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Apr 20, 2020

कहो आ के बहार-फोर्टी डेज़ १९५९

आप खुश होते हैं तब गीतों के संगीत का आनंद लेते है
और जब आप दुःख के बादलों में घिरे होते हैं तब बोलों
का अर्थ समझते हैं. ये बात जिसने भी कहीं है सटीक है.

एक गीत है मुकेश आशा का गाया युगल गीत १९५९ का
जिसमें पहली पंक्ति को कुछ यूँ समझते थे हम-कहो आ
के बाहर, करे मेरा सिंगार. वो शब्द बहार है जिसके कारण
गफ़लत कई गानों में हो चुकी है.

सरसरी तौर पर गान सुनने में अर्थ का अनर्थ होने की
सम्भावना प्रबल होती है. मगर, जिन गानों के बोल ही
समझ ना आयें उनका क्या? साय सुकू साय सुकू साय
साय !

कैफी आज़मी की रचना है और बाबुल का संगीत. गीत
में एक शोख नज़र से सौ भेद समझने की बात कही
गयी है. सदियों से कवि, गीतकार और प्रेमी रिसर्च कर
के थक-मर गए मगर स्त्री मन का भेद कोई ना जान
पाया. अंगड़ाई मच्छर भगाने के लिए है या अलसाने की
अदा.

गाने की हो ओ ओ ओ से आपको नैयर के संगीत वाला
‘रोका कई बार मैंने’ गीत याद आना चाहिए.




गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ
कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
चुनूँ फूल हज़ार ओ करूँ तुझपे निसार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला

आँखों में खुशी नाचे होंठों पे हंसी गाये
कह दो गम-ए-दुनिया से छुपे से गुज़र जाये
सुनो दिल की पुकार कहे दिल बार बार
मुझे प्यार मिला ओ दिलदार मिला
हा आ आ आ आ

चुनूँ फूल हज़ार ओ करूँ तुझपे निसार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला

ये मस्त फ़ज़ा दिल को दीवाना बनाती है
ये मस्त फ़ज़ा दिल को दीवाना बनाती है
एक शोख नज़र तेरी सौ भेद बताती है
तुम्हीं मेरा क़रार तुम्हीं मेरा निखार
मुझे प्यार मिला ओ दिलदार मिला
हा आ आ आ आ

कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हाय

बेदर्द ज़माने को हम प्यार सिखा देंगे
दिल खो ही चुके पहले अब जां भी गंवा देंगे
ये है ऐसा खुमार नहीं जिसका उतार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
…………………………………………………
Kaho aa ke bahaar-40 Days 1959

Artists: Premnath, Nishi

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May 13, 2018

जब छाए कभी सावन की घटा-रेशमी रुमाल १९६१

फिल्म रेशमी रुमाल से एक रेशमी धुन सुनते हैं. मधुरता
यत्र तत्र बिखरी हुई है संगीत के खजाने में बस उसे खोज
कर आनंद लेने की ज़रूरत है.

राजा मेहँदी अली खान का लिखा हुआ गीत है जिसकी धुन
तैयार की है बाबुल ने.





गीत के बोल:

जब छाए कभी सावन की घटा
रो रो के न करना याद मुझे
ऐ जान-ए-तमन्ना गम तेरा
कर दे ना कही बरबाद मुझे
जब छाए कभी सावन की घटा

जो मस्त बहारें आई थी
वो रूठ गई उस गुलशन से
जो मस्त बहारें आई थी
वो रूठ गई उस गुलशन से
जिस गुलशन में दो दिन के लिए
किस्मत ने किया आबाद मुझे

जब छाए कभी सावन की घटा

वो राही हूँ पल भर के लिए
जो जुल्फ के सायें में ठहरा
वो राही हूँ पल भर के लिए
जो जुल्फ के सायें में ठहरा
अब ले के चली है दूर कहीं
ऐ इश्क तेरी बेदाद मुझे

जब छाए कभी सावन की घटा

ऐ याद-ए-सनम अब लौट भी जा
क्यूँ आ गई तू समझाने को
ऐ याद-ए-सनम अब लौट भी जा
क्यूँ आ गई तू समझाने को
मुझको मेरा गम काफ़ी है
तू और न कर नाशाद मुझे

जब छाए कभी सावन की घटा
रो रो के न करना याद मुझे
ऐ जान-ए-तमन्ना गम तेरा
कर दे ना कही बरबाद मुझे
जब छाए कभी सावन की घटा
…………………………………………………………..
Jab chhaye kabhi sawan ki ghata-Reshmi Rumal 1961

Artists: Manoj Kumar, Shakeela

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Apr 9, 2018

गर्दिश में हों तारे-रेशमी रुमाल १९६१

फिल्म रेशमी रुमाल से एक रेशमी सी धुन सुनते हैं.
गीत मुकेश ने गाया है. राजा मेहँदी अली खान के बोल
हैं और बाबुल का संगीत. संगीतकार बाबुल वही हैं
बिपिन बाबुल की जोड़ी वाले.

फिल्म रेशमी रुमाल में कुछ कर्णप्रिय गीत हैं. इस
फिल्म में मनोज कुमार और शकीला प्रमुख कलाकार
हैं.



गीत के बोल:

गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे
ग़र तू हिम्मत न हारे तो होंगे वारे न्यारे
गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे
ग़र तू हिम्मत न हारे तो होंगे वारे न्यारे

मुझको मेरी आशा देती है दिलासा
मुझको मेरी आशा देती है दिलासा
आयेंगी बहारें चली जाएगी ख़िज़ा
हो आस्मां ये नीला नीला करे है इशारे

गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे
ग़र तू हिम्मत न हारे तो होंगे वारे न्यारे
गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे
दुनिया है सराय रहने तो कह्म आए
दुनिया है सराय रहने तो कह्म आए
आया है तो हँसी-खुशी रह ले तू यहाँ
हो सूरमा है ज़िंदगी जो काँटों में गुज़ारे

गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे
ग़र तू हिम्मत न हारे तो होंगे वारे न्यारे
गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे

बाज़ुओं में दम है फिर काहे का ग़म है
बाज़ुओं में दम है फिर काहे का ग़म है
आहनी इरादे हैं उमंगें हैं जवां
हो मुश्किलें कहाँ हैं उम्हें मेरा दिल पुकारे

गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे
ग़र तू हिम्मत न हारे तो होंगे वारे न्यारे
गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे
ग़र तू हिम्मत न हारे तो होंगे वारे न्यारे
गर्दिश में हों तारे ना घबराना प्यारे
..........................................................
Gardish mein hon tare-Reshmi Rumaal 1961

Artist: Manoj Kumar

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Oct 31, 2017

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ-फोर्टी डेज़ १९५९

नायिका सार्वजनिक नल पर पानी पीते पीते पानी पीना
भूल के गाना गाने लगती है और नल खुला रह जाता है.
नायक को ढूंढ रही है अपनी सुध बुध खो के.

पेटी और तबला वाले गीत दुर्लभ है फिल्मों में. एक तो
मुझे याद है सत्तर के दशक वाला-दीवाने हैं दीवानों को
न घर चाहिए.

कैफी आज़मी की रचना है और मधुर संगीत टायर किया
है बाबुल ने. गीत में मन्ना डे के साथ एक जनाना आवाज़
है वो किसकी है क्या ज्ञानी संगीत प्रेमी प्रकाश डालेंगे.
या तो आशा भोंसले की ही आवाज़ है या कोई और, स्पष्ट
नहीं हो पाता.



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
मिलेगा उसके क़दम का निशाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी

रहा जो छुप के जवाँ दिल में आरज़ू की तरह
रहा जो छुप के जवाँ दिल में आरज़ू की तरह
चला गया जो ग़रीबों की आबरू की तरह
हो चला गया जो ग़रीबों की आबरू की तरह
नज़र तो आयेगा वो मेहमाँ कभी न कभी

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
मिलेगा उसके क़दम का निशाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी

हर इक सितम का वफ़ायें जवाब माँगेंगी
हर इक सितम का वफ़ायें जवाब माँगेंगी
हर एक बूँद का आँखें हिसाब माँगेंगी
हो हर एक बूँद का आँखें हिसाब माँगेंगी
लहू पुकारेगा बन के ज़बां कभी न कभी

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
मिलेगा उसके क़दम का निशाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी

हा आ आ आ हा आ आ आ हा आ आ आ
लुटी लुटी सी तमन्ना जो हाथ उठायेगी
लुटी लुटी सी तमन्ना जो हाथ उठायेगी
चमकते चाँद सितारों को तोड़ लायेगी
हो चमकते चाँद सितारों को तोड़ लायेगी
गले मिलेंगे ज़मीं आसमान कभी न कभी

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
मिलेगा उसके क़दम का निशाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
…………………………………………….
Naseeb hoga mere meherban-40 Days 1959

Artists: Premnath, Shakila, Nishi

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Mar 19, 2017

बैठे हैं रहगुज़र पर-४० डेज़ १९५९

आशा भोंसले ने हिंदी फिल्म सिनेमा में सर्वाधिक गीत गाये
हैं. उनके अनेकों फ़िल्मी, गैर फ़िल्मी गीत लोकप्रिय हैं. आज
सुनेंगे एक कम लोकप्रिय संगीतकार की बेहद लोकप्रिय रचना.
फिल्म ४० डेज़ सन १९५९ की एक फिल्म है जिसका निर्देशन
द्वारका खोसला ने किया था.

आशा भोंसले के सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है ये. इसके
संगीतकार हैं बाबुल. बाबुल ने बिपिन के साथ मिल के जोड़ी
भी बनाई थी जो बिपिन-बाबुल के नाम से जानी जाती है. आम
संगीत प्रेमी उनके नाम से वाकिफ नहीं हैं.

प्रेमनाथ और शकीला की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फिल्म
में के एन सिंह, निशी और शम्मी भी मौजूद हैं.

किसी गीत के बोल कितने महत्त्वपूर्ण होते हैं उसकी गुणवत्ता
निर्धारण में उसका एक उदाहरण है ये गीत जिसके बोल लिखे
हैं कैफ़ी आज़मी ने. इस गीत में अरमान की नर्म बाहें लचका
मारी हैं.





गीत के बोल:

बैठे हैं रहगुज़र पर दिल का दिया जलाये
शायद वो दर्द जानें शायद वो लौट आये
बैठे हैं रहगुज़र पर दिल का दिया जलाये
बैठे हैं रहगुज़र पर

आकाश पर सितारे चल चल के थम गए हैं
आकाश पर सितारे चल चल के थम गए हैं
हो ओ ओ ओ ओ
शबनम के सर्द आँसू फूलों पे जम गए हैं
हम पर नहीं किसी पर ऐ काश रहम खाये
शायद वो दर्द जानें शायद वो लौट आये
बैठे हैं रहगुज़र पर

राहों में खो गई हैं हसरत भरी निगाहें
राहों में खो गई हैं हसरत भरी निगाहें
हो ओ ओ ओ ओ
कब से लचक रही हैं अरमान की नर्म बाहें
हर मोड़ पर तमन्ना आहट उसी की पाये
शायद वो दर्द जाने शायद वो लौट आये
बैठे हैं रहगुज़र पर दिल का दिया जलाये
बैठे हैं रहगुज़र पर
…………………………………………………
Baithe hain rehguzar par-40 Days

Artist: Shakila

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Sep 30, 2016

हम दीवाने तेरे दर से-नकली नवाब १९६२

आपको आज एक गीत सुनवा रहे हैं फिल्म नकली नवाब से
जिसे रफ़ी और आशा ने गाया है. कव्वाली है ये जिसके बोल
लिखे हैं राजा महेंदी अली खान ने.

रेयर और ओब्स्क्योर फिल्मों से मधुर गीत सुनवाते रहे हैं हम
नकली नवाब की स्टारकास्ट इम्प्रेसिव है और अशोक कुमार,
मनोज कुमार और शकीला जैसे कलाकार फिल्म में मौजूद हैं.

गीत के संगीतकार हैं बाबुल जिन्होंने स्वतंत्र संगीत देने के साथ
ही बिपिन बाबुल की जोड़ी बना के भी संगीत दिया कई फिल्मों
में. ये फ़िल्में पचास के दशक वाली थीं. मदन मोहन के सहायक
रहे बिपिन और बाबुल ने जोड़ी के रूप में बेहतर का किया और
जोड़ी टूटने के बाद उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं चल पाया.




गीत के बोल:

हम दीवाने तेरे
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
हम दीवाने हाय! हम दीवाने तेरे
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
और मचलेंगे अभी तुझपे मचलने वाले
और मचलेंगे अभी तुझपे मचलने वाले
और मचलेंगे अरे मचलेंगे मचलेंगे मचलेंगे
और मचलेंगे अभी तुझपे मचलने वाले
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले

फूल सा रंग भी है हुस्न भी है रूप भी है
अरे फूल सा रंग भी है और हुस्न भी है
रूप भी है
फिर मेरे इश्क़ का सूरज भी है और धूप भी है
फिर मेरे इश्क़ का सूरज भी है और धूप भी है
अब तो ये प्यार के साये नहीं ढलने वाले
और मचलेंगे अभी तुझपे मचलने वाले
और मचलेंगे अभी तुझपे मचलने वाले
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले

बेरुखी ने तेरे ज़ालिम हमें बरबाद किया
बेरुखी ने तेरे ज़ालिम हमें बरबाद किया
ऐसे भूले के न भूले से हमें याद किया
ऐसे भूले के न भूले से हमें याद किया
याद किया याद किया
फूल से दिल को निगाहों से मसलने वाले
ऐ जी फूल से दिल को निगाहों से मसलने वाले
फूल से दिल को निगाहों से मसलने वाले

हम दीवाने तेरे
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
और मचलेंगे अभी तुझपे मचलने वाले

ना फलक की हमें परवाह ना ज़माने का ख्याल
अरे ना फलक की हमें परवाह ना ज़माने का ख्याल
हो ओ ओ ओ लाख दुनिया के गम हों
हमको कुछ भी नहीं मलाल
लाख दुनिया के गम हों
हमको कुछ भी नहीं मलाल
सामने बैठे हैं बैठे हैं बैठे हैं
सामने बैठे हैं तकदीर बदलने वाले
सामने बैठे हैं तकदीर बदलने वाले
सामने बैठे हैं तकदीर बदलने वाले

हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
हम दीवाने तेरे
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
हम दीवाने तेरे दर से नहीं टलने वाले
हम दीवाने तेरे
………………………………………………………………….
Ham deewane tere dar se-Nakli nawab 1962

Artists: Ashok Kumar, Manoj Kumar, Shakeela, KN Singh

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Aug 20, 2016

लगन मोरे मन की बलम-बाबुल १९५०

लगन शब्द का इस्तेमाल अक्सर खुशनुमा और प्रेरणादायी
गीतों में होता है. दुःख भरे गानों के लिए दूसरे शब्द भी हैं
गीतकारों के पास, मगर लिखने वाला किस सीन को और
स्तिथि को कैसे भांपेगा ये समझना फिल्म के निर्देशक के
लिए भी मुश्किल होता है.

संगीत का जानकार निर्देशक अवश्य इस काम में दखल दे
सकता है. शब्द के लेवल पर बदलाव वाले निर्देशक बिरले हैं
इस फिल्म उद्योग में.

फिल्म: बाबुल
वर्ष: १९५०
गीतकार: शकील बदायूनीं
संगीतकार:नौशाद
गायिका: लता मंगेशकर




गीत के बोल:

लगन मोरे मन की बलम नहीं जाने
लगन मोरे मन की बलम नहीं जाने
बलम नहीं जाने सजन नहीं जाने
लगन मोरे मन की बलम नहीं जाने

लाज की मारी मैं तो मुँह से ना बोलूँ
मुँह से ना बोलूँ
भेद किसी से कभी दिल के न खोलूँ
दिल के न खोलूँ
ठेस जिया पे लागे
ठेस जिया पे लागे
छुप छुप रो लूँ
छुप छुप रो लूँ

तड़प बिरहन की बलम नहीं जाने
बलम नहीं जाने सजन नहीं जाने
लगन मोरे मन की बलम नहीं जाने

डूब न जायें कहीं आशा के तारे
आशा के तारे
नैन चुरा के हाय सैयाँ हमारे
सैयाँ हमारे
नेहा लगाने गये
नेहा लगाने गये
सौतन द्वारे सौतन द्वारे

कदर मेरे धन की बलम नहीं जाने
बलम नहीं जाने सजन नहीं जाने
लगन मोरे मन की बलम नहीं जाने
..........................................................................
Lagan more man ki-Babul 1950


Artist: Nargis

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Dec 5, 2009

मैं दीवाना मस्ताना-फोर्टी डेज़ १९५९

मस्ती भरे गीत देख के दर्शक थोड़ी देर को भूल जाता है
अपने सारे गम और ये भी कि जो फिल्म वो देख रहा है
उससे पैसे वसूल हो रहे हैं या नहीं. ये तो उस ज़माने में
होता था जब व्यक्ति समय निकाल कर अपने घर से दूर
सिनेमा हॉल जाया करता था फिल्म देखने.

उसके बाद के युग में आया बी सी आर जिससे पिक्चर
देखने हेतु इधर उधर की आवाजाही की परेशानी बची.
इसको एक वीडियो लायब्रेरी वाला  बीबी सी यार भी कहा
करता था. उसकी वैलिड वजह भी थी उसके पास-दोनों
में कोनू फरक नोई. दोनोई बकर-बकर करत हैं.

सुनते हैं फिल्म ४० डेज़ अर्थात ४० दिन से मुकेश का
एक लोकप्रिय गीत जिसका संगीत किसी नामचीन म्युज़िक
डायरेक्टर ने नहीं तैयार किया है. गीत अलबत्ता ख्यातनाम
शायर का लिखा हुआ है.



गीत के बोल:

मैं दीवाना मस्ताना
ओ मुश्किल भेद मेरा पा जाना
मैं दीवाना मस्ताना
मैं दीवाना मस्ताना
ओ मुश्किल भेद मेरा पा जाना
मैं दीवाना मस्ताना

दुनिया मेरी ठोकर में
तूफ़ां क़ैद मेरे सागर में
तूफ़ां क़ैद मेरे सागर में
सारा ज़माना मेरा निशाना
सारा ज़माना मेरा निशाना

खेल नहीं मुझसे टकराना
मुश्किल भेद मेरा पा जाना
मैं दीवाना मस्ताना

चर्चे मेरे पनघट पर
रोके राह मचल के दिलबर
मस्त जवानी मेरी दीवानी
मस्त जवानी मेरी दीवानी
हुस्न मुझे दिल दे नज़राना
मुश्किल भेद मेरा पा जाना
मैं दीवाना मस्ताना

दुश्मन झूठे यारों का
सच्चा यार वफ़ादारों का यारों
सच्चा यार वफ़ादारों का
तोड़ दे पत्थर जोश में आ कर
तोड़ दे पत्थर जोश में आ कर
ये दिल का नाज़ुक पैमाना
मुश्किल भेद मेरा पा जाना
मैं दीवाना मस्ताना

मैं दीवाना मस्ताना
ओ मुश्किल भेद मेरा पा जाना
मैं दीवाना मस्ताना
…………………………………………………
Main deewana mastana-40 Days 1959

Artist: Premnath, a beautiful horse

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Oct 20, 2009

मिलते ही ऑंखें दिल हुआ दीवाना-बाबुल १९५०

बहुत कम श्रोता ऐसे हैं जो बचपन से ही नौशाद, तलत महमूद और
शमशाद बेगम के नाम पहचानते हों । मेरी आदत रही शुरू से कि मैं
गायक, गायिका, गीतकार और संगीतकार का नाम याद रखने की
कोशिश करता रहा । रेडियो सीलोन और विविध भरती का योगदान
बहुत रहा इस गाने को बजाकर श्रोताओं को रटाने में । गाना
इतना स्पष्ट और तरीके से गाया गया है कि आप भी २-३ बार
सुनकर इसको याद कर सकते हैं। ये सन १९५० का एक हिट युगल
गीत है। बाबुल फ़िल्म के सारे गाने लोकप्रिय थे। इसके बोल लिखे
हैं नौशाद के जोड़ीदार शकील बदायूनी ने। गाने पे होंठ हिलाए हैं
दिलीप कुमार ने।



गाने के बोल :

मिलते ही ऑंखें दिल हुआ दीवाना किसी का
मिलते ही ऑंखें दिल हुआ दीवाना किसी का
अफसाना मेरा बन गया अफसाना किसी का
अफसाना मेरा बन गया अफसाना किसी का

पूछो न मोहब्बत का असर , हाय न पूछो
हाय न पूछो
पूछो न मोहब्बत का असर, हाय न पूछो
हाय न पूछो

दम भर में कोई हो गया परवाना किसी का
दम भर में कोई हो गया परवाना किसी का
अफसाना मेरा बन गया अफसाना किसी का
मिलते ही ऑंखें दिल हुआ दीवाना किसी का


हँसते ही न आ जाए कहीं आँखों में आंसू
आँखों में आंसू
हँसते ही न आ जाए कहीं आँखों में आंसू
आँखों में आंसू

भरते ही छलक जाए न पैमाना किसी का
भरते ही छलक जाए न पैमाना किसी का
अफसाना मेरा बन गया अफसाना किसी का
मिलते ही ऑंखें दिल हुआ दीवाना किसी का

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