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Mar 13, 2017

दिल दिया है यार ने-लाल चुनरिया १९८३

दुर्लभ और कर्णप्रिय गीतों की श्रृंखला में अगला गीत पेश
है सन १९८३ की एक अनजान फिल्म लाल चुनरिया से.

आम जनता के बीच लोकप्रिय हुए इस गीत को गाया 
है चंद्राणी मुखर्जी ने. इस गीत का संगीत तैयार किया है
श्यामजी घनश्यामजी ने. कुलवंत जानी ने फिल्म के गीत
लिखे हैं. परिक्षीत साहनी, ज़रीना वहाब, अरुण गोविल
और मिथुन फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं.




गीत के बोल:

आ जे के तेरी राह में पलकें बिछा के हम
बैठे हैं इंतज़ार की शमा जला के हम
दिल दिया है यार ने तो मेहरबानी यार की
दिल दिया है यार ने तो मेहरबानी यार की
दिल से रखेंगे लगा कर हम निशानी यार की
दिल दिया है यार ने तो मेहरबानी यार की
मेहरबानी यार की

आज तक तो सर झुकना था खुदा के सामने
झुक गया है खुद-ब-खुद जान-ए-वफ़ा के सामने
आज तक तो सर झुकना था खुदा के सामने
झुक गया है खुद-ब-खुद जान-ए-वफ़ा के सामने
मान की है दिल ने मेरे
मान की है दिल ने मेरे हुक्मरानी यार की
दिल से रखेंगे लगा कर हम निशानी यार की
दिल दिया है यार ने तो मेहरबानी यार की
मेहरबानी यार की

हम तो बस एक कांच का टूटा हुआ टुकड़ा ही थे
यार ने ऐसा तराशा कर दिया हीरा उसे
हम तो बस एक कांच का टूटा हुआ टुकड़ा ही थे
यार ने ऐसा तराशा कर दिया हीरा उसे
कैसे भूलेंगे भला हम
कैसे भूलेंगे भला हम कदरदानी यार की
दिल से रखेंगे लगा कर हम निशानी यार की
दिल दिया है यार ने तो मेहरबानी यार की
दिल से रखेंगे लगा कर हम निशानी यार की
दिल दिया है यार ने तो मेहरबानी यार की
मेहरबानी यार की
..................................................................
Dil diya hai yaar ne-Lal chunariya 1983

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Mar 3, 2017

अपुन तो यारी में-हरफनमौला १९७६

आपको फिल्म डाकू से एक बेहद लोकप्रिय गीत सुनवाया
था कुछ समय पहले श्यामजी घनश्यामजी के संगीत वाला.
कभी गम से दिल लगाया जिसे आप सब ने बेहद पसंद
लिया था. आज सुनते हैं उन्हीं के संगीत से सजा एक मस्त
गीत फिल्म हरफनमौला से जो सन १९७६ में रिलीज़ हुई थी.

फिल्म के निर्माता और निर्देशक एस एम् सागर हैं. फिल्म में
अशोक कुमार, कबीर बेदी और आशा सचदेव. परदे पर इस
गीत को गा रहे हैं अशोक कुमार डोकरों की महफ़िल में.
महफ़िल की शोभा बढ़ाने के लिए इसमें बिंदु मौजूद हैं.



गीत के बोल:

महफ़िल भी हम सजाएँ हे गाना भी हम सुनाएँ हे 
अपना तो ये ही धरम है यारों के काम आयें
अपुन तो यारी में
अपुन तो यारी में यारों के लिए मरता
अपुन तो यारी में यारों के लिए मरता
तेरे किये क्या क्या हम डींग डांग करता
कौन है अपना पूछने वाला
यार ही जोरू यार ही साला कुक कुक कुक
अपुन तो यारी में यारों के लिए मरता
तेरे किये क्या क्या हम डींग डांग करता

मैं हूँ अनोखा मेरा दिल है नगीना
ले कर के आया देखो कैसी हसीना
ताल टटोटी हे गुलगुल पोटी
चाल है के जैसे चले दिल पे कैंची
चाल है के जैसे चले दिल पे कैंची
जिधर जाए जालिम क़यामत गुज़रता

अपुन तो यारी में यारों के लिए मरता
तेरे किये क्या क्या हम डींग डांग करता

थोडा सा तुम भी अभी मस्ती में आओ
हे आओ नी बाबा
ऐसा क्या यार खाली हमको नचाओ
हे बाकड़ बागुम आ बा बागुम आ बा बागुम आ
हम भी नचाएगा ऐसा मज़े में
हम भी नचाएगा ऐसा मज़े में
तुमको भूल जायेगा रास्ता भी घर का

अपुन तो यारी में यारों के लिए मरता
तेरे किये क्या क्या हम डींग डांग करता
कौन है अपना पूछने वाला यार ही जोरू यार ही साला
अपुन तो यारी में यारों के लिए मरता
तेरे किये क्या क्या हम डींग डांग करता
डींग डांग करता
………………………………………………………
Apun to yaari mein-Harfanmaula 1976

Artists: Ashok Kumar, Bindu, Anwar Hussain

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Oct 28, 2016

मैं ढूँढता हूँ जिनको-ठोकर १९७४

हिंदी फिल्म सिनेमा जगत में सबसे ज्यादा संगीतकार शायद ७० के
दशक में सुर्ख़ियों में आये. उसके बाद अभी वाला युग है २०१० के
बाद वाला.

एक संगीतकार हैं श्यामजी घनश्यामजी. एक ही सज्जन हैं मगर
नाम से यूँ लगता है कि कोई जोड़ी हो. उनके भी जलवे रहे भले
ही सीमित समय के लिए रहे हों. उनकी फिल्म ठोकर के २ गीत
बेहद चर्चित हुए एक मुकेश का गाया हुआ और एक रफ़ी का गाया
हुआ.

प्रस्तुत गीत मुकेश का गाया हुआ है. इसे साजन देहलवी ने लिखा
है.



गीत के बोल:

मैं ढूँढता हूँ जिनको रातों को खयालों में
वो मुझको मिल सके ना
वो मुझको मिल सके ना सुबह के उजालों में
मैं ढूँढता हूँ जिनको रातों को खयालों में

सुहानी प्यार की बातें मेरे दिलदार की बातें
कभी इक़रार की बातें कभी इंकार की बातें
एक दर्द सा छुपा है दिल के हसीन छालों में

मैं ढूँढता हूँ जिनको रातों को खयालों में

जो यूँ बरबाद होते हैं वो कब आबाद होते हैं
दिल-ए-नाशाद होते हैं वो एक फ़रियाद होते हैं
उलझा हुआ हूँ कब से
उलझा हुआ हूँ कब से ग़म के अजीब जालों में

मैं ढूँढता हूँ जिनको रातों को खयालों में
वो मुझको मिल सके ना सुबह के उजालों में
मैं ढूँढता हूँ जिनको रातों को खयालों में
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Main dhoondhta hoon jinko-Thokar 1974

Artist: Baldev Khosa, Alka

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Jun 23, 2016

महफ़िल में उसने देखा-डाकू १९७५

बस इतनी इल्तिजा है अगर हो सके तो करना
मरने के बाद मेरे आना कब्र के चल के


नाउम्मीदी और मायूसी इतनी भी ना हो के मुंह से इस तरह के
अलफ़ाज़ निकलें. साजन देहलवी की रचना है फिल्म डाकू से.
इनके गीतों और रचनाओं ने चौंकाया है मुझे. मौके भले ही कम
मिले हों इन्हें लिखने के फिल्मों के लिए, छाप छोड़ी है इन्होने
अपने हर एक गीत में. कुछ न कुछ सामान ज़रूर दिया है खास
सा सुनने वाले के लिए. 

आपको गर ठोकर फिल्म के गीत याद हों. इस फिल्म का रफ़ी
का गाया एक गीत मशहूर हुआ था. वो गीत रफ़ी की अंदाज़-ए-बयां
और हीरोईन की अदायगी के लिए जाना जाता है.

डाकू का गीत सुनते सुनते मुग़ल-ए-आज़म और अनारकली के अंतिम
गीतों वाले मंज़र याद आ जाते हैं. फिल्म डाकू के गीतों के लिए
कई गीतकारों की सेवाएं ली गयीं. गीत फिल्माया गया है बिंदु पर
और इसे गा रही हैं उषा मंगेशकर.



गीत के बोल:

महफ़िल में उसने देखा
मुझे जब नज़र बदल के
आँखों में मेरी आये
आँखों में मेरी आये आंसू मचल मचल के
आँखों में मेरी आये आंसू मचल मचल के
महफ़िल में उसने देखा

जा के कहो सितारा उस बेवफा से कहना
जा के कहो सितारा उस बेवफा से कहना
काटी है रात हमने करवट बदल बदल के
काटी है रात हमने चरमट बदल बदल के
काटी है रात हमने

तुम प्यार का सहारा मुझको अगर ना दोगे
तुम प्यार का सहारा सुझको अगर ना दोगे
रह जाऊँगी मैं इक दिन शमा की तरह जल के
रह जाऊँगी मैं इक दिन शमा की तरह जल के
रह जाऊँगी मैं इक दिन

आ जाओ मुझपे नज़रें लोगों की उठ रही हैं
आ जाओ मुझपे नज़रें लोगों की चुठ रही हैं
दुनिया मेरी बदल दो मेरे साथ साथ चल के
दुनिया मेरी बदल दो मेरे साथ साथ चल के
दुनिया मेरी बदल दो

बस इतनी इल्तिजा है गर हो सके तो करना
बस इतनी इल्तिजा है गर हो सके तो करना
मरने के बाद मेरे आना कब्र के चल के
मरने के बाद मेरे आना कब्र के चल के
महफ़िल में उसने देखा
मुझे जब नज़र बदल के
महफ़िल में उसने देखा
…………………………………………………….
Mehfil mein usne dekha-Daaku 1975

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Dec 11, 2014

नज़र नज़र से मिलाओ के रात –डाकू १९७५

डाकू फिल्म का एक चर्चित गीत आपको सुनवाया था
अब सुनें एक अनसुना सा गीत जिसे प्रीती सागर और
उषा मंगेशकर ने गाया है. ये प्रीती सागर वही हैं जिन्होंने
फिल्म जूली का अंग्रेजी गाना गाया था. जूली का गाना
बेहद चर्चित हुआ मगर ये कहीं कोने में छुपा सा रह गया.
ऐसा एक बार नहीं हजारों बार हुआ है इस फिल्म उद्योग
में. गाना सुनने लायक है और पुराने गीतों के प्रेमी इसका
आनंद ज़रूर ले सकते हैं.फिल्म के गीतों के लिए कई
गीतकारों की सेवाएं ली गयीं. इनमें कई नामचीन लोग
भी हैं. प्रस्तुत गीत रामेश्वर त्यागी ने लिखा है. गाना
बिंदु और लक्ष्मी छाया पर फिल्माया गया है



गीत के बोल:

नज़र नज़र से मिलाओ के रात जाती है
हाय, नज़र नज़र से मिलाओ के रात जाती है
मुझे गले से लगाओ के रात जाती है

नज़र नज़र से मिलाओ के रात जाती है

तुम्ही से तुमको मैं मांगूंगी प्यार के बदले
तुम्ही से तुमको मैं मांगूंगी प्यार के बदले
लुभा रही है दिलों को बहार के बदले
न हमसे, अजी न हमसे
आँख चुराओ के रात जाती है
न हमसे आँख चुराओ के रात जाती है

नज़र नज़र से मिलाओ के रात जाती है

बगैर आपके छाई हुई उदासी है
बस एक प्यार की खातिर ये रूह प्यासी है
बस एक प्यार की खातिर ये रूह प्यासी है
शराब-ऐ-इश्क अरे शराब-ऐ-इश्क
पिलाओ के रात बाकी है
हाय शराब-ऐ-इश्क पिलाओ के रात जाती है
मुझे गले से लगाओ के रात जाती है
नज़र नज़र से मिलाओ के रात जाती है

...................................................................

Nazar nazar se milao-Daaku 1975

Artist: Laxmi Chhaya,

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Dec 9, 2014

कभी गम से दिल लगाया-डाकू १९७५

बड़े दिनों के बाद हम बे-वतनों को याद वतन की मिटटी आई है.
ये शब्द शायद इस ब्लॉग के पाठक ज़रूर सोच रहे होंगे. कुछ
स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के चलते इधर ध्यान नहीं दे पाने
का खेद है.

आज एक फरमाईशी गीत. फिल्म का नाम है डाकू. फिल्म का
निर्माण उन्हीं सज्जन ने किया है जिन्होंने तीसरी कसम निर्देशित
की थी और उस तीसरी कसम ने शैलेन्द्र का सुख-चैन और जीवन
छीन लिया था. बासु नाम के दो निर्देशकों में मुझे चटर्जी साहब
ज्यादा पसंद हैं.

सत्तर के दशक का एक हॉट टोपिक था-डाकू. कई सफल असफल
फ़िल्में बनीं उस दौर में. एक है “डाकू” ये निराशाजनक है कि डाकू
नाम से बनी हुई फिल्म असफल हुई. इस फिल्म का गाना अलबत्ता
बहुत चर्चित हुआ नरेन्द्र चंचल का गाया हुआ-कभी गम से दिल
लगाया. इसे चमन लाहौरी नाम के कम प्रसिद्ध गीतकार ने लिखा है.
संगीत भी कम प्रसिद्ध संगीतकार श्याम जी-घनश्याम जी ने दिया है.

बोल बढ़िया हैं गीत के . आज के ‘पहाड पे चढ के ऊंचे सुर में गीत
गाने वाले’ दौर में ये गीत नयी पीढ़ी को भी पसंद आएगा ऐसा मेरा
अनुमान है.




गीत के बोल:


कभी गम से दिल लगाया, हो
कभी अश्क के सहारे

कभी शब् गुज़ारी रो के
कभी गिन के चाँद तारे
कभी गिन के चाँद तारे
कभी गिन के चाँद तारे

कभी गम से दिल लगाया

गम-ऐ-आशिकी के सदमे
मुझे और देना हमदम
गम-ऐ-आशिकी के सदमे
मुझे और देना हमदम
मेरे दिन गुज़र रहे हैं
मेरे दिन गुज़र रहे हैं
तेरी याद के सहारे
तेरी याद के सहारे
तेरी याद के सहारे
तेरी याद के सहारे
कभी गम से दिल लगाया

गुलशन परस्त मैं हूँ
अहल-ए-चमन से कह दो
गुलशन परस्त मैं हूँ
खूने जिगर से हमने
खूने जिगर से हमने
फूलों के रुख निखारे
फूलों के रुख निखारे
फूलों के रुख निखारे

कभी गम से दिल लगाया

तुझे वास्ता खुदा का
ज़रा देख ले इधर भी
तुझे वास्ता खुदा का

घबरा के मर न जाए
घबरा के मर न जाए
शब्-ए-हिज्र गम के मारे
शब्-ए-हिज्र गम के मारे
शब्-ए-हिज्र गम के मारे
शब्-ए-हिज्र गम के मारे

कभी गम से दिल लगाया

मौजों में है दफीना
है ना खुदा करूं क्या
मौजों में है दफीना
डूबे हुए हैं मेरी
डूबे हुए हैं मेरी
उम्मीद के कनारे
उम्मीद के कनारे
उम्मीद के कनारे
उम्मीद के कनारे

कभी गम से दिल लगाया

ठुकरा रही है दुनिया
हर गाम पे मुझी को
ठुकरा रही है दुनिया
कोई नहीं है ऐसा
कोई नहीं है ऐसा
तकदीर जो संवारे
तकदीर जो संवारे
तकदीर जो संवारे
तकदीर जो संवारे

कभी गम से दिल लगाया
.....................................................
Kabhi gham se dil lagaya-Daaku 1975

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Dec 15, 2009

मेरी हसरतों की दुनिया-गाल गुलाबी नैन शराबी - १९७३

१९७३ में जीवन पुत्र किरण कुमार बहुतेरी हिन्दी फिल्मों में
दिखाई दिए। प्रारब्ध में चर्चित जवानी नहीं थी सो अधेड़ आयु
में उनको यश एवं प्रसिद्धि प्राप्त हुए। फ़िल्म से एक गाना है जो
संगीत रसिकों को पसंद आया। मोहम्मद रफ़ी और कृष्णा कल्ले
ने इस युगल गीत को गाया है। एक संगीत प्रेमी ने मुंबई स्थित
रफ़ी चौक की फोटो लगा के इस गाने का ऑडियो यू ट्यूब पर डाला
है। गीत को एक गुमनाम से संगीतकार श्यामजी घनश्यामजी ने
संगीत से नवाज़ा है।

गीत  का वीडियो भी उपलब्ध है उसे देखिये। 



गीत के बोल:

मेरी हसरतों की दुनिया
तू मिले कहीं जो मुझको
सीने से लगा लूं तुझको

मेरी हसरतों कि दुनिया
मेरी हसरतों की दुनिया

तू मिले कहीं जो मुझको
सीने से लगा लूं तुझको

मेरी हसरतों की दुनिया
मेरी हसरतों की दुनिया

प्यार तेरा इश्क मेरा
कोई मिट जाने की शय नहीं है
तू मिलेगी मेरे दिल को
आज भी तो ये पूरा यकीन है
तू जहाँ है
तू जहाँ है प्यार मेरे
तू जहाँ है प्यार मेरे
मेरे ख्वाबों कि मंजिल वही है

मेरी हसरतों की दुनिया
मेरी हसरतों की दुनिया

हो हो ओ ओ ओ

मेरे दिलवर ज़िन्दगी भर
नाम तेरा रहेगा जुबां पर
सर झुकेगा उस जगह पर
पांव तेरे पड़ेंगे जहाँ पर
पूरे होंगे सारे वादे
पूरे होंगे सनम सारे वादे
वो जो आपस में हमने किये हैं

मेरी हसरतों की दुनिया
मेरी हसरतों की दुनिया
..............................................................
Meri hastaron ki duniya-Gaal gulabi nain sharabi  1973

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