सुनते हैं शकील आजमी की लिखी रचना जिसका संगीत तैयार किया
है मिथुन शर्मा ने जिसे रिक्रीयेट किया है अन्नू मलिक ने, जैसा कि
सब जगह विवरण में मिलता है. . फिल्म का नाम है ज़हर और इसे
आतिफ असलम ने गाया है.
आज कल के गाने का मूड क्या है और कलाकारों के चेहरे पर क्या
भाव हैं, कनेक्ट कर पाना मुश्किल होता है. कॉपी पेस्ट के लिए
इतना विवरण काफी है या और भी दूं?
गीत के बोल:
वो लम्हें वो बाते कोई ना जाने
थी कैसी राते हो बरसाते
वो भीगी भीगी यादें
वो भीगी भीगी यादें
ना मै जानू ना तू जाने
कैसा है ये मौसम कोई ना जाने
कही से यह खिजां आई
गमों की धूँप संग लाई
खफा हो गये हम
जुदा हो गये हम
वो लम्हें वो बाते कोई ना जाने
थी कैसी राते हो बरसाते
वो भीगी भीगी यादें
वो भीगी भीगी यादें
सागर की गहराई से
गहरा है अपना प्यार
सहराओं की इन हवाओं में
कैसे आयेगी बहार
कहाँ से ये हवा आई
घटायें काली क्यों छाई
खफा हो गए हम
जुदा हो गए हम
वो लम्हें वो बाते कोई ना जाने
थी कैसी राते हो बरसाते
वो भीगी भीगी यादें
वो भीगी भीगी यादें
…………………………………………….
Wo lamhe-Zehar 2005
आज कल के गीतों के मुखड़े इस अंदाज़ में प्रस्तुत किये जाते हैं जैसे मिसाल दी जाती है-एक दाना ही काफी है, पूरी बोरी टटोलने की क्या ज़रूरत है.
ज़रूरत शब्द से एक किशोर का गाया पुराना गाना है, बेहद लोकप्रिय. इसके अलावा ज़रूरत शब्द से एक फिल्म भी है सत्तर के दशक की जिसे बी. आर. इशारा ने बनाया था.
सुनते हैं मिथुन का लिखा और संगीतबद्ध किया एक गीत फिल्म एक विलन से जिसे मुस्तफा ज़ाहिद गा रहे हैं.
गीत के बोल:
ये दिल तन्हा क्यूं रहे क्यूं हम टुकड़ों में जियें ये दिल तन्हा क्यूं रहे क्यूं हम टुकड़ों में जियें क्यूं रूह मेरी ये सहे मैं अधूरा जी रहा हूँ हरदम ये कह रहा हूँ मुझे तेरी ज़रूरत है मुझे तेरी ज़रूरत है मुझे तेरी ज़रूरत है
अंधेरों से था मेरा रिश्ता बड़ा तूने ही उजालों से वाक़िफ़ किया अब लौटा मैं हूँ इन अंधेरों में फिर तो पाया है खुद को बेगाना यहाँ तन्हाई भी मुझसे खफा हो गई बंजरों ने भी ठुकरा दिया मैं अधूरा जी रहा हूँ खुद पर ही इक सज़ा हूँ मुझे तेरी ज़रूरत है मुझे तेरी ज़रूरत है
तेरे जिस्म की वो खुशबुएं अब भी इन सांसों में ज़िंदा है मुझे हो रही इनसे घुटन मेरे गले का ये फंदा है
हो तेरे चूड़ियों की वो खनक यादों के कमरे में गूँजे है सुन कर इसे आता है याद हाथों में मेरे जंजीरें हैं तू ही आ के इनको निकाल ज़रा कर मुझे यहाँ से रिहा मैं अधूरा जी रहा हूँ ये सदायें दे रहा हूँ मुझे तेरी ज़रूरत है मुझे तेरी ज़रूरत है मुझे तेरी ज़रूरत है ……………………………………………………… Mujhe teri zaroorat-Ek villain 2014
आइये सुनें फिल्म एक विलन से एक और गीत जिसे मिथुन
नबे लिखा और स्वरबद्ध किया है. इसे गाने का काम उन्होंने
सौंपा मोहम्मद इरफ़ान को.
सिद्धार्थ मल्होत्रा और श्रद्धा कपूर पर इसे फिल्माया गया है.
गीत आज के लिहाज से मधुर और सुनने लायक है. हमारी
पीढ़ी के लोग भी कभी कभार इसे सुन सकते हैं.
गीत का मुखडा क्या है उससे हमें क्या लेना देना बस समझ
आना चाहिए ना. आजकल बंजारा शब्द ज्यादा चलन में है.
गीत के बोल:
जिसे जिंदगी ढूंढ रही है
क्या ये वो मुकाम मेरा है
यहाँ चैन से बस रुक जाऊं
क्यूँ दिल ये मुझे कहता है
जज्बात नए से मिले हैं
जाने क्या असर सा हुआ है
एक आस मिली फिर मुझको
जो कबूल किसी ने किया है
हाँ किसी शायर की गज़ल ड्रीमगर्ल
किसी शायर की गज़ल
जो दे रूह को सुकून के पल
कोई मुझको यूँ मिला है
जैसे बंजारे को घर
नए मौसम की सहर
या सर्दी में दोपहर
कोई मुझको यूँ मिला है
जैसे बंजारे को घर
जैसे कोई किनारा
देता हो सहारा
मुझे वो मिला किसी मोड पर
कोई रात का तारा
करता हो इशारा
वैसे ही रौशन करे वो शहर
दर्द मेरे वो भुला ही गया
कुछ ऐसा असर हुआ
जीना मुझे फिर से वो सिखा गया
जैसे बारिश कर दे तर
ये मर्हाम दर्द पर
कोई मुझको यूँ मिला है
जैसे बंजारे को घर
नए मौसम की सहर
या सर्दी में दोपहर
कोई मुझको यूँ मिला है
जैसे बंजारे को घर
मुस्कुराता ये चेहरा
देता है जो पहरा
जाने छुपाता क्या दिल का समंदर
औरों को टीओ हरदम साया देता है
वो धुप में है खड़ा खुद मगर
लगी है उसे चोट
फिर क्यूँ महसूस मुझे हो रहा
दिल तू बता दे
क्या है इरादा तेरा
मैं परिंदा बेसबर
था उड़ा जो दर-बदर
कोई मुझको यूँ मिला है
जैसे बंजारे को घर
नए मौसम की सहर
या सर्दी में दोपहर
कोई मुझको यूँ मिला है
जैसे बंजारे को घर
कोई मुझको यूँ मिला है
जैसे बंजारे को घर
जैसे बंजारे को घर
जैसे बंजारे को घर
जैसे बंजारे को घर
………………………………………………
Jaise banjaare ko ghar-Em villain 2014
गीत पसंद आने की तीन वजहें होती हैं-बोल, संगीत और
तीसरी वजह-कुछ नहीं, बस यूँ ही.इस गीत के पसंद आने
की क्या वजह है ये जानिये इस पोस्ट में.
प्रस्तुत गीत जिस नायिका पर फिल्माया गया है उसकी
आँखों की शान में कुछ ज्यादा कसीदे काडे गए हैं. नायिका
हैं नौहीद सायरसी. नायिका सुन्दर हैं, निस्संदेह, थोड़ी बहुत
एक्टिंग भी कर लेती हैं. नायक हैं सिद्धार्थ कोइराला, मनीषा
कोइराला के भाई.
गीत पसंद आने की सीढ़ी एक वजह है ढाक-चिक ढाक-चिक
स्टाइल का तबला है. शुरू में मुझे ये आतिफ असलम की
गायकी का एक्सटेंशन जैसा लगता था, मगर धीरे धीरे यह
समझ आया रूप कुमार राठौड की गायकी आतिफ की गायकी
से ज्यादा समृद्ध है. गीत में इको और कोरस का प्रभावी
इस्तेमाल किया गया है. अंग्रेजी भाषा में संगीत भक्त कुछ
यूँ कहते हैं-Tune grows on you after a while(गीत आपके ऊपर
कुछ समय बाद उगने लगता है). कुछ ऐसा ही है इस गीत
के साथ, धीरे धीरे आपको ये पसंद आना शुरू होता है.
गीत के बोल सईद कादरी के हैं और संगीत मिथुन का. एक
बढ़िया धुन बनाई है मिथुन ने जिसे लंबे समय तक सुना
जा सकेगा.
मुझसे ये हर घडी मेरा दिल कहे
तुम्ही हो उसकी आरजू
मुझसे ये हर घडी मेरे लब कहें
तेरी ही हो सब गुफ्तगू
बातें तेरी इतनी हंसी
मैं याद इनको जब करता हूँ
फूलों सी आये खुशबू
रख लूं छुपा के मैं कहीं तुझको
साया भी तेरा न मैं दूं
रख लूं बना के कहीं घर मैं तुझे
साथ तेरे मैं ही रहूँ
जुल्फें तेरी इतनी घनी
देख के इनको ये सोचता हूँ
साये में इनके मैं जियूं
दिल यही बोला मेरा दिल यही बोला
यारा राज़ ये उसने है मुझपे खोला
के है इश्क मोहब्बत है जिसके दिल में
उसको पसंद करता है मौला
दिल यही बोला मेरा दिल यही बोला
यारा राज़ ये उसने है मुझपे खोला
के है इश्क मोहब्बत है जिसके दिल में
उसको पसंद करता है मौला
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Aankhen teri-Anwar 2007
अरिजीत सिंह का गाया एक और उल्लेखनीय गीत सुनते हैं.
फिल्म एक विलन के लिए इसे लिखा और संगीतबद्ध किया
है मिथुन ने. मिथुन का पूरा नाम मिथुन शर्मा है. नई पीढ़ी
के संगीतकार काफी प्रतिभाशाली हैं, वे गीत भी खुद लिख
लिया करते हैं कभी कभी.
फिल्म: एक विलन
गायक: अरिजीत सिंह
गीत: मिथुन
संगीत: मिथुन
कलाकार-सिद्धार्थ मल्होत्रा, श्रद्धा कपूर
गीत के बोल:
पल दो पल की ही क्यूं है ज़िंदगी
इस प्यार को है सदियाँ काफी नहीं
तो खुदा से माँग लूँ
मोहलत मैं इक नयी
रहना है बस यहाँ
अब दूर तुझसे जाना नहीं
जो तू मेरा हमदर्द है
जो तू मेरा हमदर्द है
सुहाना हर दर्द है
जो तू मेरा हमदर्द है
तेरी मुस्कुराहटें हैं ताक़त मेरी
मुझको इन्हीं से उम्मीद मिली
चाहे करे कोई सितम ये जहां
इनमे ही है सदा हिफाज़त मेरी
जिंदगानी बड़ी खूबसूरत हुई
जन्नत अब और क्या होगी कहीं
जो तू मेरा हमदर्द है
तेरी धड़कनों से है ज़िन्दगी मेरी
ख्वाहिशें तेरी अब दुआएं मेरी
कितना अनोखा बंधन है ये
तेरी मेरी जान जो एक हुई
लौटूंगा यहाँ तेरे पास मैं हाँ
वादा है मेरा मर भी जाऊं कहीं
जो तू मेरा हमदर्द है
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Jo too mera hamdard-EK villain 2014
कुछ साल पहले हमने एक आवाज़ सुनी जो गली गली में
सुनाई दी. वो थी आतिफ असलम की आवाज़. गाना था-तेरे
बिन मैं यूँ कैसा जिया. ये आवाज़ एक टी वी रियलिटी शो
में भी सुनाई दे चुकी थी पहले. अब ये आवाज़ हिंदी फिल्म
संगीत का एक नियमित हिस्सा है. ये तो तय था इस आवाज़
की लोकप्रियता से नयी गायकी के अंदाज़ की शुरुआत हो गयी
है. अदनान सामी के अलसाए से अंदाज़ के आगे वाला पहलू
इधर सुनाई देगा आपको. गौरतलब है राहत फतह अली खान
से लेकर जितने भी नए गायक हैं हिंदी फिल्म जगत में वे सब
नुसरत फतह अली खान के गायन के मुरीद हैं.
इसी परिपाटी में आगे चल के एक गीत और आया सन २०१३
में, फिल्म आशिकी २ के लिए- तुम ही हो. इस गीत को गाया है
अरिजीत सिंह ने जो अभी के समय के सबसे लोकप्रिय गायक हैं.
यू ट्यूब पर जो वीडियो टी सीरीज़ ने लोड किया है उसे ४४,९७४,५१९
बार देखा जा चुका है. गीत फिल्माया गया है आदित्य रॉय कपूर
और श्रद्धा कपूर पर. श्रद्धा जाने माने खलनायक और चरित्र अभिनेता
शक्ति कपूर की सुपुत्री हैं.
लोकप्रिय गीतों को शामिल करने का हमारा पुराना फंडा है इसलिए
आपको आज सुनवा रहे हैं अरिजीत का गाया, मिथुन का लिखा,
स्वरबद्ध किया गीत फिल्म आशिकी-२ से. संगीतकार मिथुन शर्मा
भी उभरते हुए सितारे हैं और काफी उभर चुके हैं अभी तक संगीत
के क्षेत्र में.
गीत के बोल:
हम तेरे बिन अब रह नहीं सकते
तेरे बिना क्या वजूद मेरा
तुझसे जुदा गर हो जाएँगे
तो खुद से ही हो जाएंगे जुदा
क्योंकि तुम ही हो
अब तुम ही हो
ज़िन्दगी अब तुम ही हो
चैन भी, मेरा दर्द भी
मेरी आशिकी अब तुम ही हो
तेरा मेरा रिश्ता है कैसा
इक पल दूर गंवारा नहीं
तेरे लिए हर रोज़ हैं जीते
तुझको दिया मेरा वक़्त सभी
कोई लम्हा मेरा न हो तेरे बिना
हर सांस पे नाम तेरा
क्योंकि तुम ही हो
अब तुम ही हो
ज़िन्दगी अब तुम ही हो
चैन भी, मेरा दर्द भी
मेरी आशिकी अब तुम ही हो
तेरे लिए ही जिया मैं
खुद को जो यूँ दे दिया है
तेरी वफ़ा ने मुझको संभाला
सारे ग़मों को दिल से निकाला
तेरे साथ मेरा है नसीब जुड़ा
तुझे पा के अधूरा ना रहा
क्योंकि तुम ही हो
अब तुम ही हो
ज़िन्दगी अब तुम ही हो
चैन भी, मेरा दर्द भी
मेरी आशिकी अब तुम ही हो