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Dec 18, 2017

ए री मैं तो प्रेम दीवानी-जोगन १९५०

फिल्म जोगन से एक गीत सुनते हैं आज. मीराबाई की रचना
को स्वर दिया है गीता दत्त ने. बुलो सी रानी नामक संगीतकार
ने इसे संगीतबद्ध किया है. बुलो सी रानी के जीवन में प्रसिद्ध
होने के क्षण कम आये और ये उनके संगीत वाली एकमात्र ऐसी
फिल्म है जिसके सभी गीत चाव से सुने जाते हैं.

योग संयोग ऐसी चीज़ें हैं जीवन की जिन पर किसी का बस नहीं
चलता. किसी की बस छूट जाती है तो कोई बस पकड़ लेता है.
कोई बस पकड़ भी लेता है तो उसमें उसके साथ धक्का मुक्की होगी
या उसे बैठने की जगह नसीब होगी ये कौन जानता है. जिंदगी
का सफर ऐसा ही है. 



गीत के बोल:

ए री मैं तो प्रेम दीवानी मेरो दर्द न जाने कोय
ए री मैं तो प्रेम दीवानी मेरो दर्द न जाने कोय

सूलीयों पर सेज हमारी सोनो किस बिध होय
गगन मंडल पर सेज पिया की मिलन किस बिध होय
दर्द न जाने कोय

ए री मैं तो प्रेम दीवानी मेरो दर्द न जाने कोय

घायल की गत घायल जाने और न जाने कोय
मीरा के प्रभु सिर मिटे जब वैद साँवारिया होय
दर्द न जाने कोय

ए री मैं तो प्रेम दीवानी मेरो दर्द न जाने कोय
....................................................................
Ae ri main to prem deewani-Jogan 1950

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Jul 30, 2016

झुकी आई रे बदरिया-भाभी १९३८

सावन शुरू होते ही हमने आपको एक सावन गीत सुनाया
था. समय हो गया उस बात को. अब के सावन का महीना
आधा बीत गया है और हमने आपको अभी तक कोई और
सावन गीत नहीं सुनाया.

आपको आज एक डिवाईन सावन गीत सुनवाते हैं. मीरा बाई
रचित इस गीत को फिल्म भाभी के लिए सरस्वती देवी ने
संगीतबद्ध किया है जिसे रेणुका देवी गा रही हैं. परदे पर
कलाकार भी वही हैं. साथ में गुज़रे ज़माने के एक नामचीन
कलाकार भी हैं-जयराज.



गीत के बोल:

झुकी आई रे बदरिया सावन की
झुकी आई रे बदरिया सावन की
सावन की
सावन की मनभावन की
सावन की मनभावन की
झुकी आई रे बदरिया सावन की
झुकी आई रे बदरिया

नन्ही नन्ही बुंदियाँ मेहरा बरसे
पी पी पपीहा राज करे
आली जाए कहो पिया आवन की
झुकी आई रे बंदरिया सावन की
झुकी आई रे बदरिया

सुन रे हठी पपीहा पापी
पी को नाम न ले
सुन पावे कोई बिरहा की मारी
पी कारन कीजे
ये दोउ नैना कहो ना माने
नदिया बहे जैसे सावन की,
कोई जाए कहो पिया आवन की
झुकी आई रे बदरिया सावन की
झुकी आई रे बंदरिया
सावन की मनभावन की
सावन की मनभावन की
झुकी आई रे बदरिया सावन की
झुकी आई रे बदरिया
.....................................................................
Jhuki aayi re badariya-Bhabhi 1938

Artists: Renuka Devi, Jairaj

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Jul 25, 2016

प्रेम लगाना चाही रे मनवा-यात्रिक १९५२

बिनाता चक्रवर्ती का गाया एक भजन सुनते हैं फिल्म
यात्रिक से. काफी डूब के गाया हुआ है ये भजन और
आप इसे सुनते ही रिलेक्स हो जायेंगे. पंकज मलिक
ने इसकी धुन बनाई है फिल्म यात्रिक के लिए. धुन
अलौकिक बन पड़ी है.

मीरा बाई से बड़ा कोई समर्पित भक्त नहीं हुआ कृष्ण
का. समर्पण और विश्वास अपने चरम पर है उनकी
भक्ति में. मीरा बाई के कथन की बड़ी सुन्दर व्याख्या
उपलब्ध है पंजाब केसरी के पन्नों पर इधर-
मीरा जी के अनुभव

http://www.punjabkesari.in/mantra-bhajan-arti/news/meera-ji-432530

फिल्म यात्रिक सन १९५२ की एक फिल्म है जिसका
निर्माण न्यू थिएटर्स ने किया और फिल्म के निर्देशक
हैं कार्तिक चटर्जी. फिल्म के प्रमुख कलाकारों में हैं
वसंत चौधरी, अभि भट्टाचार्य, मोलिना, मनोरमा,
माया मुखर्जी इत्यादि.



गीत के बोल:

मीरा कहे
बिना प्रेम से
नहीं मिले हे हे हे नंदलाला
प्रीत करना चाही
प्रेम लगाना चाही
भजन करना चाही
साधन करना चाही
भजन करना चाही
भजन करना चाही
प्रेम लगाना चाही रे मनवा
प्रीत करना चाही
प्रीत करना चाही
साधन करना चाही
भजन करना चाही

रस्सी पूजन से हरी मिलें तो
मैं पूजूं तुलसी ताड़
रस्सी पूजन से हरी मिलें तो
मैं पूजूं तुलसी ताड़
मैं पूजूं तुलसी ताड़
पत्थर पूजन से हरी मिलें तो
मैं पूजूं पहाड़
मैं पूजूं पहाड़
दूध पीने से हरी मिलें
दूध पीने से हरी मिलें तो
बहुत वत्स बाला
बहुत वत्स बाला

मीरा कहे बिना प्रेम से
मीरा कहे बिना प्रेम से
नहीं मिले नंदलाला
नहीं मिले नंदलाला
नहीं मिले नंदलाला
...........................................................
Prem karma chahi re manwa-yatrik 1952

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Sep 28, 2011

जोगिया से प्रीत किये दुःख होए - गरम कोट १९५५

आज सितम्बर २८ को स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर का बयासीवां जन्म दिवस
है।

लता मंगेशकर का निस्संदेह इतिहास की उन नारियों में स्थान है जिन्होंने
जन-मानस पर सबसे ज्यादा प्रभाव डाला है जहाँ तक भारतीय इतिहास का
सवाल है । आश्चर्य नहीं है कि उन्हें भारत रत्न से भी काफी समय पहले
सम्मानित किया जा चुका है। सैंकड़ों संगीतकारों के साथ उन्होंने हजारों गीत
गाये हैं और आज भी गाने की ख्वाहिश रखती हैं।

हिंदी फिल्मों के महानायक को आप "८२" के अंक वाली तख्ती लिए टीवी
के चैनल पर लता मंगेशकर को जन्म दिवस की शुभकामनाएं देते देख ही
चुके होंगे। मेरे ख्याल से महानायक अपनी युवावस्था में उतने सक्रिय नहीं
दिखे जितना वे अपनी बुजुर्गावास्था में दिखाई दे रहे हैं। उनसे आज की पीढ़ी
को ऊर्जावान बने रहने का सबक लेना चाहिए। लिटिल "बी" सुन रहे हैं ना ?

आपको लता मंगेशकर के गाये कई मधुर गीत हम सुनवा चुके हैं इस ब्लॉग
पर। आज आपको सुनवाते हैं एक अनजान सी फिल्म गरम कोट से एक मधुर
गीत जो शायद खिचड़ी रंग के बालों वाली पीढ़ी ने अवश्य एक ना एक बार सुना
होगा। सादा और सरल सा गीत है जिसकी धुन बनाई है संगीतकार अमरनाथ ने।

'गरम कोट' राजिंदर सिंह बेदी की लिखी एक कहानी पर आधारित फिल्म है।
'गरम कोट' कहानी से साहित्य प्रेमी विशेषकर उर्दू साहित्य प्रेमी अवश्य ही वाकिफ
होंगे। बेदी ख्यातनाम साहित्यकार हैं। गौरतलब है कि इस फिल्म के सह-निर्माता
बेदी हैं और इस फिल्म के ज़रिये उन्हें स्क्रीनप्ले लिखने का पहला अवसर
मिला और स्क्रीनप्ले लिखने का ये सिलसिला समय के साथ आगे बढ़ता ही गया।
समय के साथ उन्हें कई फिल्मों के संवाद लिखने का भी मौका मिला।

भक्त-श्रेष्ठ मीरा बाई की दिव्य रचना पर बने गीत को फिल्माया गया है हिंदी फिल्मों
की सबसे चर्चित मां पर। नारी शक्ति को प्रणाम करते हुए ये गीत सभी महिला पाठकों
को समर्पित। उल्लेखनीय है अभिनेत्री निरूपा रॉय ने फिल्म दीवार में अमिताभ की
मां का किरदार निभाया था। इसी वाक्य को अगर हम ३७ साल पहले लिखते तो यूँ
होता- फिल्म दीवार में अमिताभ ने निरूपा रॉय के बेटे की भूमिका निभाई थी।
गीत मीरा बाई का पारंपरिक गीत है और इसका संगीत तैयार किया है अमरनाथ
(चावला) ने. इनके बारे में जिक्र फिर कभी.





गीत के बोल:

प्रीत किये दुःख होए, दुःख होए
प्रीत किये दुःख होए
जोगिया से प्रीत किये दुःख होए
जोगिया से प्रीत किये दुःख होए

प्रीत किये सुख, ना मोरी सजनी
प्रीत किये सुख, ना मोरी सजनी
जोगिया मीत ना कोए

जोगिया से प्रीत किये दुःख होए
जोगिया से प्रीत किये दुःख होए

रैन दिवस कल नाहीं परत है
रैन दिवस कल नाहीं परत है
रैन दिवस कल नाहीं परत है

तुम मिलिया बिन मोहे
तुम मिलिया बिन मोहे

ऐसी सूरत या जग माही
ऐसी सूरत या जग माही
फेर न देखी कोए
फेर न देखी कोए

जोगिया से प्रीत किये दुख होए
जोगिया से प्रीत किये दुख होए

मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे
कब रे मिलोगे
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे
मिलिया आनंद होए

जोगिया से प्रीत किये दुख होए
जोगिया से प्रीत किये दुख होए
.......................................
Jogiya se preet kiye dukh hoye-Garam Coat 1955

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May 20, 2011

मुरलिया बाजे री जमुना के तीर-तूफ़ान और दिया १९५६

आइये एक बार फिर से हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर
की तरफ चलें। इस बार आपको सन ५६ की एक फिल्म
तूफ़ान और दिया से एक मधुर भजननुमा गीत सुनवाते हैं।
भक्त मीरा बाई की रचना है यह और इसका संगीत तैयार किया है
वसंत देसाई ने। इस रचना को समय समय पर कई कलाकारों
ने अपनी आवाज़ और अपने अंदाज़ में गाया है जिनमें से
एक जगजीत सिंह की पत्नी चित्रा सिंह भी हैं।


गीत परदे पर गा रही हैं अभिनेत्री नंदा। वसंत देसाई का संगीत
है फिल्म में और इस ब्लॉग पर यह फिल्म का तीसरा गीत है।
गीत सीधा और सरल सा है और इसे आसानी से गुनगुनाया जा
सकता है। गायिका हैं लता मंगेशकर।



गीत के बोल:

मुरलिया बाजे री जमुना के तीर
मुरलिया बाजे री जमुना के तीर

मुरली सुनत मेरो मन हर लीनो
मुरली सुनत मेरो मन हर लीनो
चीत धरत नहीं धीर
चीत धरत नहीं धीर

कारो कन्हैया कारी कमरिया
कारो कन्हैया कारी कमरिया
कारो जमुना को नीर
कारो जमुना को नीर

मुरलिया बाजे री जमुना के तीर
मुरलिया बाजे री जमुना के तीर

मीरा के प्रभु गिरधर नागर
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
चरण कमल पे सीर
चरण कमल पे सीर

कारो कन्हैया कारी कमरिया
कारो कन्हैया कारी कमरिया
कारो जमुना को नीर
कारो जमुना को नीर

मुरलिया बाजे री जमुना के तीर
मुरलिया बाजे री जमुना के तीर

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Nov 10, 2010

घूंघट के पट खोल रे-जोगन १९५०

घूंघट थीम के ऊपर कुछ गीत हम सुन चुके हैं पहले। एक ५० की
फिल्म का गीत सुनते हैं जो ख़ासा लोकप्रिय है। गीत में कुछ ऐसा
कहा गया है-घूंघट खोलने के बाद पिया मिलेंगे। अंतर्मन का
घूंघट खोल तो हरि मिलेंगे। ये रचना पारंपरिक रचना है जो कृष्ण
भक्त मीरा बाई द्वारा रचित है। 'पारंपरिक' शब्द का प्रयोग बॉलीवुड
में तभी होता है जब गीत सदियों, युगों पुराना हो और जिसे किसी
फ़िल्मी गीतकार ने ना लिखा हो।

फिल्म जोगन के गीत की संगीत रचना की है बुलो सी. रानी ने।
गीत गाया है गीता रॉय ने और ये फिल्माया गया है नर्गिस पर।
गायिका गीत दत्त के कैरियर में ये गीत एक मील का पत्थर गीत
साबित हुआ. इस भजन को आप कई आवाजों में सुन पाएंगे
कारण-इसको कई गायकों ने गाया है। रागदारी की बात करें तो
ये गीत राग 'दरबारी कानडा' के लगभग निकट है। शुद्धता की बात
करें तो ये विडम्बना है कि १९६४ की फिल्म जिद्दी का हास्य गीत
'प्यार की आग में' इस राग के सबसे निकट माना जायेगा।



गीत के बोल:

घूँघट के पट खोल रे
तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे
तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे

घट घट में तोरे
साईं बसत हैं
घट घट में तोरे
साईं बसत हैं
कठू बचन मत बोल रे
तोहे पिया मिलेंगे

घूँघट के पट खोल रे
तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे

धन जोबन का गर्ब न कीजे
धन जोबन का गर्ब न कीजे
झूठा इनका मोल रे
तोहे पिया मिलेंगे

घूँघट के पट खोल रे
तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे

सूने मन्दिर
सूने मन्दिर दिया जला के
सूने मन्दिर दिया जला के
आसन से मत डोल रे
तोहे पिया मिलेंगे

घूँघट के पट खोल रे
तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे
.............................................................
Ghoonghat ke pat khol re-Jogan 1950

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