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Jan 2, 2020

तू शैतानों का सरदार है-बारूद १९७६

बाल गीतों में अगला पेश है फिल्म बारूद से. वो
गीत जिनका सम्बन्ध बच्चों से होता है उन्हें हम
बाल गीत कहते हैं.

फिल्म बारूद के लिए इस गीत को आनंद बक्षी ने
लिखा है. मुकेश और शिवांगी कोल्हापुरे की आवाजें
हैं, एस डी बर्मन का संगीत.



गीत के बोल:

तू शैतानों का सरदार है
सच है
हरदम लड़ने को तैयार है
सच है
ओ तेरे हाथों मेरा जीना दुश्वार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
हो डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
शैतानों का सरदार है
सच है
हरदम लड़ने को तैयार है
सच है
ओ तेरे हाथों मेरा जीना दुश्वार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
हो डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है

मार के ठोकर मेज का कोना तोड़ दिया है
मेरा तो हर सपन सलोना तोड़ दिया है
मार के ठोकर मेज का कोना तोड़ दिया है
मेरा तो हर सपन सलोना तोड़ दिया है
और अपना भी हर एक खिलौना तोड़ दिया है
और अब जाने क्या तोड़े कोई एतबार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
हो डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है

सोचा था तू मेरे कितने काम करेगा
पढ़ लिख कर दुनिया में रोशन नाम करेगा
सोचा था तू मेरे कितने काम करेगा
पढ़ लिख कर दुनिया में रोशन नाम करेगा
तू तो मेरा नाम भी बदनाम करेगा
तुझको समझाने की हर कोशिश बेकार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
ओ डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है

क्या जंगल का राजा कभी मोर बनेगा
शेर का बेटा क्या इतना कमज़ोर बनेगा
अरे क्या जंगल का राजा कभी मोर बनेगा
शेर का बेटा क्या इतना कमज़ोर बनेगा
मैं सिपाही बना तू शायद चोर बनेगा
क्या कहूँ तू फूल है या काँटों का हार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
डैडी फिर भी तुमको मुझसे प्यार है
…………………………………………………
Too shaitanon ka sardar hai-Barood 1976

Artists: Shriram Lagoo, Master Raju

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Jan 9, 2019

अटकन बटकन दही चटोकन-बारूद १९६०

बच्चों पर फिल्माए गीत मासूम से सुनाई देते हैं. इनके
निर्माण के समय विशेष ध्यान रखा जाता है. इन्हें सुन
कर पकी उम्र वालों को भी बचपन याद आ जाता है.

फिल्म बारूद में एक और बच्चा गीत है. इसमें जो छोटा
बच्चा है वो हैं हनी ईरानी. बच्चा स्मार्ट है और वो बड़ी
चीज़ों की ही मांग करता है. गर गीत में चौथा अंतरा
होता और उसमें पूछा जाता-गिलहरी लोगे या डायनोसार
वो डायनोसार का ही नाम लेता.

हसरत जयपुरी के बोल हैं और खय्याम का संगीत. इसे
लाता मंगेशकर ने गाया है और गाने में हनी ईरानी की
आवाज़ भी है.



गीत के बोल:

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

चंदा की गेंद तुझे ला दूंगी मुन्ना
ला दूंगी मुन्ना
बिजली का बल्ला मंगा दूंगी मुन्ना
मंगा दूंगी मुन्ना
मुन्ना मेरा ले ले लेगा
फिर तो घर में खेलेगा
फिर तो घर में खेलगा
गेंद लोगे या बल्ला
बल्ला
जुग जुग जियो मेरे लल्ला

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई

बादल का हाथी हवाओं का घोड़ा
हवाओं का घोड़ा
बैठेगा मुन्ना लगायेगा कोड़ा
लगायेगा कोड़ा
हाथी फिर तो झूमेगा
देश देश में घूमेगा
देश देश में घूमेगा

घोड़ा लोगे या हाथी
हाथी
मैं मुन्ने की साथी

अटकन बटकन दही चटोकन
राजा गये दिल्ली
सात कटोरी लाये
एक कटोरी टूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
मुन्ने का दिल लूट गई
…………………………………………
Atkan batkan dahi chatokan-Barood 1960

Artists: Kumkum, Sheikh Mukhta, Honey Irani

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Jan 28, 2017

मतलब जो समझे-बारूद १९७६

जनता मस्का लगाने में कितनी बारूद खर्च करती है.
मस्का लगाना भी एक कला है. मस्का लगाने में
अगर कुछ फायदा हो तो ठीक है अन्यथा आप
बेवकूफ ही साबित होते हैं अंत में. मस्का लगा लगा
के कितनों की रोज़ी रोटी चलती है, ये नेता और
अभिनेता से जुड़े लोगों के अलावा कौन बेहतर समझ
सकता है.

एक जगह लेख का शीर्षक था-ओरिजनल चोकलेटी
हीरो के नाम में ८० के दशक के उत्तराध में चर्चा
में आये एक नायक का नाम मिला. खैर छोडिये
हम तो उससे भी ज्यादा चर्चित रहे चोकलेटी हीरो
का एक गीत सुनते हैं आज फिल्म बारूद से. किशोर
का गाया गीत है ये जिसे आनंद बक्षी ने लिखा है
और इसकी धुन बनाई है एस डी बर्मन ने.



गीत के बोल:

बड़ा ही खूबसूरत इस जगह का हर नज़ारा है
हे  मगर फिर भी किसी का नाम लेकर दिल पुकारा है

मतलब जो समझे मेरे संदेश का 
मतलब जो समझे
मतलब जो समझे मेरे संदेश का
इस देश में है कोई क्या मेरे देश का
मतलब समझे जो  मेरे संदेश का

ये चेहरे  ये आँखें
ये चेहरे  ये आँखें
बदले लिबास रंग रूप तो वो ही है
यादों की छाव धूप तो वो ही है
बदले लिबास रंग रूप तो वो ही है
यादों की छाव धूप तो वो ही है
क्या फायदा 
क्या फायदा फिर इस भेष का
इस देश में है कोई क्या मेरे देश का
मतलब समझे जो  मेरे संदेश का

वो माटी  वो पानी
वो माटी  वो पानी
आ मिल के फूलों की बातें करेंगे
सावन के झूलों की बातें करेंगे
आ मिल के फूलों की बातें करेंगे
सावन के झूलों की बातें करेंगे
मिल के सहें 
मिल के सहें ये ग़म परदेस का
इस देश में है कोई क्या मेरे देश का
मतलब समझे जो  मेरे संदेश का

मतलब जो समझे मेरे संदेश का
इस देश में है कोई क्या मेरे देश का
मतलब समझे जो  मेरे संदेश का
………………………………………………
Matlab jo samjhe-Barood 1976

Artists: Rishi Kapoor, Shoma Anand

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Aug 26, 2016

समुन्दर समुन्दर-बारूद १९७६

इन्टेरेक्टिव गीत बहुतेरे हैं फिल्म संगीत के खजाने में. ऐसे
गीत जिसमें गायक गायिका संवाद भी बोला करते हैं. प्रस्तुत
गीत में “यहाँ तक” शब्दों का प्रयोग है. प्रश्नोत्तर जैसा गीत है
जिसमें नायिका को उत्तर का इंतज़ार है. शोमा आनंद नायिका
हैं इस गीत में जिन्होंने अभिनय में झंडे नहीं गाडे मगर इस
गीत में वे अपने अनुभव के आधार और निर्देशक के निर्देशों
पर जितना भी कर पा रही हैं वो सराहनीय है. गीत आकर्षक
बन पड़ा है.

कैद नायिका युक्ति ढूंढ रही है चंगुल से छूटने की. गीत के
अंत तक आपको समझ आ जायेगा वो कहाँ तक कामयाब हुई.

गीत आनंद बक्षी ने लिखा है और संगीत है एस डी बर्मन का.

इस गीत को विशेष धन्यवाद है उसके पीछे कुछ पुरानी यादें
हैं. फिल्म शोर के एक गीत में हमने समझा-मोजों की रवानी.
अब मोज़े और रवानी का संगम हमारी समझ नहीं आया था.
इस गीत के आने के बाद हमें आसानी से समझ आया-मोजों
की चादर. सूखते मोजों की कतार. उर्दू भाषा के जानकार जब
मिले तब जा कर फंडा क्लीयर हुआ और ‘मौजों’ का सही अर्थ
समझ आया.



गीत के बोल:

समुन्दर समुन्दर यहाँ से वहाँ तक
ये मौजों की चादर बिछी आस्माँ तक
मेरे मेहरबाँ मेरी हद है कहाँ तक
यहाँ तक यहाँ तक यहाँ तक

समुन्दर समुन्दर यहाँ से वहाँ तक
ये मौजों की चादर बिछी आस्माँ तक
मेरे मेहरबाँ मेरी हद है कहाँ तक
यहाँ तक तो यहाँ तक अच्छा यहाँ तक

मैं करती हूँ वादा उठाती हूँ क़समें
ये बुलबुल रहेगी सदा तेरे बस में
मैं करती हूँ वादा उठाती हूँ क़समें
ये बुलबुल रहेगी सदा तेरे बस में
मुझे क़ैद करते हो क्यों इस तपस में
मैं उड़कर भी जाऊँगी आख़िर कहाँ तक
ये मौजों की चादर बिछी आस्माँ तक

मेरे मेहरबाँ मेरी हद है कहाँ तक
यहाँ तक बोलो यहाँ तक यहाँ तक

मोहब्बत से ये कह रही है जवानी
सितम हो चुके अब करो मेहरबानी
मोहब्बत से ये कह रही है जवानी
सितम हो चुके अब करो मेहरबानी
किसी प्यार की कोई छेड़ो कहानी
चली आई है बात दिल की ज़ुबाँ तक
ये मौजों की चादर बिछी आस्मां तक

मेरे मेहरबां मेरी हद है कहाँ तक
यहाँ तक यहाँ तक यहाँ तक

समुन्दर समुन्दर यहाँ से वहाँ तक
ये मौजों की चादर बिछी आस्माँ तक
मेरे मेहरबाँ मेरी हद है कहाँ तक
अच्छा यहाँ तक यहाँ तक यहाँ तक
...............................................................
Samundar samundar-Barood 1976

Artists: Shoma Anand, Rishi Kapoor

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Oct 23, 2015

तेरी दुनिया में नहीं कोई-बारूद १९६०

गूगल के हाल ही में मिले प्रेम पत्र से हम इतने अभिभूत हैं कि
ब्लॉग लिखने की इच्छा ही खत्म हो गयी है. एडसेंस अपना अपार
प्रेम प्रदर्शित करता रहा है समय समय पर.

इस  बार जो प्रशस्ति प्रदान की गयी है वो है- डिसेप्टिव साईट
नेविगेशन जिसका आशय समझ पाना टेढ़ी खीर है. मेरे ख्याल
से इसे समझने से अच्छा है कि चवन्नी-अठन्नी के मोह से
छुटकारा पा लिया जाए. इससे ज्यादा धन तो मंदिर के बाहर
कटोरा लेकर खड़े होने पर प्राप्त हो जाता है. उसमें नेट पैक की
ज़रूरत नहीं पढ़ती, आँखें नहीं फोडना पढ़ती और न ही कम्प्युटर
वगैरह काम आता है. केवल लयबद्ध तरीके से बक बक करो
और इनाम पाओ.

आज आपके लिए एक गीत पेश है फिल्म बारूद से जो सन
१९६० की फिल्म है.





गीत के बोल:

तेरी दुनिया में नहीं कोई हमारा अपना
बेसहारों को ज़रा दे दे सहारा अपना,
दे दे सहारा अपना
तेरी दुनिया में नहीं कोई हमारा अपना
बेसहारों को ज़रा दे दे सहारा अपना,
दे दे सहारा अपना

दिल के मंज़र में निगाहों में उजाले हैं तेरे
तेरी गोदी के ये बच्चे हैं जो पाले हैं तेरे
तू ही हिम्मत दे चाहने वाले हैं तेरे
तू ही अपने ले हमें गाते हैं तेरी रचना
बेसहारों को ज़रा दे दे सहारा अपना,
दे दे सहारा अपना

रोज लेते हैं तेरा नाम लिए जाते हैं
प्यास लगती है तो आंसू ही पिए जाते हैं
हम बुरे ही सही लेकिन तेरे कहलाते हैं
तू दया की है नदी तू है किनारा अपना
बेसहारों को ज़रा दे दे सहारा अपना,
दे दे सहारा अपना

रूप लाखों हैं तेरे तू कोई मजबूर नहीं
कोई ज़र्रा नहीं जिसमें के तेरा नूर नहीं
अपने बन्दों से किसी हाल में तू दूर नहीं
तू दूर नहीं
तूने हर काम जो बिगाड़ा वो संवारा अपना
बेसहारों को ज़रा दे दे सहारा अपना,
दे दे सहारा अपना

तेरी दुनिया में नहीं कोई हमारा अपना
बेसहारों को ज़रा दे दे सहारा अपना,
दे दे सहारा अपना
...............................................................
Teri duniya mein nahin koi-Barood 1960

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Nov 29, 2010

रंग रंगीला सांवरा -बारूद १९६०

हमने बात की थी ख़य्याम के पंजाबी स्वाद वाले हिंदी गीतों
की। आइये सुना जाए एक गीत फिल्म बारूद से जो कि सन
१९६० की फिल्म है। अगर आप इस गीत में संजीव कुमार जैसे
दिख रहे कलाकार को पहचान जाएँ तो अपने आप को पक्का
फिल्म प्रेमी समझिये। परदे पर गीत गा रही हैं अभिनेत्री कुमकुम
जिनकी स्क्रीन प्रेजेंस ज़बरदस्त हुआ करती थी और शायद
ये बात उनकी समकालीन नायिकाओं के लिए इर्ष्या का विषय
हो । उनपर फिल्माए गए गीत फिल्म की मुख्य नायिका वाले
गीत से तकरीबन हमेशा ही बेहतर नज़र आते। नारी सुलभ
अदाओं से भरपूर ये गीत रोचक है ।

सिनेमा हाल का पर्दा जंगी आकार का हुआ करता है और उस पर
नायक नायिका का आकार भी भीमकाय दिखा करता है। जब काया
बड़ी दिखेगी तो हंसी और आंसू भी बड़े दिखाई देंगे। शायद यही वजह
हो सिनेमा हॉल में हंसी का बगीचा पैदा होने और आंसुओं के तालाब
भरने के।

जिनको गीतों की श्रेणियां बनाने का शौक है उनके लिए सुझाव-
इस गीत को आप 'मटका' गीत की श्रेणी में रख सकते हैं। गीत
में १००-५० तो दिखाई दे ही रहे हैं ना।

गीत गाया है लता मंगेशकर और साथी कलाकारों ने। परदे पर
महिला मंडल के बीच आपको अभिनेत्री टुनटुन भी नज़र आ जाएँगी।
गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने और तर्ज़ बनाई है ख़य्याम ने।



गीत के बोल:

रंग रंगीला सांवरा
रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो

रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए

नीर भरन को जब जब जाऊं
ताके चन्द्र चकोर
अररारारा ताके चन्द्र चकोर
आते जाते रोक ले रास्ता
ना माने चितचोर
अररारारा ना माने चितचोर

धागा हो तो तोर भी डालूँ
धागा हो तो तोर भी डालूँ
बीच पे किसका जोर
ननदिया छेड़े बीच बाज़ार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो

रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए

नटखट मोहन बाज़ ना आया
दीनी गागर फोड़
अररारारा दीनी गागर फोड़

फूल से नाज़ुक नरम कलाई
जालिम ने दी मोड़
अररारारा जालिम ने दी मोड़

फँस गई मोरी जान गज़ब में
फँस गई मोरी जान गज़ब में
मैं भागी चुनरी छोड़
ननदिया छेड़े बीच बाज़ार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो

रंग रंगीला संवारा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए
..................................................................
Rang rangeela sanwra-Barood 1960

Artist: Kumkum

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Feb 23, 2010

दिल काँटों में उलझाया है-बारूद १९७६

कहा जाता है सचिन देव बर्मन की जवानी ४० की उम्र के बाद
शुरू हुई। इसका अभिप्राय अन्यथा ना ले लें। जवानी से मतलब
बतौर संगीतकार उनकी पारी ४० की उम्र के आसपास शुरू हुई। जब
अक्सर जनता की बैटरी ४० आते आते चुकने लगती है तब उसकी
क्रियाशीलता भी थोड़ी मंद पड़ने लगती है, उस समय अगर किसी
व्यक्ति की प्रतिभा उफान पर आये तो अचम्भा अवश्य होता है। हम
यहाँ साहित्यकारों की बात नहीं कर रहे हैं जो अधिकांश डुकरियाने या
सठियाने के बाद ही कालजयी कृतियों की रचना करते हैं।

सचिन देव बर्मन के बारे में किस्सा ही अलग है। बतौर गायक उन्होंने
अपनी छाप बहुत पहले छोड़ना शुरू कर दिया था। उल्लेखनीय बात ये है की
वे उन चुनिन्दा शख्सियत में हैं जो अपने जीवन के अंतिम समय तक
शीर्ष पर बने रहे। ७० के दशक में वे संगीत के मामले में अपने पुत्र को
टक्कर सी देते प्रतीत होते थे। जहाँ राहुल देव बर्मन की ४-५ फ़िल्में आया
करती वहीँ सचिन देव बर्मन १ ही फिल्म के संगीत से छा जाया करते।
ये परस पत्थर वाला स्पर्श का अनुभव राहुल देव बर्मन के संगीत में नहीं
महसूस हो पाया। हालाँकि पंचम स्वयं एक गुणी एवं प्रगतिशील संगीतकार
थे मगर किस्मत शायद उनसे हमेशा रूठी रही। उनको अपने पिता की तरह
लगातार चर्चा में बने रहने का सौभाग्य नहीं मिला।

चलिए इस चर्चा को यहीं रोकते हुए गीत के बारे में कुछ कहा जाए। कुछ ही
गीत फिल्मों में ऐसे मिलेंगे आपको जिसमे हीरो हिरोइन दोनों के गाल लाल
सेब की तरह सुर्ख दिखाई दें। ऋषि कपूर और शोमा आनंद इस गीत में आपको
लाल लाल दिखाई देंगे। हवा में कलाबाजी खाते हुए शोमा आनंद एक गीत गा
रही हैं। वे शायद अपने पूरे कैरियर में इतनी सुन्दर और किसी गीत में नहीं
दिखाई दी होंगी, ये मेरा अनुमान है। जनता की राय भिन्न हो सकती है इस
मामले में। बारूद सचिन देव बर्मन की अंतिम फिल्मों में से एक है। गीत
लिखा है आनंद बक्षी ने और आवाज़ है लता मंगेशकर की।



गीत के बोल:

दिल काँटों में उलझाया है
की एक दुश्मन पे प्यार आया है

दिल काँटों में उलझाया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है

शोला शबनम में लहराया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है

दिल काँटों में

जादू सा तन में लगा है
मौसम बदलने लगा है
जादू सा तन में लगा है
मौसम बदलने लगा है
लगता है मेरे सीने से
दिल बहार निकलने लगा है

शीशा पत्थर से टकराया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है

दिल काँटों में उलझाया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है

दिल काँटों में

ना पास आने दिया है
ना दूर होने दिया है
ना पास आने दिया है
ना दूर होने दिया है
ना होंठों को हंसने दिया है
ना आँखों को रोने दिया है

बड़ा ज़ालिम ने तड़पाया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है

दिल काँटों में उलझाया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है

दिल काँटों में

ऐसा सितमगर कैसे
सैयां बना रे ना जाने
जब तक हो सका ये हमसे
हम रूठे रहे नहीं माने

यही गुस्सा ये रंग लाया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है

दिल काँटों में उलझाया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है
शोला शबनम में लहराया है
कि एक दुश्मन पे प्यार आया है

दिल काँटों में

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