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May 20, 2020

साँसों को साँसों में ढलने दो-हम तुम २००४

सुनते हैं सन २००४ की क्लासिक, क्रिटिकली ऐक्लेडम्ड और
न जाने क्या क्या विशेषणों से सुसज्जित फिल्म हम तुम से
अगला गीत. फिल्म को ढेर सारे पुरस्कार मिल चुके हैं अतः
इसकी शान में ज्यादा कसीदे काढने की ज़रूरत नहीं बची.

इसे इतनी बार देख लिए फिर भी ना जाने क्यूँ ऐसा लगता है
कुछ समझना बाकी है. दिमाग पर ज्यादा जोर देने में सर में
दर्द होने लगता है और इसे समझने का हमारा प्रयास अधूरा
ही रह जाता है.

दरअसल ये अ९८९ की एक अमरीकी फिल्म व्हेन हैरी मेट सैली
पर आधारित है. हम तुम फिल्म है ज़रूर हिंदी भाषा में मगर
आत्मा अटलांटिक महासागर में डुबकियां लगा के आई है अतः
आम भारतीय दर्शक को कुछ अटपटी लगती है. उसके अलावा
इसका कथानक कहीं कहीं रबड़ माफिक खींचा हुआ लगता है.

फिल्म की रिलीज़ के आस पास हम तुम शीर्षक वाले काफ़ी
सारे कार्टून स्ट्रिप रिलीज़ हुए थे वो इस फिल्म से सम्बंधित
सबसे उल्लेखनीय बात है और कुछ नयापन भी था उस समय
के लिहाज से.

किसी समय हमें लगता था कि समझ में नहीं आने वाले या
देर से समझ आने वाले कथानकों पर सिर्फ देव आनंद फिल्म
बनाया करते हैं. हमारा मुगालता नई पीढ़ी के फिल्मकारों की
फ़िल्में देख के दूर हो गया और ऐसे काफ़ी सारे फिल्मकार हैं
जो अभिव्यक्ति के नाम पर अपने अंदर के व्यक्ति को प्रस्तुत
कर देते हैं स्क्रीन पर बेहिचक और बेझिझक.

गीत लिखा है प्रसून जोशी ने और इसकी धुन तैयार की है
जतिन ललित ने. अलका याग्निक और बाबुल सुप्रियो ने गीत
को स्वर दिए हैं.



गीत के बोल:

हम तुम हम तुम हम तुम
साँसों को साँसों में ढलने दो ज़रा
हूँ हूँ हूँ हूँ ला ला ला ला ला ला
साँसों को साँसों में ढलने दो ज़रा
धीमी सी धड़कन को बढ़ने दो ज़रा
लम्हों की गुज़ारिश है ये पास आ जाये
हम हम तुम तुम हम तुम

आँखों में हमको उतरने दो ज़रा
बाहों में हमको पिघलने दो ज़रा
लम्हों की गुज़ारिश है ये पास आ जाये
हम हम तुम तुम हम तुम
साँसों को साँसों में ढलने दो ज़रा

सलवटें कहीं करवटें कहीं
फैल जाये काजल भी तेरा
नज़रों में हो गुज़रता हुआ
ख़्वाबों का कोई क़ाफ़िला
जिस्मों को रूहों को जलने दो ज़रा
शर्मो हया को मचलने दो ज़रा
हाँ लम्हों की गुज़ारिश है ये पास आ जाये
हम हम तुम तुम हम तुम

साँसों को साँसों में ढलने दो ज़रा

छू लो बदन मगर इस तरह
जैसे सुरीला साज़ हो
अँधेरे छुपे तेरी ज़ुल्फ़ में
खोलो के रात आज़ाद हो
आँचल को सीने से ढलने दो ज़रा
शबनम की बूँदें फिसलने दो ज़रा
लम्हों की गुज़ारिश है ये पास आ जाये
हम हम तुम तुम हम तुम
साँसों को साँसों में ढलने दो ज़रा
बाहों में हमको पिघलने दो ज़रा
लम्हों की गुज़ारिश है ये पास आ जाये
हम हम तुम तुम हम तुम
हम हम तुम तुम हम तुम
………………………………………..
Saanson ko saanson mein-Hum tum 2004

Artists: Saif Ali Khan, Rani Mukherji

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May 19, 2020

कैसे मुझे तुम मिल गई-गज़नी २००८

फिल्म साजन और पसंद अपनी अपनी के मिश्रण में काफ़ी
मात्रा में हिंसा डाल दी जाए तो कहानी बन जाती है फिल्म
गज़नी की. ये तो सरसरी तौर पर आकलन हुआ मगर इसमें
रहस्य और रोमांच भी है.

मूल स्रोत सन १९५१ की अंग्रेजी फिल्म हैप्पी गो लवली है
जिसमें डेविड निवेन और वेरा एलन की प्रमुख भूमिकाएं हैं.
इस फिल्म में भी गाने हैं और फिल्म रोचक है. आपको
मौका मिले तो इसे अवश्य देखें.

फिल्म साजन और पसंद अपनी अपनी की फिल्मों की तरह
गज़नी फिल्म का अंत सुखान्त नहीं है. इसमें अंत में हालांकि
नायक को अपनी यादों के साथ चेहरे पर हलकी मुस्कराहट
लिए समय के प्रहारों से मुक्त दिखलाया गया है मगर वो एक
सांत्वना जैसा है दर्शक के लिए जिसने फिल्म के फ्लैशबैक में
दुखद घटनाएँ और क्रूरता देख ली हैं.

साजन फिल्म तो खूब चली मगर पसंद अपनी अपनी फिल्म
के बारे में ज्यादा चर्चा नहीं हुई सिवाय इस गीत के-तुम जो
मिले हो जो लंबे समय तक रेडियो की शोभा बना रहा. इसे
मिथुन के फैन्स ने ज़रूर देखा और मिथुन को हलके फुल्के
रोल में देख के उन्हें आश्चर्य भी हुआ होगा.

प्रसून जोशी का लिखा गीत सुनते हैं जिसका धुन रहमान ने
तैयार की है. इसे श्रेया घोषाल और बेनी दयाल ने गाया है.



गीत के बोल:

हो हो हो हो हो हो हो हो
कैसे मुझे तुम मिल गई
क़िस्मत पे आये ना यक़ीं
उतर आई झील में
जैसे चाँद उतरता है कभी
हौले हौले धीरे से

गुनगुनी धूप की तरह से तरन्नुम में तुम
छू के मुझे गुज़री हो यूँ
देखूँ तुम्हेँ या मैं सुनूँ
तुम हो सुकून तुम हो जुनून
क्यूँ पहले ना आईं तुम

कैसे मुझे तुम मिल गईं
हो हो हो हो हो हों
क़िस्मत पे आये न यक़ीं
हो हो हो हो हो हों

मैं तो ये सोचता था
के आजकल ऊपर वाले को फ़ुर्सत नहीं
फिर भी तुम्हेँ बना के वो
मेरी नज़र मेँ चढ़ गया
रुतबे में वो और बढ़ गया

आ आ आ आ आ आ आ आ
बदले रास्ते झरने और नदी
बदले दीप की टिम टिम
छेड़े ज़िन्दगी धुन कोई नई
बदले बरखा की रिमझिम
बदलेंगी ऋतुएं अदा
पर मैं रहूँगी सदा उसी तरह
तेरी बांहों में बांहें डाल के
हर लम्हा हर पल
आ आ आ आ आ आ आ आ

ज़िन्दगी सितार हो गई
रिमझिम मल्हार हो गई
मुझे आता नहीँ क़िस्मत पे अपनी यक़ीन
कैसे मुझको मिली तुम
………………………………………………….
Kaise mujhe tum mil gayi-Ghajini 2008

Artists: Aamir Khan, Asin

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May 4, 2020

चंदा चमके चम चम-फ़ना २००६

चंदा चमके चमचम से तो हमें चमचम याद आ गई और मुंह में
पानी भर आया. चांद परोसा और इस गाने को मिला लें तो चाँद
थोड़े दिन में किसी गाने में खाने की वस्तु भी हो जायेगी. तरह
तरह के चांद सोशल मीडिया पे चमक रहे हैं. हजारों वैराइटी के
चांद देख देख के मन भर गया है.

डिजिटल युग ने हमें कुछ दिया है तो कुछ हमसे छीना भी है. हम
सकारात्मक सोच रखते हुए जो दिया है उसी के बारे में बात करेंगे.
सोशल मीडिया के शुरू होने पर सबसे पहले मिला मेसेंजर और
उसमें मिली स्माईली. एब्रिवेशन भी मिल गए. मोबाइल युग आने
पर हमें झूठ बोलने की आदत हो गई. झुमरी तलैया में बैठा व्यक्ति
बोलता है-मैं मजनू का टीला में हूँ.

बीच में एक आईटम आई-पेजर. बेचारा युवा होने के पहले ही
सिधार गया. तकनीकि की रफ़्तार और कर लो दुनिया मुट्ठी में
की दौड ने उसको कहीं पीछे छोड़ दिया.

शक करने की आदत बढ़ी और बीबियाँ और बॉस लोग वीडियो
कॉलिंग पर ज़ोर देने लगे. उसके अलावा विश्वास और धैर्य भी कम
होता चला. टैक्सी में बैठों तो कॉल करो, ट्रेन, बस में बैठो तो कॉल
करो, पहुँच जाओ तो कॉल करो. फोन बंद था तो क्यूँ था? मेरा
फोन नहीं उठाया कित्ती देर तक घंटी बजती रही, फोन उठाते नहीं
हो.

मोबाईल फोन पर एस एम् एस संदेशों का आदान प्रदान शुरू हुआ
और अंतर्देशीय पत्र और पोस्ट कार्ड गुज़रे ज़माने की बात हो गई.
तार सन्देश तो अब नयी पीढ़ी को मालूम ही
नहीं है क्या बला थी.

मोबाइल में कैमरा आया तो जनता दिशा मैदान में कैसी डिज़ाईन
बनाती है ये भी दिखाई देने लगा. कुत्ते के साथ लिप-लॉक वाले फोटो
दिखने लगे वो भी इतने बढ़िया के आप सीरियल किसर की फ़िल्में
भूल जाएँ.

फेसबुक बहुत पहले आ गया मगर ऑरकुट के बीमार पढ़ने तक उसे
इंतज़ार करना पड़ा. जनता ने अपने तोतों औ छिपकलियों की भी
प्रोफाइल उस पर बना मारी. कॉपी पेस्ट के लिए एक अच्छा प्लेटफोर्म
मिल गया. हमारे यहाँ के रेल्वे प्लेटफोर्म और उधर के प्लेटफोर्म में
काफ़ी समानताएं हैं. जनता दोनों जगह गंदगी करती है.

व्हाट्सएप आया और जो कुछ फेसबुक पर करना बचा था इधर पूरा कर
लिया. सुबह सुबह फूल पत्ती के साथ जबरिया स्वागत.

सी सी टी वी कैमरा आया जिसमें ये भी दिखाई देने लगा कि आपने
कितने बजे अपनी टांग खुजाई, खोपड़ी बजाई. हरामखोरी करने वाले
कर्मचारियों की जान पे बन आई.

ये हैं प्रसून जोशी का लिखा हुआ और जतिन ललित द्वारा लय में बाँधा
गया गीत जिसे महालक्ष्मी अय्यर संग गाया है बाबुल सुप्रियो ने.



गीत के बोल:

चन्दा चमके चम चम चीखे चौकन्ना चोर
चींटी चाटे चीनी चटोरी चीनीखोर
चन्दा चमके चम चम चीखे चौकन्ना चोर
चींटी चाटे चीनी चटोरी चीनीखोर
कितना मुश्किल है ये गाना ज़रा गा के दिखाना
चन्दा चीनी चमके चाटे चौकन्ना चीखे चोर
चन्दा चमके चम चम चीखे चौकन्ना चोर
चींटी चाटे चीनी चटोरी चीनीखोर

खड़कसिंह के खड़कने से खड़कती हैं खिड़कियाँ
खिड़कियों के खड़कने से खड़कता है खड़कसिंह
खड़कसिंह के खड़कने से खड़कती हैं खिड़कियाँ
खिड़कियों के खड़कने से खड़कता है खड़कसिंह
कितना मुश्किल है ये गाना ज़रा गा के दिखाना
खडक खडक खडके खिड़की खडकसिंह के खड़के ज़ोर

चन्दा चमके चम चम चीखे चौकन्ना चोर
चींटी चाटे चीनी चटोरी चीनीखोर
चन्दा चमके चम चम चीखे चौकन्ना चोर
चींटी चाटे चीनी चटोरी चीनीखोर

पक्के पेड़ पर पका पपीता पका पेड़ या पका पपीता
पके पेड़ को पकडे पिंकू पिंकू पकडे पका पपीता
बोलो
पक्के पेड़ पर पका पपीता पकड़ा पिंकी पकी का कपडा
कपडा हा हा हा
पक्के पेड़ पर पका पपीता पका पेड़ या पका पपीता
पके पेड़ को पकडे पिंकू पिंकू पकडे पका पपीता
कितना मुश्किल है ये गाना ज़रा गा के दिखाना
पके पेड़ को पकडे पिंकू पिंकू पकडे पका पपीता

चन्दा चमके चम चम चीखे चौकन्ना चोर
चींटी चाटे चीनी चटोरी चीनीखोर
चन्दा चमके चम चम चीखे चौकन्ना चोर
चींटी चाटे चीनी चटोरी चीनीखोर
कितना मुश्किल है ये गाना ज़रा गा के दिखाना
चन्दा चीनी चमके चाटे चौकन्ना चीखे चोर
चन्दा चमके चम चम चीखे चौकन्ना चोर
चींटी चाटे चीनी चटोरी चीनीखोर
……………………………………………………….
Chanda chamke cham cham-Fanaa 2006

Artists: Aamir Khan, Kajol, Rishi Kapoor, a kid

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Nov 16, 2019

मेरे हाथ में तेरा हाथ-फ़ना २००६

सन २००६ की फिल्म फ़ना एक चर्चित फिल्म है जिसके
१-२ गीत काफी बजे हैं. दो गीत आप सुन चुके हैं आपको
अब सुनवाते हैं तीसरा गीत जो कि एक युगल गीत है
सोनू निगम और सुनिधि चौहान की आवाजों में.

गीत लिखा है प्रसून जोशी ने और इसकी धुन तैयार की
हा जतिन ललित ने. सोनू निगम और सुनिधि चौहान का
कोई भी युगल गीत हमने काफी दिन से नहीं सुना है.





गीत के बोल:

मेरे हाथ में तेरा हाथ हो
सारी जन्नतें मेरे साथ हो
मेरे हाथ में तेरा हाथ हो
सारी जन्नतें मेरे साथ हो
तू जो पास हो फिर क्या ये जहां
तेरे प्यार में हो जाऊं फ़ना
मेरे हाथ में तेरा हाथ हो
सारी जन्नतें मेरे साथ हो
तू जो पास हो फिर क्या ये जहां
तेरे प्यार में हो जाऊं फ़ना
मेरे हाथ में तेरा हाथ हो
सारी जन्नतें मेरे साथ हो

तेरे दिल में मेरी साँसों को पनाह मिल जाए
तेरे इश्क में मेरी जां फ़ना हो जाए
जितने पास है खुशबू सांस के
जितने पास होंठों के शलजम
जैसे साथ है करवट याद के
जैसे साथ बाहों के संगम
जितने पास पास ख्वाबों के नज़र
उतने पास तू रहना हमसफ़र
तू जो पास हो फिर क्या ये जहां
तेरे प्यार में हो जाऊं फ़ना

मेरे हाथ में तेरा हाथ हो
सारी जन्नतें मेरे साथ हो

रोने दीज हमको दो आँखें सुजाने दे
बाहों में ले एल और खुद को भीग जाने दे
है जो सीने में कैद दरिया वो छूट जायेगा
है इतना दर्द के तेरा दामन भीग जायेगा
जितने पास पास धडकन के हैं राज़
जितने पास बूंदों के बादल
जैसे साथ साथ चन्दा के है रात
जितने पास नैनों के काजल
जितने पास पास सागर के लहर
उतने पास तू रहना हमसफ़र
तू जो पास हो फिर क्या ये जहां
तेरे प्यार में हो जाऊं फ़ना

मेरे हाथ में तेरा हाथ हो
सारी जन्नतें मेरे साथ हो

अधूरी सांस थी धडकन अधूरी थी अधूरे हम
मगर अब चाँद पूरा है फलक पे और अब पूरे हैं हम
……………………………………………
Mere haath mein-Fanaa 2006

Artists: Aamir Khan, Kajol

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Jul 19, 2019

चाँद सिफ़ारिश जो करता-फना २००६

जतिन ललित के संगीत वाला कोई गीत सन २००१
के बाद सबसे ज्यादा बजा तो वो है फिल्म फना का
यह गीत जो हम आपको आज सुनवायेंगे. ये कम
समय में ज्यादा बजने वाला गीत है.

इसे उदित नारायण और कैलाश खेर ने गाया है. बोल
है प्रसून जोशी के. गीत के बहाने क़ुतुब मीनार की सैर
हो जाती है.



गीत के बोल:

सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह
सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह

चांद सिफारिश जो करता हमारी देता वो तुमको बता
शर्म-ओ-हया पे परदे गिरा के करनी है हमको खता
जिद है अब तो है खुद को मिटाना होना है तुझमें फना
चांद सिफारिश जो करता हमारी देता वो तुमको बता
शर्म-ओ-हया पे परदे गिरा के करनी है हमको खता

तेरी अदा भी है झोंके वाली छू के गुज़र जाने दे
तेरी लचक है जैसे के डाली दिल मे उतर जाने दे
आ जा बाहों मे कर के बहाना होना है तुझमें फना
चांद सिफारिश जो करता हमारी देता वो तुमको बता
शर्म-ओ-हया पे परदे गिरा के करनी है हमको खता

सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह
सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह

है जो इरादे बता दूं तुमको शर्मा ही जाओगी तुम
धड़कने जो सुना दूं तुमको घबरा ही जाओगी तुम
हमको आता नहीं है छुपाना होना है तुझमें फना
चांद सिफारिश जो करता हमारी देता वो तुमको बता
शर्म-ओ-हया पे परदे गिरा के करनी है हमको खता
जिद है अब तो है खुद को मिटाना होना है तुझमें फना
.....................................................................
Chand sifarish jo karta-Fanaa 2006

Artist: Aamir Khan, Kajol

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Sep 19, 2017

देखो ना-फना २००६

फिल्म फना से एक गीत सुनते हैं सोनू निगम और सुनिधि चौहान
का गाया हुआ.

प्रसून जोशी का गीत है और जतिन ललित का संगीत. कुछ कुछ
शंकर एहसान लॉय वाला प्रभाव महसूस होता है गीत में.
   



गीत के बोल:

ये साजिश है बूंदों की कोई ख़्वाईश है चुप चुप सी
ये साजिश है बूंदों की कोई ख़्वाईश है चुप चुप सी
देखो ना देखो ना
देखो ना देखो ना
हवा कुछ हौले हौले जुबां से क्या कुछ बोले
क्यों दूरी है अब दरमियाँ
देखो ना देखो ना
देखो ना देखो ना

फिर न हवायें होंगी इतनी बेशरम
फिर ना डगमग डगमग होंगे ये कदम
फिर न हवायें होंगी इतनी बेशरम
फिर ना डगमग डगमग होंगे ये कदम
हो सावन ये सीधा नहीं खुफ़िया बड़ा
कुछ तो बरसते हुये कह रहा
समझो ना समझो ना
समझो ना समझो ना
हवा कुछ हौले हौले जुबां से क्या कुछ बोले
क्यों दूरी है अब दरमियाँ
देखो ना देखो ना
देखो ना देखो ना

जुगनू जैसी चाहत देखो जले मुझे
मीठी सी मुश्किल है कोई क्या करे
जुगनू जैसी चाहत देखो जले मुझे
मीठी सी मुश्किल है कोई क्या करे
होठों की अर्जी ऐसे ठुकराओं ना
साँसों की मर्ज़ी को झूठलाओं ना
छू लो ना छू लो ना
छू लो ना छू लो ना

हवा कुछ होले छोले जुबां से क्या कुछ बोले
क्यों दूरी है अब दरमियाँ
देखो ना देखो ना
देखो ना देखो ना
………………………………………………
Dekho na-Fanaa 2006

Artists: Aamir Khan, Kajol

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Dec 7, 2016

मैं कभी बतलाता…माँ-तारे ज़मीन पर २००७

सन २००७ की फिल्म तारे ज़मीन पर एक सार्थक फिल्म है. ये काफी
लोकप्रिय रही. रूटीन की प्यार मोहब्बत वाली या ढिशुम ढिशुम वाली फिल्मों
से बिलकुल अलग. कोई भी सफल हिंदी फिल्म की कहानी बिना फ़िल्मी
मसालों के पूरी नहीं होती, इस फिल्म में भी हैं मगर थोड़े कम. गाने ही
अपने आप में बहुत बड़ा मसाला अवयव हैं फिल्म का.

फिल्म से एक गीत सुनते हैं शंकर महादेवन का गाया हुआ जिसमें माँ को
याद किया गया है. बच्चों के लिए सब कुछ उनकी माँ होती है. संकटमोचक
कहें या ममता की मूर्ति. किसी भी रूप में वो केवल आपका हित ही चाहेगी.
इसलिए बच्चे अपनी व्यथा अपनी माँ से ही कहा करते हैं. गीत प्रसून जोशी
ने लिखा है और इसकी धुन बनाई है संगीतकार तिकड़ी शंकर एहसान लॉय
ने.



गीत के बोल:

मैं कभी बतलाता नहीं
पर अंधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं  दिखलाता नहीं
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब है पता है ना माँ
तुझे सब है पता मेरी माँ

भीड़ में यूँ ना छोड़ो मुझे
घर लौट के भी आ ना पाऊँ माँ  
भेजना इतना दूर मुझको तू
याद भी तुझको आ ना पाऊँ माँ
क्या इतना बुरा हूँ मैं माँ
क्या इतना बुरा मेरी माँ

जब भी कभी पापा मुझे जो ज़ोर से
झूला झुलाते हैं माँ
मेरी नज़र ढूँढे तुझे
सोचूं यहीं तू आ के थामेगी माँ

उनसे मैं ये कहता नहीं
पर मैं सहम जाता हूँ माँ
चेहरे पे आने देता नहीं
दिल ही दिल में घबराता हूँ माँ
तुझे सब है पता है ना माँ
तुझे सब है पता मेरी माँ
ओ मैं कभी बतलता नहीं
पर अंधेरे से डरता हूँ मैं माँ
यूँ तो मैं  दिखलाता नहीं
तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ
तुझे सब है पता है ना माँ
तुझे सब है पता मेरी माँ
…………………………………………………………
Main kabhi batlata nahin-Taare zameen par 2007

Artists: Darsheel Safary

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Apr 9, 2016

रस के भरे तोरे नैन-सत्याग्रह २०१३

आज आपको एक गीत सुनवाते हैं जो हमारे एक मित्र को
बेहद पसंद है. हमारे मित्र किलासिकल को ज्यादा सुना
करते हैं. उनका मानना है कि फिल्म संगीत में से कभी
भी किलासिकल  संगीत गायब नहीं होगा और वो समय
समय पर फिल्मों में सुनाई देता रहेगा.

इस गीत के गायक पाकिस्तान के मशहूर गायक हैं. साथ
में हैं अर्पिता चक्रवर्ती जिनका शायद ये पहला गीत सुनवा
रहे हैं इस ब्लॉग पर. प्रसून जोशी के लिखे गीत की तर्ज़
बनाई है आदेश श्रीवास्तव ने.

अजय देवगन और करीना कपूर परदे पर इस गीत में आपको
दिखाई देंगे. सत्याग्रह प्रकाश झा की फिल्म है और इस वजह
से इसमें आपको उनके फैवरेट कलाकार अजय देवगन दिख
रहे हैं. अजय देवगन का अभिनय समय के साथ मंज गया.
अमिताभ के साथ काम कर कर के उनके अभिनय में निखार
आया ऐसा कुछ फिल्म प्रेमियों का मानना है. पहली बार
वे अमिताभ के साथ मेजर साब में दिखे थे.



गीत के बोल:

रस के भरे तोरे नैन सांवरिया
रस के भरे तोरे नैन सांवरिया
तड़पत हूँ दिन रैन सांवरिया
तड़पत हूँ दिन
तड़पत हूँ दिन
बिन देखे नहीं चैन सांवरिया
बिन देखे नहीं चैन
हो, रस के भरे तोरे नैन सांवरिया
रस के भरे तोरे नैन
दर्द जिया का, कासे कहूँ मैं
टीस में कैसे बोलूं
पिया बिना मैं, जोगन जोगन
बन के बावरिया डोलूं
और न कर बेचैन सांवरिया
रस के भरे तोरे नैन सांवरिया
रस के भरे तोरे नैन
तड़पत हूँ दिन रैन सांवरिया
तड़पत हूँ दिन रैन
रस के भरे तोरे नैन सांवरिया


तोरे खातिर से सजाई
खुसबू फुलवा फुलवा
अंग अंग मोरे गंध तेहारी
बहियन झूला झुलवा
हुई सुहागन रैन सांवरिया
हुई सुहागन रैन
हो रस के भरे तोरे नैन सांवरिया
रस के भरे तोरे नैन सांवरिया सांवरिया

रस के भरे तोरे नैन सांवरिया
रस के भरे तोरे नैन सांवरिया
तड़पत हूँ दिन रैन सांवरिया
तड़पत हूँ दिन रैन
………………………………………………………………….
Ras ke bhare tore nain-Satyagrah 2013

Artists: Ajay Devgan, Kareena Kapoor

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Feb 19, 2016

लड़की क्यूँ न जाने-हम तुम २००४

हिंदी सिनेमा में आपको एक मीटर से लगा कर एक किलोमीटर
लंबे गीत मिल जायेंगे. अगर ऐसे गीतों के साथ विवरण भी
चस्पा किया जाए तो दो किलोमीटर लंबी दास्तान हो जायेगी.

प्रस्तुत गीत है गीत और बोलचाल का मिश्रण फिल्म हम तुम
से जो सैफ अली खान और रानी मुखर्जी अभिनीत एक चर्चित
फिल्म थी. प्रसून जोशी के लिखे गीत की तर्ज़ बनायीं है जोड़ी
जतिन ललित ने. धुन चाहे आकर्षक हो या न हो, गीत रोचक
है. नोक झोंक और छेड़ छाड वाले गीत सुनने में ज्यादा आनंद
देते हैं. इसमें नोक झोंक ज्यादा है. गीत जैसे जैसे प्रगति की
और अग्रसर होता है कुछ कुछ रैप गीत जैसा सुनाई देता है और
इसमें रैप के आवश्यक तत्वों -गिम्मी, वाना, गोना, ऊह ऊह,
ये ये जैसे शब्दों में से दो शब्द आये हैं.

गीत गाया है शान उर्फ शांतनु और अलका याग्निक ने.



गीत के बोल:

लड़की क्यूँ न जाने क्यूँ लड़कों सी नहीं होती

सोचती है ज़्यादा  कम वो समझती है
सोचती है ज़्यादा  कम वो समझती है
दिल कुछ कहता है  कुछ और ही करती है
लड़की क्यूँ न जाने क्यूँ लड़कों सी नहीं होती
लड़की क्यूँ न जाने क्यूँ लड़कों सी नहीं होती

सोचती है ज़्यादा  कम वो समझती है
सोचती है ज़्यादा  कम वो समझती है
दिल कुछ कहता है  कुछ और ही करती है
लड़की क्यूँ न जाने क्यूँ लड़कों सी नहीं होती
लड़की क्यूँ न जाने क्यूँ लड़कों सी नहीं होती

प्यार उसे भी है मगर शुरूआत तुम्ही से चाहे
खुद में उलझी-उलझी है पर बालों को सुलझाये

आय मीन यू आर आल द सेम यार
हम अच्छे दोस्त हैं  पर उस नज़र से तुमको देखा नहीं
वो सब तो ठीक है पर उस बारे में मैंने सोचा नहीं

सब से अलग हो तुम ये कह के पास तुम्हारे आये
और कुछ दिन में तुम में अलग सा कुछ भी न उसको भाये

उफ़  ये कैसी शर्ट पहनते हो
ये कैसे बाल कटाते हो
गाड़ी तेज़ चलाते हो
तुम जल्दी में क्यूँ खाते हो
गिम्मी ए ब्रेक

तुम्हें बदलने को पास वो आती है
तुम्हें मिटाने को जाल बिछाती है
बातों-बातों में तुम्हें फंसाती है
पहले हँसाती है
फिर बड़ा रुलाती है
लड़की क्यूँ न जाने क्यूँ लड़कों सी नहीं होती
लड़की क्यूँ न जाने क्यूँ लड़कों सी नहीं होती

ऐ इतना ही खुद से ख़ुश हो तो पीछे क्यूँ आते हो
फूल कभी तो हज़ार तोहफ़े आख़िर क्यूँ लाते हो

अपना नाम नहीं बताया आपने
क़ॉफ़ी पीने चलेंगे
मैं आपको घर छोड़ दूँ
फिर कब मिलेंगे

बिखरा बिखरा बेमतलब सा टूटा फूटा जीना
और कहते हो अलग से हैं हम तान के अपना सीना

भीगा तौलिया कहीं फ़र्श पे
टूथपेस्ट का ढक्कन कहीं
कल के मोज़े उलट के पहने
वक़्त का कुछ भी होश नहीं

जीने का तुमको ढंग सिखलाती है
तुम्हें जानवर से इन्साँ बनाती है
उसके बिना एक पल रह ना सकोगे तुम
उसको पता है ये कह ना सकोगे तुम
इसलिये लड़कियाँ लड़कों सी नहीं होतीं
इसलिये लड़कियाँ लड़कों सी नहीं होतीं
  
जाने कौन-कौन से दिन वो तुमको याद दिलाये
प्यार को चाहें भूल भी जाये  तारीख़ें न भुलाये

फर्स्ट मार्च को नज़र मिलाई
चार अप्रैल को मैं मिलने आई
इक्कीस मई को तुमने छुआ था
छः जून मुझे कुछ हुआ था
  
लड़कों का क्या है किसी भी मोड़ पे वो मुड़ जायें
अभी किसी के हैं अभी किसी और से वो जुड़ जायें

तुम्हारे मम्मी डैडी घर पे नहीं हैं
ग्रेट मैं आ जाऊँ
तुम्हारी फ्रेंड अकेली घर जा रही है
बेचारी मैं छोड़ आऊँ उफ़्
  
एक हाँ कहने को कितना दहलाती है
थक जाते हैं हम वो जी बहलाती है
  
वो शरमाती है  कभी छुपाती है
लड़की जो हाँ कह दे  उसे निभाती है
इसलिये लड़कियाँ लड़कों सी नहीं होतीं
इसलिये लड़कियाँ लड़कों सी नहीं होतीं


ना ना ना ना
इसलिये लड़कियाँ लड़कों सी नहीं होतीं
लड़की क्यों… ओह गॉड
इसलिये लड़कियाँ लड़कों सी नहीं होतीं
ना ना ना ना  ओह गॉड शट अप
आल राईट आल राईट
इस में झगडा करने की क्या बात है यार
पहले पहले भँवरे जैसे आसपास मंडराई
अरे बट आय
फिर बिज़ी हूँ कह कर तुमको वो टरकाई
कम ऑन रिया
समझा करो डार्लिंग आज बहुत काम हैं
अरे मेरी भी तो सुनो
दूर हुआ तो क्या दिल में तुम्हारा नाम है
ओह वाव
जिस चेहरे पर मरते हैं वो बोरिंग हो जाए
आय ऍम नॉट लिसनिंग टू यू
कुछ ही दिन में नज़रें इनकी इधर उधर मंडराई
आय ऍम नॉट लिसनिंग टू यू
सिर्फ प्यार से जिंदगी नहीं चलती
ओ के आय ऍम नॉट विद हर
तुम इंटीरियर डेकोरेशन का कोर्स क्यों नहीं करती
ओ के देट्स इट
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Ladki kyun-Hum tum 2004

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Jan 4, 2016

मुख़्तसर मुलाक़ात है-तेरी मेरी कहानी २०१२

गीतों में शब्दों के प्रयोग पर काफी दिन से हमने चर्चा नहीं
की. मुख़्तसर-एक शब्द है उर्दू का जिसका अर्थ है-संक्षिप्त
काफी गीतों में इस शब्द का प्रयोग आपने देखा होगा. किसी
गीत की शुरुआत इस शब्द से हुई हो मुझे याद नहीं आता.
हो सकता है कोई गीत शब्द से बना हो और अभी याद न
आ रहा हो. प्रसून जोशी-गीतकार इस गीत के जिन्होंने इसे
एक आधुनिक कविता के नदाज़ में लिखा है बधाई के पात्र
हैं. गीत गाया है वाजिद अली ने और इसका संगीत तैयार
किया है साजिद-वाजिद की जोड़ी ने. गीत के जो गायक हैं
वे संगीतकार जोड़ी में से ही एक शख्स हैं.

फिल्म का नाम है तेरी मेरी कहानी जिसे सुन कर दर्शक को
खुशनुमा मुगालता होता है कि ये उसकी अपनी कहानी है.



गीत के बोल:

मुख़्तसर मुलाक़ात है
अनकही कोई बात है
फिर रात की शैतानियाँ
या अलग, ये जज़्बात है
मुख़्तसर...

मौसम ये कहता है, भीगे अंधेरों में
डुबकी लगाते हैं ना
पर मुझको लगता है, मैं रोक लूं खुद को
एहसास है ये नया
क्या हुआ, मैं हूँ बेखबर
है नया सा, सुहाना असर
जीत है या मात है
मुख़्तसर मुलाकात है...

ये तो सुना था, के कुछ ऐसा होता है
पर मुझको भी हो गया
मेरी तो दुनिया बिलकुल अलग थी
अंदाज़ वो खो गया
देखना, डूबना हो गया
डूबना, तैरना हो गया
क्या असर मेरे साथ है
मुख़्तसर मुलाक़ात है...
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Mukhtsar mulaqat hai-teri meri kahani 2012

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