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Aug 22, 2017

अकेला हूँ मैं इस दुनिया में-बात एक रात की १९६२

फिल्म के नाम से तो यूँ लगता है कोई हॉरर फिल्म हो मगर
ऐसा नहीं है. सस्पेंस अलबत्ता ज़रूर है इस कहानी में. फिल्म
में कुछ बढ़िया गाने हैं जिनमें से एक आपको आज सुनवाते हैं.

मजरूह सुल्तानपुरी के बोल हैं, एस डी बर्मन का संगीत और
रफ़ी की खनकती आवाज़.



गीत के बोल:

अकेला हूँ मैं इस दुनिया में
कोई साथी है तो मेरा साया
अकेला हूँ मैं इस दुनिया में
कोई साथी है तो मेरा साया
अकेला हूँ मैं

न तो परवाना और न दीवाना
मैं किसी महफ़िल का
सूनी सूनी राहें थामती हैं बाहें
ग़म किसे मन्ज़िल का
न तो परवाना और न दीवाना
मैं किसी महफ़िल का
सूनी सूनी राहें थामती हैं बाहें
ग़म किसे मन्ज़िल का
मैं तो हूँ राही दिल का
हाय साथी है तो मेरा साया
अकेला हूँ मैं इस दुनिया में
कोई साथी है तो मेरा साया
हठेला हूँ मैं

जैसे कभी प्यारे झील के किनारे
हँस अकेला निकले
वैसे ही देखो जी ये मनमौजी
मौजों के सीने पे चले
जैसे कभी प्यारे झील के किनारे
हँस अकेला निकले
वैसे ही देखो जी ये मनमौजी
मौजों के सीने पे चले
चाँद सितारों के तले
साथी है तो मेरा साया
थकेला हूँ मैं इस दुनिया में
कोई साथी है तो मेरा साया
अकेला हूँ मैं
…………………………………………………
Akela hoon main-Baat ek raat ki 1962
 
Artist: Dev Anand

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Feb 24, 2015

सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली प्रविष्टियाँ

गूगल ने ब्लॉगर को जितनी सुविधाएँ दी हुई हैं शायद किसी और साईट
के लिए संभव नहीं. यहाँ ब्लॉगर का तात्पर्य ब्लॉग लिखने वाले से है. इन
सुविधाओं में एक है- एनालिटिक्स. वैसे तो सामान्य सुविधाओं में ही
आपको इतने आंकड़े प्राप्त हो जाते हैं कि आपको अपने ब्लॉग की दिशा
तय करने में मदद मिलती है. गूगल में सपोर्ट भी बढ़िया है. बाकायदा
फोरम बने हुए हैं हर सर्विस के लिए.

आज आपको इस ब्लॉग पर अभी तक के सफर के बारे में बतलाते हैं.
२००८ से शुरू हुए इस ब्लॉग को ७ वर्ष पूरे हो गए हैं. इस सफर में आपने
तरह तरह की प्रविष्टियाँ पढ़ीं और सराहीं. सब पाठकों का एक बार फिर
से हार्दिक धन्यवाद. सबसे ज्यादा बार पढ़ी जाने वाली प्रविष्टियों की सूची
नीचे दे रहा हूँ  अंकों के साथ.

१.हिंदी फिल्मों में बरसात वाले गाने-नमक हलाल  संख्या १०९३९


२.तूने प्यार की बीन बजायी-आई मिलन की रात १९९१ संख्या ९७९७


३.दिल दिया है जान भी देंगे-कर्मा १९८६ संख्या ५०५३


४.तेरी मेरी मेरी तेरी प्रेम कहानी-बोडी गार्ड २०११ संख्या ४६५०


५.ओढनी ओढ़ के नाचूं-तेरे नाम संख्या ४३३१


६.मेरे दिल पे लगा दे डार्लिंग-बसंत १९६०  संख्या ३४९०


७.दाता एक राम-भजन-हरिओम शरण संख्या ३३९६


८.समय तू जल्दी जल्दी चल-कर्म संख्या ३०२७


९.प्यार के कागज़ पे-जिगर संख्या २४७५


१०.दिलवाले दिलवाले-नाटक १९४७ संख्या २२१९



११.अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो-कृष्ण भजन-लक्खा संख्या १८७०




१२.फ़िल्मी बरसात-देखो ज़रा देखो बरसात-ये दिल्लगी १९९४ संख्या १७३१


१३.किसने चिलमन से मारा-बात एक रात की १९६२ संख्या १४४६


ऊपर प्रविष्टियों के विश्लेषण करने के आद कुछ रोचक आंकड़े मिलते हैं.
प्रसिद्धि में  महानायक सबसे ऊपर हैं. बप्पी लहरी के संगीत वाले गीत
के साथ फिल्म शराबी के गीत के साथ. उसके बाद जो गाना दूसरे नंबर
पर है वो चौंका देने वाला है. प्यार की बीन इतनी बार बजेगी उम्मीद नहीं
थी. फिल्म आई मिलन की रात के गीत आज भी सुने जाते हैं. संगीत
समीक्षक सुन रहे हैं ?

उसके बाद काफी अंतर से फिल्म कर्मा का देशभक्ति गीत है.  ये गीत भी
अपने समय का एक लोकप्रिय गीत रहा है और आज भी चुनाव और
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बजता मिलेगा.

चौथे और पांचवे स्थान की पोस्ट और गाने से ये तो स्पष्ट है सलमान खान
लोकप्रियता में बहुत आगे हैं. दोनों गीत उनकी फिल्मों से हैं.

छठे नंबर पर चौंकाने वाली प्रविष्टि है. ओ पी नय्यर के सभी लोकप्रिय
गीतों को पीछे छोड़ ये कम सुना गया गीत जो कि निहायत मधुर गीत
है, फिल्म बसंतसे, सबसे आगे आया.

हरिओम शरण भजन गायकी में बहुत उच्च स्थान रखते हैं. उनका
भजन जोउनके सबसे पॉपुलर भजन में से एक है सातवें नंबर पर है.

आठवें स्थान पर है-आर डी बर्मन के संगीत वाला गीत फिल्म कर्म से.
समयतू जल्दी जल्दी चल. इसने अपने ही भाई-समय तू धीरे धीरे चल
को पीछेछोड़ दिया.शायद आज के समय में ज़ल्दी चलना मांग बन चुकी
है.

आनंद मिलिंद का संगीत -९० में पैदा हुई युवा पीढ़ी को बहुत भाता है.
नवेनंबर पर फिल्म जिगर का गीत है. इस सूची में आनंद मिलिंद का
ये दूसरागीत है.

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की लोकप्रियता का अंदाज़ा आप दसवे नंबर पर
गीत से लगा सकते हैं-ये फिल्म नाटक से कम सुना गया गीत है, मगर
सुनने के मामले में सबसे आगे है. ये मेरी भी समझ के परे है. उनके इतने
सारे लोकप्रिय गीत यहाँ हैं मगर कम चर्चित रहे इस ब्लॉग के पाठकों के
बीच. शायद ब्लॉग की पहुँच या वर्गीकरण में कुछ ऐसा है जो समीक्षा
करने लायक है.

ग्यारहवे नंबर पर है लखबीर सिंह लक्खा का कृष्ण भजन-अरे द्वारपालों.
निस्संदेह ये पिछले कुछ वर्षों से काफी सुना गया है और लोकप्रिय है
भजन भक्तों के बीच.

फ़िल्मी बरसातों में दूसरा गीत जो संख्या में बारहवे नंबर पर है सैफ,
अक्षय और काजोल अभिनीत ये दिल्लगी से.

सचिन देव बर्मन का संगीत फिल्म बात एक रात की से. गौरतलब है
मन्ना डे का गाया गीत तेरहवे नंबर पर है पाठक संख्या के मामले में.
उन्होंने सारे नामचीन गायकों को इधर पीछे छोड़ दिया है. धन्यवाद
पाठकों मन्ना डे को इतना याद करने के लिए. उन्हें वो सराहना नहीं
मिली जिसके वे हक़दार थे.

इन आंकड़ों से पता चलता है कि ब्लॉग किस दिशा में सफर कर रहा
है. ज़रूर ही अलग हट के ट्रेंड बन रहा है इसका. पाठक वर्ग क्या चाहता
है उसका भी अंदाजा सहज लगता है आंकड़ों के विश्लेषण से.

उजागर, अप्रकट, गुप्त एवं सुप्त सभी प्रकार के पाठकों का धन्यवाद.

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Jan 11, 2010

अकेला हूँ मैं इस दुनिया में-बात एक रात की १९६२

नायक को दुनिया में अकेला होने का कोई गम नहीं है। ऐसे ही
नज़रिए की ज़रुरत होती है जीवन में। इसको परदे पर गा रहे हैं
देव आनंद। गीत मजरूह का लिखा हुआ है और सन १९६२ की
फिल्म 'बात एक रात की के लिए इसका संगीत तैयार किया है
सचिन देव बर्मन ने। साथी मिल गया तो ठीक ना मिला तो ठीक।
साइकल पर स्वर नायक अपने साये के साथ ही खुश है और
फ़िल्मी आशा के अनुरूप उसको अगली रील तक कोई हमसफ़र
ज़रूर मिल जायेगा ।

..........





गाने के बोल:

अकेला हूँ मैं इस दुनिया में
कोई साथी है तो मेरा साया

अकेला हूँ मैं

न तो परवाना और न दीवाना,
मैं किसी महफ़िल का
सूनी सूनी राहें, थामती हैं बाहें
ग़म किसे मन्ज़िल का
मैं तो हूँ राही दिल का
साथी है तो मेरा साया

अकेला हूँ मैं

जैसे कभी प्यारे, झील के किनारे,
हँस अकेला निकले
वैसे ही देखोजी, ये मन मौजी
मौजों के सीने पे चले
चाँद सितारों के तले
साथी है तो मेरा साया

अकेला हूँ मैं इस दुनिया में
कोई साथी है तो मेरा साया

अकेला हूँ मैं
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Akela hon main-Baat Ek Raat Ki 1962

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Aug 31, 2009

किसने चिलमन से मारा-बात एक रात की १९६२

जॉनी वाकर के ऊपर एक विशेष गायक के गीत बहुत
सुने होंगे आपने। यह गीत है फ़िल्म बात एक रात की से,
और ये एक कठिन गीत है । सारे संगीतकार जब कोई कठिन
बंदिश बनाते तो मन्ना डे को ज़रूर याद करते। जिस गीत में
अत्यधिक उतार चढाव हों, उसके लिए मन्ना डे की गायकी और
आवाज़ को सबसे उपयुक्त समझा जाता। इसका बढ़िया
नमूना ये गीत ही देख लीजिये। बोल हैं मजरूह सुल्तानपुरी
के और धुन है सचिन देव बर्मन की। मजरूह ने तबियत से
कठिन हिन्दी और उर्दू शब्दों का प्रयोग किया है इस गीत में।
मजरूह  सुल्तानपुरी ज़बरदस्त लेखक थे. वे चाहते तो फुल टाइम
व्यंग्यकार भी हो सकते थे. उनकी लेखनी में कई रूप छिपे हुए
हैं जो उनको हरफनमौला बनाते हैं.





गीत के बोल:

अरे
किसने, चिलमन से मारा
हाय, किसने चिलमन से मारा
अरे, नज़ारा मुझे
किसने चिलमन से मारा, नज़ारा मुझे
किसने चिलमन से मारा
बिखेरे बाल जब वो

बिखेरे बाल जब वो
बिखेरे बाल, जब वो
आसमानों पर, घटा झूमे
चले जब
चले जब, हाय
चले जब, नाज़ से ज़ालिम
क़यामत भी, क़दम चूमे
क़यामत भी क़दम चूमे
हां, पग में पायल डार के
घूंघट नयन झुकाए
बिन बादल की, दामिनी
बिन बादल की दामिनी
चमकत लचकत जाय
चमकत लचकत जाय
चमकत लचकत जाय
चमकत लचकत जाय
फिर ना देखा हाय
फिर ना देखा, ना देखा, ना देखा,
ना देखा
अरे, फिर ना देखा, पलट के, दुबारा मुझे
फिर ना देखा, पलट के, दुबारा मुझे

किसने चिलमन से , हाय
किसने चिलमन से मारा

सीने में दिल है, दिल में दाग
दागों में सोज़-ओ-साद-ऐ-इश्क
सीने में दिल है, अरे वाह
सीने में दिल है
दिल में दाग
दागों में सोज़-ओ-साज़-ऐ-इश्क
परदा बपर्दा है पिन्हा
परदानशीं का राज़-ऐ-इश्क
परदा बपर्दा
अरे वाह, परदा बपर्दा
वाह वाह, परदा बपर्दा
अरे मौला, परदा बपर्दा है पिन्हा
परदानशीं का राज़-ऐ-इश्क
जतन मिलन का तब करूं
नाम पता जब होय
एक झलक बस
एक झलक दिखलाय के कर गई पागल मोय
कर गई पागल मोय
कर गई पागल मोय
कर गई पागल मोय
मेरे दिल, मेरे दिल, मेरे दिल

अरे,
मेरे दिल ने तड़पकर
हाय, दिल ने तड़पकर
मेरे दिल ने तड़पकर
मेरे दिल ने तड़पकर पुकारा मुझे


किसने चिलमन से मारा, नज़ारा मुझे

किस ने चिलमन से मारा

.................................

Kisne chilman se maara-Baat ek raat ki 1962

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