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Aug 20, 2017

जा जा रे जा साजना-अदालत १९५८

दो रंग दो चाल वाला एक गीत सुनते हैं फिल्म अदालत से.
इसे आम तौर पर दो रंग वाला कहा जाता है. इसे दो चाल
वाला कहने के पीछे वजह है गीत में दो गतियों का प्रयोग.
गाडी सेकण्ड और फोर्थ गीयर में कैसे चलेगी उसका नमूना.

लता मंगेशकर और आशा भोंसले ने इसे गाया है. अपने आप
में अनूठे किस्म का गीत है ये. मदन मोहन के संगीत में
ऐसे गति वाले प्रयोग कम हैं. गीत राजेंद्र कृष्ण ने लिखा है.
अब इसे झटपट सुन लेते हैं नहीं तो पोस्ट निबंध में तब्दील
हो जायेगी और किताब लेखकों के कान और सर के बाल खड़े
हो जायेंगे.



गीत के बोल:

जा जा रे जा साजना
काहे सपनों में आये
जा के देस पराये  बेवफ़ा
जा जा रे जा साजना

तुझको ग़रज़ क्या मेरी वफ़ा से
जियूँ या मरूँ मैं तेरी बला से
जा जा रे जा साजना
काहे सपनों में आये
जा के देस पराये  बेवफ़ा
जा जा रे जा साजना

दिल तो दिया था तुझे बड़े अरमान से
प्यार लगाया भी तो किस बेईमान से
दे ही गया जो दग़ा सैयाँ
जा जा जा साजना
जा जा जा साजना
काहे सपनों में आये
जा के देस पराये  बेवफ़ा
जा जा जा साजना

दो दिन के पहले  झूठी खुशी दी
दर्द भरी फ़िर  ये ज़िन्दगी दी
जा जा रे जा साजना
काहे सपनों में आये
जा के देस पराये  बेवफ़ा
जा जा रे जा साजना

हाथ पकड़ बैठे क्यों ऐसे मीत का
ढंग न आये जिसे ज़रा सा भी प्रीत का
जाने न क्या है वफ़ा सैयाँ
जा जा जा साजना
काहे सपनों में आये
जा के देस पराये  बेवफ़ा
जा जा जा साजना
……………………………………………………………………………
Ja ja re ja saajna-Adalat 1958

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Aug 7, 2017

बहना ओ बहना तेरी डोली-अदालत १९७६

फिल्म अदालत से एक भाई बहन गीत सुनते हैं जिसमें भाई बहन
के लिए कुछ करना चाहता है. जाने के लिए सुनें ये गीत.

अमिरभ बच्चन और एक अभिनेत्री(जिसका नाम याद नहीं आ रहा
है) पर इसे फिल्माया गया है. मुकेश ने इसे गाया है. गुलशन बावरा
गीतकार हैं और कल्याणजी आनंदजी संगीतकार.



गीत के बोल:

बहना ओ बहना तेरी डोली मैं सजाऊँगा
बहना ओ बहना तेरी डोली मैं सजाऊँगा
तेरी जायेगी बरात होगी आँखों से बरसात
हंस हंस के मैं दुखद विदाई का छुपाऊँगा
बहना ओ बहना तेरी डोली मैं सजाऊँगा

मेरी गुडिया जैसी बहना
मेरी गुडिया जैसी बहना तू तो है इस घर का गहना
जा के ससुराल में अपने सीता जैसी बन के रहना
बहना ओ बहना तेरी डोली मैं सजाऊँगा
बहना ओ बहना तेरी डोली मैं सजाऊँगा

जीवन में तू सब सुख पाना
जीवन में तो सब सुख पाना सदा सुखी ससुराल में रहना
सुख के उस जीवन में हमको
सुख के उस जीवन में हमको भूल ना जाना प्यारी बहना
बहना ओ बहना तेरी डोली मैं सजाऊँगा
.......................................................................
Behna o behna teri doli-Adalat 1976

Artists: Amitab Bachchan

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Apr 17, 2017

किस्मत तो देखो-अदालत १९४८

एक निर्देशक थे वसंत जोगलेकर. श्वेत श्याम युग से शुरू कर के वे
रंगीन फिल्मों के दौर तक पहुंचे. सन १९४२ की फिल्म किती हासिल
से लेकर उन्होंने १९७६ की फिल्म जानकी तक अपना निर्देशन कैरियर
चलाया. सन १९६८ की फिल्म एक कली मुस्काई उनकी निर्देशित शायद
आखिरी हिंदी फिल्म थी. उसके बाद उन्होंने २-३ मराठी फिल्मों का
निर्देशन किया. ‘आपकी सेवा में’ फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने किया
जिसमें लता मंगेशकर को पहला गीत गाने का अवसर मिला.

प्रकाश झा की फिल्म अभिशप्त(१९८८) में उन्हें परदे पर भी देखा गया
और संभवतः ये उनका आखिरी फ़िल्मी कनेक्शन रहा. उन्हें सन १९६३
की फिल्म आज और कल के लिए अधिक जाना जाता है.

आज आपको सन १९४८ की फिल्म अदालत से एक गीत सुनवा रहे हैं
रफ़ी की आवाज़ में. गीत लिखा है महिपाल ने और इसकी धुन बनाई है
दत्ता दावजेकर ने. इस फिल्म में बाबूराव पेंढारकर और शालिनी प्रमुख
कलाकार हैं.

गीत उस समय का है जब रफ़ी ज्यादा लोकप्रिय गायक नहीं थे. फिल्म
भी ज्यादा चली नहीं थी तो उसके गीत भी समय के साथ हाशिए पर
चले गए.



गीत के बोल:

किस्मत तो देखो हमसफ़र
किस्मत तो देखो हमसफ़र
चार कदम चले नहीं
चार कदम चले नहीं
इस तरह जुदा हुए
के आज तक मिले नहीं
आज तक मिले नहीं
किस्मत तो देखो

दिल ने तो की दुआ बहुत
लेकिन ना आ सकी बहार
फूल उम्मीदों के मेरे
खिलाये भी खिले नहीं
खिलाये भी खिले नहीं
किस्मत तो देखो

दिल ने तो चाहा था के अब
कह दें अपना माजरा
उल्फत ने सी दिए ऐसे लब
हिलाए भी हिले नहीं
हिलाए भी हिले नहीं
किस्मत तो देखो

रौशन थी जिनसे ये ज़मीन
रौशन थी जिनसे ये ज़मीन
यूँ गुल हुए मेरे चिराग
जलाये भी जले नहीं
जलाये भी जले नहीं

किस्मत तो देखो हमसफ़र
चार कदम चले नहीं
इस तरह जुदा हुए
के आज तक मिले नहीं
किस्मत तो देखो
...................................................................
Kismat to dekho-Adalat 1948

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Dec 30, 2016

उनको ये शिकायत है-अदालत १९५८

फिल्म अदालत से अगला गीत सुनते हैं लता मंगेशकर के
गाये कुछ नायब गीत हैं फिल्म में. गीतकार राजेंद्र कृष्ण
और मदन मोहन के सौजन्य से हमें लम्बे समय तक सुनी
जाने वाली अनेक रचनाएँ मिली हैं. मदनमोहन की विशेषता
थी कि वे बोलों के मूड के हिसाब से उसके लिए धुन तैयार
कर देते थे.




गीत के बोल:

उनको ये शिकायत है के हम कुछ नहीं कहते
कुछ नहीं कहते
उनको ये शिकायत है के हम कुछ नहीं कहते
कुछ नहीं कहते
अपनी तो ये आदत है के हम कुछ नहीं कहते
कुछ नहीं कहते
उनको ये शिकायत है

मजबूर बहुत करता है ये दिल तो ज़ुबां को
ये दिल तो ज़ुबां को
मजबूर बहुत करता है ये दिल तो ज़ुबां को
ये दिल तो ज़ुबां को
कुछ ऐसी ही हालत है के हम कुछ नहीं कहते
कुछ नहीं कहते
उनको ये शिकायत है

कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते
अगर कहने पे आते
कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते
अगर कहने पे आते
दुनिया की इनायत है के हम कुछ नहीं कहते
कुछ नहीं कहते
उनको ये शिकायत है

कुछ कहने पे तूफान उठा लेती है दुनिया
उठा लेती है दुनिया
कुछ कहने पे तूफान उठा लेती है दुनिया
उठा लेती है दुनिया
अब इसपे कयामत है के हम कुछ नहीं कहते
उनको ये शिकायत है के हम कुछ नहीं कहते
कुछ नहीं कहते
अपनी तो ये आदत है के हम कुछ नहीं कहते
कुछ नहीं कहते
.........................................................................
Unko ye shikayat hai-Adalat 1958

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Jun 25, 2016

जब दिन हसीन-अदालत १९५८

वो भी दिन थे हम पिकनिक मनाया करते थे. अब पिकनिक
हमको मनाती है ‘कभी तो आ’ गा कर. जिंदगी इन दिनों
कुछ ज्यादा ही कोम्प्लीकैटेड हो गयी है, फुर्सत के रात दिन
तलाशने पढते हैं.

अदालत फिल्म का अनसुना गीत सुनते हैं आज. ये युगल
गीत है रफ़ी और आशा का गाया हुआ. राजेंद्र कृष्ण ने इसे
लिखा है और संगीत तैयार किया है मदन मोहन कोहली ने.

इसे फिल्माया गया है तलवार कट मूंछे रखने वाले कलाकार
प्रदीप कुमार और हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन अदाकाराओं
में से एक नर्गिस पर.



गीत के बोल:

जब दिन हसीन
दिल हो  जवान
क्योँ ना मनाये पिकनिक
सीने में आग
होंठों पे राग
मिल-जुल के गायें पिकनिक

साईकल सवार  बाँधे कतार  लो हम चले
जंगल के पार  हिरनों की डार  जैसे चले
हिप हिप हुर्रे!
मौसम पे रंग
दिल में उमंग
फिर क्यों ना जायें पिकनिक
जब दिन हसीन
दिल हो  जवान
क्योँ ना मनाये पिकनिक

पानी का शोर  लहरों का जोर
 आ तोड़ दें
तूफ़ान में नाव  मिल-जुल के
आओ  सब छोड़ दें
हिप हिप हुर्रे!
साहिल से दूर
जा के हुज़ूर
ऐसी जमायें पिकनिक
जब दिन हसीन
दिल हो  जवान
क्योँ ना मनाये पिकनिक

ये दिन अजीब  हम तुम करीब 
हाय फिर कहाँ
मस्ती के खेल  आपस का मेल 
हाय फिर कहाँ
हिप हिप हुर्रे!
ज़ुल्फ़ों के डाल
उड़ते रुमाल
रंगीन बनायें पिकनिक
जब दिन हसीन
दिल हो  जवान
क्योँ ना मनाये पिकनिक
……………………………………….
Jab dil haseen-Adalat 1958

Artists-Pradeep Kumar, Nargis

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Nov 14, 2015

दुपट्टा मेरा मलमल का-अदालत १९५८

नेट पर उपस्थित संगीत फोरम और समूहों में आशा भोंसले के
गाये उन गीतों पर जिनका संगीत मदनमोहन ने तैयार किया है,
चर्चा कम होती है. आपको मदन मोहन और लता मंगेशकर के
कोम्बिनेशन पर चर्चा जगह जगह मिल जायेगी. ये सही भी है
कि बेहतर और गंभीर धुनें मदन मोहन ने लता मंगेशकर के
लिए ही चुनीं. एक पहलू और भी है कि तेज और उतार चदाव
वाले गीत आशा भोंसले ने ज्यादा गाये और उनमें से भी कई
की धुनें बेहतर हैं. यहाँ एक बात को और समझते चलें कि उम्दा
से मतलब शास्त्रीय संगीत पर आधारित या शांत सा गीत. ये
परिभाषा कई गंभीर किस्म के श्रोताओं द्वारा दी गयी है और इस
पैरामीटर के तहत वे आजकल के गीत सिरे से ख़ारिज कर देते
हैं. पसंद अपनी अपनी ख्याल अपना अपना. आजकल की पीढ़ी
को लूप वाला संगीत सुनना पसंद है.

आज सुनते हैं आशा भोंसले के गाया एक कम सुना गया गीत जो
मदन मोहन के संगीत को पसंद करने वाओं के नज़र में अनमोल
रत्न है. ये एक युगल गीत है जिसे गीता दत्त संग आशा भोंसले ने
गाया है. बोल राजेंद्र कृष्ण के हैं और फिल्म का नाम है अदालत.



गीत के बोल:

दुपट्टा मेरा मलमल का
रंग सलेटी हलका
ज़माना लुट जायेगा
सर से अगर ढलका
ओ नेरी सा भई नेरी सा
ओ नेरी सा ओ नेरी सा

बटन मेरे कुर्ते के, हाय चनवे
बटन मेरे कुर्ते के सितारे आसमानी सजना
हो इसीलिये देखा ना, अंधेरा कभी तेरे अंगना
होय इसीलिये देखा ना, अंधेरा कभी तेरे अंगना

ओ नेरी सा भई नेरी सा
नेरी सा भई नेरी सा
ओ नेरी सा ओ नेरी सा

ओ तुमसा भी कोई ना, हाय चनवे
ओ तुमसा भी कोई ना ज़माने में निडर होगा
वहीं पे दम तोड़ेंगे, जहाँ पे तेरा दर होगा
हाय,वहीं पे दम तोड़ेंगे, जहाँ पे तेरा दर होगा
दुपट्टा मेरा मलमल का
रंग सलेटी हलका
हाय, ज़माना लुट जायेगा
सर से अगर ढलका

ओ नेरी सा भई नेरी सा
नेरी सा भई नेरी सा
ओ नेरी सा ओ नेरी सा
.................................................................................
Dupatta mera malmal ka-Adalat 1958

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Nov 3, 2015

जाना था हमसे दूर–अदालत १९५८

जाना था हमसे दूर बहाने बना लिए. गीत का मुखडा सरल सा है
मगर इसे आप एक बार सुन लेंगे तो शायद ही भुला पाएंगे. फुर्सत
में पिरोये गए शब्द और बुनी गयी धुन. राजेंद्र कृष्ण अगर शब्दों
के जादूगर थे तो मदन मोहन सुरों के. दोनों ने मिल कर हमें
इतनी अमर रचनाएँ दी हैं कि धन्यवाद जैसे शब्द थोड़े कम पड़ते
हैं. जो बाकी का अच्छा काम बचा था वो राजा मेहँदी अली खान ने
मदन मोहन के लिए पूरा कर दिया. उन्होंने भी मदन मोहन के लिए
काफी मधुर और संजीदा गीत लिखे.

शब्द कब कैसे और कहाँ फिट होने से मधुर सुनाई देते हैं इसका
अंदाजा लगाना कठिन है. गीतकार भी गीत रचते समय शायद इस
बात पर ज्यादा गौर नहीं करता मगर धुन बनने के बाद थोडा यकीन
होने लगता है कि गाना हिट होगा. ऐसा सभी गीतों के साथ नहीं हो
पाता है. “आना’ शब्द वाले गीत आपने शायद उतने नहीं सुने होंगे
जितने ‘जाना’ शब्द वाले. जाना शब्द में दर्द छुपा होता है
शायद इसलिए वे ज्यादा दिल को छू जाते हैं.

उदाहरण पेश है-

१) तेरा जाना दिल के अरमानों का लुट जाना-लता-अनाड़ी
२) तुम रूठ के मत जाना-रफ़ी, आशा-फागुन
३) चला जाना नहीं नैन मिला के-लता-बड़ी बहन
४) ओ दूर जाने वाले-प्यार की मंजिल-सुरैया
५) तुम मुझसे दूर चले जाना ना-लता-इश्क पर जोर नहीं
६) साथिया नहीं जाना के जी न लगे-लता, रफ़ी-आये दिन बहार के
७) परदेस जा के परदेसिय भूल न जाना-लता-अर्पण
८) पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना-रफ़ी-शीर्षक
९) मुझे भूल जाना अगर हो सके-रफ़ी-तकदीर
१०) नहीं नहीं जाना नहीं-लता-पत्थर दिल
११) ओ जाने वाले मुड़के ज़रा देखते जाना-लता-श्री ४२०
१२) हम कितने नादान थे यारों आज ये समझा आज ये जाना-
किशोर-सितमगर

गीतकार इस प्रकार से हैं

गीत क्रमांक १ शैलेन्द्र का लिखा हुआ है, गीत नम्बर २ है
कमर जलालाबादी का, गीत नम्बर ३ है राजेंद्र कृष्ण का, गीत
नम्बर ४ भी राजेंद्र कृष्ण का, गीत नम्बर ५ आनंद बक्षी का,
गीत नम्बर ६ आनंद बक्षी का, गीत नम्बर ७ आनंद बक्षी का ,
गीत नम्बर ८ मजरूह सुल्तानपुरी का, गीत नम्बर ९ है फिर से
आनंद बक्षी का, गीत नम्बर १० है वर्मा मालिक का, गीत नम्बर
११ है हसरत जयपुरी का, गीत नम्बर १२ है मजरूह सुल्तानपुरी
का.

और भी ऐसे गीत हैं जिनके मुखड़े में ये शब्द आता है. ऊपर
जिन गीतकारों के नाम आये हैं और जो गीत हैं वो एक से बढ़
कर एक गीत हैं. शब्दों का चयन हर गीतकार का अलग अलग
होता है. शब्द फिट करने का तरीका भी अलग अलग.


अब उसी बात को पोसिटिव वे में लेते हैं-

१) आज मुझे सजन घर जाना-खुर्शीद-मझधार
२) बता दूं क्या लाना तुम लौट के आ जाना-लता-
पत्थर के सनम
३)मैं जट जमला पगला दीवाना इत्ती सी बात
न जाना-रफ़ी-प्रतिज्ञा
४)जाना है हमें तो जहाँ करार मिले-लता, किशोर-पांच दुश्मन


तीसरी बानगी-इसमें जाना शब्द प्रेमिका या जाने-जिगर
लखते-जिगर वगैरह के लिए प्रयुक्त हुआ है मगर ये
गीत भी लोकप्रिय हैं.

१) जाना तुम्हारे प्यार में क्या क्या–मुकेश-ससुराल
२) सुनो जाना सुनो जाना-किशोर-हम सब उस्ताद हैं
३) बहुत दूर मुझे चले जाना है-लता, किशोर-हीरा पन्ना

ऊपर वाला गीत नम्बर ३ साहिर का लिखा हुआ है और काफी
कोम्प्लेक्स सा सुनाई देता है. हालाँकि ये है युगल गीत मगर
इसकी धुन भी एब्सट्रैक्ट किस्म की है. कुल मिला के जो भी
लुब्बे-लुबाब तैयार हुआ है वो कर्णप्रिय है. यही पंचम के संगीत
की विशेषता है.

चौथी किस्म है जिसमें “जाना’ शब्द दूसरी क्रिया के
लिए प्रयुक्त होता है-रुक मत जाना, थक मत जाना
इत्यादि.

१) रात के राही थक मत जाना-बाबला-लता/मन्ना डे
२) रुक जाना नहीं तू कहीं हार के-किशोर-इम्तिहान
३) जीना यहाँ मरना यहाँ इसके सिवा जाना कहाँ-
मुकेश-मेरा नाम जोकर
४) आना जाना लगा रहेगा-बप्पी लहरी,
मोहम्मद अज़ीज़-गिरफ्तार

ये फिलोसोफिकल गीत जिन गीतकारों ने लिखे हैं उनके नाम
हैं-

१)साहिर लुधियानवी
२) मजरूह सुल्तानपुरी
३) नीरज
४) इन्दीवर


पांचवी किस्म है कॉमेडी.

१) सर फोड फोड मर जाना-श्याम सुन्दर, गीता दत्त-दिल की रानी
२) धीरे से जाना खटियन में ओ खटमल-किशोर-छुपा रुस्तम


आइये सुना जाए फ़िल्म अदालत से ये प्रसिद्ध गीत जिसे कोकिला
लता मंगेशकर ने गाया है. आप सोच रहे होंगे कि आज ये लंबी पोस्ट
किसलिए. तो जनाब आज ही थोड़े से बादाम पिस्ते खाने को मिले
लंबे अरसे बाद. निहाल हो गए. कल मिले न मिलें पता नहीं इसलिए
इस खुशी को आज ही मन लो, पूरी बारूद खर्च कर लो. बादाम से
दिमाग की लालटेन जल उठती है.




गीत के बोल:


जाना था हमसे दूर, बहाने बना लिये
अब तुमने कितनी दूर, ठिकाने बना लिये
जाना था हमसे दूर

रुख्सत के वक्त तुमने जो आँसू हमे दिये
उन आसूओं से हमने फसाने बना लिये
अब तुमने कितनी दूर, ठिकाने बना लिये
जाना था हमसे दूर

दिल को मिले जो दाग, जिगर को मिले जो दर्द
उन दौलतों से हमने, खजाने बना लिये
अब तुमने कितनी दूर, ठिकाने बना लिये
जाना था हमसे दूर

जाना था हमसे दूर, बहाने बना लिये
अब तुमने कितनी दूर, ठिकाने बना लिये
जाना था हमसे दूर
..................................................................
Jaana tha hamse door-Adalat 1958

Artist-Nargis

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Apr 29, 2010

तुमसे दूर रह के-अदालत १९७६

पुरानी अदालत का एक गीत आपने सुना। आइये नयी अदालत
फिल्म(१९७६) से एक युगल गीत सुना जाए। नरेन्द्र बेदी निर्देशित
इस फिल्म में अमिताभ का डबल रोल है । नरेन्द्र बेदी की बतौर
निर्देशक ये आठवीं फिल्म थी। अमिताभ बच्चन और नीतू सिंह पर
फिल्माया गया ये गीत लता और रफ़ी की आवाज़ में है। इसका
संगीत तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी ने।

ये संभवतः इस फिल्म का सबसे ज्यादा बजने वाला गीत है। इस
गीत को मैं कभी  कभी सुन लिया करता हूँ। इस फिल्म के लेखक
भी वही हैं। फिल्म  ज्यादा नहीं चली लेकिन अमिताभ के महानायक
बनने के बाद उनके प्रशंसकों ने इस फिल्म को एक बार ज़रूर देखा।
गीत लिखा है  गुलशन बावरा ने ।

अमिताभ बच्चन जितनी चुस्ती से इस गीत में दौड़ लगा रहे हैं
वैसी ही चुस्ती से उन्होंने फिल्म शक्ति(१९८३) के गीत 'जाने कैसे
कब कहाँ' में भी लगायी थी।



गीत के बोल:

ओ तुमसे दूर रह के
हो ओ तुमसे दूर रह के हमने जाना प्यार क्या है
दिल ने माना यार क्या है

हो ओ तुमसे दूर रह के
हो ओ तुमसे दूर रहके हमने जाना प्यार क्या है
दिल ने माना यार क्या है,

हो हो हो ओ
ओ तुमसे दूर रहके

तुमको पा के ना पहलू में लगता था यूँ
जीते हैं किस लिए और जिंदा है क्यूँ

हम भी रहते थे बेचैन से हर घडी
बिन तुम्हारे तो वीरान थी ज़िन्दगी
बिन तुम्हारे तो वीरान थी ज़िन्दगी

हो ओ तुमसे दूर रह के
हो ओ तुमसे दूर रह के हमने जाना प्यार क्या है
दिल ने माना यार क्या है

हो तुमसे दूर रह के
हो ओ तुमसे दूर रह के

दूरियां किस लिए मिल गए हैं जो हम
अब तो होने दो अरमान पूरे सनम
अब तो होने दो अरमान पूरे सनम

वक़्त आने पे मिट जायेंगी दूरियां
जब ना होंगी ज़माने से मजबूरियां
जब ना होंगी ज़माने से मजबूरियां

हो ओ तुमसे दूर रह के
हो ओ तुमसे दूर रह के हमने जाना प्यार क्या है
दिल ने माना यार क्या है

हो तुमसे दूर रह के
हो ओ तुमसे दूर रह के
...................................................
Ho tumse door reh ke-Adalat 1976

Artists: Amitabh Bachchan, Neetu Singh

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Feb 13, 2010

यूँ हसरतों के दाग-अदालत १९५८

मदन मोहन ने गाने तो बहुत से बनाये मगर चर्चित उस अनुपात
में नहीं हुए। उनके सबसे ज्यादा चर्चित गीतों में से एक है अदालत
फिल्म का 'यूँ हसरतों के दाग" । नर्गिस पर फिल्माया गया ये गीत
बड़े परदे पर देखने पर ज्यादा प्रभाव पैदा करता है। राजेंद्र कृष्ण की
लेखनी से निकली ये ग़ज़ल बेहद चर्चित है और आम श्रोता और ख़ास
श्रोता वर्ग में समान रूप से लोकप्रिय भी। इस गीत की तारीफ़ में इन्टरनेट
पर तमाम जगह आंग्ल भाषा प्रेमी बड़े बड़े निबंध लिख चुके हैं अतः ज्यादा
लिखने की ज़रुरत नहीं है इधर।



गीत के बोल:

यूँ हसरतों के दाग मोहब्बत में धो लिए
खुद दिल से दिल कि बात कही और रो लिए
यूँ हसरतों के दाग मोहब्बत में धो लिए
खुद दिल से दिल कि बात कही और रो लिए

यूँ हसरतों के दाग

घर से चले थे हम तो ख़ुशी की तलाश में
घर से चले थे हम तो ख़ुशी की तलाश में
ख़ुशी की तलाश में
गम राह में खड़े थे वही साथ हो लिए
खुद दिल से दिल की बात कही और रो लिए

यूँ हसरतों के दाग

मुरझा चुका है फिर भी ये दिल फूल ही तो है
मुरझा चुका है फिर भी ये दिल फूल ही तो है
हाँ फूल ही तो है
अब आप की ख़ुशी से काँटों में सो लिए
खुद दिल से दिल की बात कही और रो लिए

यूँ हसरतों के दाग

होठों को सी चुके तो ज़माने ने ये कहा
होठों को सी चुके तो ज़माने ने ये कहा
ज़माने ने ये कहा
ये चुप सी क्यूँ लगी है अजी कुछ तो बोलिए
खुद दिल से दिल की बात कही और रो लिए

यूँ हसरतों के दाग मोहब्बत में धो लिए
खुद दिल से दिल की बात कही और रो लिए
यूँ हसरतों के दाग

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Nov 15, 2009

ज़मीन से हमें आसमान पर-अदालत १९५८

अदालत नाम से दो फिल्में मुझे ध्यान हैं। एक अमिताभ वाली
और एक ये है श्वेत श्याम के ज़माने से। आशा भोंसले और रफी के
गाये इस युगल गीत को आपने 'छाया गीत' जैसे कार्यक्रमों में बहुत सुना
होगा। आशा भोंसले की आवाज़ और नर्गिस का अभिनय थोड़ा रेयर
किस्म का अनुभव है। इसमे प्रदीप कुमार नायक हैं । संगीत मदन मोहन
का है । ओ पी नय्यर के से संगीत का आभास देता ये गीत सदाबहार गीत
माना जाता है। फ़िल्म सन १९५८ में आई थी। मर्यादित छेड़ छाड़ किसे कहा
जाता है उसका एक शानदार नमूना है ये गीत। इसमे प्रश्न-उत्तर के माध्यम
से भावनाएं व्यक्त की गई हैं।



गीत के बोल:

आ आ आ

ज़मीन से हमें आसमान पर
बिठा के गिरा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें के दिल में
बसा के भुला तो न दोगे

ज़मीन से हमें आसमान पर
बिठा के गिरा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें के दिल में
बसा के भुला तो न दोगे

ए रात इस वक्त आँचल में तेरे
जितने भी हैं ये सितारे
ए रात इस वक्त आँचल में तेरे
जितने भी हैं ये सितारे

जो दे दे तू मुझ को तो, फिर मैं लूटा दूँ
किसी की नज़र पे ये सारे

आ आ आ
कहो के ये रंगीन सपने
सजा के मिटा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें.................

तुम्हारे सहारे निकल तो पड़े हैं
है मंजिल कहाँ दिल न जाने
तुम्हारे सहारे निकल तो पड़े हैं
है मंजिल कहाँ दिल न जाने

जो तुम साथ दोगे तो आएगी एक दिन
मंजिल गले से लगाने

आ आ आ
इतना तो दिल को यकीन है
हमें तुम दगा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें................

ज़मीन से हमें आसमान पर
बिठा के गिरा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें के दिल में
बसा के भुला तो न दोगे

आहा, हा हा हा, हा हा हा
ला ला, ला ला ला, ला ला ला
हम्म हम्म हम्म हम्म हम्म हम्म
हा हा, हा हा हा, हा हा हा

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