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Aug 9, 2015

इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया- परदेसी बाबू १९९८

‘परदेसी’ शब्द गीतों में बेहद सफल रहा है. इस शब्द वाली
कुछ फ़िल्में भी हैं. आपने कभी गौर किया परदेसी शब्द में
“देसी” शब्द छुपा हुआ है. कहीं इसकी प्रसिद्धि के पीछे देसी
का हाथ तो नहीं ? गोविंदा की एक फिल्म है परदेसी बाबू.
सन १९९८ की, इस फिल्म में उनके साथ दो हीरोईनें हैं,
शिल्पा शेट्टी और रवीना टंडन. गोविंदा ऐसी २-३ फिल्मों
में और अभिनय कर चुके हैं जिसमें उनके साथ २ हीरोईनें हैं.
गोविंदा हैं तो फिल्म में हास्य होना अनिवार्य है. इसमें भी
है, मगर कम.

आज आपको इस फिल्म से बहुसितारा गीत सुनवाते हैं जिसका
चर्चा काफी हुआ अपने समय में. गीत सुधाकर शर्मा का लिखा
हुआ है और इसकी धुन बनाने के साथ गायन किया है संगीत
देने वाले आनंद राज आनंद ने. इसमें सावन के झूलों का जिक्र
है अन्य त्योहारों के साथ. हमारी संस्कृति की विशेषता बतलाने
वाला ये गीत देश भक्ति पूर्ण है और इसे हर नागरिक को एक न
एक बार अवश्य सुनना चाहिए.





गीत के बोल:

जहाँ पांव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया
जहाँ पांव में पायल हाथ में कंगन
जहाँ पांव में पायल हाथ में कंगन
जहाँ पांव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया,
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया
जहाँ पांव में पायल हाथ में कंगन
हो माथे पे बिंदिया
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया,
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया

जहाँ जंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाये
जहाँ जंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाये
मुंह से तो कुछ न बोले चुपके चुपके नीर बहाए
जहाँ जंग पे जाए सिपाही तो खुद सजनी तिलक लगाये
मुंह से तो कुछ न बोले चुपके चुपके नीर बहाए
और अश्कों से अपने लिख कर भेजे प्यार की चिट्ठियाँ
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया,
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया

जहाँ दिन निकले सुन कर श्लोक गुरबानी और अजान,
अल्लाह ओ अल्लाह
जहाँ दिन निकले सुन कर श्लोक गुरबानी और अजान
जहाँ मज़हब से ऊंचा है इंसान सारे एक सामान
अरे आंच नहीं है सांच को चाहे देख ले सारी दुनिया
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया,
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया

शबरी के खा के बेर राम ने प्रेम की प्रथा चलाई
शबरी के खा के बेर राम ने प्रेम की प्रथा चलाई
मीरा ने पी कर ज़हर का प्याला प्रीत की रीत निभाई
जहाँ प्रेम की धुन पर गोपियों संग नाचे कृष्ण कन्हैया
कहीं होता है रे भैया ?
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया, इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया

सावन के झूले कहीं बैसाखी के मेले
अरे सावन के झूले कहीं बैसाखी के मेले
लगता है खुद कुदरत इस धरती पर आ कर खेले
जहाँ माँ से लोरी सुने बिना बच्चों को न आये निंदिया
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया, इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया

प्रेम कहानी मेरे देश की एक से एक निराली
जहाँ सोहनी ने महीवाल की खातिर अपनी जान गवाई
जहाँ रांझे ने हीर की एक पल ना सही जुदाई
जहाँ सोहनी ने महिवाल की खातिर अपनी जान गवाई
जहाँ रांझे ने हीर की एक पल ना सही जुदाई
जहाँ शीरीं और फरहाद के इश्क में बही दूध की नदियाँ
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया,
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया,
 इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया,
 इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया,
इट हैप्पंस ओनली इन इण्डिया
.................................................................................
It happens only in India-Pardesi babu 1998

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Jan 21, 2015

मुस्कुरा के जियो जिंदगी-आग १९९४

फिल्म आग(१९९४) से एक फिलोसोफिकल सोंग प्रस्तुत है
आज. सभी जानते हैं मुस्कुराना और हंसना स्वास्थ्य के
लिए ज़रूरी है. हँसते हँसते कई मुश्किलें ताल जाती हैं और
हल हो जाती हैं. हँसने वाले के साथ सभी चलना पसंद
करते हैं और रोने वालों के तो साये भी साथ छोड़ दिया
करते हैं.

गीत कुमार सानु ने गाया है और बोल समीर के हैं. गीत में
एक बात अनूठी कही गयी है-वक्त के साथ हर ज़ख्म भरता
नहीं. हम अक्सर ज़ख्मों के भर जाने के बारे में ही सुनते
आये हैं. ये थोडा अलग है. साथ में ये भी बात कही गयी
है-ज़ख्मों के न भरने के बावजूद कोई मरता नहीं, सही है.



गीत के बोल:

मुस्कुरा के जियो जिंदगी
ओ मेरे यार
मुस्कुरा के जियो जिंदगी
ओ मेरे यार
आयेंगे जायेंगे गम खुशी
ओ मेरे यार
मुस्कुरा के जियो जिंदगी
ओ मेरे यार

आँखों में अश्क है सीने में आग है
जिंदगी कुछ नहीं दर्द का राग है
वक्त के साथ हर ज़ख्म भरता नहीं
फिर भी जीते हैं सब कोई मरता नहीं
कोई मरता नहीं
जो न हारे वही आदमी
ओ मेरे यार
आयेंगे जायेंगे गम खुशी
ओ मेरे यार
मुस्कुरा के जियो जिंदगी
ओ मेरे यार

रस्ते मिल गए बन गए काफिले
जो चले बस उसी को मंजिल मिले
वो भला या बुरा दिन गुज़र जाता है
सबका बिगड़ा नसीबा संवर जाता है
हाँ संवर जाता है
फिर भला किसलिए बेबसी 
ओ मेरे यार
मुस्कुरा के जियो जिंदगी
ओ मेरे यार
आयेंगे जायेंगे गम खुशी
ओ मेरे यार
मुस्कुरा के जियो जिंदगी
ओ मेरे यार
...............................................
Muskura ke jiyo zindagi-aag 1994

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Jan 10, 2015

हिंदी फिल्मों में बरसात-आँखों में तुम-आग १९९४

आँखों में तुम हो, सुरमे की तरह, सांसों में तुम हो
पिपरमेंट की खुशबू की तरह. इतना तो अनुमान लगा
सकते हैं हम श्रोता. इस फिल्म में हास्य से भरपूर कई
गीत हैं, ये थोडा गंभीर है. शीत ऋतु में बरसाती गीत
याद आने की वजह है आजकल हो रही बिन मौसम
बरसात. हिंदी फिल्मों के निर्देशकों को बरसात दिखाना
ज़रूरी हो जाता है. इससे ये पता चलता है कि फ़िल्मी
कलाकार भी नहाते हैं और साफ़ सफाई पसंद होते हैं.
उसके अलावा एक सन्देश भी होता है आम आदमी के
लिए- प्रकृति के अनमोल खजाने बारिश का भी लुत्फ़
उठाया जाना ज़रूरी है. बारिश में भीगने का आनंद कुछ
ही लोग लेते हैं. इंसान आनंद ले न ले, पेड पौधे तो
जी भर के खुश होते हैं बारिश के पानी से. बूंदे पढते
ही कैसे खिल उठते हैं सब.

समीर का लिखा गीत आ रहे हैं साधना सरगम और
कुमार सानु. धुन आनंददायी है और इस गीत का
फिल्मांकन भी बेहतर है. दिलीप सेन समीर सेन अपने
समकालीनों से थोड़े बेहतर संगीतकार हैं मगर उन्हें
बहुत ज्यादा अवसर नहीं मिले फिल्मों में.

प्रेम वो खूबसूरत अहसास है जो व्यक्ति का सोचने का
नजरिया पूरी तरह से बदल देता है. एक बहुत ही रोमांटिक
गीत है ये और उम्मीद है आपको पसंद आएगा.



गीत के बोल:

आँखों में तुम हो साँसों में तुम हो
तुम हो मेरी जिंदगी
मेरे करीब हो मेरा नसीब हो
तुम हो मेरी बंदगी
ये पहला प्यार है वफ़ा का इकरार है
तुम हो मेरी हर खुशी ओ सनम ओ सनम




ऐसे न अपनी रेशमी जुल्फें बिखराओ
बेचैनी इस दिल की न और बढ़ाओ
हो ओ, शर्म से मेरी ऑंखें क्यूँ झुक जाती हैं
बातें लबों तक आ के क्यूँ रुक जाती हैं.
यही तो इज़हार है
दीवानों का खुमार है
तुम हो मेरी बेखुदी ओ सनम ओ सनम

तेरी मोहब्बत ने क्या मेरी हालत कर दी
हाल बताऊँ कैसे तुझको बेदर्दी
प्यास तेरी चाहत की क्यूँ बढती जाए
इक पल भी अब मुझको क्यूँ चैन न आये
इसी में तो करार है
फिजा में भी बहार है
तुम हो मेरी आशिकी ओ सनम ओ सनम

आँखों में तुम हो साँसों में तुम हो
तुम हो मेरी जिंदगी
मेरे करीब हो मेरा नसीब हो
तुम हो मेरी बंदगी
ये पहला प्यार है वफ़ा का इकरार है
तुम हो मेरी हर खुशी ओ सनम ओ सनम 
...............................................................
Ankhon mein tum ho-Aag 1994

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Jan 6, 2015

तेरा क्या लगता है दीवाना-आग १९९४

फिल्म आगे के पिछले गीत की तरह इस गीत में भी ढेर सारे
सहायक कलाकार हैं. लेकिन इसमें एक बात का फर्क है-इसमें
कलाकारों के कपड़ों पर थोड़ी मेहनत की गयी है. गीत की शुरुआत
नायिका के झरने पर अटखेलियाँ करने से हो रही है. पिछले
गीत वाली बुज़ुर्ग महिला इस गीत में भी है जो शायद नायक नायिका
की केमिस्ट्री को ठीक करने में लगी है. हो रा की खरखरी ध्वनि से
शुरू होने वाला गीत काफी चर्चित गीत है. इसके बोल बेहतर हैं पिछले
गीत से और इसकी धुन भी कर्णप्रिय है.


इसमें भी नायक लाठी लेकर भैंस चराने वाले अंदाज़ में चल रहा है.
थोड़ी राहत है बीच में जब वो एक सपने वाली सीक्वेंस में नृत्य
करता दिखाई देता है.  फिल्म के गीत देख के आप आधी कहानी
तो समझ ही सकते हैं फिल्म की.  गीत इला अरुण और अलका
याग्निक ने गाया है. बोल एक बार फिर से समीर के और धुन
दिलीप सेन समीर सेन की है.



गीत के बोल:

हो रा हो,
रे इतना बता दे ना छुपा
तेरा क्या लगता है दीवाना
तेरा क्या लगता है दीवाना
रे हो रा
रे इतना बता दे ना छुपा
तेरा क्या लगता है दीवाना
तेरा क्या लगता है दीवाना, हाय

मैं क्या बोलूं कैसे बोलूं
ये भेद भला कैसे खोलूं
कैसे तुझे बतलाऊं रे
बड़ी शर्म मुझको आती है
मेरी आँख भी झुक झुक जाती है

हो रा हो ओ

मेरे माही मेरे बलमा
तेरे नाम जवानी लिख दी
चुपके चुपके सबसे छुप के
मैंने प्रेम कहानी लिख दी है
पागल दीवानी जाना
मेरे पीछे तू न आना
तेरी बातों में न आऊँ
ना जान के जान गवाऊं
अरे जा जा अरे जा जा
तुझपे मरने से अच्छा है
मैं डूब के कहीं मर जाऊं
रे हो रा हो
रे कहते हैं तू बचेगी
बावरी तुझे बाँहों में जो भर लेगा
रे, तुझे बाँहों में जो भर लेगा , हाय

घबराऊंगी तड़पाऊँगी 
फिर सीने से लग जाऊँगी
मर जाऊँगी इसके प्यार में
इसे पा के मैं दिखलाऊंगी
हो, इसे पा के मैं दिखलाऊंगी

रे हो रा हो


ये लड़की प्रेम दीवानी है
इसे कौन भला समझायेगा
जो सिकी प्रेम कहानी है
कोई ना सुनने आएगा
ये प्रेम डगर से जायेगी
जो बात न ये मानेगी
पगली पीछे पछताएगी

मैं कैसे तुझे समझाऊ
क्या है मेरी मजबूरी
दुनिया मेरी बेरंग है
ओ तेरे सपने हैं सिन्दूरी
तुझपे खुशियाँ लुटाऊँ
तेरे सारे दर्द उठाऊँ
बस तेरी धुन में गाऊँ
तेरी जोगन बन जाऊं
मेरे राजा अब न जा
मैं तेरे लिए ही आई हूँ
और तेरे किये ही मेरी जिंदगानी
............................
Tera Kya Lagta Hai-Aag 1994

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Jan 5, 2015

अंगिया में अंग न समाये -आग १९९४

किसी गीत में तक धिना धिन शब्द आते हैं तो बरबस ध्यान
उधर चला जाता है.अभी हमें दूसरे शब्दों के बारे में चर्चा बिल्कुल
नहीं की है जिनसे ध्यान आकृष्ट होता है.

इस गीत पर विस्तार से चर्चा करेंगे ये लेजेंडरी गीत जो है. कवि
कहता है “अंगिया में अंग न समाये बलमा” इसका सीधा अर्थ ये
है-कपडे तंग सिल दिए हैं दर्जी ने या, तंग सिलवा दिए गए हैं.
कपडा घटिया निकल गया. कमज़ोर दर्जे का सूत था जो सिकुड
गया. जीवन से पैरेलल ड्रा किया जाए तो अमूमन हर व्यक्ति को
शिकायत होती है अपनी स्थितियों से, किसी को मकान छोटा
लगता है, किसी को अपनी कार, किसी को अपनी सेलेरी.

दूसरी पंक्ति है-“मीठी मीठी चुभन जगाए बलमा”, एक आशावादी
वक्तव्य है, तकलीफ में भी आनंद की अनुभूति. उसके बाद की
पंक्तियों में है-“तक धिन धिन धिना धिन इत्यादि”. ये सब डमी
शब्द हैं इनका अर्थ है-आनंद के बाद मुझे शब्द नहीं सूझ रहे,
इसलिए धम धमा धम, जय हो.

बाकी का भाग चटके लगने के बाद प्रस्तुत किया जायेगा.


पांच फुट की बालाओं के बीच छह फुट की बाला ऐसी लगती है
जैसे तीसरी कक्षा की छात्राओं के बीच आठवीं कक्षा की छात्रा
जबरन घुस आई हो.. नायक की लम्बाई के बारे में तो कहना
व्यर्थ है वो हमेशा ही फिल्मों में जादुई तरीके से अपनी नायिकाओं
से लंबा दिखा है. गाने में आपको महिला पोशाकों की पूर्ण रेंज
देखने को मिल जायेगी, मानो इन कलाकारों ने किसी छोटे से
कपडे के स्टोर पर धावा बोल के जिसके जो समझ में आया वो
पहन लिया हो. गीत को लोकगीत वाला कलेवर देने की कोशिश
की गयी है, मगर ताल से वो फ़िल्मी ही सुनाई देता है. इतने साल
हो गए फ़िल्में देखते फ़िल्मी नृत्य शैली किस स्कूल में सिखाई जाती
है आज तक मालूम नहीं हुआ. जो नृत्य निर्देशक हैं वो किस स्कूल
में ये सब सीखते हैं, मालूम नहीं. अगर स्वतः प्रेरणा से ऐसे नृत्य
उनके दिमाग को सूझ जाते हैं तो दाद देनी होगी उनकी कल्पनाशक्ति
की. काफी फर्टाइल किस्म का दिमाग होता है इनका.

गीत के अंत में बकरियां प्रगट हो जाती है तालियाँ बजाने के लिए.
बकरियों की चाल भी नृत्य वाली है मानो उन्हें भी गीत पसंद आया हो.
जिसने भी इस गाने का संपादन किया है उसको बधाई पशु-प्रेम के लिए.
पीटा की मानद सदस्यता का हक़दार है वो. उसके अलावा निर्देशन भी
कमाल का है-नायक के चेहरे पर पूरे गीत में ऐसे भाव हैं जैसे उसे उस
संगीतमय कसरत से ज्यादा रूचि गुमी हुई भैंस खोजने में है. हिंदी
फिल्म के नायक का ये विश्वामित्री इस्टाइल बहुत कम देखने को मिलता
है.  एक शिकायत है बस-धुन बेहतर बनायीं जा सकती थी इस गीत की


अंगिया में अंग न समाये बलमा
अंगिया में अंग न समाये बलमा
मीठी मीठी चुभन जगाए बलमा
तक धिन धिन तक धिन धिन
आ जा ना मोरे पिया लागे न मोरा जिया
तक धिन धिन तक धिन धिन
याद पे गिनती हूँ तेरे दिन दिन दिन दिन दिन दिन दिन

अंगिया में अंग न समाये बलमा
तक धिन धिन तक धिन धिन
मीठी मीठी चुभन जगाए बलमा
तक धिन धिन तक धिन धिन

मेरे नैन नशीले मेरे होंठ रसीले
तू देख तो मुझको मेरे छैल छबीले
मेरी चढ़ती जवानी दरिया का पानी
मेरे बस में नहीं है अब दिलवर जानी
आई है कैसी उम्र चढ़ता है कैसा ज़हर
कटती है रातें तारे गिन गिन गिन 

अंगिया में अंग न समाये बलमा
तक धिन धिन तक धिन धिन
मीठी मीठी चुभन जगाए बलमा
तक धिन धिन तक धिन धिन

कोई कहे यहाँ है, कोई कहे वहाँ है
बतला बेदर्दी मुझे दर्द कहाँ है
क्या हाल बताऊँ कैसे समझाऊँ
दिलदार तड़प के मैं मर जा जाऊं
जगी है कैसी अगन जलता है मेरा बदन
जी न सकूंगी मैं तेरे बिन बिन बिन बिन
तक धिन धिन तक धिन धिन
तक धिन धिन तक धिन धिन

अंगिया में अंग न समाये बलमा
तक धिन धिन तक धिन धिन
मीठी मीठी चुभन जगाए बलमा
तक धिन धिन तक धिन धिन
......................................................
Angiya mein ang na samaye balma-Aag 1994

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Nov 15, 2010

मय से मीना से ना साकी से - खुदगर्ज़ १९८७

गोविंदा और नीलम पर फिल्माया गया एक थोडा कर्णप्रिय युगल गीत।
इसमें तरह तरह की ध्वनियों का प्रयोग किया गया है। एक जगह पर
बेचारा तबला आपको डिस्को-तबला सुनाई देगा। वैसे तबले के साथ
अन्य ताल वाद्यों का प्रयोग करने वाले राजेश रोशन पहले संगीतकार नहीं
हैं। राहुल देव बर्मन ने ताल वाद्यों के ऊपर शायद सबसे ज्यादा अनुसन्धान
किया था जहाँ तक हिंदी फिल्म संगीत का सवाल है। नीलम जैसा की उनकी
कई फिल्मों में नज़र आता है, किसी केश तेल का विज्ञापन करती सी नज़र
आती हैं। उनकी केश राशि वाकई तारीफ़-ए-काबिल है। गीत एक बेहद सफल
फिल्म "खुदगर्ज़ से लिया गया है। ये "क्यूंकि मैं राकेश रोशन हूँ" की पहली सुपर
हिट फिल्म थी बतौर डायरेक्टर । ये फिल्म के कुछ उन हलके फुल्के दृश्यों में से
है जिसमे डिस्को-खिसको डांस लिया जा रहा है। ऐसे मौके दर्शकों को एक
विश्राम लेने में सहायक होते हैं और कई दर्शक गीत शुरू होते ही सिनेमा
हाल से बाहर निकल कर धूम्रपान या जुगाली करने लगते हैं, पोपकोर्न खरीद
खरीद लाते लाते हैं या शंका निवृत्ति के लिए निकल जाते हैं।





गीत के बोल:

मय से मीना से ना साकी से
मय से मीना से ना साकी से
ना पैमाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से

गुल से गुंचों से ना बुलबुल के
गुनगुनाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से

ख्वाब में जन्नत का नक्शा
आ गया जब सामने
रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु
रु रु रु रु रु रु रु रु
ख्वाब में जन्नत का नक्शा
आ गया जब सामने
फूलों से भी दिल ना बहला
हम लगे तुझे ढूँढने

जन्नत की बहारों से ना परियों के
जन्नत की बहारों से ना परियों के
मुस्कुराने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से

एक दिन मैं भी गई थी
जौहरी बाज़ार में
रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु
रु रु रु रु रु रु रु रु
एक दिन मैं भी गई थी
जौहरी बाज़ार में

तेरी आँखें याद आयीं
हीरो के भी हार में

मोती से ना हेरों से ना जेवर से
मोती से ना हेरों से ना जेवर से
ना किसी खजाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से

मय से मीना से ना साकी से
मय से मीना से ना साकी से
ना पैमाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से

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Jan 30, 2010

हेड या टेल -दीवाना मस्ताना १९९७

कहते हैं ब्लॉग जगत में-बिन टिप्पणी सब सून। सही भी है। जहाँ ज्यादा
चटके लगे हों, वो जगह ज्यादा प्रसिद्ध मानी जाती है। किसी ने सुझाव
दिया कि ब्लॉग पर गुड चिपकाओ तब मक्खियाँ आएँगी। उस सुझाव पर
अमल करते हुए हमने भी ब्लॉग की पोषाक बदल डाली। अभी तक किसी
भी प्रतिक्रिया के प्राप्त ना होने कि अवस्था में हम ये मान लेते हैं कि पचास
फ़ीसदी को पोषक पसंद आई, पचास को नहीं। मतलब ये कि सिक्का खड़ा
है अभी तक।

हेड या टेल पर भी एक गाना है हिंदी फिल्म में। वो है दीवाना मस्ताना
में, जो एक कॉमेडी फिल्म है अनिल कपूर और गोविंदा की। जूही चावला
ने फिल्म में नायिका की भूमिका निभाई है। फिल्म का सार एक लाइन में-
"एक अनार दो बीमार " का मिश्रण "everything is fair in love and war"
के साथ। दिमाग के तार झनझना देता है ये गीत। नए गायकों में से एक जो
बुलंद आवाज़ के स्वामी हैं-विनोद राठोड वो इस गाने को गाना शुरू
करते हैं। प्रस्तुत गीत के संगीतकार हैं-लक्षीकान्त प्यारेलाल। दुसरे
गायक हैं उदित नारायण। अनिल कपूर शायद मिस्टर इंडिया ब्रांड टोपी
से मुक्त नहीं हो पाएंगे। उनके अलावा ऐसी टोपी सिर्फ राज कपूर के सर
पे जंचा करती थी। जी नहीं हम चार्ली चैप्लिन की बात नहीं कर रहे हैं
क्यूंकि ये हिंदी फिल्मों वाला ब्लॉग है। चार्ली एक बहुत महान कलाकार
थे और उनके सर की टोपी का मुकाबला करने वाले संपूर्ण विश्व के सिनेमा
में इक्का दुक्का हुए हैं जिनमे हमारे देश का कोई भी नहीं है। इसपर चर्चा
फिर कभी, फिलहाल इस गीत को सुनिए।





गीत के बोल:

ला रा ला, इश्क हज़ारों करते हैं पर
आशिक सब का नाम नहीं
ये सब के बस का काम नहीं

हेड या टेल, हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
इस खेल में कोई है पास
इस खेल में कोई है पास
कोई है पास तो कोई है फ़ैल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
इस खेल में कोई है पास
इस खेल में कोई है पास
कोई है पास तो कोई है फ़ैल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल

दो दिलों के बीच में जो आएगा, आएगा
मुफ्त में बेमौत मारा जाएगा
दो दिलों के बीच में जो आएगा, आएगा
मुफ्त में बेमौत मारा जाएगा
देखता ही राह जाएगा विल्लेन
देखता ही राह जाएगा विल्लेन
हीरो हिरोइन को ले जाएगा
हो आज हो या कल
होगा दो दिलों का मेल
होगा दो दिलों का मेल

हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
हेड या टेल, हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
इस खेल में कोई है पास
इस खेल में कोई है पास
कोई है पास तो कोई है फ़ैल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल

बड़े बड़े हार गए इस खेल में
इस खेल में
थोड़े पागलखाने गए थोड़े जेल में
थोड़े जेल में
अरे बड़े बड़े हार गए इस खेल में
थोड़े पागलखाने गए थोड़े जेल में
दरिया में डूब गया था महिवाल
दरिया में डूब गया था महिवाल
रांझे का हो गया था मजनू सा हाल
रोमियो का हो गया था हार्ट फ़ैल
हो गया था हार्ट फ़ैल

हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
इस खेल में कोई है पास
इस खेल में कोई है पास
कोई है पास तो कोई है फ़ैल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
हेड या टेल हेड टेल

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