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Dec 4, 2017

ये मुलाक़ात इक बहाना है-खानदान १९७९

कुछ गीत कालजई कहलाते हैं जैसे कि फिल्म खानदान का ये
गीत जिसे लता मंगेशकर ने गाया है. इसके बोल और संगीत
दोनों लाजवाब हैं.

बोल नक्श लायलपुरी के हैं और संगीत खय्याम का. गीत में
नायक जीतेंद्र और फिल्म कि दो नायिकाएं-सुलक्षणा पंडित और
बिंदिया गोस्वामी दिखलाई दे रहे हैं.




गीत के बोल:

ये मुलाक़ात एक बहाना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है

धड़कने धड़कनों में खो जायें
धड़कने धड़कनों में खो जायें
दिल को दिल के क़रीब लाना है
दिल को दिल के क़रीब लाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है

मैं हूँ अपने सनम के बाहों में
मैं हूँ अपने सनम के बाहों में
मेरे क़दमों तले ज़माना है
मेरे क़दमों तले ज़माना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है

ख़्वाब तो काँच से भी नाज़ुक है
ख़्वाब तो काँच से भी नाज़ुक है
टूटने से इन्हें बचाना है
टूटने से इन्हें बचाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है

मन मेरा प्यार का शिवाला है
मन मेरा प्यार का शिवाला है
आप को देवता बनाना है
आप को देवता बनाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है
ये मुलाक़ात एक बहाना है
……………………………………………………..
Ye mulaqat ek bahana hai-Khandan 1979

Artists: Bindiya Goswami, Jeetendra, Sulakshana Pandit

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Nov 20, 2016

नील गगन पर उड़ते बादल-खानदान १९६५

आप सन १९४२ और सन १९८१ के खानदानों से मिल ही चुके हैं
अब आपको मिलवाते हैं सन १९६५ के खानदान से.

सुनील दत्त और नूतन अभिनीत फिल्म खानदान के गीत लोकप्रिय
हुए थे. रफ़ी और आशा का गाया युगल गीत लिखा है राजेंद्र कृष्ण
ने और इसकी धुन बनाई है रवि ने.

कुछ श्रेणियाँ जो हमें सूझती हैं इस गीत के लिए वो इस प्रकार से
हैं- नीलगगन हिट्स, आ आ आ हिट्स, उड़ते बादल हिट्स. गीत के
मुखड़ों में आ आ आ का प्रयोग काफी कम हुआ है. हम पुराने गीतों
की ही बात कर रहेहैं. आज के गीतों में अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ
सभी का इस्तेमाल हो जाता है सिवायें अं अ: को छोड़ के.

भारत एक कृषि प्रधान देश है और ये गीत कृषि और खेती को समर्पित
है. कथानक का किसान एक अमीर किसान है और उसके पास घोडा
भी है. वो नायिका को घोड़े पर क्यूँ नहीं बिठा रहा है जानने के लिए
देखने फिल्म खानदान.



गीत के बोल:

नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तू छाया
छुपे हुए ओ चंचल पंछी जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा
नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तू छाया
छुपे हुए ओ चंचल पंछी जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा


बहता-बहता क्यारियों में ठंडा-ठंडा पानी
बहता-बहता क्यारियों में ठंडा-ठंडा पानी
चूम न ले कहीं पाँव तेरे ओ खेतों की रानी
चूम के मेरे पाँव मैले वो होगा मैला
मैं हूँ खेतों की दासी तू खेतों का राजा

नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तू छाया
छुपे हुए ओ चंचल पंछी जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा

हरी-भरी इन खेतियों की राम करे रखवाली
हरी-भरी इन खेतियों की राम करे रखवाली
वो चाहे तो सौ-सौ दाने देगी एक-एक डाली
मेहनत-वालों की सुनता है वो ऊपर वाला
खोल के रखियो अपनी झोली भर देगा दाता

नील गगन पर उड़ते बादल आ आ आ
धूप में जलता खेत हमारा कर दे तू छाया
छुपे हुए ओ चंचल पंछी जा जा जा
देख अभी है कच्चा दाना पक जाए तो खा
...............................................................................
Neeelgagan pe udte badal-Khandan 1965

Artists: Sunil Dutt, Nutan

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Jul 5, 2016

बस्ती के लोगों में हुए बदनाम-खानदान १९७९

जीतेंद्र पर फिल्माए गए और उल्लेखनीय गीतों में से अगला
पेश है. कमाल की बात है कि जीतेंद्र पर फिल्माए गए किशोर
के गीतों पर ज्यादा चर्चा नहीं हुआ करती है. ज्यादा लिखूंगा
तो किसी अंग्रेजी ब्लॉग पर इस आइडिये पर तुरंत एक पोस्ट
छाप जायेगी और हम भुट्टे भूजंते रह जायेंगे.

प्रस्तुत गीत इस फिल्म में उपलब्ध किशोर के दोनों गीतों में
से कम सुना गया गीत है मगर मधुर है और बोल भी इसके
बढ़िया हैं. नक्श लायलपुरी ने इसे लिखा है और संगीत तैयार
किया है खय्याम ने.




गीत के बोल:

बस्ती के लोगों में हुए बदनाम लगे इलज़ाम
चाहत बुरी यारों चाहत बुरी
दिल कर दिया एक सितमगर के नाम लगे इलज़ाम
चाहत बुरी यारों चाहत बुरी
बस्ती के लोगों में हुए बदनाम

कैसे कहूँ किसलिए बदगुमान है
मुझसे खफा है मगर मेरी जान है
कैसे कहूँ किसलिए बदगुमान है
मुझसे खफा है मगर मेरी जान है
जालिम ने कर दी है नींदें हराम लगे इलज़ाम
चाहत बुरी यारों चाहत बुरी
बस्ती के लोगों में हुए बदनाम

सपनों की दुल्हन मेरे दिल की रानी
चंचल सी नटखट सी अल्हड जवानी
सपनों की दुल्हन मेरे दिल की रानी
चंचल सी नटखट सी अल्हड जवानी
मुझसे उलझती रहे सुबह शाम लगे इलज़ाम
चाहत बुरी यारों चाहत बुरी
बस्ती के लोगों में हुए बदनाम

जुल्फों में खुशबू है आँखों में मस्ती
गोरे बदन से है मदिरा छलकती
जुल्फों में खुशबू है आँखों में मस्ती
गोरे बदन से है मदिरा छलकती
फिर भी है प्यासा मेरे दिल का जाम लगे इलज़ाम
चाहत बुरी यारों चाहत बुरी
बस्ती के लोगों में हुए बदनाम लगे इलज़ाम
चाहत बुरी यारों चाहत बुरी
दिल कर दिया एक सितमगर के नाम लगे इलज़ाम
चाहत बुरी यारों चाहत बुरी
बस्ती के लोगों में हुए बदनाम
…………………………………………………….
Basti ke logon mein hue badnaam-Khandan 1979

Artists: Jeetendra, Sulakshana Pandit

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Jul 17, 2015

तू कौन सी बदली में मेरे चाँद-खानदान १९४२

दीना नाथ मधोक स्टार गीतकार हुआ करते थे
काली-पीली(श्वेत श्याम) फिल्मों के युग में. उनका
लिखा एक गीत सुनते हैं आज नूरजहाँ का गाया
हुआ. गौरतलब है किसी गायिका के नाम के आगे
मैडम नहीं लगा. ये रुतबा केवल नूरजहाँ को हासिल
है. उनके चाहने वालों की कोई कमी नहीं है.

इस गीत में नायिका चाँद और ईद को याद कर रही
है. संगीत तैयार किया है गुज़रे हुए ज़माने के नामचीन
संगीतकार गुलाम हैदर ने.



गीत के बोल:

तू कौन सी बदली में मेरे चांद है आ जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा
तू कौन सी बदली में मेरे चांद है आ जा

दिल ढूंढ रहा है के मेरा चांद कहाँ है
छोटी सी झलक दे के मेरी ईद बना जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा

पहलू में लिये बैठी हूँ मैं दर्द भरा दिल
मर जाऊं या जीती रहूं ये तो बता जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा
……………………………………………………………
Too kaun si badli mein mere chand-Khandan 1942

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