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Jun 7, 2020

मोहब्बत के दुश्मन-चमेली की शादी १९८६

फिल्मों में नाटकीयता तो पाई ही जाती है मगर नौटंकी के
अंश भी पाये जाते हैं. नौटंकी आम भाषा में थियेटर को भी
बोला जाता है. गांव के साथ ये शब्द ज्यादा जुडा हुआ है.

फिल्म चमेली की शादी की कहानी चुस्त है और उसमें सीन
बदलने की रफ़्तार औसत से बेहतर है जो दर्शकों को बांधे
रखने की बड़ी वजह है. हमें सिनेमा की जितनी समझ है
उस अनुसार हम बतला देते हैं. क्रिटिकल ऐक्लैम, रिक्लेम
हमारी समझ में नहीं आता.

फिल्म में बादशाही सल्तनत को याद करते हुए ये गाना
फिल्माया गया है. शायद ये सलीम अनारकली के प्रेम के
प्रतीक के सबसे नज़दीक है, मेरे ख्याल से. ये एक खयाली
विचार जैसा है और जिसमें नायक के साथी दरबारियों में
तब्दील हो जाते हैं. गीत शुरू होते ही जिस मकान में वे
घुसते हैं उसके सामने की दीवार पे भगंदर का इलाज जैसा
कुछ लिखा होता है. ऐसे प्रतीक बारीकी से सिनेमा देखने
वाले ही देख और समझ पाते है.

गीत अनजान रचित है जिसे अनवर ने गाया है. इसकी धुन
तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने.

गीत अनिल कपूर, पंकज कपूर और अमृता सिंह पर फिल्माया
गया है.




गीत के बोल:

फिर कोई बना मुग़ले आज़म
फिर कैद हुई अनारकली
पर आज सलीम झुकेगा नहीं
देखेगी तमाशा सारी गली

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
बुझाये बुझे ना मोहब्बत के शोले
बुझाये बुझे ना मोहब्बत के शोले
ऐ जालिम अगर तू समुन्दर भी ले आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

मोहब्बत को कोई तिज़ारत समझ के
या पत्थर की कोई ईमारत समझ के
ये ना सोच
ये ना सोच बाजार में बेच देगा
ये सौदा बहुत तुझको महँगा पड़ेगा
जो बिक जाये वो होश-ए-मोहब्बत नहीं हैं
मोहब्बत नहीं हैं मोहब्बत नहीं हैं
जो बिक जाये वो होश-ए-मोहब्बत नहीं हैं
मोहब्बत है इबादत मोहब्बत है पूजा

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

सितम ऐसे पहले भी तो हो चुके हैं
दीवाने मगर किसके आगे झुके हैं
दिलों पे न तेरी हुकूमत चलेगी
मोहब्बत ये ज़ंजीरो में न बँधेगी
फतह कर सके जो मोहब्बत की दुनिया
मोहब्बत की दुनिया मोहब्बत की दुनिया
फतह कर सके जो मोहब्बत की दुनिया
अगर कहीं हो वो सिकंदर भी ले ए

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

ये जोश-ए-जूनून जब बग़ावत पे आये
कटे तो कटे सर झुके न झुकाये
सितमगर है आया बुरा वक्त तेरा
दीवाना उलट देगा ये तख़्त तेरा
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
दिल के जोश-ए-जूनून का दिल के जोश-ए-जूनून का
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
जोश-ए-जूनून का जोश-ए-जूनून का
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
अगर मिल सके तो वो खंजर भी ले आ

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
बुझाये बुझे न मोहब्बत के शोले
ऐ जालिम अगर तू समुन्दर भी ले आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
………………………………………..
Mohabbat ke dushman-Chameli ki shadi 1986

Artists: Pankaj Kapoor, Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jan 19, 2020

यार दगा दे गया-चोरों की बारात १९८०

गानों की वैराइटी की बात करें तो ८० के दशक में हमें
सबसे ज्यादा तरह तरह का सामान देखने को मिला.
इसी दशक में हमने सलमा आगा, गुलाम अली और
डिस्को संगीत को देख लिया. इस दशक की फ़िल्मी
कव्वालियां भी अलग अलग रंग वाली मिल गयीं.

किसी फिल्म का शीर्षक गीत कव्वाली हो ऐसा कम
देखा हमने. सन १९७७ की फिल्म हम किसी से कम
नहीं में भी शीर्षक गीत कव्वाली है. फिल्म ज़माने को
दिखाना है में भी शीर्षक गीत कव्वाली है.

सुनते हैं सन १९८० की फिल्म की भूली बिसरी कव्वाली
जो जीवन पर फिल्माई गयी है. धार्मिक फिल्मों में
नारद मुनि की भूमिकाएं निभाने वाले जीवन ने सामान्य
फिल्मों में अधिकतर विलन की भूमिकाएं निभाई हैं.

आनंद बक्षी के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.
इसे मन्ना डे, अनवर और जसपाल सिंह ने गाया है.



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यार दगा दे गया
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
छोड़ा गया साथ
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
छोड़ा गया साथ
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
ओ आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात

हर गली में ढूंढते हर कली से पूछते
मिल गया कोई निशाँ हम चले आये यहाँ
हर गली में ढूंढते हर कली से पूछते
मिल गया कोई निशाँ हम चले आये यहाँ
तो दूर थी मंजिल बड़ी राह थी मुश्किल बड़ी
गिरते सँभलते रहे हम मगर चलते रहे
ये भरोसा था हमें
था हमें
इतना पता था हमें
था हमें
हम रहे जिंदा गर आज हो या कल मगर
अरे होगी मुलाक़ात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया

वाडे सभी तोड़े के अपना शहर छोड़ के
वो बसा परदेस में एक नये भेस में
हमने भी छोड़ा वतन बाँध के सर पे कफ़न
वो नहीं या हम नहीं हम किसी से कम नहीं
हम किसी से कम नहीं
देखिये सुनिये जनाब क्या तबियत है खराब
किसलिए ये बेरुखी बात नहीं आप की
रे लोगों की है बात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया

बेवफा वो बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
हम पुरानी दोस्ती
हम पुरानी दोस्ती तोड़ के कैसे अजी
हम पुरानी दोस्ती तोड़ के कैसे अजी
जान देंगे साथ हम हमने खाई थी कसम
बेवफा वो बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
बेवफा वो है तो क्या
हम तो नहीं बेवफा
हाँ ये सितम हो किसलिए किसलिए
वो अकेला क्यूँ जिए क्यूँ जिए
किस तरह होगी भला फूल से खुशबू जुदा
किस तरह होगी भला फूल से खुशबू जुदा
आज का दिन खास है दूर थी अब पास है
हो मिलन की रात
आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात
ओ आगे आगे दूल्हा रे पीछे चोरों की बारात

ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
ओ यार दगा दे गया दुल्हन को ले गया
ओ यार दगा दे गया
…………………………………………….
Yaar daga de gaya-Choron ki baraat 1980

Artists: Jeevan, Ajit, Sudhir, Shatrughan Sinha

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Aug 4, 2019

बताओ ए दुनियावालों-सबूत मांगता है कानून १९९४

आज ४ अगस्त है जिसका किशोर कुमार से खास सम्बन्ध है.
एक दुर्लभ गीत सुनवाते हैं आपको. इसके लिए अपलोड करने
वाले को शुक्रिया देना बेहद ज़रूरी है. फिल्म रिलीज़ हुई १९९४
में मगर ये गीत ८० के दशक में रिकोर्ड हो चुका था.

किशोर कुमार की आवाज़ समय के साथ साथ परिपक्व होती
चली और भारीपन बढ़ता गया. ये सभी गायकों के साथ होता है.
९० के दशक में किशोर कुमार के कई क्लोन सुनाई देना शुरू
हुए. संगीतकारों के पास विकल्प भी नहीं थे उनके अलावा.अब
सत्तर के दशक वाला किशोर कुमार कहाँ से लाएं? जो टोनल
क्वालिटी किशोर कुमार की सन १९८५ तक हुआ करती थी वो
शायद भविष्य में किसी नए कलाकार में नहीं मिलेगी.

प्रस्तुत गीत शायद ही आपने सुना हो कभी. फिल्म का नाम भी
शायद ही आपने सुना हो. गीत में किशोर कुमार के साथ
साधना सरगम और अनवर की आवाजें हैं. महेंद्र देहलवी के लिखे
गीत की तर्ज़ बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने. परदे पर आपको
शशि कपूर संग राज बब्बर दिखलाई देंगे.





गीत के बोल:

बताओ ए दुनिया वालों हम प्यार क्यूँ ना करें
बताओ ए दुनिया वालों हम प्यार क्यूँ ना करें
हम प्यार क्यूँ ना करें
जब दिल से मिले दिल फिर अहले महफ़िल
दिल से मिले दिल फिर अहले महफ़िल
इज़हार क्यूँ ना करें

बताओ ए दुनिया वालों हम प्यार क्यूँ ना करें
हम प्यार क्यूँ ना करें
जब नज़रें हों कातिल हो हुस्न हासिल
नज़रें हों कातिल हो हुस्न हासिल
फिर वार क्यूँ ना करें
बताओ ए दुनिया वालों हम प्यार क्यूँ ना करें
हम प्यार क्यूँ ना करें

बड़ी मुश्किल से बड़ी मुश्किल से मिलता है प्यार
प्यार वो खज़ाना है प्यार वो खज़ाना है
हो ओ ओ इसको पा के जो खोयेगा यार
यार वो दीवाना है यार वो दीवाना है
हो माना प्यार है खज़ाना ओ माना प्यार है खज़ाना
यार है दीवाना
पर मुश्किल है प्यार का निभाना पर मुश्किल है प्यार का निभाना
कहे कुछ भी ज़माना पर हमने या जाना
कभी भूले से दिल न लगाना कभी भूले से दिल न लगाना
ये दिल तो है दिल दिल ये दिल तो है दिल दिल
यार हो मुकाबिल दीदार क्यूँ ना करे

बताओ ए दुनिया वालों हम प्यार क्यूँ ना करें
हम प्यार क्यूँ ना करें
………………………………………………………
Batao ae duniya walon-Saboot mangta hai kanoon 1994

Artists: Shashi Kapoor, Unknown, Raj Babbar

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Aug 2, 2019

मौसम मौसम लवली मौसम-थोड़ी सी बेवफाई १९८०

अनवर और सुलक्षणा पंडित के गाया युगल गीत सुनते हैं
फिल्म थोड़ी सी बेवफाई से. युवा पद्मिनी कोल्हापुरे और
युवा सिद्धार्थ रे पर ये गीत फिल्माया गया है. सिद्धार्थ
वही हैं फिल्म बाजीगर के “छुपाना भी नहीं आता” गीत
वाले.

गुलज़ार के बोल हैं और खय्याम का संगीत. फिल्म का ये
गीत थोडा तेज गति वाला है. युवा पीढ़ी के हिसाब से बनाया
गया गीत. फिल्म का दूसरा गीत-आँखों में हमने आपने’
राजेश खन्ना और शबाना आज़मी पर फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

हो हो ओ ओ ओ ओ
हो हो ओ ओ ओ ओ

मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

हवा के झोंकों मे तेरी खुशबू सी है
हवा के झोंकों मे तेरी खुशबू सी है
बेवजह लगता है कोई खुशखबरी है

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

कली के होठों पे मुस्कुराहट सी है
कली के होठों पे मुस्कुराहट सी है
कहो तो सुनती हैं सुनो तो कहती हैं

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

ना जाने ऐसे में क्यूँ बदन जलते हैं
ना जाने ऐसे में क्यूँ बदन जलते हैं
ज़मीन पे उड़ते हैं हवाओं मे चलते हैं

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम
.......................................................................
Mausam mausam lovely mausam-Thodi si bewafai 1980

Artists: Padmini Kolhapure, Siddharth Ray

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May 7, 2017

मुहब्बत अब तिजारत बन गई है-अर्पण १९८३

जीतेंद्र और रीना रॉय अभिनीत फिल्म अर्पण में कुछ चर्चित गीत
हैं उनमें से एक सुनवाते हैं आपको.

इसे आनंद बक्षी ने लिखा, अनवर ने गाया और लक्ष्मी प्यारे
ने संगीत में बाँधा है.



गीत के बोल:

मुहब्बत अब तिजारत बन गई है
तिजारत अब मुहब्बत बन गई है

किसी से खेलना फिर छोड़ देना
किसी से खेलना फिर छोड़ देना
खिलौनों की तरह दिल तोड़ देना
हसीनों
हसीनों की ये आदत बन गई है

मुहब्बत अब तिजारत बन गई है
तिजारत अब मुहब्बत बन गई है

कभी था नाम इसका बेवफ़ाई
कभी था नाम इसका बेवफ़ाई
मगर अब आजकल तो बेहयाई
शरीफ़ों
शरीफ़ों की शराफ़त बन गई है

मुहब्बत अब तिजारत बन गई है
तिजारत अब मुहब्बत बन गई है
……………………………………………………..
Mohabbat ab tizarat ban gayi-Arpan 1983

Artist: Jeetendra

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Mar 4, 2017

करते थे वो सलाम-महबूब मेरे एल्बम १९९५

आपको एक गैर फ़िल्मी गीत सुनवाते हैं गायक अनवर की
आवाज़ में. ये एक गज़ल है अनवर फर्रुखाबादी की लिखी
हुई जिसका संगीत भी अनवर(गायक) ने तैयार किया है.

अनवर फर्रुखाबादी ने कुछ गीत ही लिखे हैं फिल्मों के लिए.
आपको एक उल्लेखनीय गीत सुनवाया था बैंक मैनेजर फिल्म
से मन्ना डे का गाया हुआ. सन १९८२ की एक फिल्म
दिल ही दिल में जिसका संगीत मंधीर जतिन का तैयार किया
हुआ है उसमें आप अनवर के लिखे गीत सुन सकते हैं.
   



गीत के बोल:


करते थे वो सलाम अभी कल की बात है
मिलते थे सुबह-ओ-शाम अभी कल की बात है
करते थे वो सलाम अभी कल की बात है
मिलते थे सुबह-ओ-शाम अभी कल की बात है
करते थे वो सलाम अभी कल की बात है

तन्हाईयों में मुझको बुलाते थे रात दिन
तन्हाईयों में मुझको बुलाते थे रात दिन
बुलाते थे रात दिन
लिखते थे वो पयाम अभी कल की बात है
लिखते थे वो पयाम अभी कल की बात है
मिलते थे सुबह-ओ-शाम अभी कल की बात है
करते थे वो सलाम अभी कल की बात है

दौलत की राह पाते ही मगरूर हो गए
दौलत की राह पाते ही मगरूर हो गए
लेते थे मेरा नाम अभी कल की बात है
लेते थे मेरा नाम अभी कल की बात है
मिलते थे सुबह-ओ-शाम अभी कल की बात है
करते थे वो सलाम अभी कल की बात है
.......................................................................
Karte the o salaam-Mere mehboob non film song

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Feb 12, 2016

आँखें तेरी इतनी हंसी-अनवर २००७

गीत पसंद आने की तीन वजहें होती हैं-बोल, संगीत और
तीसरी वजह-कुछ नहीं, बस यूँ ही.इस गीत के पसंद आने
की क्या वजह है ये जानिये इस पोस्ट में.

प्रस्तुत गीत जिस नायिका पर फिल्माया गया है उसकी
आँखों की शान में कुछ ज्यादा कसीदे काडे गए हैं. नायिका
हैं नौहीद सायरसी. नायिका सुन्दर हैं, निस्संदेह, थोड़ी बहुत
एक्टिंग भी कर लेती हैं. नायक हैं सिद्धार्थ कोइराला, मनीषा
कोइराला के भाई.

गीत पसंद आने की सीढ़ी एक वजह है ढाक-चिक ढाक-चिक
स्टाइल का तबला है. शुरू में मुझे ये आतिफ असलम की
गायकी का एक्सटेंशन जैसा लगता था, मगर धीरे धीरे यह
समझ आया रूप कुमार राठौड की गायकी आतिफ की गायकी
से ज्यादा समृद्ध है. गीत में इको और कोरस का प्रभावी
इस्तेमाल किया गया है. अंग्रेजी भाषा में संगीत भक्त कुछ
यूँ कहते हैं-Tune grows on you after a while(गीत आपके ऊपर
कुछ समय बाद उगने लगता है). कुछ ऐसा ही है इस गीत
के साथ, धीरे धीरे आपको ये पसंद आना शुरू होता है.

गीत के बोल सईद कादरी के हैं और संगीत मिथुन का. एक
बढ़िया धुन बनाई है मिथुन ने जिसे लंबे समय तक सुना
जा सकेगा.




गीत के बोल:

मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे

आँखें तेरी
आँखें तेरी इतनी हंसी
के इनका आशिक मैं बन गया हूँ
मुझको बसा ले इनमें तू

इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे

के इनका आशिक मैं बन गया हूँ
मुझको बसा ले इनमें तू

मुझसे ये हर घडी मेरा दिल कहे
तुम्ही हो उसकी आरजू
मुझसे ये हर घडी मेरे लब कहें
तेरी ही हो सब गुफ्तगू
बातें तेरी इतनी हंसी
मैं याद इनको जब करता हूँ
फूलों सी आये खुशबू

रख लूं छुपा के मैं कहीं तुझको
साया भी तेरा न मैं दूं
रख लूं बना के कहीं घर मैं तुझे
साथ तेरे मैं ही रहूँ
जुल्फें तेरी इतनी घनी
देख के इनको ये सोचता हूँ 
साये में इनके मैं जियूं

इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे

दिल यही बोला मेरा दिल यही बोला
यारा राज़ ये उसने है मुझपे खोला
के है इश्क मोहब्बत है जिसके दिल में 
उसको पसंद करता है मौला
दिल यही बोला मेरा दिल यही बोला
यारा राज़ ये उसने है मुझपे खोला
के है इश्क मोहब्बत है जिसके दिल में 
उसको पसंद करता है मौला
........................................................................
Aankhen teri-Anwar 2007

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Jan 1, 2013

नया साल आये तमाशे दिखाये - नज़राना प्यार का १९८०

नया साल आया, नयी संभावनाएं ले कर के आया. ऐसा
ही कुछ लगभग हर व्यक्ति सोचता है. नए साल की नयी
योजनाएं, पुराने को पीछे छोड़ने की जद्दोजहद. रेसोल्यूशन
आते हैं इस समय जो अधिकतर कुछ दिन बाद गोल हो
जाते हैं जैसे जैसे १ जनवरी का खुमार उतरता है. बदलाव
प्रकृति का नियम है, इसलिए बदलाव का स्वागत करना
एक स्वाभाविक प्रक्रिया है.

आइये इस अवसर पर सन ८० की फिल्म नजराना प्यार का
से एक गीत सुना जाए. गीत के बोल निदा फाज़ली ने लिखे
हैं और संगीत है हेमंत भोंसले का. इस गीत को आशा भोंसले,
अमित कुमार और अनवर ने गाया है. हेमंत भोंसले आशा के
सुपुत्र हैं. फिल्म के निर्देशक एस. एम्. सागर हैं.



गीत के बोल:

नया साल आये, तमाशे दिखाये
किसी को हँसाए, किसी को रुलाये
नया साल आये, तमाशे दिखाये
किसी को हँसाए, किसी को रुलाये


जहाँ है उजाला वहीँ है अंधेरा
मुकद्दर पे काबू, ना मेरा ना तेरा
ये जीवन पहेली, समझ में ना आये

नया साल आये, तमाशे दिखाये
किसी को हँसाए, किसी को रुलाये

मोहब्बत मुकद्दर, बदलती रही है
ये कश्ती तो तूफां में चलती रही है
मोहब्बत अंधेरों में रस्ता बनाये

नया साल आये, तमाशे दिखाये
किसी को हँसाए, किसी को रुलाये

मेरी जां मोहब्बत से दौलत बड़ी है
ये दुनिया में जादू की ऐसी छड़ी है
मोहब्बत खरीदे मुकद्दर बनाये
नया साल आये, तमाशे दिखाये
किसी को हँसाए, किसी को रुलाये
.............................................................
Naya saal aaye-Nazrana pyar ka 1980

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Feb 5, 2011

नज़र से फूल चुनती है नज़र-अहिस्ता अहिस्ता

नए चेहरों पर फिल्माया गया एक गीत पेश है। फिल्म रिलीज़
के वक़्त दोनों ही चेहरे नए थे। पद्मिनी कोल्हापुरे को ज़रूर जनता
पहचानने लगी थी तब तक। फिल्म का नाम है-अहिस्ता अहिस्ता
और प्रस्तुत गीत फिल्म का शीर्षक गीत है। फिल्म के गीत काफी
लोकप्रिय थे रिलीज़ के वक़्त और उसके बाद इक्का दुक्का गीत आज
भी सुनाई दे जाते हैं कभी। गीत नक्श लायलपुरी का लिखा हुआ है
और संगीत तैयार किया है खय्याम ने। आशा भोंसले और अनवर
इसके पार्श्व गायक हैं। नायक हैं शशि कपूर के सुपुत्र कुणाल कपूर।



गीत के बोल :

नजर से फूल चुनती हैं नजर
नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
दुआएं दे रहे हैं पेड, मौसम जोगिया सा हैं
तुम्हारा साथ है् जब से, हर एक मंझर नया सा हैं
हसीं लगने लगी हर रहगुजर,
आहिस्ता, आहिस्ता

बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुम से हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
बहुत अच्छे हो तुम, फिर भी हमे तुमसे हया क्यों है
तुम ही बोलो हमारे दरमियाँ ये फासला क्यों हैं
मजा जब हैं के तय हो ये सफर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बन के आता हैं
हमेशा से अकेलेपन में कोई मुस्कुराता हैं
ये रिश्ता प्यार का हैं, आसमां से बनके आता हैं
मगर होती हैं दिल को ये खबर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता

नजर से फूल चुनती हैं नजर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
मोहब्बत रंग लाती हैं मगर, आहिस्ता, आहिस्ता
आहिस्ता, आहिस्ता
...................................................
Nazar se phool chunti hai nazar-Ahista ahista 1981

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Dec 24, 2010

कसमें हम अपनी जान की-मेरे गरीब नवाज़ १९७३

अनवर की आवाज़ में एक गीत और सुनते हैं । कुछ पोस्ट पहले आपको
एक गीत सुनवाया था उनका। ये गीत पदार्पण गीत है अनवर का हिंदी
फिल्म जगत में जो लिया गया है फिल्म मेरे गरीब नवाज़ से। इसकी
धुन कमल राजस्थानी की है जिन्हें हम उनके कई मधुर गैर फ़िल्मी गीतों
के लिए पहचानते हैं। परदे पर किस कलाकार ने अभिनय किया है गीत पर
इसकी मुझे कतई जानकारी नहीं है। उम्मीद है आप में से किसी को अवश्य
ही उस कलाकार का नाम मालूम होगा। गीत महबूब सरवर का लिखा हुआ है।





गीत के बोल :

कसमें हम अपनी जान की खाए चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कह कर गए थे वोह कि न आएंगे अब कभी
कह कर गए थे वोह कि न आएंगे अब कभी
लेकिन खयाल बन के वो आये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की

रुस्वाइओं के डर से न दामन भिगो सके
रुस्वाइओं के डर से न दामन भीगो सके
पलकों में आंसुओं को छुपाये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की

अनवर सुजूद-ए-शौक़ की मत पूछ इंतहा
अनवर सुजूद-ए-शौक़ की मत पूछ इंतहा
हर हर क़दम पे सर को झुकाये चले गए
फिर भी वो ऐतबार न लाए चले गए

कसमें हम अपनी जान की खाए चले गए
.........................................................................
Kasmen ham apni jaan ki-Mere garib nawaz  1973

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Dec 2, 2010

मेरे ख्यालों की रहगुज़र-ये इश्क नहीं आसान १९८४

ज़िगर मुरादाबादी की कुछ पंक्तियाँ यूँ हैं:

ये इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजिये
एक आग का दरिया है बस डूब के जाना है।

ये फलसफा ज़िन्दगी के ऊपर भी आसानी से लागू होता है।


आपको गायक अनवर हुसैन का एक लाजवाब गीत सुनवाया
था फिल्म "हम हैं लाजवाब" से। मोहम्मद रफ़ी के अवसान के
बाद हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में पैदा हुए बड़े रिक्त स्थान को कुछ
हद तक भरने का भरोसा पैदा करने वाले गायक ने कुछ गीत
गाये और गुमनामी के अंधेरों में कहीं खो गया। शायद गायक
की अपनी शर्तों पर काम करने का जूनून होने की वजह से ये
गत बनी या समय का फेर कहिये इसको। मामला चाहे जो भी
हो उनसे कमतर प्रतिभा वाले गायक सामने आये या लाये गए
और उन गायकों ने वो सब हासिल कर लिया जिसकी शायद
अनवर अपने फुर्सत के क्षणों में कल्पना मात्र ही कर पाते होंगे।

इसे विडम्बना ही कहिये कि जिस कलाकार को फिल्मों में गाते
सुना जाना चाहिए वो बीयर बार में सोम-रस प्रेमियों का दिल
बहला रहा है। उस कलाकार कि आवाज़ आम श्रोता कि पहुँच
में नहीं है क्यूंकि उनके लिए सार्वजनिक मंच उपलब्ध नहीं है.
प्रश्न ये है कि क्या सुनने वालों या संगीत पेमियों में से पहले कोई
ऐसा नहीं था जिसे गायक की इस गति पर ज़रा भी सहानुभूति
नहीं हुई हो। सवाल अंतरात्मा के जागने का है। समय का फेर
इसी को कहा जाता है। खैर देर आयद दुरुस्त आयद के साथ
गायक के लिए शुभकामनाएं। उन्हें और काम मिले और उनकी
प्रतिभा का paryapt दोहन हो चाहे टी वी पर हो या फिल्मों में।
सच्चे संगीत प्रेमी उन्हें फिर से सुनना चाहते हैं।

जब सितारे गर्दिश में हो तो आपके प्रशंसक ही आपको बिना पहचाने
धक्का मार के निकाल जाते हैं।

अंग्रेजी का दैनिक और उसके रिपोर्टर बधाई के पात्र हैं जिनके प्रयासों
से एक कलाकार को वापस सुनहरे दौर में लौटने का मौका मिल सकता
है। पत्रकारों को ऐसी दैवीय प्रेरणा देने वाली शक्ति को नमन। आइये सुनें
अनवर की आवाज़ में एक ग़ज़ल सुनें जो फिल्म "ये इश्क नहीं आसान"
से है। इस गीत को लिखा आनंद बक्षी ने और संगीत तैयार किया है
लक्ष्मी प्यारे ने। अमिताभ बच्चन की फिल्म कालिया बनाने वाले
फिल्मकार टीनू आनंद ने इस फिल्म का निर्देशन किया है। फिल्म ने
अच्छा व्यवसाय नहीं किया मगर प्रयास सराहनीय कहा जायेगा। फिल्म
का संगीत सुनने लायक है।



गीत के बोल:

मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं

मेरी निगाहों के आसमान से
ज़मीन-ए-दिल पर उतर रहे हैं

ये कैसे मुमकिन है हमनशीनों
ये कैसे मुमकिन है हमनशीनों
के दिल को दिल की खबर ना पहुंचे
के दिल को दिल की खबर ना पहुंचे

उन्हें भी हम याद आते होंगे
के जिनको हम याद कर रहे हैं

मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं

इसी मुहब्बत की रोज़-ओ-शब् हम
इसी मुहब्बत की रोज़-ओ-शब् हम
सुनाया करते थे दास्तानें
सुनाया करते थे दास्तानें

इसी मुहबत का नाम लेते हुवे
भी हम आज डर रहे हैं

मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं

चले हैं थोड़ी ही दूर तक बस
वो साथ मेरे सलीम फिर भी
ये बात मैं कैसे मैं भूल जाऊं
के हम कभी हमसफ़र रहे हैं

मेरी निगाहों के आसमान से
ज़मीन-ए-दिल पर उतर रहे हैं

मेरे ख्यालों की रहगुज़र से
वो देखिये वो गुज़र रहे हैं
...................................................
Mere khayalon ki rehguzar-Ye ishq nahin asaan 1984

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Oct 25, 2009

कोई परदेसी आया- हम हैं लाजवाब १९८४

इस गीत को देखने ही मैं थिएटर में गया था। इसी गीत
को नहीं देख पाया। फ़िल्म के दौरान कुछ मुफ्त के इंटरवल
हो गए मित्रों के कारण। बाद में इसकी वी. सी. डी. लाके देख पाया ।
इस गाने ने धमाल मचा दिया था। इसके बोल, संगीत दोनों
लाजवाब हैं। फ़िल्म की कहानी लाजवाब भले ना रही हो, गीत
शानदार हैं। गायक हैं अनवर जिनका पूरा नाम अनवर हुसैन है।
आनंद बक्षी का लिखा ये गीत सबसे लोकप्रिय 'परदेसी गीत ' की
सूची में शामिल है। इसके संगीतकार हैं आर डी बर्मन। परदे
पर इसको गा रहे हैं कुमार गौरव।



गाने के बोल:

कोई परदेसी आया, परदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में
देस बनाया, परदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में

सारी ज़मीं से, सारे आसमान से
प्यार बढ़ा है, दोनों जहाँ से
सारे संदेसे इक संदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में
देस बनाया, परदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में

हम सब मुसाफिर, दुनिया सफर है
इस रस्ते में, किस को ख़बर है
कौन कहाँ मिल जाए, किस भेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में
देस बनाया, परदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में

अपना है यारों ये सारा ज़माना
बेगानों को भी ना ठुकराना
दर्द हजारों दिल की इक ठेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में
देस बनाया, परदेस में
कोई परदेसी आया, परदेस में

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Mar 30, 2009

हमसे का भूल हुई- जनता हवालदार १९७९

गायक अनवर का पहला लोकप्रिय गीत जिसने लोकप्रियता
की हदें पार कीं । इसके बोल और संगीत बराबर के जिम्मेदार
इसको प्रसिद्धि दिलाने में। बोल हैं मजरूह के और संगीत है
राजेश रोशन का। ऐसा सुना जाता है कि राजेश खन्ना भी
एक बार धोखा खा गए और उन्होंने मान लिया था कि ये गाना
रफी ने गाया है। यूँ भी अनवर की आवाज़ रफी की आवाज़ के सबसे
नज़दीक है। यू ट्यूब पर जो विडियो है उसमे साउंड क्वालिटी
थोडी ख़राब है।



गाने के बोल:

हमसे का भूल हुई जो ये सज़ा हमका मिली
हमसे का भूल हुई जो ये सज़ा हमका मिली
अब तो चारों ही तरफ़ बंद है दुनिया की गली
हमसे का भूल हुई जो ये सज़ा हमका मिली

दिल किसी का न दुखे हमने बस इतना चाहा
पाप से दूर रहे झूठ से बचना चाहा
पाप से दूर रहे झूठ से बचना चाहा
उसका बदला ये मिला उलटी छुरी हमपे चली
अब तो चारों ही तरफ़ बंद है दुनिया की गली
हमसे का भूल हुई जो ये सज़ा हमका मिली

हमपे इलज़ाम ये है चोर को क्यूँ चोर कहा
क्यूँ सही बात कही काहे न कुछ और कहा
क्यूँ सही बात कही काहे न कुछ और कहा
ये है इनसाफ़ तेरा वाह रे दाता की गली
अब तो चारों ही तरफ़ बंद है दुनिया की गली
हमसे का भूल हुई जो ये सज़ा हमका मिली

अब तो इमान धरम की कोई कीमत ही नहीं
जैसे सच बोलने वालों की ज़रूरत ही नहीं
जैसे सच बोलने वालों की ज़रूरत ही नहीं
ऐसी दुनिया से तो दुनिया तेरी वीरान भली
अब तो चारों ही तरफ़ बंद है दुनिया की गली
हमसे का भूल हुई जो ये सज़ा हमका मिली
हमसे का भूल हुई जो ये सज़ा हमका मिली
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Hamse kaa bhool hui-Janta Hawaldar 1979

Artists: Rajesh Khanna

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