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Feb 4, 2020

प्यार है इक निशान क़दमों का-मुक्ति १९७७

दर्शन पर कोई गीत सुने काफ़ी दिन हो गए हैं. ऐसे
गीत अवश्य सुनना चाहिए जिससे हीलियम गैस थोड़ी
नियंत्रण में रहे और मन का गुब्बारा ज्यादा ऊपर ना
उड़ के ज़मीन के नज़दीक रहे.

संगीत भक्त इतने सारे gem गिनवा देते हैं कि उसके
बाद तरह तरह के जैम और मुरब्बे याद आने लगते हैं
और मुंह में पानी आने लगता है.

सुनते हैं एक उम्दा बोलों वाला गीत फिल्म मुक्ति से
जिसे आनंद बक्षी ने लिखा है. इसकी धुन आर डी बर्मन
ने बनाई है और इसे रफ़ी ने गाया है. इसे फिल्म के
टाईटल्स पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

मिल जाती है संसार में संसार से मुक्ति
मिलती नहीं मर के भी मगर प्यार से मुक्ति

प्यार है इक निशान क़दमों का
प्यार है इक निशान क़दमों का
जो मुसाफ़िर के बाद रहता है
प्यार है इक निशान क़दमों का
जो मुसाफ़िर के बाद रहता है
भूल जाते हैं लोग सब लेकिन
कुछ ना कुछ फिर भी याद रहता है
प्यार है इक निशान क़दमों का

रोक लेती हैं राह में यादें
जब भी राहों से हम गुज़रते हैं
रोक लेती हैं राह में यादें
जब भी राहों से हम गुज़रते हैं
खो गये क़हक़हों में जो उनको
आँसुओं में तलाश करते हैं
दिल पे हल्की सी चोट लगती है
दर्द आँखों से टूट बहता है

प्यार है इक निशान क़दमों का

कुछ भी तो कम नहीं हुआ देखो
ज़ख्म हैं फूल हैं बहारें हैं
कुछ भी तो कम नहीं हुआ देखो
ज़ख्म हैं फूल हैं बहारें हैं
तुम नहीं हो मगर तुम ही तुम हो
सब तुम्हारी ही यादगारें हैं
टूट जाने से टूट जाते हैं
दिल के रिश्ते ये कौन कहता है

प्यार है इक निशान क़दमों का

ये ग़लत है के मरने वालों को
ज़िंदगी से निजात मिलती है
ये ग़लत है के मरने वालों को
ज़िंदगी से निजात मिलती है
इस बहाने से ग़म के मारों को
और लम्बी हयात मिलती है
माना ज़ंजीरें टूट जाती हैं
आदमी फिर भी क़ैद रहता है
भूल जाते हैं लोग सब लेकिन
कुछ ना कुछ फिर भी याद रहता है

प्यार है इक निशान क़दमों का
जो मुसाफ़िर के बाद रहता है
…………………………………………………
Pyar hai ek nishan-Mukti 1977

Artists: Pehchano kaun ?

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Dec 3, 2019

दिल सजन जलता है-मुक्ति १९७७

आशा भोंसले के स्पेशल गीतों में से आज एक सुन लेते
हैं. सन १९७७ की फिल्म मुक्ति की कहानी समझने के लिए
आपको फिल्म ढंग से देखना पड़ेगी. सिर्फ शीर्षक से आपको
कुछ समझ नहीं आने वाला.

प्रस्तुत गीत को देख के भी अगर आप कथानक का अनुमान
लगाएं तो नहीं मालूम कर पाएंगे फिल्म के बारे में. विषय
थोडा गंभीर है फिल्म का.

आनंद बक्षी की रचना है और आर डी बर्मन का संगीत. इसे
बिंदिया गोस्वामी पर फिल्माया गया है. जिस तकनीक का
इस्तेमाल गाने में किया गया है उसे वॉइस ओवर कहते हैं.
झाग नहाने के साबुन से इतने प्रकट नहीं होते. ये तो कोई
कपडे धोने वाला डिटर्जेंट है जी, खुशबूदार, झागवाला !

गीत में नायिका का नाम भी आता है.



गीत के बोल:

ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला हा ला ला ला ला ला हा ला ला ला

दिल सजन जलता है ये बदन जलता है
लगी दिल की लगी हुई कब से है जाने
जब से लगा कहीं पे दिल तब से है जाने
लगी दिल की लगी हुई कब से है जाने
जब से लगा कहीं पे दिल तब से है जाने

दिल सजन जलता है ये बदन जलता है
दिल सजन जलता है ये बदन जलता है

ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
चली हवा ये कैसी फूलों की गलियों में
शबनम के गिरने से आग लगे कलियों में
हो चली हवा ये कैसी फूलों की गलियों में
शबनम के गिरने से आग लगे कलियों में
ये चमन जलता है ये बदन जलता है
ये चमन जलता है ये बदन जलता है

प्यार का रंग लगा है जब से मेरी बिंदिया में
ये धरती जलती है सपनों में निंदिया में
हो प्यार का रंग लगा है जब से मेरी बिंदिया में
ये धरती जलती है सपनों में निंदिया में
ये गगन जलता है ये बदन जलता है
ये गगन जलता है ये बदन जलता है
लगी दिल की लगी हुई कब से है जाने
ला ला ला
जब से लगा कहीं पे दिल तब से है जाने
लगी दिल की लगी हुई कब से है जाने
ला ला ला
जब से लगा कहीं पे दिल तब से है जाने
या या या या या या या या या
या या या या या या या या या
…………………………………………….
Dil sajan jalta hai-Mukti 1977

Artists: Bindiya Goswami, Vikram

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Jan 11, 2018

सुहानी चाँदनी रातें-मुक्ति १९७७

सन १९७७ के सबसे ज्यादा बजे गीतों में एक है मुकेश का गाया
गीत फिल्म मुक्ति से. एक आकर्षक धुन में बंधा ये गीत लिखा है
आनंद बक्षी ने. इसके संगीतकार हैं आर डी बर्मन. इस फिल्म के
सभी गीत जनता ने तबियत से सुने हैं.

मुकेश के गए लोकप्रिय गीत जिनका संगीत आर डी बर्मन ने तैयार
किया है कुछ और भी हैं:-

कहीं करती होगी वो मेरा इंतज़ार-फिर कब मिलोगी
जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा-कटी पतंग
लल्ला लल्ला लोरी-मुक्ति
एक दिन बिक जायेगा-धरम करम



गीत के बोल:

सुहानी चाँदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं
सुहानी चाँदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं
तुम्हारे प्यार की बातें हमें सोने नहीं देतीं
सुहानी चाँदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं

तुम्हारे रेशमी जुल्फ़ों में दिल के फूल खिलते थे
तुम्हारे रेशमी जुल्फ़ों में दिल के फूल खिलते थे
कहीं फूलों के मौसम में हम तुम भी मिलते थे
पुरानी वो मुलाकातें हमें सोने नही देतीं
तुम्हारे प्यार की बातें हमें सोने नहीं देतीं
सुहानी चाँदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं

कहीं ऐसा न हो लग जाये दिल में आग पानी से
कहीं ऐसा न हो लग जाये दिल में आग पानी से
बदल ले रास्ता अपना घटाएं मेहरबानी से
के यादों की ये बरसातें हमें सोने नहीं देतीं
तुम्हारे प्यार की बातें हमें सोने नहीं देतीं

सुहानी चाँदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं
...................................................................
Suhani chandni ratein-Mukti 1977

Artists: Shashi Kapoor, Vidya Sinha, Sanjeev Kumar

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Apr 25, 2017

लल्ला लल्ला लोरी(मुकेश)-मुक्ति १९७७

वर्ज़न सोंग्स की श्रेणी में अगला प्रस्तुत है फिल्म मुक्ति से
ये एक लोरी गीत है जिसे गा कर बच्चे को सुलाने की एक
कोशिश हो रही है लेकिन बच्चा सो नहीं रहा है.

गीत दो संस्करण में उपलब्ध है-मुकेश और लता की आवाजों
में. मुकेश वाला संस्करण ज्यादा लोकप्रिय है. आनंद बक्षी ने
इसे लिखा है और फिल्म मुक्ति के लिए इसे संगीतबद्ध किया
है आर डी बर्मन ने. परदे पर दिखाई देने वाला बच्चा एक
लड़का है.



गीत के बोल:

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  मुन्नी करे तमाशा

छोटी छोटी प्यारी प्यारी सुन्दर परियों जैसी है
किसी की नज़र ना लगे  मेरी मुन्नी ऐसी है
शहद से भी मीठी  दूध से भी गोरी
चुपके चुपके  चोरी चोरी  चोरी

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  मुन्नी करे तमाशा
कारी रैना के माथे पे  चमके चाँद सी बिंदिया
मुन्नी के छोटे छोटे नैनों में खेले निंदिया
सपनों का पलना  आशाओं की डोरी
चुपके चुपके  चोरी चोरी  चोरी

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  मुन्नी करे तमाशा
…………………………………………………….
Lalla lalla lori(Mukesh)-Mukt 1977

Artists: Shashi Kapoor, Vidya Sinha, Master Bittu

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Apr 21, 2017

लल्ला लल्ला लोरी(लता)-मुक्ति १९७७

लता मंगेशकर का गाया एक गीत सुनते हैं फिल्म मुक्ति से
जो एक लोरीनुमा गीत है. इसके पहले अंतरे में दर्शन है
रो दूसरे अंतरे में इंतज़ार का दर्द.

आनंद बक्षी के बोल और आर डी बर्मन के संगीत वाला ये
गीत परदे पर विद्या सिन्हा गा रही हैं.



गीत के बोल:

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा
लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा

आधी मुरझा जाती है  थोड़ी सी कलियाँ खिलती हैं
आधी मुरझा जाती है  थोड़ी सी कलियाँ खिलती हैं
सारी की सारी खुशियाँ  जीवन में किसको मिलती हैं
या टूटे पलना  या टूटे डोरी
चुपके चुपके चोरी चोरी  चोरी

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा

लिख लेती लिखवा लेती मैं  आगे क्या है गाना
लिख लेती लिखवा लेती मैं  आगे क्या है गाना
लेकिन मैं क्या करती तेरे पापा को था जाना
मुझसे भी छिप कर  तुझसे भी चोरी
चुपके चुपके चोरी चोरी  चोरी

लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा
लल्ला लल्ला लोरी  दूध की कटोरी
दूध में बताशा  जीवन खेल तमाशा
.......................................................
Lalla lalla lori(Lata)-Mukti 1977

Artists: Vidya Sinha,

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Aug 5, 2011

दिल लुभा के मेरे साथी-मुक्ति १९६०

दुर्लभ और कर्णप्रिय गीतों की श्रृंखला में अगला मधुर गीत
पेश है फिल्म मुक्ति (१९६०) से. मोतीलाल और नलिनी जयवंत
अभिनीत फिल्म में अनजान से संगीतकार मलय चक्रवर्ती का
संगीत है.

प्रस्तुत गीत लता मंगेशकर की आवाज़ में है जिसके बोल लिखे
हैं मुनीर काज़मी ने.



गीत के बोल:

दिल लुभा के मेरे साथी भूल जाना ना
जैसे रोती है घटा ऐसे रुलाना ना
दिल लुभा के मेरे साथी भूल जाना ना
दिल लुभा के भूल जाना ना

बात नैनों से हुई रातों की नींद गयी
बात नैनों से हुई रातों की नींद गयी
बार बार आये ख्यालों में ये कह न सकी
इस तडपते दिल को तुम मेरी कसम तडपाना ना
जैसे रोती है घटा ऐसे रुलाना ना
दिल लुभा के भूल जाना ना

चांदनी भी खिल उठी नीले गगन के बागों में
चांदनी भी खिल उठी नीले गगन के बागों में
चैन दिल का ढूंढती हूँ चन्द्रमा के दाग में
चैन दिल का ढूंढती हूँ चन्द्रमा के दाग में

रात के तारों को बादल में छिपाना ना
जैसे रोती है घटा ऐसे रुलाना ना
दिल लुभा के भूल जाना ना
....................................
Dil lubha ke mere sathi-Mukti 1960

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