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Jun 10, 2015

इशारों को अगर समझो-धर्मा १९७३

पिछली एक दो पोस्ट में हमने जिक्र किया था कि
प्रसिद्धि किसी विशेष नाम की मोहताज नहीं। उसको
तो प्रतिभा चाहिए परवान चढ़ने के लिए। ये बात एक
कव्वाली के विषय में कही गई थी.

आज आपको ऐसी ही एक कव्वाली सुनवाते हैं जो कि
प्रसिद्ध है मगर जनता को उस फिल्म का नाम अता-पता
मालूम नहीं है. ये है आशा रफ़ी की गयी हुई कव्वाली –
राज़ को राज़ रहने दो. फिल्म धर्मा के लिए इसे लिखा
हैवर्मा मलिक ने और इसकी धुन बनाई है संगीतकार जोड़ी
सोनिक-ओमी ने. ये कव्वाली बहुत बजी है जगह जगह
पर. आकाशवाणी ने भी इसको बजाया। इस क़व्वाली की
वजह से इस एल्बम के एल पी रिकॉर्ड बहुत बिके ।

अदायगी अपने चरम पर है इस कव्वाली में. बिंदु और प्राण
इसे परदे पर गा रहे हैं. फिल्म में प्राण का किरदार बहुत
पावरफुल किस्म का है.





गीत के बोल:

ये खुशी ये महफिलें और ये जो नया अंदाज़ है
समझने वालों समझ लो इसमें भी एक राज़ है
राज़ की बात कह दूं तो जाने महफ़िल में फिर क्या हो
राज़ की बात कह दूं तो जाने महफ़िल में फिर क्या हो
राज़ खुलने का तुम पहले
राज़ खुलने का तुम पहले ज़रा अंजाम सोच लो
इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो
इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो
राज़ की बात कह दूं तो जाने महफ़िल में फिर क्या हो

जुबान पे बात आई कभी रूकती नहीं है, कभी रूकती नहीं है
उठ गयी जो आँख एक बार झुकती नहीं है, अरे झुकती नहीं है
उम्मीदों का सवेरा सामने महफ़िल होने दूं
अभी जो छुपाऊँ दिल तो वो छुपती नहीं है
जो बरसों से छुपी दिल में उसे होंठों पे आने दो
जो बरसों से छुपी दिल में उसे होंठों पे आने दो
राज़ की बात कह दूं तो जाने महफ़िल महफ़िल
महफ़िल में फिर क्या हो

उठे आँखें जो मएह्फिल में उन्हें फोड के रख दूं
वो आँखें फोड के रख दूं
बढे जो हाथ उन हाथों को मैं तोड़े के रख दूं
मेरी जान तोड़ के रख दूं
जो नावाकिफ हैं आज उनसे जा के ये कह दूं
जुबां पे राज़ आया तो जुबां को मोड के रख दूं
खुशी से कोई जीता है फुशी से उसको जीने दो
खुशी से कोई जीता है खुशी से उसको जीने दो
इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो

उसी को छीन कर तेरी नज़र से दूर कर दूं
हाँ दूर कर दूं
तुझे मैं आहें भरने के लिए मजबूर कर दूं
हाँ मैं मजबूर कर दूं
यहाँ बदनाम कर दूं वहां मशहूर कर दूं
जुबां खुल जाए अगर मेरी तो चकना चूर कर दूं
ज़रा अफसाने के पहले पोटा लगने दो दुनिया को
ज़रा अफसाने के पहले पता लगने दो दुनिया को
राज़ की बात कह दूं तो जाने महफ़िल में, जाने महफ़िल में
जाने महफ़िल में फिर क्या हो

ये सूरज चंद और तारे चले मेरे इशारों पर
चले मेरे इशारों पर
हुकूमत है मेरी दरिया समुन्दर और किनारों पर
समुन्दर और किनारों पर
मैं अपने हाथों से इस दुनिया की तकदीर लिखता हूँ
मगर फिर तरस आता है तेरे जैसे बेचारों पर
नहीं पैदा हुआ जो रोके मेरी राहों को
नहीं पैदा हुआ जो रोके मेरी राहों को
इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो

तुम्हारी जात क्या है तेरी औकात क्या है
तुम्हारे क्या इरादे ये पहले तू बता दे
हुस्न की मार बुरी है इश्क की हार बुरी है
नज़र के तीर छोडूं तीर को ऐसे तोडूं 
अगर घूंघट उठा दूं  तो मैं आँख लड़ा दूं
कमर के देख झटके इधर भी देख पलट के
तू मुझको ना पहचाने मुझे तू भी ना जाने
बदन मेरा है कुंदन मेरा दिल भी है चन्दन
मैं चन्दन की खुशबू हूँ मैं चन्दन की खुशबू हूँ
मैं चन्दन मैं चन्दन मैं चन्दन हू-ब-हू हूँ
इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो
इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो
…………………………………………………………………………
Isharon ko agar samjho-Dharma 1973

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Jul 12, 2011

आयो कहाँ से घनश्याम-बुड्ढा मिल गया १९७१

मन्ना डे की लाजवाब, बेमिसाल गायकी का एक शानदार नमूना।
सुनते रहिये बस । इसको सुनकर मैं कभी नहीं थकता । फिल्म
बुड्ढा मिल गया में इसे फिल्माया गया है प्रसिद्द चरित्र अभिनेता
ओमप्रकाश पर. फिल्म बुड्ढा मिल गया में इसे फिल्माया गया है
प्रसिद्द चरित्र अभिनेता ओमप्रकाश पर. गीत के अंत में नायिका
अर्चना की आवाज़ है. पोस्ट का ड्राफ्ट २ साल से पढ़ा हुआ था आज
सोचा इसे पोस्ट कर ही दिया जाए.







गाने के बोल:

हाँ हाँ आं, आ आ आ , रे

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

रैना बितायी किस धाम
रैना बितायी किस धाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

रात की जागी रे,
रात की जागी रे
अँखियाँ हैं तोरी
रात की जागी रे
अँखियाँ हैं तोरी
हो रही गली गली
जिया की चोरी
हो रही गली गली
जिया की चोरी
हो नहीं जाना बदनाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
हाय राम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम

सज धज तुमरी का कहूं रसिया
ध नि ध ध , ध नि ध ध, म ध प्,
म प् म, रे म गा, म ग सा नि सा नि सा
नि सा ग म ग,सा गा म प् नि गा म,
प् नि सा गा म सा नि नि प् म गा सा म प्

सज धज ठुमरी का कहूं रसिया
ऐसे लगे तेरे हाथों में बंसिया
ऐसे लगे तेरे हाथों में बंसिया
जैसे कटारी लियो थाम
जैसे कटारी लियो थाम
हाय राम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम


मैं न कहूं कछु
मोसे न रूठो
मैं न कहूं कछु
मोसे न रूठो
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूछो
तुम ख़ुद अपने जियरा से पूछो
बीती कहाँ पे कल शाम

आयो कहाँ से घनश्याम
आयो कहाँ से घनश्याम
श्याम,
आयो कहाँ से घनश्याम
श्याम रे
आयो कहाँ से घनश्याम
...........................
Aayo kahan se ghanshyam-Buddha mil gaya 1971

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Jan 23, 2010

देखो रूठा है-दहशत १९८१

सारिका के नाम से एक गीत याद आ गया । सारिका कुछ
गीतों में बहुत ज्यादा हिली डुली हैं , उसका एक नमूना है ये।
फिल्म का नाम है दहशत । इस फिल्म में बप्पी लहरी का
संगीत है। रामसे बंधुओं की इस होरर फिल्म ने बॉक्स ऑफिस
पर भी दहशत मचा दी अर्थात फिल्म ज्यादा नहीं चली। फिल्म के
शुरुआती दृश्य Dracula: Prince of darkness से थोड़े प्रेरित
हैं। गीत गाया है आशा भोंसले ने। ये भी एक बरसाती गीत है।



गीत के बोल:

हा, देखो झूठा है, हमसे रूठा है
दिल जिसका मतवाला है
देखो झूठा है, हमसे रूठा है
दिल जिसका मतवाला है

कैसे समझाऊँ, कैसे मैं मनाऊँ
कैसे समझाऊँ, कैसे मैं मनाऊँ
मेरा यार गुस्सेवाला है
मेरा यार गुस्सेवाला है

देखो झूठा है, हमसे रूठा है
दिल जिसका मतवाला है

मौसम में नशा है
प्यार में मज़ा है
बैठे हो क्यूँ गुमसुम
धरती से गगन मिले
फूलों से पवन मिले
क्यूँ ना मिले हम तुम

मौसम में नशा है
प्यार में मज़ा है
बैठे हो क्यूँ गुमसुम
धरती से गगन मिले
फूलों से पवन मिले
क्यूँ ना मिले हम तुम

हो, कैसे समझाऊँ, कैसे मैं मनाऊँ
कैसे समझाऊँ, कैसे मैं मनाऊँ
मेरा यार गुस्सेवाला है
मेरा यार गुस्सेवाला है

देखो झूठा है, हमसे रूठा है
दिल जिसका मतवाला है

दिल का तोहफा लायी हूँ
नज़रें चुराए हुए
छोडके पिया तू
कहाँ चाल दिया तू
मूंह को फुलाये हुए

दिल का तोहफा लायी हूँ
नज़रें चुराए हुए
छोडके पिया तू
कहाँ चाल दिया तू
मूंह को फुलाये हुए

अरे, कैसे समझाऊँ, कैसे मैं मनाऊँ
कैसे समझाऊँ, कैसे मैं मनाऊँ
मेरा यार गुस्सेवाला है
मेरा यार गुस्सेवाला है

देखो झूठा है, हमसे रूठा है
दिल जिसका मतवाला है

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Jan 16, 2010

देखा मैंने देखा-विक्टोरिया न. २०३

हिंदी फिल्मों की स्क्रिप्ट की ये मजबूरी है कि हीरो अपनी मर्ज़ी
से कुछ पहचान नहीं सकता। विक्टोरिया की सवारी करते करते
उसपर सवार हीरो चलाने वाली लड़की जो लड़के के भेस में है,
पहचान नहीं पाता। ये गीत अपने ज़माने में बहुत लोकप्रिय था,
विशेषकर मनचले युवकों के बीच। ये फिल्म बड़ी हिट फिल्म थी
और इसका कथानक जनता द्वारा बहुत पसंद किया गया। गीत में
आपको नवीन निश्चल और सायरा बानो दिखाई देंगे। गीत गाया है
किशोर कुमार ने और संगीतकार हैं कल्याणजी आनंदजी ।



गीत के बोल:

देखा मैंने देखा, हा हा हा
देखा मैंने देखा
सपनो की एक रानी को
रूप की इक मस्तानी को

मस्ती भरी जवानी को
हाय रे हाय मैंने देखा
मैंने देखा हाय हाय
देखा मैंने देखा
देखा मैंने देखा, हा हा हा

थी बड़ी वो चंचल, हाय
ले गयी दिल मतवाला
मेरा ले गयी दिल मतवाला
प्यार को क्या समझे तू
घोडा चलाने वाला
घोडा गाडी चलाने वाला
थोड़ी सी वो काली थी
थोड़ी सी वो काली थी
बड़ी ही गुस्से वाली थी
लेकिन वो दिल वाली थी
जिसको मैंने देखा, मैंने देखा
हाय हाय देखा मैंने देखा

देखा, हाँ मैंने देखा

तन से आँचल खिसका
छम से वो जब निकली
छम से वो जब निकली
लूट के ले गयी महफ़िल
बन के वो जब निकली,हाय
बन के वो जब निकली
सुन्दर थी अलबेली थी
सुन्दर थी अलबेली थी
लगती नयी नवेली थी
प्यार की एक पहेली थी
जिसको मैंने देखा, मैंने देखा
हाय हाय देखा, मैंने देखा

देखा मैंने देखा

जी मेरा ये चाहे
मांग मैं उसकी भर दूं
मांग मैं उसकी भर दूं
अपना सारा जीवन
उसको अर्पण कर दूं
मैं उसको अर्पण कर दूं
दुनिया को दिखलाऊंगा
दुनिया को दिखलाऊंगा
अपना उसे बनाऊंगा
किसी भी सूरत पाऊंगा
जिसको मैंने देखा, मैंने देखा
हाय हाय देखा, मैंने देखा

देखा मैंने देखा
सपनो की एक रानी को
रूप की इक मस्तानी को
मस्ती भरी जवानी को
हाय रे हाय, मैंने देखा
हाय हाय देखा, मैंने देखा
मैंने देखा
हाय हाय देखा, देखा रे मैंने देखा
देखा देखा देखा रे मैंने देखा
हाय हाय देखा, देखा रे मैंने देखा

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Nov 25, 2009

भली भली सी एक सूरत-बुड्ढा मिल गया १९७१

सिचुएशन आधारित गीतों में से एक है ये गीत। वे गीत
जिनके बिना भी फ़िल्म आगे बढ़ सकती है उनमे से एक।
ऐसे मसाले फ़िल्म में दर्शकों की समय समय पर उपजी
बोरियत को ख़तम करने के लिए डाले जाते हैं। गीत में
नविन निश्चल और अर्चना परदे पर गा रहे हैं। पार्श्व गायन
किया है आशा भोंसले और किशोर कुमार ने। फ़िल्म
बुड्ढा मिल गया का ये गीत बहुत घिसा हुआ गीत है अर्थात
बहुत बजा है समय समय पर।



गाने के बोल:

भली भली सी एक सूरत
भला सा एक नाम

धड़कन है मेरे दिल की
सुबह हो या शाम

भली भली सी एक सूरत
भला सा एक नाम

धड़कन है मेरे दिल की
सुबह हो या शाम

कौन है वो दिलरुबा
अरे कहो न हमसे ज़रा

हाँ, ओई लो, ना ना ना ना
ओये होए होए, तुम हो वो दिलरुबा


भली भली सी एक सूरत
भला सा एक नाम

धड़कन है मेरे दिल की
सुबह हो या शाम

हुई मेरी जिया की चोरी
अच्छा?
अरे हाँ उस चोर की शकल है गोरी
तो क्या हुआ?
हो गया मिलना बहुत ज़रूरी
चल पगली!
फिर सुनो तो आगे हमारी दिल की मजबूरी, तू ,तू ,तू
वो जो मेरे करीब आया
ओ हो
मेरे तन पे पड़ा जो साया
फिर क्या हुआ?
यूँ समझो न गले लगाया
छी छी छी
तब से सोती हूँ जागती हूँ लेके उसका नाम
कौन हैं वो दिलरुबा कहो न हमसे ज़रा

तुम हो वो दिलरुबा

भली-भली सी एक सूरत...

हाय मुश्क़िल हैं मेरा भी जीना
ह... म ...
सोचूँ तो आता हैं पसिना
बाप-रे!
कल मैने देखी अजब हसीना
ह... म ...
प्यार मे उसके धड़के मेरा दिल जलता है सीना
धक धक धक
पास वो आई बड़ी अदा से
हा!
बोली क्यूँ हो खफ़ा-खफ़ा से
हाय मर जाऊँ
हम भी थे एक नज़र के प्यासे
क्यूँ नहीं?

दिल पे उसने जो हाथ रखा आ गया आराम
कौन हैं वो दिलरुबा कहो न हमसे ज़रा

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