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Sep 21, 2017

तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये-आशा १९८०

नवरात्रि के शुभ अवसर पर सुनते हैं फिल्म आशा से देवी भजन.
इसे नरेन्द्र चंचल और रफ़ी और साथियों ने गाया है.

आनंद बक्षी के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.




गीत के बोल:

साँची जोतों वाली माता
तेरी जयजयकार
तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये
मैं आया  मैं आया शेरा वालिये
ओ जोताँ वालिये पहाड़ा वालिये
ओ मेहराँ वालिये
ओ तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये
मैं आया  मैं आया शेरा वालिये

सारा जग है एक बंजारा
सारा जग है एक बंजारा
सबकी मंज़िल तेरा द्वारा
ऊँचे पर्वत लम्बा रस्ता
ऊँचे पर्वत लम्बा रस्ता
पर मैं रह न पाया शेरा वालिये
तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये
मैं आया  मैं आया शेरा वालिये

सूने मन में जल गई बाती
तेरे पथ में मिल गए साथी
तेरे पथ में मिल गए साथी
मुँह खोलूँ क्या तुझसे माँगूँ
मुँह खोलूँ क्या तुझसे माँगूँ
बिन माँगे सब पाया शेरा वालिये
तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये
मैं आया  मैं आया शेरा वालिये

कौन है राजा कौन भिखारी
कौन है राजा कौन भिखारी
एक बराबर तेरे सारे पुजारी
एक बराबर तेरे सारे पुजारी
तूने सबको दर्शन दे के
तूने सबको दर्शन दे के
अपने गले लगाया शेरा वालिये
तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये
मैं आया  मैं आया शेरा वालिये

ओ प्रेम से बोलो
जय माता दी
ओ सारे बोलो
जय माता दी
ओ आते बोलो
जय माता दी
ओ जाते बोलो
जय माता दी
ओ कष्ट निवारे
जय माता दी
ओ पार उतारे
जय माता दी
ऐसी माँ भोली
जय माता दी
भर दे झोली
जय माता दी
ओ तेरे दर पर
जय माता दी
माँ देगी दर्शन
जय माता दी
ओ जय माता दी
जय माता दी
पहाड़ाँ वाली की जय
वैष्णो देवी की जय
अम्बे रानी की जय
........................................................................
Toone mujhe bulaya sherawaliye-Asha 1980

Artists: Jeetendra

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May 24, 2017

चेत चेत कर चल रे चतुर नर-आशा १९४८

खेमचंद्र प्रकाश के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर का
गाया एक मधुर गीत सुनते हैं. किसी एल मेघानी साहब
ने इसे लिखा है.

यूट्यूब के विवरण-ससुर नर पर ना जाएँ. ये तो अपलोड
करने वाले ने हास्य का पुट दे दिया है.




गीत के बोल:

चेत चेत कर चल रे चतुर नर
चेत चेत कर
चेत चेत कर चल रे चतुर नर
ये मार्ग अनजाना है
क्या जाने
क्या जाने कल फिर किस किस को
कौन देश में जाना है
कौन देश में जाना है
चेत चेत कर चल रे चतुर नर
चेत चेत कर

भूले हैं बस इसी फेर में
आ आ के कितने कितने
पता अभी तक नहीं किसी का
खोए गए सब से जितने
इस चक्कर में आए तो
फिर बच कर कहीं ना जाना है
चेत चेत कर चल रे चतुर नर
चेत चेत कर

अभी सँभल जाओ रुक जाओ
समय आज भी है बाक़ी
कल फिर दूर निकल जाओगे
हाथ रहेगी न बाज़ी
जीते जी इस विघट बाट में
नाहक तू मिट जाना है

चेत चेत कर चल रे चतुर नर
चेत चेत कर
चेत चेत कर चल रे चतुर नर
ये मार्ग अनजाना है
क्या जाने
क्या जाने कल फिर किस किस को
कौन देश में जाना है
कौन देश में जाना है
चेत चेत कर चल रे चतुर नर
चेत चेत कर
…………………………………………
Chet chet kar chal re-Asha 1948

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Jan 22, 2010

शीशा हो या दिल हो-आशा १९८

८० के दशक में जीतेंद्र और रीना रॉय की जोड़ी की कुछ
फ़िल्में आयीं। इनमे आशा और अर्पण प्रमुख हैं। फिल्म
आशा का निर्देशन जय ओमप्रकाश ने किया था जो 'अ'
नाम की फिल्मों का निर्माण करते थे। ये बात और है
उन्होंने अपना दामाद 'र' नाम वाला चुना-राकेश रोशन।
फिल्म आशा सन १९८० की सबसे सफल फिल्मों में थी,
एक ऐसी फिल्म जिसको बॉक्स ऑफिस की भाषा में
ब्लाक-बस्टर कहा जाता है। फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत
आपके लिए पेश है जो लता मंगेशकर का गाया हुआ है।
रीना रॉय पर फिल्माए गए इस गीत के गीतकार है आनंद बक्षी
और संगीतकार हैं लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल । साप्ताहिक कार्यक्रम
बिनाका गीतमाला में ये गीत तीसरे नंबर पर आया। उस साल
चोटी के तीन स्थानों पर लक्ष्मी कान्त प्यारेलाल के गीत ही
विराजे।



गीत के बोल:

हो, हो , ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
शीशा हो या दिल हो
शीशा हो या दिल हो
आखिर टूट जाता है
टूट जाता है
टूट जाता है
टूट जाता है

लब तक आते आते हाथों से
सागर छूट जाता है
छूट जाता है
छूट जाता है
छूट जाता है

शीशा हो या दिल हो
आखिर टूट जाता है

हो हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
काफी बस अरमान नहीं
कुछ मिलना आसान नहीं
दुनिया की मजबूरी है
फिर तकदीर ज़रूरी है
ये जो दुश्मन है ऐसे
दोनों राज़ी हो कैसे
एक को मनाओ तो दूजा रूठ जाता है
रूठ जाता है
रूठ जाता है

शीशा हो या दिल हो
आखिर टूट जाता है

बैठे थे किनारे पे
मौजों के इशारे पे
बैठे थे किनारे पे
मौजों के इशारे पे
हम खेलें तूफानों से
इस दिल के अरमानों से
हमको यह मालूम ना था
कोई साथ नहीं देता
कोई साथ नहीं देता
माझी छोड़ जाता है
साहिल छूट जाता है
छूट जाता है
छूट जाता है

शीशा हो या दिल हो
शीशा हो या दिल हो
आखिर टूट जाता है
टूट जाता है
टूट जाता है
टूट जाता है

शीशा हो या दिल हो

दुनिया एक तमाशा है
आशा और निराशा है
थोड़े फूल है कांटे है
जो तकदीर ने बांटे हैं
अपना अपना हिस्सा है
अपना अपना किस्सा है
कोई लुट जाता है
कोई लूट जाता है
लूट जाता है
लूट जाता है

शीशा हो या दिल हो
आखिर टूट जाता है
टूट जाता है
टूट जाता है
टूट जाता है
लब तक आते आते हाथों से
सागर, छूट जाता है
छूट जाता है
छूट जाता है

शीशा हो या दिल हो
.................................................................
Sheesha ho ya dil ho-Asha 1980

Artist-Reena Roy

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Dec 19, 2009

ज़रा रुक रुक के-आशा १९५७

वैजयंती माला का नृत्य फिर से एक बार एक श्वेत श्याम के
युग की फिल्म से। फिल्म का नाम आशा है जो सन १९५७ में
आई थि। इस फिल्म का एक गीत आपको ज़रूर याद होगा-
ईना मीना डीका जो किशोर ना गाया है। फिल्म के सभी गीत सुनने
लायक हैं। लता मंगेशकर का ये गीत कम सुना गया गीत है इसलिए
इसको पहले शामिल किया गया है ब्लॉग पर। इस गीत को देख के
मेरा भी नाचने का मन करने लगता है ;)



गीत के बोल:

ज़रा रुक रुक के ज़रा थम थम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के

ज़रा रुक रुक के ओ ज़रा थम थम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के

मेरी अंखियों में धार है काजल की
धार है काजल की
मेरी जुल्फों में लहर है बादल की
धार काजल की

मेरी पायल में सुर हैं सरगम के
मेरी पायल में सुर हैं सरगम के

ओ ज़रा रुक रुक के ओ ज़रा थम थम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के

ओ ज़रा रुक रुक के ओ ज़रा थम थम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के

मेरे दिल में लगन जब तेरी है
मेरे दिल में
मेरे दिल में लगन जब तेरी है
फिर गम क्या जो रात अँधेरी है
मेरी बिंदिया,
ओ मेरी बिंदिया तो सैयां चम् चम् चमके
मैं तो द्वार चली सखी बालम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के

ओ ज़रा रुक रुक के ओ ज़रा थम थम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के

मैंने देखी है झलक एक, साजन की
एक, साजन की
अब प्यास बुझी मेरी अँखियाँ की
मेरी अँखियाँ की

जली ज्योत ख़ुशी की गए दिन गम के
जली ज्योत ख़ुशी की गए दिन गम के

ओ ज़रा रुक रुक के ओ ज़रा थम थम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के
मैं तो द्वार चली सखी बालम के

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