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Aug 8, 2015

आ जा अब तो आ जा-अनारकली १९५३

फिल्म अनारकली का एक एक गीत अनूठा है. इस फिल्म से आज
आपको एक उम्दा किस्म का दर्दीला गीत सुनवाते हैं. सी रामचंद्र ने
शायद इस फिल्म का संगीत कम्पोज करते समय नहीं सोचा होगा कि
ये ज़बरदस्त हिट और इतिहास में अहम स्थान रखने वाला एलबम
साबित होगा.

फिल्म के संगीत की लोकप्रियता से सभी को फायदा ज़रूर हुआ होगा,
चाहे गायक गायिका हों, गीतकार हो, या फिर संगीत का एल पी जारी
करने वाली कंपनी. अनारकली के साथ मुग़ल-ए-आज़म जैसी पॉपुलरिटी
और हाईप नहीं जुड़े हुए थे लेकिन वो अपना स्थान बनाने में सफल
हो गयी. गीत अभिनेत्री बीना रॉय पर फिल्माया गया है.

ये संयोग ही है कि वर्षों पहले मैंने एक बच्चे को लगभग इसी तर्ज़ पर
रोते सुना था. या तो उसे बच्चे ने रोने का इनोवेटिव तरीका गाना सुन
के सीखा था या वो जन्मजात प्रतिभाशाली था. वैसे उसके अलावा कभी
कभी वो बेसुरा प्रलाप भी करता था जिसमें अधिकतर “भाँ भाँ “ की
ध्वनि सुनाई देती थी. मेरे लिए एक उदाहरण जैसा था-संगीत हमारे
जीवन से किस हद तक जुडा है.





गीत के बोल:

आ जा अब तो आ जा
मेरी क़िस्मत के ख़रीदार
अब तो आ जा
नीलाम हो रही है
मेरी चाहत सर-ए-बाज़ार
अब तो आ जा

आ जा अब तो आ जा
मेरी क़िस्मत के ख़रीदार
अब तो आ जा

सब ने लगाई बोली, ललचाई हर नज़र
मैं तेरी हो चुकी हूँ दुनिया है बेख़बर
ज़ालिम बड़े भोले हैं, मेरे ये तलबगार
अब तो आ जा

हसरत भरी जवानी, ये हुस्न ये शबाब
रंगीन दिल की महफ़िल मेरे हसीन ख़्वाब
गोया कि मेरी दुनिया लुटने को है तैयार
अब तो आ जा

आ जा अब तो आ जा
मेरी क़िस्मत के ख़रीदार
अब तो आ जा
नीलाम हो रही है
मेरी चाहत सर-ए-बाज़ार
अब तो आ जा
…………………………………………………
Aa ja ab to aa ja-Anarkali 1953

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Aug 4, 2011

ओ मोरे सजना-समुन्दर १९५७

फिल्म समुन्दर से एक शानदार गीत आपको सुनवाया था पहले. अब
सुनते हैं फिल्म से एक कम सुना हुआ गीत. गीत ये भी कर्णप्रिय है
मगर ज्यादा सुना गया केवल मदन मोहन भक्तों द्वारा.

गीत फिल्माया गया है बीना रॉय पर. फिल्म में उनके साथ प्रेमनाथ
नायक हैं जिनकी फिल्म में दोहरी भूमिका है. राजेंद्र कृष्ण ने गीत लिखा
है और इसे गा रही हैं लता मंगेशकर.






गीत के बोल:

ओ मोरे सजना
ढूँढूँ कहाँ तेरा निशाँ
तुझको पुकारे मेरे दिल का जहाँ

आ जा कहीं से आ जा दिल का करार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के
आ जा कहीं से आ जा दिल का करार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के

आ जा कहीं से आ जा

ये हवायें भीगी भीगी ये हसीं हसीं नज़ारे
मेरे साथ कर रहे हैं तेरा इंतज़ार प्यारे
तेरा इंतज़ार प्यारे
बस एक झलक दिखा दे आँखों में प्यार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के

आ जा कहीं से आ जा

कहती है आरजू ये आ जा किसी बहाने
कहती है आरजू ये आ जा किसी बहाने
दिल ही में रह न जाएँ कहीं प्यार के फ़साने
कहीं प्यार के फ़साने
सूने चमन में आ जा फिर से बहार ले के
बैठे हुये हैं कब से तेरा इंतज़ार ले के

आ जा कहीं से आ जा
.........................
O more sajna-Samundar 1957

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Jul 13, 2011

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ-घूंघट १९६०

सन १९४६ की घूंघट से एक गीत सुना आपने, अब सुनवाते हैं
सन १९६० की घूंघट फिल्म से. पिछला गीत रफ़ी का युगल गीत
था. इसमें वे अकेले ही गा रहे हैं. शकील बदायुनी के बोलों पर
संगीतकार रवि ने एक आकर्षक धुन बनायीं है. गीत में बीना राय
दिखाई देंगी आपको परेशां सी. थोड़ी देर के बाद प्रदीप कुमार भी
दिखलाई देने लगते हैं. वो भी कुछ परेशां से हैं . गीत पार्श्व में
बज रहा है. धीरे धीरे तीसरा चरित्र भी परदे पर आता है-वो हैं
नायिका आशा पारेख.





गीत के बोल:


हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
पास रह कर भी हैं कितनी दूरियाँ, दूरियाँ

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ

कुछ अँधेरे में नज़र आता नहीं
कोई तारा राह दिखलाता नहीं
जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ
जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ, हाय

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ

शमा के अंजाम की किसको ख़बर
ख़त्म होगी या जलेगी रात भर
शमा के अंजाम की किसको ख़बर
ख़त्म होगी या जलेगी रात भर
जाने ये शोला बनेगी या धुआँ
जाने ये शोला बनेगी या धुआँ, हाय

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
पास रह कर भी हैं कितनी दूरियाँ, दूरियाँ

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
.............................................
Haye re insaan ki majbooriyan-Ghoonghat 1960

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Nov 28, 2009

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए-समुन्दर १९५७

मदन मोहन के बनाये और लता के गाये गीतों की चर्चा सबसे
ज्यादा हुई मगर मदन मोहन को और उनके वंशजों को हमेशा
शिकायत रही कि मदन मोहन को वो सम्मान नहीं मिला जिसके
वो हकदार थे। व्यावसायिक जगत में "क्लास" और "मास" दोनों
का ध्यान रखना पड़ता है। गीत ऐसे हों जो कठिन रागों पर बने होने
के बावजूद गुनगुनाये जा सकें। जब जब मदन मोहन ने ऐसे गीत
बनाये वो सब लोकप्रिय हुए। आज एक ऐसे गीत का जिक्र होगा जो कि
मधुर गीत है, मगर आम आदमी इसको आसानी से गुनगुना नहीं सकता।
इसका आनंद केवल सुनकर उठाया जा सकता है। वैसे इस गीत को मैं
आसानी से गुनगुना लेता हूँ क्यूंकि इसे इतनी बार सुन लिया है कि याद
हो चुका है । फ़िल्म वाला गीत सी डी, केसेट में उपलब्ध गीत से थोड़ा अलग है।
इस फ़िल्म में प्रेमनाथ और बीना राय प्रमुख कलाकार हैं और ये गीत बीना राय
पर फिल्माया गया है। दर्द वाला आवश्यक तत्त्व-वायलिन इस गीत में है। ये
एक टॉप क्लास गीत है इसमे संदेह की रत्ती भर गुंजाईश नहीं। राजेंद्र कृष्ण ने
भी तबियत से इसे लिखा है ।



गीत के बोल:

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए
सजनवा हो, बलमवा हो

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए
सजनवा हो, बलमवा हो

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए

लहरें किनारे से बिछड़ गयीं ऐसे
लहरें किनारे से बिछड़ गयीं ऐसे
नज़रों से दूर तुम हो गए पिया जैसे
हो गए पिया जैसे

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए
सजनवा हो, बलमवा हो

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए
पतझड आई, छाई उदासी
प्रीत कमल मुरझाये
पास नहीं जब तुम ही बालम मन कैसे मुस्काए
मन कैसे मुस्काए

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए
सजनवा हो, बलमवा हो

आऊँ तो आऊं पिया कैसे मैं आऊं
आऊँ तो आऊं पिया कैसे मैं आऊं
तेरे मिलन की राह न पाऊँ
राह न पाऊँ

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए
सजनवा हो, बलमवा हो

चैन नहीं आए कहाँ दिल जाए

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