कह रहा ये वतन ये ज़मीं आसमां
माँओं ने अपने बेटे दिये नौजवां
सोच कर और क्या
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तां

मातृभूमि का दिल तू नहीं तोड़ना
देश के दुश्मनों को नहीं छोड़ना
मरना जीना तुझे इस वतन के लिए
फ़र्ज़ अपना निभा दे अमन के लिए
नाज़ तुझपे करे ये ज़मीं आसमां
देते हैं ये दुआ
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तां

देश के नाम अपनी जवानी लिखी
ये जवानी है क्या ज़िंदगानी लिखी
बस यहां तक की हमने कहानी लिखी
अब लिखो इसके आगे की तुम दास्तां

अब लिखो इसके आगे की तुम दास्तां
फ़र्ज़ कर दो अदा
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तां

दोस्तों साथियों हम चले दे चले
अपना दिल अपनी जां
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तां
…………………………………………………………
Watan walon watan na bech dena-Indian 2001

Artists: Jawans, Sunny Deol, Jackie Shroff

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Aug 15, 2018

उस मुल्क की सरहद को-आँखें १९६८

सरहद के सिपाहियों को याद करता ये गीत सुनते
हैं आँखें फिल्म से. इसमें थोडा सा दर्शन भी छुपा
हुआ है.

साहिर ने इस गीत में दो शब्दों का प्रयोग किया है
-तराज़ू और मीज़ान. दोनों का अर्थ एक ही है.





गीत के बोल:

उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
जिस मुल्क की सरहद की निगेहबान हैं आँखें

हर तरह के जज़्बात का ऐलान हैं आँखें
हर तरह के जज़्बात का ऐलान हैं आँखें
शबनम कभी शोला कभी तूफ़ान हैं आँखें

आँखों से बड़ी कोई तराज़ू नहीं होती
आँखों से बड़ी कोई तराज़ू नहीं होती
घुलता है बसर जिसमें वो मीज़ान हैं आँखें
घुलता है बसर जिसमें वो मीज़ान हैं आँखें
आँखें ही मिलाती हैं ज़माने में दिलों को
आँखें ही मिलाती हैं ज़माने में दिलों को
अनजान हैं हम तुम अगर अनजान हैं आँखें
अनजान हैं हम तुम अगर अनजान हैं आँखें

लब कुछ भी कहें उससे हकीक़त नहीं खुलती
लब कुछ भी कहें उससे हकीक़त नहीं खुलती
इंसान के सच झूठ की पहचान हैं आँखें
इंसान के सच झूठ की पहचान हैं आँखें
आँखें ना झुकें तेरी किसी गैर के लिए
आँखें ना झुकें तेरी किसी गैर के लिए
दुनिया में बड़ी चीज मेरी जान हैं आँखें
दुनिया में बड़ी चीज मेरी जान हैं आँखें

उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
जिस मुल्क की सरहद की निगेहबान हैं आँखें
जिस मुल्क की सरहद की निगेहबान हैं आँखें
……………………………………………………
Us mulk ki sarhad ko-Aankhen 1968

Artists:

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Aug 15, 2017

अपना देश विदेश के आगे हाथ न फैलाए-अनोखा १९७५

ए के हंगल को आपने परदे पर गाना गाते देखा है? ये अनूठा गीत
पेश है १५ अगस्त के अवसर पर. गीत में सन्देश है एक. नई पीढ़ी
को इसे एक बार अवश्य सुनना चाहिए.

इन्दीवर के बोल हैं, मुकेश की आवाज़ और कल्याणजी आनंदजी का
संगीत.



गीत के बोल:

अपना देश विदेश के आगे हाथ न फैलाए
अपना देश विदेश के आगे हाथ न फैलाए
आज जहाँ है रेत कल वहाँ खेत मुस्कुराए
आज जहाँ है रेत कल वहाँ खेत मुस्कुराए
ऐसा करो
ऐसा करो के गाँव-गाँव में गंगा लहराए
ऐसा करो के गाँव-गाँव में गंगा लहराए
अपना देश विदेश के आगे हाथ न फैलाए

मेहनत का ही नाम है वो जिसको क़िस्मत कहते हैं
जिसको क़िस्मत कहते हैं
दो हाथों का खेल है वो जिसको दौलत कहते हैं
जिसको दौलत कहते हैं
हम जहाँ पसीना बहाएँगे मोती वहाँ उगाएँगे
मोती वहाँ उगाएँगे
नदियाँ बाँधें नहर निकालें ख़ुशहाली छाए
नदियाँ बाँधें नहर निकालें ख़ुशहाली छाए
ऐसा करो के गाँव-गाँव में गंगा लहराए

अपना देश विदेश के आगे हाथ न फैलाए
कभी भी हाथ न फैलाए

देश की हर एक चीज़ है अपनी क्यों अपने हाथों क्यूँ तोड़ें
हम अपने हाथों क्यूँ तोड़ें
इसको बचाना फ़र्ज़ है अपना क्यूँ सरकार पर छोड़ें
हम क्यूँ सरकार पर छोड़ें
अपना भारत सारा हमें प्रांत-प्रांत है प्यारा
हमें प्रांत-प्रांत है प्यारा
आपस के ही इन दंगों में
इन दंगों में
आपस के ही इन दंगों में देश न जल जाए
ऐसा करो के गाँव-गाँव में गंगा लहराए

अपना देश विदेश के आगे हाथ न फैलाए
कभी भी हाथ न फैलाए
आज जहाँ है रेत कल वहाँ खेत मुस्कुराए
कल वहाँ खेत मुस्कुराए
........................................................................
Apna desh videsh ke aage-Anokha 1975

Artists: AK Hangal, Kids

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फ़ौजी गया जब गाँव में-आक्रमण १९७५

बॉलीवुड समय समय पर देश भक्ति की फ़िल्में बनाता रहता है.
ये ज़रूरी भी हैं हमें अपने वीर जवानों की शहादत और योगदान
को याद दिलाने के लिए. मनोज कुमार ने इस थीम पर काफी
फ़िल्में बनाई हैं और उसके अलावा सामाजिक समस्याओं पर भी
कुछ फ़िल्में उनकी हैं जो दूसरे निर्देशकों और निर्माताओं की फिल्मों
से ज्यादा टोपिक को कवर करती हैं. फिल्म में मसाले नहीं होंगे
तो उसकी कमर्शियल वायबिलिटी संदिग्ध होगी. बिना गाने वाली
फिल्म को हमारे यहाँ वृत्त चित्र समझा जाता है.

आज जिस फिल्म से आपको गीत सुनवा रहे हैं उसके नायक है
राजेश खन्ना.

सुनते हैं ७५ की फिल्म आक्रमण से एक लोकप्रिय गीत किशोर कुमार
का गाया हुआ. आनंद बक्षी के बोल हैं और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का
संगीत.

   


गीत के बोल:

फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में
पहन के रंगरूट फ़ुल बूट पाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में

पहले लोगों ने रखा था मेरा नाम निखट्टू
पहले लोगों ने रखा था मेरा नाम निखट्टू
ओए दो दिन में जग ऐसे घूमा जैसे घूमें लट्टू
भरती हो के करनैला करनैल सिंह बन बैठा
मेरा बापू साथ मेरे जरनैल सिंह बन बैठा
आते देखा मुझको तो सब करने लगे सलामी
आगे पीछे दौड़े चाचा-चाची मामा-मामी

यारों ने सामान उठा कर रखा अपने सर पे
यारों ने सामान उठा कर रखा अपने सर पे
दरवाजे पर बैठे थे सब जब मैं पहुँचा घर पे
कस कर पूरे जोर से फिर मैने सैल्यूट जो मारा
सबकी छुट्टी हो गई फिर मैने बूट से बूट जो मारा

फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में

घर के अन्दर जा कर फिर जब मैने खोला बक्सा
घर के अन्दर जा कर फिर जब मैने खोला बक्सा
हाय देख रहे थे सब देखें जंग का नक्शा
सबको था मालूम शाम को खुलेगी रम की बोतल
सबको था मालूम शाम को खुलेगी रम की बोतल
सब आ बैठे घर पर मेरे घर मेरा बन गया होटल

बीच में बैठा था मैं सब बैठे थे आजू बाजू
इतने में बंदूक चली भई गाँव में आये डाकू हाँ
उतर गई थी सबकी छुप गए सारे डर के मारे
उतर गई थी सबकी छुप गए सारे डर के मारे
मैं घर से बाहर निकला सब मेरा नाम पुकारें
मार के लाठी ज़मीं पे झट से डाकुओँ को ललकारा
वे थे चार अकेला मैं मैने चारों को मारा

फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में

छोड़ के अपने घोड़े डाकू जान बचा कर भागे
छोड़ के अपने घोड़े डाकू जान बचा कर भागे
मेरी वाह-वाह करते सुबह नींद से लोग जागे
मैं खेतों की सैर को निकला मौसम था मस्ताना
रस्ते में वो मिली मेरा था जिससे इश्क़ पुराना
जिससे इश्क़ पुराना
ख़ूब सुने और ख़ूब सुनाये किस्से अगले-पिछले
भई ख़ूब सुने और ख़ूब सुनाये किस्से अगले-पिछले
निकला चाँद तो हम दोनों भी खेत से बाहर निकले
हाय-हाय मच गया शोर सारे गाँव में

फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में
ओय फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में
फ़ौजी गया जब गाँव में
.............................................................................
Fauji gaya jab gaon mein-Aakraman 1975

Artist: Rajesh Khanna

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Apr 23, 2017

ये देश है वीर जवानों का-नया दौर १९५७

हिंदी फिल्म सिनेमा इतिहास में एक ऐसा गीत भी है जो
है तो देशभक्ति गीत मगर इसे सबसे ज्यादा शादी के अवसर
पर सुना जाता है और जनता इस पर खूब नाचती भी है.
ये सिलसिला कैसे शुरू हुआ उसके बारे में मुझे जानकारी
तो नहीं है मगर ये कह सकता हूँ शायद शादी करने वाले
नौजवानों की हिम्मत बढ़ाने के लिए बजाया जाता हो !
शादी करना भी एक हिम्मत का काम है ना. कोई सेंटी
किस्म का दूल्हा बिदाई तक आंसू ना बहाए इसलिए उसे
एडवांस में ये सुना दिया जाता है. साथ में बाराती झूमते
नाचते हैं इस गीत पर, उससे भी दूल्हे की हिम्मत बढती है.

श्रेणी बनाने वाले सयाने इसे देशभक्ति गीत और शादी गीत
दोनों श्रेणियों में शामिल करते हैं. हम भी उनके ज्ञान और
उसके इम्प्लीमेंटेशन की कद्र करते हुए दोनों श्रेणियों में
गिन लेते हैं.

साहिर के लिखे इस गीत को रफ़ी और बलबीर ने गाया है.
बलबीर के गाने से भी इसे बल मिला है. नैयर ने इसकी 
धुन बनाई है.



गीत के बोल:

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ये देश है वीर जवानों का
अलबेलों का मस्तानों का
इस देश का यारों होए
इस देश का यारों क्या कहना
ये देश है दुनिया का गहना


ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यहाँ चौड़ी छाती वीरों की
यहाँ भोली शक्लें हीरो की
यहाँ गाते हैं रांझे होये
ओ यहाँ गाते हैं रांझे मस्ती में
मचती है धूमें बस्ती में

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
पेड़ों पे बहारें झूलों की
राहों में कतारें फूलों की
यहाँ हँसता है सावन होये
यहाँ हँसता है सावन बालों में
खिलती है कलियाँ गालों में

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
कहीं दंगल शोख जवानों के
कहीं करतब तीर कमानों के
यहाँ नित नित मेले होये
यहाँ नित नित मेले सजते हैं
नित ढोल और ताशे बजते हैं

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
दिलवर के लिए दिलदार हैं हम
दुश्मन के लिए तलवार हैं हम
मैदान में अगर हम
मैदान में अगर हम डट जाएँ
मुश्किल है के पीछे हट जाएँ
……………………………………………………………..
Ye desh hai veer jawanon ka-Naya daur 1957

Artists: Dilip Kumar, Ajit

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दुल्हन चली हाँ पहन चली-पूरब और पश्चिम १९७०

एक देशभक्ति की भावना से ओत प्रोत गीत सुनते हैं
जिसे महेंद्र कपूर ने गाया है.

फिल्म: पूरब और पश्चिम
वर्ष: १९७०
गीतकार: इन्दीवर
गायक: महेंद्र कपूर
संगीत: कल्याणजी आनंदजी



गीत के बोल:

पूरब में सूरज ने छेड़ी  जब किरणों की शहनाई
चमक उठा सिन्दूर गगन पे  पच्छिम तक लाली छाई

दुल्हन चली  हाँ पहन चली
हो रे दुल्हन चली  हो पहन चली
तीन रंग की चोली
बाहों में लहराये गंगा जमुना
देख के दुनिया डोली
दुल्हन चली  हो पहन चली
तीन रंग की चोली

ताजमहल जैसी ताजा है सूरत
चलती फिरती अजंता की मूरत
मेल मिलाप की मेहंदी रचाए
बलिदानों की रंगोली
दुल्हन चली  हो पहन चली
तीन रंग की चोली

मुख चमके ज्यूँ हिमालय की चोटी
हो ना पड़ोसी की नीयत खोटी
ओ घर वालों ज़रा इसको संभालो
ये तो है बड़ी भोली
दुल्हन चली  हो पहन चली
तीन रंग की चोली

और सजेगी अभी और संवरेगी
चढ़ती उमरिया है और निखरेगी
अपनी आजादी की दुल्हनिया
दीप के ऊपर होली
दुल्हन चली  हो पहन चली
तीन रंग की चोली

देश प्रेम ही आजादी की दुल्हनिया का वर है
इस अलबेली दुल्हन का सिंदूर सुहाग अमर है
माता है कस्तूरबा जैसी  बाबुल गाँधी जैसे
बाबुल गाँधी जैसे
चाचा इसके नेहरु  शास्त्री  डरे ना दुश्मन कैसे
डरे ना दुश्मन कैसे
वीर शिवाजी जैसे वीरे  लक्ष्मी बाई बहना
लक्ष्मण जिसके बोध  भगत सिंह  उसका फिर क्या कहना
उसका फिर क्या कहना
जिसके लिए जवान बहा सकते हैं खून की गंगा
जिसके लिए जवान बहा सकते हैं खून की गंगा
आगे पीछे तीनो सेना ले के चले तिरंगा
सेना चलती है ले के तिरंगा
सेना चलती है ले के तिरंगा
हो कोई हम प्रान्त के वासी हो कोई भी भाषा भाषी
सबसे पहले हैं भारतवासी
सबसे पहले हैं भारतवासी
सबसे पहले हैं भारतवासी
सबसे पहले हैं भारतवासी
……………………………………………………
Dulhan chali haan pahan chali-Purab aur pashchim 1970

Artists: Manoj Kumar, Bharti, Various

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Mar 21, 2017

होठों पे सच्चाई रहती है-जिस देश में गंगा बहती है १९६०

मुकेश का गाया एक देशभक्ति से ओत प्रोत गीत सुनते हैं. इसे
एक न एक बार हर नागरिक को ज़रूर सुनना चाहिए.

स्वच्छ भारत अभियान के दौर में इस गीत पर भी विचार मंथन
की आवश्यकता है. कितना हम अपने आदर्शों और मूल्यों से
भटके और कहाँ हमें सुधार की ज़रूरत है. जीवन दायिनी गंगा
को हम कितना सम्मान देते हैं विचारणीय और प्रासंगिक प्रश्न
है. हर नागरिक को नदियों के संरक्षण के लिए कुछ न कुछ
योगदान अवश्य देना चाहिए.

गीत के शुरू की ध्वनियाँ हमारे देश में जगह जगह इस्तेमाल
की जाने वाली परंपरागत आवाजों का मिश्रण है. गीत मुकेश
ने गाया है जिसे शैलेन्द्र ने लिखा और शंकर जयकिशन ने
संगीत से सजाया.




गीत के बोल:

होठों पे सच्चाई रहती है
जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है
हम उस देश के वासी हैं
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

मेहमां जो हमारा होता है
वो जान से प्यारा होता है
मेहमां जो हमारा होता है
वो जान से प्यारा होता है
ज़्यादा की नहीं लालच हमको
थोड़े मे गुज़ारा होता है
थोड़े मे गुज़ारा होता है

बच्चों के लिये जो धरती माँ
सदियों से सभी कुछ सहती है
हम उस देश के वासी हैं
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

कुछ लोग जो ज़्यादा जानते हैं
इन्सान को कम पहचानते हैं
कुछ लोग जो ज़्यादा जानते हैं
इन्सान को कम पहचानते हैं
ये पूरब है पूरब वाले
हर जान की कीमत जानते हैं
हर जान की कीमत जानते हैं

मिल जुल के रहो और प्यार करो
एक चीज़ यही जो रहती है
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

जो जिससे मिला सिखा हमने
गैरों को भी अपनाया हमने
मतलब के लिये अन्धे होकर
रोटी को नहीं पूजा हमने
अब हम तो क्या सारी दुनिया
सारी दुनिया से कहती है
हम उस देश के वासी हैं
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है
…………………………………………………………………
Honthon pe sachchai rehti hai-Jis desh mein Ganga behti hai 1960

Artists: Raj Kapoor, Tiwari, Pran

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Jan 26, 2017

ताकत वतन की हमसे है-प्रेम पुजारी १९७०

देश भक्ति गीत सुनते हैं आज २६ जनवरी के अवसर पर. जो
ज़ज्बाई झोंका १५ अगस्त और २६ जनवरी को आता है अगर
वो साल भर कायम रहे तो सभी के मन में देशभक्ति और
देश प्रेम के भाव जाग्रत बने रहेंगे. हमारे जवान अगर हमारी
सीमाओं की सुरक्षा कर के हमें चैन की नींद सोने का अवसर
देते हैं तो हमारा भी ये दायित्व है हम अपने देश से प्रेम करें
और इसे स्वच्छ, स्वस्थ और खुशहाल बनाये रखने में अपना
योगदान दें.

फिल्म प्रेम पुजारी के लिए इस गीत को लिखा है नीरज ने और
इसकी धुन बनाई है एस डी बर्मन ने. मन्ना डे और रफ़ी के
संग कोरस ने इस गीत को गाया है.



गीत के बोल:

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

पहरेदार हिमालय के हम झोंके हैं तूफ़ान के
सुन कर गरज हमारी सीने फट जाते चट्टान के
पहरेदार हिमालय के हम झोंके हैं तूफ़ान के
सुन कर गरज हमारी सीने फट जाते चट्टान के

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

सीना है फौलाद का अपना फूलों जैसा दिल है
तन में विन्ध्याचल का बल है मन में ताजमहल है
सीना है फौलाद का अपना फूलों जैसा दिल है
तन में विन्ध्याचल का बल है मन में ताजमहल है

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

देकर अपना खून सींचते देश की हम फुलवारी
बंसी से बन्दूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी
देकर अपना खून सींचते देश की हम फुलवारी
बंसी से बन्दूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

आकर हमको कसम दे गई राखी किसी बहन की
देंगे अपना शीश न देंगे मिट्टी मगर वतन की
आकर हमको कसम दे गई राखी किसी बहन की
देंगे अपना शीश न देंगे मिट्टी मगर वतन की

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

खतरे में हो देश अरे तब लड़ना सिर्फ धरम है
मरना है क्या चीज़ आदमी लेता नया जनम है
खतरे में हो देश अरे तब लड़ना सिर्फ धरम है
मरना है क्या चीज़ आदमी लेता नया जनम है

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

एक जान है एक प्राण है सारा देश हमारा
नदियाँ चल कर थकी रुकी पर कभी न गंगा धारा
एक जान है एक प्राण है सारा देश हमारा
नदियाँ चल कर थकी रुकी पर कभी न गंगा धारा

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले
………………………………………………………..
Taqat watan ki hamse hai-Prem pujari 1970.

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Nov 6, 2016

वंदे मातरम-कभी खुशी कभी गम २००१

फ़िल्में ऐसी हों जो हर प्रकार का इमोशनल अटैक करें आपके
दिमाग पर. फिल्म कभी खुशी कभी गम में सारे फ़िल्मी मसाले
मौजूद हैं. दर्शक को चारों ओर से घेर लो ताकि वो किसी न किसी
बात पर वाह वाह ज़रूर करे. इस लिहाज़ से देखा जाए तो फिल्म
बेहद सफल है. अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी और काजोल का
अभिनय फिल्म के कुछ मजबूत पक्षों में से एक है.

एक बात अच्छी है २००० के आसपास और उसके बाद बनने वाली
फिल्मों में-इन्हें बनाने के वक्त अप्रवासी भारतीयों का ज्यादा ध्यान
रखा जाने लगा है. ओवरसीज़ मार्केट एक बड़ा मार्केट हो चुका है
आज बॉलीवुड के लिए और निर्माता निर्देशक इस बात को अच्छी
तरह से भुना लेना चाहते हैं. भव्य कैनवास और बड़ी स्टारकास्ट
होने के बावजूद फिल्म ऐसा लगता है बेहतर बनाई जा सकती थी.

इस फिल्म से एक गीत सुनते हैं जो बंकिम चंद्र रचित वंदे मातरम
और इकबाल रचित सारे जहाँ से अच्छा का मिश्रण है. इसे गाया है
कविता कृष्णमूर्ति और उषा उथुप ने. सन्देश शांडिल्य ने इस गीत
का संगीत तैयार किया हैं. फिल्म का एक मजबूत पक्ष ये गीत भी
है. गीत में फिल्म के सभी प्रमुख कलाकार मौजूद हैं और मुरलीवाले
की मूर्ति के दर्शन भी हो जाते हैं.




गीत के बोल:

वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम
वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम

वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम
वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम
सुजलाम सुफलाम मातरम

मलयज शीतलाम मातरम
सुजलाम सुफलाम मातरम
मलयज शीतलाम मातरम
शस्य शामला मातरम
वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम
वंदे मातरम वंदे मातरम मातर
हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसितां हमारा हमारा
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा
………………………………………………………
Vande Matram-Kabhi Khushi Kabhi Gham 2001

Artist: Hrithik Roshan

Lyrics: Bankim Chandra Chattopadhyay, Allama Muhammad Iqbal

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Oct 19, 2016

नफ़रत की लाठी तोड़ो-देश प्रेमी १९८२

आनंद बक्षी का लिखा हुआ एक देशभक्ति गीत सुनते हैं फिल्म
देशप्रेमी से. मोहम्मद रफ़ी ने इस गीत को गाया है. अमिताभ
पर फिल्माया गया गीत संगीत से संवारा है लक्ष्मी प्यारे ने.
इस फिल्म के गीत काफी लोकप्रिय थे अपने वक्त. फिल्म रिलीज़
के १० साल बाद भी इन्हें खूब सुना गया.

प्रस्तुत गीत देशभक्ति वाले त्योहारों के अवसर पर ज़रूर बजा
करता है. गीत में जिस गति से जनता का ह्रदय परिवर्तन होता
है काश वैसा ही वास्तविक जीवन में भी हो.



गीत के बोल:


नफ़रत की लाठी तोड़ो लालच का खंजर फेंको
ज़िद के पीछे मत दौड़ो तुम प्रेम के पंछी हो
देश प्रेमियों
देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों

नफ़रत की लाठी तोड़ो लालच का खंजर फेंको
ज़िद के पीछे मत दौड़ो तुम प्रेम के पंछी हो
देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों

मीठे पानी में ये ज़हर न तुम घोलो
जब भी कुछ बोलो ये सोच के तुम बोलो
भर जाता है गहरा घाव जो बनता है गोली से
पर वो घाव नहीं भरता जो बना हो कड़वी बोली से
दो मीठे बोल कहो
मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो ढेश प्रेमियों
मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों

देखो ये धरती हम सब की माता है
सोचो आपस में क्या अपना नाता है
हम आपस में लड़ बैठे
हम आपस में लड़ बैठे तो देश को कौन सम्भालेगा
कोई बाहर वाला अपने घर से हमें निकालेगा
दीवानों होश करो
मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों

तोड़ो दीवारें ये चार दिशाओं की
रोको मत राहें इन मस्त हवाओं की
पूरब पश्चिम उत्तर दक्खिन वालों मेरा मतलब है
इस माटी से पूछो क्या भाषा क्या इसका मज़हब है
फिर मुझसे बात करो

मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
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Mere desh premiyon-Desh premi 1982

Artists: Amitabh Bachchan, Uttam Kumar, Shammi Kapoor, Parikshit Sahni, Premnath

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Aug 15, 2016

हम करें राष्ट्र आराधन–देशभक्ति गीत

आज आपको सुनवाते हैं जयशंकर प्रसाद रचित एक मधुर एवम
गरिमामय देशभक्ति गीत. इसे संगीतबद्ध किया है अशित देसाई ने.
बरसों पहले चंद्रप्रकाश द्विवेदी के टी वी सीरियल चाणक्य में इस
गीत को शामिल किया गया था.

८ सितम्बर १९९१ से ९ अगस्त १९९२ तक इस सीरियल का प्रसारण
हुआ था. अपने आप में अनूठा ये सीरियल आज भी दर्शकों की
स्मृति में कायम है. इसमें चाणक्य की शीर्षक भूमिका निभाई थी
इसके निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने.




गीत के बोल:

अन्तर से मुख से कृति से
निश्र्चल हो निर्मल मति से
श्रद्धा से मस्तक नत से
हम करें राष्ट्र अभिवादन अभिवादन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन

हम करें राष्ट्र आराधन
तन से मन से धन से
तन मन धन जीवन से
हम करें राष्ट्र आराधन

अपने हंसते शैशव से
अपने खिलते यौवन से
अपने हंसते शैशव से
अपने खिलते यौवन से
प्रौढ़ता पूर्ण जीवन से
हम करें राष्ट्र का अर्चन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन

अन्तर से मुख से कृति से
निश्र्चल हो निर्मल मति से
श्रद्धा से मस्तक नत से
हम करें राष्ट्र अभिवादन अभिवादन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन

अपने अतीत को पढ़कर
अपना इतिहास उलटकर
अपने अतीत को पढ़कर
अपना इतिहास उलटकर
अपना भवितव्य समझकर
हम करें राष्ट्र का चिंतन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन
आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन

है याद हमें युग युग की
जलती अनेक घटनायें
जो माँ के सेवा पथ पर
आई बनकर विपदायें
हमने अभिषेक किया था
जननी का अरिशोणित से
हमने श्रृंगार किया था
माता का अरिमुंडो से

हमने ही उसे दिया था
सांस्कृतिक उच्च सिंहासन
माँ जिस पर बैठी सुख से
करती थी जग का शासन
अब काल चक्र की गति से
वह टूट गया सिंहासन
अपना तन मन धन देकर
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन

तन से मन से धन से
तन मन धन जीवन से
हम करें राष्ट्र आराधन
आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन
करें राष्ट्र आराधन
करें राष्ट्र आराधन
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Ham Karen rashtra aaradhan-Deshbhakti geet non film

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जागे हैं अब सारे लोग...आज़ादी-बोस द फॉरगोटन हीरो २००५

आजादी की वर्षगाँठ के सुअवसर पर सुनते हैं एक देशभक्ति गीत
फिल्म नेताजी सुभाष चंद्र बोस द फॉरगोटन हीरो से. जावेद अख्तर
के लिखे गीत को संगीत से संवारा है ए आर रहमान ने. यह गीत
ए आर रहमान ने ही गाया है.

श्याम बेनेगल निर्देशित फिल्म में सचिन खेडेकर नामक अभिनेता
ने नेताजी की भूमिका निभाई है. 




गीत के बोल:

जागे हैं अब सारे लोग तेरे देख वतन
गूंजे हैं नारों से अब ये ज़मीन और ये गगन
कल तक मैं तनहा था सूने थे सब रास्ते
कल तक मैं तनहा था पर अब है साथ मेरे
लाखों दिलों की धड़कन
देख वतन

आज़ादी पाएंगे आज़ादी लायेंगे
आज़ादी छायेगी
आज़ादी आएगी आएगी

जागे हैं अब सारे लोग तेरे देख वतन
गूंजे हैं नारों से अब ये ज़मीन और ये गगन
कल तक मैं तनहा था सूने थे सब रास्ते
कल तक मैं तनहा था पर अब है
साथ मेरे लाखों दिलों की धड़कन
देख वतन

हम चाहें आज़ादी
हम मांगें आज़ादी
आज़ादी छायेगी
आज़ादी आएगी आएगी
......................................................................
Jaage hain ab saare log-Bose The forgotten hero 2005

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Jun 2, 2016

भारत हमको जान से प्यारा है-रोजा १९९३

रोजा फिल्म से एक देश भक्ति गीत सुनते हैं आज. हरिहरन
के गाये इस गीत को पी के मिश्रा ने लिखा है. संगीतकार
रहमान ने दोनों संस्करणों में संगीत दिया है-मूल तमिल और
प्रस्तुत हिंदी में डब की हुई फिल्म में भी.

सन्देश गीत का एक बार फिर वही है-एकता और भाईचारा.
रहमान की शुरूआती हिंदी फिल्मों के गीत पी के मिश्रा और
महबूब ने काफी लिखे हैं. फिल्म ताल के बाद से समीकरण
बदले और उन्होंने उत्तर भारत के दुसरे गीतकारों के साथ भी
काम करना शुरू कर दिया.




गीत के बोल:

भारत हमको जान से प्यारा है
सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है
भारत हमको जान से प्यारा है
सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है

सदियों से भारत भूमि दुनिया की शान है
भारत माँ की रक्षा में जीवन कुर्बान है

भारत हमको जान से प्यारा है
सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है

उजड़े नहीं अपना चमन
टूटे नहीं अपना वतन
गुमराह ना कर दे कोई
बरबाद ना कर दे कोई
मंदिर यहाँ, मस्जिद वहाँ
हिन्दू यहाँ, मुस्लिम यहाँ
मिलते रहें हम प्यार से, जागो..

हिन्दुस्तानी नाम हमारा है
सबसे प्यारा देश हमारा है
हिन्दुस्तानी नाम हमारा है
सबसे प्यारा देश हमारा है

जन्मभूमि है हमारी शान से कहेंगे हम
सभी ही तो भाई-भाई प्यार से रहेंगे हम
हिन्दुस्तानी नाम हमारा है
सबसे प्यारा देश हमारा है

आसाम से गुजरात तक
बंगाल से महाराष्ट्र तक
जाति कई, धुन एक है
भाषा कई, सुर एक है
कश्मीर से मद्रास तक
कह दो सभी हम एक हैं
आवाज़ दो हम एक हैं, जागो
.....................................................................
Bharat hamko jaan se pyara hai-Roja 1993

Artists- Arvind Swamy, Madhu

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Jun 1, 2016

ज़िन्दगी मौत ना बन जाए-सरफ़रोश १९९९

इस गीत के बोल झकझोरने वाला हैं. देश भक्ति के भाव जगाने
वाला ये गीत है सन १९९९ की फिल्म सरफ़रोश से. इसे जिन दो
गायकों ने गाया है वेहै-सोनू निगम और रूप कुमार राठौड. फिल्म
के निर्देशक है जॉन मैथ्यू मत्थन जिन्होंने एटनबरो की फिल्म
गांधी से बतौर सहायक निर्देशक अपनी शुरुआत की थी. उन्होंने
गोविन्द निहलानी के साथ भी काम किया और एड फ़िल्में भी
बनाईं.

फिल्म सरफ़रोश की काफी तारीफ हुई. फिल्म ने कई पुरस्कार भी
जीते. संगीत पक्ष भी फिल्म का काफी मज़बूत है. प्रस्तुत गीत
इसरार अंसारी ने लिखा है और इसकी धुन जतिन ललित ने बनाई
है.



गीत के बोल:

ज़िन्दगी मौत ना बन जाए, संभालो यारों
खो रहा चैन-ओ-अमन, खो रहा चैन-ओ-अमन
मुश्किलों में है वतन, मुश्किलों में है वतन
सरफरोशी की शमा दिल में जला लो यारों
ज़िन्दगी मौत ना बन जाए, संभालो यारों

एक तरफ प्यार है, चाहत है, वफादारी है
एक तरफ देश में धोखा है, गद्दारी है
बस्तियां सहमी हुई, सहमा चमन सारा है
ग़म में क्यूं डूबा हुआ आज सब नज़ारा है
आग पानी की जगह अब्र जो बरसाएंगे
लहलाते हुए सब खेत झुलस जायेंगे, जायेंगे, जायेंगे
खो रहा चैन-ओ-अमन, खो रहा चैन-ओ-अमन
मुश्किलों में है वतन, मुश्किलों में है वतन
सरफरोशी की शमा दिल में जला लो यारों
ज़िन्दगी मौत ना बन जाए, संभालो यारों
चन्द सिक्कों के लिए, तुम ना करो काम बुरा
हर बुराई का सदा होता है अंजाम बुरा

जुर्म वालों की कहाँ उम्र बड़ी है यारों
इनकी राहों में सदा मौत खड़ी है यारों
ज़ुल्म करने से सदा ज़ुल्म ही हासिल होगा
जो न सच बात कहे वो कोई बुजदिल होगा
सरफरोशों ने लहू दे के जिसे सींचा है
ऐसे गुलशन को उजड़ने से बचा लो यारों
सरफरोशी की शमा दिल में जला लो यारों यारों यारों
ज़िन्दगी मौत ना बन जाए, संभालो यारों
...................................................................
Zindagi maut na bane jaaye yaaron-Sarfarosh 1999

Artists-Sonali Bendre, Aamir Khan

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May 11, 2015

आवाज़ दो हम एक हैं-देश भक्ति गीत

देश भक्ति गीतों को सुनने में एक अलग आनंद आता है.
हर संगीत प्रेमी को इन्हें अवश्य सुनना चाहिए. ऐसे गीतों
में अतिरिक्त उर्जा सी महसूस होती है, कुछ बोलों की वजह
से और कुछ इनके लिए बनाई गयी विशेष धुनों के कारण.

सुनते हैं एक गैर-फ़िल्मी देशभक्ति गीत जिसे गीतकार और
शायर जां निसार अख्तर ने लिखा है. इस गाया है रफ़ी ने
खय्याम की धुन पर. इसे भारत चीन के युद्ध के वक्त १९६२
में तैयार किया गया था.

शिव खेडा ने एक जगह अपनी प्रस्तुति में कहा था-ये मुफ्त
की आजादी है जिसकी हम लोग कीमत नहीं समझते हैं. इस
आजादी की कीमत है. जो हम खुली हवा में सांस ले पाते हैं
वो सीमा पर तैनात हमारे रक्षक जवानों की बदौलत है. जो
आजादी हमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीर जवानों के
वर्षों के संघर्ष की बदौलत प्राप्त हुई है उसकी हम कद्र करें.
उसे कायम रखने के लिए हमारे जवान निरंतर पसीना बहाते
हैं.

हर व्यक्ति को देशभक्ति का पाठ अवश्य पढाया जाना चाहिए
जिससे वो एक जिम्मेदार नागरिक बने.




गीत के बोल:

एक है अपनी ज़मीं, एक है अपना गगन
एक है अपना जहां, एक है अपना वतन

अपने सभी सुख एक हैं, अपने सभी ग़म एक हैं
आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं
आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं


ये वक़्त खोने का नहीं, ये वक़्त सोने का नहीं
जागो वतन ख़तरे में है, सारा चमन खतरे में है
फूलों के चेहरे ज़र्द हैं, ज़ुल्फ़ें फ़िज़ा की गर्द हैं
उमड़ा हुआ तूफ़ान है, नरगे में हिन्दुस्तान है
दुश्मन से नफ़रत फ़र्ज़ है, घर की हिफ़ाज़त फ़र्ज़ है
बेदार हो, बेदार हो, आमादा-ए-पैकार हो

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

ये है हिमाला की ज़मीं, ताज-ओ-अजंता की ज़मीं
संगम हमारी आन है, चित्तौड़ अपनी शान है
गुल्मर्ग का महका चमन, जमुना का तट, गोकुल का बन
गंगा के धारे अपने हैं, ये सब हमारे अपने हैं
कह दो कोई दुश्मन नज़र, उठे न भूले से इधर
कह दो के हम बेदार हैं, कह दो के हम तैयार हैं

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं

उठो जवानां-ए-वतन, बाँधे हुए सर से कफ़न
उठो दकन की ओर से, गंग-ओ-जमन की ओर से
पंजाब के दिल से उठो, सतलुज के साहिल से उठो
महाराष्ट्र की खाक से, दिल्ली की अर्ज़-ए-पाक से
बंगाल से गुजरात से, कश्मीर के बागात से
नेफ़ा से, राजस्थान से, कुल खाक-ए-हिन्दोस्तान से

आवाज़ दो, आवाज़ दो हम एक हैं, हम एक हैं
हम एक हैं, हम एक हैं
हम एक हैं, हम एक हैं
....................................................
Awaaz do ham ek hain-Patriotic non-film song

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Jan 26, 2014

नन्हा मुन्ना राही हूँ-सन ऑफ इण्डिया १९६२

शांति माथुर की आवाज़ में सन ऑफ इण्डिया से अगला
गीत सुनते हैं जिसमें देशभक्ति का जज़्बा है.

आज की शिक्षण पद्धति में देश के प्रति भक्ति के बीज
डालने की प्रक्रिया को गंभीरता से सुधारने की ज़रूरत है.
जिस व्यक्ति को जयहिन्द बोलने में शर्म आये वो इस
देश के किस काम का.

कर्तव्यों से भी जनता विमुख होती जा रही है, जब वही
चेतना अधिकारों के प्रति जागरूक कर देती है तो फ़िर
कर्तव्यों के प्रति क्यूँ नहीं.



गीत के बोल:

नन्हा मुन्ना रही हूँ देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द
जय हिन्द जय हिन्द
नन्हा मुन्ना रही हूँ देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द
जय हिन्द जय हिन्द

डट के मैं चलूँगा ना डर डर के
चाहे मुझे जीना पड़े मर मर के
मंज़िल से पहले न लूँगा कही दम
आगे ही आगे बढ़ाउंगा कदम
दाहिने बाएं दाहिने बाएं थम

नन्हा मुन्ना रही हूँ देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द
जय हिन्द जय हिन्द

नया है ज़माना मेरी नई है डगर
देश को बनाऊँगा मशीनों का नगर
भारत किसी से रहेगा नहीं कम
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम
दाहिने बाएं दाहिने बाएं थम

नन्हा मुन्ना रही हूँ देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द
जय हिन्द जय हिन्द

बड़ा हो के देश का सहारा बनूँगा
दुनिया की आँखों का तारा बनूँगा
रखूँगा ऊँचा तिरंगा परचम
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम
दाहिने बाएं दाहिने बाएं थम

नन्हा मुन्ना रही हूँ देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द
जय हिन्द जय हिन्द

चाँद की सी नगरी है मेरा ये वतन
सबको सिखाउंगा मैं प्यार का चलन
दुनिया में गिरने न दूंगा कही बम
आगे ही आगे बढ़ाऊंगा कदम
दाहिने बाएं दाहिने बाएं थम

नन्हा मुन्ना रही हूँ देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द
जय हिन्द जय हिन्द
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
………………………………………..
Nanha munna rahi hoon-Son of India 1962

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Aug 17, 2011

वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम-फौजी १९७५

देश को स्वतंत्र हुए ६५ साल हो गये हैं। वर्षों के संघर्ष के बाद हमें
सन १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्त हुई। इस दौरान जितने भी वीरों और
बहादुरों ने इसकी प्राप्ति में अपना बलिदान और योगदान दिया उन
सभी को नमन। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।

प्रस्तुत गीत है फिल्म फौजी से जो सन १९७५ की फिल्म है। गीत
में दिखाईदेने वाले कलाकारों में जोगिन्दर प्रमुख हैं। जोगिन्दर की
बनाई अधिकतर फिल्मोंमें सोनिक ओमी का संगीत है। गीत गाया
है मन्ना डे और मोहम्मद रफ़ी ने और उनके साथ एक महिला आवाज़
भी है जिसे मैं पहचान नहीं पा रहा हूँ।


गीत के बोल:

वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
गोलियाँ खा के गर्दन झुकाता नहीं
कदम को बढ़ा के हटाता नहीं
ओ गोलियाँ खा के गर्दन झुकाता नहीं
कदम को बढ़ा के हटाता नहीं
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी वीर वरगा
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी वीर वरगा
वीर वरगा  नी मेरे वीर वरगा
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी वीर वरगा
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम

शहीदों के खून की खुशबू पुकारे
कोई आबरू-ए-वतन न उजड़े
शहीदों के खून की खुशबू पुकारे
कोई आबरू-ए-वतन न उजड़े
हदों की हिफाज़त हमारा धर्म है
हदों की हिफाज़त हमारा धर्म है
हिमालय से पत्थर न कोई उखाड़े
ना कोई उखाड़े
ये ही है अरमान फौजी मेरा नाम
ये ही है अरमान फौजी मेरा नाम

फौजी रब दा ऐ दूसरा नाम हे लगे नी मेरे वीर जैसा
फौजी रब दा ऐ दूसरा नाम हे लगे नी मेरे वीर जैसा
वीर जैसा नी मेरे वीर जैसा
फौजी रब दा ऐ दूसरा नाम हे लगे नी मेरे वीर जैसा
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम
वर्दी है भगवान फौजी मेरा नाम

ओ हिंदू सिख ईसाई कोई मुसलमान है
ये बेटे हजारों मगर एक माँ है
हिंदू सिख ईसाई कोई मुसलमान है
ये बेटे हजारों मगर एक माँ है
तिरंगे का आँचल ना उतारे कोई
तिरंगे का आँचल ना उतारे कोई
यही कौम की बंदगी का नशा है
बंदगी का नशा है
बाजू है करपाण फौजी मेरा नाम
बाजू है करपाण फौजी मेरा नाम

कौम खातिर हुआ कुर्बान ये लगे मुझे पीर जैसा
ओ कौम खातिर हुआ कुर्बान ये लगे मुझे पीर जैसा
पीर जैसा ये लगे पीर जैसा
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी वीर वरगा
फौजी रब दा है दूजा नाम हे लगे नी मुझे पीर जैसा
कौम खातिर हुआ कुर्बान ये लगे मुझे पीर जैसा
.........................................................................
Vardi hai bhagwan-Fauji 1976

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Jan 26, 2010

दिल दिया है जान भी देंगे-कर्मा १९८६

सुभाष घई को भी शोमैन कहा जाता है फिल्म जगत में राज कपूर की
भांति क्यूँ कि वे भी भव्य कैनवास प्रस्तुत करते हैं दर्शकों के सम्मुख।
फिल्म करमा उनकी महत्वकांक्षी फिल्म थी जिसमे बड़े बड़े सितारे
मौजूद थे। दिलीप कुमार, नूतन के साथ तीन हीरो और तीन हीरोइनों
के अलावा उस समय का एक उभरता हुआ सितारा खलनायक के रूप
में-अनुपम खेर। सुभाष घई ने फिल्म विधाता(१९८२) की सफलता के
बाद दिलीप कुमार को पुनः लिया अपनी फिल्म के लिए । आइये इस
फिल्म का सबसे चर्चित गीत सुना जाये ।देश भक्ति गीतों में शामिल
हो चुका ये गीत आपने अक्सर आपने चुनाव के समय और छब्बीस
जनवरी, पन्द्रह अगस्त के दिन सुना होगा.

फिल्म: कर्मा
वर्ष: १९८६
गीतकार: आनंद बक्षी
संगीतकार: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गायक: मोहम्मद अज़ीज़, कविता कृष्णमूर्ति
कलाकार: नूतन, दिलीप कुमार



गीत के बोल:

मेरा कर्मा तू मेरा धर्मा तू
तेरा सब कुछ मैं मेरा सब कुछ तू

हर करम अपना करेंगे
हर करम अपना करेंगे
ए वतन तेरे लिए
दिल दिया है जान भी देंगे
ए वतन तेरे लिए
दिल दिया है जान भी देंगे
ए वतन तेरे लिए

हर करम अपना करेंगे
ए वतन तेरे लिए
दिल दिया है जान भी देंगे
ए वतन तेरे लिए

हर करम अपना करेंगे
ए वतन तेरे लिए
दिल दिया है जान भी देंगे
ए वतन तेरे लिए

तू मेरा कर्मा तू मेरा धर्मा तू मेरा अभिमान है
ए वतन महबूब मेरे तुझपे दिल कुर्बान है
हम जियेंगे या मरेंगे ए वतन तेरे लिए
दिल दिया हैं जान भी देंगे

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई हमवतन हमनाम हैं
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई हमवतन हमनाम हैं
जो करे इनको जुदा मज़हब नहीं इल्जाम है
हम जियेंगे और मरेंगे
ए वतन तेरे लिए

दिल दिया है जान भी देंगे
ए वतन तेरे लिए

तेरी गलियों में चलाकर नफरतों की गोलियां
लूटते हैं कुछ लुटेरे दुल्हनों की डोलियाँ
लुट रहा है आप वो अपने घरों को लूट कर
खेलते हैं बेखबर अपने लहू से होलियाँ

हम जियेंगे और मरेंगे
ए वतन तेरे लिए

दिल दिया है जान भी देंगे
ए वतन तेरे लिए
ए वतन तेरे लिए
........................................................
Dil diya hai jaan bhi denge-Karma 1986

Artists: Dilip Kumar, Nutan

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