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Jul 26, 2020

आँखों से दिल में उतर कर-फरेब १९९६

आज बहुत सी बॉलीवुड हस्तियों के जन्मदिन हैं. इनमें
से एक हैं सुमन रंगनाथन. घुंघराले बालों वाली सुमन
अपने समय की अभिनेत्रियों से थोड़ी अलग दिखती थीं.
हालांकि अलग लुक्स का उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ
जहाँ तक हिंदी फिल्मों का सवाल है.

२६ जुलाई १९७४ को बैंगलोर में जन्मी सुमन ने कन्नड़
फिल्म सी बी आई शंकर से अपने फ़िल्मी कैरियर की
शुरुआत की थी. ये १९८९ में आई थी.

हिंदी फिल्म जगत में और उन्हें बड़े बैनर की फिल्मों
में प्रमुख नायिका के रोल कम मिले. अधिकतर फिल्मों
में सुमन सहायक भूमिकाओं में नज़र आईं. ये भी हो
सकता है कि दूसरी भारतीय भाषाओँ में फ़िल्में करने की
वजह से उन्हें समय ना मिल पाया हो.

वैसे वजह तो ये भी बतलाई जाती है कि वे फिल्मों के
बजाये इतर कारणों से ज्यादा चर्चा में रहीं जिसमें अफेयर
और असफल से रहे रिश्ते भी शामिल हैं.

आज सुनते हैं नीरज का लिखा हुआ फिल्म फरेब का गीत
जिसकी धुन जतिन ललित ने तैयार की हैं कुमा सानू और
अलका याग्निक ने इसे गाया है. फिल्म के नायक का नाम
फराज़ खान है.

फिल्म फरेब, अनलाफुल एंट्री(१९९२) का देसी संस्करण है.
अनलॉफुल एंट्री में जो रोल रे लियोट्टा ने निभाया था वो
देसी संस्करण में मिलिंद गुनाजी ने निभाया है.




गीत के बोल:

आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
मेरे यार मेरे प्यार तेरी महक मेरे तन-मन में है
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
मेरे यार मेरे प्यार तेरी महक मेरे तन-मन में है
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
…………………………………………………..
Aankhon se dil mein utar ke-Fareb 1996

Artists: Suman Ranganathan, Faraaz Khan

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Oct 29, 2019

मेरी महबूबा आज मेरे घर-फरेब १९६८

दीपों का पर्व है और कम से कम सात दिन तो इसकी
रौनक रहेगी ही. एक गीत सुनते हैं जिसकी पहली पंक्ति
में दीप शब्द आया है. किसके जीवन में दीवाली कब आ
जाए नहीं कहा जा सकता. दीवाली से अर्थ बड़ा खुशी का
मौका भी होता है.

मन्ना दे और भूपेंद्र का गाया गीत है ये फिल्म फरेब से
जिसे असद भोपाली ने लिखा है. इसकी धुन तैयार की है
उषा खन्ना ने.

देसी लॉरेल और हार्डी बने दो कलाकार और किसी फेयरी
टेल में से निकली हसीना जैसी एक नायिका इस गीत पर
फ्री स्टाइल नृत्य का आनंद ले रहे हैं. जुमलों और श्रेणी
के हिसाब से ये ‘मेरी महबूबा हिट्स’ के अंतर्गत आता है.
ठीक है ना अमरीका वासी भारतीय भाइयों और बहनों.




गीत के बोल:

अरे हाँ
जलाओं दीप चरागाँ करो ज़माने में
बहार आई है मेरे गरीबखाने में
समझे मेरे लाल

मेरी महबूबा
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई
ओ मेरी महबूबा आज मेरे घर आई
अरे नोटों के हार इसको पहना दो यार
एक परी आसमान से उतर आई
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई

चाहता हूँ मैं इसको दिल-ओ-जान से
चाहता हूँ मैं
चाहता हूँ मैं इसको दिल-ओ-जान से
इसकी खातिर मैं दुनिया से टकराऊँगा हाँ
देखने वाले मुंह तकते रह जायेंगे
इस हसीना को मैं ले के उड़ जाऊँगा
इस हसीना को मैं ले के उड़ जाऊँगा
प्यार ले के मेरी हमसफ़र आई
ओ प्याज ले के मेरी हमसफ़र आई
एक परी आसमान से उतर आई
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई

शादी होगी हमारी बड़ी धूम से
शादी होगी
शादी होगी हमारी बड़ी धूम से
बैंड बाजे बजेंगे मज़ा आएगा
ओ जब भी गुजरेंगे हम बन के दूल्हा दुल्हन
शहर में एक हंगामा हो जायेगा
शहर में एक हंगामा हो जायेगा
आज बरसों के उम्मीद भर आई
हो आज बरसों के उम्मीद भर आई
एक परी आसमान से उतर आई
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई

लग न जाए किसी मनचले की नज़र
लग न जाए
लग न जाए किसी मनचले की नज़र
मैं रखूंगा इसे दो जहाँ से परे
चाँद पर होगा बंगला मेरे चाँद का
इस ज़मीन से अलग आसमान से परे
इस ज़मीन से अलग आसमान से परे
मेरी मंजिल मुझे अब नज़र आई
हो मेरी मंजिल मुझे अब नज़र आई
अरे नोटों के हार इसको पहना दो यार
एक परी आसमान से उतर आई
मेरी महबूबा आज मेरे घर आई
हो मेरी महबूबा आज मेरे घर आई
……………………………………………..
Meri mehbooba aaj mere ghar-Fareb 1968

Artists: Maloom nai

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Oct 20, 2019

ऐ जिंदगी के साथी-फरेब १९६८

बेला बोस पर फिल्माया गया एक गीत सुनते हैं फिल्म
अभिनेत्री बेला बोस को सहायक भूमिकाएं ज्यादा मिलीं.
इसमें वो नायिका हैं. है न चौंकाने वाला गीत. देव कुमार
जिन्हें अक्सर आपने खलनायक बने देखा होगा इसमें
वे जेंटलमैन बने बैठे प्यानो बजा रहे हैं.

फरेब से. गीत के बोल बढ़िया हैं, इस गीत को लिखा है
असद भोपाली ने और इसकी धुन उषा खन्ना ने तैयार
की है. गीत गाया है सुमन कल्याणपुर ने.




गीत के बोल:

ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से
ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से
मेरी साँसों में महकना मेरा दिल बन के धड़कना
ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से

धीमी धीमी आग दहकते गालों की
हलकी हलकी छांव सुनहरे बालों की
धीमी धीमी आग दहकते गालों की
हलकी हलकी छांव सुनहरे बालों की
तेरे लिए है लेकिन कहना ना तू किसी से
ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से
ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से

पहली पहली प्यार ने ली है अंगडाई
पहली पहली बार मिली है तन्हाई
पहली पहली प्यार ने ली है अंगडाई
पहली पहली बार मिली है तन्हाई
अब तो गले से लगा ले तड़प ना दूर ही से
ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से
ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से

दिल की नाज़ुक बात जुबां तक आ पहुंची
बढते बढते बात कहाँ तक आ पहुंची
दिल की नाज़ुक बात जुबां तक आ पहुंची
बढते बढते बात कहाँ तक आ पहुंची
डरती नहीं हैं मोहब्बत दुनिया की बेरुखी से

ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से
ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से
मेरी साँसों में महकना मेरा दिल बन के धड़कना
ऐ जिंदगी के साथी जाना न जिंदगी से
…………………………………………………
Ae zindagi ke sathi-Fareb 1968

Artists: Bela Bose, Dev Kumar

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Dec 19, 2016

ये तेरी ऑंखें झुकी झुकी-फरेब १९९६

आज आपको एक विलायती फिल्म की सटीक देसी कॉपी के रूप
में बनी फिल्म फरेब से एक गीत सुनवाते हैं. इसके गीत काफी
लोकप्रिय हुए थे एक वक्त.

फरेब फिल्म के प्रमुख कलाकारों के नाम कुछ इस प्रकार से हैं-
फराज़ खान, सुमन रंगनाथन और मिलिंद गुनाजी, ये तकरीबन
नए नाम थे हमारे लिए. उन दिनों फ़िल्मी कलाकारों और फिल्म
से सम्बंधित लोगों के नाम ढूंढ के याद रखने का शौक हुआ
करता था.

जो हमसे फ़िल्मी जानकारी लिया करते थे वे तो आज बड़ी बड़ी
गाड़ियों में घूमते हैं और हम साइकिल चलाते ही रह गए. यही
फर्क होता है ज्ञानवान और धनवान में. जिस ज्ञान से धन आये
वही मनुष्य को अपने जीवन में सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखना
चाहिए. एक सटीक कहावत है-भूखे भजन ना होयें गोपाला.
उसके अलावा भी सयाने कह गए हैं-पहले रोजी फिर रोज़ा. अगर
आपके पास खुजाने के लिए ज्यादा धन है तो औरों का मुफ्त
मनोरंजन कीजिये और दूसरों को मौके दीजिए कि वे आपके
मजे लूट सकें. आखिर ईश्वर ने सभी को मजे लूटने वाला बना
दिया तो लुटने वाला कौन बचेगा. उसने लुटने पिटने वाले जंतु भी
खूब बनाये हैं और उनको बुद्धि भी लुटने पिटने वाली ही दी है.

प्रस्तुत गीत इन्दीवर साहब का लिखा हुआ है जिसकी धुन तैयार
की जतिन ललित ने. गायक कलाकार का नाम अभिजीत है. 



गीत के बोल:

ये तेरी आँखें झुकी झुकी
ये तेरा चेहरा खिला खिला
ये तेरी आँखें झुकी झुकी
ये तेरा चेहरा खिला खिला
बड़ी क़िसमत वाला है वो
बड़ी क़िसमत वाला है वो
प्यार तेरा जिसे मिला
ये तेरी आँखें झुकी झुकी
ये तेरा चेहरा खिला खिला
बड़ी क़िसमत वाला है वो
प्यार तेरा जिसे मिला
ये तेरी आँखें झुकी झुकी

छलकती गालों से लाली
बड़ी तू शरम-ओ-हया वाली
होंठ तेरे पूजा के फूल
फूल की नाज़ुक तू डाली
ये तेरी
ये तेरी आँखें झुकी झुकी
ये तेरा चेहरा खिला खिला
बड़ी क़िसमत वाला है वो
प्यार तेरा जिसे मिला
ये तेरी आँखें झुकी झुकी

किसी के के प्यारे प्यारे बाल
किसी की प्यारी प्यारी चाल
तू सर से पाँव तलक़ सुन्दर
तू है कुदरत का कोई कमाल
ये तेरी
ये तेरी आँखें झुकी झुकी
ये तेरा चेहरा खिला खिला
बड़ी क़िसमत वाला है वो
बड़ी क़िसमत वाला है वो
प्यार तेरा जिसे मिला
ये तेरी आँखें झुकी झुकी
ये तेरा चेहरा खिला खिला
ये तेरी आँखें झुकी झुकी
ये तेरा चेहरा खिला खिला
……………………………………………………….
Ye teri ankhen jhuki jhuki-Fareb 1996

Artists: Milind Gunaji

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Jan 3, 2015

मेरे सुख दुःख का संसार-फरेब १९५३

सन १९५३ की एक फिल्म है फरेब इसमें किशोर कुमार
ने अभिनय किया है. किशोर कुमार को “रूप तेरा मस्ताना “
जैसे गीतों के बाद पहचानने वालों के लिए ये एक अचम्भा
हो सकता है. देखिये आज ये पुराना गीत और आनंद उठायें
इसका. गीत धीमा और कर्णप्रिय है और जूने पुराने संगीत
प्रेमी इसे काफी पसंद करते हैं. मैं भी कभी कभी इसे सुन
लिया करता हूँ.

गीत मजरूह सुल्तानपुरी की देन है और संगीत अनिल बिश्वास
की मेहरबानी



गीत के बोल:

मेरे, सुख दुःख का संसार
तेरे दो नैनन में
मेरे, सुख दुःख का संसार
तेरे दो नैनन में
इकरार कभी इनकार
इकरार कभी इनकार
तेरे दो नैनन में,
दो नैनन में, सुख दुःख का संसार
मेरे सुख दुःख का संसार
तेरे दो नैनन में

कोई सीखे इनसे सितम ढाना
हो, सितम ढाना
कोई सीखे,
कोई सीखे इनसे सितम ढाना
झुक झुक के, कुछ कुछ फरमाना
फिर उठ कर साफ़ मुकर जाना
झुक झुक के
झुक झुक के,  कुछ कुछ फरमाना
फिर उठ कर साफ़ मुकर जाना
कभी प्यार,
कभी प्यार कभी तकरार
तेरे दो नैनन में
दो नैनन में, सुख दुःख का संसार
मेरे, सुख दुःख का संसार
तेरे दो नैनन में

यही दोस्त यही दुश्मन जैसे
हो, दुश्मन जैसे
यही दोस्त
यही दोस्त यही दुश्मन जैसे
पल में कांटे की चुभन जैसे
पल में खिल जाए चमन जैसे
पल में
पल में कांटे की चुभन जैसे
पल में खिल जाए चमन जैसे
कभी खार
कभी खार कभी गुलज़ार
तेरे दो नैनन में
दो नैनन में सुख दुःख का संसार
तेरे दो नैनन में
मेरे, सुख दुःख का संसार
तेरे दो नैनन में
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Mere sukh dukh ka sansaar-Fareb 1953

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