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Nov 9, 2019

ये कथा भक्त भगवान की-रामभक्त विभीषण १९५८

धार्मिक फिल्मों से हमने कम गीत सुने हैं और फिल्मों
के बजाये गैर फ़िल्मी धार्मिक गीत ज्यादा सुने हैं. एक
फिल्म है सन १९५८ की राम भक्त विभीषण जिसका एक
अनूठा गीत हम आज आपको सुनवायेंगे.

गीत की विशेषता ये है इसे सरस्वती कुमार दीपक ने
लिखा है और इसे गाया है कवि प्रदीप ने जिहोने खुद
काफी गीत लिखे फिल्मों के लिए और स्वयं गाये भी.
संगीत तैयार किया है अजीत मर्चेंट ने.

फिल्म का शीर्षक गीत है ये और इसमें भक्त और उनके
तारणहार के ऊपर काफी प्रकाश डाला गया है.



गीत के बोल:

ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की
भगवन को चिंता रहती है
भक्तों के कल्याण की
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की

जब जब पीड पड़ी भक्तों पर
प्रभु ने आन उबारा
बाल भक्त प्रहलाद को हरि ने
नरसिंह बन के तारा
भक्तों के कारण आते हैं
काया धार इंसान की
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की

त्रेता युग में जब रावण ने
त्रिभुवन को दहलाया
वीर सिंधु तजदीर बंधु ने
नर का रूप बनाया
भक्त विभीषण का दुःख हरने
चले राम और जानकी
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की

सीते सीते हे सीते सुन
पंचवटी अकुलाई
पर्णकुटी के साथ हुई थी
सूनी कुटिया प्राण की
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की

कह दे ना भगवन से जा कर
अब ना करे वे देरी
अगर नहीं आ पाए तो होगी
यहाँ राख की ढेरी
है मुझको हर घडी प्रतीक्षा
भगवान की मुस्कान की
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की

ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की
भगवन को चिंता रहती है
भक्तों के कल्याण की
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की
धर्म जा रहा पुण्य जा रहा
लंका नीर बहाती
आज अभागा दिया छोड़ के
दूर हो रही बाती
नहीं खबर थी रावण को भी
नहीं खबर थी रावण को क्या
ताकत प्रभु के मान की
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की

तीन लोक से न्यारी महिमा
दो अक्षर के नाम की
दो अक्षर के नाम की
तैर रहे पत्थर पानी पर
ये लीला है राम की
तैर रहे पत्थर पानी पर
ये लीला है राम की
महिमा वेद पुराण सुनाते
महिमा वेद पुराण सुनाते
भगवन के वरदान की
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की

भक्त विभीषण ने भीषण बन के
किया अनुपम त्याग रे
किया अनुपम त्याग
चढा दिया प्रभु के चरणों पे
जीवन का अनुराग रे
जीवन का अनुराग
लिखी भक्त ने पुत्र रक्त से
लिखी भक्त ने पुत्र रक्त से
ये गाथा बलिदान की
ये कथा भक्त भगवान की
ये कथा भक्त भगवान की
……………………………………
Ye Katha Bhakt Bhagwan ki-Rambhakt Vibishan 1958

Artist:

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Jun 16, 2018

कोई दिन ज़िन्दगी के-गुंजन १९४८

सन १९४८ में कई उल्लखनीय फ़िल्में आयीं और कई
फ़िल्में ऐसी हैं जिनका संगीत खूब लोकप्रिय हुआ और
बजा. ये भी एक ऐसा वर्ष रहा जिसमें पुरानी और नयी
पीढ़ी के संगीतकारों की बराबर सी मौजूदगी रही..

सुनते हैं एक कम जाने पहचाने संगीतकार की बढ़िया
धुन मुकेश की आवाज़ में.

गीत सरस्वती कुमार दीपक रचित है.




गीत के बोल:

कोई दिन ज़िन्दगी के गुनगुना कर ही बिताता है
कोई दिन ज़िन्दगी के गुनगुना कर ही बिताता है
कोई पा कर के खोता है कोई खो कर के पाता है

हमारी ज़िन्दगी भी क्या कभी हँसना कभी रोना
हमारी ज़िन्दगी भी क्या कभी हँसना कभी रोना
जिसे हम अपना कहते हैं वो हमसे दूर जाता है

उम्मीदें लुट गईं जिसकी तसव्वुर छिन गया जिसका
उम्मीदें लुट गईं जिसकी तसव्वुर छिन गया जिसका
वो कश्ती आप ही गहरे समन्दर में डुबाता है

अगर दिल हो गया वीरां करूँगा मौत से उल्फ़त
अगर दिल हो गया वीरां करूँगा मौत से उल्फ़त
किसी बदहाल पर अब कौन दो आँसू बहाता है

किसी के चैन से आराम से क्या वास्ता अपना
किसी के चैन से आराम से क्या वास्ता अपना
न कोई साथ देता है न कोई पास आता है

कोई दिन ज़िन्दगी के गुनगुना कर ही बिताता है
…………………………………………..
Koi din zindagi ke-Gunjan 1948

Artist: Aap dhoondho

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Feb 21, 2018

पानी का बुलबुला-सुहागन १९५४

सन १९६४ की गुरु दत्त और माला सिन्हा अभिनीत फिल्म सुहागन
से आपने कई गीत सुने. आज सुनते हैं इससे दस साल पहले एक
और इसी नाम से बनी फिल्म सुहागन से एक गीत.

ये दर्शनवादी गीत गाया है गीता दत्त ने. सरस्वती कुमार दीपक के
बोल हैं और वसंत रामचंद्र का संगीत. इस फिल्म की नायिका हैं
गीता बाली जो गीत में नज़र आ रही हैं. परदे पर इसे गाने वाली
नायिका को आप पहचानिये.

वसंत पवार और रामचंद्र वाधवकर की जोड़ी को वसंत-रामचंद्र के
नाम से जाना जाता है. सुनने पर ऐसा लगता है मानो वसंत देसाई
और सी रामचंद्र की जोड़ी हो.




गीत के बोल:

पानी का बुलबुला
पानी का बुलबुला ये जिंदगानी
कलियों की है दो दिन की जिंदगानी
हंस के बिताये जा गा के बिताए जा
मस्ती की अनमोल बस्ती बसाये जा
पानी का बुलबुला ये जिंदगानी
कलियों की है दो दिन की जिंदगानी
हंस के बिताये जा गा के बिताए जा
मस्ती की अनमोल बस्ती बसाये जा

दीप बुझ जायेगा पीछे पछतायेगा
दीप बुझ जायेगा पीछे पछतायेगा
रूप ढल कर दो आंसू बहायेगा बहायेगा
सपने सजाये जा मन बहलाएगा
खोने को भूल कर पाए जा पाए जा

पानी का बुलबुला
पानी का बुलबुला ये जिंदगानी
कलियों की है दो दिन की जिंदगानी
हंस के बिताये जा गा के बिताए जा
मस्ती की अनमोल बस्ती बसाये जा

सपनो की झोली खुशियों की झोली
घर में वो भोली
किस्मत की कश्ती डोली ना डोली
किस्मत की कश्ती डोली ना डोली
मुस्कुराये जा मुस्कुराये जा
मुस्कुराये जा
नए नए रास्ते हैं तेरे वास्ते
आगे आगे बढ़ इनेहं अपना बनाये जा

पानी का बुलबुला
पानी का बुलबुला ये जिंदगानी
कलियों की है दो दिन की जिंदगानी
हंस के बिताये जा गा के बिताए जा
मस्ती की अनमोल बस्ती बसाये जा
.....................................................................
Paani ka bulbula-Suhagan 1964

Artist: Geeta Bali

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Dec 5, 2017

भागवत भगवान की है आरती-भागवत महिमा १९५५

सरस्वती कुमार दीपक का लिखा एक गीत सुनते हैं
सन १९५५ की फिल्म भागवत महिमा से. इसे गाया
है हेमंत कुमार ने और संगीतकार भी हेमंत कुमार ही
हैं.

भागवत महिमा के बारे में सभी जानते हैं. कुछ वर्षों
से भागवात कथा के काफी भव्य आयोजन होने लगे
हैं. पौष के माह में ये आयोजन सबसे ज्यादा होते हैं.




गीत के बोल:

भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती

ये अमर ग्रन्थ ये मुख्य पन्थ
ये पंचम वेद निराला
नव ज्योति जगानेवाला
ये अमर ग्रन्थ ये मुख्य पन्थ
ये पंचम वेद निराला
नव ज्योति जगानेवाला
हरिगान यही वरदान यही
जग के मंगल की आरती
पापियों को पाप से है तारती

भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती

ये शान्ति गीत पावन पुनीत सा
कोप मिटाने वाला
हरि दरश दिखानेवाला
ये शान्ति गीत पावन पुनीत सा
कोप मिटाने वाला
हरि दरश दिखानेवाला
है सुख करनी है दुःख हरनी
मधुसूदन की आरती
पापियों को पाप से है तारती

भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती

ये मधुर बोल जगफन्द खोल
सन्मार्ग दिखाने वाला
बिगड़ी को बनाने वाला
ये मधुर बोल जगफन्द खोल
सन्मार्ग दिखाने वाला
बिगड़ी को बनाने वाला

श्री राम यही घनश्याम यही
प्रभु की महिमा की आरती
पापियों को पाप से है तारती

भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
………………………………………………
Bhagwat Bhagwan ki hai aarti-Bhagwat mahima 1955

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Oct 1, 2016

दुनिया एक कहानी रे भैया-अफसाना १९५१

सन १९५१ की फिल्म अफसाना से एक दर्शंनवादी गीत सुनते हैं जो
एक मेले में गाया जा रहा है. दुनिया के बारे में बतलाता ये गीत दो
हिस्सों में प्रकट होता है. गीत के अंत में बिछुडे हुओं को एक दूसरे
याद आ जाते हैं.

सरस्वती कुमार दीपक का लिखा हुआ गीत है जिसे रफ़ी ने गाया है.
आकर्षक धुन में बंधा ये गीत तैयार किया है हुस्नलाल भगतराम ने.
बी आर चोपड़ा की फिल्मों में आपको ऐसा एक आध गीत ज़रूर ही
मिलेगा, जीवन के किसी भी पहलू पर हो मगर मिलेगा ज़रूर. मेले
में इस गीत को कौन कलाकार गा रहा है उसे पहचानने में मेरी मदद
करें.



गीत के बोल:

दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
तूने कह दी मैंने कह दी दुनिया एक कहानी
इस दुनिया के मेले में कोई राजा कोई रानी
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी

इस मेले में हार जीत है और मेले का मेल
इस मेले में उड़न खटोले हाथी घोड़े रेल
कहीं हिंडोले कहीं तमाशे तरह तरह के खेल
इस मेले में पाना खोना जीवन बहता पानी रे भैया
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी

हरियल ले लो फरियल ले लो ले लो चन्दा तारा
आओ चुन्नू आओ मुन्नू
आओ चुन्नू आओ मुन्नू ले लो नया गुब्बारा
मुनिया रानी
मुनिया रानी हमें बता दो क्या है नाम तुम्हारा
कास कर डोर पकड़ना बिटिया मत करना नादानी
इस धागे में बंधी रहेगी तेरी प्रीत पुरानी रे भैया
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी

आई यहाँ कल कहाँ हमें ले जाएगी तकदीर
कौन कहे किसकी आँखों में कब भर आये नीर
एक बार जो खींची प्रीत की मिटती नहीं लकीर
एक बार जो खींची प्रीत की मिटती नहीं लकीर
भूल ना जाना भटक ना जाना माया आणि जानी रे भैया
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी

पार्ट २

दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
तूने कह दी मैंने कह दी दुनिया एक कहानी
इस दुनिया के मेले में कोई राजा कोई रानी
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी

दूर देश से पंछी आया
दूर देश से पंछी आया मिलता नहीं बसेरा
अभी तक उसकी आँखों में छाया हुआ अँधेरा
आंधी ने तिनके तिनकों को चारों ओर बखेरा
बनी हुई है एक अफसाना तेरी याद पुरानी रे भैया
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
दुनिया एक कहानी रे भैया दुनिया एक कहानी
...................................................................................
Duniya ek kahani re bhaiya-Afsana 1951

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Jan 31, 2012

रात गई फिर दिन आता है-बूट पॉलिश १९५४

कथनी और करनी में अंतर मिट जाता है तभी व्यक्ति महात्मा बनता है।
आज बापू की पुण्यतिथि है और उनकी याद में एक गीत प्रस्तुत है फिल्म
बूट पॉलिश से। प्रेरणादायक गीत है ये और मानो ये सन्देश दे रहा हो कि
राजनीति के संक्रमण काल के बाद सुहानी भोर ज़रूर आएगी एक बार फिर।

आम आदमी का जीवन क्या जीवन है इस गीत के माध्यम से ही जान लीजिये।
बच्चों पर बनी ये मर्मस्पर्शी फिल्म मधुर गीतों का खज़ाना है। गीतकार शैलेन्द्र
हसरत और 'सरस्वती कुमार दीपक' ने एक एक गीत में प्राण फूँक दिए हों
मानो। फिल्म 'तीसरी कसम' के एक गीत में भी बुढ़ापे और जवानी की गाथा है
जो शैलेन्द्र का लिखा हुआ है । काल के पहिये पर नीरज साहब फिल्म 'चंदा
और बिजली' के गीत में कह चुके हैं। तीनों ही गीतों का संगीत तैयार किया है
शंकर जयकिशन ने। गीत में प्रमुख कलाकार हैं-बेबी नाज़ और डेविड।

प्रस्तुत गीत के लेखक हैं सरस्वती कुमार "दीपक" । गायक मन्ना डे की आवाज़
को तो आप पहचानते ही होंगे।



गीत के बोल:

रात गई
हो हो हो हो हो
रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई

रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई

कितना बड़ा सफ़र इस दुनिया का
एक रोता एक मुस्काता है
एक रोता एक मुस्काता है
हा आ आ आ आ आ आ आ
कदम कदम रखता राही
कितनी दूर चला जाता है
एक एक तिनके तिनके से
एक एक तिनके तिनके से
पंछी का घर बन जाता है

हो ओ रात गई, रात गई

कभी अँधेरा कभी उजाला
कभी अँधेरा कभी उजाला
फूल खिला फिर मुरझाता है
खेला बचपन हंसी जवानी
खेला बचपन हंसी जवानी
मगर बुढ़ापा तडपाता है
मगर बुढ़ापा तडपाता है
खेला बचपन हंसी जवानी
मगर बुढ़ापा तडपाता है

सुख दुःख का पहिया चलता है
वही नसीबा कहलाता है

हो ओ रात गई, रात गई

रात गई फिर दिन आता है
इसी तरह आते जाते ही
ये सारा जीवन जाता है
हो ओ रात गई, रात गई
........................................
Raat gayi fir din aata hai-Boot Polish

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Apr 4, 2010

देख चाँद की ओर-आग १९४८

फिल्म आग (१९४८) के कुछ गीत हम सुन चुके हैं। आइये अगला गीत
सुना जाए। ये है शैलेश मुखर्जी और शमशाद बेगम का गाया युगल गीत।
आकर्षक धुन है इस गीत की, जिसे लिखा है सरस्वती कुमार दीपक ने
और धुन बनाई है राम गांगुली ने। फिल्म में मल्लाह गीत गा रहा है।
इस तरह के प्रतीकात्मक गीत आगे बहुत बने। आइये ये गीत देखा जाए।



गीत के बोल:

कहीं का दीपक, कहीं की बाती
कहीं का दीपक, कहीं की बाती
आज बने हैं जीवन साथी
देख हंसा है चाँद, मुसाफिर
देख चाँद की ओर
देख चाँद की ओर
देख चाँद की ओर
मुसाफिर
देख चाँद की ओर
देख चाँद की ओर

देख घटा घनघोर
देख घटा घनघोर
मुसाफिर, देख घटा घनघोर
देख घटा घनघोर
चाँद के मुख पर घूंघट डाले,
खेल रही जो खेल
खेल रही जो खेल
छिपा लिया आँचल में मुखड़ा,
देख घटा का खेल
देख घटा का खेल
खेल खेल में देख मुसाफिर,
बंधी प्रीत की डोर

देख चाँद की ओर
देख चाँद की ओर
मुसाफिर
देख चाँद की ओर
देख चाँद की ओर

देख लहर की ओर
देख लहर की ओर
मुसाफिर
देख लहर की ओर
देख लहर की ओर
तड़प उठी जो देख चाँद को
छिपा ना पाई प्रीत
छिपा ना पाई प्रीत
मिलन हुआ चंदा लहरों का,
गूँज उठा संगीत
गूँज उठा संगीत

यूं मिलते हैं देख मुसाफिर,
चंदा और चकोर

देख चाँद की ओर
देख चाँद की ओर
मुसाफिर
देख चाँद की ओर
देख चाँद की ओर
............................................................................
Dekh chand ki or-Aag 1948

Artist: Raj Kapoor

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