गीतों में पुनर्जन्म की कथा भी फ़िल्मी गीत निर्माण के शुरू
के दौर से चली आ रही है. शब्दों का हेर फेर होता है मगर
मजमून वही होता है. फ़िल्मी गीत सिचुएशन के हिसाब से
बनाये जाते हैं/थे इसलिए कहानी से उनका ज्यादा सम्बन्ध
होता है/था. आजकल के दौर में कहानी से गीत का कनेक्शन
होना ज़रूरी नहीं है. किसी भी कहानी में आप कैसा भी गीत
डाल दो बस धम-धम भरपूर होनी चाहिए.
गीत गौहर कानपुरी का है और संगीत बप्पी लहरी का. इसे
लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया है. गीत फिल्माया
गया है आदिल अमन और भावना भट्ट पर. भावना भट्ट
को आपने फिल्म दो जासूस में शैलेन्द्र सिंह के साथ समुद्र
में नौका पर गीत गाते देखा होगा. आदिल अमन के बारे
में ज्यादा जानकारी नहीं है. जिस भी ज़माने की कहानी इस
फिल्म के लोग बतलाना चाहते हों, एक बात तो तय है कि
फिल्म के गाँव काफी आगे पहुंचे हुए लगते हैं समय से. इस
गीत में नायक मेटल की बांसुरी जो बजा रहा है.
गीत के बोल:
हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
फिर जनम लेंगे हम फिर जनम लेंगे हम
हो ओ ओ ओ हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
फिर जनम लेंगे हम फिर जनम लेंगे हम
हो हो हो हो हो हो हो हो ओ ओ ओ ओ
एक है जान दो बदन एक महक दो सुमन
हो एक है जान दो बदन एक महक दो सुमन
सीता हूँ मैं राम तुम राधा हूँ मैं श्याम तुम
हो ओ ओ हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
फिर जनम लेंगे हम फिर जनम लेंगे हम
पहले भी थे साथी हम आज भी तेरा साथ है
हो पहले भी थे साथी हम आज भी तेरा साथ है
एक दो जनम कुछ नहीं सदियों की ये बात है
हो ओ ओ हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
फिर जनम लेंगे हम फिर जनम लेंगे हम
…………………………………………………….
Ham naa kabhi honge juda-Phir janam lenge ham 1977
सन १९७५ की फिल्म ज़ख़्मी से एक और उल्लेखनीय गीत सुनते हैं आज. ये लाता मंगेशकर का गाया हुआ है. प्रस्तुत गीत एक कार में फिल्माया गया है. फिल्मों में कार के गीत फिल्माते वक्त पीछे परदे पर कोई पहले से फिल्माई गयी दृश्यावली चलायी जाती और कार को हिलाया जाता जिससे चलने का आभास होता. ये गाना भी कुछ ऐसे ही शूट किया गया है और जो शख्स कार हिला रहा है वो चालक वाली तरफ से कुछ ज्यादा ही हिला रहा है इसे. गाने की दो तीन पंक्तियों के बाद कार का हिलना थोडा कम हो जाता है.
गीत में एक स्वस्थ सी बच्ची, सुनील दत्त और आशा पारेख दिखाई दे रहे हैं. गीत लता की आवाज़ में है जिसे गौहर कानपुरी ने लिखा है. इसकी धुन बनाई है सोना पहनने के मामले में महिलाओं को भी पीछे छोड़ने वाले संगीतकार बप्पी लहरी ने. गीत की धुन भी खरा सोना है.
गीत के बोल:
जिंगल बेल जिंगल बेल जिंगल आल द वे सांता क्लॉज़ इज कमिंग अलोंग राईडिंग ऑन ए स्ले जिंगल बेल जिंगल बेल जिंगल आल द वे सांता क्लॉज़ इज कमिंग अलोंग राईडिंग ऑन ए स्ले
आओ तुम्हे चाँद पे ले जाएं प्यार भरे सपने सजाएं छोटा सा बंगला बनाएं एक नयी दुनिया बसाएं हो.. आओ तुम्हे चाँद पे ले जाएं प्यार भरे सपने सजाएं छोटा सा बंगला बनाएं एक नयी दुनिया बसाएं
प्यार की है दुनियाँ दूर आसमां पे मिलके ना बिछड़े कोई वहाँ पे ऐसी भी एक डगर है ऐसा भी एक नगर है
ओ आओ तुम्हे चाँद पे ले जाएं प्यार भरे सपने सजाएं छोटा सा बंगला बनाएं एक नयी दुनिया बसाएं ओ आओ तुम्हे चाँद पे ले जाएं
ग़म.. जहाँ सोए और खुशी जागे आस की है मंज़िल, तारों से आगे दिल वहां रोते नही हैं आँसू तो होते नही हैं
हो आओ तुम्हे चाँद पे ले जाएं प्यार भरे सपने सजाएं छोटा सा बंगला बनाएं एक नयी दुनिया बसाएं ………………………………………………………………… Aao tumhen chand pe le jayen-Zakhmi 1975
लिपट गयो रे, चूम गयो रे, घूम गयो रे के अलावा भी
गम हैं ज़माने में और मशहूर हैं. “मार गयो रे” भी उतना
ही सुना जाता है जितना “तार गयो रे”.
फिल्म जान-ऐ-बहार से सुनते हैं एक गीत जिसे सचिन,
सारिका, कन्हैयालाल और जगदीप पर फिल्माया गया है.
गीत लिखा है गौहर कानपुरी ने और संगीत तैयार किया है
बप्पी लहरी ने. बप्पी के खजाने में डिस्को के अलावा भी
बहुत कुछ है जो ढंग से सुना जाना बाकी है
गीत के बोल अनूठे हैं और पारंपरिक गीतों में ऐसे बोल मिला
करते हैं-रसगुल्ला घुमाए के मार गयो रे. हो सकता है ये
कोई पारंपरिक गीत का संशोधित संसकरण हो. इसके पहले
चर्चित “मार गयो रे” जनता ने सुना था १९४९ की फिल्म
नदिया के पार में. वो सी रामचंद्र का कमाल है और काफी
सुना गया गीत है.
गीत के अंत में गधे पर सवार मदर इण्डिया के चर्चित लाला
का किरदार निभाने वाले कलाकार कन्हैयालाल और जगदीप
प्रकट होते हैं. आनंद कुमार चित्रगुप्त ने कन्हैयालाल के लिए
आवाज़ दी है. वही आनंद हैं आनंद मिलिंद जोड़ी वाले. इन्होने
कुछ हिंदी फ़िल्मी गीत भी गाये हैं. महिला आवाज़ रुना लैला
की है गाने में.
गीत के बोल:
मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे
सुनो दिलरुबा मुझे क्या हुआ
नशे में खता हो तो गुस्सा न करना
सुनो तो सनम तुम्हें है कसम
ज़माना बुरा है तुम ऐसा न करना
तो फिर मैं क्या करून दिलदार इंतज़ार
मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे
नाचे मन में सुकून मिलता है
न वीराने में चैन मिल जायेगा
बेबी तेरी मिल जाने दे
मेरे होने वाले ससुर जी
मेहनत गयी बेकार
मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे
ना गाने आये हैं ना बजने आये हैं
यहाँ अपनी बिगड़ी बनाने आये हैं
कव्वाली में लोरी सुनाने आये हैं
मुकद्दर है सोया जगाने आये हैं
मेरे होने वाले ससुर जी
मेहनत गयी बेकार
मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे
रसगुल्ला प्यार भरा जो आप जी ने मारा
तो सह गए हम
रसगुल्ला प्यार भरा जो आप जी
जो आप जी ने
नहीं नहीं जो आप जी ने मारा
तो सह गए हम
तो फिर मैं क्या करूं जान-ऐ-बहार
मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे हाँ मार गयो रे
रसगुल्ला घुमाई के मार गयो रे
हो मार गयो रे
मार गयो रे हाँ मार गयो रे
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Maar gayo re-Jaan-e-bahar 1978
नए साल का आगाज़ इस ब्लॉग पर राम लक्ष्मण की धुन के साथ हो
रिया है. में केना चा रिया था -भोत कंटाप और बेहतरीन म्यूजिक है.
लगभग हर मौके पर गाने बन गए हैं हिंदी फिल्मों में -दांत मांजने से
लगा कर दिशा मैदान तक सब पर. कोई पहलु ऐसा है जो छोड़ा हो
फिल्मकारों ने ?
अब लगे हाथ सुन ही लीजिए इस तेज संगीत वाले सुरेश वाडकर के
गाये गीत को. भूचाल को भौचाल ऐसे बोला जा रहा है कि भोपाल की
याद दिला जाता है. खामखाँ की तकलीफ उठाई गीतकार ने. अमां
मियां भोपाल ही लिख देते तो भोपाल वाले शुक्रिया फरमाते टोकरे
भर भर के. वो तो अपने गौहर कानपुरी साहब हैं, कानपुर वाले
जिन्होंने इसे लिखा है. कोई बात नहीं शुक्रिया हम अपनी तरफ से
और संगीत प्रेमियों की तरफ से उनका दे रहे हैं एक अच्छा गीत
लिखने के लिए.
गीत के बोल:
आधी रात आई है तो ख़याल आया है
आधी रात आई है तो ख़याल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
आधी रात आई है तो ख़याल आया है
आधी रात आई है तो ख़याल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई
जून जुलाई और अगस्त हाँ सितम्बर
अक्टूबर नवंबर बीत गया है दिसंबर
हाँ हाँ बीत गया है
नये साल की नयी नयी बातें
अपने दिन हैं अपनी
अरे नाचे गएँ धूम मचाएं
अम्बर पे भी हम छा जाएँ
अम्बर पे भी हम छा जाएँ
ऐसा लगे के धरती पे भौचाल आया है
ऐसा लगे के धरती पे भौचाल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई
जून जुलाई और अगस्त हाँ सितम्बर
अक्टूबर नवंबर बीत गया है दिसंबर
हाँ हाँ बीत गया है
अपना जीवन अपना कब है
जिसको भाये उसका सब है
अरे हम हों सबके सब हों अपने
कुछ ऐसे हों अपने सपने
कुछ ऐसे हों अपने सपने
अरे आज पुराने साल का इंतकाल आया है
अरे आज पुराने साल का इंतकाल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई
जून जुलाई और अगस्त हाँ सितम्बर
अक्टूबर नवंबर बीत गया है दिसंबर
हाँ हाँ बीत गया है
आधी रात आई है तो ख़याल आया है
आधी रात आई है तो ख़याल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
नया साल आया है नया साल आया है
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Aadhi raat aayi..naya saal-Baharon ki manzil 1991
प्यार वो खूबसूरत एहसास है कि उसका असर सभी उम्र वालों
पर बराबर होता है. बस ग्राम और किलोग्राम का फर्क हो जाता है.
सबका इसे ज़ाहिर करने का तरीका जुदा होता है. अंतरमुखी व्यक्ति
इसे अपने शांत अंदाज़ में व्यक्त करता है और बहिर्मुखी व्यक्ति ढोल
ढमाके के साथ . अब एक जवान लड़की पूरी उछल कूद कर के इसे
कैसे बतला सकती है इस गीत के ज़रिये बताया गया है. गीत नैचुरल
लगता है और इसमें बिलकुल फ्री स्टाइल स्नान और नृत्य किया गया
है. व्याकुलता मिश्रित छटपटाहट किसे कहते हैं देखिये इस गीत में.
रंजीता और प्रेमा नारायण इसमें प्रमुख कलाकार हैं.
लता मंगेशकर की आवाज़ है, गौहर कानपुरी के बोल हैं और राम-लक्ष्मण
का संगीत है.
गीत के बोल:
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
धक् धक् धक् धडके जिगर
पल पल पल फडके नज़र
धक् धक् धक् धडके जिगर
पल पल पल फडके नज़र
पग पग पर लगता है डर
डर से कहीं जाऊं न मर
नींद नहीं नैना कटत नहीं रैना
पडत नहीं चाइना हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
छोटा लगे दिन लंबी लगे रात
पहले तो न थी ऐसी कोई बात
छोटा लगे दिन लंबी लगे रात
पहले तो न थी ऐसी कोई बात
बैरी हुआ दिल तौबा दिल की जात
ऐसे मौके पे छोड़ा मेरा साथ
मैं बेला चमेली थी सब की सहेली
फिरूं अब अकेली हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
मैं भोली हसीना
बनी जो नगीना
कहीं की रही न हाय
होय रब्बा मुझे क्या हो गया
हुआ क्या हसीना
मेरा बचपन खो गया
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Main bholi haseena-Woh jo haseena 1983
Artists: Ranjeeta, Prema Narayan,Mithun Chakravorty,
एक मनोरंजक और नटखट गीत देखते हैं। आखिर बहुत दिन हो गये हैं हमें ऐसा गीत सुने। फिर हमें सौम्यता का स्वर्ण पदक भी तो नहीं प्राप्त करना है ब्लॉग पुरस्कारों में।
जवानी के दौर में जब आप किसी लड़की की ऊँगली मुंह में डालते हैं तो दिल के अन्दर से व्ह्यऊँ व्ह्यऊँ ट्यून ट्यून की ध्वनियाँ निकलने लगती है। गीत की शुरुआत में इसे बड़े ही अनोखे अंदाज़ में दिखाया गया है। जो भी पाठक जवानी के दौर में हैं या गुज़र चुके हैं उन्होंने इसे ज़रूर महसूस किया होगा। युवा रीना राय और राजेश रोशन पर फिल्माया गया ये गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ है, इसे लिखा गौहर कानपुरी ने और संगीत से संवारा है बप्पी लहरी ने।
गीत के बोल:
अभी अभी थी दुश्मनी अभी है दोस्ती दिल विल मेरी मंजिल नहीं चली रे अभी अभी थी दुश्मनी अभी है दोस्ती दिल विल मेरी मंजिल नहीं चली रे
हा, छोड़ ना
गोरी गोरी बाहों को अरे अरे छोडो जी देखो इन अदाओं से नाता नहीं जोड़ो जी गोरी गोरी बाहों को अरे अरे छोडो जी देखो इन अदाओं से नाता नहीं जोड़ो जी इसके आगे प्यार है, प्यार बेकार है
अभी अभी थी दुश्मनी अभी है दोस्ती दिल विल मेरी मंजिल नहीं चली रे
ऐसे ही अकेले में प्यार किया जाता है कसम खायी जाती है वादा किया जाता है, हा ऐसे ही अकेले में प्यार किया जाता है कसम खायी जाती है वादा किया जाता है बाद में फिर शादी है, शादी में बर्बादी है
अभी अभी थी दुश्मनी अभी है दोस्ती दिल विल मेरी मंजिल नहीं चली रे ला ला ला ला ला ला ला ला ला चली रे .................................. Abhi abhi thi dushmani-Zakhmi 1975
आइये एक बप्पी लहरी का संगीतबद्ध किया हुआ होली गीत सुना जाए
फिल्म ज़ख़्मी से जिसके गाने बहुत बजे थे अपने ज़माने में । ये गीत
भी बहुत बजा करता था होली के अवसर जो आज भी आपको सुनाई दे
जायेगा। किशोर कुमार के गाये होली गीत आपको काफी सुनाई देंगे।
गीत फिल्माया गया है सुनील दत्त पर।
गीत में दो रंग हैं. एक तरफ होली का हुडदंग तो दूसरी और आवाज़ में
शिकायत और दर्द है.
गीत के बोल:
हो हा हा , हो हा हा
हो हा हा , हो हा हा
आया रे, आया रे, आया रे
हो हा हा , हो हा हा
हो हा हा , हो हा हा
आली रे, आली रे, आली रे, आली रे,
आली रे, आली रे, होली
आली रे, आली रे, आली रे, आली रे,
आली रे, आली रे, होली
आली रे, आली रे, होली
आली रे, आली रे, होली
आली मस्तानों की टोली
तूफ़ान दिल में लिए
आली रे, आली रे, होली
आली रे, आली रे, होली
आली मस्तानों की टोली
तूफ़ान दिल में लिए
तूफ़ान दिल में लिए
हे, ज़ख़्मी दिलों का बदला चुकाने
ज़ख़्मी दिलों का बदला चुकाने
आये हैं दीवाने दीवाने
हैं दीवाने दीवाने
आये हैं दीवाने दीवाने
हैं दीवाने दीवाने
आये हैं दीवाने दीवाने
हैं दीवाने दीवाने
आली रे, आली रे, होली
आली रे, आली रे, होली
आली मस्तानों की टोली
तूफ़ान दिल में लिए
तूफ़ान दिल में लिए
हो, होली के रंग में दिल का लहू ये
किसने मिला दिया
छाई बहार कलियाँ खिली तो
गुलशन जला दिया
हो, होली के रंग में दिल का लहू ये
किसने मिला दिया
छाई बहार कलियाँ खिली तो
गुलशन जला दिया
दिल में होली जल रही है
दिल में होली जल रही है
होए, आली रे, आली रे, होली
आली रे, आली रे, होली
आली मस्तानों की टोली
तूफ़ान दिल में लिए
तूफ़ान दिल में लिए
ना ना ना ना ना ना ना ना ना
हे हे
ना ना ना ना ना ना ना ना ना
हे हे
ऑंखें हैं लाल जैसे गुलाल
झांकी विशाल है
शेरों की चाल, उसपे जलाल
बचना मुहाल है
अरे, ऑंखें हैं लाल जैसे गुलाल
झांकी विशाल है
शेरों की चाल, उसपे जलाल
बचना मुहाल है
दिल में होली जल रही है
दिल में होली जल रही है
होए, आली रे, आली रे, होली
आली रे, आली रे, होली
आली मस्तानों की टोली
तूफ़ान दिल में लिए
तूफ़ान दिल में लिए
हो
ज़ख़्मी दिलों का बदला चुकाने
ज़ख़्मी दिलों का बदला चुकाने
आये हैं दीवाने दीवाने
हैं दीवाने दीवाने
आये हैं दीवाने दीवाने
हैं दीवाने दीवाने
हो हा हा , हो हा हा
हो हा हा , हो हा हा
आया रे, आया रे, आया रे
हो हा हा , हो हा हा
हो हा हा , हो हा हा
...............................................
Aaye hain deewane-Zakhmi 1975
ये फिल्म का शीर्षक गीत है जिसे जसपाल सिंह ने गाया है।
मस्त तेज़ गति वाला गीत है ये और गीत में मोर का नाच भी
देखने को मिल जायेगा आपको ।
नायिका को गीतों में ढालने के लिए सावन कैटेलिस्ट का
काम करेगा. गीत के बोल अच्छे हैं और इसे गौहर कानपुरी
ने लिखा है. गौहर ने बप्पी के लिए भी काफ़ी अच्छे गीत
लिखे हैं.
तुम्हे गीतों में ढालूंगा ,
आ, आ, आ, आ,हा
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
सावन को आने दो
सावन को आने दो
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
सावन को आने दो
सावन को आने दो
हो, ओ ओ ओ ओ हो, ओ ओ ओ ओ
हो, ओ ओ ओ ओ हो, ओ ओ ओ ओ
झूलों की होंगे घटायें
फूलों की होंगे बहारें
झूलों की होंगे घटायें
फूलों की होंगे बहारें
सरगम की लय पे भँवरे
कलियों का घूंघट उतारें
सपने जगा लूँगा
तुमको तुम्ही ही से मैं
एक दिन चुरा लूँगा
कब ?
सावन को आने दो
सावन को आने दो
देखो ये शान हमारी
हम हैं पवन के पुजारी
देखो ये शान हमारी
हम हैं पवन के पुजारी
धरती गगन के मिलन की
आरती हमने उतारी
अब मैं ना मानूंगा
इस दिल के दर्पण में
तुमको सजा लूँगा
कब ?
सावन को आने दो
सावन को आने दो
बादल से रस रंग बरसे
प्यासा मान कहे को तरसे
बादल से रस रंग बरसे
प्यासा मान कहे को तरसे
कहती है बरखा दीवानी
गोरी सिमट नहीं डर से
अपना बना लूँगा
दिल में बसा लूँगा
सीने से लगा लूँगा
कब ?
सावन को आने दो
सावन को आने दो
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
तुम्हे गीतों में ढालूंगा
सावन को आने दो
सावन को आने दो
सावन को आने दो
...........................................................
Sawan ko aane do-Title song-1979
इस गाने का शुमार अब तक उपजाए गए सबसे बढ़िया रोमांटिक
गीतों में किया जाता है। ये रीना रॉय की शुरुआती फिल्मों में से एक
है। गाने के कुछ हिस्सों में ऐक्टर और ऐक्ट्रेस दोनों की हेयर-स्टाइल
मिलती जुलती लगती है। राकेश रोशन काफ़ी समय से विग का
इस्तेमाल करते आ रहे हैं। हो सकता है इस गीत में भी उन्होंने विशेष
विग पहना हो।
जींस का चलन हमारे देश में तकरीबन १९८० के आसपास शुरू हुआ।
उस लिहाज़ से राकेश रोशन के कपड़े उस समय के हिसाब से आधुनिक
कहे जा सकते हैं। ७० के दशक में ज्यादा मोरी वाली फुल पेंट का चलन
था । शर्ट की कॉलर भी लम्बी हुआ करती थी। उसी के साथ हिप्पी स्टाइल
के बाल रखने का फैशन था। ऐसी लम्बी मूंछे रखने का चलन था या नहीं
उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
गाने का आनंद उठायें, आलेख काफी हो चुका । मेरी बैटरी भी चुक गई है।
गायक: किशोर, आशा संगीतकार: बप्पी लाहिरी
गीत के बोल :
जलता है जिया मेरा भीगी-भीगी रातों में
आजा गोरी चोरी-चोरी अब तो रहा नहीं जाए रे
हूँ हूँ, हाय रे हाय रे हाय रे
हे हे जलता है जिया मेरा भीगी-भीगी रातों में,
आ : गुलाबी ये प्याले हैं तेरे हवाले
तू भी दिल की लगी को बुझा ले
फिर ना आए कभी ऐसी रात
फिर ना आए कभी ऐसी रात
कि : जलता है जिया मेरा
पिलाई है तुमने जो प्यासे को शबनम
दिल के शोले भला कैसे हों कम
बन के बादल करो बरसात
बन के बादल करो बरसात
कि : हो हो जलता है जिया मेरा
आ : ना ना अभी ये फ़साना हमें ना सुनाना
देखो राजा क़दम ना बढ़ाना
नहीं छेड़ो ऐसी वैसी बात
नहीं छेड़ो ऐसी वैसी बात
कि : हो जलता है जिया मेरा
....................................................
Jalta hai jiya mera-Zakhmi 1975