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Mar 9, 2018

कागा रे जा रे जा रे-वफ़ा १९५०

क से काला कौवा. काले कौवे पर बने फ़िल्मी गीत सुने बहुत दिन
हुए. एक आज सुन लेते हैं. फिल्म का नाम है वफ़ा. बिदेसवा से
संदेसवा कबूतर ज्यादा लाया करते थे मगर इस गीत में कौवे से
निवेदन किया जा रहा है.

संगीतकार विनोद के हास्य रस वाले गीत ज्यादा लोकप्रिय हैं दूसरे
सामान्य गीतों के बनिस्बत. विचित्र सी बात है किन्तु सत्य है.
सुनते हैं गीत जिसे लिखा है अज़ीज़ कश्मीरी ने और इसे गाया है
लता मंगेशकर ने.




गीत के बोल:

कागा रे जा रे जा रे
मोरे पिया का सन्देसवा
ला रे ला रे ला रे
कागा रे जा रे जा रे

उड़ जा रे ओ काले कागा जा साजन के द्वार
कहना उसने कर दी देर
काहे जिया बेकार
बिना दोष के ओ निर्मोही
बिना दोष के ओ निर्मोही
काहे रूठ गया रे जा रे
कागा रे जा रे जा रे

दूर देस के जाने वाले ले जा मेरे बैन
कहना तुझ बिन नैन बावरे
रोते हैं दिन रैन
मेरी दशा दिखलाने को
मेरी दशा दिखलाने को
दो नैन मेरे ले जा रे आ रे
कागा रे जा रे जा रे
मोरे पिया का सन्देसवा
ला रे ला रे ला रे
कागा रे जा रे जा रे
..................................................................
Kaaga re ja re ja re-Wafa 1950

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Oct 29, 2017

घिर घिर के आई बदरिया-एक थी लड़की १९४९

कहने का अंदाज़ बदल जाता है और एक आध शब्द इधर से उधर
हो जाए मगर अर्थ वही रहता है. चाहे घिर घिर आये चाहे घिर घिर
के आये, चाहे घुमड़ घुमड़ कर आये बदरिया तो बदरिया ही रहेगी.
जैसे बॉयज़ विल बी बॉयज़ एंड बंदरियाज़ विल बी बंदरियाज़.

एक और गीत सुनते हैं बदरिया वाला फिल्म एक थी लड़की से. इसे
अज़ीज़ कश्मीरी ने लिखा और विनोद ने संगीत से संवारा. गायिका हैं
लता मंगेशकर और इसे फिल्माया गया है मीना शौरी पर.




गीत के बोल:

घिर घिर के आई बदरिया
साजनवा न जा
घिर घिर के आई बदरिया
साजनवा न जा
रोते हैं नैन बावरे इन्हें समझा जा
रोते हैं नैन बावरे इन्हें समझा जा
घिर घिर के आई बदरिया
साजनवा न जा

पहले तो आस दिलाई
अब फिर क्यूँ आँख चुराई
पहले तो आस दिलाई
अब फिर क्यूँ आँख चुराई
हाथों में हाथ दिया है लाज निभा जा
हाथों में हाथ दिया है लाज निभा जा
रोते हैं नैन बावरे इन्हें समझा जा
घिर घिर के आई बदरिया
साजनवा न जा
घिर घिर के आई बदरिया
साजनवा न जा

आँखें फ़रियाद करेंगी रो रो कर याद करेंगी
आँखें फ़रियाद करेंगी रो रो कर याद करेंगी
आँखों की भूल बालमा आ के बता जा
आँखों की भूल बालमा आ के बता जा
रोते हैं नैन बावरे इन्हें समझा जा
घिर घिर के आई बंदरिया
साजनवा न जा
घिर घिर के आई बदरिया
साजनवा न जा
..................................................................................
Ghir ghir ke aayi-Ek thi ladki 1953

Artist: Meena Shorey

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Jul 21, 2017

हुज़ूरेवाला जो हो-ये रात फिर ना आएगी १९६६

सन १९६६ की सस्पेंस फिल्म से एक लोकप्रिय गीत
सुनेंगे आज. फिल्म के नाम में रात शब्द है इसलिए
इसे रात में सुनवा रहे हैं.

अज़ीज़ कश्मीरी के बोल हैं और इसे नैयर के संगीत
निर्देशन में आशा भोंसले और मीनू पुरुषोत्तम ने गाया
है. गीत में हेलन, मधुमति, मुमताज़ और विश्वजीत
को तो मैं पहचान पा रहा हूँ, बाकियों को आप पहचान
लीजिए.



गीत के बोल:

हुज़ूरेवाला जो हो इजाज़त 
तो हम ये सारे  जहाँ से कह दें
हुज़ूरेवाला जो हो इजाज़त 
तो हम ये सारे  जहाँ से कह दें
तुम्हारी अदाओं पे मरते हैं हम
ये किसने कहा है कि डरते हैं हम
हुज़ूरेवाला जो हो इजाज़त 
तो हम ये सारे  जहाँ से कह दें
हुज़ूरेवाला

क्यों न कह दें मोहब्बत खुदा है
ये हक़ीक़त नहीं है तो क्या है
क्यों न कह दें मोहब्बत खुदा है
ये हक़ीक़त नहीं है तो क्या है
ओ दिलवाले दांव लगा ले
कर दिया दिल को तेरे हवाले
बड़ा लुत्फ़ छुप छुप के जलने में है
मज़ा तीर खा के सम्भलने में है

हुज़ूरेवाला जो हो इजाज़त 
तो हम ये सारे  जहाँ से कह दें
हुज़ूरेवाला

देखिये तो ज़रा मुस्कुरा के
कौन बैठा है पहलू में आ के
देखिये तो ज़रा मुस्कुरा के
कौन बैठा है पहलू में आ के
ओ दिल वाले दांव लगा ले
कर दिया दिल को तेरे हवाले
ये नीची निगाहें गज़ब कर गईं
पता ना चला ज़ुल्म कब कर गईं
हुज़ूरेवाला जो हो इजाज़त 
तो हम ये सारे  जहाँ से कह दें
हुज़ूरेवाला
………………………………………………….
Huzurewala-Ye raat phir na aayegi 1966

Artists: Helen, Madhumati

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Jan 7, 2017

बेला बम्बीना-एक दो तीन १९५३

अपने अलबेला, बेला, केला, अकेला, तबेला शब्द सुने होंगे मगर किसी
हिंदी फिल्म के गीत में बेला बम्बीना नहीं सुना होगा. ऐसा एक गीत है
सन १९५३ की फिल्म एक दो तीन में. अज़ीज़ कश्मीरी का लिखा गीत
है जिसकी धुन बनाई है विनोद ने. विनोद ने हलके फुल्के गीत खूब
बनाये हैं.

आशा भोंसले का गाया गीत है. मीना शोरे इस गीत में आपको दिखाई
देंगी. जहाँ तक मेरा ख्याल है इस फिल्म से आप एक गीत सुन चुके हैं
पहले. बेला बम्बीना नाम से कई नए पुराने विलायती गीत हैं जिनमें से
शायद डीन मार्टिन वाला ज्यादा फेमस है.



गीत के बोल:

बेला बम्बीना ओये बेला बम्बीना
आया है सावन का मस्त महीना ओये
बेला बम्बीना

कह दो ये पुकार के दिन हैं बहार के
कह दो ये पुकार के दिन हैं बहार के
कलियों के मुखड़े पे
कलियों के मुखड़े पे आया है पसीना
बेला बम्बीना ओये बेला बम्बीना.

बेला बम्बीना ओये बेला बम्बीना.
आया है सावन का मस्त महीना ओये
बेला बम्बीना

ओ घिर के आई घटा घिर के आई घटा
ओ घिर के आई घटा घिर के आई घटा
जिया मेरा डोल गया
पिया जी मोरे आ जिया न तड़पा
पिया जी मोरे आ जिया न तड़पा
सजनवा तेरे बिना मुश्किल है जीना ओये
बेला बम्बीना

झूमती है डालियां देख ये मेरी बालियां
झूमती है डालियां देख ये मेरी बालियां
कहती है पिया की गली
कहती है पिया की गली जइयो रे कभी ना
बेला बम्बीना ओय बेला बम्बीना

बेला बम्बीना ओये बेला बम्बीना.
आया है सावन का मस्त महीना ओये
बेला बम्बीना
...........................................................
Bella bambina-Ek do teen 1953

Artist:Meena Shorey

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Sep 19, 2016

मौसम आया है रंगीन-ढोलक १९५१

मौसम और सुहाने मौसम पर गीत सुने काफी दिन हो गए हैं हमें.
आज सुनते हैं सन १९५१ की फिल्म ढोलक से एक गीत जिसे गाया
है सुलोचना कदम और सतीश बत्रा ने. अज़ीज़ कश्मीरी के लिखे बोल
हैं और श्याम सुन्दर का संगीत.

ढोलक फिल्म के इस गीत में ढोलक का सुन्दर प्रयोग है. विलायती
और पंजाबी दोनों प्रभावों के संगम वाला ये गीत अनूठा है और इसे
बार बार सुनने को मन करता है.





गीत के बोल:

मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ
मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ
मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ

फूल खिले कलियाँ शरमाईं
रुत मस्ती की आ गई
रुत आ गई
रुत आ गई
नीले-नीले अम्बर पर
बिन पूछे बदली छा गई
हो छा गई
हो छा गई
खिला है ख़ुशियों का बाज़ार
करेंगे नैनों का व्योपार
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ

मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ

झूम रही है डाली-डाली
झूम रहा मन मेरा रे
मन मेरा रे
मन मेरा रे
दो नैननों से ओझल
उस का नैनों बीच बसेरा रे
बसेरा रे
बसेरा रे

करेंगे चाहत का इकरार
किसी की जीत किसी की हार
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ
मौसम आया है रंगीन
बजी है कहीं सुरीली बीन
ऐसे में हौले हौले हौले हौले आ
.........................................................................
Mausam aaya hai rangeen-Dholak 1951

Artists:Meena Shorey, Ajit

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Sep 15, 2016

ओ बेखबर तुझे क्या पता-अकलमंद १९६६

आज सुनवाते हैं एक अनूठा गीत जिसे किशोर कुमार और
आई एस जौहर के संग कुछ अनजान कलाकारों पर फिल्माया
गया है., है तो ये एक फ़िल्मी कव्वाली मगर रोचक है. इस
कव्वाली को लिखा है अज़ीज़ कश्मीरी ने और इसकी धुन बनाई
है ओ पी नैयर ने.

गीत में किशोर कुमार और आई एस जौहर दोनों के लिए पार्श्व
गायन महेंद्र कपूर ने किया है. महेंद्र कपूर से वे बोल भी गवा
लिए गए हैं जिनके लिए किशोर कुमार विख्यात थे.

गीत में पुराने ज़माने के गायक जी एम् दुर्रानी और नयी पीढ़ी
के गायक भूपेंद्र की आवाजें भी है. भूपेंद्र सन १९६६ के हिसाब
से युवा पीढ़ी के उभरते गायक थे.



गीत के बोल:

तुम हो और क्या हो हम जान गए हैं
अब सामने आ जाओ के पहचान गए हैं

ओ बेखबर तुझे क्या पता
मिले दिल जिसे वो है बादशाह
ओ बेखबर तुझे क्या पता
मिले दिल जिसे वो है बादशाह
वो जो दर्द दुनिया का बाँट ले
वो बशर नहीं
वो बशर नहीं वो तो है खुदा
ओ बेखबर तुझे क्या पता

तोड़े जो किसी का दिल कोई
कहते हैं फलक हिल जाता है
एक पर्दानशीं की बात है क्या
ढूंढें से खुदा मिल जाता है
ये भेद की बात कहें कैसे
दिलवालों ने क्या क्या देख लिए
मंसूर चढा जब सूली पर
दुनिया ने तमाशा देख लिया
है खुदा का भी यही फैसला
है खुदा का भी यही फैसला
मिले दिल जिसे वो है बादशाह
वो जो दर्द दुनिया का बाँट ले
वो बशर नहीं वो तो है खुदा
ओ बेखबर तुझे क्या पता

कुछ लोग बदल कर भेस यहाँ
संसार को धोखा देते हैं
झूठी ही तसल्ली दे दे कर
बीमार को धोखा देते हैं
कुछ ऐसे भी हैं दिलवाले यहाँ
जो जान के धोखा खाते हैं
दुश्मन को दोस्त समझते हैं
पहचान के धोखे खाते हैं
लुटा दिल तो दिल ने यही कहा
लुटा दिल तो दिल ने यही कहा

कहते हैं के दुनिया से पहले
दिलवालों की तस्वीर बनी
फिर हुस्न बना फिर इश्क बना
फिर आशिक की तकदीर बनी
दीवाने हमें गाफिल ना समझ
हम आशिक हैं अनजान नहीं
हर बात को खूब समझते हैं
हैं अकलमंद नादान नहीं
जो किसी के गम से हो आशना
जो किसी के गम से हो आशना
वो बशर नहीं वो तो है खुदा
ओ बेखबर तुझे क्या पता
..........................................................................
O bekhabar tujhe kya pata-Akalmand 1966

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Aug 18, 2016

चुराते हो नज़रें अजी किसलिए-किलर्स १९६९

पहलवानी और रोमांस-क्या कंट्रास्ट है मगर उपलब्ध है हिंदी
फिल्मों में. दारा सिंह ने कई पहलवानी फिल्मों में काम किया
६० के दशक में. उन पटकथाओं में कुश्ती एक आवश्यक तत्व
हुआ करता था. आज के युग में हालिया रिलीज़ हुई एक कुश्ती
प्रधान फिल्म ‘ऐ’ ग्रेड का दर्ज़ा प्राप्त है और उसने बॉक्स ऑफिस
पर अच्छा मुनाफा भी कमाया.

पहले के युग में एक अलग वर्ग होता था कुश्ती की फ़िल्में देखने
वाला. अभी तक जितने भी पहलवान नायक हुए हैं उन सब में
दारा सिंह सबसे प्रभावी हैं.

आपको सुनवाते हैं फिल्म किलर्स से आशा का गाया एक बढ़िया
गीत. जनता अक्सर दारा सिंह की फिल्मों को बी ग्रेड का दर्ज़ा
प्रदान करती आई है. बी ग्रेड की फिल्म और कुछ खास गिनती
के संगीतकार. ओ पी नैयर ने भी ऐसी कुछ फिल्मों में संगीत
दिया है.

प्रस्तुत गीत बेला बोस और दारा सिंह पर फिल्माया गया है. इसे
लिखा है अज़ीज़ कश्मीरी ने. गीत में उषा टिमोथी नामक गायिका
की भी आवाज़ है. गौरतलब है परदे पर किसी और नायिका को
होंठ हिलाते नहीं दिखाया गया है. ये प्रयोग क्यूँ किया गया ये
शायद नैयर को ही मालूम रहा होगा-गीत में इको इफेक्ट पैदा
करने के लिए या किसी और वजह से. हो सकता है गीत मूलतः
दो गायिकाओं के ऊपर फिल्माने के लिए बनाया गया हो जिसे बाद
में केवल बेला बोस पर ही फिल्माकर इतिश्री कर ली गयी.



गीत के बोल:

चुराते हो नज़रें अजी किसलिए
चुराते हो नज़रें अजी किसलिए
के जिन्दा हैं बस आप ही के लिए
चुराते हो नज़रें अजी किसलिए
के जिन्दा हैं बस आप ही के लिए
चुराते हो नज़रें अजी किसलिए

अगर बेकरारी न होती, हाय
ये हालत हमारी ना होती
अगर बेकरारी न होती, हाय
ये हालत हमारी ना होती
लुटते न दिल को खुशी से
जो मर्ज़ी तुम्हारी ना होती
सुनो हाल-ए-दिल खुदा के लिए
के जिन्दा हैं बस आप ही के लिए

चुराते हो नज़रें अजी किसलिए

नशीली निगाहों के सदके
मोहब्बत की राहों पे कुर्बान
नशीली निगाहों के सदके
मोहब्बत की राहों पे कुर्बान
अगर दिल का आना गुनाह है
तो ऐसे गुनाहों से कुर्बान
बहकने लगे हैं कदम बिन पिए
के जिन्दा हैं बस आप ही के लिए

चुराते हो नज़रें अजी किसलिए

बहुत हमने चाहत छुपाई, हाय
लगी दिल की क़दमों में लायी
बहुत हमने चाहत छुपाई, हाय
लगी दिल की क़दमों में लायी
मिटे हम तो खुश है ज़माना
लुटे हम तो चुप है खुदाई
लुटे लुट के फिर भी ना शिकवे किये
के जिन्दा हैं बस आप ही के लिए

चुराते हो नज़रें अजी किसलिए
के जिन्दा हैं बस आप ही के लिए
चुराते हो नज़रें अजी किसलिए
...............................................................
Churate ho nazren aji kisliye-The Killers 1969


Artists: Bela Bose, Dara Singh

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Nov 22, 2015

एक दो तीन हों तो-एक दो तीन १९५३

पिछले दिनों एक ऐसे व्यक्ति मिले जिनको मिल के एक
कहावत याद आ गयी-जान न पहचान मैं तेरा मेहमान.
इस कहावत से एक गीत याद आया जो आज आप सुनेंगे.

आप अगर नेता हों या अभिनेता या दोनों का मिश्रण उस
स्तिथि में आपको पहचानने वाले यकायक उग आते हैं
इधर उधर से. एक आम आदमी को पहचानने वाले कम
ही होते हैं इसलिए कभी कभी कोई अजनबी पहचानने की
कोशिश करता है तो लगता है अपना भी सेलिब्रिटी स्टेटस
बढ़ गया हो.

आपको आज सुनवाते हैं गुज़रे ज़माने के नामचीन सितारों
पर फिल्माया गया एक हल्का फुल्का गीत. मीना शोरी और
मोतीलाल पर फिल्माया गया ये गीत गाया है आशा भोंसले
ने. एक दो तीन एक हास्य फिल्म है. प्रस्तुत गीत लिखा है
अज़ीज़ कश्मीरी ने और इसके संगीतकार हैं एरिक रोबर्ट्स
उर्फ विनोद.



गीत के बोल:

कर रहा है मुकद्दर इशारा हमें
तेरे लारों ने रखा कुंवारा हमें
एक दो तीन
एक दो तीन हों तो करूं ऐतबार
पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार
एक दो तीन हों तो करूं ऐतबार
पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार

भोली भाली सूरतें दिल में कडूरतें
भोली भाली सूरतें दिल में कडूरतें
हमें तो ये जानता है नन्हा सा शिकार
हमें तो ये जानता है नन्हा सा शिकार
इसलिए करते हैं रोज छेड़ छाड
पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार
एक दो तीन हों तो करूं ऐतबार पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार
एक दो तीन हों तो करूं ऐतबार पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार

मिलेंगे जो रस्ते कहेंगे नमस्ते हो नमस्ते जी नमस्ते
मिलेंगे जो रस्ते कहेंगे नमस्ते हो नमस्ते जी नमस्ते
जान न पहचान मैं तेरा मेहमान
जान न पहचान मैं तेरा मेहमान
ऐसी ही शरारतों में आती है ये खार
पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार

देखिये हुजूर मेरी अंखियों के नूर
रहो दूर दूर ये मैं कहूँगी ज़रूर
देखिये हुजूर मेरी अंखियों के नूर
रहो दूर दूर ये मैं कहूँगी ज़रूर
लगेगी न नाव तेरी मेरी कभी पार
सुनी नहीं कभी मेरे दिल की पुकार
लगेगी न नाव तेरी मेरी कभी पार
सुनी नहीं कभी मेरे दिल की पुकार

एक दो तीन हों तो करूं ऐतबार
पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार
एक दो तीन
एक दो तीन हों तो करूं ऐतबार
पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार
एक दो तीन हों तो करूं ऐतबार
पिया जी ने लारे हमें दिए हैं हज़ार
............................................................................
EK do teen honto-Ek do teen 1953

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Dec 1, 2010

एक पल रुक जाना-ढोलक १९५१

आइये एक नटखट गीत सुना जाए जो सन ५१ की फिल्म ढोलक
से है। अजीत और मीना शोरे परदे पर नोकझोंक करते दिखाई दे
रहे हैं। अभिनेता अजीत ने अपना फ़िल्मी सफ़र बतौर नायक
शुरू किया था लेकिन उनको प्रसिद्धि खलनायकी से ज्यादा प्राप्त
हुई। नायक वाला उनका दौर श्वेत श्याम फिल्मों में ही ख़त्म हो
गया था। ५७ की फिल्म नया दौर में आपने उन्हें सहायक
अभिनेता के रूप में देखा। इस गीत की एक पंक्ति आपको
फिल्म नया दौर के एक गीत की याद अवश्य दिलाएगी। वो
गीत है रफ़ी और आशा का गाया युगल गीत।




गीत के बोल:

एक पल रुक जाना सरकार
ना मारो दो नैनों की मार
के एक पल रुक जाना

एक पल हट जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
के एक पल हट जाना

कित चले हमें तड़पा के
एक रंग नया दिखला के
कित चले हमें तड़पा के
एक रंग नया दिखला के

के एक पल रुक जाना सरकार
ना मारो दो नैनों की मार
के एक पल रुक जाना

एक पल हट जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
के एक पल हट जाना

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ, ओ ओ ओ
अब और सहारा ढूँढें
चल कर नया दियारा ढूँढें
अब और सहारा ढूँढें
चल कर नया दियारा ढूँढें
के अब तो हो गए हैं बेकार
मांगें चल के कहीं उधार
के एक पल हट जाना

के एक पल रुक जाना सरकार
ना मारो दो नैनों की मार
के एक पल रुक जाना

ये दिल फटने की बाते
हम से दूर हटने की बातें
ये दिल फटने की बाते
हम से दूर हटने की बातें

के इक पल रुक जाना सरकार
न मारो दो नैनों की मार
के इक पल रुक जाना

इक पल हट जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
कि इक पल हट जाना

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ, ओ ओ ओ
दिल फट गया है तो सी लो
चाहे मर जाओ या जी लो
दिल फट गया है तो सी लो
चाहे मर जाओ या जी लो
के इक पल हट जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
के इक पल हट जाना

के इक पल रुक जाना सरकार
झूठे तुम हो तुम्हारा प्यार
के इक पल रुक जाना

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May 2, 2010

दिल्ली से आया भाई टिंगू-एक थी लड़की १९४९

नई पीढ़ी के नौजवानों के लिए, जिनका ऐसा मानना है कि श्वेत श्याम
विशेषकर ४० और ५० में दशक में केवल रोतले से गाने बने थे, उनके
लिए ये गीत पेश है।

एरिक रोबर्ट्स उर्फ़ विनोद पंजाबी मूल के एक गुणी संगीतकार थे। उनका
शो ज्यादा लम्बा नहीं चला क्यूंकि वे अल्पायु में ही इस दुनिया से विदा
ले गए। उन्होंने कई यादगार गीत श्रोताओं के लिए छोड़े हैं।

प्रस्तुत गीत बिनोता चक्रवर्ती की आवाज़ में है जिसे अज़ीज़ कश्मीरी ने
लिखा है। गीत में आप विनोद को ओर्केस्ट्रा संचालन करते हुए देख सकते
हैं। गीत में आपको जवान आइ. एस. हो और फिल्म की नायिका मीना शोरे
दिखाई देंगे। वैसे गायिका के नाम पर मुझे संदेह है। मेरा दिमाग तो काम
थोडा कम करता है, पिस्ता बादाम जो महंगे हो गए हैं। मुझे इस गायिका को
पहचानने में मदद कीजिये।

गीत हास्य का पुट लिए शुरू होता है और भाईचारे का सन्देश देने लगता है
आखिरी अंतरे में। हनी ओ ब्रायन नामक अभिनेत्री पर इसे फिल्माया गया
है।




गीत के बोल:

दिल्ली से आया भाई टिंगू
दिल्ली से आया भाई टिंगू
टिंगू का भाई चिंगू
और उस का भाई शिंगू शिंगू
दिल्ली से आया भाई टिंगू

टिंगू था ज़रा पतला पतला
चिंगू था ज़रा छोटा छोटा
शिंगू था ज़रा मोटा मोटा

तीनो थे पक्के यार
यार पक्के यार
तीनो थे पक्के यार
यार पक्के यार

हो बेदर्दी और लोहा
मारे है डींग डींग दिन्गू
दिल्ली से आया भाई टिंगू

तीनो निकले माल रोड पर
मटक मटक कर चलते थे
तीनो निकले माल रोड पर
मटक मटक कर चलते थे
हा हा हा हो हो हो
रामा पांव पटक कर चलते थे
ओ हो हो हा हा हा
रामा पांव पटक कर चलते थे
मटक मटक कर मटक कर
पांव पटक कर पटक कर

हाथों में डाले हाथ
फिरते थे साथ साथ
हाथों में डाले हाथ
फिरते थे साथ साथ
गाते थे ये एक बात
हिंदुस्तान हमारा है ये
सब दुनिया से न्यारा है
हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई
सब की आँख का तारा है

दिल्ली से आया भाई टिंगू
दिल्ली से आया भाई टिंगू
टिंगू का भाई चिंगू
और उस का भाई शिंगू शिंगू

दिल्ली से आया भाई टिंगू

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Dec 2, 2009

चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर -ढोलक १९५१

ढोलक फ़िल्म का ये गीत पुराने संगीत प्रेमियों की जुबां
पे चढ़ा हुआ है। सुलोचना कदम नाम की गायिका का गाया
ये गीत अपने ज़माने का हिट गीत था। आज भी इस गीत के
चाहने वाले इसको सुनकर झूम उठते हैं। अभिनेत्री मीना शोरी
पर फिल्माया गया ये गीत आज भी वैसा ही जवान सुनाई देता
है जैसा सन ५० के दशक में सुनाई देता था। अज़ीज़ कश्मीरी
ने इस गीत के बोल लिखे हैं जिनका नाम तक नहीं लेता कोई
इस गीत को इतनी प्रसिद्धि मिलने के बावजूद। इस गीत की धुन
सुनकर सयाने संगीत प्रेमी ये अंदाज़ा लगाने में समर्थ होंगे कि
श्याम सुंदर पंजाबी मूल के संगीतकार थे।



गीत के बोल:

चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी
चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी

दिल की हसरत आंसुओं में
दिल की हसरत आंसुओं में
टुकड़े होकर बह गई
टुकड़े होकर बह गई

मेरी उम्मीदों पर बिजली जब गिरा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी
चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी

आंसुओं ने दास्ताँ-ऐ-गम सुनानी थी अभी
आंसुओं ने दास्ताँ-ऐ-गम सुनानी थी अभी
दास्ताँ-ऐ-गम सुनानी, हाँ सुनानी थी अभी
दिल की दिल में ही रही, अरमान मिटा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी
चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी

क्या अनोखी चोट दी है
क्या अनोखी चोट दी है
बेवफा बेदर्द ने
बेवफा बेदर्द ने
दिल में रह कर देखिये वो दिल चुरा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी
चोर चोरी आग सी दिल में लगा कर चल दिए
हम तड़पते रह गए वो मुस्कुरा कर चल दिए
चोर चोरी

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ऐसे रसिया का -ढोलक १९५१

कुछ ऐसे गीत हैं जिनको न आकाशवाणी ने, न ही रेडियो सीलोन ने
बार बार बजाया लेकिन एक बार सुनके संगीत भक्त अपने ब्लॉग और
फोरम में दावे करते हैं की वे इसे पचासों बार सुन चुके हैं। संगीतकार
श्याम सुंदर एक गुणी संगीतकार थे जिनका जिक्र हम पहले एक पोस्ट
में कर चुके हैं। ये युगल गीत जो लता और रफ़ी का गाया हुआ है बहुत ही
दुर्लभ गीतों में से एक है. दुर्लभ की परिभाषा से अभी तक आप परिचित
हो ही गए होंगे। यहाँ इसका तात्पर्य एक अंग्रेज़ी शब्द-obscure से है ।
इमानदारी से मैं भी कहूँगा की यू ट्यूब पर इसको देखने के पहले मैंने इसे
केवल ४ बार सुना है। देखने को तो ये पहली बार ही मिला है जिस दयालु
आत्मा ने इसको यू ट्यूब पर चिपकाया है उसको धन्यवाद्। पढ़ते रहिये
होंगे पोस्ट में इस फ़िल्म के एक बहुत ही लोकप्रिय गीत की चर्चा होने
वाली है। नायक कलाकार हैं-अजीत जिनको आप पहचान ही गए होंगे।



गीत के बोल:

ऐसे रसिया का, ऐसे बलमा का
क्या ऐतबार, ऐतबार, झूठा प्यार
ऐसे रसिया का, ऐसे बलमा का
क्या ऐतबार, ऐतबार, झूठा प्यार

जा के मन में बसा गुइयाँ
सौतन का प्यार
जा के मन में बसा गुइयाँ
सौतन का प्यार
सौतन का प्यार

ऐसे रसिया का, ऐसे बलमा का
क्या ऐतबार, ऐतबार, झूठा प्यार

ऐसी गोरी का, ऐसी छोरी का
क्या ऐतबार, ऐतबार, कैसा प्यार

जाके मन में बसा रामा
गैरों का प्यार
जाके मन में बसा रामा
गैरों का प्यार
गैरों का प्यार

ऐसी गोरी का, ऐसी छोरी का
क्या ऐतबार, ऐतबार, कैसा प्यार

हमसे तो झूठी मोहब्बत जताए
गैरों से छिप छिप के नैना मिलाये
हमसे तो झूठी मोहब्बत जताए
गैरों से छिप छिप के नैना मिलाये

काहे रह रह के देता है ख्वाब
ऐतबार, झूठा प्यार

ऐसे रसिया का, ऐसे बलमा का
क्या ऐतबार, ऐतबार, झूठा प्यार

हमसे तो बोले तुम्हारी हूँ राजा
अजी, हमसे तो बोले तुम्हारी हूँ राजा
औरों से बोले निगाहों में आ जा
औरों से बोले निगाहों में आ जा

ऑंखें गैरों से करती है चार
ऐतबार, कैसा प्यार

ऐसी गोरी का, ऐसी छोरी का
क्या ऐतबार, ऐतबार, कैसा प्यार

जाओ जी झूठे बहने न मारो
जाओ जी झूठे बहने न मारो
नैनों के तिरछे निशाने न मारो
नैनों के तिरछे निशाने न मारो

जुल्मी छीलो न दिल का करार
ऐतबार, झूठा प्यार
जा के मन में बसा गुइयाँ
सौतन का प्यार
जाके मन में बसा रामा
गैरों का प्यार

सौतन का प्यार

ऐसे रसिया का
ऐसी गोरी का
ऐतबार, झूठा प्यार
ऐतबार, कैसा प्यार

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Mar 30, 2009

धड़का तो होगा दिल ज़रूर-सी आई डी ९०९ १९६७

कुछ गीत फ़िल्म में आगे बेंच पर बैठे दर्शकों के लिए बनाये
जाते थे। आगे की बेंच पर बैठ के मैंने भी कुछ फ़िल्में देखी।
वहां बैठ के देखने का आनंद बालकनी में बैठे व्यक्ति को नहीं हो
सकता। बड़े परदे पर सभी चीज़ें बड़े अकार की दिखाई देती है।
ऐसे में कोई हिलती डुलती वस्तु जो परदे के एक छोर से दूसरी
छोर की तरफ़ जाए तो उसको देखने के लिए गर्दन भी वैसी ही
घुमाते रहना पड़ता है। इस गीत में मुमताज़ और बेला बोस के
साथ फिरोज खान दिखाई देंगे आपको। लंबे कद वाली नायिका
मुमताज़ हैं । इस गीत को लिखा है अज़ीज़ कश्मीरी ने और धुन
बनाई है ओ पी नय्यर ने। इस गीत में आए शब्द 'ताबेदार' का अर्थ
है-आज्ञाकारी या सेवक।



गीत के बोल:

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजुर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजूर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार

आँखों में तुम्हारी चाहत की तस्वीर लिए
आए हैं,
आए हैं तुम्हारे क़दमों में तकदीर लिए
किस्मत ने कभी मौका जो दिया
दिखलायेंगे हम
दिल चीज़ है क्या
ये जान भी देंगे तुम पे लुटा

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजूर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

ये प्यार हमें लाया है कहाँ मालूम नहीं
कहते हैं, किसे आँखों की ज़बान मालूम नहीं

कातिल है अदा, दुश्मन है नज़र
अब बच के कोई जाए किधर
मरने दो यहीं मरना है अगर

धडक तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजूर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार

इस दिल से कोई इकरार तो कर
ऐ जाने वफ़ा
थोड़ा ही सही
थोड़ा ही सही प्यार तो कर
ऐ जाने वफ़ा

किस्मत ने कभी मौका जो दिया
दिखलायेंगे हम दिल चीज़ है क्या
ये जान भी देंगे तुम पे लुटा

धडक तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजूर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
............................................................
Dhadka to hoga dil zaroor-CID 909 1967

Artists: Bela Bose, Mumtaz, Feroz Khan

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