Showing posts with label Masoom. Show all posts
Showing posts with label Masoom. Show all posts

Aug 6, 2020

छोटा बच्चा जान के-मासूम १९९६

माया नगरी मुंबई को बोला जाता है. बम्बई नाम का
शहर था तो शायद ज्यादा मायावी लगता था. अब ये
कुछ कुछ रहस्यमयी लगने लगा है. इस माया नगरी
में है बॉलीवुड जो शुरू से ही कई रहस्यों को समेटे है.
गीतकार अमित खन्ना ने ये नाम दिया फिल्म उद्योग
को.

बॉलीवुड के दौरों और चलन पर समय समय पर फ़िल्में
बनती रही हैं. कई तो ऐसी बनी हैं कि समीक्षक के
लेख पढ़ने पर पता चला कि ये बॉलीवुड की कहानी है.
वैसे उन ज्ञानी निर्देशकों को फिल्म के टाइटल्स के साथ
ही बतला देना चाहिए कि मजमून क्या है. कई दर्शक तो
बेचारे कन्फ्यूज हो जाते हैं कि फिल्म है या रंग बिरंगी
डाक्यूमेंट्री. कुछ फ़िल्में तो ऐसी लगती हैं मानो उनमें
२-३ फिल्मों की आत्माएं घुस के तांडव मचा रही हों.

छोड़ें ये सब, और सुनते हैं फिल्म मासूम का गीत. ये
उए समय का गीत है जब इसे गाना वाला भी मासूम था.
आदित्य नारायण जो १९८७ को आज ही के दिन पैदा
हुए.

गीत और संगीत दोनों आनंद राज आनंद के हैं.



गीत के बोल:

छोटा बच्चा जान के ना कोई आँख दिखाना रे
डूबी डूबी डब डब डूबी डूबी डब डब
अकल का कच्चा समझ के हमको ना समझाना रे
डूबी डूबी डब डब डूबी डूबी डब डब
भोली सूरत जान के हमसे ना टकराना रे
डूबी डूबी डब डब डूबी डूबी डब डब
.
.
.
………………………………………….
Chhota bachcha jaan ke-Masoom 1996

Artists: Kids

Read more...

Jan 2, 2017

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा-मासूम १९८६

मासूम फिल्म से मासूम सा गीत सुनते हैं. बच्चों के गीतों से
कोई विशेष मतलब निकलने का कोई मतलब नहीं होता. ये
बस यूँ ही और कैसे भी लिखे जाते हैं. बड़ों के लिए बने हुए
गीतों में धोती फाड़ के रुमाल हो सकता है तो बच्चों वाले गीत
में रुमाल फाड़ के धोती बन सकती है.

गुलज़ार का लिखा और आर डी बर्मन द्वारा संगीतबद्ध गीत सुनते
हैं फिल्म मासूम से. वनिता मिश्रा, गुरप्रीत कौर और गौरी बापट
ने इस गीत को गाया है. जुगल हंसराज, उर्मिला मातोंडकर और
तीसरे बच्चे का नाम मुझ मालूम नहीं, परदे पर दिखलाई दे
रहे हैं.





गीत के बोल:

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

घोड़ा पहुंचा चौक में चौक में था नाई
घोड़े जी की नाई ने हज़ामत जो बनाई
चग-बग चग-बग चग-बग चग-बग
घोड़ा पहुंचा चौक में चौक में था नाई
घोड़े जी की नाई ने हज़ामत जो बनाई
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

घोड़ा था घमंडी पहुंचा सब्जी मंडी
सब्जी मंडी बरफ़ पड़ी थी बरफ़ में लग गई ठंडी
चग-बग चग-बग चग-बग चग-बग
घोड़ा था घमंडी पहुंचा सब्जी मंडी
सब्जी मंडी बरफ़ पड़ी थी बरफ़ में लग गई ठंडी
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा

घोड़ा अपना तगड़ा है देखो कितनी चरबी है
चलता है महरौली में पर घोड़ा अपना अरबी है
चग-बग चग-बग चग-बग चग-बग
घोड़ा अपना तगड़ा है देखो कितनी चरबी है
चलता है महरौली में पर घोड़ा अपना अरबी है
बांह छुड़ा के दौड़ा घोड़ा दुम उठा के डौड़ा

लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
...............................................................
Ladki ki kathi-Masoom 1982

Read more...

Aug 9, 2016

हमें उन राहों पर चलना है-मासूम १९६०

सुबीर सेन और आरती मुखर्जी का गाया एक गीत सुनते हैं
जिसमें कोरस का भी गायन है. राजा मेहँदी अली खान के
लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है रॉबिन बैनर्जी ने. सन १९६०
की फिल्म मासूम का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था.
फिल्म में सरोष ईरानी, हनी ईरानी, मनमोहन कृष्ण, मोहन
चोटी, केष्टो मुखर्जी, चमन पुरी जैसे कलाकार हैं.

सत्येन बोस ने इससे पहले सन १९५४ में बच्चों वाली फिल्म
बनायीं थी जागृति जो काफी चर्चित रही और उस फिल्म के
गीत तो आज भी आप सुन सकते हैं.सन१९५४ की ही एक
फिल्म के लिए उन्होंने संगीतकार शैलेश को मौका दिया था
जिन्हें बाद में सवेरा फिल्म का संगीत तैयार करने का भी
अवसर मिला. बोस ने रोबिन बैनर्जी से केवल यही फिल्म
मासूम करवाई. ७० के दशक में बोस की अधिकांश फिल्मों
में लक्ष्मी-प्यारे का संगीत है.

इस गीत में सुबीर सेन का उच्चारण काफी हद तक साफ़ है.
उनसे काफी रिहर्सल कराई होगी संगीत निर्देशक ने इस गीत
के लिए अन्यथा वो ‘दुर मेरी मंज़िल’ और ‘दिल हुआ घायिल’
जैसा कुछ गाते. तब भी ‘इन’ और ‘उन’ शब्दों का मिश्रण
है गीत में.



गीत के बोल:

हमें उन राहों पर चलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

जब तक न लगन हो सीने में
बेकार है ऐसे जीने में
जब तक न लगन हो सीने में
बेकार है ऐसे जीने में
चढ़ना है हमें चंदा की तरह
सूरज की तरह नहीं ढ़लना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम हैं दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

मैं पास रहूँ या दूर रहूँ
ये बात अभी तुम से कह दूँ
मैं पास रहूँ या दूर रहूँ
ये बात अभी तुम से कह दूँ
हँसना ही नहीं फूलों की तरह
दीपक की तरह हमें जलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

आकाश से आती है ये सदा
ग़म आए अगर तो जी न ढला
आकाश से आती है ये सदा
ग़म आए अगर तो जी न ढला
कभी ग़म हैं यहाँ कभी हैं ख़ुशियाँ
हर हाल में हम को पलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
.......................................................................
Hamen un rahon par-Masoom 1960

Honey Irani, Sarosh Irani, Manmohan Krishna

Read more...

Nov 16, 2009

नानी तेरी मोरनी को-मासूम १९६२

नाना नानी के ज़माने का गाना । यूँ कहिये संयुक्त परिवार के
युग का गीत। जब तीन पीढ़ियाँ एक साथ रहा करती थी। बच्चों
वाला ये गीत बेहद लोकप्रिय हुआ था। इसको हेमंत कुमार की पुत्री
रानू मुखर्जी ने गाया है। बोल शैलेन्द्र के हैं और धुन हेमंत कुमार
की। परदे पर बाल कलाकार हैं-हनी ईरानी।



गाने के बोल:

नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए
नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए
बाकी जो बचा था काले चोर ले गए

खाके पीके मोटे होके, चोर बैठे रेल में
चोरों वाला डिब्बा कट कर, पहुँचा सीधे जेल में
खाके पीके मोटे होके, चोर बैठे रेल में
चोरों वाला डिब्बा कट कर, पहुँचा सीधे जेल में

नानी तेरी मोरनी को ...

उन चोरों की खूब खबर ली, मोटे थानेदार ने
मोरों को भी खूब नचाया, जंगल की सरकार ने
उन चोरों की खूब खबर ली, मोटे थानेदार ने
मोरों को भी खूब नचाया, जंगल की सरकार ने

नानी तेरी मोरनी को ...

अच्छी नानी प्यारी नानी, रूसा-रूसी छोड़ दे
जल्दी से एक पैसा दे दे, तू कंजूसी छोड़ दे
अच्छी नानी प्यारी नानी, रूसा-रूसी छोड़ दे
जल्दी से एक पैसा दे दे, तू कंजूसी छोड़ दे

नानी तेरी मोरनी को ...
......................................................
Nani teri morni ko-Masoom 1962

Artist: Honey Irani

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP