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Feb 28, 2016

दिल का खिलौना हाय टूट गया गूँज उठी शहनाई १९५९

एक उच्च कोटि का दर्द भरा गीत जो किसी भी प्रकार के
विवरण और सन्दर्भों का मोहताज़ नहीं है. फिल्म है १९५९
की गूँज उठी शहनाई. अमिता इसे परदे पर गा रही हैं .



गीत के बोल

टूट गया
टूट गया टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया, हाय
दिल का खिलौना हाय टूट गया

हुआ क्या क़ुसूर ऐसा सैंयाँ हमारा
जाते हुये जो तूने हमें ना पुकारा
उल्फ़त का तार तोड़ा
हमें मझधार छोड़ा
हम तो चले थे ले के तेरा ही सहारा
साथी हमारा हमसे छूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया

दिल का खिलौना हाय टूट गया

कैसी परदेसी तूने प्रीत लगाई
चैन भी खोया हमने, नींद गँवाई
तेरा ऐतबार कर के
हाय इंतज़ार कर के
ख़ुशियों के बदले ग़म की दुनिया बसाई
ज़ालिम ज़माना हमसे रूठ गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया

दिल का दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
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Dil ka khilona haye too gaya-Goonj uthi shehnai 1959

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Nov 2, 2015

हौले-हौले घूँघट पट खोले-गूँज उठी शहनाई १९५९

लौट के बुद्धू घर को आये. ये कहावत सोच समझ कर
बनायीं गयी है. ये क्या सभी कहावतें सोच समझ कर
बनायीं गयी हैं और ऐसी बनाई गयी हैं कि हर युग में
सटीक बैठती हैं. कहावतें समय के बंधनों से मुक्त हैं.

आइये सुनते हैं पुरानी सुपर डुपर हिट गूँज उठी शहनाई
से एक सुमधुर युगल गीत. आज के सारे गीत फेल हैं
ऐसे गीतों के आगे. भरत व्यास के बोल है और संगीत
है वसंत देसाई का.

घरेलू लड़की सी दिखने आली अभिनेत्री अमिता ने ज्यादा
हिंदी फ़िल्में नहीं कीं मगर जितनी भी की हैं उनमें उन्होंने
अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराई है. उन्हें मुख्य नायिका
की भूमिकाएं मिलना बंद हो गयीं बाद में जो समझ के
बाहर है. बॉलीवुड की कई बातें समझ में नहीं आती हैं.



गीत के बोल:

हौले-हौले घूँघट पट खोले
बलमवा बेदर्दी
हौले-हौले
ए माने ना  माने ना ज़ुल्मीं सैंयाँ
पकड़े बैंयाँ  हाय दैया
जिया मोरा डोले
हौले-हौले

भोले-भोले, हाय भोले-भोले
ज़हर काहे घोले नयनवा बेदर्दी
भोले-भोले
अरे देखो जी देखो जी दिल की चोरी
कर के गोरी, ये छोरी
मीठी-मीठी बोलें
भोले-भोले

बेदर्दी  बेदर्दी बेदर्दी
रूप कैसा दिया है तुझे राम ने
चाँद शरमाये गोरी तेरे सामने
किया हमको बदनाम तेरे नाम ने
मेरा दामन क्यों आये अब थामने
डालो ना, डालो ना
जादू का डोरा छलिया छोरा
मन मोरा खाये हिचकोले
हौले-हौले
भोले-भोले ज़हर काहे घोले नयनवा बेदर्दी
भोले-भोले

साजनिया, साजनिया, साजनिया
देखो आँखें मिलाओ देखभाल के
ज़रा समझो इशारे मेरी चाल के
लचकाओ कमर ये सम्भाल के
रख दोगी कलेजा निकाल के
झनन, झनन झाँझर झमके, बिजली चमके,
थम-थम के  भड़के दिल में शोले
भोले-भोले
हौले-हौले घूँघट पट खोले
बलमवा बेदर्दी
हौले-हौले
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Haule hjaule ghoonghat pat khole-Goonj uthi shehnai 1959

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Jul 17, 2011

बहारों थाम लो अब दिल-नमस्ते जी १९६५

जी एस कोहली एक गुणी संगीतकार थे. वे ओ पी नय्यर के सहायक
भी रहे. उनके संगीत में कहीं कहीं ओ पी नय्यर के संगीत की छाप
सुनाई पढ़ती. इस गीत में मगर आप पाएंगे कि शैली कल्याणजी आनंदजी
की शैली के नज़दीक है. घंटियों की टुनटुनाहट के साथ गीत शुरू होता है.

बतौर स्वतंत्र संगीत निर्देशक उन्होंने कई फिल्मों में संगीत दिया. नमस्ते जी
फिल्म भी एक है जिनमें उनके संगीतबद्ध गीत हैं. महमूद और अमिता पर
फिल्माए गए इस युगल गीत को लिखा अनजान ने, गाया है मुकेश और
लता मंगेशकर ने.

नायिका अमिता कुछ अच्छी 'ऐ' ग्रेड फ़िल्में करने के बाद 'बी' ग्रेड फिल्मों
में दिखाई देने लगीं और धीमे धीमे फ़िल्मी दुनिया से गायब सी हो गयीं.

फिल्म नमस्ते जी को भी बी या सी ग्रेड फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म का
ये सबसे लोकप्रिय गीत है जो यहाँ प्रस्तुत है.





गीत के बोल:


बहारों थाम लो अब दिल मेरा महबूब आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल

क़हर अंदाज़ हैं तेरे, क़यामत हैं तेरी बातें
हो ओ ओ ओ
हो मेरी तो जान ले लेंगी ये बातें ये मुलाक़ातें
मुलाक़ातें
सनम शरमाए जब ऐसे मज़ा कुछ और आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल

लबों पर ये हँसी क़ातिल ग़ज़ब जादू निगाहों में
हो ओ ओ ओ
हो क़सम तुझको मोहब्बत की मचल न ऐसे राहों में
ऐसे राहों में
मचल जाता है दिल जब रू-ब-रू दिलदार आता है
हो शरारत कर न नाज़ुक दिल शरम से डूब जाता है

बहारों थाम लो अब दिल
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Baharon tham lo ab dil-Namaste ji 1965

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Nov 16, 2010

आये हैं दूर से-तुमसा नहीं देखा १९५७

फिल्म तुमसा नहीं देखा(१९५७) से एक गीत आप सुन चुके हैं
इस ब्लॉग पर। एक और मीठा गीत सुनवाते हैं आपको आज।
इस युगल गीत में रफ़ी का साथ दे रही हैं आशा भोंसले। शम्मी
कपूर और अमिता पर इसे फिल्माया गया है। प्रेमी अपनी प्रेमिका
इस मिलने दूर से आया है। दूर से आया है तो उसे उम्मीद है उसकी
प्रेमिका उससे लड़िया लड़िया के बातें करेगी। अमिता की छबि
बहुत सौम्य किस्म की बनी हुई थी और इस गीत में भी वे उन
सौम्य सीमाओं ke bheetar ही athkheliyan कर रही हैं ।





गीत के बोल:

आये हैं दूर से, मिलने हुज़ूर से
ऐसे भी चुप न रहिये, कहिये जी कुछ तो कहिये
दिन है के रात है
तुमसे मेहमान का, मुझपे एहसान क्या
लाखों ही जुल्फों वाले, आते हैं घेरा डाले
मेरी क्या बात है

आये हैं दूर से, मिलने हुज़ूर से
ऐसे भी चुप न रहिये,
कहिये जी कुछ तो कहिये
दिन है के रात है

उठ के तो देखिये, कैसी फिजा है
शरमाना छोडिये, ये क्या अदा है
उठ के तो देखिये, कैसी फिजा है
शरमाना छोडिये, ये क्या अदा है
तौबा ये क्या फ़रमाया
मैं तो यूँ ही शरमाया
तौबा ये क्या फ़रमाया
मैं तो यूँ ही शरमाया
मेरी क्या बात है

आये हैं दूर से, मिलने हुज़ूर से
ऐसे भी चुप न रहिये, कहिये जी कुछ तो कहिये
दिन है के रात है

दिखती है रोज़ ही, ऐसी फिजायें
मुखड़े के सामने, काली घटायें

दिखती है रोज़ ही, ऐसी फिजायें
मुखड़े के सामने, काली घटायें
कोई चल जाए जादू, फिर हम पूछेंगे बाबू
कोई चल जाए जादू, फिर हम पूछेंगे बाबू
दिन है के रात है

तुमसे मेहमान का, मुझपे एहसान क्या
लाखों ही जुल्फों वाए, आते हैं घेरा डाले
मेरी क्या बात है

आये हैं दूर से, मिलने हुज़ूर से
ऐसे भी चुप न रहिये, कहिये जी कुछ तो कहिये
दिन है के रात है

तुमसे मेहमान का, मुझपे एहसान क्या
लाखों ही जुल्फों वाले, आते हैं घेरा डाले
मेरी क्या बात है

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Nov 22, 2009

तेरे सुर और मेरे गीत -गूँज उठी शहनाई १९५९

विजय भट्ट ने दो महान फ़िल्में दी हैं बॉलीवुड को। ये हैं- बैजू बावरा
और गूँज उठी शहनाई । उसके पहले राम राज्य उनकी बहुत चर्चित
फ़िल्म रही जो सन १९४३ में आई थी । सिनेमा के माध्यम पर उनकी
पकड़ ज़बरदस्त थी। जिन्होंने फ़िल्म 'हरियाली और रास्ता' देखी है
(मनोज कुमार वाली) वे इस बात से जरूर सहमत होंगे की उनकी
फिल्मों में संगीत पक्ष मजबूत रहा है। चाहे पौराणिक, ऐतिहासिक
फ़िल्में हों या सामाजिक उन्होंने साधिकार अपने कला कौशल को
प्रदर्शित किया है। जिन दो फिल्मों का जिक्र मैंने ऊपर किया है ,
विजय भट्ट उनके निर्माता और निर्देशक भी थे। दोहरी भूमिका
निभाना कोई आसान काम नहीं । कला पक्ष और वाणिज्य दोनों को
साधना बहुत कम हस्तियों को नसीब हुआ है हिन्दी फ़िल्म जगत में।
यश चोपड़ा उनमे से एक हैं।

गूँज उठी शहनाई एक महाकाव्य है जिसमे भारत व्यास के गीत और
वसंत देसाई का संगीत है। इसके गीत सदाबहार और गहरी छाप
छोड़ने वाले हैं। शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला खान की शहनाई की
आवाज़ से से समृद्ध ये फ़िल्म 'क्लासिक' की श्रेणी से भी ऊपर स्थान
रखती है। ये गीत लता मंगेशकर की आवाज़ में है और उनके सर्वश्रेष्ठ
गीतों में से एक है। इस गीत के बोल सरल से हैं और फिल्मांकन भी
इसका सीधा सरल है। सादगी कभी कभी ज्यादा खूबसूरत नज़र आती
है। अभिनेत्री अमिता और राजेंद्र कुमार वो कलाकार हैं जो इसमे आपको
परदे पर दिखाई देंगे।



गाने के बोल:

तेरे सुर और मेरे गीत
दोनों मिलकर बनेगी प्रीत

तेरे सुर और मेरे गीत
दोनों मिलकर बनेगी प्रीत

धड़कन में तू है समाया हुआ
ख्यालों में तू ही तू छाया हुआ
हाँ आ ,धड़कन में तू है समाया हुआ
ख्यालों में तू ही तू छाया हुआ

दुनिया के मेले में लाखों मिले
मगर तू ही तू दिल को भय हुआ

मैं तेरी जोगन तू मेरा मीत,
दोनों मिलकर बनेगी प्रीत

तेरे सुर और मेरे गीत

मुझको अगर भूल जाओगे तुम
मुझसे अगर दूर जाओगे तुम
हाँ आ,मुझको अगर भूल जाओगे तुम
मुझसे अगर दूर जाओगे तुम

मेरी मोहब्बत में तासीर है
मेरी मोहब्बत में तासीर है
तो खिंचके मेरे पास आओगे तुम

देखो हमारी होगी जीत
दोनों मिलकर बनेगी प्रीत

तेरे सुर और मेरे गीत

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