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Dec 28, 2018

तुमको फ़ुरसत हो-बेवफ़ा १९५२

पूल में तैरती नायिका से नायक मजेदार प्रश्न कर रहा है.
उसे पीपिंग टॉम नहीं कह सकते क्यूंकि कहानी के अनुसार
वो प्रेमी है उसके अलावा वो तो सामने बैठा देख रहा है.
पीपिंग टॉम छुप के देखा करते हैं.

अब या तो वो पहली बार कोट पैंट पहन कर आया है या
पहली बार उसे किसी ने सेब खाने को दिया है तो वो
इतना गदगद है कि नायिका को बतलाना चाहता है अपनी
उपलब्धियों के बारे में.

स्विमिंग पूल फर्स्ट फ़्लोर पर है और नायक ग्राउंड फ्लोर पर.
नायक की आँखों का एंगल देख कर तो ऐसा ही लग रहा
है.

बेवफ़ा फिल्म का ये बेहतर गीत है और ज्यादा लोकप्रिय भी.
सरशर सैलानी के बोल हैं और ए आर कुरैशी का म्यूज़िक




गीत के बोल:

तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो
तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो
चार आँखें न करो
चार आँखें न करो एक नज़र देख तो लो
तुमको फ़ुर्सत हो

बात करने के लिए कौन तुम्हें कहता है
बात करने के लिए कौन तुम्हें कहता है
ना करो हमसे कोई
ना करो हमसे कोई बात मग़र देख तो लो

तुमको फ़ुर्सत हो
तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो

अपने बीमार-ए-मोहब्बत की तसल्ली के लिए
अपने बीमार-ए-मोहब्बत की तसल्ली के लिए
हाल-ए-दिल पूछ तो लो
हाल-ए-दिल पूछ तो लो ज़ख़्म-ए-जिगर देख तो लो

तुमको फ़ुर्सत हो
तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो

दिल-ए-बर्बाद को आबाद करो या न करो
दिल-ए-बर्बाद को आबाद करो या न करो
कम से कम तुम मेरा
कम से कम तुम मेरा उजड़ा हुआ घर देख तो लो

तुमको फ़ुर्सत हो
तुमको फ़ुर्सत हो मेरी जान तो इधर देख तो लो
तुमको फ़ुर्सत हो
………………………………………………………..
Tum ko fursat ho-Bewafa 1952

Artist: Raj Kapoor, Nargis

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Oct 26, 2018

तू आये न आये तेरी खुशी-बेवफा १९५२

तलत महमूद की मखमली आवाज़ में सरशर सैलानी की
एक रचना सुनेंगे फिल्म बेवफा से. इस फिल्म के गाने एक
ट्रीट की तरह हैं. तलत के गाये काफी गीत मौजूद हैं इसमें.

फिल्म की गीत सुने जाते हैं इसकी वजह धुनें बेहतर होना
है या फिल्म की स्टारकास्ट, ये सोचने वाली बात है.

गीत में नायक एक ही जगह बैठा है और नायिका के ही
मूवमेंट्स दिखलाई देते हैं गीत में. ये भी एक समय था
बॉलीवुड में और एक समय ऐसा भी आया जब नायिका
एक जगह बैठी होती और नायक पूरे शरीर को हिला रहा
होता, उछल कूद कर रहा होता.




गीत के बोल:

तू आये न आये तेरी खुशी
तू आये न आये तेरी खुशी
हम आस लगाये बैठे हैं
दीदार की प्यासी आँखों में
दीदार की प्यासी आँखों में
तूफ़ान छुपाये बैठे हैं
तू आये न आये तेरी खुशी

ए दर्द-ए-मुहब्बत तेरी क़सम
दिल हमने लगा के देख लिया
ए दर-ए-मुहब्बत तेरी क़सम
दिल हमने लगा के देख लिया
अश्कों की ज़ुबानी किस्सा-ए-ग़म
दुनिया को सुना के देख लिया
गैरों से गिला क्या अपने ही
गैरों से गिला क्या अपने ही
जब आँख चुराए बैठे हैं
गैरों से गिला क्या अपने ही
जब आँख चुराए बैठे हैं
तू आये न आये तेरी खुशी

इतना तो बता दे ए ज़ालिम
अब नज़रों से तू दूर है क्यूँ
इतना तो बता दे ए ज़ालिम
अब नज़रों से तू दूर है क्यूँ
मिलना ही तुझे मंज़ूर नहीं
या मेरी तरह मजबूर है तू
तू कह दे अगर तो उठ जायें
हम तेरे बिठाये बैठे हैं
तू कह दे अगर तो उठ जायें
हम तेरे बिठाये बैठे हैं
तू आये न आये तेरी खुशी
……………………………………….
Too aaye na aaye teri-Bewafa 1952

Artist: Raj Kapoor, Nargis

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Oct 22, 2018

दिल मिला दर्द को मेहमान-बेवफ़ा १९५२

गीतकार के सामने भी समस्या खड़ी हो जाती है एक ही
फिल्म में एक जैसे गाने लिखने की नौबत आ जाती है.
तब वो लिखता है- आँख बक्ष्शी है आँख लड़ाने के लिए,
मुंह बख्शा है खाना खाने के लिए, अरे नहीं नहीं, इधर
इसका मतलब होगा-गाना गाने के लिए.

पहली पंक्ति में गीतकार ने अपनी भड़ास निकल दी है
जो शायद संगीतकार के समझ ना आई और ना ही
परदे पर गाने वाले के. गायक को इतनी छूट कहाँ
फिल्म उद्योग में के वो कुछ सोच सके.

ये हमारा अपना विचार है, ३-५ पांच पन्ने के निबंध
वाले चाहें तो अपनी दलीलें पेश कर सकते हैं इधर.
देर लगती है बुझाने के लिए तो फायर ब्रिगेड बुलवा
लो.

सरशर सैलानी के बोल, अल्लारखा का संगीत है और
तलत महमूद की आवाज़.



गीत के बोल:

दिल मिला दर्द को मेहमान बनाने के लिये
आँख बख़्शी है कहीं आँख लड़ाने के लिये
हो लड़ाने के लिये
आँख बख़्शी है कहीं आँख लड़ाने के लिये

काम हाथों का है मिलने की दुआएं करना
काम हाथों का है मिलने की दुआएं करना
सर मिला आपके कदमों पे झुकाने के लिये
सर मिला आपके कदमों पे झुकाने के लिये
हो झुकाने के लिये
सर मिला आपके कदमों पे झुकाने के लिये

हुस्न की आँख में आँसू नहीं देखे जाते
हुस्न की आँख में आँसू नहीं देखे जाते
इश्क़ तैयार है हर नाज़ उठाने के लिये
इश्क़ तैयार है हर नाज़ उठाने के लिये
हो उठाने के लिये
इश्क़ तैयार है हर नाज़ उठाने के लिये

हाय आते ही ये जाने का तक़ाज़ा कैसा
हाय आते ही ये जाने का तक़ाज़ा कैसा
देर लगती है लगी दिल की बुझाने के लिये
देर लगती है लगी दिल की बुझाने के लिये
हो बुझाने के लिये
देर लगती है लगी दिल की बुझाने के लिये
आँख बख़्शी है कहीं आँख लड़ाने के लिये
……………………………………………….
Dil mila dard ko mehmaan-Bewafa 1952

Artist: Raj Kapoor

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Sep 17, 2018

यही बहार है-राग रंग १९५२

सरशर सैलानी के लिखा हुआ एक गाना सुनते हैं फिल्म
राग रंग से. फिल्म की नायिका गीता बाली हैं. गीत का
वीडियो उपलब्ध नहीं है.

हर्षोल्लास वाला गीत है और फिल्म में कई रंग वाले
गाने हैं. मनियापुर के छैला नाम से भी एक गाना है.
ये मनियापुर कहाँ है कोई बतलायेगा.

फिल्म में संगीत सेवा रोशन ने प्रदान करी है.



 गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला
यही बहार है यही बहार है
यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की
यही घडी है जवानी के गुनगुनाने की
हाँ मुस्कुराने की

ये प्यारे प्यारे नज़ारे ये ठंडी ठंडी हवा
ये हल्का हल्का नशा
ये काली काली घटाओं की मस्त मस्त अदा
ये कोयलों की सदा
मचल के आ गई रुत मस्तियाँ लुटाने की
हाँ झूम जाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की

कली कली से ये भंवरे ने मुस्कुरा के कहा 
नज़र मिला के कहा 
नज़र से काम न निकला तो गुदगुदा के कहा 
गले लगा के कहा 
किया है प्यार तो किया है प्यार तो 
किया है प्यार तो परवाह न कर ज़माने की 
हाँ हँसी उडाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जो टूटता है रुबां
जो टूटा है रुबां उसको टूट जाने दे
मेरे शबाब को जी भर के गीत गाने दे
हाँ गीत गाने दे
मेरे शबाब को जी भर के गीत गाने दे
हाँ गीत गाने दे
तड़प उठी हुई तड़प उठी हुई
तड़प उठी हैं तमन्नायें झूम जाने की
हाँ लगी बुझाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की
…………………………………………………
Yahi bahar hai-Raag rang 1952

Artist: Geeta Bali

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Feb 2, 2018

आग से न खेलो बाबूजी-गुरु घंटाल १९५६

सन १९५६ की एक फिल्म है गुरु घंटाल. इस फिल्म से एक
गीत सुनते हैं आज. गीता दत्त के साथ इसे आगा ने गाया
है.

सरशर सैलानी के बोल हैं और लच्छीराम का संगीत. गीत थोडा
रेयर किस्म का है.

फिल्म में प्रमुख भूमिकाएं मोतीलाल और उषा किरण की हैं.
साथ में अजीत, मीना कुमारी, शीला रमानी, वीणा, सुन्दर और
हेलन भी मौजूद हैं. फिल्म का निर्माण होमी वाडिया ने किया.




गीत के बोल:

आग से ना खेलो बाबूजी

लगे तो बुझे न बाबू ओ बाबू
प्यार की आग है जी प्यार की आग है
प्यार जिसे कहते हैं जवानी का तो हक है
जवानी का तो हक है
आ आ आ आ आ जिंदगी एक साज़ है
प्यार उसका राग है
राग जो अधूरा होगा
राग जो अधूरा होगा रोग बन जायेगा
रोग बन जायेगा
बनने दो जी रोग बड़ा मजा आयेगा
बड़ा मजा आयेगा

आग से ना खेलो बाबूजी

दिल बड़ी चीज़ है ओ बाबू रखना संभाल के
जी रखना संभाल के
दिल को लगाना तो लगाना देखभाल के
लगाना देखभाल के
उलटी चाल चलने वाला बाज़ी हार जायेगा
बाज़ी हार जायेगा
अरे हार जाने दो जी बाज़ी बड़ा मजा आयेगा
बड़ा मजा आयेगा

आग से ना खेलो बाबूजी

तीसमार खां हो चाहे गुरु घंटाल हो
जी गुरु घंटाल हो
पहली शर प्यार की है पाकिट में माल हो
जी पाकिट में माल हो
फ़ोकट का प्यार कहीं जूतियाँ खिलाएगा
जी जूतियाँ खिलाएगा
अरे खाने दो जी जूतियाँ बड़ा मज़ा आयेगा
बड़ा मज़ा आयेगा

आग से ना खेलो बाबूजी
………………………………………………..
Aag se na khelo babuji-Guru ghantaal 1956

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May 11, 2017

छोटा सा फ़साना है-बिरहा की रात १९५०

हुस्नलाल भगतराम के संगीत वाला एक गीत सुनते हैं.


फिल्म: बिरहा की रात
वर्ष: १९५०
गीतकार: सरशर सैलानी
गायक: रफ़ी, लता
संगीत: हुस्नलाल भगतराम





छोटा सा फ़साना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का
और ही तराना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का
और ही तराना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का
छोटा सा फ़साना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का

हो ओ ओ ये किसने चुपके चुपके मुझे बेक़रार कर दिया
ये किसने चोरी चोरी मेरे दिल पे वार कर दिया
ये किसने चुपके चुपके मुझे बेक़रार कर दिया
ये किसने चोरी चोरी मेरे दिल पे वार कर दिया
मज़े की बात देखिये कि दिल मेरा निशाना है
दिल मेरा निशाना है

छोटा सा फ़साना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का
छोटा सा फ़साना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का

हो ओ ओ यूँ ही बदल न जाये कहीं दिल मेरे हुज़ूर का
दिल मेरे हुज़ूर का
कहीं क़ुसूर बन न जाये प्यार बेक़सूर का
यूँ ही बदल न जाये कहीं दिल मेरे हुज़ूर का
कहीं क़ुसूर बन न जाये प्यार बेक़सूर का
पुकारता है दिल मेरा कि तू है तो ज़माना है
तू है तो ज़माना है

छोटा सा फ़साना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का
छोटा सा फ़साना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का
और ही तराना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का
छोटा सा फ़साना है तेरे मेरे प्यार का
हो तेरे मेरे प्यार का
....................................................................
Chhota sa fasana-Birha ki raat 1950

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Feb 14, 2017

कहीं दिल लगाने का सामान-राग रंग १९५२

फिल्म राग रंग से आपको २ गीत सुनवाए हैं पहले. आज तीसरा
गीत सुनते हैं जिसे राजकुमारी ने गाया है.

सरशर सैलानी का गीत है और रोशन का संगीत. गीत में गति
परिवर्तन होता है दो जगह पर. ऐसे गति परिवर्तन वाले गीत
आपने राहुल देव बर्मन के संगीत में काफी सुने होंगे. यूँ कहें
उनके संगीत वाले ऐसे गीत ज्यादा सुनने को मिले हमें. रोशन
ने हलके फुल्के गीत भी काफी बनाये. उन्हें आम जनता शानदार
कव्वालियों के लिया ज्यादा याद किया करती है.




गीत के बोल:

कहीं दिल लगाने का सामान कर ले
सामान कर ले
हो मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
आसान कर ले
कहीं दिल लगाने का सामान कर ले
सामान कर ले

मुरादों के दिन हैं
मुरादों के दिन हैं ये
उमँगों की रातें उमँगों की रातें
ये बातें नहीं हैं मुंह से
बातें नहीं हैं मुंह से
कहने की बातें कहने की बातें
निगाहों निगाहों में पहचान कर ले
निगाहों निगाहों में पहचान कर ले
मँज़िल की
मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
हो आसान कर ले हो आसान कर ले
कहीं दिल लगाने का सामान कर ले
सामान कर ले
वो मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
आसान कर ले


वही ज़िँदगी है जो वही ज़िँदगी है जो
खुशियों से खेले खुशियों से खेले
मुश्क़िल है दुनिया में
मुश्क़िल है दुनिया में
जीना अकेले जीना अकेले
किसी की तमन्ना को मेंहमान कर ले
किसी की तमन्ना को मेंहमान कर ले
मँज़िल की
मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
हो आसान कर ले हो आसान कर ले

कहीं दिल लगाने का सामान कर ले
सामान कर ले
वो मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
आसान कर ले
.....................................................................
Kahin dil lagane ka samaan-Raag rang 1952

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Dec 1, 2016

ज़रा सुन तो ले हसीना-सुन तो ले हसीना १९५८

इस फिल्म का नाम ऐसा है मानो किसी गीत की कोई
पंक्ति हो. सुन तो ले हसीना फिल्म का नाम है जो शायद
उस समय के हिसाब से लंबा नाम था. हसीना पूरी कहानी
में सुन नहीं रही है तो फिल्म का नाम ही ऐसा रख दिया
गया. वैसे तो फ़िल्मी हसीनाएं ज़ल्द सुनती हैं और ३ मिनट
के गाने के तीसरे मिनट के खत्म होने के चंद सेकण्ड शेष
रहने पे अच्छे से सुनना शुरू कर देती हैं.

ये गीत लिखा है सरशर सैलानी ने और इसकी धुन बनाई है
एस मोहिंदर ने. आशा और रफ़ी इस गीत को गा रहे हैं.



गीत के बोल:

ज़रा सुन तो ले
ओ ज़रा सुन तो ले हसीना
ओ ज़रा सुन तो ले हसीना
अरे तेरा पीछा करते करते
हो गया एक महीना
ओ ज़रा सुन तो
ओ ज़रा सुन तो ले हसीना
ओ पीछा छोड़ मेरा
पीछा छोड़ तू अल्लादीना
पीछा छोड़ तू अल्लादीना
कोतवाल से कह के कर दूं
मुश्किल तेरा जीना
ओ पीछा छोड़ मेरा
पीछा छोड़ तू अल्लादीना

मांगी थी खजूर खुदा से ओ ओ ओ ओ
मांगी थी खजूर खुदा से
मिल गयी हमको एक हूर
हूर के पीछे पड़ा हुआ है कबसे एक लंगूर
...........................................................
Zara sun to le haseena-Sun to le haseena 1958

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Oct 30, 2016

जगमगाती दीवाली की रात आ गई-स्टेज १९५१

दीपावली के शुभ अवसर पर दृश्य अदृश्य सभी पाठकों को
ढेर सारी शुभकामनाएं. तो सभी को हैप्पी हप्पी, हैं जी?
हंजी.

इस सु-अवसर पर सुनते हैं स्टेज फिल्म से एक गीत जिसे
सरशर सैलानी ने लिखा है, आशा भोंसले और कोरस ने
गाया है और जिसकी धुन बनाई है हुस्नलाल-भगतराम ने.






गीत के बोल:

जगमगाती
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी
जगमगाती
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी
जैसे तारों की
जैसे तारों की घर में बारात आ गयी
जगमगाती
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी

जैसे फूलों के
जैसे फूलों के चेहरे पे रंग आ गया
हां हां हां रंग आ गया
रंग आ गया
हो हो हो
रंग आ गया
जैसे कलियों को
जैसे कलियों को हँसने का ढंग आ गया
हाँ हाँ हाँ ढंग आ गया
हाँ हाँ हाँ ढंग आ गया
हो हो हो ढंग आ गया
जैसे दुल्हन नसीहत से
जैसे दुल्हन नसीहत से शरमा गयी
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी
जगमगाती
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी
जैसे तारों की
जैसे तारों की घर में बारात आ गयी
जगमगाती
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी

दीपों माला की धरती पे सुन के खबर
हां हां सुन के खबर
हो हो सुन के खबर
दीपों माला की धरती पे सुन के खबर
चाँद निकला नहीं आज आकाश पर
दीपों माला की धरती पे सुन के खबर
चाँद निकला नहीं आज आकाश पर
आज धरती भी आकाश पर छा गयी
छा गयी छा गयी छा गयी छा गयी
आज धरती भी आकाश पर छा गयी

जगमगाती
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी
जगमगाती
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी
जैसे तारों की
ओ जैसे तारों की घर में बारात आ गयी
जगमगाती
ओ जगमगाती दीवाली की रात आ गयी
रात आ गयी रात आ गयी रात आ गयी
हां हां रात आ गयी हो हो रात आ गयी
................................................................
Jagmagati diwali ki raat-Stage 1951

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Jun 20, 2011

बन के सुहागन रही अभागन-आधी रात १९५०

एक बार किसी ने फरमाइश की-मेलंकली किसिम के गीत सुनवाओ।
हमने कहा ज़रूर। हमने उसे हुस्नलाल भगतराम द्वारा संगीतबद्ध
कुछ गीत सुनवा दिए। जो गीत सुनवाए थे उनमें से एक था फिल्म
आधी रात का यह गीत-बन के सुहागन रही अभागन। सन १९५० की
फिल्म आधी रात में अशोक कुमार और नर्गिस प्रमुख भूमिकाओं
में हैं। सरशर सैलानी का लिखा गीत गा रही हैं लता मंगेशकर।

पुराने फ़िल्मी गीत इस मायने में भी बढ़िया लगा करते थे कि २-३ मिनट
में ख़त्म हो जाया करते थे। आजकल के गीतों में बोलों से ज्यादा वाद्य
यंत्रों की आवाजें होती हैं जिन्हें कभी कभी ज़बरदस्ती झेलना पड़ता है।





गीत के बोल:

बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
फूटी हुई तक़दीर के आगे
चल न सकी तदबीर मेरी
चल न सकी तदबीर मेरी

बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी

दिल में आग आँखों में पानी
दिल में आग आँखों में पानी
हाय मेरी बरबाद जवानी
हाय मेरी बरबाद जवानी
किसको सुनाऊँ ग़म की कहानी
कौन बँधाए धीर मेरी
कौन बँधाए धीर मेरी

बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी

ख़ून के आँसू पीती हूँ मैं
ख़ून के आँसू पीती हूँ मैं
मौत की आस पे जीती हूँ मैं
मौत की आस पे जीती हूँ मैं
इसके सिवा ऐ दुनिया वालो
कोई नहीं तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी

बन के सुहागन, रही अभागन
फूट गई तक़दीर मेरी
फूट गई तक़दीर मेरी
................................
Ban ke suhagan-Aadi Raat 1950

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