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Nov 5, 2019

देखो इधर जनाब-ए-मन कहाँ खो-ज़बरदस्त १९८५

आपको ज़बरदस्त फिल्म ‘ज़बरदस्त’ से पांच ‘ज़बरदस्त’
गीत सुनवा चुके हैं. आइये लगे हाथ छठवां गीत भी सुन
लें. ये किशोर कुमार की आवाज़ वाला एकल गीत है. इस
फिल्म में बहुत से नामचीन सितारे हैं. नासिर हुसैन अपने
अनूठे कथानकों के लिए जाने जाते हैं. देव आनंद का भी
कुछ ऐसा ही हाल है फ़िल्में बनाने के मामले में. नासिर
हुसैन का सफलता अनुपात बहुत ज्यादा है देव आनंद के
मुकाबले.

वैसे आपको बता दें, इस फिल्म के एक-दो गाने बहुत बजे
लेकिन फिल्म कमर्शियली सक्सेसफुल की कैटेगरी में नहीं
आती है. गीत मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे और संगीत दिया
राहुल देव बर्मन ने. मजरूह की लेखनी में चुम्बकीय प्रभाव
ज़बरदस्त है और इस फिल्म के लोकप्रिय गीत उस बात की
ज़बरदस्त पुष्टि करते हैं.



गीत के बोल:

हाँ
देखो इधर जनाब-ए-मन कहाँ खो गये
देखो इधर जनाब-ए-मन कहाँ खो गये
जान लो के आज से मेरे हो गये तुम
जान लो के आज से मेरे हो गये तुम
ये जान भी लो ये मान भी लो
हे ये जान भी लो ये मान भी लो

हो इस तरह न जाइये के ऐ जाने जाँ
इस तरह न जाइये के ऐ जाने जाँ
तुमसा दूसरा मुझे मिलेगा कहाँ से
ज़रा तो रुको रुको सितम न करो
हे हे हे हे हे
ज़रा तो रुको सितम न करो
देखो इधर जनाब-ए-मन कहाँ खो गये
जान लो के आज से मेरे हो गये तुम
ये जान भी लो ये मान भी लो हाँ

हो आरज़ू ये थी के तुमको अपना के हाँ
आरज़ू ये थी के तुमको अपना के
इन लबों को चूमते तुम्हें प्यार करते
मिलो जो मुझे हाँ हाँ तो प्यास बुझे
हे हे हे हे हे
मिलो जो मुझे तो प्यास बुझे

देखो इधर जनाब-ए-मन कहाँ खो गये
जान लो के आज से मेरे हो गये तुम
ये जान भी लो ये मान भी लो
ये जान भी लो ये मान भी लो
…………………………………………….
Dekhi idhar janabe man-Zabardast 1985

Artists: Rajiv Kapoor, Huma Khan, Rati Agnihotri, Rajendra Nath

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Apr 23, 2018

सुनो सितमगर मेरे-ज़बरदस्त १९८५

फिल्म सितमगर के गीत से एक गीत ऐसा याद आया जिसमें
सितमगर शब्द मुखड़े में आता है. ये गीत सन १९८५ की ही
एक फिल्म ज़बरदस्त में है. फिल्म ज़बर दस्त से एक दो
गीत आप सुन चुके हैं पूर्व में.

कहा जाता है संगीतकार सबसे बढ़िया धुन अपने गाने के लिए
रखता है. आज आपको एक गीत सुनवाते हैं जिसे संगीतकार
ने स्वयं गाया है. आशा भोंसले की आवाज़ भी है गीत में अतः
ये एक युगल गीत कहलाया. गीत मजरूह सुल्तानपुरी का है.




गीत के बोल:

अरे सुनो सितमगर ओ मेरे
सुनो ओ दिलवर मेरे
इस महफ़िल में तुम क्या आये
हम जैसों के दिन फिरे
अरे सुनो सितमगर ऐ मेरे ऐ मेरे
सुनो ऐ दिलवर मेरे
इस महफ़िल में तुम क्या आये
हम जैसों के दिन फिरे
...................................................................
Suno sitamgar mere-Zabardast 1985

Artists: Rajeev Kapoor, Rati Agnihotri

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Oct 27, 2011

जब चाहा यारा तुमने-ज़बरदस्त १९८५

आपको फिल्म 'ज़बर दस्त' से तीन गीत सुनवाए जा चुके हैं। फिल्म
ज़बरदस्त बहुसितारा फ्लॉप फिल्म है जो कुछ उम्दा गीतों से सजी
हुयी है। आइये सुनें इस फिल्म का सबसे चर्चित गीत जिसे आपके
कान एक ना एक बार ज़रूर सुन चुके होंगे। ये गीत चित्रहार के
ज़माने में कई बार टी वी पर दिखाई दे जाता था। गीत में बैगपाइपर
की ध्वनि का बढ़िया प्रयोग है। गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ और
किशोर कुमार द्वारा गाया गया है। फिल्म में संगीत पंचम
का है।

श्रेणी बनाने क शौक़ीन इसे बैगपाइपर हिट्स की श्रेणी में रख सकते हैं।
(वो वाला बैगपाइपर नहीं-बोतल में भरे रंगीन पेय के विज्ञापन वाला)
पंचम ने इस वाद्य का बढ़िया प्रयोग फिल्म "हम किसी से कम नहीं" के
गीत में भी किया है और वो गीत भी किशोर कुमार का गाया हुआ है।




गीत के बोल:

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
चलो जी हम बुरे सही, चलो जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं
अरे, कसम से कहना, हमारी सूरत नहीं है प्यारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया

समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
समझ सको तो हमसफ़र, हमें तुम अपना जानो
उधर नहीं इधर चलो, कभी तो कहना मानो
अरे, लिपट के पूछो , के आगे मर्ज़ी है अब हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या हो

जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से ज़िन्दा कर दिया
..............................................
Jab chaha yaara tumne-Zabardast 1985

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Aug 10, 2011

करेगा ज़माना क्या-ज़बरदस्त १९८५

बार्बी डॉल डांस देखिये फिल्म ज़बरदस्त से। पिछले कुछ गीतों में हमने
बात की थी कि रति अग्निहोत्री की लम्बाई ज्यादा है और वे अपने कई
साथी नायकों से लंबी हैं। इस गीत को इस तरह से फिल्माया गया है
कि राजीव कपूर की लम्बाई और उनकी लम्बाई बराबर दिखती है। ये
ज़बरदस्ती उछलो-कूदो नृत्य वाले गीत को गाया है किशोर कुमार ने और
आशा भोंसले ने।

श्रेणी बनाने का शौकीनों के लिए सुझाव-इस गीत को आप डार्लिंग गीत कह सकते
हैं। गीत आनंद बख्शी ने लिखा है और धुन है आर डी बर्मन की।






हो करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
हो करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
तुम हो मेरे, हम हैं तेरे
डार्लिंग, है ना बोलो है ना

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
तुम हो मेरे, हम हैं तेरे
डार्लिंग, है ना बोलो है ना

हो हो हो

हे, मेरा सब कुछ तेरे लिए, तेरा सब कुछ मेरे लिए
बोलो बोलो
मेरा सब कुछ तेरे लिए, तेरा सब कुछ मेरे लिए
आखिर को है
हाँ आखिर को हैं बीवी मियां
डार्लिंग है ना बोलो है ना

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें

आए हुए बड़ी दूर से हैं, हम तो यहाँ मई-जून से हैं
आए हुए बड़ी दूर से हैं, हम तो यहाँ मई-जून से हैं
और आज ही
और आज ही, है वापसी
डार्लिंग है न बोलो है न

हो हो हो हो हो हो हो हो हो
करेगा ज़माना क्या, सच को छुपाना क्या
दुनिया को आओ बतला दें
........................................
Karega zamana kya-Zabardast 1985

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Apr 29, 2010

भूल हो गई जाने दे-ज़बरदस्त १९८५

हिंदी फिल्मों के कुछ फार्मूले समझ के बाहर हैं मसलन जब हीरो
हिरोइन से रूठ के कहीं जाने लगता है तो उसके हाथ में एक छोटा सा
बैग होता है जिसमे १०-२० जोड़ी मोज़े या रुमाल से ज्यादा कुछ नहीं
आ सकता। दूसरी बात वो जंगल या पहाड़ पर ही ज्यादा रूठा करता है।
ऐसी गति से चलता है मानो कोई बस या कार उड़ते हुए पहाड़ पर उसको
लेने आनेवाली हो । २-३ मिनट तक ये ड्रामा चलता है, हिरोइन उसको
मना लेती है और जाने का प्रोग्राम कैंसल । ऐसा संगीतमय ड्रामा नासिर हुसैन
के एक फिल्म -प्यार का मौसम में भी है जिसमे शशि कपूर रूठ के कहीं चले
जा रहे हैं और नायिका आशा पारेख गीत गा के उनको मनाने का यत्न कर रही हैं ।

फिल्म ज़बरदस्त जिसका युगल गीत हम आज सुनेंगे उसमे भी अभिनेत्री
रति अग्निहोत्री नायक राजीव कपूर को मनाने का संगीतमय प्रयत्न करती
नज़र आएँगी। ये फिल्म भी नासिर हुसैन निर्देशित फिल्म है और संगीत
राहुल देव बर्मन का है। पहाड़ी भी कुछ कुछ मिलती जुलती है -वही शायद
प्यार का मौसम वाली। मेरे अनुमान से पूना और मुंबई के बीच की कोई पहाड़ी
होना चाहिए।

गीत की धुन आकर्षक एवं तेज़ है जो आपको बांधे रखेगी। गायक कलाकार हैं
आशा भोंसले और किशोर कुमार।



गीत के बोल:

अरे भूल हो गई जाने दे सजना
मर जाऊंगी, मान जा, मान जा , मान जा

हो ओ ओ भूल हो गई जाने दे सजना
मर जाऊंगी, मान जा, मान जा , मान जा

सजा दे इन आखों को कि ये खता है इनकी
कहे ना पहचाना तुझे
तुझे क्या से क्या समझा कहूं क्या मैं इस दिल को
कैसे नहीं जाना तुझे
मानती हूँ जाने दे सजना
मर जाऊंगी, मान जा, मान जा ना, मान जा

तुझे मैं ना चाहूंगी तो कैसे ना चाहूंगी
मैं तो दीवानी यार की
गिले जो भी हैं दिल के मिटा ले गले मिल के
तुझको कसम है यार की

छोड़ गुस्सा जाने दे सजना
मर जाऊंगी, मान जा, मान जा ना, मान जा

भूल हो गई जाने दे सजना
मर जाऊंगी, मान जा, मान जा ना, मान जा

हा हा ,चलो माफ़ करता हूँ
कहा तो कहा तुमने
आगे ना कहना फिर कभी
चला जाऊँगा वरना कहीं तुमसे इतनी दूर
ढूंढोगी सारी ज़िन्दगी
और फिर पुकारोगी सजना
अरे मर जाऊंगी मान जा, मान जा, मान जा

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Jan 9, 2010

ऐसे ना ठुकराओ-ज़बरदस्त १९८५

जब से संगीत उत्पादक यन्त्र संयंत्र सस्ते और आम आदमी की पहुँच में
आये हैं तबसे हमें बैलगाड़ी, रेलगाड़ी, टेम्पो, रिक्शा, ट्रक, ट्रक्टर-ट्रोली
इत्यादि में गाने बजते मिल जाते हैं। अभी एक सवारी का जिक्र हमने
नहीं किया है वो है 'कार' । आपको कभी कभार ऐसी कारें ज़रूर मिली होंगी
जिसमे से धम धम की ध्वनियाँ निकल रही होती हैं, उसके अलावा कुछ
सुनाई नहीं देता। ऐसा लगता है मानो कोई धौंकनी चल रही हो या कपड़ों
की धुलाई हो रही हो। इन संगीत प्रेमियों को केवल धम धम से मतलब होता
है, गाना चाहे कोई भी हो। खुद से ज्यादा वे दूसरों को सुनाने का प्रयत्न करते हैं।
वैसी ही धम धम की ध्वनि इस गीत में भी है, मगर इसमें आपको बोल भी सुनाई
देंगे। आशा भोंसले की आवाज़ में ये गीत है फिल्म ज़बरदस्त से जो सन १९८५ की
फिल्म है। इस फिल्म में उनके साथ नायक हैं-सनी देवल । इस गीत में राहुल देव बर्मन
ने भी अपनी आवाज़ फिट की है । गीत कर्णप्रिय है और कम सुना हुआ भी।
बांसुरी का उपयुक्त प्रयोग हुआ है इस गीत में।



गीत के बोल:

आ, ऐसे ना ठुकराओ
ऐसे ना, ओ ठुकराओ ए सनम
अब के गए तो फिर ना आयेंगे हम
आ, ऐसे ना ठुकराओ ए सनम
हो, अब के गए तो फिर ना आयेंगे हम
आ.....

आ, कैसे हम तुझसे कहें
अब कोई सपना नहीं
भीगी आँखों में तेरे सिवा
तडपे दिल जिसके लिए
कोई ऐसा दिलवर नहीं
सूनी रातों में तेरे सिवा

हा हा हा, हा हा , हा हा हा हा

हो, ऐसे ना ठुकराओ ए सनम
अब के गए तो फिर ना आयेंगे हम
हा.....

हाँ, हम तो टूटा दिल लिए
ये जलते आंसू पिए
भटकेंगे जाने कहाँ कहाँ
पर इतना तुम भी सुनो
के चाहनेवाला कोई
मिलता है मुश्किल से जाने जां
हा हा हा, हा हा हा

हो, ऐसे ना ठुकराओ ए सनम
अब के गए तो फिर ना आयेंगे हम
हा.....

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