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Oct 11, 2019

बुझा दे जल गई-इम्तिहान १९७४

यहाँ किसी दिए या शमा की बात नहीं हो रही वरन
लगी हुई आग की बात हो रही है. ये ऐसी आग है जो
दिखती नहीं. अलग अलग भाव हो सकते हैं इस आग
के. आग की तरह झाग भी कई प्रकार का होता है उस
पर आख्यान फिर कभी कर लेंगे.

गीत है फिल्म इम्तिहान से जिसे आशा भोंसले ने गाया
है. मजरूह के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.




गीत के बोल:

बुझा दे जल गई अरे मैं जल गई
न जाने कैसी लगी अगन सजना
आ जा रे आ जा पिया
गया रे गया जिया
बुझा दे जल गई अरे मैं जल गई
न जाने कैसी लगी अगन सजना
आ जा रे आ जा पिया
गया रे गया जिया
बुझा दे

अपना ये ज़ख्म-ए-जिगर दिखाऊँ
जाने जान कितना तुझे कितना
जबसे हुई मैं घायल हुआ रे
मुश्किल बचना मेरा बचना
पर तुझे क्या पता मैं जियूं या मरूं
बेवफा बेखबर तू बता क्या करूं
काहे इतना तड़पाए तू

बुझा दे जल गई अरे मैं जल गई
न जाने कैसी लगी अगन सजना
आ जा रे आ जा पिया
गया रे गया जिया
बुझा दे

शाम जहाँ होने लगी के होने लगी
रे धक् धक् जिया धक् धक्
चैन मुझे आये नहीं जुदाई में
तेरी किसी पल किसी करवट
नाम लूं मैं तेरा और आहें भरूं
ये नहीं तो बता मैं जातां क्या करूं
कैसे दिल को चैन आये तो

बुझा दे जल गई अरे मैं जल गई
न जाने कैसी लगी अगन सजना
आ जा रे आ जा पिया
गया रे गया जिया
बुझा दे
………………………………………………….
Bujha de jal gayi-Imtihaan 1974

Artist: Vinod Khanna, Bindu

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Sep 24, 2019

देखो इधर भी जाने तमन्ना-इम्तिहान १९७४

जाने तमन्ना हिट्स के अंतर्गत आने वाला एक और गीत
सुनते हैं जो फिल्म इम्तिहान से है. विनोद खन्ना और
तनूजा अभिनीत ये फिल्म सन १९७४ में रिलीज़ हुई थी.

गीत किसी पिकनिक स्पॉट पर गाया जा रहा है. मजरूह
के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे का संगीत. आशा भोंसले संग
इसे उषा मंगेशकर ने गाया है.





गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला

देखो इधर भी जाने तमन्ना
प्यासे पड़े हैं हम तुम्हारी एक नज़र के
पर जो संवरिया की है पुजारन
उनकी दीवानी कुछ मांगे जो उन को चाह कर के
देखो इधर भी जाने तमन्ना
प्यासे पड़े हैं हम तुम्हारी एक नज़र के
पर जो संवरिया की है पुजारन
उनकी दीवानी कुछ मांगे जो उन को चाह कर के
देखो इधर भी जाने तमन्ना
देखो इधर भी जाने तमन्ना

मन में बसे हो जो प्रीतम तो नैन मिले या न मिले
मन में बसे हो जो प्रीतम तो नैन मिले या न मिले
दिल जब दे कर लिया गम तो चैन मिले या न मिले
जब से लगी तुमसे लगन हाल यही है जाने जिगर
जब जब तरसे हम रह गए दिल को थाम कर के
देखो इधर भी जाने तमन्ना
प्यासे पड़े हैं हम तुम्हारी एक नज़र के
पर जो संवरिया की है पुजारन
उनकी दीवानी कुछ मांगे जो उन को चाह कर के
देखो इधर भी जाने तमन्ना
देखो इधर भी जाने तमन्ना

दर्द-ए-दिल से तेरी बेरुखी ले ना जाए कहीं मेरी जिंदगी
दर्द-ए-दिल से तेरी बेरुखी ले ना जाए कहीं मेरी जिंदगी
हो पिया का दर्द अनमोल इसको ना जिंदगी से तोल
हो पिया का दर्द अनमोल इसको ना जिंदगी से तोल
थक गए हम सुन सुन के ताने ज़माने भर के

देखो इधर भी जाने तमन्ना
प्यासे पड़े हैं हम तुम्हारी एक नज़र के
पर जो संवरिया की है पुजारन
उनकी दीवानी कुछ मांगे जो उन को चाह कर के
देखो इधर भी जाने तमन्ना
देखो इधर भी जाने तमन्ना
देखो इधर भी जाने तमन्ना
देखो इधर भी जाने तमन्ना
…………………………………………………………….
Dekhi idhar bhi jaane tamanna-Imtihaan 1974

Artists: Tanuja, Bindu, Vinod Khanna

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Jan 28, 2018

चाहा तो बहुत न चाहें तुझे-इम्तिहान १९९४

आज एक युगल गीत सुनते हैं सन १९९४ की फिल्म इम्तिहान से.
चाहना और ना चाहना ये दोनों भाव इसके मुखड़े में मौजूद हैं. वो
कहते हैं किसी का बस ना चलना. कई चीज़ें ऑटो-मेटिकली होती
हैं जिन पर किसी का बस ट्रक या जोर नहीं चलता.

गीत गाया है कुमार सानू और बेला सुलाखे ने. फैज़ अनवर की
रचना है और अन्नू मलिक का संगीत.





गीत के बोल:

चाहा तो बहुत न चाहें तुझे चाहत पे मगर कोई ज़ोर नहीं
चाहा तो बहुत न चाहें तुझे चाहत पे मगर कोई ज़ोर नहीं
दिल ही तो है तुमपे आ ही गया दिल का सनम यह क़सूर नहीं
चाहा तो बहुत चाहा तो बहुत चाहा तो बहुत

चाहा तो बहुत न चाहें तुझे चाहत पे मगर कोई ज़ोर नहीं
दिल ही तो है तुमपे आ ही गया दिल का सनम ये क़सूर नहीं
चाहा तो बहुत हो चाहा तो बहुत

तेरा नाम है इन होंठों पे सीने में है तस्वीर तेरी
तूने मुझको अपना माना ये है सनम तक़दीर मेरी
हो ये है सनम तक़दीर मेरी
दिल ये पुकारे मिल के सनम हम
दिल ये पुकारे मिल के सनम हम होंगे कभी अब दूर नहीं

चाहा तो बहुत न चाहें तुझे चाहत पे मगर कोई ज़ोर नहीं
दिल ही तो है तुमपे आ ही गया दिल का सनम ये क़सूर नहीं
चाहा तो बहुत हो चाहा तो बहुत

जाने किस तरह वो जीते हैं जिनका कोई दिलदार नहीं
पत्थर होंगे उनके दिल में जिनको किसी से प्यार नहीं
ओ जिनको किसी से प्यार नहीं
करते न कैसे इकरार तुमसे
करते न कैसे इकरार तुमसे इतने भी हम मग़रूर नहीं

चाहा तो बहुत न चाहें तुझे चाहत पे मगर कोई ज़ोर नहीं
दिल ही तो है तुमपे आ ही गया दिल का सनम ये क़सूर नहीं
चाहा तो बहुत न चाहें तुझे चाहत पे मगर कोई ज़ोर नहीं
चाहा तो बहुत हो चाहा तो बहुत
चाहा तो बहुत
........................................................................
Chaha to bahut na chahen tujhe-Imtihaan 1994

Artists: Saif Ali Khan, Raveena Tandon

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Jul 17, 2011

रोज़ शाम आती थी-इम्तिहान १९७४

अभिनेत्री नूतन और तनूजा का कैरियर साठ के और सत्तर के दशक में
साथ साथ चला. नूतन ने तो जल्दी ही अपना ऊंचा मुकाम हासिल कर
लिया फिल्म जगत में मगर तनूजा को काफी संघर्ष के बावजूद, (यहाँ
संघर्ष का तात्पर्य अभिनय कला से हैं न कि फ़िल्में पाने के लिए संघर्ष
से) वो स्थान नहीं मिल पाया की उनकी किसी एक फिल्म को दर्शक
याद करें. प्रस्तुत गीत लिया गया है फिल्म इम्तिहान से जो सन १९७४
की फिल्म है. मजरूह के आकर्षक बोलों को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने. फिल्म में संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का. इस गीत में विनोद खन्ना
ने बेहतर अभिनय किया है. नायिका के कपडे कुछ अजीब से लगेंगे आपको
सन ७० के आस पास और बाद में कुछ एक फ़िल्में ऐसी आयीं जिनमें
नायकों और नायिकाओं की पोशाकें कुतूहल का विषय हुआ करती थीं.

गीत में कैमरे के साथ एक फ़िल्टर लगाया गया है जिससे सुनहरी धूप वाले
समय को भी शाम बना दिया गया है. ये करिश्मा पकड़ में आ जाता है
गीत के बीच में, जहाँ आधी धूप आधी छांव वाली कहानी दिखाई देती है.
ये होता है अन्तर शुरू होते समय. ऐसे कारनामे विडियो का मज़ा किरकिरा
कर देते हैं.




गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला ला
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

डाली में ये किसका हाथ करे इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा छूके तन गुदगुदाए मुझे
हौले हौले धीरे धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए
खुली आँख सपने दिखाए
दिखाए दिखाए दिखाए
खुली आँख सपने दिखाए

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

अरमानों का रंग है जहाँ पलकें उठाती हूँ मैं
हँस हँस के है देखती जो भी मूरत बनाती हूँ मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े दिल खो और भी जाती हूँ मैं
जगमगाती हूँ मैं
दीवानी हुई जाती हूँ मैं
दीवानी दीवानी दीवानी
दीवानी हुई जाती हूँ मैं

ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी
....................................
Roz shaam aati thi-Imtihaan 1974

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Dec 8, 2010

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के-इम्तिहान १९७४

कहते है जीवन है तो संघर्ष है। संघर्ष किस रूप में होगा
ये कोई नहीं जानता। सभी प्राणियों को किसी न किसी
रूप में जूझना पढता है । आइये एक दास्तान पड़ें एक
कुत्ते की जिसने ऑंखें न होने के बावजूद हिम्मत नहीं
हारी। अरे इंसानों इसी से सबक ले लो तुम।

मौका है एक प्रेरणादायक गीत सुनने का। फिल्म
इम्तिहान से किशोर का गाया गीत सुना जाए आज ।
ये सभी को प्रेरित करता है आगे बढ़ने के लिए।

अंधे कुत्ते की अनोखी कहानी





गीत के बोल:

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
काँटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही

सूरज देख रुक गया है तेरे आगे झुक गया है
जब कभी ऐसे कोई मस्ताना
निकले है अपनी धुन में दीवाना
शाम सुहानी बन जाते हैं दिन इंतज़ार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही

साथी न कारवां है ये तेरा इम्तिहां है
यूँ ही चला चल दिल के सहारे
करती है मंज़िल तुझको इशारे
देख कहीं कोई रोक नहीं ले तुझको पुकार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही

नैन आँसू जो लिये हैं ये राहों के दिये हैं
लोगों को उनका सब कुछ दे के
तू तो चला था सपने ही ले के
कोई नहीं तो तेरे अपने हैं सपने ये प्यार के
ओ राही, ओ राही
ओ राही, ओ राही
...............................................

Ruk jaana nahin too kahin haar ke-Imtihaan 1974

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Nov 30, 2010

इस तरह आशिक़ी का असर-इम्तिहान १९९४

पहले सोचा आपको पुरानी ७० के दशक वाली इम्तिहान
का गीत सुनवाऊं फिर विचार बदला, सोचा सुनने वालों का
भी एक इम्तिहान लेना चाहिए। अरे भाई बहुत से दर्शक इस
फिल्म को देख कर इम्तिहान दे चुके हैं आप एक गीत नहीं
सुन सकते ?

ये उस दौर की फिल्म है जब शर्मिला टैगोर पुत्र उर्फ़ नायक
सैफ अली खान "सेफ" माने जाते थे। वो इसलिए कि एक्टिंग
आये या ना आये, फिल्म पिटे चाहे हिट हो उनको फ़िल्में मिलती
रहेंगी, ऐसा कई लोगों का मानना था। इस मामले में बच्चन पुत्र
उतना भाग्यशाली नहीं रहे। खैर एक्टिंग ना इस फिल्म की
नायिका से बनी ना नायक से, अलबत्ता गीत ने ही हिट होकर
कुछ फिल्म में कमाल दिखाया। गीत फायज़ अनवर का है और
धुन अनु मालिक की। ये अनु के भी उस दौर का संगीत है जिस
दौर में वो हर दूसरी फिल्म के संगीत में बाज़ीगर के संगीत की
झलक दिखलाने की कोशिश करते। गीत गाया है कुमार सानू ने।

गीत फिल्माया गया है सनी देवल पर। ये एक चमत्कारी गीत भी है।
जैसे ही हीरो गिटार बजाता है उसमें से प्यानो की आवाज़ निकलती है।
ऐसा करने के बाद वो टार्ज़न की माफिक खिड़की से कूदकर फर्श पर
आ जाता हैं। या कौनसा गिटार है भाई जो पूरे गीत में प्यानो की
आवाज़ निकाल रहा है। विचित्र वीणा के अविष्कारक विश्व मोहन
भट्ट ने शायद ये गीत नहीं देखा है।



चलते चलते आपको इस गीत के फ़्रांसिसी भाई से भी मिलवा देते हैं:
Yves Montand - Les Feuilles Mortes
ये भाई हालाँकि उम्र में बड़ा है और इसकी पैदाइश san १९५१ की है।






गीत के बोल:

इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

मैं दीवाना बन गया हूँ कैसी ये मुहब्बत है
ज़िन्दगी से बढ़कर अब तेरी ज़रूरत है
मुझको तू चाहिए तेरा प्यार चाहिए
एक बार नहीं सौ बार चाहिए
हर साँस मैं अपनी तुझपे लुटाऊँगा
दिल के लहू से तेरी माँग सजाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

प्यार क्या है दर्द क्या है दीवाने समझते हैं
इश्क़ में जलने का मतलब आशिक़ ही समझते हैं
मैं तड़पता हूँ तुझसे कुछ न कहूँ
बिन कहे भी मगर मैं तो रह न सकूँ
इस बेखुदी में आखिर कहाँ चैन पाऊँगा
मर के भी मैं तुझसे जुदा हो न पाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा

इस तरह आशिक़ी का असर छोड़ जाऊँगा
तेरे चेहरे पे अपनी नज़र छोड़ जाऊँगा
...............................................................................
Is tarah se ashiqui ka-Imtihaan 1994

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