Showing posts with label Dilip Kumar. Show all posts
Showing posts with label Dilip Kumar. Show all posts

May 29, 2016

नैन लड़ जई हैं-गंगा जमुना १९६१

फ़िल्मी संगीत में लोक गीतों को भी जगह दिया जाना पुराना
प्रचलन है. ये दस्तूर आज भी जारी है. पारंपरिक गीतों और
लोक गीतों के बिना फिल्म संगीत अधूरा लगता है. जब फिल्म
के कथानक ग्रामीण प्रष्ठभूमि के होते हैं तब तो इनका शामिल
होना बड़ी ज़रूरत नज़र आता है.

एक फ़िल्मी लोक गीत सुनते हैं फिल्म गंगा जमुना से जिसे
लिखा है शकील बदायूनी ने और गा रहे हैं मोहम्मद रफ़ी. इसके
संगीतकार हैं नौशाद. नौशाद ने कुछ पारंपरिक गीतों पर आधारित
गीत बनाये और एर काफी लोकप्रिय रहे. लोकप्रिय संगीत की
रचना वे अपने सांचे में ढाल के तैयार करते थे फिर भी जनता
उनके गीतों को हाथों-हाथ लेती थी.




गीत के बोल:

लागा गोरी गुजरिया से
नेहा हमार
होइ गवा सारा चौपट मोरा
रोजगार

नैन लड़ जई हैं तो मनवा मा कसक होइबे करी
प्रेम का छुटि है पटाखा तो धमक होइबे करी
नैन लड़ जई हैं तो मनवा मा कसक होइबे करी

रूप को मन मा बसईबा तो बुरा का होई है
तोहू से प्रीत लगईबा
तोहू से प्रीत लगईबा तो बुरा का होई है
प्रेम की नगरी मा कुछ हमरा भी हक़ होइबे करी
नैन लड़ जई हैं तो मनवा मा कसक होइबे करी

होई गवा मनमा मोरे तिरछी नजर का हल्ला
होई गवा मनमा मोरे तिरछी नजर का हल्ला
गोरी को देखे बिना निंदिया ना आवै हमका
फाँस लगी है तो करेजवा मा खटक होइबे करी
नैन लड़ जई हैं तो मनवा मा कसक होइबे करी

थैक थैक थै थै, थै
धा के तिनक धिन, ता के तिनक धिन,
धा के तिनक धिन,  धा के तिनक धिन, धा

आँख मिल जई है सजनिया से तो नाचन लगिहे
आँख मिल जई है सजनिया से तो नाचन लगिहे
प्यार की मीठी गजल
प्यार की मीठी गजल मनवा भी गावन लगिहे
झाँझ बजी है तो कमरिया मा लचक होइबे करी
झाँझ बजी है तो कमरिया मा लचक होइबे करी

नैन लड़ जई हैं तो मनवा मा कसक होइबे करी

नैना जब लड़ी है तो भैया मन मा कसक होइबे करी
अरे नैना जब लड़ी है तो भैया मन मा कसक होइबे करी

मन ले गयी रे धोबनिया रामा कैसा जादू डार के
मन ले गयी रे धोबनिया रामा कैसा जादू डार के
कैसा जादू डार के रे, कैसा टोना मार के
मन ले गयी रे धोबनिया रामा कैसा जादू डार के
....................................................................................
Nain lad jai hain-Ganga Jamuna 1961

Read more...

Feb 22, 2016

कोई सागर दिल को-दिल दिया दर्द लिया १९६६

नौशाद मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ के कायल थे. वे मुक्त कंठ से
रफ़ी की प्रशंसा किया करते थे. उन्होंने रफ़ी के लिए कुछ बहुत
ही उम्दा किस्म की धुनें बनायीं जिनमें से एक है ६६ की फिल्म
दिल दिया दर्द लिए से-कोई सागर दिल को बहलाता नहीं. इस
गीत के बोल भी अनमोल है और शकील बदायूनी ने सरल से
शब्दों में एक टूटे हुए इंसान के दिल की बात कह दी है.

कभी आप जिंदगी में भंवर में उलझें हों तो गीत के कोई खास
हिस्सा याद हो जाता है और वो दीर्घकाल में आपका प्रिय भी हो
जाया करता है, कुछ ऐसा ही है गीत के दूसरे अंतरे में.

खमाज थाट के राग कलावती पर ये गीत आधारित है.






गीत के बोल:

कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
बेख़ुदी में भी करार आता नहीं
कोई सागर दिल को बहलाता नहीं

मैं कोई पत्थर नहीं इन्सान हूँ
मैं कोई पत्थर नहीं इन्सान हूँ
कैसे कह दूं गम से घबराता नहीं

कोई सागर दिल को बहलाता नहीं

कल तो सब थे कारवाँ के साथ-साथ
कल तो सब थे कारवाँ के साथ-साथ
आज कोई राह दिखलाता नहीं

कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
बेख़ुदी में भी करार आता नहीं

ज़िन्दगी के आईने को तोड़ दो
ज़िन्दगी के आईने को तोड़ दो
इसमें अब कुछ भी नज़र आता नहीं

कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
बेख़ुदी में भी करार आता नहीं
कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
.....................................................................................
Koi sagar dil ko behlata nahin-DIl diya dard liya 1966

Read more...

Feb 9, 2016

हमारे दिल से ना जाना-उड़न खटोला १९५५

पिछली पोस्ट में हमने जाल मिस्त्री का नाम लिया था. उनके
बारे में कुछ और बात की जाए. फिल्म उड़न खटोला जिन्होंने
देखी है-मोरे सैयां जी–गीत का फिल्मांकन तो याद ही होगा.
थोडा आगे बढते हैं- फिल्म आखिरी खत में एक छोटे बच्चे
के पीछे कैमरा ले कर काफी कसरत की थी उन्होंने. सिनेमा
के सबसे स्वाभाविक दृश्यों में से कुछ एक हैं वे-उस बच्चे के
दृश्य. थोडा पीछे को चलें-ब्लॉक बस्टर फिल्म बरसात(१९४९)
की ओर. एक गीत आपको याद ही होग फिल्म का-पतली कमर
है.

उड़न खटोला की दो विशेषताएं हैं-जितनी स्पष्ट गानों की रिकॉर्डिंग
में हैं उतनी ही स्पष्टता फिल्म के छायांकन में भी है.

आज आपको फिल्म उड़न खटोला से ही एक गीत सुनवाते हैं-




गीत के बोल:


हमारे दिल से न जाना
धोखा न खाना दुनिया बड़ी  बेईमान
हो पिया दुनिया बड़ी बेईमान
हमारे दिल से न जाना
धोखा न खाना दुनिया बड़ी बेईमान
हमारे

मैं हूं जी प्यार की पहली निशानी
मैं हूं जी प्यार की पहली निशानी
आँखों से आज कहूं दिल की कहानी
आँखों से आज कहूं दिल की कहानी
ओ ओ ओ ओ ओ सुन लो जी पैंया पड़ूँ
हो ओ ओ हो
देखो जी विनती करूं
देखो जी विनती करूं
हो ओ ओ ओ ओ हो
हमारे घर लाज निभाना
दिल न दुखाना
बलमा कहा मेरा मान
ओ पिया दुनिया बड़ी  बेईमान

हमारे दिल से न जाना
धोखा न खाना दुनिया बड़ी बेईमान
हमारे

मीठे दो बोल यहां मुश्किल है बोलना
मीठे दो बोल यहां मुश्किल है बोलना
दुनिया से भेद कभी मन के न खोलना
दुनिया से भेद कभी मन के न खोलना
हो ओ ओ ओ झूटी है प्रीत यहां
हो ओ ओ ओ ओ
कोई न मीत यहां
कोई न मीत यहां
हो ओ ओ ओ ओ ओ
बुरा है आज ज़माना
टूटे जिया ना
उलझन में है मेरी जान
हो पिया दुनिया बड़ी बेईमान

हमारे दिल से न जाना
धोखा न खाना दुनिया बड़ी बेईमान
हमारे
.............................................................................
Hamare dil se na jaana-Udan Khatola 1955

Read more...

Dec 30, 2015

आज मेरे मन में सखी बांसुरी-आन १९५२

दिलीप कुमार की हिट फिल्मों में से एक है सन १९५२ की
फिल्म आन और इसका संगीत ज़बरदस्त हिट कहा जाता
है. फिल्म से एक लता मंगेशकर का गीत सुनवा चुके हैं
आपको पहले. फिल्म में नादिरा नायिका की भूमिका में हैं.
एक और नायिका हैं फिल्म में जिनका नाम है-निम्मी.

प्रस्तुत गीत नायिका निम्मी पर फिल्माया गया है. ये गीत
हर्षोल्लास वाला गीत है यानि कि खुशनुमा गीत कह सकते
है इसे. फिल्म आन गीतों से भरपूर फिल्म है और इसमें १०
गीत हैं जो हम आपको सुनवायेंगे धीरे-धीरे. पंकज उधास की
एक गज़ल है-मजा लेना है पीने का तो कम-कम धीरे-धीरे पी.



गीत के बोल:

आज मेरे मन में सखी बांसुरी बजाये कोई
आज मेरे मन में
आज मेरे मन में सखी बांसुरी बजाये कोई
प्यार भरे गीत सखी बार-बार गाये कोई
बांसुरी बजाये, बांसुरी बजाये सखी गाये सखी रे
कोई छैलवा हो कोई अलबेलवा हो कोई छैलवा हो

रंग मेरी जवानी का लिए झूमता घर आया है सावन
रंग मेरी जवानी का लिए झूमता घर आया है सावन
हो सखी हो रे सखी आया है सावन
मेरे नैनों में है साजन

इन उंदी घटाओं में हवाओं में सखी नाचे मेरा मन
हो सखी नाचे मेरा मन
हो अंगना में सावन मनभावन हो जी
हो इन उंदी घटाओं में हवाओं में सखी नाचे मेरा मन
हो सखी नाचे मेरा मन
दिल के हिंडोले पे मोहे झूलना झुलाये कोई
प्यार भरे गीत सखी बार-बार गाये कोई
बांसुरी बजाये, बांसुरी बजाये सखी गाये सखी रे
कोई छैलवा हो कोई अलबेलवा हो कोई छैलवा हो

कहता है इशारों में कोई आ मोहे अम्बुवा के तले मिल
भला वो कौन है घायल
कहता है इशारों में कोई आ मोहे अम्बुवा के तले मिल
भला वो कौन है घायल
मैं नाम न लूं आज लगे लाज सखी
धडके मेरा दिल हो सखी धडके मेरा दिल
हो आँगन में सावन मन भावन हो जी
हो मैं नाम न लूं आज लगे लाज सखी
धडके मेरा दिल हो सखी धडके मेरा दिल
तार पे जीवन के मधुर रागिनी सुनाये कोई
प्यार भरे गीत सखी बार-बार गाये कोई
बांसुरी बजाये, बांसुरी बजाये सखी गाये सखी रे
कोई छैलवा हो कोई अलबेलवा हो कोई छैलवा हो
...................................................................................
Aaj mere man mein sakhi-Aan 1952

Read more...

May 9, 2015

इन्साफ का मंदिर है ये-अमर १९५४

सफलता के प्रतिशत के लिहाज से सोचा जाए तो शायद
नौशाद हिंदी फिल्मों के सबसे सफल संगीतकार माने जाएँ.
उन्होंने दूसरे संगीतकारों की तुलना में कम फिल्मों में
संगीत दिया और सबसे ज्यादा हिट लोकप्रिय संगीत दिया
फिल्मों में. ऐसा नहीं है कि उनकी सभी फिल्मों के गीत
हिट रहे हों. कुछ ऐसी भी फ़िल्में हैं जिनके गीत जनता ने
सुने ही नहीं. लेकिन उनकी ऐसी फ़िल्में कम हैं.

उनके संगीत की विशेषता रही-निरंतरता जिसे अंग्रेजी में
कंसिस्टेंसी कहते हैं. अपनी शैली में उन्होंने बहुत ज्यादा
बदलाव या प्रयोग नहीं किये. पारंपरिक और देसी धुनों
को वे घुमा फिर के प्रस्तुत करते रहे और सफल भी रहे.
उन्हें हम एक अच्छा सेल्समैन कह सकते हैं फ़िल्मी गीतों
का. कुछ शास्त्रीय राग उन्हें भी प्रिय रहे और वे उन पर
आधारित बंदिशें बनाते रहे. प्रतुत गीत राग भैरवी पर
आधारित है.

आइये सुनते हैं फिल्म अमर का यह भक्ति गीत. इसे लिखा
है शकील बदायूनीं ने और गाया है रफ़ी ने.




गीत के बोल:

इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है
इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है
इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है
कहना है जो कह दे तुझे किस बात का डर है

है खोट तेरे मन मे जो भगवान से है दूर
है पाँव तेरे फिर भी तू आने से है मजबूर
हिम्मत है तो आ जा, ये भलाई की डगर है

इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है

दुःख दे के जो दुखिया से ना इन्साफ करेगा
भगवान भी उसको ना कभी माफ़ करेगा
ये सोच ले हर बात की दाता को खबर है
हिम्मत है तो आजा, ये भलाई की डगर है

इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है

है पास तेरे जिसकी अमानत उसे दे दे
निर्धन भी है इंसान, मोहब्बत उसे दे दे
जिस दर पे सभी एक हैं बन्दे, ये वो दर है

इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है

मायूस ना हो हार के तक़दीर की बाज़ी
प्यारा है वो गम जिसमें हो भगवान भी राज़ी
दुःख दर्द मिले जिसमें, वही प्यार अमर है
ये सोच ले हर बात की दाता को खबर है

इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है
…………………………………………………..
Insaaf ka mandir hai ye-Amar 1954

Read more...

Jul 20, 2011

मोरे सैयां जी उतरेंगे पार हो-उड़न खटोला १९५५

क्या दिन थे साहब वे भी. सन १९५५ में भी कई नायब गीत बने.
एक फिल्म आई जिसके सभी गाने बड़े चाव से सुने गए. फिल्म में
निम्मी और दिलीप कुमार की जोड़ी है. फिल्म में संगीत नौशाद का
है. नाम है फिल्म का-उड़न खटोला. इस फिल्म का नाव वाला गीत
सुनाते हैं आपको. इसके 'हैया हो हैया रे हैया हैया हो' ने वो गूँज की
जो सभी जगह सुनाई पढ़ी. कितने आदर के साथ सैयां का नाम लिया
जा रहा है-'मोरे सैयां जी' ! नाव चालिका हैं निम्मी और सवार हैं
दिलीप कुमार.

फिल्म में ढेर सारे गीत हैं और सभी तकरीबन सुने जाते हैं पुराने संगीत
प्रेमियों द्वारा. गीत में अँगरेज़ सी और अभिनेत्री मुमताज़ की दूर की रिश्तेदार
सी दिखने वाली बाला का नाम है-सूर्य कुमारी.

गीत में गौर करने लायक बात जो है-अंगूठी किस ऊँगली में पहनाई जा रही
है ?




गीत के बोल:

मोरे सैयां जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो

हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हैय्या रे हैय्या
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो

मोरे सैंया जी
ओ मोरे सैंया जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो
ओ मोरे सैंया जी
ओ मोरे सैंया जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो

धीरे बहो धीरे धीरे, धीरे बहो नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो

चंचल धारा बहता पानी, बहता पानी
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
जल थल नदिया हो, जल थल नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
नाव पुरानी सर पे ठाड़ा मँझधार हो
हैय्या रे हैय्या
सर पे ठाड़ा मँझधार हो
नदिया धीरे बहो

मोरे सैंया जी
ओ मोरे सैंया जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो

धीरे बहो धीरे धीरे, धीरे बहो नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो

हा आ आ आ आ आ आ आ

ताल तलैया दुनिया माने, दुनिया माने
हैय्या हो हैय्या
मन का सागर कोऊ न जाने, कोऊ न जाने
हैय्या हो हैय्या
मैं जानूँ या मोरा यार हो
हैय्या रे हैय्या
मैं जानूँ या मोरा यार हो
नदिया धीरे बहो

मोरे सैंया जी
ओ मोरे सैंया जी उतरेंगे पार हो
नदिया धीरे बहो

धीरे बहो धीरे धीरे, धीरे बहो नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो

चलती नैया रोके आँधी, रोके आँधी
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
चुप चुप देखे, हो चुप चुप देखे
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
बेबस माँझी छूटे जाये पतवार हो
हैय्या रे हैय्या
छूटे जाये पतवार हो
नदिया धीरे बहो,

धीरे बहो धीरे धीरे, धीरे बहो नदिया
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हैय्या हो हो
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हैय्या हो हो
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या, हैय्या हो
हैय्या हो हो
हैय्या रे हैय्या हैय्या रे हैय्या हैय्या
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
हैय्या हो, हैय्या रे हैय्या
...................................
More saiyan ji utrenge paar-Udan Khatola 1955

Read more...

Jul 18, 2011

उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी-नया दौर १९५७

फिल्म नया दौर के साथ कुछ रोचक किस्से जुड़े हुए हैं. सुनते हैं कि
पहले नायिका के रोल में मधुबाला को लिया जाना था. उनकी जगह
वैजयंतीमाला आ गयीं. उसी तरह से ओ पी नय्यर भी मूल योजना का
हिस्सा नहीं थे. उन्हें भी बाद में अनुबंधित किया गया.

ओ पी नय्यर ने जो गीत इस फिल्म के लिए बनाये वो आज भी उतने ही
उत्साह से सुने जाते हैं, विशेषकर एक गीत जिसे शादी ब्याह के अवसर पर
खूब बजाया और गाया जाता है. ये युगल गीत जो इधर प्रस्तुत है आज उसे
भी खूब सुना जाता है. गायक हैं आशा और रफ़ी.

साहिर लुधियानवी ने इस फिल्म के गीत लिखे हैं. साहिर ने बी. आर. चोपड़ा की
कई फिल्मों के लिए गीत लिखे, अधिकतर में संगीत एन. दत्ता या रवि का होता.
ऐसा क्यूँ इसकी कहानी फिर कभी, फिलहाल ये गीत सुनिए.




गीत के बोल:

हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी

हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
हो, उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी

कुँवारियों का दिल मचले
कुँवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये

जब ऐसे चिकने चेहरे
जब ऐसे चिकने चेहरे

तो कैसे ना नज़र फिसले
तो कैसे ना नज़र फिसले
जिन्द मेरिये

हो, रुत प्यार करन की आई
रुत प्यार करन की आई

हो, रुत प्यार करन की आई
हो, रुत प्यार करन की आई
के बेरियों के बेर पक गये
के बेरियों के बेर पक गये
जिन्द मेरिये

कभी डाल इधर भी फेरा
कभी डाल इधर भी फेरा

के तक-तक नैन थक गये
के तक-तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये

हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े

हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े
हो, उस गाँव से सँवर कभी साजक़े

के जहाँ मेरा यार बसता
के जहाँ मेरा यार बसता
जिन्द मेरिये

पानी लेने के बहाने आजा
पानी लेने के बहाने आजा

के तेरा मेरा इक रस्ता
के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये

हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ
हो, तुझे चाँद के बहाने देखूँ

तुझे चाँद के बहाने देखूँ
तुझे चाँद के बहाने देखूँ

तू छत पर आजा गोरिये
तू छत पर आजा गोरिये
जिन्द मेरिये

अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के
अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के

के चाँद बैरी छिप जाने दे
के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये

हो, तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी

तेरी चाल है नागन जैसी
हो, तेरी चाल है नागन जैसी

रे जोगी तुझे ले जायेंगे
रे जोगी तुझे ले जायेंगे
जिन्द मेरिये

जायेँ कहीं भी मगर हम सजना
हो, जायेँ कहीं भी मगर हम सजना

यह दिल तुझे दे जायेंगे
यह दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये
...................................
Ude jab jab zulfen teri-Naya daur 1957

Read more...

Jun 30, 2011

मैं टूटी हुई एक नैया हूँ-आदमी १९६८

फिल्म आदमी के तीन गीत आप सुन ही चुके हैं। अब
सुनते हैं चौथा गीत। ये दर्द भरा या यूँ कहिये नैराश्य के
भावों को उभारता गीत है। गायक ने जिस गंभीर तरीके
से उस मूड को उभारा है वो बहुत तारीफ़-ए-काबिल है।
शकील बदायूनी के बोलों को धुन प्रदान की है नौशाद
ने। इस गीत के लिए दिलीप कुमार से उपयुक्त नायक
कौन हो सकता है भला ? एक दुविधा सी है और नायक
अपन आप को नायिका के हवाले करना चाहता है मगर
गीत के अंत में वो अकेला छोड़ देने की ख्वाहिश ज़ाहिर
कर ही देता है।




गीत के बोल:

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
जी चाहे डुबो दो मौजों में या साहिल पे ले जाओ

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ

एक तुम ही सहारा हो मेरा जीवन की अँधेरी रातों में
दुनिया की ख़ुशी तक़दीर का ग़म सब कुछ है तुम्हारे हाथों में
अब चाहे इधर ले जाओ मुझे या चाहे उधर ले जाओ

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ

मायूस नज़र मजबूर क़दम उजड़ा हुआ आलम है दिल का
जीना भी ये कोई जीना है मुँह देख सकूँ ना मंज़िल का
बीते हुए दिन मिल जाएँ जहाँ मुझे ऐसी डगर ले जाओ -२

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ

आँसू न बहाओ मेरे लिए ग़म मुझको अकेले सहने दो
टूटे न तुम्हारा नाज़ुक दिल ये दर्द मुझी तक रहने दो
अब छोड़ दो मुझको राहों में या दूर नगर ले जाओ

मैं टूटी हुई इक नैया हूँ मुझे चाहे जिधर ले जाओ
...................................................................
Main tooti hui ek naiya hoon-Aadmi 1968

Read more...

Jun 8, 2011

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख-शिकस्त १९५३

क से क्लासिक। सबकी क्लासिक की अपनी अपनी परिभाषा होती
है। आइये एक क्लासिक गीत देखें और सुनें। इसके क्लासिक होने का
सबसे पहला कारण ये है कि ये शैलेन्द्र का लिखा हुआ गीत है और
प्रेरणादाई गीत है। संगीतमय फिल्म शिकस्त से ये गीत लिया
गया है। ब्लॉग पर ये शिकस्त फिल्म का तीसरा गीत है। पिछले
दो गीत तलत महमूद की आवाज़ में हैं, इसमें रफ़ी की आवाज़ है।





गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

सच कभी तो होंगे ख़्वाब और ख़याल, तेरे ख़्वाब और ख़याल
हो तेरे ख़्वाब और ख़याल
कब तलक रहेंगे बेक़सी के जाल, दिल पे बेक़सी के जाल
हो दिल पे बेक़सी के जाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल तेरे दिल का हाल
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

दिल के तार छू के गा रहा है कौन गीत गा रहा है कौन
हो गीत गा रहा है कौन
ले के ये बहारें आ रहा है कौन मुस्कुरा रहा है कौन
हो मुस्कुरा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
तन पे और मन पे छा रहा है कौन छा रहा है कौन
अपना दिल किसी पे हार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख


नींद से धरती को जो जगायेगा ज़मीं को जो जगायेगा
ज़मीं को जो जगायेगा
बीज आँसुओं के जो बिछायेगा जो मेहनतें लुटायेगा
जो मेहनतें लुटायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
फूल उसके आँगन में मुस्कुरायेगा मुस्कुरायेगा
और चार दिन गुज़ार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख

गा रही है धरती गीत प्यार के सुहाने गीत प्यार के
सुहाने गीत प्यार के
दिन गुज़र चुके हैं इंतज़ार के हो तेरे इंतज़ार के
हो तेरे इंतज़ार के
चुप न रह पपीहे ये मन को मार के मन को मार के
चुप न रह पपीहे मन को मार के मन को मार के
आयेंगे पिया पुकार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
आयेंगे पिया पुकार कर के देख

नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
इसके रूप का सिंगार कर के देख
इसपे जो भी है निसार कर के देख
नई ज़िन्दगी से प्यार कर के देख
.....................................
Nayi zindai se pyar kar ke dekh-Shikast 1953

Read more...

May 21, 2011

नैन मिले नैन हुए बाँवरे-तराना १९५१

आपको पुरानी तराना फिल्म का एक भी गीत नहीं सुनाया है अभी तक।
आज आपको इस हिट मुज़िकल फिल्म से एक गीत सुनवाते हैं जो
सुबह सुबह के किसी रेडियो प्रोग्राम में आपने ज़रूर सुना होगा।

कुछ haunting(भूतिया नहीं) melodies अक्सर बिना किसी वजह से
याद आ जाती हैं और आप उनको गुनगुनाने लग जाते हैं। ये भी एक ऐसा
ही युगल गीत है। इस गीत में बहुत स्कोप है आहें भरने का विशेषकर प्रेमी
युगल के लिए। प्रेम धवन के सरल से मगर प्रभावी बोलों को एक
आकर्षक धुन पर तैराया है संगीतकार अनिल बिस्वास ने। अनिल बिश्वास
जैसे कुशल चितेरे फिल्म संगीत जगत में कम ही हुए हैं। हिंदी गीत जो आज हम
आज सुनते हैं उसके स्वरुप को व्यवस्थित करने का श्री अनिल बिस्वास को
ही जाता है। गीत में सौम्यता को शुरू से आखिर तक कायम रखने की कला
में अनिल बिश्वास सिद्धहस्त थे। गीत फिल्माया गया है दो नामी कलाकारों
पर-दिलीप कुमार और मधुबाला।



गीत के बोल:

नैन मिले नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
चैन कहाँ मोहे सजन संवरे
नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे
नैन मिले नैन हुए बाँवरे

देखते ही देखते मैं खो गई
देखते ही देखते मैं खो गई
जागते ही जागते मैं सो गई
जागते ही जागते मैं सो गई
अब कभी मैं जागना ना चाहूँ रे
अब कभी मैं जागना ना चाहूँ रे

नैन हुए बावरे

चलते चलते पाँव मेरे थम गये
चलते चलते पाँव मेरे थम गये
तुम मिले तो दिल के सारे ग़म गये
तुम मिले तो दिल के सारे ग़म गये
मिल गयी ज़ुल्फ़ों की ठंड़ी छाँव रे
मिल गयी ज़ुल्फ़ों की ठंड़ी छाँव रे
नैन हुए बावरे

धड़कने दिल की छुपाऊँ किस तरह
ऐ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
धड़कने दिल की छुपाऊँ किस तरह
लाज का घूँघट उठाऊँ किस तरह
लाज का घूँघट उठाऊँ किस तरह
किस तरह साजन तेरी बन जाऊँ रे
किस तरह साजन तेरी बन जाऊँ रे
नैन हुए बावरे

नैनों से नैना तेरे कुछ कह गये
ऐ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
नैनों से नैना तेरे कुछ कह गये
प्यार की लहरों में दो दिल बह गये
प्यार की लहरों में दो दिल बह गये
अब रुके ना प्रीत की ये नाव रे
अब रुके ना प्रीत की ये नाव रे
नैन हुए बावरे

नैन मिले नैन हुए बावरे
चैन कहाँ मोहे सजन साँवरे
नैन हुए बावरे
.....................................
Nain mile nain hue banwre-Tarana 1951

Read more...

May 15, 2011

ऐ मेरे दिल कहीं और चल २- दाग १९५२

"प्यासा हूँ मगर लोग समझते हैं पिया सा"- वाह साहब क्या पंक्तियाँ
हैं पिछले गीत की। आप सभी ने ये ज़रूर एक ना एक बार सुना होगा
कि कोई शराबी नाली में पड़ा है और कुत्ता उसका मुंह चाट रहा है।
मैंने २-३ बार देखा भी है। कुछ रोज़ पहले ध्यान से देखने पर
पाया कुत्ता उस व्यक्ति के होंठ भी चाट के साफ़ कर रहा है। अमूमन
ऐसे दृश्य केवल वहीँ देखे जा सकते हैं जहाँ कुत्ते पाले होते
हैं और कुत्तों को घर के सदस्य की तरह रखा जाता है। वैसी
जगहों पर उनकी चाटा-चाटी को भी खुली छूट होती है।

प्रस्तुत गीत एक प्रसिद्ध फिल्म दाग से है। सन १९५२ की दाग।
१९५२ की दाग शैलेन्द्र के गीतों के लिए याद की जाती है
तो सन १९७३ वाली साहिर के गीतों के लिए। प्रस्तुत गीत में
नायक कुत्ते को निमंत्रण देता सा प्रतीत होता है-आ जा मेरे
पीछे पीछे, मैं आगे चल के गिरने वाला हूँ उसके बाद तेरी जो
मर्ज़ी हो करना। इस फिल्म के लिए नायक को फ़िल्म फेयर
पुरस्कार मिला था। नायक को तो आप पहचान ही गए होंगे।
गीत गाया है तलत महमूद ने और इसकी धुन तैयार की है
शंकर जयकिशन ने।




गीत के बोल:

ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल

चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
इन बहारों से क्या फ़ायदा
जिस में दिल की कली जल गई
ज़ख्म फिर से हरा हो गया

ऐ मेरे दिल कहीं और चल

चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
लुट रहा था किसी का जहाँ
देखती रह गई ये ज़मीन
चुप रहा बेरहम आसमान

ऐ मेरे दिल कहीं और चल
........................................
Ae mere dil kahin aur chaal(Talat)-Daag 1952

Read more...

Jan 11, 2011

शाम-ए-ग़म की क़सम-फुटपाथ १९५३

आपको मखमली आवाज़ सुनवाते हैं बहुत दिनों बाद।
तलत महमूद की आवाज़ में ये सदाबहार गीत सुनिए
फिल्म फुटपाथ से। सन १९५३ से ये गीत श्रोताओं को
आनंदित करता आ रहा है। मजरूह के बोलों को सुरों
में पिरोया है खय्याम ने। दिलीप कुमार की ट्रेजेडी किंग
की इमेज में ऐसे गीतों का योगदान बहुत रहा। इस गीत
को अक्सर श्रोता दुखी अवस्था में सुना करते हैं और ऐसा
सुना जाता है कि इसको सुनने के बाद वे अवसाद से बाहर
आ जाते हैं। कुछ कुछ होम्योपैथी के इलाज़ की तरह.....





गीत के बोल:

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

दिल परेशान है रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा हैं हम
शाम-ए-ग़म की क़सम

चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले न दर्द-ए-जुदाई कहीं
रुत हंसीं हैं तो क्या चाँदनी है तो क्या
चाँदनी ज़ुल्म है और जुदाई सितम

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम

अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
अब तो आ जा के अब रात भी सो गई
ज़िन्दगी ग़म के सेहराव में खो गई
ढूँढती हैं नज़र तू कहाँ हैं मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म

शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगीं हैं हम
आ भी जा आ भी जा आज मेरे सनम
शाम-ए-ग़म की क़सम
..............................
Sham-e-gham ki kasam-Footpath 1952

Read more...

Jan 10, 2011

सो जा मेरे प्यारे-फुटपाथ १९५३

हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना अजब गज़ब लोरियों से भरा पड़ा है।
अधिकतर लोकप्रिय लोरियां आपको पुरानी फिल्मों में ही मिलेंगी।
बॉलीवुड का मानना है कि फ़िल्मी बच्चे बड़े हो गए हैं अतः इस ज़माने
में लोरियों की आवश्यकता नहीं है। आजकल लोरी की जगह दूसरे किस्म
के गानों ने ले ली है। उदाहरण के लिए बच्चे बड़े हो गए हैं और शायद
आईटम-सोंग ज्यादा देखना सुनना पसंद करते हैं।


मीठी और मधुर खुशनुमा लोरियां आपने बहुत सुनी होंगी। एक
दुःख भरी लोरी भी सुनिए जो फिल्म फुटपाथ में है। ये सन १९५३
कि फिल्म है. दुःख भरी लोरी गा कर बच्चे को सुलाना बहुत ही
कठिन कार्य है जो आप महसूस करेंगे इस गीत में। गीत फिल्माया
गया है मीना कुमारी पर। गीत लिखा है मजरूह ने और इसकी
धुन बनाई है खय्याम ने। आंसुओं में भीगी लोरी गाने वाली गायिका
हैं आशा भोंसले।





गीत के बोल:

सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा

रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
रात सुहानी चंदा गाये
मीठी मीठी निंदिया आये
राजदुलारे नैनन तारे सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
अंखियों के तारे
सो जा सो जा

आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
आहों की फ़रियाद की दुनिया
ये दुनिया बेदाज की दुनिया
तेरी दुनिया चाँद सितारे सो जा

सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
सो जा मेरे प्यारे
सो जा सो जा
..........................................................
So ja mere pyare-Footpath 1953

Read more...

Dec 18, 2010

साला मैं तो साहब बन गया-सगीना १९७४

बिना विवरण वाला एक गीत प्रस्तुत है। आशा है आपको
पसंद आएगा। स्वच्छता जीवन का एक आवश्यक तत्त्व है
और इसी को ब्लॉग पर भी अमल में लाने की कोशिश जारी है।
टिप्पणी वाले स्थान में तो वैसे भी बहुत सफाई रहती है, थोड़ी
पोस्ट वाले स्थान में भी दर्शायी जाए। वो तो देखिये कमबख्त
हाथ की उँगलियाँ हरकत करती रहती है और देखते ही देखते
७ लाइन टाइप हो गयीं।



गीत के बोल:

साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का

वाह फकीरे! वाह फकीरे
वाह फकीरे, सूट पहनकर कैसा कूड़े फंडे
कौवा जैसे पंख मयूर का अपनी दम में बांधे
अपना दम में बांधे
अरे क्या जानो हम इस भेजा में क्या-क्या नक्षा खींचा
लीडर लोग की ऊंची बातें, क्या समझे तुम नीचा?
क्या समझे तुम नीचा?
मेरा वो सब जाहिलपन गया
साला मैं तो साहब बन गया

साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का

सूरत है बन्दर की फिर भी लगती है अलबेली
कैसा राजा भोज बना है मेरा गंगू तेली
तेरा गंगू तेली
तुम लंगोटी-वाला ना बदला मैं ना बदलेगा
तुम सब साला लोग का किस्मत, हम साला बदलेगा
हम साला बदलेगा
सीना देखो कैसा तन गया!

साला मैं तो साहब बन गया
अरे, साला मैं तो साहब बन गया
रे, साहब बनके कैसा तन गया
ये सूट मेरा देखो, ये बूट मेरा देखो
जैसे गोरा कोई लन्दन का
.............................
Saala main to sahab ban gaya-Sagina 1974

Read more...

Nov 17, 2010

बदनाम ना हो जाए-शहीद १९४८

कामिनी कौशल के नाम से एक फिल्म और याद आ गई जी।
उसका भी एक गीत सुन लो जी। इस फिल्म का नाम 'शहीद' है
जी।

फिल्म शहीद(१९४८) के दो गीत बेहद लोकप्रिय हुए । ये गीत
उनमे से एक है और सुरिंदर कौर का गाया हुआ है। सुरिंदर कौर
पंजाबी मूल की प्रसिद्ध गायिका हैं। उस समय पंजाब के कई कलाकार
फिल्म उद्योग में हुआ करते थे विशेषकर संगीत के क्षेत्र में और इनमे
गीतकार, गायक, गायिका और संगीतकार बहुत से थे पंजाबी मूल के।
यहाँ पंजाब मूल से तात्पर्य अविभाजित भारत के पंजाब से हैं। आपको
उस दौर की पाकिस्तानी फिल्मों में भी इसी स्टाइल का संगीत मिलेगा।

ये गीत कमर ज़लालाबदी का लिखा हुआ है और संगीतकार हैं गुलाम हैदर
जिनका नाम बहुत अदब से लिया जाता रहा है संगीत के क्षेत्र में। गीत
लोकप्रिय ज़रूर है मगर बहुत कम लोगों को ये जानकारी होगी कि ये कमर
ज़लालाबदी की कलम से निकला है।



गीत के बोल:

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

दुनिया में मोहब्बत की यही रीत है ऐ दिल
दुनिया में मोहब्बत की यही रीत है ऐ दिल
ये ही रीत है ऐ दिल
ये ही रीत है ऐ दिल
जल जाना मगर होंठों पे फ़रियाद ना लाना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

कह दे ना कहीं आँख मेरे दिल की कहानी
कह दे ना कहीं आँख मेरे दिल की कहानी
मेरे दिल की कहानी
मेरे दिल की कहानी
ऐ दिल तेरी धड़कन कहीं सुन ले ना ज़माना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

ऐ जान-ए-मोहब्बत यही बस मेरी दुआ है
ऐ जान-ए-मोहब्बत यही बस मेरी दुआ है
यही बस मेरी दुआ है
यही बस मेरी दुआ है
हो जाये तेरे साथ मेरी जान भी रवाना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

बदनाम ना हो जाए,
बदनाम ना हो जाए मोहब्बत का फ़साना
ओ दर्द भरे आंसुओं आँखों में ना आना

Read more...

Oct 1, 2010

कोई नहीं मेरा इस दुनिया में-दाग १९५२

कहते हैं आशा है तो जीवन है। विश्वास है तो सांस है। इन दोनों तत्वों का
कभी कभार अभाव सा नज़र आने लगता है। ऐसे में टूट के बिखर जाने का
मन करता है। ज़िन्दगी निचोड़ने में कोई कसर नहीं छोडती है। ऐसे में गीत
एक बड़ा सहारा बन कर उभरते हैं ।

दिलीप कुमार को ट्रेजेडी किंग के नाम से जाना जाता है ।
उनके ऊपर फिल्माए गए तलत के गाये गीत अनमोल खज़ाना हैं।
तलत की मखमली आवाज़ और दिलीप के हाव भाव का संगम
अनूठा है और इसको जोड़ रंगीन फ़िल्में आने के बाद नहीं सुनाई
दिया या देखने को मिला। हसरत जयपुरी को हम सब रोमांटिक गीतों
के लिए जानते हैं मगर उन्होंने कई क्लासिक दर्द भरे गीत भी लिखे हैं
ये उनमे से एक है।





गीत के बोल:


चाँद एक बेवा की चूड़ी की तरह टूटा हुआ
हर सितारा बेसहारा सोच में डूबा हुआ


गम के बादल एक ज़नाजे की तरह ठहरे हुए
सिसकियों के साज़ पर कहता है दिल रोता हुआ

कोई नहीं मेरा इस दुनिया में आशियाँ बर्बाद है
आंसू भरी मुझे किस्मत मिली है ज़िन्दगी नाशाद है

कोई नहीं मेरा इस दुनिया में आशियाँ बर्बाद है

जा हवा तू रस्ता ले अपना
किस्मत है मेरी जी के तड़पना
जा हवा तू रस्ता ले अपना
किस्मत है मेरी जी के तड़पना

आई है मेरे गम पे जवानी रोती हुई एक याद है

कोई नहीं मेरा इस दुनिया में आशियाँ बर्बाद है

सूख चुके हैं आँखों के झरने
लूट लिया हमें दाग-ए-जिगर ने
सूख चुके हैं आँखों के झरने
लूट लिया हमें दाग-ए-जिगर ने

फूल नहीं ये ज़ख्म खिले हैं
फूल नहीं ये ज़ख्म खिले हैं
आस्मां सय्याद है
आस्मां सय्याद है

कोई नहीं मेरा इस दुनिया में आशियाँ बर्बाद है
कोई नहीं मेरा इस दुनिया में आशियाँ बर्बाद है

मौसम दुखों का सर पर है छाया
मुझसे जुदा है खुद मेरा साया
मौसम दुखों का सर पर है छाया
मुझसे जुदा है खुद मेरा साया

हम हैं अकेले गम के हैं मेले
दर्द की फ़रियाद है

कोई नहीं मेरा इस दुनिया में आशियाँ बर्बाद है

Read more...

Mar 6, 2010

ओ रे हो रे झनन घूँघर बाजे-गंगा जमुना १९६१

नौशाद ने अपनी अधिकतर सर्वश्रेष्ठ रचनाएँ लता मंगेशकर के लिए
रचीं। इस मामले में मत भिन्न हो सकते हैं और कुछ संगीत प्रेमी एक
पुरुष गायक का नाम ले सकते हैं। नौशाद के गानों की विशेषता उनकी
ज़बरदस्त क्लैरिटी और साउंड क्वालिटी होती थी। इस मामले में उन्होंने
अपने कई समकालीनों को पीछे छोड़ा। ये भी एक बड़ी वजह है जनता द्वारा
उनके गीतों को पसंद किये जाने की । १९६१ के कई और गीत सुन लीजिये और
फिल्म गंगा जमुना के इस प्रस्तुत गीत से तुलना कीजिये, आपको खुद फर्क
महसूस हो जायेगा।

फिल्म गंगा जमुना का ये गीत मुझे सबसे ज्यादा प्रिय है , वजह ये नहीं कि
ये लता का गाया गीत है, बल्कि ये एक बढ़िया कोरस गीत है , नौशाद अपने
अच्छे कोरस गीतों के लिए जाने जाते हैं। उसके अलावा ये एक खुशगवार
गीत है। इसको सुनकर तबियत खुश हो जाती है। गीत बहुत उतार चदाव वाला
है और गाने में आसान नहीं है जितना ये सुनने में प्रतीत होता है। गीत के अंत में
आपको महेंद्र कपूर कि आवाज़ सुनाई पड़ेगी। वैजयंतीमाला के नृत्य कौशल पर
कोई टिप्पणी कि आवश्यकता नहीं है। फिल्म गंगा जमुना में लता के गाये चार
एकल गीत हैं।



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ

ओ रे हो रे झनन घूँघर बाजे
मोरा मन झूमे पिया तोरी डगर चूमे पिया
आ जा घर आ जा

ओ रे हो रे झनन घूँघर बाजे
मोरा मन झूमे पिया तोरी डगर चूमे पिया
आ जा घर आ जा

आ रे, ओ सजन आ जा
आ जा रे आ जा रे
दिल की उमंग जागी मोरी, गाये जिया
दिल की उमंग जागी मोरी
आ जा रे सजना रे
आस मोहे लागी तोरी आ जा पिया
आस मोहे लागी तोरी
आ जा रे सजना रे

रुत रंगीली दिन मिलन के
रुत रंगीली दिन मिलन के
मधुर मधुर सपने मोरे मन के बालम जागे

मोरा मन झूमे पिया तोरी डगर चूमे पिया
आ जा घर आ जा
ओ रे हो रे झनन घूँघर बाजे
मोरा मन झूमे पिया तोरी डगर चूमे पिया
आ जा घर आ जा

आ रे, ओ सजन आ जा
आ जा रे आ जा रे
बैयाँ पकड़ छेड़े मोहे सखियाँ मोरी
बैयाँ पकड़ छेड़े मोहे
आ जा रे सजना रे

बिनती करें लाजों भरी अँखियाँ मोरी
बिनती करें लाजों भरी
आ जा रे सजना रे

पग पग छलके मन की मदिरा
पग पग छलके मन की मदिरा
सनन सनन डोले पवन बदरा घूँघर नाचे

मोरा मन झूमे पिया तोरी डगर चूमे पिया
आ जा घर आ जा
ओ रे हो रे झनन घूँघर बाजे
मोरा मन झूमे पिया तोरी डगर चूमे पिया
आ जा घर आ जा

आ जा रे, झनन घूँघर बाजे रे
हो हो हो, झनन घूँघर बाजे रे
आ जा रे, झनन घूँघर बाजे रे
हो हो हो, झनन घूँघर बाजे रे

Read more...

Feb 18, 2010

सपनों की सुहानी दुनिया-शिकस्त १९५३

आइये पुराने दौर की तरफ लौटा जाए तलत महमूद के एक गीत
को सुनने के लिए। तलत की मखमली आवाज़ और तानपुरे का
साथ आपको आनंदित कर देगा। शैलेन्द्र के बोलों को धुन प्रदान की
है शंकर जयकिशन की। गीत दिलीप कुमार पर फिल्माया गया है।




गीत का विडियो इधर देखा जा सकता है:

http://www.youtube.com/watch?v=H4yfSmBhWQU

गीत के बोल:

आ आ आ आ....आलाप

सपनों की सुहानी दुनिया को
आँखों में बसाना मुश्किल है
सपनों की सुहानी दुनिया को
आँखों में बसाना मुश्किल है
अपनों से जताना मुश्किल है
गैरों से छुपाना मुश्किल है

मेरा बचपन बीत चुका है
मेरा बचपन बीत चुका है
दिल का लड़कपन बाकी है
दिल का लड़कपन बाकी है
हाय बाकी है
मैं अपने आप को समझा लूं
पर दिल को मानना मुश्किल है

सपनों की सुहानी दुनिया को
आँखों में बसाना मुश्किल है
अपनों से जताना मुश्किल है
गैरों से छुपाना मुश्किल है

एहसान तेरा कैसे भूलूँ
एहसान तेरा कैसे भूलूँ
तेरे ग़म के सहारे जिंदा हूँ
वरना इन जाती सांसों का
फिर लौट के आना मुश्किल है

सपनों की सुहानी दुनिया को
आँखों में बसाना मुश्किल है

Read more...

Jan 24, 2010

झूम झूम के नाचो आज-अंदाज़ १९४९

फिल्म: अंदाज़
वर्ष: १९४९
संगीत : नौशाद
गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरी
गायक : मुकेश
कलाकार : दिलीप कुमार, राज कपूर, नर्गिस



गीत के बोल:

झूम झूम के नाचो आज, नाचो आज, गाओ खुशी के गीत हो
गाओ खुशी के गीत
आज किसी की हार हुई है, आज किसी की जीत, हो
गाओ खुशी के गीत, हो ओ

कोई किसी किसी की, आँख का तारा
जीवन साथी, साजन प्यारा
और कोई तक़दीर का मारा
ढूँढ रहा है दिल का सहारा
किसी को दिल का दर्द मिला है, किसी को मन का मीत, हो
गाओ खुशी के गीत, हो ओ

झूम झूम के नाचो आज, नाचो आज, गाओ खुशी के गीत हो
गाओ खुशी के गीत, हो ओ

देखो तो कितना, खुश है ज़माना
दिल में उमंगें लब पे तराना
दिल जो दुखे आँसू न बहाना
ये तो यहाँ का ढंग पुराना
इसको मिटाना उसको बनाना, इस नगरी की रीत हो
गाओ खुशी के गीत, हो ओ

झूम झूम के नाचो आज, नाचो आज, गाओ खुशी के गीत हो
गाओ खुशी के गीत, हो ओ
..........................................................................
Jhoom jhoom ke nacho aaj-Andaz 1949

Read more...

Jan 16, 2010

तुमरे संग तो रैन बिताई -सगीना १९७४

फिल्म देखने के पहले तक यही लगता रहा कि काका-काकी, अर्थात
राजेश खन्ना और कोई उनकी हिरोइन पर फिल्माया गया गीत है।
उस भ्रम की एक बड़ी वजह लता और किशोर के युगल गीत अधिकतर
राजेश खन्ना पर फिल्माए गए हैं। फिल्म देखने पर आश्चर्य हुआ क्यूंकि
इसमें नायक नायिका दिलीप कुमार और सायरा बानो हैं। फिल्म के
संगीत निर्देशक सचिन देव बर्मन हैं। दिलीप कुमार पर किशोर की
आवाज़ एकदम फिट बैठ रही है इधर। देसी खुसबू वाला ये मधुर गीत
मजरूह सुल्तानपुरी की कलम से निकला है। गीत देखने में भी आनंद
देता है और अगर दिलीप कुमार और सायरा बानो आज भी इस गीत को
देखने तो उनको भी आनंद आएगा। थोडा हास्य भाव से भरा ये गीत
फिल्म सगीना से हैं जो सन १९७४ में आई थी।



गीत के बोल:

जोर चले ना बस में मोर जिया
जतन बता मैं का करूं
ओ रे बेदर्दी, सैयां

तुमरे संग तो रैन बिताई
कहाँ बिताऊँ दिन
तुमरे संग तो रैन बिताई
कहाँ बिताऊँ दिन
हम्म, रैन का सपना बीत गया
अब दिन में तारे गिन

हो, तुमरे संग तो रैन बिताई
कहाँ बिताऊँ दिन
तुमरे संग तो रैन बिताई
कहाँ बिताऊँ दिन
हम्म, रैन का सपना बीत गया
अब दिन में तारे गिन

हे, तारे गिन गिन के बरस भये सोलह
हे, कैसे दीवाने पे दिल तोरा डोला
हे, तारे गिन गिन के बरस भये सोलह
हे, कैसे दीवाने पे दिल तोरा डोला

आग लगाइके हाय रे जुल्मी बनता है भोला
आग लगाइके हाय रे जुल्मी बनता है भोला
रोग विकट है प्रेम का पगली, तरसेगी निस दिन
हो चढ़ी जवानी सही ना जाए रसिया तोहरे बिन

तुमरे संग तो रैन बिताई
कहाँ बिताऊँ दिन

हे, गोरी, गोरी फँसी जइहो पहिन मोरा कंगना
हे, फिर भी मटकते फिरूंगी तोरे अंगना
गोरी फँसी जइहो पहिन मोरा कंगना
फिर भी मटकते फिरूंगी तोरे अंगना
काहे मेरे संग चाहे काँटों पे चलना

तुमरे संग तो रैन बिताई
कहाँ बिताऊँ दिन
.......................................
Tumre sang to rain bitayi-Sagina 1974

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP