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Feb 27, 2017

नाचे रे गोरी डींगू-लाजवाब १९५०

कुछ गीतों के साथ मजेदार यादें जुडी होती हैं. ऐसा ही
एक गीत है जो कभी अनोखे बोल वाले कार्यक्रम में आया
करता था. इसकी धुन बड़ी आकर्षक है.

ये अनोखे बोल और भी अनोखे हो जाते था जब शब्द ना
समझ आने की सूरत में जनता कुछ का कुछ बतलाया
करती थी. फिल्म लाजवाब का ये गीत लोक धुन पर
आधारित है. इसमें लता मंगेशकर के साथ अनिल बिश्वास
की आवाज़ है जो इस गीत के संगीतकार भी हैं. गीत
किसी शेखर नाम के गीतकार ने लिखा है जिन्होंने फिल्म
में कुल जमा दो गीत लिखे हैं.

रेडियो सीलोन काफी लहरा लहरा के बजा करता था हमारे
और कई घरों के रेडियो पर. मुझे इसका शब्द समझ नहीं
आया तो किसी ने बतलाया-झींगु, झिंगो, किसी ने कहा पिंगु.
अभी कुछ दिन पहले यू ट्यूब पर किसी ने लिख रखा था
डेंगू.

इसके बोल केवल एक ही अंतरे के दे रहा हूँ. हमारे प्रिय कॉपी
पेस्ट करने वाले मित्र थोड़ी तकलीफ उठायें और सुन के दूसरे
अंतरे के बोल लिखे लें अपने आप.



गीत के बोल:

डींगू नाचे रे गोरी डींगू
नाचे रे गोरी डींगू
नाचे रे गोरी डींगू
ए ढोल बाजे कुडदुम पायल बजे झुम झुम
ढोल बाजे कुडदुम पायल बजे झुम झुम
हाँ जिया बोले सैयां नाचे रे गोरी डींगू
नाचे रे गोरी हई नाचे रे गोरी
नाचे रे गोरी हई नाचे रे गोरी

पास बालम चोरी चोरी आ
हाय तुझे देख न ले
कोई तुझे देख न ले कोई
ले के जिए दे के जिया
कह ले ज़रा सुन ले ज़रा
नाचे रे गोरी डींगू
नाचे रे गोरी डींगू
प्यार भरे नैन मिला जा
पास बालम चोरी चोरी आ
हाय तुझे देख न ले
कोई तुझे देख न ले कोई
ले के जिए दे के जिया
कह ले ज़रा सुन ले ज़रा
प्यार भरे नैन मिला जा
नाचे रे गोरी डींगू
नाचे रे गोरी डींगू

तोरे बिना चैन नहीं आये रे बलम
चैन नहीं आये
कौन सुने दिल जो मेरा गाये रे बलम
दिल जो मेरा गाये
तोरे बिना चैन नहीं आये रे बलम
चैन नहीं आये
कौन सुने दिल जो मेरा गाये रे बलम
दिल जो मेरा गाये
उमड़ घुमड़ आई घटा तोहे बलम मेरी कसम
नैनों से आ दिल में समा जा

नाचे रे गोरी डींगू
नाचे रे गोरी डींगू
ए ढोल बाजे कुडदुम पायल बजे झुम झुम
ढोल बाजे कुडदुम पायल बजे झुम झुम
हाँ जिया बोले सैयां नाचे रे गोरी डींगू
नाचे रे गोरी हई नाचे रे गोरी
नाचे रे गोरी हई नाचे रे गोरी
...........................................................................
Naache re gori dingu-Lajawab 1950

Artist: Rehana

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Jun 17, 2016

तुझे भुला दिया-अनजाना अनजानी २०१०

फिल्म बॉम्बे के गाने-कहना ही क्या के बाद कई ऐसे गीत आये
जो गीत और कव्वाली के हाइब्रिड जैसे सुनाई देते हैं. सन २०१०
की फिल्म अनजाना अनजानी से एक गीत जो ध्यान आकृष्ट करता
है वो है- तुझे भुला दिया. इसमें तीन तरह का ट्रीटमेंट है. विलायती
लोक गीत जो एक बाजे के साथ चलते रहते हैं उसके अलावा आज
की आतिफी गायकी का मिश्रण है.

सिद्धार्थ आनंद फिल्म के निर्देशक हैं और साजिद नडियाडवाला इसके
निर्माता. रणवीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा इस फिल्म के प्रमुख
कलाकार हैं. गीत की शुरुआत ऐसा लगता है जैसे सुनिधि गा रही
हों, मगर ये हैं श्रुति पाठक-एक नई गायिका. इसके अलावा ज्यादा
आवाजें गीत में मोहित चौहान की हैं. थोड़ी सी बाकी की आवाजें
शेखर रवजियानी की हैं. इस दो लोगों ने मिल के लिखा है-कुमार
नाम के गीतकार संग विशाल दादलानी ने!


गीत के बोल:

नैना लगियाँ बारिशां
ते सुक्के सुक्के सपने वि पिज गए
नैना लगियाँ बारिशां
रोवे पलकें दे कोने विच नींद मेरी
नैना लगियाँ बारिशां
हंजू दिगडे ने चोट लगे दिल ते
नैना लगियाँ बारिशां
रुत बिरहा दे बादलां दी छा गयी

काली काली खाली रातों से
होने लगी है दोस्ती
खोया खोया इन राहों में
अब मेरा कुछ भी नहीं
हर पल हर लम्हा
मैं कैसे सहता हूँ
हर पल हर लम्हा 
मैं खुद से ये कहता रहता हूँ
तुझे भुला दिया ओ
तुझे भुला दिया ओ
तुझे भुला दिया ओ
फिर क्यूँ तेरी यादों ने
मुझे रुला दिया ओ
मुझे रुला दिया

तेरी यादों में लिखे जो लफ्ज़ देते है सुनाई
बीते लम्हे पूछते है क्यूँ हुए ऐसे जुदा
खुदा, खुदा मिला जो ये फासला है
खुदा तेरा ही ये फैसला है
खुदा होना था वो हो गया
जो तूने था लिखा

काली काली खाली रातों से
होने लगी है दोस्ती
खोया खोया इन राहों में
अब मेरा कुछ भी नहीं
हर पल हर लम्हा
मैं कैसे सहता हूँ
हर पल हर लम्हा
मैं खुद से ये कहता रहता हूँ
तुझे भुला दिया ओ
तुझे भुला दिया ओ
तुझे भुला दिया ओ
फिर क्यूँ तेरी यादों ने
मुझे रुला दिया ओ
मुझे रुला दिया


नैना लगियाँ बारिशां
ते सुक्के सुक्के सपने वि पिज गए
नैना लगियाँ बारिशां
रुत बिरहा दे बादलां दी छा गयी

दो पल तुझसे जुडा था
ऐसे फिर रस्ता मुडा था
तुझसे में खोने लगा
जुदा जैसे होने लगा
मुझसे कुछ मेरा

तू ही मेरी लिए अब कर दुआ
तू ही इस दर्द से कर दे जुदा
तेरा होके तेरा जो मैं ना रहा
मैं ये खुद से कहता हूँ

तुझे भुला दिया ओ
तुझे भुला दिया ओ
तुझे भुला दिया ओ
फिर क्यूँ तेरी यादों ने
मुझे रुला दिया ओ
मुझे रुला दिया
.....................................................................
Tujhe bhula diya-Anjaana anjaani 2010

Artists-Ranveer Kapoor, Priyanka Chopra

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May 20, 2016

बड़ी मुश्किल है-चिंगारी १९५५

पसंद अपनी अपनी ख्याल अपना अपना. इस फलसफे के साथ
जीते जीते ही आपको कई हमखयाल मिल ही जाते हैं. संगीत
में भी कुछ ऐसा ही हुआ मेरे साथ. एक हमारे मित्र को और
मुझे फिल्म चिंगारी का लता का गाया गीत बेहद पसंद है. कोई
नामचीन संगीतकार नहीं जुडा हुआ है गीत के साथ मगर इसे
लिखने वाले ज़रूर बड़ी हस्ती हैं फ़िल्मी दुनिया की-शैलेन्द्र.
शैलेन्द्र सादगी पसंद व्यक्ति थे मगर लेखन उनका उच्च कोटि
का, वे स्वतंत्र कविता लेखन करते तो आज उनकी गिनती
हिंदी साहित्य के अच्छे कवियों में होती. खैर, होनी और बदी
भी कुछ मायने रखती हैं जीवन में, उनका प्रारब्ध उन्हें फ़िल्मी
दुनिया में ले आया.

गीत का संगीत तैयार किया है मनोहर ने जिन्होंने फिल्म रईस
१९४८ से बतौर स्वतंत्र संगीतकार संगीत देना शुरू किया. फिल्म
का निर्माण किसी को-ओपरेटिव पिक्चर्स नामक संस्था ने किया
जिसने इसके अलावा शायद केवल एक और फिल्म का निर्माण
किया सन १९६७ में-दो दुश्मन. उस फिल्म में भी मनोहर का
संगीत है. वैसा ही कुछ हाल इसके निर्देशक का है. श्रीवास्तव
जी ने दो फिल्मों का निर्देशन किया-चिंगारी और बाजे घुँघरू(६२)
बाजे घुँघरू किसी राम राज फिल्म्स नामक संस्था ने बनाई.

गीत में आपको रोशन और शंकर जयकिशन की संगीत शैली का
मिश्रण मिलेगा. टू-इन-वन गीत है इस तरह से ये. ये बात तुलना
के लिए नहीं लिखी गयी है. इरादा है कि संगीत भक्त इस गीत
के ओर्केस्ट्रा और धुन पर गौर फरमाएं जो किसी परिपक्व संगीत
निर्देशक के आउटपुट जैसा है.



गीत के बोल:

बड़ी मुश्किल है अजब मेरा दिल है
ना जाने किसे ढूंढें ना जाने किसे चाहे

बड़ी मुश्किल है अजब मेरा दिल है
ना जाने किसे ढूंढें ना जाने किसे चाहे

सखियों से छुपती फिरूं कहीं जी ना लगे
रातों को तारे गिनूं पालक भी ना लगे
मेरे संग संग मेरी निन्दिया भी सारी रात जगे
मेरे संग संग मेरी निन्दिया भी सारी रात जगे

बड़ी नुश्किल है अजब मेरा दिल है
ना जाने किसे ढूंढें ना जाने किसे चाहे

सपने आये फिर ललचाए जा के फिर ना आये
जा के फिर ना आये
दिल नादान ये अरमान मचलें और रह जाएँ
मचलें और रह जाएँ

बड़ी लुश्किल है अजब मेरा दिल है
ना जाने किसे ढूंढें ना जाने किसे चाहे

ए दिल ये तू ही बता उन्हें ढूंढूं कहाँ
सपनों में देखा जिन्हें मिलेंगे वो  कहाँ
ओ बिन कारण आँगन में क्या सोचूँ खड़ी खड़ी
ओ बिन कारण आँगन में क्या सोचूँ खड़ी खड़ी

बड़ी मुश्किल है अजब मेरा दिल है
ना जाने किसे ढूंढें ना जाने किसे चाहे

बड़ी मुश्किल है अजब मेरा दिल है
ना जाने किसे ढूंढें ना जाने किसे चाहे
............................................................................
Badi mushkil hai-Chingari 1955

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Apr 28, 2016

किसे पूछूं, दुआ-शंघाई २०१२

एक समय था जब हिन्दुस्तानी शहरों के नाम पर फ़िल्में
बनती थीं. हिंदी सिनेमा के ग्लोबलाईजेशन के बाद दूसरे
देशों के शहरों के नाम पर भी फ़िल्में बनना शुरू हुयीं.
अब आप चाइनीज़, मेक्सिकन कोंटिनेंटल फ़ूड खाएं और
बाकी चीज़ों से परहेज़ करें ये तो हो ही नहीं सकता ना.
देसी पब्लिक विलायती दुल्हनें ले आती हैं अब तो.

फिल्म शंघाई से एक गीत सुना जाए जिसे नंदिनी श्रीकर,
अरिजीत सिंह और शेखर ने गाया है. शेखर विशाल-शेखर
संगीतकार जोड़ी वाले. गीत कुमार नामक गीतकार ने लिखा
है और इसकी धुन बनायीं है विशाल-शेखर ने. इस गीत
को अभय देवल, कल्कि कोचलिन और इमरान हाशमी पर
फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

किसे पूछूं है ऐसा क्यूं?
बेजुबां सा ये जहां है
खुशी के पल कहाँ ढूँढूं?
बेनिशां सा वक़्त भी यहाँ है

जाने कितने लबों पे गिले हैं
ज़िन्दगी से कई फासले हैं
पसीजते हैं सपने क्यूं आँखों में
लकीरें जब छूते इन हाथों से
यूं बेवजह

जो भेजी थी दुआ
वो जा के आसमां से यूं टकरा गयी
के आ गयी है लौट के सदा
जो भेजी थी दुआ
वो जा के आसमां से यूं टकरा गयी
के आ गयी है लौट के सदा

सांसों ने कहाँ रुख मोड़ लिया
कोई राह नज़र में न आये
धड़कन ने कहाँ दिल छोड़ दिया
कहाँ छोड़े इन जिस्मों ने साये
यही बार-बार सोचता हूँ तन्हाँ मैं यहाँ
मेरे साथ-साथ चल रहा है यादों का धुआँ

जो भेजी थी दुआ
वो जा के आसमां से यूं टकरा गयी
के आ गयी है लौट के सदा
जो भेजी थी दुआ
वो जा के आसमां से यूं टकरा गयी
के आ गयी है लौट के सदा
.........................................................................
Kise poochhon Dua-Shanghai 2012

Artists: Emran Hasmi, Kalki Koechlin, Abhay Deol,

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Jan 31, 2016

दरिया का किनारा आय हाय-बैंक मेनेजर १९५९

दरिया का किनारा काफी रोमांटिक हुआ करता है जहाँ तक
फिल्मों का सवाल है. इस गीत को सुन कर देख कर तो
कम से कम ऐसा ही प्रतीत हो रहा है. ये गीत है फिल्म
बैंक मेनेजर से. इस फिल्म से आप पूर्व में दो लोकप्रिय
गीत सुन चुके हैं. ये गीत थोडा कम सुना हुआ है मगर
मधुर है. जलाल मलीहाबादी साहब ने इसके बोल लिखे हैं
और संगीत है मदन मोहन का.

ये गाना मीनू मुमताज़ और शेखर पर फिल्माया गया है.
फिल्म का मैनजर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक का है या निजी
बैंक का, मुझे मालूम नहीं चल पाया है अभी तक, थोड़ी
मदद करें और जानकारी दें.




गीत के बोल:

दरिया का किनारा आये हाय
बाहों का सहारा हाय हाय
ऐसे में न छेड़ो बलम
लुट जायेंगे हम
हाय, दरिया का किनारा आये हाय

दिल के पास चले भी आओ
अब न हमें तड़पाओ
ये दिल है तुम्हारा ए हाय
बाहों का सहारा हाय हाय
ऐसे में न छेड़ो बलम
लुट जायेंगे हम
हाय, दरिया का किनारा आये हाय

आँखें मिली तो झूमा मौसम
दिल ने ली अंगडाई
नींद न आये धडके दिल
कैसी ये आग लगाई
एक तीर है मारा आये हाय
बाहों का सहारा हाय हाय
ऐसे में न छेड़ो बलम
लुट जायेंगे हम
हाय, दरिया का किनारा आये हाय

ऐसी नज़र से हम को न देखो
रह रह के प्यार आये
कितना है प्यारा हाय हाय
बाहों का सहारा आये हाय
ऐसे में न छेड़ो बालम
लुट जायेंगे हम

दरिया का किनारा आये हाय
बाहों का सहारा हाय हाय
ऐसे में न छेड़ो बलम
लुट जायेंगे हम
हाय, दरिया का किनारा आये हाय
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Dariya ka kinara aaye haye-Bank manager 1959

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