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Jan 28, 2012

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू-झुमरू १९६१

गीतों को सुनते सुनते कुछ अंतराल के बाद उसकी बारीकियां पकड़ में
आने लगती हैं और गुनगुनाने वाले का मुगालता ख़त्म हो जाता है कि वह
इसे बढ़िया ढंग से गा रहा है। ये बात दीगर है कि कुछ ओर्केस्ट्रा के कलाकारों
को ये मुगालता ता-उम्र बना रहता है। आज आपको एक गीत ऐसा सुनवाते हैं
जिसे मैंने जितनी बार इधर उधार सुना बिगड़ा हुआ ही सुना। इसकी हू-ब-हू
कॉपी करना असंभव है। गीत कठिनतम गीतों में से एक है और गायक का
अनूठा अंदाज़ इसमें अपने चरम पर है।

फिल्म का नाम है झुमरू और ये फिल्म का शीर्षक गीत है। गीत लिखा है
मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी धुन स्वयं किशोर कुमार ने बनाई है ।

गीत के बोलों में जो योड्लिंग के साथ साथ कुछ अन्य शब्दों का समावेश भी
है जिसे आप स्वयं समझिये।



गीत के बोल:

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
साथ में हमसफ़र ना कोई कारवां,
भोला भाला सीधा साधा
लेकिन दिल का हूँ शहज़ादा
है ये मेरी ज़मीन ये मेरा आसमान


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
प्यार सीने मैं है हर किसी के लिए
मुजको प्यारा हर इंसान
दिलवालों पे हूँ कुर्बान
ज़िन्दगी है मेरी ज़िन्दगी के लिए


मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरू
फक्कड़ घुँघरू बन के घूमूं
मैं ये प्यार का गीत सुनाता चला
मंजिल पे मेरी नज़र
मैं दुनिया से बेखबर
बीती बातों पे धूल उड़ाता चला

....................................
Main hoon jhum jhum jhum jhum jhumroo-jhumroo 1961

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Oct 19, 2011

मैं आशिक हूँ बहारों का-आशिक १९६२

बिलकुल राज कपूराना गीत है ये। कुछ गीत ख़ास राज कपूर के लिए रचे
गये थे उनमें से एक है फिल्म आशिक का ये शीर्षक गीत। इस फिल्म से पूर्व
में आप ४ गीत सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर। किसी मोहतरमा के ख्याल में
आशिक होना आम बात है। इसमें कुदरत के नज़रों के साथ साथ कई और
पहलुओं के साथ आशिकी का जिक्र है जो गीत को अलग बनाता है।

इस तरह के गीत राज कपूर कि फिल्मों में कई हैं। इन सभी गीतों में वे इधर
उधार घुमते हुए बेफिक्र से गीत गेट दिखाई देते हैं। फिल्म आवारा के शीर्षक
गीत का ही उदाहरण ले लीजिये। ऐसे प्रेरणादायी गीत उनकी फिल्मों की
विशेषता होते थे। ऐसे गीतों को रचने के लिए गीतकार शैलेन्द्र का एक बार
फिर से तह-ए-दिल शुक्रिया।



गीत के बोल:

मैं आशिक हूँ बहारों का, नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का

सदियों से जग में आता रहा मैं
नए रंग जीवन में गता रहा मैं
नए भेस में नित नए देश मैं

मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का,इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का

कभी मैंने हंस के दीपक जलाए
कभी बन के बादल आंसू बहाए
मेरा रास्ता प्यार का रास्ता

मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का

चला गर सफ़र को कोई बेसहारा
तो मैं हो लिया संग दिए एक तारा
गाता हुआ दुःख भूलता हुआ

मैं आशिक हूँ बहारों का नज़रों का, फिजाओं का, इशारों का
मैं मस्ताना मुसाफिर हूँ जवां धरती के अनजाने किनारों का
मैं आशिक हूँ बहारों का

..........................................
Main aashiq hoon baharon ka-Aashiq 1962

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Jul 18, 2011

मैं भोला भाला हूँ-भोला भाला १९७८

फिल्म भोला भाला में राजेश खन्ना दोहरी भूमिका में हैं.
एक तो है भोला भाला युवक जो बीमा का एजेंट है. दूसरा
है डाकू. साईकिल पर हिंदी फिल्मों का नायक कम चला करता
है. नायक ने साईकिल भी चलायी लेकिन फिल्म नहीं चली.
कहानी में दम होना बहुत ज़रूरी है. ये पहली शर्त होती है
फिल्म के चलने में. गीत अच्छे हैं मगर वो भी फिल्म की
मदद नहीं कर पाए बॉक्स ऑफिस पर.

ये फिल्म का शीर्षक गीत है, आनंद बक्षी का लिखा और किशोर
का गाया हुआ. इसके संगीतकार हैं राहुल देव बर्मन.



गीत के बोल:

मैं भोला भाला हूँ
भोले दिल वाला हूँ

अरे मैं भोला भाला हूँ
भोले दिल वाला हूँ

दुनिया मुझको क्या जाने
दुनिया से निराला हूँ

मैं भोला भाला हूँ

मैं कहा राम राम
सब ठीक ठाक है ना

देस विदेस की बातें मैं क्या समझूं मैं क्या जानूं
..................................
Main bhola bhala hoon-Bhola bhala 1978

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Nov 21, 2010

अँधेरी रातों में-शहंशाह १९८८

सन ८८ में भी कुछ सुनने लायक गीत आये उन गीतों में से एक
आपको सुनवा चुके हैं। एक फिल्म बनाई थी टीनू आनंद ने-
शहंशाह जिसमे शीर्षक भूमिका अमिताभ बच्चन ने निभाई थी ।
१९८८ में ये फिल्म आई और इसमें किशोर कुमार का गाया एक
गीत है जो शीर्षक गीत भी है फिल्म का-अँधेरी रातों में। आनंद
बक्षी के लिखे गीत को स्वरबद्ध किया है नयी संगीतकार जोड़ी
अमर-उत्पल ने। ये गीत मैंने बहुत सुना है, आज आप भी एक
बार सुन लीजिये। टीनू आनंद निर्देशित फिल्म 'कालिया' में भी
अमिताभ बच्चन नायक की भूमिका में थे।



गीत के बोल:

अँधेरी रातों में सुनसान राहों पर
अँधेरी रातों में सुनसान राहों पर
हर ज़ुल्म मिटने को
एक मसीहा निकलता है
जिसे लोग शहंशाह कहते हैं

अँधेरी रातों में सुनसान राहों पर
अँधेरी रातों में सुनसान राहों पर
हर ज़ुल्म मिटाने को
एक मसीहा निकलता है
जिसे लोग शहंशाह कहते हैं

अँधेरी रातों में सुनसान राहों पर

शहर की गलियों में वो फिरता है
शहर की गलियों में वो फिरता है
दोस्तों से दोस्त बनकर मिलता है
दुश्मनों के सर पे ऐसे गिरता है
जैसे बिजली गिरे बरसातों में

अँधेरी रातों में सुनसान राहों पर
हर ज़ुल्म मिटाने को
एक मसीहा निकलता है
जिसे लोग शहंशाह कहते हैं

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Nov 12, 2010

मेरा जीवन कुछ काम ना आया -मेरा जीवन १९७६

साँसों के चलने को तो जीवन कहा नहीं जाए.......

अनजान या गुमनाम सी फिल्मों में कई मधुर गीत हैं जो हमारी जानकारी में
नहीं आते। आगे एक ऐसा ही गीत पेश है जो फिल्म "मेरा जीवन" से लिया गया है।
किशोर कुमार का गाया यह गीत बेहद लोकप्रिय हुआ था। गीत के बोल है
एम्. जी. हशमत के और संगीत है सपन-जगमोहन का।





गीत के बोल:

मेरा जीवन
मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

ओ ओ, अपनों के होते हुए
तन में बनायें तन्हाई
हो ओ ओ, आंसू बना के ख़ुशी
आँखों से मैंने बरसाई
हो ओ ओ, खुशियों को रोते रोते
दुनिया में अब तो मेरा
जी घबराया

मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

हो ओ, बरस गए रे सावन
दरिया भी जोश में आये
हो ओ ओ, फूल भी खिलने लगे
कलियों के मन मुस्काए
हो ओ ओ, सूनी रही एक डाली
उस पे तो कोई अब तक
फूल ना आया

मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

हो ओ, जीने को जीना चाहें
मांगूं तो मौत ना आये
हो ओ ओ,साँसों के चलने को तो
जीवन कहा नहीं जाए
हो ओ ओ, दर्द बसा के दिल में
मेरा नसीब मुझको
कहाँ पे लाया

मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

मेरा जीवन कुछ काम ना आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
जैसे सूखे पेड़ की छाया
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Mera jeevan kuchh kaam na aaya-Mera jeevan 1976

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